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आखिरी दिन गर्लफ्रेंड ने सब कुछ दे दिया

Girlfriend sex kahani, gaand chatna sex story, peshab peena sex story: मेरा नाम धर्मेश है, और मैं एक बड़ी एमएनसी में सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम करता हूं, जहां रोजाना कोडिंग और मीटिंग्स का सिलसिला चलता रहता है। लेकिन ये कहानी उस समय की है जब मैं ग्रेजुएशन के पहले साल में था, उम्र करीब 19 साल की, और देहरादून में अकेला रहता था, क्योंकि मेरी फैमिली दूसरे शहर में बसी हुई थी, वहां से दूर होने की वजह से मैंने खुद को थोड़ा रिजर्व रखना सीख लिया था।

मेरा कमरा एक पुराने बड़े मकान में था, जहां मकान मालिक कभी आते-जाते नहीं थे, बस मुझे किराए पर एक कमरा दे रखा था, और वो जगह इतनी शांत थी कि शाम होते ही सन्नाटा छा जाता, हल्की हवा की सरसराहट और दूर से आती गाड़ियों की आवाजें ही साथ देतीं। मैं कोचिंग क्लास जाता था, जहां पढ़ाई के साथ-साथ थोड़ी बहुत मस्ती भी चलती, लेकिन मेरी जिंदगी में तब एक बड़ा ट्विस्ट आया जब कोचिंग में अचानक मेरी मुलाकात अपूर्वा से हुई, जो स्कूल टाइम की पुरानी दोस्त थी, और हम करीब सात साल बाद मिले थे, वो अब कॉलेज में पढ़ रही थी, उम्र भी 19 साल की ही थी, और उसकी खूबसूरती देखकर दिल धड़क उठता।

अपूर्वा की लंबाई 5 फुट 5 इंच थी, गोरा रंग, भरा हुआ बदन जो हर कर्व पर परफेक्ट लगता, कमर पतली लेकिन कूल्हे थोड़े भरे हुए, और जब वो चलती तो उसके कदमों की थिरकन में एक रिदम था जो आंखों को बांध लेता, उसके बाल लंबे और घने, चेहरा गोल और होंठ गुलाबी, जो मुस्कुराते हुए और भी आकर्षक लगते। हमारी दोस्ती धीरे-धीरे फिर से गहरी होने लगी, बातें होतीं, हंसना-हंसाना चलता, और छह महीनों में वो दोस्ती प्यार में बदल गई, वो मेरे कमरे पर आने लगी, जहां हम घंटों बैठकर बातें करते, और धीरे-धीरे रोमांस शुरू हो गया, किस करना, गले लगना, उसके बदन की गर्माहट महसूस करना, लेकिन हमने कुछ अनकहे नियम बना लिए थे, जैसे मैं उसके साथ पूरा सेक्स नहीं कर सकता, वो कहती कि सब कुछ करो लेकिन चूत में लंड मत डालना, और मैं उसकी मर्जी के खिलाफ कभी नहीं जाता।

मैं कई बार जिद करता, लेकिन उसकी आंखों में वो डर और प्यार देखकर रुक जाता, हम बस चुचियां चूसना, चूत चाटना, लंड को जांघों के बीच रगड़ना, ये सब करते, और हर बार उसके बदन की खुशबू, उसकी सांसों की गर्मी, और उसकी सिसकारियां मुझे और पागल कर देतीं। फिर ग्रेजुएशन खत्म होने वाला था, मुझे अच्छी जॉब के लिए कोलकाता जाना पड़ रहा था, मैंने अपूर्वा को बताया तो वो उदास हो गई, रोते हुए बोली कि तुम मुझे छोड़कर चले जाओगे तो मैं क्या करूंगी, उसकी आंखों में आंसू देखकर मेरा दिल पिघल गया, मैंने उसे सीने से लगाया और समझाया कि जल्दी अच्छी जॉब लगाकर शादी का प्रपोज करूंगा, हम साथ रहेंगे।

