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पड़ोस के लड़के ने चोदा

Virgin Padosan sex story: मेरा नाम पूजा है, मैं भरतपुर की रहने वाली हूँ। मैं 19 साल की हूँ। मेरे मोहल्ले में कई लोग रहते हैं, लेकिन उनमें से पवन एक अलग ही लड़का था। वो 22 साल का था, देखने में अच्छा और मोहल्ले में उसकी इज्जत भी थी। मेरी उससे पहले ज्यादा बात नहीं होती थी, लेकिन धीरे-धीरे हालात बदलने लगे थे।

एक दिन मोहल्ले की भाभी ने कहा, “पूजा की तबियत ठीक नहीं है, इसकी दवा करा दो।”

पवन ने तुरंत हाँ कर दी और मुझे बाइक पर बैठने को कहा। मैं चुपचाप उसके पीछे बैठ गई।

जैसे ही बाइक चली, मेरा शरीर उसकी पीठ से टच होने लगा। मेरे बूब्स उसकी पीठ से सट रहे थे, और अजीब सा अहसास हो रहा था। पहले तो मैंने खुद को थोड़ा अलग करने की कोशिश की, लेकिन रास्ते में बाइक की हलचल से मेरा शरीर बार-बार उसकी पीठ से टकरा रहा था। मैं चुपचाप बैठी रही, लेकिन मन में अजीब सा एहसास हो रहा था।

डॉक्टर से दवाई लेने के बाद पवन मुझे घर छोड़ने आया। जाते-जाते मैंने उसकी तरफ देखा, तो वह भी मुझे ही देख रहा था। लेकिन मैं बिना कुछ कहे अंदर चली गई।

उस दिन के बाद से जब भी हम आमने-सामने होते, मुझे महसूस होता कि वह मुझे अलग नज़रों से देखने लगा था। पहले उसकी आँखों में सिर्फ पड़ोसी वाली भावना थी, लेकिन अब उसके देखने का अंदाज़ बदल गया था।

एक दिन जब मैं छत पर खड़ी थी, तो उसने मुझसे कहा, “क्या बात है, आज बहुत ही गज़ब लग रही हो!”

मैं उसकी बात सुनकर हल्का सा मुस्कुरा दी।

फिर उसने कहा, “तुम जिसकी बीवी बनोगी, वह बहुत खुश रहेगा!”

मुझे उसकी बातों पर हँसी आ गई। “हट!” कहकर मैं हँसते हुए नीचे चली गई।

अब मैं भी उसे देखने लगी थी। जब भी वह सामने आता, मेरी नज़रें खुद-ब-खुद उसकी तरफ चली जातीं।

कुछ दिनों बाद उसकी बहन का जन्मदिन था। मैं भी वहाँ गई थी। हमने खूब मस्ती की, डांस भी किया।

जब मैं जाने लगी, तो पवन ने मुझसे कहा, “पूजा, मेरे वीडियो भेज देना!”

मैंने उसे देखा और पूछा, “मेरा नंबर है क्या तुम्हारे पास?”

वह हल्के से मुस्कुराया और बोला, “नहीं, दो ना!”

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मुझे नहीं पता था कि मैं सही कर रही थी या नहीं, लेकिन मैंने उसे अपना नंबर दे दिया।

अब हमारी बातें होने लगीं। पहले हल्की-फुल्की बातें होती थीं, फिर ये बातें घंटों तक चलने लगीं। अब मुझे भी उसकी बातें सुनकर अच्छा लगने लगा था।

एक दिन उसने मुझसे कहा, “पूजा, तुम मुझे बहुत प्यारी लगती हो… मुझे लग रहा है कि मैं तुम्हें पसंद करने लगा हूँ।”

मेरे दिल की धड़कन तेज़ हो गई। मैंने फौरन पूछा, “सच्ची?”

“हाँ!” उसने तुरंत जवाब दिया।

मैं खुद को रोक नहीं पाई और लिख दिया, “मैं भी तुमसे प्यार करने लगी हूँ…”

अब हमारे बीच प्रेम बढ़ने लगा था।

फिर एक दिन उसने मुझसे कहा, “आज रात छत पर मिलोगी?”

