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मौका मिलते ही चचेरी बहन को चोद दिया

Chacha ki beti ki choot ki seal todi: प्रिय, मेरा नाम कर्ण है। ग्वालियर, मध्य प्रदेश में मेरा घर है। ये यौन कहानी पिछले साल बहुत ठंडी थी।

मेरे पिताजी, माताजी और दो छोटे भाई बहन हमारे परिवार में रहते हैं। मेरे चाचा चाची के परिवार में उनके छोटे भाई नितिन, बड़ी लड़की प्रिया और अन्नू शामिल थे। यह मेरी चाचा की लड़की अन्नू के साथ मेरी पहली चुदाई है।

अन्नू कॉलेज में पढ़ रही थी। उसका बदन बहुत कामुक था। उसकी त्वचा चिकनी और गोरी थी जो ठंड के मौसम में भी चमकती दिखाई देती थी। उसने खुद मुझे बताया था कि उसके चूतड़ ३४ इंच के हैं जो गोल और भरे हुए थे, कमर ३० इंच की पतली थी जो उसके कूल्हों को और आकर्षक बनाती थी और बूब्स ३२ इंच के थे जो उभरे हुए और दृढ़ थे।

मैं पहली बार अन्नू को बहन की नजर से देखा था। फिर मैंने अन्नू को देखने का नजरिया बदल दिया। अब मैं उसके पास अधिक समय बिताने लगा और उसके साथ अधिक संबंध बनाने लगा।

उन दिनों ठंड का मौसम था, इसलिए सब लोग छत पर खुली धूप में आने लगे। ठंडी हवा में भी धूप की नरम गर्माहट अच्छी लगती थी। वह छत पर बने बाथरूम में नहाने जाती थी और सबसे कहती, कोई छत पर नहीं आना, मैं नहाने जा रही हूं। उसकी आवाज में एक हल्का सा संकोच और चेतावनी का मिश्रण होता था।

उसकी इसी बात का लाभ उठाकर मैं अपने कमरे से चुपके से छत पर चला जाता और बाथरूम के पुराने दरवाजे की झिरी से अंदर झांकता। वहां से नहाते समय उसके नंगे शरीर को देखता। ठंड के कारण उसकी त्वचा पर हल्की सी कांपती हुई सिहरन दिखाई देती। पानी की बूंदें उसके गले से नीचे उतरकर उसके उभरे बूब्स पर रुकतीं, फिर उसके पेट और अंत में उसके गोल चूतड़ों पर बह जातीं। उसकी कमर पतली होने के कारण उसके कूल्हे और भी उभरकर दिखते। मैं सांस रोके उसे देखता और मेरा लंड उस समय कड़क हो जाता।

एक दिन वह नहा रही थी और बाथरूम के दरवाजे नहीं लगाए थे। धूप में बाहर आकर कपड़े लेने लगी। उस समय वह पूरी तरह से लपेटी हुई थी, सिर्फ एक पतला सा तौलिया उसके नंगे बदन को ढके हुए था जो उसके गीले शरीर से चिपका हुआ था। उसके बूब्स तौलिए के नीचे से उभरे दिख रहे थे और निप्पल की हल्की सी आउटलाइन साफ नजर आ रही थी। ठंडी हवा में उसके शरीर पर पानी की बूंदें चमक रही थीं। उस दिन मैं दूर एक आड़ में छिपकर उसे देख रहा था। मेरे दिल की धड़कन तेज हो गई थी।

बाहर आते ही उसने मुझ पर नजर डाली। जब उसने मुझे देखा, वह तुरंत बाथरूम में चली गई और उधर से ही कहा, नीचे जाओ। उसकी आवाज में आश्चर्य और हल्का गुस्सा था।

उसे देखते ही मुझे डर लग गया। मैं नीचे भागकर अपने कमरे में जाकर सुताई होने के लिए इंतजार करने लगा। उसने नीचे आकर किसी से कुछ नहीं कहा।

