गुंडों ने बहन को तैयार किया भाई ने चोदा

Kunwari behan chudai sex story, Gundo ne behan garam kiya sex story: मेरा नाम कौस्तुभ है मेरी बहन का नाम अंशिका है वो 29 साल की है अंशिका देखने मैं बहुत मस्त लगती है उसे देख के हर किसी के मन मैं उसे बस चोदने का ख्यल ही आता होगा. अंशिका की ब्रा का साईज़ 32 है उसकी नेवल बहुत सुन्दर है उसके बूबस उसकी चुत सब बहुत मस्त है. 

उसके नंगे जिस्म देख के ऐसा लगता है जैसे कोई गदराई बरसों की प्यासी जवानी है जो मचल रही है, और ये सब मैं कैसे जानता हु ये ही बतना चाहता हु. मै और अंशिका दोनों अकेले दिल्ली मैं रेहते हैं मैं जॉब करता हु वो कोलेज मैं पढती है और वही होस्टेल मैं रेहती है, वीकेंडस पे आती रेहती है मेरे पास.

ये पिछले महीने दिवाली से 2 हफ़्ते पहले की बात है अंशिका वीकेंडस पे आई हुई थी, रात के 9:30 हो रहे होंगे मैं और अंशिका दोनों सब टीवी पे लेफ्ट राइट लेफ्ट देख रहे दी. तभी दरवाजे पे दस्तक हुई और मे मैने जैसे ही दरवाजा खोला मैं देखा कुछ लोग बाहर खड़े थे सारे ६ फीट के आस पास के थे शक्ल से क्रिमिनल्स लग रहे थे.

उन्होने मुझे घर के अंदर धक्का दे दिया और अंदर घुस गए और दरवाजा लॉक कर लिया और कहा शोर मचाया तो गोली मार देंगे और अपनी पिस्टोल मेरे सर पे लगा दी तभी अंशिका अंदर के रूम से बहर आ गयी उनकी आवजों को सुन के.

उन्होने अंशिका को उपर से नीचे तक घूर के देखा फिर उन मैं से एक ने कहा साला रंडी चोद रहा था, फिर एक ने कहा साले आज कल के लौंडे यहाँ पढने आते हैं पर करते हैं रंडी बाज़ी फिर उन्होने मुझे कहा क्या बे मादरचोद रंडी बुलाता है घर मैं हैं और वो मुझे लेके अंदर आ गये और पहले वाले रूम मैं बैठ गए.

असल मे अंशिका ने उस वक्त व्हाइट कलर की स्कर्ट और पिंक टॉप पहनी थी इस वजह से उसकी गंड बहुत बड़ी लग रही थी और अंशिका के लिप्स देखने मैं नॉर्मली ऐसे लगते हैं जैसे की पता नहीं कितना लंड चूस्ती हो पर मे जानता हु की वो अभी तक वर्जिन है और बहुत ही शरीफ और सीधी है.

अब मुझे पता चला के वो कुल 6 लोग थे, अंशिका उन्हें देख के बहुत डरी हुई लग रही थी तभी उनमे से एक आगे बढ़ा और अंशिका के पास ख़ड़ा होके अंशिका को छूने लगा और कहने लगा साली कितने मे चुद रही थी तू? नाम क्या है तेरा? अंशिका ने डर से धीरे से कहा- अंशिका.

फिर उनमे से एक ने मुझसे पूछा- कौन है रंडी? कहाँ से लाया?

मैने कहा मेरी छोटी बहन है.

इस पे सारे हँसेने लगे कहा वाह क्या मस्त माल है तेरी बहन साली की गांड देख के तो लगता है बहुत मराती है. फिर सब हंसने लगे. अंशिका के डर के मारे आंसू निकलने लगे. तभी एक ने कहा साली जा खड़ी क्या है हमारे खाने के लिये कुछ ला.

