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मौसी के जाने के बाद मम्मी बनी जीजा की रंडी

Jiju sali wild sex story, mausa ji ne mummy ko choda sex story, jiju sali chudai sex story: मेरा नाम हिमानी सिंह है। मैं पानीपत की रहने वाली हूं। आज मेरी उम्र 28 साल है और मेरा फिगर 34-28-38 का है। मैं थोड़ी मोटी-तगड़ी हूं, लेकिन पुरुषों की नजरें अक्सर मेरी गांड और चूचियों पर टिक जाती हैं।

हमारे घर में मम्मी-पापा, मुझसे दो साल छोटा भाई राहुल और तीन साल छोटी बहन कोमल है। मम्मी का नाम राधा है। उनका फिगर 36-30-40 का है। मम्मी की कमर थोड़ी मोटी है, चूचियां भारी-भरकम और गांड इतनी मोटी कि सलवार में भी साफ उभर आती है। वो बेहद खूबसूरत हैं, गोरी चिट्ट और चेहरा ऐसा कि 40 पार होने के बाद भी कॉलेज की लड़कियों को मात दे दें।

ये कहानी उस समय की है जब मैं अभी 18-19 साल की थी, यानी लगभग 10 साल पहले। उस वक्त मैंने पहली बार अपनी मम्मी की असली चुदाई देखी थी और वो भी इतने करीब से कि आज भी याद करके मेरी चूत गीली हो जाती है।

हमारी मौसी दिल्ली में रहती थीं। वो बहुत अच्छी थीं, लेकिन कैंसर की वजह से उनकी मौत हो गई। मौसी के जाने के बाद उनका पूरा परिवार उदास हो गया। मौसा जी रमेश और उनका इकलौता बेटा सोनू। सोनू उस समय 21 साल का था, कॉलेज में पढ़ता था, लंबा, गोरा और काफी हैंडसम।

मौसा जी मौसी की मौत से बहुत टूट गए थे। दिन-रात शराब में डूबे रहते। खाना-पीना छोड़ दिया था, बस पीते और रोते। ये सब सुनकर पापा और मम्मी ने फैसला किया कि कुछ दिन दिल्ली जाकर मौसा जी को संभालेंगे, शायद घर में लोग रहेंगे तो वो संभल जाएं।

पापा का कपड़ों का बड़ा बिजनेस है। वो अक्सर बाहर रहते हैं, इसलिए कुछ दिन दिल्ली में रहने में कोई दिक्कत नहीं थी। हम सब परिवार दिल्ली चले गए।

पहले कुछ दिन पापा और मम्मी मिलकर मौसा जी को समझाते रहे। कहते, “जो होना था सो हो गया, अब सोनू का भी ध्यान रखना है। जिंदगी रुकती नहीं।” मौसा जी सुनते, लेकिन आंखों में आंसू आ जाते।

एक हफ्ता बीत गया। पापा को वापस काम पर लौटना था। उन्होंने मम्मी से कहा, “राधा, तुम यहां कुछ दिन और रुक जाओ। मैं बच्चों को लेकर घर चला जाता हूं। दुकान भी देखनी है।”

मम्मी ने मुझे अपने साथ रोक लिया। बोलीं, “हिमानी मेरे साथ रहेगी, तुम राहुल और कोमल को ले जाओ।”

पापा दोपहर में निकल गए। अब घर में सिर्फ मौसा जी, सोनू, मम्मी और मैं थी। मौसा जी अब धीरे-धीरे उबर रहे थे। दिन में शराब नहीं पीते थे, लेकिन शाम को एक-दो पैग जरूर लगाते।

एक शाम अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। छत पर बहुत सारे कपड़े सुखाए हुए थे। मम्मी जल्दी-जल्दी ऊपर गईं। कपड़े उतारते वक्त सीढ़ियों पर उनका पैर फिसल गया। वो सीढ़ियों से लुढ़ककर नीचे आ गईं। कमर में जोर की चोट लगी। वो चिल्लाईं, “आह्ह… मेरी कमर!”

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मौसा जी ड्राइंग रूम में बैठे शराब का पैग पी रहे थे। मम्मी की आवाज सुनकर वो दौड़कर आए। मम्मी को सहारा देकर उठाया। मम्मी ठीक से खड़ी भी नहीं हो पा रही थीं। मौसा जी ने उन्हें गोद में उठाकर बेडरूम में ले जाकर लिटा दिया।

मौसा जी ने तुरंत दर्द निवारक क्रीम निकाली और मम्मी की कमर पर लगाई। दर्द की गोली भी दी। मम्मी को बोला, “आराम करो, मैं देखता हूं।”

उस दिन सबने बाहर से खाना मंगवाया। मम्मी खाना भी नहीं खा पाईं ठीक से। रात को बहुत दर्द हुआ।

अगली सुबह मौसा जी जल्दी उठे और मम्मी के पास आए। पूछा, “राधा, आज दर्द कैसा है?”

