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लंड पकड़ा है तो साथ निभाना

Jiju sali chudai sex story, Desi anal chudai sex story, Young college girl fucked sex story: जब से मुझे जवानी आई है, तब से मन बार-बार चुदने को बेचैन होने लगा है। रातों में रंगीन-रंगीन सपने आने लगे हैं, जिसमें कोई मर्द मुझे ऊपर चढ़कर जोर-जोर से चोदता है। हाय राम, मेरी चूचियाँ मसल-मसल कर लाल कर दे, मेरे नरम-नरम होंठों को चूस-चूस कर सूजा दे। जैसे ही मैं टॉयलेट जाती हूँ, मूत्र के साथ-साथ वहाँ मीठी-मीठी खुजली होने लगती है। फिर तो लंड की तलब इतनी तेज हो जाती है कि बस किसी मोटे-मोटे लंड को अपनी चूत में घुसाने की इच्छा सताने लगती है।

कभी-कभी तो गांड चुदवाने का भी मन करता है। फिर सोचती हूँ, हाय रे… ये क्या सोच रही हूँ मैं। शर्म से पूरा शरीर पानी-पानी हो जाता है। रात को अकेले बिस्तर पर लेटकर ऐसे-ऐसे ख्याल आते हैं कि नींद ही नहीं आती। हाथ खुद-ब-खुद नीचे चला जाता है और मैं चूत मसल-मसल कर झड़ जाती हूँ।

अब मैं कॉलेज में पढ़ रही हूँ। मेरे शरीर में अब अच्छे उभार आ चुके हैं। चूचियाँ मौसमी के फल जैसी गोल-मटोल हो गई हैं, निप्पल हल्के गुलाबी और संवेदनशील। सहेलियाँ मस्ती में कभी-कभी इन्हें दबा देती हैं और हंसती हैं, “अरे तनिषा, ये तो अभी और बड़े होंगे… बड़े होने दो, फिर दबाने में कितना मजा आएगा!”

पहले तो गुस्सा आता था, लेकिन अब उनके हाथ लगते ही दिल में मीठी सी टीस उठती है। मन करता है और जोर से दबवाऊँ। सपनों में लंड दिखने लगे हैं। कोई बहुत मोटा, कोई लंबा-सा, कोई काला-सा तो कोई गोरा चमकदार। मैं उन्हें हाथ में पकड़ती हूँ, दबाती हूँ, जीभ से चाटती हूँ। उफ़… कितना अच्छा लगता है। काश कोई असली जानदार लंड मेरी चूत में पूरा घुस जाए, मुझे निहाल कर दे।

उसी समय मेरे जीजा और दीदी घर आए हुए थे। दीदी को देखकर मैं हैरान रह गई। दीदी की चूचियाँ अब बहुत बड़ी और भरी-भरी हो गई थीं। कमर पतली, चूतड़ गोल-मटोल और चाल में लचक। गर्दन लंबी और सुंदर। मैंने अपनी चूचियाँ देखीं, मेरी तो अभी छोटी-छोटी हैं। मन में ख्याल आया, जरूर जीजा ने दीदी को खूब चोदा होगा। लंड को चूत में घुसाकर जोर-जोर से पेला होगा। दीदी कितना मजा लेती होगी। इस्स्स्स… सोचते ही मेरी चूत में गर्माहट फैल गई।

जीजा बहुत अच्छे लगते हैं। बातें प्यार से करते हैं, आँखों में शरारत रहती है। क्या वो सिर्फ़ दीदी को चोदते हैं? क्या मुझे भी चोद सकते हैं? मेरा कमरा दीदी के कमरे के बिल्कुल पास था। रात को मैं चुपके से उनकी बातें सुनने की कोशिश करती। ज्यादातर तो दीदी की सिसकारियाँ सुनाई देतीं, “आह्ह… ओह्ह… जीजा… और जोर से…” कभी हल्की चीखें भी। सुबह दीदी चेहरा चमकता हुआ निकलती। मेरे मन में चुदने की इच्छा और तेज हो गई।

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एक दिन बगीचे में जीजा अखबार पढ़ रहे थे। दीदी अंदर काम में व्यस्त थी। मैं हिम्मत करके पास गई, “जीजा, एक बात कहूँ?”

“हाँ तनिषा, बोलो ना…”

“दीदी को रात को इतना मत मारो।”

“क्यों? दीदी ने तुमसे कुछ कहा क्या?”