थोड़ी देर के लिए मुझे लगता था कि वे अभी बच गए हैं। फिर मैं दो दिन तक उसके संपर्क में भी नहीं आया। मैं सहज हो गया जब मुझे पता चला कि उसने ये बात घर में किसी को नहीं बताई।

अब वह भी मुझे काम करते देखती है और मैं भी। मैं उसकी किस नजर से देखता हूं, उसे पता था।

वह एक दिन कमरे में कपड़े प्रेस कर रही थी। मैं छत से बाहर उसकी ओर देख रहा था। वह मुझे देखकर हल्के से मुस्कराई। यह मेरे लिए एक तरह का ग्रीन सिग्नल था। उसके होंठों पर हल्की सी मुस्कान खिली हुई थी जो गुलाबी और नरम दिख रही थी। उसकी आंखों में एक चमक थी जिसमें शर्म के साथ थोड़ी सी चंचलता झलक रही थी। उसकी कमर थोड़ी झुकी हुई थी और कूल्हों की मुद्रा में एक आकर्षक बल था जो उसके कामुक बदन को और भी उभार रहा था।

मैंने अब सोचा कि अन्नू को किसी भी तरह चोदना चाहिए।

एक दिन, हम दोनों छत पर बैठे। मैं फोन चला रहा था।

उसने पूछा, “भाई, क्या देख रहे हो?”

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मैंने कहा, “कुछ नहीं।”

फिर मैंने उससे पूछा, “तुम क्या देखना चाहती हो?”

उसने कहा, “जो दिखाओ।”

मैंने पूछा, “क्या देखना है, फिर भी बताओ।”

उसने कहा, “कुछ सुंदर दिखाओ।”

मैंने पूछा, “अब मैं तुम्हें क्या अच्छा लगता है? मैं अपनी तरफ से कुछ रिस्क नहीं लेना चाहता था। तुम्हें क्या अच्छा लगता है?”

उसने कहा, “ओके, मैं बाद में बताऊंगी।”

छत पर बातचीत के दौरान हमारी नजरें बार-बार मिल रही थीं। उसकी आंखों में हल्की शर्म थी लेकिन साथ ही उत्तेजना भी महसूस हो रही थी। मेरे मन में अन्नू के कामुक शरीर की यादें ताजा हो रही थीं। उसके गीले बूब्स, गोल चूतड़ और पतली कमर की कल्पनाएं मेरे दिमाग में घूम रही थीं। मेरे लंड में खून तेजी से दौड़ने लगा था। हाथ-पैर हल्के से कांप रहे थे।

मैं जानता हूं कि अन्नू चुदाने को तैयार है, बस किसी को पहल करनी चाहिए।

फिर एक दिन मेरी मां और चाची दुकान पर गईं। पिताजी और चाचा भी घर नहीं थे। मैं, मेरा भाई और मेरी बहन ही थे। मेरे भाई और बहन टीवी देख रहे थे। अन्नू और मैं कमरे के ऊपर थे।

जब उसे कपड़े बदलने थे, अन्नू ने कहा, “भाई, बाहर जाओ मुझे कपड़े बदलने हैं।”

मैंने उससे कहा, “मैं यहीं हूं, मुंह उधर कर लेता हूं। आप कपड़े बदलें।”

उसने थोड़ा संकोच करते हुए कहा, “ओके, लेकिन तुम देखना नहीं।”

वह कुछ देर रुकी। मैंने कहा, “हां।”

फिर उसने सिर्फ मेरे सामने अपना टॉप निकाला। जब मैंने चोरी से उसे देखा, मैं सिर्फ देखता रह गया। उसके बूब्स बहुत सुंदर थे। वे गोल, दृढ़ और चिकने थे। ठंड के मौसम में भी उनकी निप्पल हल्की सख्त होकर ऊपर उठी हुई थीं। उसकी गोरी त्वचा पर हल्की सी लाली छाई हुई थी। वह भी जानती थी कि मैंने उसको कपड़े बदलते देखा था।

