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बाबा ने कुंवारी लड़की को प्रसाद में लंड का रस पिलाया

Baba sex story, kunwari ladki ki chudai, dehati ladki ki chudai kahani, gaon ki ladki baba se chudi: मेरा नाम प्रियंका है, मैं एक छोटे से गांव से हूं, मेरी उमर 39 साल की है, मेरी शादी हो गई है लेकिन मेरे कोई बच्चा नहीं है। ये कहानी तब की है जब मैं 18 की हुई थी, मेरे मां-बाप मुझसे बहुत प्यार करते थे। वैसे तो हमारे गांव में लड़कियों को पढ़ाने-लिखाने का कोई रिवाज नहीं था लेकिन मेरे मां-बाप ने मुझे पढ़ने-लिखने से कभी नहीं रोका था। मेरी 12वीं पूरी हो गई थी, अब मेरे गांव वाले इस फिराक में थे कि मेरी शादी करा दी जाए लेकिन मेरी मम्मी ने मुझपर कोई जोर नहीं डाला, बस वो तो मुझे अच्छे मुकाम पर देखना चाहती थी।

एक दिन हमारे गांव में एक बाबा आए, वो संन्यासी बन गए थे, उनकी जबकी उमर इतनी नहीं थी। हमारे गांव के सभी लोग उनसे आशीर्वाद लेने जाया करते थे, मेरे मां-बाप भी उनका आशीर्वाद लेने मुझे लेकर उनके पास आ गए। मैंने बाबा को देखा, बाबा की उमर लगभग 25-28 के करीब होगी, उन्होंने सिर्फ धोती पहनी हुई थी, उनका विशाल बदन मुझे उनकी तरफ आकर्षित कर रहा था। अच्छा उस वक्त मैंने भी अपनी कमसिन जवानी में कदम रख लिया था, तो मैं भी अब लंड तलाश कर रही थी।

कभी-कभी मुझे गांव वालों की बातें भी अच्छी लगने लगती थी कि अब मेरी शादी हो जानी चाहिए, मुझे कभी-कभी मेरी चूत में चींटियां सी लगती थी जब मैं उत्तेजित हो जाती थी। मेरी सहेलियां जिनकी शादी हो गई थी वो मुझे अपनी सुहागरात की कहानियां सुनाया करती थी। उस समय पोर्न का तो इतना चलन नहीं था, तो मैं अपनी चूत की गर्मी को अपने हाथों से ही ठंडा कर लेती थी। मेरा मन तो करता था चुदाई करवाने का लेकिन गांव का ऐसा माहौल था कि चुदाई क्या अगर किसी लड़के के साथ भी कभी खड़ी हुई कोई लड़की दिख जाती थी तो उसके बारे में बातें बननी शुरू हो जाती थी।

मैंने अपने आपको इन चीजों से साफ रखा हुआ था, यानी मुझे आज तक किसी भी लड़के ने छुआ तक भी नहीं था। तो जब बाबा को मैंने देखा तो एक बार को मेरे दिल ने कहा कि काश ऐसा ही मर्द कोई मेरे बदन को निचोड़ दे। बाबा जिस भी गांव में जाते थे उनकी सेवा के लिए कुंवारी लड़कियां ही लगाई जाती थी, जो उन्हें खाना, पीना कराए और बदले में बाबा उनके लिए अच्छे वर का उन्हें वरदान देते थे। मेरे मां-बाप ने इस बात का फायदा उठाया और मेरी ड्यूटी उनकी सेवा में लगा दी। मेरे साथ गांव की 4 लड़कियां और थी, हम में काम बटा हुआ था, मैं बाबा के कमरे की और बाहर की जगह की सफाई किया करती।

बाबा हमारे गांव में 3 दिन के लिए रुके हुए थे, बाबा किसी भी ऐसी स्त्री का स्पर्श नहीं कर सकते थे जिसको पहले किसी भी मर्द ने छुआ हो इसलिए उनके लिए कुंवारी लड़कियों को लगाया जाता था। मेरे मां-बाप ने मुझे 3 दिनों के लिए वही बाबा के पास रुकने के लिए ही बोला, 4 लड़कियों में से 2 मेरी सहेलियां भी थी, तो मुझे मजा करने का एक मौका भी मिल गया था। हम अपना काम खत्म करने के बाद गप्पें लड़ाने बैठ जाते थे, फिर रात हुई तो बाबा ने हम पांचों को एक साथ अपने कमरे में बुलाया, हम वहां गए तो बाबा ने हमें प्रसाद खिलाया।

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फिर हम वापस अपने-अपने कामों में लग गए, हमें सबको बहुत थकावट हो रही थी क्योंकि आने-जाने वालों को मैनेज करना और सारे काम करना बड़ी बात थी, तो हम जल्दी अपना काम खत्म करके अपने कमरे में जाकर सो गए, हमें जमीन पर भी एकदम नींद आ गई। फिर मैं जब सुबह में उठी तो मेरी गांड में बहुत तेज दर्द हो रहा था, मुझे समझ नहीं आया कि ये क्यों हो रहा है। मैं जब टॉयलेट में गई तो मेरी गांड से खून भी आया टट्टी के साथ, मुझे कुछ गड़बड़ लगने लगी, मैं शर्म के मारे बाकी लड़कियों से ये नहीं पूछ सकी।