और अंशिका किचन मैं चली गयी कुछ लाने, थोड़ी देर मे कुछ खाने को लेके वो वापिस आ गयी और जैसे ही झुक के प्लेट टेबल पर रखने लगी उसके पीछे खड़े एक आदमी ने उसकी स्कर्ट को पूरा उपर उठा के कहा साली की गांड तो देखो क्या गदराई हुई है.

अंशिका इस हरक़त पे चिल्ला पड़ी बोली-ये क्या बातमीजी है?

तभी उनमे से एक ने अंशिका के बाल को पकड़ के खींचा अंशिका दर्द से कराहने लगी.

तब उनमैं से एक बोला साली तुझे तो अब हम बतायेंगे की बातमीजी क्या होती है.

मैने चिल्ला के कहा-मेरी बहन को छोड़ दो.

तब उन्होने कहा- साले बेहन के लोड़े तेरी तो, और वहीं पड़े चादर को उठा के मेरे हाथ पैर बांध दिये. और कहा देख आज तेरे सामने तेरी बहने की ब्लू फिल्म बनायेगे इसे अपनी रंडी बनायेंगे. और उन्होने अंशिका को पकड़ लिया और कहा साली चल अपने सारे कपड़े उतर नहीं तो तेरे और तेरे भाई दोनो को गोली मार देंगे.

अंशिका डर गयी उसने उनसे बहुत कहा हमे छोड़ दो पर वो नहीं माने अंत मैं अंशिका ने रोते हुये अपने कपड़े उतारने शुरू किये और उनमे से एक ने अपने पॉकेट से फोन निकाल लिया और अंशिका की फिल्म बनाने लगा, पहले अंशिका ने अपना टॉप उतारा. अंशिका की चूचियाँ उसके ब्रा से झलकने लगी उसकी नेवेल पूरी मस्त सी देखने लगी, फिर उन्होने कहा चल अब स्कर्ट उतार.

अंशिका बोली- प्लीज़ ये नहीं. तब उनमे से एक ने जबरदस्ती अंशिका की स्कर्ट उतर दी.

मैने पहली बार अंशिका को पॅंटी और ब्रा मैं इस तरह देखा था. उसको इस तरह देख के पता नहीं क्यूं मुझे अच्छा भी लगने लगा, अब बारी थी पॅंटी उतारने की अंशिका ने धीरे से पॅंटी उतार दी, हे भगवान मैं आज अपनी सगी बहन की झाटों भरी चूत देख रहा था और वो अपनी चूत को अपनी मोटे मोटे जाँघों के बीच छुपा रही थी.

अब बारी थी ब्रा की, लेकिन इसके पहले ही उन लोगों ने उसकी ब्रा खींच के फाड़ दी और अंशिका के दोनो चूचियाँ आजाद होके उनके सामने झूल गयी, फिर क्या था सारे अंशिका के जिस्म के साथ खेलने लगे और एक फिल्म बनाता रहा.

अंशिका बार बार उन्हे कह रही थी प्लीज़ भगवान के लिये मुझे जाने दो कुछ मत करो ऐसा मत करो मैं बर्बाद हो जौउँगी, पर वो कहाँ सुनने वाले थे. वो तो अंशिका की जिस्म से खेलने मैं लगे थे. फिर उनमे से एक ने कहा भाई साली की चूत चाटते पर साली की झांटे इतनी बड़ी हैं की मज़ा नहीं आयेगा तभी दूसरे ने कहा तो क्या हो गया रंडी की चूत शेव कर देते हैं.

और उसने अपने एक साथी से कहा-जा और जाके रूम से रेज़र दूंढ़ के ला. फिर 10 मिनट मे वो आदमी रेज़र, मग मैं पानी और साबुन लेके आ गया. उन लोगों ने जबरदस्ती अंशिका को बेड पे लिटा दिया और उसकी टांगे पकड़ के खोल दी. अब तो अंशिका चिल्लाने लगी थी और रोने लगी थी.

