Didi sex story, Gori chut chudai sex story, Hotel room chudai sex story, Dost ki shaadi chudai sex story: हैलो दोस्तों, मेरा नाम ऋषभ है और मैं अलीगढ़ का रहने वाला हूं। मेरी उम्र 25 साल है और मैं एक बिजनेसमैन हूं। ये कहानी मेरे साथ घटी एकदम सच्ची घटना की है, जिसमें मेरे एक दोस्त की बुआ की लड़की यानी करुणा दीदी ने खुद मेरे सामने सारे कपड़े उतारे और मुझे उकसाकर चुदवाया।
बात करीब एक महीने पहले की है, जब मैं अपने दोस्त अमर की शादी में आगरा के एक फार्म हाउस पर गया था। अमर ने मुझे वहां कई लोगों से मिलवाया, जिनमें उसकी बुआ की लड़की करुणा भी थीं। करुणा दीदी सच में बहुत खूबसूरत थीं। उनका दूध जैसा गोरा रंग, 5 फीट 6 इंच की लंबाई, भरा-पूरा जिस्म, जैसे कोई अप्सरा धरती पर उतर आई हो। उम्र करीब 29 साल रही होगी और फिगर 36-28-36 का परफेक्ट।
उन्होंने एक खूबसूरत लहंगा-चोली पहनी हुई थी, ब्लाउज बैकलेस था और उसमें से उनका गोरा बदन साफ झलक रहा था। मैं भी उन्हें अमर की तरह दीदी ही कहकर बुला रहा था।
शादी के दौरान मैं ज्यादातर करुणा दीदी के पास ही रहा। बातों-बातों में पता चला कि वो दिल्ली में एक बैंक में क्लर्क हैं और दिल्ली से सीधे आगरा शादी में आई हुई हैं। वो एक होटल में रुकी हुई थीं।
जयमाला के बाद ज्यादातर रिश्तेदार जा चुके थे। तभी करुणा दीदी ने अमर से कहा, “भाई, मैं थोड़ा आराम कर लूंगी, होटल चलती हूं। कोई मुझे छोड़ दे।” अमर ने तुरंत मुझे देखकर कहा, “ऋषभ, तू अपनी गाड़ी से दीदी को होटल छोड़ आ।”
मैंने हामी भरी, “हां बिल्कुल दीदी, चलिए मैं छोड़ आता हूं।” दीदी ने सबको बाय किया और मैं उन्हें गाड़ी में बिठाकर होटल ले आया।
होटल पहुंचते ही करुणा दीदी बोलीं, “गाड़ी पार्किंग में लगा और ऊपर रूम नंबर 103 में आ जा भाई, मुझे तेरी जरूरत पड़ेगी।”
ये कहकर वो तेज कदमों से अंदर चली गईं। मैंने गाड़ी पार्क की और लिफ्ट लेकर रूम 103 पर पहुंचा। दरवाजा थोड़ा खुला था, मैंने धक्का देकर अंदर कदम रखा। कमरा हल्की रोशनी वाला था, एसी चल रहा था, बेड पर दीदी बैठी हुई थीं, अभी भी लहंगे-चोली में, लेकिन चेहरे पर एक हल्की मुस्कान थी।
उन्होंने मुझे देखते ही कहा, “सुन, ये लहंगा निकालने में मदद कर जरा।” और नाड़ा मेरी तरफ कर दिया।
मैं उनके ठीक सामने खड़ा हो गया। नाड़े की गांठ को धीरे-धीरे खोला, उंगलियां उनके नरम पेट की त्वचा को छू रही थीं। लहंगा ढीला होते ही मैंने उसे दोनों तरफ से पकड़कर धीरे-धीरे नीचे सरकाया। लहंगा जमीन पर गिरा तो दीदी मेरे सामने सिर्फ बैकलेस ब्लाउज और नीचे बैंगनी पैंटी में खड़ी थीं। उनका गोरा जिस्म इतना चमकदार था कि मेरी सांसें रुक सी गईं। पतली कमर, भरे हुए चूतड़, मोटी-चिकनी जांघें, सब कुछ परफेक्ट। मेरा लंड पैंट के अंदर पहले से ही पूरी तरह खड़ा हो चुका था, दबाव से दर्द हो रहा था।
दीदी ने बेड से एक सफेद तौलिया उठाया, उसे कमर के चारों तरफ लपेट लिया और मेरी तरफ पीठ करके खड़ी हो गईं। “जरा ये ब्लाउज भी खोल दे।” उनकी आवाज में हल्की सी कंपकंपी थी, जैसे वो खुद भी उत्सुक हों। ब्लाउज में पीछे सिर्फ एक हुक लगा था। मैंने उंगलियां लगाईं, हुक को धीरे से खोला। ब्लाउज ढीला हुआ तो मैंने कंधों से नीचे सरकाकर पूरी तरह उतार दिया। ब्लाउज जमीन पर गिरा। अब नीचे बैंगनी ब्रा में उनके 36 के गोरे-गोरे बूब्स उभरे हुए थे, गहरी दरार साफ दिख रही थी, ब्रा के कपड़े से बाहर झांकते हुए।
मैं रुक नहीं सका। बिना कुछ कहे ब्रा के पीछे के हुक भी खोल दिए और ब्रा को कंधों से नीचे सरकाकर उतार फेंका। दीदी चौंककर दोनों हाथों से अपने बूब्स ढकने लगीं, “अरे इसे क्यों उतार दिया?”
मैंने उनकी आंखों में देखा और मुस्कुराकर कहा, “दीदी, मैंने सोचा आप इसे भी उतरवाओगी ही… तो मैंने मदद कर दी।”
कहानी का अगला भाग: दीदी को पेल कर गोरे चूतड़ लाल कर दिया – Part 2
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