मुझे कुछ समझ में भी नहीं आ रहा था क्योंकि मैं समझती थी कि लंड सिर्फ चूत में ही जाता है और मेरी गांड में दर्द हो रहा था, इसका मतलब मैंने उस समय ये निकाला कि शायद सोते हुए कोई चीज मुझे लग गई होगी और मैं उससे संतुष्ट हो गई। दूसरे दिन का काम करने के बाद बाबा ने हमें फिर प्रसाद खिलाया और फिर हम जाकर अपने कमरे में सो गए। सोते-सोते मुझे एहसास हुआ कि पीछे से कोई मेरे धक्के मार रहा है लेकिन फिर मुझपर मधोशी सी छाने लगी और मुझे लगा कि ये सपना है।

लेकिन सुबह में फिर मेरी गांड का बुरा हाल हुआ पड़ा था और फिरसे वो सपना दिमाग में घूमने लगा, वो मुझे ऐसा लग रहा था कि रियल में हो रहा है सपने में नहीं। मैंने इस बात की तह तक जाने की सोची, तो मैं सारी लड़कियों को ऑब्जर्व करने लगी, लड़कियां सभी गांड दबाकर चल रही थी यानी उनके भी सेम प्रॉब्लम थी और वो भी शर्म के मारे कुछ बता नहीं पा रही थी। तो मैं समझ गई कि शायद हमारी गांड मारी जा रही है, उसको कन्फर्म करने के लिए मैंने अपने आपको भी ऑब्जर्व किया कि मैं घर में तो कभी ऐसे घोड़े बेचकर नहीं सोती और इतना थकती भी नहीं हूं।

तो मुझे ये समझ आया कि शायद हमें बेहोश किया जा रहा है, तो फिर मेरे हल्के-हल्के समझ में आने लगा कि बाबा जो हमें प्रसाद खिलाते हैं शाम में शायद उसके अंदर ही कुछ होता है। तो मैंने आज ठान ली देखने की, बाबा ने एस यूजुअल हमें सबको बुलाया, हमें प्रसाद दिया, मैं उसको लेकर बाहर आ गई और मैंने उसको फेंक दिया। मेरा शक सही निकला उस दिन न मुझे थकान हुई और ना ही नींद आई, मैं सोने की कोशिश भी करती रही लेकिन नींद नहीं आई। फिर बाबा काफी देर बाद हमारे कमरे में आए और उन्होंने एक-एक करके हमारे कपड़े उतारने शुरू कर दिए।

मैं उस समय तक चुप रही और जैसे के तैसे अपने कपड़े उतरवा दिए, उन्होंने हम पांचों को नंगी कर दिया। फिर एक-एक करके सबकी गांड मारनी शुरू कर दी, वो बहन का लोड़ा बाबा चूत नहीं मारता था जिससे किसी को पता न लग जाए, गांड से किसी को कुछ पता ही नहीं लगता था। मैंने जैसे ही उसका लंड देखा मेरे होश उड़ गए, उसका लंड तकरीबन 7.5 इंच का होगा और बहुत मोटा भी था। वो बहुत तेज-तेज झटके मार रहा था, कभी-कभी कोई लड़की आवाज निकालती थी वरना वो बेसुध पड़ी रहती थी। फिर मेरी बारी आई, बाबा ने मेरी टांगे उठाई और अपने कंधों पर रख ली।

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मेरी कमर के नीचे एक पिलो लगा दिया जिससे मेरी गांड का छेद पूरा खुल गया, मैं बुरी तरह से डर गई थी, मैं उससे मरवाना तो नहीं चाहती थी लेकिन उसके आगे बोलने की हिम्मत नहीं थी। मैं भी बेसुध पड़ी रही लेकिन जब उसने मेरी गांड में अपना लंड डाला, मेरी सही में गांड फट गई, मेरी रोने वाली हालत हो गई। मेरा जोर-जोर से चिल्लाने का मन कर रहा था लेकिन मैंने सहन कर लिया और बिलकुल वैसे ही पड़ी रही। लेकिन फिर बाबा मदरचोद ने मेरी गांड का भोसड़ा बनाना शुरू कर दिया, उसने बहुत तेज-तेज झटके मारने शुरू कर दिए, मेरी बुरी हालत हो गई। मैं बोली तो कुछ नहीं और ना ही चिल्लाई बस मेरी आधी खुली हुई आंखों से आंसू निकलने शुरू हो गए, बाबा समझ गए कि मैं जागी हुई हूं, तभी वो बोला…

बाबा: “प्रियंका बेटा जाग रही हो।”

मैं कुछ नहीं बोली लेकिन मेरी धड़कनें बहुत तेज चलने लगी, उसने फिर वही पूछा, तो मैंने भी हिम्मत कर ली और बोल दिया।

मैं: “बाबा आपने ये बहुत गलत काम किया है, मैं अब पूरे गांव को आपकी हकीकत बताऊंगी।”