तभी उनमे से दो ने अंशिका के हाथ पकड़ लिये और दो ने टांगे. पेहले वाले ने अंशिका को जाँघों से पकड़ लिया. अंशिका चिल्ला रही थी इस वजह से जो फिल्म बना रहा था उसने फटाक से अपना पॅंट खोला और अपना मोटा लम्बा लंड निकाल के अंशिका के मुह मे डाल दिया और फिल्म बनाने लगा.

बाकी जो एक था उसने अंशिका की चूत 5 मिनट मे शेव कर दी. अब अंशिका की पूरी चूत चिकनी दिख रही थी. वो उनके सामने बिलकुल नंगी थी. उसकी चूत ऐसी लग रही थी जैसे किसी 16 साल की लड़की की होती है, अंशिका चिल्ला तो नहीं पा रही थी मुह मे लंड होने की वजह से पर उसके मुह से गुऊंन गू गॅप गॅप की आवाज आ रही थी.

अब तो बारी बारी से सारे अंशिका की चूत को चाटने लगे. अब अंशिका को भी मस्ती आने लगी थी क्यूंकि उसके मुह से अब आवाजें आने लगी थी आआआहहह्ह उऊऊन्न आआःह्ह सीईइइस इस तरह काफी देर तक कोई अंशिका से लंड चुसवाता कभी कोई उसकी चूचियाँ दबाता कभी उन्हें चूसता.

और अंशिका ऊ ओई मा मज़ा आगया ऊई ऊई कर रही थी. कह रह थी आअह राजा और चाटो आहह. अभी तक मैने ये सिर्फ सुना था की हर औरत मे एक रंडी छुपी होती है और आज ये मैने अंशिका मे देख लिया की कैसे वो 6 अंजान लोगो के आगे नंगी होके अपनी चूत चटवा रही थी उनके लंड को लॉलीपोप की तरह चूस चूस के मज़े ले रही थी.

अंशिका को ऐसे मस्ती मे बोलते देख मैं समझ नहीं पा रहा था की क्या ये वही मेरी छोटी बहन अंशिका है, पर अंशिका को कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा था. वो ये भी नहीं सोच रही थी की वो अपने बड़े भाइ के सामने उन 6 अजनबियों से अपनी चुत चटवा रही थी और बारी बारी से उनके लंड अपने मुह मे ले रही थी. ये सब काफी देर तक चलता रहा.

उन छहों ने अंशिका को जमीन पर घुटनों के बल बिठा रखा था और वो एक के बाद एक अपने मोटे, नसों से फूले हुए लंड उसके मुंह में ठूंस रहे थे. अंशिका की आंखें लाल हो चुकी थीं, आंसुओं से गीली थीं, लेकिन उसके होंठ अब भी हर लंड को चूसने के लिए फैले हुए थे. एक गुंडे ने उसके बालों को मुट्ठी में जकड़ लिया और उसके सिर को आगे-पीछे करके अपने लंड को उसके गले तक धकेल दिया, जिससे अंशिका के मुंह से घुटघुट की आवाज निकली और लार उसके ठोड़ी से टपकने लगी. दूसरा आदमी उसके पीछे बैठ गया था और अपनी उंगलियों से उसकी चूत की फूली हुई भगनासा को रगड़ रहा था, बीच-बीच में दो उंगलियां अंदर डालकर तेजी से अंदर-बाहर कर रहा था, जिससे अंशिका की चूत से चिकचिक की आवाज आने लगी और उसकी जांघें कांपने लगीं. तीसरा आदमी उसके सामने घुटनों पर बैठकर अपना लंड उसके मुंह से निकालकर उसके गालों पर रगड़ रहा था और फिर उसे फिर से अंदर ठेल रहा था. अंशिका की सांसें तेज हो चुकी थीं, उसके स्तन ऊपर-नीचे उछल रहे थे, निप्पल्स कड़े और लाल हो गए थे, और उसकी चूत से रस टपक-टपककर फर्श पर गिर रहा था. हर बार जब कोई नया लंड उसके मुंह में जाता, वो पहले थोड़ा सा पीछे हटने की कोशिश करती लेकिन फिर खुद ही आगे बढ़कर उसे गले तक ले लेती, जैसे उसकी इच्छा अब पूरी तरह जाग चुकी हो. ये सब लगातार कई मिनट तक चलता रहा, कभी एक साथ दो लंड उसके मुंह के किनारों पर रगड़ते, कभी कोई उसकी चूत को जीभ से चाटता और कभी कोई उसके निप्पल्स को चूसकर काटता, जिससे अंशिका बार-बार कराह उठती और उसकी कमर मचलने लगती.