मैं पहले झिझकी, फिर धीरे से “हाँ” कह दिया।

रात को जैसे ही मैं छत पर पहुँची, पवन पहले से वहाँ खड़ा था। मुझे देखते ही हल्का मुस्कुराया।

हम दोनों एक-दूसरे को देखने लगे, जैसे कुछ कहने की ज़रूरत ही न हो।

उसने धीरे से मेरा हाथ पकड़ा और अपनी तरफ खींच लिया। मेरे अंदर हल्का सा डर था, लेकिन मैंने खुद को उसकी बाहों में जाने दिया।

उसने मेरा चेहरा अपने हाथों में लिया और हल्के से मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए।

मेरे पूरे शरीर में कंपन सा होने लगा। यह मेरा पहला किस था। मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और खुद को उसके करीब जाने दिया।

कई मिनट तक हम ऐसे ही खड़े रहे। फिर उसने मेरे पेट पर हाथ रखा और हल्के से सहलाने लगा।

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मैं उसकी गर्म साँसों को महसूस कर सकती थी।

फिर उसका हाथ धीरे-धीरे मेरे बूब्स की तरफ बढ़ा। पहले तो मैंने झिझकते हुए उसे देखा, लेकिन फिर मैंने उसे नहीं रोका।

उसने धीरे-धीरे मेरे बूब्स पर हाथ रखा और हल्के से सहलाने लगा। मैं उसकी हर हरकत को महसूस कर रही थी।

उसने मेरे कान में फुसफुसाया, “आज तो मैं तुम्हें पूरा महसूस करना चाहता हूँ…”

मैंने धीरे से उसकी गर्दन पकड़ कर उसे और करीब कर लिया।

उसकी गर्म साँसें मेरी गर्दन पर पड़ रही थीं, और मेरा शरीर जैसे सुन्न सा हो रहा था। मैंने धीरे से उसकी गर्दन को पकड़कर उसे और करीब खींच लिया।

उसका हाथ अब मेरी ब्रा के ऊपर था, और वह हल्के-हल्के मेरे बूब्स को दबा रहा था। मुझे एक अलग ही तरह का अहसास हो रहा था, कुछ नया, कुछ अजीब… लेकिन अच्छा भी लग रहा था।

मेरी सांसें तेज़ हो रही थीं। उसने धीरे से मेरी ब्रा के हुक खोल दिए, और मेरे बूब्स उसके सामने आ गए। उसकी नज़रें उनमें ही अटक गईं। मैं शर्म से लाल हो गई थी, लेकिन उसने मुझे और करीब कर लिया और अपने होंठ मेरे निप्पल पर रख दिए।

जैसे ही उसने हल्के से चूसा, मेरे मुँह से एक सिसकारी निकल गई।

“आह्ह… पवन!”

वह अब मेरे दोनों बूब्स को अपने हाथों से मसल रहा था, और बीच-बीच में अपने होंठों से उन्हें चूस रहा था। मैं उसकी हर हरकत पर और पागल सी हो रही थी।

मैंने उसकी गर्दन को और कसकर पकड़ लिया और उसकी पीठ पर अपनी उंगलियों से हल्के से नाखून गड़ा दिए।

“अब और मत रोक, मुझे और पास आने दे…” उसने फुसफुसाते हुए कहा।

मैं अब पूरी तरह से उसके स्पर्श के नशे में थी। उसने मुझे गोद में उठा लिया और कमरे के अंदर ले गया।

तख्त पर मुझे लिटाते ही उसने मेरी लोअर को नीचे खींच दिया। मेरे मन में हल्का सा डर था, लेकिन अब मुझे भी उसका पूरा अहसास लेना था।

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“प्लीज़ पवन…” मैंने धीरे से कहा।

“आज तुम्हें पूरा महसूस करना चाहता हूँ पूजा…”

उसने मेरी पैंटी को भी धीरे से नीचे किया, और अब मैं उसके सामने पूरी तरह से नंगी थी। वह मेरी चूत को देख कर एकदम रुक गया, जैसे उसने कोई कीमती चीज़ देख ली हो।

“तुम इतनी खूबसूरत हो पूजा…”

मैंने हल्के से अपने पैरों को जोड़ लिया, लेकिन उसने धीरे से मेरी टाँगों को अलग किया और अपनी उँगलियाँ मेरी चूत पर रख दीं।

“आह्ह… पवन!” मेरे मुँह से एक और सिसकारी निकली।

उसकी उंगलियाँ मेरी चूत की पुत्तियों को सहला रही थीं, और मेरी हालत अब काबू से बाहर हो रही थी। मैं चाह रही थी कि वह अब आगे बढ़े।

उसने अपनी उँगलियों से मेरी चूत को और फैलाया और हल्के से अपनी जीभ वहाँ रख दी।

मेरी पूरी बॉडी एकदम झनझना उठी।

“ओह्ह… आह्ह…” मैंने उसके बालों को जोर से पकड़ लिया।

वह अब मेरी चूत को पूरी तरह से चूस रहा था, और मैं उसके हर मूवमेंट पर और पागल होती जा रही थी।

