कहानी का पिछला भाग: माँ ने सामने बैठकर बेटी की कोरी चूत फटवाई – Part 1
मैं बुरी तरह बेशर्म हो चुकी थी। उत्तेजना से काँप रही थी। मैंने लण्ड हसीना की माँ की चूत पर रखा और नबी के चूतड़ दबाए। लण्ड पूरा अंदर घुस गया। फिर मैं नंगी पेट के बल नबी की पीठ पर चढ़ गई और उसके साथ मिलकर हसीना की माँ की चूत चोदने लगी। ऐसा लग रहा था जैसे मैं ही चोद रही हूँ।
फिर हसीना की माँ निकली और हसीना घुस गई। अब लौड़ा हसीना की बुर में। मैं उसी तरह हसीना की बुर चोदने लगी। इस तरह मैंने पहली बार माँ-बेटी दोनों की चूत चोदने का मज़ा लिया।
कामुकता से भरकर हम सबने नबी का लण्ड चाटा। अम्मी ने पूछा, “तूने चुदवाया या नहीं?”
मैंने कहा, “नहीं, मुझे डर था कहीं गड़बड़ न हो जाए।”
अम्मी बोली, “तू तो बड़ी छुपी रुस्तम निकली बुरचोदी मुस्कान। एक ही बार में लण्ड पकड़ा, माँ का भोसड़ा चोदा और बेटी की बुर भी चोदी? मुझे फक्र है तुझ पर। अब मैं पकड़ाऊँगी तुझे लण्ड पे लण्ड और बताऊँगी कैसे लिया जाता है लण्ड का पूरा मज़ा।”
तभी डोरबेल बजी। अम्मी दौड़कर दरवाजा खोलने गईं। रात के 11 बज चुके थे। दो मिनट में अम्मी एक आदमी के साथ वापस आईं।
मैंने देखा तो बोली, “अरे साहिर अंकल आप? इतनी रात गए?”
वे बोले, “सब ठीक है बेटी मुस्कान।”
अम्मी बोलीं, “मुस्कान, तुम कभी अंकल से खुलकर नहीं मिली हो? आज खुलकर मिलो और मस्ती से बातें करो।”
मैंने पूछ लिया, “अंकल तुम इतने हैंडसम हो, स्मार्ट हो तो कई लड़कियाँ मरती होंगी। तुमने अब तक कितनी लड़कियों के साथ सेक्स किया है?”
वे बोले, “मैंने कई लड़कियों के साथ सेक्स किया है बेटी मुस्कान! और उनकी अम्मियों के साथ भी।”
मेरे मुंह से निकला, “तब तो तुम बड़े हरामजादे हो भोसड़ी के अंकल?”
सब हंस पड़े। अम्मी बोलीं, “बेटी मुस्कान, इसका लण्ड इससे भी ज्यादा हरामजादा है।”
अम्मी ने उसके पाजामे में हाथ डाला और लण्ड सहलाने लगीं। अंकल ने मेरे सामने अम्मी की चूचियाँ दबाईं।
अम्मी ने लण्ड बाहर निकाला और मुझे दिखाते हुए बोलीं, “बेटी मुस्कान, लो अब इसे पकड़कर देखो और बताओ कैसा लगा?”
मैं मूड में थी। लण्ड पकड़कर बोली, “वॉव, बड़ा हैंडसम और मस्त लौड़ा है अंकल का अम्मी जान! मज़ा आ गया इसे पकड़कर।”
अम्मी ने कहा, “तभी तो तुझे पकड़ाया मैंने लण्ड!”
फिर अम्मी ने अपने कपड़े उतारे और एकदम नंगी हो गईं। अम्मी की मस्त जवानी देखकर मैं दंग रह गई। उनकी चूत अभी भी टाइट लग रही थी, भोसड़ा नहीं बनी थी।
अम्मी ने मेरे कपड़े भी उतारे। मैं अंकल के सामने नंगी हो गई। अब मर्दों के सामने नंगी होने का मज़ा आने लगा था। मन हुआ कि कुनबे के सारे मर्दों के सामने नंगी घूमूँ, सबको अपना जिस्म दिखाऊँ, सबके लण्ड देखूँ।
अंकल का लण्ड देखकर आसमान ताकने लगा। हम दोनों माँ-बेटी ने मिलकर लण्ड चाटना शुरू किया। मैं टोपा चाटती तो अम्मी पेल्हड़, मैं पेल्हड़ चाटती तो अम्मी टोपा।
अंकल मेरी बुर चाटने लगे। बड़ी उम्र के मर्द से पहली बार चटवाया। मैं एन्जॉय करने लगी, “आह्ह.. अंकल.. ओह्ह.. कितना अच्छा लग रहा है.. चाटो और जोर से..”