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उसने कहा, “भाई, मैंने ऐसा देखा, तुम सही नहीं किया।”

मैंने कहा, “अन्नू, तुम मेरी प्यारी बहन भी तो हो। मैंने तुम्हारे बूब्स देखे तो क्या हुआ।”

उसने कहा, “हां, भाई, लेकिन आप प्रॉमिस करो कि किसी को नहीं बताओगे।”

मैंने कहा, “तुम मेरी प्यारी बहन हो, पगली।”

वह इतना सुनकर मेरे गले से लग गई।

मैंने भी उसकी गर्दन पर किस किया और उसकी गर्दन को कसकर पकड़ लिया। दोनों के गले लगने के दौरान उसकी नरम छाती मेरी छाती से सट गई। उसके दृढ़ बूब्स मेरे सीने पर दब रहे थे। उसकी गर्माहट और नरमाई का स्पर्श मेरे पूरे शरीर में बिजली सी दौड़ गया। मैं महसूस कर रहा था कि उसके निप्पल मेरी छाती से रगड़ खा रहे हैं।

मैंने उससे कहा, “अन्नू, मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं।”

उसने कहा, “हां भाई, मैं भी आपसे बहुत प्यार करती हूं।”

उसने आगे कहा, “लेकिन मुझे डर है कि अगर किसी को कुछ पता चला तो मैं मर जाऊंगी।”

मैंने पूछा, “कौन बताएगा।”

नहीं, वह कहती थी। मैंने कहा कि मैं भी नहीं बताऊंगा। अब मैं उसके बूब्स को टॉप के ऊपर से किस करने लगा।

तब मैंने किसी के नीचे आने की आवाज सुनी। हम दोनों चुप हो गए। फिर मैं उसको किस करता या बूब्स दबाता जब भी मौका मिलता। उसके पास अधिक मौके नहीं थे। दो महीने ऐसे गुजर गए।

अन्नू, घर पर सब लोग रहते हैं, मैंने कहा। मैं तुम्हें प्यार करना चाहता हूं। कहां बाहर निकलें।

उसने पूछा, “कहां?”

मैंने कहा कि कल ट्यूशन में नहीं जाना चाहिए। मैं आऊंगा। ट्यूशन के बहाने मैं तुमसे मिलने आऊंगा।

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उसने कहा, “ओके।”

अगले दिन, उसकी ट्यूशन आठ से ग्यारह बजे की होती थी, इसलिए मैं सुबह आठ बजे उसे लेने चला गया। हमारे पास तीन घंटे का समय था। मैंने उसे बाइक पर बैठाकर होटल चला गया।

वह डरती थी कि कहीं कोई समस्या नहीं होगी। वह मान गई जब मैंने उसकी बात समझा दी। मैं उससे होटल के कमरे में पहुंचा। कमरे में पहुंचते ही मैंने गेट बंद कर दिया और उसको लगे से लगा लिया।

वह मेरे गले में भी किस करने लगी। होटल के कमरे में ठंडक थी लेकिन हमारे शरीरों से उत्तेजना की गर्मी फैल रही थी। दोनों की सांसें तेज हो चुकी थीं। मैंने उसको बेड पर उठाकर बैग उसके कंधे से उतार दिया। धीरे धीरे मैं उसका टॉप निकालने लगा और उसे किस करने लगा।

उसने अपने बूब्स को छिपाने की कोशिश की। मैंने उसके हाथों को बाहर निकालकर अपने बूब्स को दबाने लगा। मैंने भी उसकी ब्रा उतार दी क्योंकि अब उसकी ब्रा उसके मम्मों को छिपा रही थी। संगमरमर की तरह सफेद, चमकदार बूब्स थे। बूब्स दबाने और चूमने के दौरान अन्नू की आहें निकल रही थीं। उसका पूरा शरीर कांप रहा था। मैंने उसके एक बूब को मुंह में लेकर चूसा तो उसकी चूत और भी गीली हो गई। मेरी उंगलियां उसकी चूत की नमी महसूस कर रही थीं।