“नहीं… लेकिन उनकी चीखें सुनाई देती हैं।”

जीजा मुस्कुराए, आँखों में शरारत भरी, “अरे जब मजा आता है ना, तभी तो चिल्लाती है।”

“मारने से मजा आता है क्या?”

जीजा ने मेरी तरफ देखा, फिर धीरे से बोले, “तनिषा जी, एक बार मरवा कर तो देखो।”

मेरा दिल धक से रह गया। चेहरा लाल हो गया। मैं तिरछी नजरों से देखकर शरमा गई। जीजा ने मुझे आँख मारी। मैं भागकर अंदर चली गई। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। हाय… जीजा ने मेरे मन की बात पढ़ ली क्या?

रात को करीब ग्यारह बजे दीदी की आवाजें आने लगीं। “आह्ह… जीजा… ओह्ह… हाँ… और जोर से…” मेरी नींद उड़ गई। मैं चुपके से उनके कमरे के दरवाजे पर गई। दरार से देखा तो जीजा दीदी की बड़ी-बड़ी चूचियाँ मसल रहे थे। दीदी सिसकार रही थी। फिर जीजा ने दीदी को घोड़ी बनाया और अपना मोटा लंड दीदी की गांड में घुसा दिया। धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगे। दीदी की चीखें और सिसकारियाँ बढ़ गईं।

मैं स्तब्ध रह गई। जीजा का लंड… हाय… इतना मोटा और लंबा… लोहे का डंडा सा। मेरी चूत गीली हो गई। जांघों से पानी टपकने लगा। मैं चुपके से अपनी चूत पर हाथ फेरने लगी। देखते-देखते मैं भी झड़ गई।

जब दोनों खत्म हुए तो मैं अपने कमरे में लौटी। नींद कहाँ थी। सारा दृश्य आँखों के सामने घूम रहा था। मेरी चूत में तेज खुजली मची हुई थी। मैंने एक उंगली गांड के छेद में डाली, तो मीठा आनंद हुआ। दूसरी उंगली से चूत मसलते-मसलते जोर से झड़ गई। “आह्ह… जीजा…”

अब जीजा मुझे फिल्मी हीरो लगने लगे थे। दिन में भी दो-तीन बार जीजा के नाम से चूत घिसकर पानी निकाल देती। जीजा भी मेरी हालत समझ गए थे। उनकी नजरें मुझे देखकर शरारत भरी हो जातीं। मैं भी उन्हें देखकर शरमा जाती, लेकिन मन में चुदने की इच्छा बढ़ती जाती।

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एक दिन मम्मी दीदी को लेकर चाचा के घर गईं। शाम तक लौटेंगी। जीजा घर पर अकेले थे। मुझे लगा आज कुछ जरूर होगा। घर वाले जाते ही मेरा दिल तेज धड़कने लगा। मैंने जल्दी से कपड़े बदले। ब्रा और पैंटी उतार दी। सिर्फ एक पतली सी शमीज पहनी और बिस्तर पर लेट गई। जीजा का लंड पकड़ने, चूसने, चूत में घुसवाने के ख्यालों में आँखें बंद हो गईं।

तभी दरवाजा धीरे से खुला। जीजा अंदर आए। मैं चौंककर उठने लगी, “हाय जीजा… आप…?”

चादर खींचने की कोशिश की, लेकिन शमीज छोटी थी। मेरी चूचियाँ और जांघें झलक गईं।

जीजा मुस्कुराए, “लेटी रहो तनिषा… कम कपड़ों में कितनी हसीन लग रही हो।”

उनकी आवाज में नशा था। मैं शरमाई, लेकिन मन खुश हो गया। “आओ ना जीजा… यहीं बैठो।”

जीजा पास आए। “उस दिन दीदी के बारे में क्या कह रही थी?”

“वो रात को सी-सी कर रही थी… चीख रही थी… बस शिकायत थी।”

“मजा आ रहा था इसलिए सी रही थी।”

“मारने से मजा आता है क्या जीजा?”

“तुम भी एक बार मरवा कर देख लो तनिषा जी।”

मैं हंस पड़ी, लेकिन सांसें तेज हो गईं। “क्या मरवाऊँ…?”