अब मैंने खुद उसे अपनी बाँहों में खींच लिया और कहा, “अब और मत रोक, मुझे पूरा बना दो…”

उसने हल्की मुस्कान दी और अपना लोअर और अंडरवियर उतार दिया।

उसका लौड़ा अब मेरी आँखों के सामने था। यह मेरी ज़िन्दगी में पहली बार था जब मैं किसी लड़के के लंड को देख रही थी।

मैं थोड़ी नर्वस हो गई, लेकिन अंदर से चाह भी रही थी।

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उसने धीरे से अपना लंड मेरी चूत पर रखा और हल्के से रगड़ने लगा।

“आह्ह…!” मेरी साँसे तेज़ हो गईं।

फिर उसने धीरे से एक झटका मारा, और उसका लंड मेरी चूत में हल्का सा घुसा।

“आह्ह… पवन! दर्द हो रहा है!”

“बस थोड़ा सा सह लो, फिर मज़ा ही मज़ा होगा मेरी जान…”

उसने धीरे-धीरे एक और झटका मारा, और इस बार उसका लंड मेरी चूत के अंदर थोड़ा और चला गया।

मेरी आँखें दर्द से भीग गई थीं, लेकिन पवन ने मेरा मुँह अपने मुँह से बंद कर दिया और मुझे जोर से चूमने लगा।

अब उसका लंड पूरी तरह मेरी चूत के अंदर था।

मुझे दर्द के साथ हल्का सा मजा भी आ रहा था। मैं उसकी पीठ को अपने नाखूनों से हल्के से खरोंचने लगी थी।

कुछ देर बाद दर्द हल्का हो गया, और अब मैं भी धीरे-धीरे उसे अपनी कमर से जकड़ने लगी।

“अब ठीक लग रहा है?” उसने हल्के से पूछा।

मैंने उसकी आँखों में देखा और धीरे से सिर हिलाया।

अब उसने अपनी मूवमेंट तेज़ कर दी।

“आह्ह… हाँ! और तेज़ पवन!”

अब वह मेरी चूत में तेज़ी से झटके मार रहा था, और मेरी साँसें तेज़ हो रही थीं।

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“आह्ह… हाँ! और जोर से!”

अब मेरा शरीर भी उसकी हरकतों के हिसाब से हिल रहा था।

कुछ देर बाद मेरी पूरी बॉडी झनझना उठी, और मैं उसके नीचे पूरी तरह से सिसकारियाँ भरने लगी।

“पवन! मैं झड़ने वाली हूँ!”

“साथ में झड़ते हैं पूजा!”

कुछ और जोरदार झटकों के बाद उसने अपना सारा पानी मेरी चूत के अंदर ही छोड़ दिया।

हम दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए हाँफ रहे थे।

वह मेरे ऊपर गिर पड़ा और मेरे माथे को चूमा।

“तुम मेरी हो पूजा…”

मैंने उसे कस कर पकड़ लिया और हल्के से मुस्कुरा दी।

मैंने उसकी आँखों में देखा और हल्की मुस्कान देते हुए कहा, “हाँ… तुम्हारी ही हूँ…”

उसने मेरे गालों को सहलाया और धीरे से मेरी नंगी कमर पर अपनी उंगलियाँ फिराने लगा। मैं अब भी उसकी बाहों में थी, और हमारी नग्न त्वचा एक-दूसरे से सटी हुई थी।

“कैसा लग रहा है?” उसने हल्के से पूछा।

मैंने उसकी छाती पर अपना सिर रखते हुए कहा, “थोड़ा दर्द है… पर अच्छा भी लग रहा है…”

वह हल्का सा मुस्कुराया और मेरी गर्दन पर अपने होंठ रख दिए। उसने धीरे-धीरे मेरी चूत से अपना लंड बाहर निकाला, जिससे मेरे शरीर में हल्की सी झुरझुरी दौड़ गई। मैं उसकी बाँहों में ही पड़ी रही।

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कुछ देर बाद, पवन ने मेरी ठुड्डी को अपने हाथों में लिया और मुझे ऊपर उठाकर चूमा।

“अब तुम मेरी हो, हमेशा के लिए…”

मैं हल्का सा हँस दी और उसके बालों में अपनी उंगलियाँ फिराने लगी।

हम दोनों कुछ मिनटों तक ऐसे ही लेटे रहे, फिर उसने धीरे से मेरे पेट पर अपनी उंगलियाँ फेरनी शुरू कीं।