तभी उनमे से एक उठा और बोला- रानी क्या अपनी चुत मैं हम सबके लंड को लेना पसंद करोगी.

अंशिका ने कहा- आह ओह नहीं… मुझे छोड दो मेरी ज़िंदगी बर्बाद हो जाएगी.

वो चिल्ला रही थी पर वो कमीने उसे चोदना चाहते थे. मैं सच बोलता हूँ वो मेरी बहन थी लेकिन मेरा लंड भी मेरे कच्छे मे पूरा खडा हो गया था समझ नहीं आ रहा था क्या करूं. ये गुंडे अभी मेरी कुँवारी बहन को चोद जायेंगे और मैं कुछ नहीं कर पाऊंगा.

तभी एक गुंडा जो उनका बॉस था बोला- देखो साले को, अपनी बहन की चूत देख कर इसका भी लंड खडा हो गया. साले बहुत मजा आ रहा है अपनी बहन की चूत देख कर, बेटे चिन्ता मत कर तुझे भी दिलवाएंगे इसकी चूत. ये देख कर अंशिका की आखें फटी की फटी रह गयी की उसे इस हलत मैं देख कर मैं उत्तेजित हो रहा हूँ.

मुझे उन पर बहुत गुस्सा आ रहा था, तभी मैने देखा मस्ती मैं एक गुंडे ने अपना पिस्टल बेड पर रख दिया, मैने उसे उठा लिया और उनके बॉस की कनपटी से सटा दिया वो एक दम से डर गया. मैने कहा- छोड दो उसे नहीं तो सालो अभी गोली मार दुंगा.. सब कुछ इतनी जल्दी मैं हुआ वो एकदम से घबरा गए.

अंशिका मेरे पीछे आ गयी. मैने उसे कहा पुलिस को फोन लगाये. वो सब डर के मारे वहाँ से भाग गए. उनके जाने के काफी देर बाद भी अंशिका मुझसे चिपकी हुई थी पूरी नंगी और गरम.. मेरी समझ नहीं आ रह था क्या करूं.. वो रोने लगी तो मैं उसे दिलासा देने लगा.

मैने उसे गले से लगा लिया और उसकी पीठ थपथापने लगा। उसकी कठोर, उभरी हुई चूचियाँ मेरे चौड़े सीने से इस तरह दब रही थीं मानो दो गरम, मुलायम गेंदें मेरी छाती पर रगड़ खा रही हों। हर थपथपाहट के साथ उसके निप्पल मेरे शरीर पर और अधिक सख्त होकर चुभ रहे थे। मेरा लंड पहले से ही पूरी तरह तना हुआ था और नेकर की पतली कपड़े की जाली से बाहर झाँक रहा था, उसकी नोक पर पहले से ही चिपचिपा तरल चमक रहा था। दिमाग पूरी तरह सुन्न पड़ चुका था, सिर्फ़ एक ही विचार बार-बार घूम रहा था — इसे अभी, इसी वक्त, पूरी तरह अपनी बनाना है।