जीजा मेरे और करीब आए। “घर की बात घर में ही रहेगी।”

“हाँ जीजा… घर में…” मैं नजरें झुका ली।

“अपने नींबू तो दिखा दो।”

मैं शरमा गई। जीजा ने हाथ बढ़ाया और मेरी चूचियाँ सहलाने लगे। निप्पल सख्त हो गए। “अरे… जीजा… क्या कर रहे हो… मत करो… आह्ह…”

मैं हाथ हटाने की कोशिश करती रही, लेकिन वो दबाते रहे। मेरी चूत तर हो गई। मैं करवट लेकर पैर सिमटाए लेट गई। शमीज ऊपर सरक गई। मेरे नंगे चूतड़ और गुलाबी गांड का छेद दिखने लगा। जीजा ने झुककर जीभ से गांड के छेद को चाट लिया।

“आह्ह… जीजा… हाय… क्या कर रहे हो…” मैं सिसक उठी।

उनकी गरम जीभ और सांसें गांड पर लग रही थीं। मैं झूमने लगी। जीजा ने मेरी चूचियाँ जोर से दबाईं। फिर मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए। मैं मदहोश हो गई। जीजा ने मेरे निचले होंठ को चूसा, जीभ अंदर डाली।

“जीजा… बस… आह्ह…”

मैं उनके नीचे दब गई। जीजा पूरी तरह ऊपर चढ़ आए। मैं कसमसाई। जीजा ने अपना पजामा नीचे किया। उनका मोटा, गोरा लंड बाहर आया। सुपाड़ा लाल और चमकदार। नसें उभरी हुईं। मैंने पहली बार किसी मर्द का लंड देखा।

“लंड लोगी तनिषा?”

मैं शरमाई, लेकिन बोली, “हाँ… लो ना…”

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“चूत दोगी?”

“हाँ जीजा… दीदी की तरह…”

जीजा ने मेरी टांगें चौड़ी कीं। लंड मेरी गीली चूत पर रगड़ा। फिर धीरे से सुपाड़ा अंदर डाला। मेरी तंग चूत खुलने लगी। “ओह्ह… जीजा… धीरे… बहुत मोटा है… आह्ह…”

जीजा ने होंठ चूसते हुए जोर से धक्का मारा। पूरा लंड अंदर चला गया। मैं चीख पड़ी, “आआह्ह्ह… जीजा… मर गई…”

फिर जीजा धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगे। थप-थप… थप-थप… आवाज आने लगी। मैं चूत उछाल-उछाल कर चुदवा रही थी। “ओह्ह… जीजा… जोर से… आह्ह… बहुत मजा आ रहा है… चोदो मुझे…”

मैं तेजी से झड़ गई। चूत कस-कस कर लंड को दबाने लगी। जीजा रुके, फिर मुझे पेट के बल लिटाया। मेरे चूतड़ थपथपाए। गांड फैलाई। लंड गांड के छेद पर रखा। धीरे से दबाया।

“आह्ह… जीजा… गांड में… ओह्ह… दर्द हो रहा है… लेकिन रुकना मत…”

पहले तेज जलन हुई, फिर मीठी कसक। जीजा ने पूरा लंड अंदर डाल दिया। जोर-जोर से गांड मारने लगे। “ले साली… चिकनी साली… गांड मारकर फालूदा बना दूँगा…”

“हाँ… मारो जीजा… जोर से… आह्ह… मीठी गालियाँ अच्छी लग रही हैं… चोदो मुझे…”

जीजा ने हुंकार भरी। लंड निकाला। मैंने हाथ में पकड़ा और तेजी से मुठ मारने लगी। जोर की धार निकली। मेरी चूचियों, पेट और मुंह पर गरम-गरम वीर्य बरसा। “अरे… छिः… पूरा गीला कर दिया…”

“चखकर देखो तनिषा…”

मैंने उंगली से उठाकर चखा। फिर बाथरूम गई। जीजा पीछे आए। मुझे गीली बॉडी पर दबोचा। शावर के नीचे मुझे फिर से चोदा। एक टांग ऊँची करके चूत में लंड घुसाया। “आह्ह… फिर से… जीजा… मजा आ गया…”

शाम तक जीजा ने मुझे कई बार चोदा। चूत चुसवाई, लंड चूसवाया, गांड मरवाई। उनका रस मेरे मुंह में, चूत में, गांड में भरा। महीनों तक ये सिलसिला चलता रहा। फिर धीरे-धीरे कम हो गया। लेकिन जवानी का वो पहला नशा… कभी नहीं भूलता। अब देखते हैं मेरे नसीब में आगे क्या लिखा है।

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