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माँ बेटी दोनों फूफा के लंड पर टांग अड़ाती

Maa Beti Fufa chudai sex story: मेरा नाम कशिश है। मैं 19 साल की लड़की हूं। हॉट और बहुत सेक्सी। इसी का फायदा उठाकर मेरे फूफा जी ने मेरी जवानी को लूट लिया। मेरी गोरी चमकदार त्वचा हर सुबह सूरज की किरणों में मोती की तरह जगमगाती थी। वह त्वचा इतनी नरम और मुलायम थी कि जैसे कोई रेशम की चादर हो। सुबह की हल्की धूप जब उस पर पड़ती तो वह चमक उठती और मेरे शरीर पर एक सुनहरा आभा छा जाती। मेरे लंबे घने काले बाल मेरी पीठ पर लहराते हुए मेरी पतली कमर तक पहुंचते थे। वे बाल इतने घने और चमकदार थे कि हवा में लहराते समय वे एक काले झरने की तरह दिखते और मेरी कमर की पतली आकृति को और भी आकर्षक बना देते। मेरी भरी हुई उभरी हुई छातियां हर सांस के साथ हल्के से ऊपर नीचे होती रहती थीं।

वे छातियां इतनी भरी हुई और दृढ़ थीं कि हर सांस के साथ उनका हल्का उछाल मेरे ब्लाउज को तान देता और उनकी गोलाई स्पष्ट रूप से दिखाई देती। मेरे गोल मटोल नितंब और पतली कमर की आकर्षक आकृति लोगों को बार बार अपनी ओर खींचती थी। जब मैं चलती तो मेरे नितंब हल्के से हिलते और वह आकृति लोगों की नजरों को खींच लेती। मेरी बड़ी आंखें और गुलाबी होंठ मेरी सेक्सी छवि को और ज्यादा निखारते थे। मेरी आंखें इतनी बड़ी और आकर्षक थीं कि उनमें देखने वाला किसी भी इंसान का मन मोह लेतीं और मेरे गुलाबी होंठ नरम और मोटे थे जो किसी को भी चुम्बन की ललक दिला देते। इसी जवानी की गरमाहट और अनुभवहीन उम्र का पूरा फायदा उठाकर मेरे फूफा जी ने मेरी नाजुक देह को अपनी इच्छाओं का शिकार बना लिया था।

और मैं सौ प्रतिशत तो सही नहीं हूं पर हां मुझे ऐसा लगता है कि मुझे चुदवाने में मेरी मां का भी हाथ है। मैं अंदर से इस बात को महसूस करती थी कि मेरी मां ने भी इस पूरे मामले में कुछ न कुछ भूमिका निभाई है। उनके व्यवहार और नजरों में कुछ ऐसा था जो मुझे संदेह में डाल देता। क्योंकि मैंने अपनी मां को भी फूफा जी से चुदते देखा है। वह दृश्य मेरे मन में बार बार घूमता रहता और मुझे हैरानी होती कि मां इतनी सहज कैसे हो गईं।

आज मैं पूरी कहानी आप सभी दोस्तों के साथ शेयर करने वाली हूं। मैं इस कहानी को विस्तार से बताने वाली हूं ताकि आप सब मेरी जिंदगी के उन पलों को महसूस कर सकें। मैं बिहार की रहने वाली हूं। मेरे पापा मुंबई में काम करते हैं। गांव में सिर्फ मैं और मेरी मां दोनों ही रहते थे। वहां सुबह की ठंडी हवा खेतों की ताजी महक लेकर आती थी। वह हवा मेरी त्वचा पर ठंडक का एहसास कराती और खेतों की मिट्टी की खुशबू मेरे नथुनों में भर जाती। शाम को दूर से गायों की आवाज और चिड़ियों की चहचहाहट घर के आंगन तक पहुंच जाती थी। गायों की मूक आवाजें शांति का संदेश देतीं और चिड़ियों की चहचहाहट जैसे संगीत की तरह गूंजती।

