Sarhaj chudai sex story, Jeeja sarhaj sex story, Patli dubli chut sex story: हेलो दोस्तों, मैं वीर श्रीवास्तव आप सबका स्वागत करता हूं। ठंडी सर्दियों में गर्म चूत और चुदाई की बात न चले ऐसा तो हो ही नहीं सकता। आज जो वाकया आपके सामने रख रहा हूं वो बिल्कुल सच्चा और मजेदार है। मेरी शादी को पांच साल हो चुके थे। अपनी साली सोनम को मैंने खूब पेला था। उसकी भी शादी हो चुकी थी। अपनी बीवी अंजू की चूत तो मैं पांच साल से लगातार मार रहा था, पर दिल में यही ख्वाहिश रहती थी कि साली की तरह कोई नई चिड़िया हाथ लगे।
एक दिन मेरे ससुर श्री राजेंद्र ने फोन किया कि साले की शादी देखने जाना है। दामाद होने के नाते मुझे भी जाना था। मेरा साला अमित थोड़ा सीधा सरल है। कहीं कोई लड़की उसे बेवकूफ न बना दे, इसीलिए ससुर जी चाहते थे कि मैं भी लड़की देखने जाऊं। लड़की का नाम अहाना था। कन्नौज में उनके इत्र के कारखाने थे। काफी पैसे वाले थे सब। अहाना के घर वाले मेरे साले को और घर मकान देख गए थे। अब हम लोगों को जाकर लड़की को देखना था और हां या ना में जवाब देना था।
हमारी फैमिली लड़की के घर पहुंच गई। अहाना बिल्कुल पतली दुबली और छमिया टाइप की थी। मां कसम क्या सामान था। इतनी मस्त मॉल देखकर मैं मन ही मन सोचने लगा कि चुदी तो जरूर होगी। मेरी होने वाली सरहज को देखकर मेरा लंड तन गया। मैंने सोचा कि साले का क्या हाल होगा, वो तो ज्यादा शर्मीला था।
ससुर जी ने पूछा, “आओ बैठो बेटी, किस कॉलेज से पढ़ी हो, कितना पढ़ा है?” अहाना बोली, “जी बीएससी फ्रॉम लाल बहादुर शास्त्री कॉलेज, कन्नौज!” उसकी आवाज कितनी मीठी थी। एक तो छमिया बॉडी, ऊपर से मीठी आवाज। मेरा लंड बहने लगा।
मैंने पूछा, “अपने बारे में बताओ अहाना।” उसने नजरें मुझ पर घुमाईं। कितनी कातिलाना नजरें थीं। मैं तो मर मिटा अपनी होने वाली सरहज पर। मन कर रहा था कि इसे गिराकर यहीं चोद लूं।
अहाना बोली, “जी मुझे हर तरह का खाना बनाना आता है। इसके अलावा किताबें पढ़ना, तरह तरह के स्वेटर बुनना, घर सजाना और कढ़ाई बुनाई का शौक है मुझे। हां गाना भी खूब पसंद है।” मैं मन में बोला, “अहाना, तुझे चोदने के लिए मैं कोई भी बहाना करूंगा।”
बहुत अच्छे अहाना, मैंने मुस्कुराकर कहा। ससुर जी को लड़की पसंद आ गई। अब मेरा साला शनि उससे बात कर रहा था। सब बात ठीक रही। उसने भी हां कर दी।
वीर, क्या कहते हो बेटे, रिश्ता पक्का कर लिया जाए, ससुर जी बोले। मैंने कहा, “जी शनि एक बात अहाना से अकेले में पूछना चाहता है।” घर वाले बोले, “जाओ बेटी छत पर चली जाओ।”
मैं अहाना को एक तरफ ले गया। मन कर रहा था कि इसके चुच्चे दबा लूं और चोद लूं। अहाना बोली, “बताइये।” मैंने कहा, “देखिये मेरा साला जानना चाहता है कि आप कुंवारी तो हैं ना, क्योंकि वो कुंवारा है, इसलिए सिर्फ कुंवारी लड़की से ही शादी करेगा।”
अहाना का चेहरा उतर गया। आंखों में आंसू आ गए और वो रोने लगी। उसने कहा, “वीर जी, मैं कुंवारी नहीं हूं। मेरे तीन साल से एक बॉयफ्रेंड था।” मैंने सोचा कि तीन साल में तो इस छमिया ने हजार बार चुदाई की होगी।
अहाना मिन्नतें करने लगी, “प्लीज वीर जी आप किसी तरह सिचुएशन संभाल लीजिए, ये बात मेरे घर वालों को पता नहीं चल पाए।” मैंने उसके कंधे पर हाथ रख दिया और हंसते हुए कहा, “देखिये मैं सिचुएशन संभाल लूंगा पर मुझे क्या मिलेगा?”