बाबा: “जा बता दे, बताएगी क्या कि बाबा ने तेरी गांड मार ली, मतलब अपनी ही इज्जत का फालूदा करेगी और अपने साथ-साथ इन बेचारी लड़कियों का भी।”

मैं: “मैं आपको सिद्ध पुरुष समझती थी और आप क्या निकले।”

बाबा: “पुत्री इस दुनिया की सबसे हसीन चीज लड़की ही है और कमसिन लड़कियां तो बस कमाल ही कर देती हैं, लंड को उससे ही चैन आता है।”

मैं: “बाबा देखो मैं किसी को कुछ नहीं बताऊंगी, प्लीज मुझे छोड़कर इन चारों की मार लो।”

बाबा: “देख ये चारों तो सब्स्टीट्यूट हैं, मैंने जबसे तुझे देखा था तबसे तुझे चोदने की फिराक में था।”

मैं: “बाबा प्लीज वरना मुझे मजबूरन बाहर जाकर बताना पड़ेगा।”

बाबा: “तू बता दे एक काम कर अभी जाकर बता कि मैं तेरी गांड मार रहा हूं, फिर देख ले पब्लिक तुझपर भरोसा करती है या मुझपर।”

मैं बुरी तरह फंस गई, अब मेरे आगे और कोई रास्ता नहीं था बाबा से गांड मरवाने के अलावा, तो मैंने बहुत देर तक ना-नुकुर करते हुए मान ही गई। फिर क्या बस मुझे उन्होंने घोड़ी बनाया और मेरी गांड में अपना लंड पेलना शुरू कर दिया, बाबा ने मेरी गांड 5-6 बार मार ली थी लेकिन अभी भी वो उनका लंड नहीं ले पा रही थी। बाबा का लंड बहुत ही ज्यादा मोटा था, गांड में लिया ही नहीं जा सकता था अगर मैं होश में होती तो, अभी मेरी बुरी हालत हो गई थी उसको गांड में लेने में। लेकिन काफी देर बाद जब मेरी गांड बिलकुल सुन्न पड़ गई तब मुझे उसका थोड़ा एहसास अपनी चूत पर महसूस होना शुरू हो गया जिससे मुझे मजा आने लगा।

फिर मैं भी मजा में चुदवाने लगी लेकिन तभी बाबा मेरी गांड में ही झड़ गए, मुझे अब मजा आने लगा था। बाबा मुझे छोड़कर उन लड़कियों को कपड़े पहनाने लगे, उनको कपड़े पहनाकर और मुझे ये बोलकर कि “अपने कपड़े पहन लेना” अपने कमरे में चले गए। मैं उनके पीछे-पीछे उनके कमरे में आ गई और उनको बोली, “बाबाजी मेरी चूत क्यों नहीं मारते आप”।

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बाबा बोले, “बाबा गांड के शौकीन हैं”।

मैं बोली, “चूत में खुजली हो रही है बाबा”।

बाबा बोले, “अपने आप मिटा ले वरना रगड़ा हो जाएगा”।

मैं: “होने दो बाबा जी”।

बाबा: “अगर एक बार और गांड मरवाना चाहती है तो आजा बैठ जा मेरे लंड पर वरना अपने कमरे में जाकर सो जा”।

मैं कमसिन थी जवां थी, मेरी चूत भी लंड मांग रही थी, मैं बस अब चुदना चाहती थी बुरी तरह से। मैंने सोचा गांड ही मरवा लेती हूं, तो मैं उनके आगे घुटनों पर जाकर बैठ गई। बाबा ने अपना लंड मेरे मुंह के पास रख दिया और मुझे चूसने के लिए बोला, पता नहीं कैसे लेकिन मुझे उस समय वो भी अच्छा लग रहा था। जबकि अब शादी के बाद मेरा पति मुझसे बहुत जिद करता है मुंह में देने की लेकिन मैं नहीं लेती, उस समय अलग ही मुझे हवस चढ़ी थी जो बाबाजी ने ही उतार दी। मैंने उनका लंड ऊपर से नीचे तक पूरा चाटा, फिर उनकी गोलियां भी चाटी और फिर उनकी गांड भी चाटी, बाबा मुझसे बहुत खुश हो गए। फिर बाबा ने देर न करते हुए मुझे घोड़ी बना दिया और मेरी गांड में अपना मोटा लंबा लंड घुसा दिया और घुसाते ही उसको तेज-तेज अंदर-बाहर करने लगे, मेरी चूचियां भी बुरी तरह हिल रही थी।

मुझे असीम आनंद की प्राप्ति हो रही थी, गांड मरवाने की वजह से लंड की ठोकर मेरी चूत में भी लग रही थी जिससे मुझे अलग ही मजा आ रहा था। बाबा ने मुझे लगभग आधे घंटे तक चोदा और फिर एकदम से अपना लंड मेरी गांड से बाहर निकाल लिया और मुझे पलट दिया और मेरा मुंह खोल लिया और अपने लंड का सारा माल प्रसाद के तौर पर मुझे खिला दिया, मैं भी उनका सारा माल पी गई। फिर मैंने बाबा के लंड को चूमा और वापस अपने कमरे में आकर सो गई।

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