मेरे पापा ज्यादा पढ़े लिखे नहीं हैं पर मेरी मां ज्यादा पढ़ी लिखी हैं। मां की पढ़ाई का ज्ञान उन्हें घर की जिम्मेदारियों में भी मदद करता था। इस वजह से वह ऐसा सोचते हैं कि मेरी बेटी पढ़ लिखकर कुछ अच्छा इंसान बनेगी। वे हमेशा मेरी तरफ से बहुत आशा रखती थीं। इस वजह से वह मुझे पढ़ाना चाहते हैं। वे हर रोज मेरे साथ बैठकर किताबें खोलती थीं ताकि मैं अपनी जिंदगी को बेहतर बना सकूं। उनकी आवाज में धैर्य और प्यार होता जो मुझे प्रेरित करता।

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जब मैं ट्वेल्थ में अच्छा नंबर लाई तो घर में बात हुई कि कशिश को कहां पढ़ाया जाए। पापा बोले कि तुम दोनों की जो मर्जी है वह करो क्योंकि मुझे ज्यादा पता नहीं है। पैसे मैं तुम्हें दे दूंगा। तुम जहां एडमिशन कराना है वह करवा लो। उनकी बातों में विश्वास था कि मां सही फैसला लेंगी।

मेरे फूफा जी दिल्ली में रहते हैं। उनका एक बेटा है जो हॉस्टल में रहता है। फूफा जी और फुआ दोनों दिल्ली में ही रहते हैं। चार कमरे का फ्लैट है जहां पर दो आदमी ही रहते हैं। वह फ्लैट आधुनिक सुविधाओं से भरा था। खूब पैसे कमाते हैं। मेरी फुआ एयर होस्टेस है और फूफा जी का शेयर बाजार का काम है। पैसा बहुत कमाते हैं और बहुत ऐश करते हैं। उनकी जिंदगी लग्जरी से भरी थी।

मेरी मम्मी ने फूफा जी को फोन किया और उन्हें बताया कि कशिश का रिजल्ट निकल गया है। अच्छा नंबर लाई है। यहां पढ़ाई का कोई स्कोप नहीं है। इस वजह से आप बताएं कि मैं क्या करूं। मम्मी की आवाज में उत्साह था। मेरी मम्मी फूफा जी को पहले से पसंद करती थीं और फूफा जी भी मम्मी को। फूफा जी तुरंत बोले काम करो दिल्ली ही आ जाओ। यहां पर एडमिशन करवा देंगे। जो करने का होगा उसकी तैयारी करेगी। उनकी बातों में जल्दी और उत्साह था।

मम्मी ने सारी बातें मुझे और पापा को बताईं। पापा हां बोल दिए और मुझे भी लगता था कि दिल्ली जाकर पढ़ाई करूंगी और खूब मजे करूंगी। राजधानी में रहूंगी इससे बढ़िया और क्या हो सकता है। मां बेटी दोनों दिल्ली आ गए। फूफा जी ने मेरा एडमिशन एक इंजीनियरिंग कॉलेज में करवा दिया फर्स्ट ईयर में। मेरा कॉलेज नोएडा में है जहां आधुनिक इमारतें चमकती थीं और हर क्लासरूम में एयर कंडीशनर की ठंडी हवा बहती रहती थी। वह हवा क्लास में ठंडक का एहसास कराती।

मेरी फुआ एक सप्ताह के लिए विदेश चली जाती है। तो फूफा जी और मम्मी को मौका मिल गया अकेले रहने का। वे मुझे सुबह जल्दी कॉलेज भेज देते थे और फिर दोनों पूरे दिन घर में बंद कमरों में रंगरेलियां मनाते थे। क्योंकि जब मैं कॉलेज से वापस आती थी तो मां का चेहरा देखकर ही लगता था कि आज भी कुछ खास हुआ है। उनका चेहरा लालिमा लिए हुए होता था। उनकी आंखें थकी हुई लेकिन संतुष्ट दिखती थीं। हमेशा उनके बाल बिखरे हुए रहते थे जैसे किसी ने उन्हें घंटों तक खींचा हो और बार बार उलझाया हो। कई बार वह बिना ब्रा के रहती थीं और उनकी भरी हुई छातियां नाइट सूट के नीचे स्पष्ट रूप से उभरी हुई दिखती थीं। इस सब से तो समझ आ ही रहा था कि घर में कुछ न कुछ जरूर चलता है।