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अगले दिन मैंने उसे कमरे पर बुलाया, और वो शाम को आई, सफेद सूट और टाइट लेगिंग्स में, बाल खुले, हाई हील्स की सैंडल, हल्का मेकअप जो उसके चेहरे को और निखार रहा था, हाथों में चूड़ियां जो खनक रही थीं, और वो चलकर आ रही थी तो मानो मेरी दुल्हन बनकर आ रही हो, उसकी खुशबू कमरे में फैल गई, हल्की परफ्यूम की मिश्रित गंध जो मुझे मदहोश कर रही थी। कमरे में आते ही वो मेरे सीने से लग गई, मैंने उसके बालों में उंगलियां फेरते हुए उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए, और लंबी किस शुरू हो गई, जीभ से जीभ मिलाई, उसके मुंह की मिठास चखी, सांसें तेज हो गईं, वो सिसकारी ले रही थी, आह्ह… धर्मेश… कितना प्यार करते हो तुम, और मैं उसके गले पर किस करता हुआ नीचे सरक रहा था, उसके सूट के ऊपर से चुचियां दबाईं, जो नरम और भरी हुईं लग रही थीं।

फिर हम बेड पर बैठ गए, मैंने कहा कि जान आज तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो, वो मुस्कुराई और बोली कि आज मैं सिर्फ तुम्हारे लिए तैयार हुई हूं, मैं जानती हूं तुम मुझसे पूरा सेक्स करना चाहते हो, मैं भी चाहती हूं लेकिन शादी के बाद, लेकिन आज… वो चुप हो गई, मैंने फिर उसके होंठ चूमते हुए पूछा कि लेकिन क्या जानू, उसने मेरी आंखों में देखकर कहा कि आज मुझे ऐसा प्यार करो कि मैं जिंदगी भर न भूलूं, जो कुछ तुम करना चाहते हो सब करो, जितना प्यार कोई किसी को न करता हो उतना करो। मैंने उसे बेड पर लिटाया, ऊपर चढ़ गया, उसके होंठ फिर चूमे, जीभ से खेला, उसके गले पर जीभ फेरी, कान के पास गर्म सांसें छोड़ी, वो कांप रही थी, उसके हाथ मेरी पीठ पर घूम रहे थे, नाखूनों से हल्का खरोंच रही थी, जो मुझे और उत्तेजित कर रहा था।

मैंने धीरे से पूछा कि जानू मैं कितनी दूर तक जा सकता हूं, वो सिसकारी लेते हुए बोली कि जितनी दूर जाना चाहो जाओ, आज सब तुम्हारा है, मैंने उसका सूट ऊपर किया, ब्रा को ऊपर सरकाया, और उसकी गुलाबी निप्पल्स को मुंह में ले लिया, जोर-जोर से चूसा, काटा, उसके निप्पल्स सख्त हो गए, वो कराह रही थी, आह्ह… धर्मेश… और जोर से चूसो… इह्ह… कितना अच्छा लग रहा है, मैं एक हाथ से दूसरी चुची दबा रहा था, उसकी त्वचा की नरमी, गर्माहट, और हल्की पसीने की खुशबू सब मिलकर मुझे पागल कर रही थी। फिर मैंने कहा कि जान मुझे बहुत प्यास लगी है, अपना दूध पिला दो ना, वो हंसकर बोली कि अभी तो दूध नहीं आएगा जानू, लेकिन मैं चूसता रहा, जीभ से निप्पल्स पर गोल-गोल घुमाता, उसके बदन से निकलती गर्मी महसूस करता, वो अपनी कमर ऊपर उठा रही थी, जैसे और ज्यादा चाहती हो।

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फिर मैं नीचे सरका, उसकी लेगिंग्स को धीरे-धीरे नीचे खींचा, पैंटी गीली हो चुकी थी, हल्की जांघों पर बाल जो एक हफ्ते पहले शेव किए हुए लग रहे थे, मैंने पैंटी साइड की और चूत पर किस किया, जीभ से क्लिट पर घुमाया, उसकी चूत की गंध आई, मादक और नमकीन, वो तड़प उठी, ओह्ह… आह्ह… धर्मेश… क्या कर रहे हो… इह्ह… जीभ अंदर डालो ना, मैंने जीभ से चूत के होंठ चाटे, अंदर-बाहर किया, उसके रस का स्वाद चखा, जो मीठा और चिपचिपा था, वो मेरे सिर को दबा रही थी, सिसकारियां ले रही थी, ऊंह्ह… हां ऐसे ही… और गहराई में… आह्ह।