फिर मैंने अपने एक हाथ को नीचे रखा और उसकी जींस के बटन को नीचे सरका दिया। उसने अपनी जींस खुद उतार दी। अब वह मेरे सामने सिर्फ पैंटी में थी। कपड़े उतारने की हर स्टेप में उसका शरीर शर्म से सिकुड़ रहा था लेकिन आंखों में इच्छा भी झलक रही थी।

मैं उसकी पैंटी में एक हाथ डालकर किस करने लगा। उसकी चूत गीली थी। मैं अपने हाथ पूरी गीली चुत को ऊपर से निचे रगड़ने लगा। दूसरे हाथ से मैंने उसके हाथ को अपने पैंट में डाल कर लण्ड पर रख दिया। वह शर्म से आंखें नीचे कर ले रही थी लेकिन उसकी उंगलियां धीरे-धीरे लंड को पकड़ रही थीं।

पैंटी के अंदर चूत को रगड़ते समय अन्नू की चूत से गर्म और चिपचिपा रस मेरी उंगलियों पर लग रहा था। हर रगड़ के साथ उसकी चूत और ज्यादा गीली होती जा रही थी। गर्म रस की चिपचिपाहट मेरी उंगलियों को पूरी तरह भिगो रही थी। अन्नू की आहें निकल रही थीं, “आह… भाई… धीरे…” उसके कूल्हे हल्के-हल्के ऊपर उठ रहे थे। उसकी सांसें तेज हो गई थीं और चेहरा शर्म से लाल हो रहा था।

कुछ देर चूत को सहलाने के बाद अपने कपड़े उतार दिए।

पहले मैंने अपनी टी-शर्ट ऊपर की तरफ खींची और सिर के ऊपर से निकाल दी। फिर मैंने अपनी जींस का बटन खोला और जिपर नीचे खींची। जींस को धीरे-धीरे कूल्हों से नीचे सरकाते हुए मैंने उसे उतार दिया। अब मैं सिर्फ अपनी अंडरवियर में था। अंडरवियर को भी मैंने धीरे से नीचे खिसकाया और अपना मोटा, खड़ा लंड पूरी तरह से बाहर निकाल लिया।

वह मेरे लंड को देखकर भयभीत हो गई और पूछा, “भाई, इतना मोटा कैसे होगा।”

मैंने प्यार से कहा, “टेंशन मत ले। ये आपकी चूत में आसानी से घुस जाएंगे। बनाने वाले ने रबर की तरह चूत बनाई है। शुरू में कुछ दर्द होगा, लेकिन फिर लंड घुस जाएगा।”

उसने कहा, “मैं अभी तक कभी नहीं थी।”

वो मेरी बात से खुश हो गई और उसने फैसला कर लिया कि उसे आज अपने भाई के लंड से अपनी चूत की सील तुड़वानी ही पड़ेगी।

मैंने उसे पीठ के बल लेटा दिया और उसकी कमर के नीचे एक तकिया लगा दिया क्योंकि मैंने भी अब देर करना ठीक नहीं समझा। उसकी चूत पाव रोटी की तरह सूजी हुई और फिसलन भरी थी। उसकी कोमल त्वचा पर पसीना चमक रहा था। मैंने उसके दोनों जांघों को धीरे से अलग किया। उसकी गुलाबी योनि पूरी तरह से भीगी हुई दिख रही थी। उसकी चूत से हल्की मादक खुशबू आ रही थी जो मेरे सिर में चढ़ रही थी।