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एक दिन मैंने फूफा जी के बेडरूम में स्पाई कैमरा लगा दिया। शाम को कॉलेज से आई तो मां को फिर मैंने उस दिन देखा वह बिना ब्रा के ही थी। नाइट सूट पहन रखा था जो उनके शरीर से चिपका हुआ था। रात होने का इंतजार किया। फूफा जी अपने कमरे में सो गए और मम्मी मेरे साथ सोती हैं। जब उनको नींद आ गई तो मैंने वह कैमरा निकाला अपने लैपटॉप में कनेक्ट किया और देखने लगी। मेरे होश उड़ गए। फूफा जी और मेरी मम्मी दोनों दिन भर चुदाई करते थे।

मैंने वीडियो में देखा कि सुबह से ही फूफा जी ने मम्मी को बेड पर धकेल दिया था। वे दोनों पूरी तरह नंगे थे। फूफा जी का मोटा दस इंच लंबा लंड सख्त होकर खड़ा था और मम्मी की चूत से पारदर्शी रस टपक रहा था। फूफा जी ने पहले मम्मी को घुटनों के बल घोड़ी बनाकर पीछे से चोद रहे थे। उन्होंने मम्मी को बेड पर मोड़ा और उनके घुटनों को मोड़कर उन्हें घोड़ी की मुद्रा में रखा। फूफा जी के हाथ मम्मी की कमर को मजबूती से पकड़े हुए थे। उन्होंने अपना मोटा लंड मम्मी की चूत के मुंह पर रगड़ा और फिर एक जोरदार झटके से अंदर धकेल दिया। हर झटके के साथ मम्मी की गांड हिल रही थी।

लंड के अंदर जाने पर मम्मी की चूत की दीवारें फैल रही थीं और पारदर्शी रस उनके लंड को चिकना बना रहा था। फूफा जी के हाथ मम्मी की कमर पकड़े हुए थे और वे तेज तेज धक्के दे रहे थे जिससे मम्मी की चूत का रस उनके लंड पर चमक रहा था। हर धक्के पर मम्मी के मुंह से कराहने की आवाजें निकल रही थीं जैसे आह उफ्फ की ध्वनि कमरे में गूंज रही हो। उनके शरीर पसीने से भीग रहे थे और चूत से निकलने वाला रस लंड के साथ मिलकर चिपचिपी आवाज पैदा कर रहा था।

फिर उन्होंने पोजिशन बदली और मम्मी को अपनी गोद में बिठाकर ऊपर नीचे चढ़ाने लगे। मम्मी की छातियां उनके मुंह के पास थीं और फूफा जी उन्हें जोर जोर से चूस रहे थे। उन्होंने मम्मी को उठाकर अपनी गोद में बिठाया और अपना लंड फिर से चूत में घुसा दिया। मम्मी अब ऊपर नीचे हिल रही थीं और उनकी छातियां फूफा जी के चेहरे के सामने उछल रही थीं। फूफा जी ने एक स्तन को मुंह में लिया और जोर से चूसा जिसमें उनकी जीभ निप्पल को घेर रही थी। मम्मी की चूत फूफा जी के मोटे लंड को पूरी तरह निगल रही थी। उनके शरीर पसीने से भीगे हुए थे और कमरे में उनकी सांसों की तेज आवाज गूंज रही थी। दिन भर मुझे कॉलेज भेजकर यहां लंड और चूत का खेल चलता रहता था। वीडियो में हर घंटे अलग अलग पोजिशन दिख रही थी।

कभी मिशनरी में मम्मी की टांगें फूफा जी के कंधों पर थीं और फूफा जी का लंड पूरी गहराई तक अंदर बाहर हो रहा था।

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मम्मी की दोनों टांगें ऊंची उठाकर फूफा जी के चौड़े मजबूत कंधों पर टिका दी गई थीं। इससे उनकी कमर पूरी तरह ऊपर को उठ गई थी और उनकी चूत पूरी तरह खुली हुई अवस्था में फैली हुई थी। फूफा जी उनके ऊपर पूरी तरह झुके हुए थे। उनका मोटा दस इंच लंबा सख्त लंड मम्मी की चूत के अंदर पूरी गहराई तक घुस रहा था।