मैंने पूछा कि जानू मैं तुम्हें सबसे गंदी जगह पर किस करना चाहता हूं, बताओ ना, वो शरमाकर बोली कि जो तुम्हें अच्छा लगे करो, मैंने उसे पलटा, अब उसकी गोल-गोल गांड मेरे सामने थी, हल्के बाल, मैंने दोनों गालों को सहलाया, किस किया, जीभ से चाटा, उसकी त्वचा की नरमी और गर्मी महसूस की, फिर गांड के दरार को फैलाया, गहरा भूरा छेद नजर आया, मैंने जीभ से चारों तरफ चाटा, उसकी गांड की हल्की गंध आई जो अपूर्वा की थी, मुझे और उत्तेजित कर रही थी, वो कांप रही थी, आह्ह… धर्मेश… वहां… इतना गंदा… लेकिन अच्छा लग रहा है… इह्ह।

मैंने होंठ छेद पर रखे और चूमने लगा, जीभ से दबाव डाला, वो अपना छेद कभी कसती कभी ढीला छोड़ती, जैसे मुझे रेस्पॉन्स दे रही हो, मैंने जीभ अंदर डालने की कोशिश की लेकिन टाइट था, फिर मैंने कहा कि जानू छेद बहुत टाइट है, जीभ अंदर नहीं जा रही, वो बोली कि तो क्या करोगे, मैंने कहा कि तुम मेरे मुंह पर बैठो, गांड मेरे मुंह के ठीक ऊपर, वो ऊपर आई, गांड रखी, मैंने जीभ अंदर डाली, चाटा, चूसा, उसके छेद का स्वाद चखा, वो हिल रही थी, ऊंह्ह… धर्मेश… कितना गहरा… आह्ह… ऐसे मत करो… इह्ह… लेकिन रुकना मत।

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काफी देर बाद मैंने उसे लिटाया, अब प्यास और बढ़ गई थी, मैंने कहा कि जान बहुत प्यास लगी है, तुम्हारा पेशाब पिलाओ ना, वो चौंककर बोली कि छी ये क्या बोल रहे हो, मैं नहीं कर सकती, मैंने कहा कि अगर मैं तुम्हारी गांड चाट सकता हूं तो पेशाब क्यों नहीं पी सकता, तुम तो चाहती थी कुछ ऐसा करूं जो कोई न करे, वो थोड़ी देर चुप रही, फिर धीरे से चूत मेरे मुंह के पास ले आई, पहले हल्की धार निकली, गरम-गरम, नमकीन स्वाद, मैं मुंह खोलकर पीने लगा, कुछ मुंह में कुछ बेड पर गिर रहा था, वो कांप रही थी, आह्ह… धर्मेश… ये सब तुमने करवा दिया… इह्ह… कितना अजीब लेकिन एक्साइटिंग लग रहा है।

धार खत्म होने पर उसने चूत होंठों पर दबा दी, आखिरी बूंद भी मैंने पी ली, अब मेरा लंड फटने को था, 7 इंच का मोटा सख्त, मैंने कहा कि अब रुक नहीं सकता, प्लीज चुदाई की इजाजत दे दो, वो बोली कि नहीं जान आज नहीं, लेकिन मैं तुम्हारा माल ठंडा कर दूंगी, उसने हाथ से लंड पकड़ा, सहलाया, जीभ से चाटा, मुंह में लिया, ग्ग्ग्ग… ग्ग्ग्ग… गी… गी… ऐसे चूसा कि मैं तड़प उठा, आह्ह… अपूर्वा… और गहरा… इह्ह, फिर हाथ से जोर-जोर से हिलाया, और माल निकल गया, सफेद गाढ़ा उसके चेहरे हाथों पर छिटका।

वो धीरे-धीरे माल चाटने लगी, मैंने रोका तो बोली कि तुम मेरा पेशाब पी सकते हो तो मैं तुम्हारा माल क्यों नहीं खा सकती, वैसे भी ये अंदर जाना था, फिर वो तैयार हुई जाने के लिए, मैंने कहा कि जान आज कुछ अधूरा सा लग रहा है, वो मुस्कुराई और बोली कि अगली बार मिलेंगे तो सारी हदें पार कर देंगे, वादा, वो कपड़े पहनकर गई, मैं उसे दूर तक देखता रहा।

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