कहानी का पिछला भाग: क्लिनिक में डॉक्टर ने चोदा – Part 1
उसने भी ज्यादा झिकझिक नहीं की और लंड के टोपे को चाटने लगी। मैं उसके बाल पीछे से पकड़े था और वो लंड के टोपे को चाट रही थी।
मैंने एक बार उसे थोड़ा और नीचे की तरफ धकेला और उसने पूरा लंड लेने की कोशिश की लेकिन आधे में ही हट गई। बोली- अगर और लिया तो उलटी हो जायेगी।
मालविका मेरे लंड को अपने मुँह में लेना तो चाहती थी लेकिन डर-डर के आगे बढ़ रही थी। एक बार को तो मुझे भी लगा जैसे वो सच में ही उलटी करने वाली हो।
फिर 3-4 मिनट बाद उसे भी मजा आने लगा और लंड को कुल्फी की तरह चाटने लगी। अपने जीभ से चाट भी रही थी।
उसके ऐसा करने से लंड और ताव खा रहा था और तड़पता हुआ पूरा उसके मुँह में घुस रहा था।
मुझसे अब रहा नहीं जा रहा था। मैं भी अब उसके साथ मरीज के लेटने वाली मेज पर 69 की अवस्था में आ चुका था और उसकी चूत चाट रहा था। वो मेरे लंड को चूसे जा रही थी।
हम लोग बस एक दूसरे में खोये हुए थे और क्लिनिक अंदर से बंद होने का कारण किसी के आने का डर भी नहीं था।
कुछ मिनट तक 69 अवस्था में रहने के बाद अचानक से मालविका जोर-जोर से हिलने लगी और सारा पानी मेरे मुंह पर ही छोड़ दिया।
उसका स्वाद बड़ा ही अच्छा था और मैं अब भी उसकी चूत चाटे जा रहा था और उसे गरम करने लगा।
वो अब भी मेरा लंड मुँह में लिए थी। 3-4 मिनट बाद ही वो फिर से तपने लगी और मुझसे बोली- कुणाल, अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है… प्लीज अब मेरी गर्मी शांत कर दो… और अपनी गाड़ी को सही जगह पार्क कर दो… इस जानवर का पिंजरा कब से इसके लिए तड़प रहा है।
यह सुनकर मैं सीधा हुआ और उसकी चूत के पास आकर बैठ गया। उसके दोनों पैरों को अपने कंधे पर रख दिया।
मुझे पता था कि इस अवस्था में सेक्स करने में मजा भी आता है और लड़की के अंदर पूरा जाता है।
मैंने थूक निकाला और उसकी चूत पर लगा दिया। अपने लंड को ठीक उसके छेद के ऊपर टिका दिया।
चूंकि आज तक मालविका ने किसी के साथ कुछ नहीं किया था तो उसकी चूत बड़ी ही मुलायम और टाइट थी।
मैंने अपने हाथों से उसकी चूत को थोड़ा सा खोला और लंड के टोपे को थोड़ा अंदर घुसाया।
जरा सा घुसते ही वो चिल्ला पड़ी और लंड बाहर निकालने को कहने लगी। लेकिन मुझे पता था कि पहली बार में लड़कियाँ ऐसे ही कहती हैं।
मैंने उसकी कमर के नीचे हाथ रखा और थोड़ा सा ऊपर किया। ज्यादा टाइट होने के कारण उसकी चूत में लंड बड़ी मुश्किल से ही जा पा रहा था।
मैंने थोड़ा सा धक्का लगाया और लंड थोड़ा और अंदर चला गया।
उसने मुझे धक्का देकर हटाने की बहुत कोशिश की मगर मैं हिला नहीं और चूत में आधे लंड को घुसा दिया।
वो दर्द के मारे चिल्ला रही थी बहुत जोर से। उसकी चीख से सारा क्लिनिक गूंज रहा था।
मैं आधे लंड को घुसा कर रुक गया ताकि उसका दर्द थोड़ा कम हो जाए।
दो मिनट बाद मैंने एक और धक्का लगाया और पूरा लंड उसकी चूत में समा चुका था।
शायद उसे ज्यादा दर्द हो रहा था जिस कारण उसकी आँखों में आँसू आ गए थे। वो जोर-जोर से आह… आह… आह… उई… इ..ई..आह… ह्ह…करने लगी।
उसके चिल्लाने से मुझे भी अच्छा लग रहा था।
मैं धक्कों पे धक्के लगाये जा रहा था और कुछ देर बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया।
मालविका की हालत बड़ी खराब थी। उसकी चूत से खून बह रहा था। उससे चला भी नहीं जा रहा था।
मैंने उसका हाथ पकड़ा और उसे बाथरूम में ले गया। अपने हाथों से ही उसकी सफाई की।
फिर मैंने मालविका को लिटा दिया। वो मुझसे नजर नहीं मिला पा रही थी।
जब बाहर मौसम ठीक हो गया तो वो जाने लगी। मैंने उससे उस समय कुछ नहीं कहा।
वो चली गई और मैं अगले मौके की इंतजार करने लगा।
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