हर जोरदार झटके में लंड का मोटा सिरा मम्मी की चूत की सबसे अंदर तक की दीवारों को फैलाता हुआ गर्भाशय तक टकरा रहा था। बाहर निकलते समय लंड पर मम्मी की चूत का गाढ़ा पारदर्शी रस चिपका हुआ दिख रहा था जो हर बार धक्के के साथ चिकचिकाती आवाज पैदा कर रहा था। मम्मी के मुंह से लगातार तेज कराहें निकल रही थीं आह्ह्ह… उफ्फ्फ… हां और जोर से चोदो… की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। उनके चेहरे पर मिश्रित दर्द और आनंद की लालिमा छाई हुई थी।

आंखें बंद और होंठ कांपते हुए थे। फूफा जी के पसीने से तरबतर शरीर मम्मी के नंगे शरीर से बार बार टकरा रहे थे। उनकी भारी सांसें मम्मी के कानों में गूंज रही थीं। मम्मी की भरी हुई छातियां हर धक्के पर जोर जोर से ऊपर नीचे उछल रही थीं और उनके निप्पल सख्त होकर खड़े थे।

कभी मम्मी फूफा जी के लंड को मुंह में लेकर चूस रही थीं और उनके गले तक ले जा रही थीं। मम्मी घुटनों के बल फर्श पर बैठी हुई थीं और फूफा जी उनके सामने खड़े थे। उन्होंने अपना मुंह खोलकर फूफा जी के लंड के मोटे गुलाबी सिरे को अपनी गीली जीभ से धीरे धीरे चाटा। फिर अचानक पूरा लंड मुंह में ले लिया।

उनके गाल अंदर की ओर धंस गए थे और गला फूल रहा था जब लंड गले की गहराई तक चला गया। मम्मी ने सिर ऊपर नीचे हिलाना शुरू किया और लंड को पूरी ताकत से चूसने लगीं। उनकी जीभ लंड की नसों पर घूम रही थी और थूक की मोटी परत लंड को चमकदार बना रही थी। फूफा जी का लंड मम्मी के मुंह से रस और थूक से चमक रहा था।

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लंड पर मम्मी का गाढ़ा थूक रिस रिस कर लंड की पूरी लंबाई पर फैल रहा था और हर बार मुंह से बाहर निकलते समय लंबी लार की डोरियां बन रही थीं जो उनके ठुड्डी तक लटक रही थीं। फूफा जी के हाथ मम्मी के बालों में उलझे हुए थे और वे हल्के से सिर दबा रहे थे जिससे लंड और गहराई तक चला जा रहा था।

कैमरा देखकर मेरा मन भी बहक गया। फूफा जी का लंड करीब 10 इंच का है। जब मम्मी चुद रही थी फूफा जी का लंड वीडियो में देखते ही मेरी चूत भी गीली हो गई। मेरी छोटी सी चूत में गर्माहट फैल गई और मेरी पैंटी पूरी तरह भीग गई।

मेरी सांसें तेज हो गईं। मेरी छातियां ऊपर नीचे होने लगीं। और अब मन ही मन फूफा जी का मन करने लगा था।

एक दिन की बात है मेरे कॉलेज की छुट्टी थी। और मम्मी पड़ोस में ही एक सत्यनारायण स्वामी की कथा हो रही थी। वहां गई थी। मौका मिल गया मुझे।

मैंने तुरंत फूफा जी को बोल दिया कि मेरे पास वीडियो कैमरा है। मैंने आपके कमरे में लगाया था। आप और मेरी मम्मी क्या क्या कर रहे थे वह सारे उसमें रिकॉर्ड हैं। फूफा जी के होश उड़ गए। मैं उन्हें ब्लैकमेल करने लगी।

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मैं बोली कि यह बात मैं अपने पापा को भी बताऊंगी और बुआ को भी बताऊंगी। फूफा जी बोले यह सब बात तो मत बताओ। तुम्हारी लाइफ का सवाल है। तुम्हें यहां से जाना पड़ जाएगा और तुम्हारे पापा कॉलेज की फीस भी नहीं भर रहे हैं।

