Moti gand chudai sex story, College maal pela sex story, Computer girl fuck sex story: ये पूरी कहानी मेरे कॉलेज के उन दिनों की है जब दिल में बस एक ही ख्वाहिश रहती थी, किसी हॉट लड़की को पाकर उसकी मादक बॉडी को भोगना। हमारे मैकेनिकल ब्रांच में तो एक भी लड़की नहीं थी, इसलिए हम सबकी नजरें दूसरी ब्रांच की लड़कियों पर टिकी रहती थीं। खासकर नई-नई आई लड़कियों पर, क्योंकि उस वक्त उनकी चूत में वो खुजली सबसे ज्यादा होती है, बस हिम्मत करके थोड़ा आगे बढ़ना पड़ता है।
मीनाक्षी कंप्यूटर ब्रांच में थी। जैसे ही वो कॉलेज में एंटर हुई, सारे सीनियर्स उसके पीछे पड़ गए। उसकी बॉडी देखकर किसी का भी लंड तड़प उठता। बड़े-बड़े गोल-गोल बूब्स जो टाइट टॉप में उभरे रहते, चिकना हल्का सांवला रंग जो देखते ही मन ललचा जाता, और सबसे खास उसकी वो चौड़ी, मोटी, मांसल गांड। हाय रब्बा, जब वो चलती तो उसकी गांड मटक-मटक कर ऐसे लहराती कि सबकी सांसें थम जातीं। मेरी तो बस उसे देखते ही लंड सलामी देने लगता, सात इंच का पूरा खड़ा हो जाता और पैंट में तड़पने लगता।
लेकिन मीनाक्षी बहुत तेज लड़की थी। किसी सीनियर के हाथ आसानी से नहीं लगी। फर्स्ट ईयर में हमारे कुछ सब्जेक्ट कॉमन थे, तो मौका मिला। एक दिन मैंने किताब के बहाने उससे बात शुरू की। धीरे-धीरे दोस्ती हो गई। मैंने कभी अपने गंदे इरादे जाहिर नहीं किए। उसके लिए मैं एक अच्छा, पढ़ाई करने वाला, मददगार लड़का बन गया। सीनियर्स से बचाता, रैगिंग से दूर रखता, उसकी हिम्मत बढ़ाता।
धीरे-धीरे हमारी दोस्ती इतनी गहरी हो गई कि पढ़ते वक्त गलती से हाथ लग जाए तो दोनों के शरीर में करंट सा दौड़ जाता। उसकी नरम त्वचा का स्पर्श, उसकी सांसों की गर्मी, सब कुछ मन में तूफान मचा देता। हम दोनों जानते थे कि कुछ होने वाला है, बस वो पल आने की देर थी।
सेकंड सेमेस्टर के एग्जाम चल रहे थे। मीनाक्षी के घरवाले मौसी के बेटे की शादी में बाहर गए हुए थे। एग्जाम की वजह से वो घर पर अकेली रह गई। एक दिन उसने मुझे फोन किया, आवाज में थोड़ी सी शरारत थी, बोली, “हेमंत, आज घर आ जाओ ना, साथ में पढ़ाई करेंगे।” मेरे तो कान में शहद घुल गया। लंड तुरंत खड़ा हो गया, उसकी मोटी गांड की याद आई तो मन बेकाबू हो गया।
मैंने पहले बाथरूम में जाकर लंड को थोड़ा शांत किया, फिर अच्छे कपड़े पहने और उसके घर पहुंच गया। दरवाजा खुलते ही नजर पड़ी तो दिल धड़क गया। उसने एक पतली, लगभग पारदर्शी सफेद नाइटी पहनी थी। अंदर ब्रा नहीं, पेंटी नहीं। उसके बड़े बूब्स की उभार साफ दिख रहे थे, गुलाबी निप्पल्स भी हल्के से झांक रहे थे। नीचे चूत की गहराई तक सब कुछ महसूस हो रहा था। मेरे मुंह में पानी आ गया, लंड पैंट फाड़ने को तैयार था।
हम स्टडी टेबल पर बैठे। आधे घंटे तक पढ़ाई का नाटक करते रहे। लेकिन मेरी नजर बार-बार उसके बूब्स पर, उसकी जांघों पर जा रही थी। आखिर हिम्मत करके मैंने उसके पीछे से हाथ बढ़ाया, कंधों पर रखकर हल्के से दबाया। उसकी गर्म त्वचा ने मुझे और उत्तेजित कर दिया। मैंने उसे अपनी ओर खींचा और कान में फुसफुसाया, “अब पढ़ाई नहीं हो रही मीनाक्षी, कुछ और हो रहा है।”
उसने मेरी जांघ पर हाथ फेरते हुए, शरमाते हुए कहा, “हम्म… चलो थोड़ी देर लेट जाते हैं।” हम बेडरूम में चले गए। एक ही चादर ओढ़कर लेट गए। उसकी सांसें तेज हो रही थीं। मैंने धीरे से उसे अपने सीने से सटाया। मेरा सात इंच का खड़ा लंड उसके नरम पेट पर दब रहा था। वो कसमसाई, लेकिन आंखें बंद रखीं।