मम्मी कराहते हुए बोलीं, “बहुत दर्द है रमेश जी… चल भी नहीं पा रही।”

मौसा जी बोले, “उल्टा लेट जाओ, मैं फिर से दवा लगाता हूं।”

मम्मी उल्टा लेट गईं। मौसा जी ने उनका कुर्ता धीरे से ऊपर किया। रात भर ढीली हुई सलवार थोड़ी नीचे खिसक गई थी। मम्मी की मोटी, गोरी गांड की दरार साफ दिख रही थी। मौसा जी की आंखें चमक उठीं।

उन्होंने क्रीम लगाते हुए हाथ गांड की तरफ ले गए। पूछा, “यहां भी दर्द है?”

मम्मी ने हां में सिर हिलाया। मौसा जी ने तुरंत सलवार को और नीचे खींच दिया। अब मम्मी की आधी गांड नंगी हो गई। वो धीरे-धीरे दोनों गालों को मसलने लगे, क्रीम फैलाते हुए।

मौसा जी बोले, “चलो, पूरा दर्द दूर कर दूं।” फिर उन्होंने दोनों गालों को फैलाकर देखा। मम्मी की गांड का छेद और चूत की लकीर साफ दिख रही थी। मौसा जी की सांसें तेज हो गईं।

फिर वो ऑफिस के लिए निकल गए और जाते-जाते बोले, “शाम को डॉक्टर दोस्त से बात करके और अच्छी दवा लाऊंगा।”

शाम को मौसा जी लौटे। फ्रेश हुए, सोनू से थोड़ी बात की, एक पैग लगाया। फिर दूसरा पैग हाथ में लेकर मम्मी के कमरे में आए।

मम्मी बिस्तर पर लेटी आराम कर रही थीं। मौसा जी ने एक तेल की शीशी दिखाई। बोले, “डॉक्टर ने कहा है इससे अच्छे से मालिश करो, दर्द पूरी तरह चला जाएगा।”

मौसा जी ने पैग खत्म किया और कहा, “उल्टा लेट जाओ राधा।”

मम्मी उल्टा लेट गईं। मौसा जी ने कुर्ता ऊपर किया और बोले, “सलवार का नाड़ा ढीला कर लो, तेल कपड़ों पर न लग जाए।”

मम्मी ने नाड़ा ढीला कर दिया। मौसा जी ने तेल हाथ में लिया और मालिश शुरू की। पहले कमर, फिर कूल्हे। धीरे-धीरे हाथ गांड पर पहुंच गए।

अब मम्मी की पूरी गांड नंगी थी। मौसा जी दोनों गालों को मसलते, फैलाते। जब फैलाते तो गांड का छेद और चूत पूरी तरह खुल जाती। मौसा जी का अंगूठा बार-बार चूत की लकीर पर रगड़ने लगा।

मम्मी के मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं… “आह्ह… इह्ह… रमेश जी…”

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मौसा जी की हिम्मत बढ़ी। उन्होंने अंगूठा चूत के अंदर डाल दिया। फिर दो उंगलियां। मम्मी चुप रहीं, बस कराह रही थीं… “आह्ह… ओह्ह…”

तभी मौसा जी ने मुझे आवाज दी, “हिमानी बेटा, बाहर मेरी बॉटल रखी है, वो और फ्रिज से पानी ले आना।”

मैं बाहर गई। लौटते वक्त दरवाजे से झांका तो देखा कि मौसा जी और मम्मी एक-दूसरे को गहरा किस कर रहे थे। मौसा जी का हाथ मम्मी की चूत में था, उंगलियां अंदर-बाहर हो रही थीं।

मैं अंदर गई तो दोनों झट से अलग हो गए। मौसा जी बोले, “हां, इससे दर्द बहुत जल्दी ठीक हो जाएगा। आज रात अच्छे से मालिश करेंगे।”

रात को खाना खाकर सब सो गए। थोड़ी देर बाद मौसा जी चुपके से हमारे कमरे में आए। उन्हें लगा कि मैं सो गई हूं।

उन्होंने दरवाजा अंदर से लॉक किया। मम्मी के पास लेट गए और बोले, “बोलो राधा… आज कौन सी मालिश चाहिए… आगे की या पीछे की?”

मम्मी ने जवाब नहीं दिया। बस मौसा जी की तरफ मुड़ीं और उन्हें जोर से किस करने लगीं।

मौसा जी ने तुरंत मम्मी के सारे कपड़े उतार फेंके। कुर्ता, ब्रा, सलवार, पैंटी… सब फेंक दिया। मम्मी पूरी नंगी हो गईं।

मौसा जी खुद भी तैयार थे। सिर्फ अंडरवियर पहना था। मम्मी ने उसे भी उतारा। मौसा जी का लंड खड़ा और मोटा था। मम्मी ने उसे हाथ में पकड़ा और मुंह में ले लिया।

मम्मी पागलों की तरह चूसने लगीं। ग्ग्ग्ग… गोग… गी… गों… गों… की आवाजें कमरे में गूंजने लगीं। मौसा जी मम्मी के बाल पकड़कर उनका मुंह चोद रहे थे।