वो बोली, “जो आप कहें।” मैंने धीरे से सिर झुकाकर कहा, “फिर आपको मेरा खास ख्याल रखना होगा।” वो समझ गई कि खास ख्याल का मतलब चुदाई है। अहाना बोली, “ओके वीर जी।”
मैंने साले को समझा दिया कि बंदी मस्त है। बॉयफ्रेंड था, शायद चुदी भी होगी, लेकिन आजकल हर लड़की किसी न किसी से फसी होती है। इतना मस्त माल तुमको अपनी जात में नहीं मिलेगा। साले ने हां कर दी। दोनों पक्षों ने मिठाई खिलाई और रिश्ता पक्का हो गया।
जब मैं आने लगा तो अहाना की नजरें मुझसे नहीं हट रही थीं। वो खुश थी और मुझे प्यार भरी नजरों से देख रही थी। अब साले से ज्यादा वो मुझे महत्व दे रही थी। मैंने मन में कहा, चूत का इंतजाम हो गया।
शादी का दिन आ गया। जयमाल पढ़ने लगा तो मैं सूट बूट में मौजूद था। मेरी होने वाली सरहज बस मुझे ही देखे जा रही थी। जब मैं स्टेज पर साले को बधाई देने गया तो मैंने अहाना का हाथ पकड़ लिया, सबकी नजर बचाते हुए। वो शर्मा गई।
जब जयमाल पड़ा तो मैंने साले को खूब ऊपर गोद में उठा लिया। सरहज अब माला नहीं डाल पा रही थी। वो मुझे आंख मारने लगी। मैंने साले को नीचे कर दिया और अहाना से माला डलवा दी। अब वो मेरी सर्टिफाइड सरहज बन चुकी थी।
शादी हो गई। दो दिन बाद मैंने साले को फोन किया। “क्यों साले साहब, मजा आया? कैसी रही सुहागरात?” वो शर्माता हुआ बोला, “बढ़िया।” मैंने पूछा, “कैसा माल था?” साला बोला, “मस्त था जीजू।”
मेरा साला तो अपनी बीवी को चोद चुका था। अब मेरी बारी का इंतजार था। कुछ दिन बाद मैं ससुराल गया। सास से कहा कि सरहज को कुछ शॉपिंग करवा दूं। मेरी बीवी बोली उसकी तबीयत खराब है। मैंने सरहज को बाइक पर बैठा लिया। मार्केट में नया मॉल और मल्टीप्लेक्स खुला था। मैंने फिल्म की दो टिकट ले ली।
फिल्म शुरू हुई। अंधेरे में मैंने सरहज की चुच्चियां मसलनी शुरू कर दीं। वो पूरी फिल्म में आह आह करती रही। मैंने कहा, “अहाना, देख तूने वादा किया था। आज तो तेरी चूत चाहिए मुझे।” वो बोली, “मैं चूत देने को तैयार हूं, पर कहां लोगे मेरी चूत साढू साहब।”
मैंने कहा, “चल होटल में दे दे, घर पर तो तुझको चोद नहीं पाऊंगा।” हम दोनों ने दो घंटे के लिए एक कमरा ले लिया। अंदर जाते ही मैंने दरवाजा बंद कर लिया।
अपनी पतली दुबली सरहज को मैंने बांहों में जकड़ लिया। गालों और होंठों पर चुम्मों की बौछार कर दी। पीछे से पकड़कर सीने से लगा लिया और मम्मे दबाने लगा। अहाना शर्मा गई। मैंने पूछा, “क्यों सरहज जी, कैसे पेलता है मेरा साला?” वो बोली, “बहुत कसके चुदाई करते हैं। देखने पर मत जाइए, देखने पर तो बुद्धू लगते हैं पर दो दो घंटे मेरी बुर फाड़ते रहते हैं और पानी नहीं छोड़ते।”