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मैं झुककर अपनी जीभ से उसकी चूत को चाटने लगा। पहले मैंने उसकी बाहरी होंठों पर लंबी लिक्क लगाई। उसकी मीठी फिसलन वाली रस की स्वाद मेरी जीभ पर फैल गया। उसकी जांघें कांपने लगीं। मैंने अपनी जीभ को उसके क्लिटोरिस पर घुमाया और हल्के दबाव के साथ चूसने लगा। उसकी सांसें तेज हो गईं। उसकी आंखें मेरी आंखों से मिलीं। उसकी नजर में वासना और बेचैनी साफ झलक रही थी।

उसकी बेचैनी बढ़ने लगी। मैंने अपनी उंगलियों से उसके गांड के छेद को भी सहलाना शुरू कर दिया। एक उंगली धीरे से उसके टाइट गुदा छेद पर घुमाई। फिर हल्का दबाव देकर अंदर डालने की कोशिश की। वह कराह उठी। “आह्ह… भैया… धीरे… उफ्फ!” मैंने अपनी जीभ की नोक से उसके गुदा छेद के आसपास हल्का teasing किया। उसकी योनि से रस और ज्यादा निकलने लगा। धीरे-धीरे उसकी चूत की मांसपेशियां सिकुड़ने लगीं।

मैंने अपनी जीभ को पूरी तरह से उसकी चूत में घुसेड़ दिया। अंदर बाहर करने लगा। मेरे लंड में तेजी से खून दौड़ रहा था। मेरा अपना शरीर गर्म हो चुका था। उसका शरीर का तापमान मेरी छाती को छू रहा था। उसने अपनी उंगलियों से मेरे बाल पकड़ लिए और मेरा सिर अपनी चूत में जोर से दबा दिया। मेरी नाक उसकी गीली चूत से सट गई। मैं तेजी से चाटता रहा। “हां… भैया… और जोर से… आह्ह yes… lick it!” उसकी जांघें मेरे सिर के चारों ओर कस गईं।

उसके मुंह से लगातार कराह निकल रही थीं। चूत से निकलता गाढ़ा रस मेरे मुंह और ठोड़ी पर बह रहा था। उसकी मांसपेशियां बार-बार सिकुड़ रही थीं।

यह इस बात का संकेत था कि चूत में आग लगी हुई है और लंड ही एकमात्र ऐसी चीज है जो इस आग को बुझा सकता है।

मैंने अपना लिंग उसकी योनि पर रख दिया। उसने कुछ चिकनाई लगाने की सलाह दी। “क्या आपके बैग में वैसलीन होगी?” मैंने चारों ओर देखते हुए उससे पूछा। “हां।” उसने कहा।

मैंने उसके बैग से वैसलीन निकाली और उसे चिकना करने से पहले अपने लिंग पर मल लिया। इसके बाद, मैं अपने लंड को हाथ में लेकर वापस चूत के पास पहुंच गया। उसने भी अपनी चूत फैला दी।

मेरा गाढ़ा, सख्त लंड उसकी सूजी हुई चूत पर टिका हुआ था। मैंने उसे धीरे-धीरे अंदर डालना शुरू किया। लिंग का मोटा सिरा उसकी तंग योनि के मुंह पर दबाव डाल रहा था। जैसे ही लंड का सिरा उसकी चूत में घुसा, उसकी आंखें फैल गईं। उसका पूरा शरीर अचानक तन गया। वह चिल्लाने ही वाली थी कि मैंने झुककर उसके होंठों को चूम लिया और अपना मुंह उसके मुंह पर रखकर उसकी आवाज दबा दी।