“फिर से शुरू करूं?” उसने शरारती अंदाज़ में पूछा।

मैंने उसे हल्की चपत मारी, “नहीं! मुझे अभी भी दर्द हो रहा है…”

वह मुस्कुराया और मुझे अपनी बाहों में और कस लिया।

थोड़ी देर बाद हम दोनों उठे। मैंने अपनी पैंटी और ब्रा पहनी, और उसने भी अपने कपड़े पहन लिए। हम दोनों एक-दूसरे को देखते हुए हँस रहे थे।

“अब घर कैसे जाओगी?” उसने पूछा।

“चुपचाप! कोई देख न ले…” मैंने धीरे से कहा।

पवन ने मुझे अपनी बाहों में खींच लिया और फिर से मेरे होंठों को चूमा।

“जल्दी फिर से मिलने का मन कर रहा है…” उसने धीरे से फुसफुसाया।

मैंने उसकी छाती पर हल्की चपत लगाई, “अब बस! बहुत हुआ!”

मैं धीरे-धीरे अपनी छत की तरफ बढ़ी, दिल अभी भी जोरों से धड़क रहा था। मेरे पैरों में हल्की लड़खड़ाहट थी, और चूत में हल्का सा दर्द हो रहा था, लेकिन अंदर से मैं एक अलग ही एहसास में डूबी हुई थी।

कमरे से निकलते वक्त पवन ने मेरी कलाई पकड़कर हल्के से खींच लिया था।

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“अभी जा रही हो?” उसने मेरी आँखों में देखते हुए पूछा।

“अब और रुकूँगी तो कोई देख लेगा…” मैंने धीरे से कहा।

उसने मेरी कमर पर हाथ रखा और हल्के से दबाया।

“अब ये सब बार-बार होगा, तुम जानती हो न?”

मैं हल्के से मुस्कुरा दी, फिर जल्दी से अपने घर की ओर बढ़ गई।

रात का सन्नाटा था, घर में सब सो चुके थे। मैंने चुपचाप अपने कमरे का दरवाज़ा खोला और अंदर आ गई। बिस्तर पर बैठते ही मैं सोचने लगी कि अभी जो हुआ, वो हकीकत थी या सपना।

मैंने अपनी चूत को हल्के से छुआ, वहाँ अभी भी हल्की गरमी महसूस हो रही थी। मेरे बूब्स पर पवन के होंठों की हल्की जलन थी, और शरीर पर उसके हाथों के निशान अब भी महसूस हो रहे थे।

थोड़ी देर तक मैं ऐसे ही बैठी रही, फिर मैंने धीरे से अपने कपड़े उतारे और वॉशरूम में चली गई।

नल खोलते ही ठंडे पानी की धार मेरे बदन पर गिरने लगी। मैं एकदम सिहर गई। मेरी चूत से हल्की हल्की जलन महसूस हो रही थी। मैंने पानी से हल्के हाथों से धोया और खुद को शीशे में देखा।

“अब मैं पहले जैसी नहीं रही…”

यह सोचते हुए हल्की मुस्कान मेरे चेहरे पर आ गई।

सुबह जब आँख खुली, तो शरीर में अब भी हल्की सुस्ती थी। उठने का मन नहीं कर रहा था, लेकिन घर में किसी को शक न हो, इसलिए मैंने खुद को नॉर्मल करने की कोशिश की।

मैं बिस्तर से उठी और जैसे ही चलने लगी, मुझे हल्की तकलीफ महसूस हुई।

“ये सब पहली बार का असर है…” मैंने खुद को समझाया और धीरे-धीरे चलने लगी।

तभी मेरा फोन बजा।

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पवन का मैसेज था: “कैसी हो मेरी जान?”

मैंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “ठीक हूँ, बस थोड़ी थकान है…”

उसने तुरंत रिप्लाई किया, “अभी तो शुरुआत है, धीरे-धीरे आदत हो जाएगी…”

मैंने शर्माते हुए फोन रख दिया और धीरे से खुद को आईने में देखा।

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⚠️ महत्वपूर्ण अस्वीकरण

ये सभी कहानियाँ केवल काल्पनिक हैं।
इनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है।

सेक्स हमेशा सहमति पर आधारित होना चाहिए।
बिना सहमति के कोई भी कार्य गलत और दंडनीय है।

इन कहानियों से प्रेरित न हों।
बस पढ़ें, आनंद लें और भूल जाएं।