मेरा लंड उसकी जांघों के बीच में फिसलने लगा, उसकी नरम, गर्म त्वचा पर सरकता हुआ उसकी चूत के बिल्कुल पास तक पहुँच रहा था। वो मेरे इस हरकत को महसूस कर रही थी और उसके चेहरे पर असमंजस, शर्म और हल्की-सी उत्तेजना का मिश्रण साफ़ दिख रहा था। उसकी साँसें तेज़ और अनियमित हो गई थीं। मैंने दिलासा देने के बहाने उसे और ज़ोर से अपने सीने से जकड़ लिया, उसकी दोनों बाहों को अपनी पीठ के पीछे लपेटते हुए बोला, “डियर, इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है। ये सिर्फ़ एक हादसा था। ये सब भूल जाओ।”

मेरी आवाज़ में नकली सहानुभूति थी, लेकिन मन में सिर्फ़ एक ही इरादा था — उन गुंडों ने उसकी चूत को पहले ही चाट-चाट कर इतना गरम कर दिया था कि अब उसकी देह पूरी तरह तैयार थी, और मैं इस मौके का पूरा फायदा उठाना चाहता था। वो अब मुझसे पूरी तरह शरमा रही थी। उसने धीरे से अपने कपड़े पहनने के लिए हाथ बढ़ाया, लेकिन मैंने तुरंत उसके दोनों कलाई पकड़ लीं और उन्हें अपने सीने पर दबा दिया। फिर मैंने धीरे से कहा, “अब भी कुछ बचा है हमारे बीच…”

वो आँखें फाड़-फाड़ कर मुझे देख रही थी, उसकी पुतलियाँ फैली हुई थीं, होंठ काँप रहे थे। मैंने उसे अपनी बाहों में समेटकर बिस्तर की ओर ले गया। वो मेरे साथ चल तो रही थी, लेकिन जैसे उसकी देह मेरे कंट्रोल में आ चुकी थी। मैंने उसे सीधे बिस्तर पर लिटा दिया, फिर कम्बल खींचकर उसके नग्न शरीर पर ओढ़ दिया। उसके बाद मैं भी उसके बगल में लेट गया।

हमारे नंगे बदन एक-दूसरे से सटे हुए थे। उसकी गरम त्वचा मेरी त्वचा से रगड़ खा रही थी। वो मेरे मन की बात समझ रही थी, लेकिन दोनों के होंठ बंद थे। मैंने बहुत धीरे से अपना दायाँ हाथ बढ़ाकर उसकी उठी हुई, सख्त चूचियों पर रख दिया। जैसे ही मेरी हथेली उसके निप्पल को छूई, 440 वोल्ट का करंट सा लगा। मेरी उंगलियाँ स्वतः ही उसके निप्पल को पिंच करने लगीं। अंशिका सिहर उठी, उसका पूरा शरीर एक झटके के साथ काँप गया। फिर वो फुसफुसाई, “भैया… प्लीज़ ऐसे मत करो। हाय ज़ालिम…”

उसकी आवाज़ में विनती थी, लेकिन उसकी साँसें और तेज़ हो गई थीं, और उसकी जांघें अनजाने में थोड़ी खुल गईं। अब मैं पूरी तरह फैसला कर चुका था कि आज इसे चोदना ही है। मैंने जल्दी से अपना कच्छा उतारा और फर्श पर फेंक दिया। मेरा लंड अब पूरी तरह खुला हुआ था — लंबा, मोटा, नसों से भरा, सिरा चमकदार और पहले से ही रस टपक रहा था। मैंने उसे अपनी जांघों के बीच में थोड़ा और करीब खींचा। मेरा लंड अब उसकी चूत के ठीक बगल में सरक रहा था, उसकी गीली, गरम त्वचा को छू रहा था।

अंशिका पहले से ही बहुत गरम थी, उसकी चूत से रस टपक रहा था, लेकिन अपने सगे भाई से चुदवाने में वो अभी भी डर रही थी। मुझे थोड़ी समझदारी दिखानी पड़ी। उसने काँपती आवाज़ में कहा, “भैया, ये सही नहीं है। आप मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकते।”

मैंने पूछा, “क्या तू मुझे प्यार नहीं करती?”