जैसे ही लिंग का सिरा उसके मवाद में फंस गया, मुझे थोड़ी देर रुकना पड़ा। उसकी चूत की दीवारें मेरे लंड को कसकर जकड़ रही थीं। उसकी गर्माहट और फिसलन मेरे पूरे लंड में महसूस हो रही थी। मैंने सावधानी से आधा लंड उसकी चूत में धकेल दिया। जैसे ही आधा मोटा लंड अंदर गया, वह जोर से चिल्लाई। “आह्ह… भैया… नहीं… बहुत दर्द हो रहा है… प्लीज रुक जाओ!” उसकी चूत से हल्का गर्म खून निकलने लगा। खून की पतली धार मेरी जांघों पर बह रही थी।

उसने अपने नाखून मेरी पीठ में गड़ा दिए। उसकी जांघें मेरे कमर को कसकर बंद करने की कोशिश कर रही थीं। उसका पूरा शरीर जोर-जोर से कांप रहा था। “मैं ऐसा नहीं कर सकती, भैया… प्लीज… बाहर निकाल दो… बहुत जल रहा है… आह्ह… मैं मर जाऊंगी!” वह सिसकने लगी। उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे। मैंने उसके गालों पर हल्के-हल्के चुम्बन किए और उसके कान में प्यार से फुसफुसाया, “शश… बस थोड़ी देर और सह लो मेरी जान… दर्द कम हो जाएगा… मैं बहुत प्यार करता हूं तुमसे।”

जैसे ही मैंने उसे फिर से गहरी चुम्बन दी, मैंने धीरे से उसके कान में समझाया। उसका दर्द धीरे-धीरे कम होने लगा। उसकी सांसें भारी हो गईं। मैंने तुरंत बाकी का पूरा लंड एक झटके में अंदर डाल दिया। वह अचानक बेहोश हो गई। उसका शरीर ढीला पड़ गया। मैंने कुछ पल रुककर उसके गालों पर चुम्बन किए।

धीरे-धीरे वह होश में आने लगी। जब वह ठीक होने लगी तो मैंने अपना लंड अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। पहले धीमी गति से। उसकी चूत अब मेरे लंड को चिपककर सहलाने लगी थी। शुरू में उसके मुंह से अभी भी दर्द भरी कराह निकल रही थी, “उफ्फ… दर्द… आह्ह…” लेकिन धीरे-धीरे वह दर्द के साथ मिलकर मजा महसूस करने लगी। “भैया… धीरे… आह्ह… हां… अब… थोड़ा अच्छा लग रहा है…” मेरी बहन की चुदाई का दर्द धीरे-धीरे कम हो गया और उसे मजा आने लगा।

उसकी चूत अब पूरी तरह से गीली हो चुकी थी। हर धक्के पर फिच-फिच की आवाज निकल रही थी। मैंने गति तेज कर दी। फिर मैंने उसे सरेआम चोदना शुरू कर दिया। उसे भी मजा आने लगा। उसने मुझे जोर से गले लगाया, चूमा और फिर अपना मुंह मेरे मुंह में डालकर मेरे साथ सेक्स करने लगी।

उसकी चूत मेरे लंड को पूरी तरह से निचोड़ रही थी। हर जोरदार धक्के के साथ उसकी भीगी हुई दीवारें सिकुड़ रही थीं। फिच-फिच… फिच-फिच की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। मैंने अपनी गति और तेज कर दी। उसके नितंब ऊपर उठकर मेरे हर झटके का जवाब दे रहे थे। उसे भी अब पूरा मजा आने लगा था। “आह्ह… भैया… और जोर से… हां… गहरी… उफ्फ yes!” उसने मुझे जोर से गले लगाया। उसके नाखून मेरी पीठ पर गड़ गए। वह बार-बार मेरे होंठ चूस रही थी। फिर उसने अपना मुंह मेरे मुंह में डालकर गहरी फ्रेंच किस करते हुए मेरे साथ पूरी तरह से सेक्स करने लगी।

दस मिनट की लगातार चुदाई के बाद मैं झड़ने वाला था। मेरा लंड उसके अंदर पूरी तरह से फूला हुआ था। मैंने हांफते हुए उससे पूछा, “अन्नू… कहां ले जाऊं… मैं झड़ने वाला हूं।” वो अपनी आंखें बंद किए हुए कराहती हुई बोली, “भाई… मुझे अंदर ही लेना है… अपनी बहन की चूत में ही अपना रस भर दो… प्लीज!”