अम्मी बोलीं, “यार साहिर, अब तू लण्ड मेरी बेटी की चूत में पेल दे और तोड़ डाल इस बुरचोदी की चूत की सील। अभी इसकी चूत एकदम कोरी है।”
अंकल ने लण्ड मेरी चूत पर टिकाया। धीरे-धीरे ठेला। लण्ड घुसने लगा। मुझे तेज दर्द हुआ। मैं चिल्लाई, “उई माँ.. मर गई मैं.. फट गई मेरी चूत अम्मी जान! बड़ा मोटा है इसका मादरचोद लण्ड..”
अम्मी बोलीं, “चुप रह भोसड़ी वाली.. अभी सब ठीक हो जाएगा। पहली बार ऐसा होता है। थोड़ा दर्द तो होगा ही।”
धीरे-धीरे दर्द कम हुआ। मैं खुद कमर हिलाने लगी। लण्ड पूरा अंदर-बाहर होने लगा। “आह्ह.. ओह्ह.. अब मज़ा आ रहा है अम्मी.. और जोर से पेलो अंकल..”
तभी मेरी खाला का बेटा आदिल आ गया। उसने सब देखा। उसका लण्ड पजामे में उछल रहा था।
अम्मी बोलीं, “बेटा आदिल, तू भी कपड़े उतार कर आ जा!”
आदिल नंगा हुआ। उसका लण्ड देखकर मैं मस्त हो गई। “बड़ा गज़ब का मोटा है आदिल भाई जान तेरा मादरचोद लण्ड! मैं तो आज पहली बार देख रही हूँ।”
अम्मी ने लण्ड मेरे मुंह में घुसाया, “अब चूस कर अच्छे से देख ले।”
मैं दो लण्डों का मज़ा लेने लगी। एक चूत में, दूसरा मुंह में। अम्मी खुश होकर बोलीं, “बेटी मुस्कान, तू भी अब मेरी तरह चुदक्कड़ हो गई है। अब आएगा जवानी का असली मज़ा!”
मैं बिंदास चुदने लगी। दोनों लण्ड बार-बार बदलते रहे। काफी देर तक धकाधक चुदाई चली। दोनों ने मेरे अंदर झड़ दिया।
अगले दिन अम्मी घर नहीं थीं। मैं अकेली थी। तभी मेरा सबसे छोटा मामू आ गए। वो मुझसे दो साल बड़े, हट्टे-कट्टे, कसरती बदन।
मैंने सोचा इसका लौड़ा भी कसरती होगा तो मज़ा आएगा। मैंने जिस्म के जलवे दिखाने शुरू किए। मम्मे, टांगें, गांड, जांघें सब दिखाए।
वो नेकर में बैठे थे। मैंने कहा, “मामू जान, नेकर पहनने की क्या जरूरत? उतार फेंको न!”
वो बोले, “अरे नंगा हो जाऊँगा यार?”
मैंने कहा, “नंगे होने से क्या हुआ? यहाँ कोई और है नहीं। मुझसे शर्माते हो?”
वो बोले, “हाँ, थोड़ी शर्म तो आ रही है।”
मैंने कहा, “हाय रब्बा, तुम कैसे मर्द हो जो लड़की से शर्माते हो? मर्द हो तो लण्ड खोलकर दिखाओ!”
मैंने नेकर के ऊपर से दबाया। “ये तो पहले से खड़ा है और तुम शर्मा रहे हो भोसड़ी के?”
मैंने नेकर उतार फेंकी। उसका लण्ड टनटनाया। मुझे एक नज़र में भा गया।
मैंने कहा, “बड़ा मस्त और जबरदस्त है तेरा लण्ड मामू जान!”
उसने मेरे कपड़े उतारे। हम दोनों नंगे बिस्तर पर आ गए। खूब जमकर चोदा-चोदी हुई। मैंने लण्ड का पूरा चस्का ले लिया।
अब जब भी कोई मर्द घर आता है, मैं उसका लण्ड पहले पकड़ लेती हूँ।
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