मैंने कहा, “तो ठीक है मैं भी आपको ऐसे ही रगड़ूंगा।” मैंने उसे पलंग पर लिटा दिया। पतली दुबली काया की मालकिन थी वो। मैं उसके दूध पीने को इतना उतावला हो गया कि ब्लाउज का बटन नहीं खोल पाया। ब्लाउज ऊपर सरका दिया। मस्त दूधिया छातियां सामने थीं।
मैं दीवाना होकर एक मम्मा मुंह में ले लिया और खूब चूसने लगा। आह्ह.. वीर जी.. हाय.. धीरे.. वो सिसकारियां भर रही थी। मैं दूसरे मम्मे को भी उछालकर चूसने लगा। उसके निप्पल सख्त हो गए थे। मैं हल्के से काटता तो वो झटके लेती, ओह्ह.. आह्ह..
फिर मैंने साड़ी ऊपर कर दी, पेटीकोट उतारा। काली पैंटी मिली। किनारे से खिसका दी। उसकी बुर के दर्शन हुए। मोटे होंठ, ऊपर की तरफ फूली हुई कचोरी जैसी। मैंने मुंह लगा दिया और चाटने लगा। जीभ से बुर के होंठ चाटे, फिर अंदर डाली। वो कमर उठाकर चिल्लाई, “आह्ह.. ओह्ह.. वीर जी.. कितना अच्छा लग रहा है.. चाटो और जोर से..”
मैंने 40 मिनट तक सिर्फ उसकी बुर चाटी। क्लिट पर जीभ घुमाई, दो उंगलियां अंदर डालकर अंदर बाहर किया। वो कई बार झड़ गई। आह्ह.. ह्ह्ह.. मैं जा रही हूं.. ऊंह्ह.. उसकी चूत से रस बह रहा था। मैं सब चूस लेता।
फिर मैंने अपना सात इंच का मोटा लंड निकाला और उसकी बुर पर रगड़ा। वो बोली, “डालो ना जल्दी..” मैंने धीरे से धक्का दिया। उसकी बुर टाइट थी, लंड आधा घुसा तो वो चीखी, “आह्ह्ह.. ओह्ह.. कितना मोटा है.. धीरे..”
धीरे धीरे पूरा घुसा दिया। फिर स्पीड बढ़ाई। हप हप आवाजें आने लगीं। वो चिल्ला रही थी, “ओह्ह.. फाड़ दो मेरी चूत.. हां.. ऐसे ही.. जोर से..”
मुझे गोद में चोदने का मन हुआ। मैंने उसे उठा लिया। वो हल्की थी। उसने खुद लंड अपनी बुर में सेट कर दिया। मैंने उसे गोद में पकड़ा और ऊपर नीचे करने लगा। वो मेरी पीठ पर हाथ कसकर लिपट गई। “हप हप” मैं पेल रहा था। वो चीख रही थी, “आह्ह.. अम्मा.. वीर जी.. मार डालो.. ओह्ह.. कितना गहरा जा रहा है..”
मैं उसके मम्मे भी चूसता जा रहा था और नीचे जोरदार धक्के मार रहा था। उसकी बुर मेरे लंड को चूस रही थी। वो बार बार झड़ रही थी, “आह्ह.. ऊंह.. मैं जा रही हूं.. हाय..” मैंने भी जोर लगाया और उसके अंदर गर्म पानी छोड़ दिया।
उस दिन मैंने उसे अनगिनत बार चोदा। हर बार नई पोजीशन में, नया मजा। फिर तो एक साल बाद ही उसकी बुर के दर्शन हो पाए।
दोस्तों, कैसी लगी ये कहानी?
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