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तीन-चार जोरदार धक्के लगाने के बाद मेरा गाढ़ा, गरम रस उसकी चूत में निकल गया। लंबी-लंबी धारें उसके अंदर छूट रही थीं। जब मैंने अपना लंड बाहर निकाला तो मेरा सफेद रस उसकी चूत से उफनकर बाहर बहने लगा। गाढ़ा वीर्य उसकी लाल-सूजी योनि से टपकता हुआ चादर पर फैल रहा था। अपनी बहन के साथ पहली बार यौन संबंध बनाने के बाद हम दोनों थककर एक साथ बिस्तर पर लेटे रहे। उसका सिर मेरी छाती पर था। हमारी नंगी देहें एक-दूसरे से चिपकी हुई थीं। हमारी गर्म शरीरों की गर्माहट एक-दूसरे को आराम दे रही थी। मैं उसके बालों में उंगलियां फिराते हुए फुसफुसाया, “अन्नू… तुम बहुत प्यारी हो… मैं तुम्हें हमेशा खुश रखूंगा।” वह मुस्कुराते हुए मेरी छाती चूमती हुई बोली, “भैया… आज पहली बार ऐसा लगा जैसे स्वर्ग मिल गया हो।”

थोड़ी देर बाद हम दोनों उठे, टॉयलेट गए और खुद को साफ किया। उस दिन हममें से प्रत्येक के बीच तीन बार यौन संबंध बने। हर बार वह पहले से ज्यादा जोर से चिल्लाती और चुदाई का मजा लेती। उसे सही ढंग से चलने में संघर्ष करना पड़ा। अगले कुछ दिनों तक उसकी चूत में हल्का दर्द और सूजन बनी रही। चलते समय उसे हर कदम पर अपनी चूत में खिंचाव और गर्माहट महसूस होती।

मैं उसे घर ले आया और बताया कि मेज से टकराने के कारण उसे चोट लगी है। कुछ ही दिनों में अन्नू ठीक हो गई।

उसके बाद, जब भी हमें मौका मिलता हम सेक्स करने के लिए होटल जाते या एक दूसरे के घर जाते। छिपकर मिलने की यह आदत हमारी जिंदगी का हिस्सा बन गई। हर मुलाकात में हम घंटों तक एक-दूसरे को चूमते, सहलाते और जोर-जोर से चोदते। अन्नू अब पूरी तरह से मेरी हो चुकी थी। उसकी चूत मेरे लंड की दीवानी हो गई थी। उसकी बड़ी बहन को भी अब हमारे रिश्ते का अंदाजा हो गया था।

मैंने उसकी बड़ी बहन के साथ भी सेक्स किया। दोनों बहनों की चूतों का स्वाद और अनुभव अलग-अलग लेकिन दोनों ही बेहद लुभावने थे। अगली बार मैं उसकी बड़ी बहन के साथ अपनी चुदाई के बारे में विस्तार से लिखूंगा। उस कहानी में आप पढ़ेंगे कि कैसे मैंने उसकी बड़ी बहन को पहले लुभाया, फिर उसकी तंग चूत को कैसे फाड़ा और दोनों बहनों को एक साथ चोदने की प्लानिंग कैसे की।

दोस्तों, मेरा मानना है कि आपको मेरी बहन के साथ मेरा पहला अनुभव पढ़कर अच्छा लगा होगा। कृपया अपने विचार मेरे साथ साझा करें।

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⚠️ महत्वपूर्ण अस्वीकरण

ये सभी कहानियाँ केवल काल्पनिक हैं।
इनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है।

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इन कहानियों से प्रेरित न हों।
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