मैंने पैर उसकी जांघों पर चढ़ाए, कसकर गले लगा लिया। उसकी सांसें गर्म हो गईं। मैंने उसके गाल पर, फिर होंठों पर किस किया। उसके होंठ गुलाब की पंखुड़ियों जैसे नरम थे। हम देर तक एक-दूसरे के होंठ चूसते रहे, जीभें मिलाकर गहरा किस करते रहे। उसकी सांसें तेज होती गईं।
फिर मैंने उसकी नाइटी धीरे-धीरे ऊपर की, उसके बड़े बूब्स बाहर आए। मैंने उन्हें दोनों हाथों से दबाया, निप्पल्स को उंगलियों से मसलते हुए चूसा। वो सिसकारी भरने लगी, “आह्ह… हेमंत… ऊफ्फ… कितना अच्छा लग रहा है…” मैंने एक बूब मुंह में लिया, जीभ से निप्पल घुमाया, दूसरा हाथ नीचे उसकी जांघों के बीच ले गया। उसकी चूत पहले से गीली थी। उंगलियों से हल्के से सहलाया तो वो कंपकंपी उठी।
मैंने नाइटी पूरी उतार दी। खुद भी नंगा हो गया। अब हम दोनों पूरी तरह नंगे थे। उसकी चिकनी त्वचा मेरे बदन से रगड़ खा रही थी। मैं उसके ऊपर चढ़ गया। उसका बदन इतना मुलायम था जैसे मक्खन हो। मैंने उसके बूब्स फिर चूसे, पेट चाटा, नाभि में जीभ डाली। वो कराह रही थी, “ऊंह्ह… और नीचे… आह्ह…”
मैं नीचे सरका। उसकी जांघें फैलाकर चूत को देखा। गुलाबी, गीली, छोटी-छोटी बालों से सजी। मैंने जीभ से चाटना शुरू किया। पहले हल्के से क्लिट पर, फिर पूरी चूत चाटी। वो चीख पड़ी, “ऊफ्फ्फ… हेमंत… क्या कर रहे हो… आग लग गई है… आह्ह… और चूसो… मेरी चूत चूसो…” मैंने जीभ अंदर डाली, क्लिट को चूसा। वो कमर उठाकर दबा रही थी मेरे मुंह पर। उसका रस मेरे मुंह में बह रहा था।
फिर मैंने उसका हाथ अपने लंड पर रखा। वो शरमाई, लेकिन पकड़ लिया। धीरे-धीरे सहलाने लगी। मैं उसके ऊपर आया। लंड चूत के मुंह पर रगड़ा। वो कांप रही थी। धीरे से अंदर डाला। वो दर्द से सिसकारी, “आह्ह… धीरे… बड़ा है…” लेकिन मैं रुका नहीं। पूरा अंदर डाल दिया। फिर धीरे-धीरे धक्के मारने लगा। वो भी साथ देने लगी, “हां… और जोर से… चोदो मुझे… आह्ह… ओह्ह…”
15 मिनट तक दनादन पेलता रहा। उसके बूब्स उछल रहे थे। वो चीख रही थी, “आह्ह… हां… और तेज… चोद डालो…” आखिर वो झड़ गई, उसकी चूत सिकुड़ गई, रस बहा। लेकिन मेरा लंड अभी तड़प रहा था।
मैंने उसे पलटा। उसकी मोटी गांड सामने थी। मैंने दोनों गाल फैलाकर चाटना शुरू किया। वो शरम से तड़प उठी, “नहीं… वहां मत…” लेकिन मैं रुका नहीं। जीभ से छेद चाटा। फिर उंगली डाली। वो चिल्लाई, “प्लीज… दर्द होता है…” मैंने कहा, “घबराओ मत मेरी जान, वैसलीन लगाता हूं।” आधी बोतल वैसलीन उसकी गांड पर और अपने लंड पर लगाई।
धीरे से लंड गांड के छेद पर रखा। धक्का दिया। वो जोर से चिल्लाई, “आआह्ह… दर्द हो रहा है…” लेकिन मैं अंदर जाता गया। पूरा अंदर डाल दिया। फिर स्पीड बढ़ाई। पहले दर्द से चीखी, फिर मजा आने लगा। वो बोली, “हां… चोद दो मेरी गांड… फाड़ दो… आह्ह… चोद हेमंत… चोद कमीने… अपनी कुत्तिया को चोद…” मैंने जोर-जोर से धक्के मारे। उसकी गांड लाल हो गई। आधे घंटे तक पेलता रहा। आखिर मैं झड़ गया, पूरा स्पर्म उसकी गांड में भर दिया।
फिर मैंने उसकी गांड चाटी, छेद में जीभ डाली। वो कराह रही थी। फिर किस किया। खड़े होकर लंड उसके मुंह में डाला। वो लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी, ग्ग्ग्ग… गी… गों… गोग… आवाजें निकालते हुए गहराई तक लिया।
हम दोनों थककर लिपटकर सो गए। उसके बाद रोज मौका मिलते ही उसकी चूत और गांड मारता रहा। चार साल तक ये सिलसिला चलता रहा। उसकी गांड और भी चौड़ी, मटकी हो गई। चोदने में अलग ही मजा आने लगा। जितना मौका मिला, उतना चुदाई की और खूब इंजॉय किया।
दोस्तों, ये कहानी आपको कैसी लगी?
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