उसने तुरंत जवाब दिया, “हाँ, अपनी जान से भी ज्यादा।”

मैंने कहा, “और मैं भी तेरा कितना ख्याल रखता हूँ,” और साथ ही मेरी हथेली उसकी चूचियों पर फिसलने लगी। मैंने एक निप्पल को अंगूठे और तर्जनी से पकड़कर हल्का सा मरोड़ा, फिर दूसरे को अपनी हथेली से दबाया। बीच-बीच में मैं झुककर उसके निप्पल को मुँह में ले लेता था — जीभ से गोल-गोल चाटता, दाँतों से हल्का सा काटता, फिर ज़ोर से चूसता। उसकी चूचियाँ मेरे मुँह में पूरी तरह समा रही थीं।

अंशिका फिर बोली, “लेकिन भाई, क्या ये सही है?”

मैंने जवाब दिया, “अब कुछ बचा है? मैं तेरी चूचियाँ चूस रहा हूँ… मेरा लंड तेरी चूत के दरवाज़े पर खड़ा है… जानेमन, अब ज्यादा सोच-विचार मत कर। मौके का फायदा उठा और मज़ा ले। तू भी गरम है और मैं भी।”

इतना कहकर मैंने उसकी दोनों चूचियों को बेतहाशा चूसना शुरू कर दिया। मेरी जीभ हर निप्पल पर बार-बार घूम रही थी, मुँह से चूसते समय चटक-चटक की आवाज़ें आ रही थीं। हाय, मैं स्वर्ग में था। अंशिका का भी बुरा हाल था — उसकी साँसें तेज़, देह काँप रही थी, चूत से रस लगातार बह रहा था। गुंडे सही कह रहे थे — मेरी बहन टॉप माल थी। ऐसी चूत को कोई और चोदे और मैं खड़ा देखता रहूँ? बहुत नाइंसाफी होती।

उसका गोरा, नरम बदन मेरी बाहों में मचल रहा था। मैंने धीरे से अपना लौड़ा उसकी चूत के मुंह पर टिकाया। उसकी चूत पहले से ही बहुत गीली थी, होंठ फूले हुए, क्लिट उभरी हुई। मैंने हल्का सा धक्का दिया। लौड़े का सिरा उसके चूत के मुंह में घुसा और फिर एक झटके के साथ आधा अंदर चला गया।

“हाय मर्रर्र गयी ईईईईई…… भैया प्लीज़ इसे निकाल लो…” वो विनती करने लगी, उसकी आँखों में आँसू आ गए थे, और उसने मेरी कमर को दोनों हाथों से पकड़कर पीछे धकेलने की कोशिश की। लेकिन जैसे ही मेरा लंड उसकी टाइट चूत की दीवारों को पूरी तरह खोलते हुए आगे बढ़ा, दर्द के साथ-साथ एक गहरी सिहरन उसके पूरे शरीर में दौड़ गई। खून की हल्की-सी गर्माहट मेरे लंड पर महसूस हुई, उसकी चूत खून से लथपथ हो गई। 24 कैरेट सोने जैसी चूत थी अंशिका की — जो गुंडों से तो बच गई, लेकिन अपने भैया से नहीं बच पाई।

मैंने धीरे-धीरे पूरा लंड उसकी चूत के अंदर डाल दिया। मेरे मोटे, नसों से भरे लंड का सिरा पहले उसके तंग प्रवेश द्वार को चौड़ा करता हुआ अंदर सरका, फिर धीमे-धीमे पूरी लंबाई उसकी गर्म, गीली दीवारों के बीच फिसलती चली गई। जब मेरा पूरा लंड उसकी चूत की सबसे गहरी जगह तक जा पहुंचा, तब मैंने कुछ पल पूरी तरह स्थिर रहकर उसे उसकी चूत की गहराई का पूरा एहसास होने दिया। उसका तंग, गर्म मांस मेरे लंड को चारों ओर से कसकर दबा रहा था, जैसे उसे अंदर समेटकर रखना चाहता हो। शुरू में अंशिका की सिसकियाँ तेज़ दर्द की थीं — उसकी साँसें रुक-रुक कर आ रही थीं, होंठ काँप रहे थे, और उसकी उँगलियाँ मेरी पीठ पर गहरे नाखून गड़ाए हुए थीं। उसकी आँखें नम होकर बंद हो गई थीं और माथे पर पसीने की बूँदें छिटक रही थीं।