“आह मेरी रंडी… मेरी लंड की प्यासी साली… आज तेरी चूत फाड़कर सोऊंगा।”

फिर मौसा जी ने मम्मी को लिटाया। अपना मुंह उनकी चूत पर रखा और जोर-जोर से चाटने लगे। जीभ अंदर-बाहर, चूत की लकीर पर रगड़ते। मम्मी चिल्ला रही थीं… “आह्ह… ओह्ह… और जोर से रमेश जी… चाटो… मेरी चूत चाटो… इह्ह… ओह्ह्ह…”

कुछ मिनट बाद मौसा जी ऊपर चढ़े। लंड चूत पर रखा और एक ही झटके में पूरा अंदर पेल दिया।

धप्प… धप्प… धप्प… कमरा चुदाई की आवाजों से भर गया। मम्मी अपनी गांड ऊपर-नीचे करके चुदवा रही थीं।

“और जोर से मेरे राजा… चोदो… मेरे भोसड़े को फाड़ दो… आह्ह्ह… ओह्ह्ह… हाय… कितना मोटा है तेरा लंड…”

मौसा जी ने मम्मी को तीन बार चोदा उस रात। पहले घोड़ी बनाकर, फिर मिशनरी में, फिर मम्मी ऊपर आकर सवार होकर। हर बार मम्मी की चूत से रस टपक रहा था।

अंत में दोनों थककर एक-दूसरे के ऊपर ही सो गए।

सुबह मौसा जी ऑफिस चले गए। मम्मी बहुत खुश और तरोताजा लग रही थीं। आज सोनू भी कॉलेज नहीं गया था। घर पर ही था।

दोपहर में किचन से कुछ गिरने की आवाज आई। मैं देखने गई तो देखा सोनू मम्मी के पीछे खड़ा था।

मम्मी बोलीं, “सोनू ये गलत है… मैं तुम्हारी मौसी हूं… रहने दो…”

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सोनू बोला, “पापा भी तो तुम्हारे जीजा लगते हैं। रात भर तुमने उनका लंड लिया, फिर मुझे क्यों नहीं?”

मम्मी चुप हो गईं। सोनू ने पीछे से मम्मी की चूचियां पकड़ीं और जोर-जोर से दबाने लगा।

मम्मी बोलीं, “रहने दो बेटा… ये नहीं होना चाहिए…” लेकिन उनकी आवाज कमजोर थी।

सोनू ने मैक्सी के ऊपर से चूचियां निकालीं। ब्रा नीचे की। मम्मी की बड़ी-बड़ी, गोरी चूचियां हवा में लटक गईं। सोनू ने गर्दन पर किस करना शुरू किया।

मम्मी की आंखें बंद हो गईं। उनका हाथ सोनू के सिर को सहलाने लगा। वो मुंह से तो बोल रही थीं “मत करो सोनू…” लेकिन शरीर साथ दे रहा था।

सोनू ने मैक्सी पूरी ऊपर की। पैंटी उतारी और फेंक दी। फिर घुटनों पर बैठ गया और मम्मी की गांड में मुंह घुसा दिया। जीभ से गांड का छेद और चूत दोनों चाटने लगा।

मम्मी दीवार से टिक गईं। कराह रही थीं… “आह्ह… सोनू… ओह्ह… क्या कर रहे हो… इह्ह… बहुत अच्छा लग रहा है…”

थोड़ी देर बाद सोनू ने मम्मी को घुटनों पर बिठाया। अपना लंड निकाला। सोनू का लंड मौसा जी से भी मोटा और डेढ़ इंच लंबा था।

मम्मी ने उसे मुंह में लिया। जोर-जोर से चूसने लगीं। ग्ग्ग्ग… गोग… गों… गी… गों… कमरे में आवाज गूंज रही थी।

सोनू ने 10 मिनट तक मम्मी का मुंह चोदा। फिर जोर से झटके देकर मम्मी के मुंह में सारा माल उड़ेल दिया। मम्मी ने सब निगल लिया।

फिर सोनू ने मम्मी को उठाया। दीवार से टिकाया। पीछे से चूत में पूरा लंड पेल दिया।

आधे घंटे तक घोड़ी बनाकर जोर-जोर से चोदा। मम्मी चिल्ला रही थीं… “आह्ह… सोनू… और जोर से… फाड़ दो मेरी चूत… ओह्ह्ह… कितना मोटा है तेरा लंड… हाय…”

अंत में सोनू ने मम्मी की चूचियों पर सारा माल गिरा दिया। मम्मी की चूचियां लाल हो गईं थीं दबाने से।

मम्मी के चेहरे पर संतुष्टि साफ दिख रही थी। वो मुस्कुरा रही थीं।

दोस्तों, ये तो सिर्फ शुरुआत थी। आगे क्या-क्या हुआ, कैसे मौसा जी और सोनू ने मिलकर मम्मी को रात-दिन चोदा, वो अगले भाग में बताऊंगी।

कहानी का अगला भाग: मौसेरे भाई का मोटा लंड मेरी पहली चुदाई में खून निकाला

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