मैं ही तुम्हारी फीस भर रहा हूं और तुम लोगों का पालन पोषण कर रहा हूं। यह बात मुझे नहीं पता थी कि सारा खर्च मेरे फूफा उठा रहे हैं। मैंने फूफा को सॉरी बोला और उनको गले लगा लिया। मैं पहले से ही उनके लंड को चूसना चाह रही थी।

उन्होंने भी मुझे गले लगाया और वहीं से नई शुरुआत कर दी अपने रिश्ते की। मैंने कहा आपको मैं भी पसंद करती हूं। उम्र में बहुत छोटी हूं पर आपका स्टाइल देखकर मैं फिदा हो गई हूं। फूफा जी तुरंत मुझे उठा लिए अपने गोद में और बोले मैं इंसान ही ऐसा कोई भी दीवानी हो जाती है।

तुम्हारी मम्मी भी मेरे पर मरती हैं अब तुम भी मेरे ऊपर फिदा हो रही हो। फूफा जी थोड़ा गुरुर में आ गए थे। पर मैं और मम्मी दोनों लूट रहे थे उनको। मैं मन ही मन सोचने लगी मुझे भी फायदा उठाना है।

इस वजह से जो वह कह रहे हैं वह सब मान लेते हैं। उन्होंने मेरे होंठ पर एक किस दे दिया और वहीं से शुरुआत हो गई। उन्होंने मेरे कपड़े उतार दिए। मेरे दोनों चुचियों को दबाने लगे।

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मैं भी उनको चूमने लगी। उन्होंने मुझे पलंग पर लेटा कर मेरे जवान चूत को खूब चाटा। मैं भी उनके मोटे लंड को खूब चूसी। उन्होंने मेरे अंग अंग को चुम्मा और अपना मोटा लंड मेरे मुंह में खूब चटवाया।

उन्होंने तकिया मेरे गांड के नीचे लगाकर मेरे दोनों पैरों को अलग अलग किया। और मोटा लंड मेरी चूत के छेद पर रखकर तीन चार पांच झटके में अंदर घुसा दिया। मेरे दोनों चुचियों को मसलते हुए मुझे चोदने लगे।

मेरे होंठ को चुम्मा लेते। मेरे निप्पल को दांतों से काटते और मेरी छोटे छेद वाली चूत में अपना मोटा लंड अंदर बाहर कर रहे थे। मेरे अंग अंग तोड़ दिए। मेरे निप्पल को इतना ज्यादा अपने मुंह से पिया कि मेरा निप्पल दर्द करने लगा था।

मेरे होंठ इतने चूसे कि मेरे होंठ दर्द करने लगे थे। मुझे शौक था फूफा जी का मोटा लंड चूसने का। उन्होंने मेरी चूत फाड़ दी। दो घंटे तक मेरी चुदाई करके मेरी काम वासना को शांत कर दिया।

जब मम्मी का फोन आया कि मैं पंद्रह मिनट में आ रही हूं तो जल्दी जल्दी हम दोनों ने कपड़े पहने और अपने अपने कमरे में चले गए। उस दिन के बाद से तो काफी कुछ बदल गया। जब भी मम्मी बाथरूम जाती है नहाने के लिए फूफा जी मेरा जींस खोल कर पीछे से ही अपना लंड मेरी चूत में डाल देते हैं।

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जब मैं कॉलेज जाती हूं तो मेरी मम्मी फूफा जी को खुश करते हैं। और जब मुझे मौका मिलता है तो मैं फूफा जी के साथ सेक्स कर लेती हूं। मेरी जिंदगी बहुत बेहतरीन चल रही है। मुझे पंद्रह हजार रुपये जेब खर्च मिलते हैं।

पढ़ाई का खर्चा भी अलग से मिलता है। और मुझे भी करने को मिलता है। इससे अच्छी जिंदगी क्या हो सकती है। बस जब फुआ आती है तब मैं मां बेटी सती सावित्री हो जाती हूं।

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Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।


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