धीरे-धीरे, जैसे-जैसे उसकी चूत मेरे लंड की मोटाई और गर्मी के आदी होती गई, वो सिसकियाँ बदलने लगीं। दर्द की तीखी आवाज़ें अब हल्की, काँपती हुई आहों में तब्दील हो गईं। उसकी जांघें स्वाभाविक रूप से मेरी कमर के चारों ओर लिपट गईं, घुटनों को मोड़कर मेरी पीठ पर टिका लिया और एड़ियाँ मेरी नितंबों के पीछे दबा दीं। अनजाने में ही उसने अपनी कमर ऊपर की ओर उठाई, जिससे मेरा लंड और भी गहराई तक उसके भीतर धँस गया। अब उसकी चूत की अंदरूनी दीवारें मेरे लंड को और अधिक कसकर जकड़ रही थीं, हर छोटी हरकत पर उसका गीला रस मेरे लंड की जड़ तक बहकर आ रहा था। उसकी साँसें अब तेज़ और गहरी हो चुकी थीं, छाती तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रही थी।

मैंने अपनी रफ्तार धीरे-धीरे बढ़ानी शुरू की। सबसे पहले मैंने लंड को लगभग पूरी तरह बाहर निकाला, सिर्फ सिरा ही अंदर रहने दिया, फिर पूरी ताकत और नियंत्रण के साथ उसे फिर से पूरी गहराई तक धकेल दिया। हर धक्के के साथ उसकी चूत से चिकचिक की हल्की आवाज़ निकल रही थी। मैं गहरे, लंबे और लगातार धक्के देता रहा — बाहर तक निकालकर फिर से पूरी शक्ति से अंदर धकेलता। अंशिका अब दर्द को पूरी तरह भूल चुकी थी। उसकी आँखें बंद हो गईं, पलकें काँप रही थीं, और होंठों से लगातार फुसफुसाहट निकल रही थी — “हाय… भैया… और… और जोर से…” उसकी आवाज़ काँपती हुई, कामुक और विनती भरी थी।

उसकी चूत मेरे हर धक्के के साथ सिकुड़ रही थी, जैसे मेरे लंड को और गहराई में खींचना चाहती हो। मैंने अपनी हथेली को उसके क्लिटोरिस पर रखा और अंगूठे से गोल-गोल रगड़ना शुरू किया, हल्के दबाव के साथ। उसका पूरा शरीर सिहर उठा, कमर बार-बार ऊपर उठकर मेरे धक्कों का जवाब दे रही थी। उसकी चूचियाँ मेरे सीने से रगड़ रही थीं — निप्पल्स सख्त और उभरे हुए, मेरी छाती की त्वचा पर लगातार घिस रहे थे। उसका गीला रस अब मेरी जांघों तक बह रहा था, चादर पर गीला धब्बा फैल रहा था। वो पूरी तरह मज़े में डूब चुकी थी, हर धक्के के साथ अपनी कमर को और ऊपर उठाकर मेरा लंड और गहराई तक ले रही थी, अपनी चूचियाँ मेरे सीने से और जोर से रगड़वा रही थी।

उस रात मैंने अंशिका को कोई दस बार चोदा और अब वाकई हम बहुत मजे करते हैं। दोस्तों उस रात के बाद से हम अक्सर चुदाई किया करते थे।

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