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दीदी को पेल कर गोरे चूतड़ लाल कर दिया

कहानी का पिछला भाग: दीदी को पेल कर गोरे चूतड़ लाल कर दिया – Part 1

वो मेरे पैंट की तरफ नजर डालीं, जहां उभार इतना साफ था कि छुप नहीं रहा था। मुस्कुराकर बोलीं, “मुझे तेरी नियत अच्छी नहीं लग रही।”

मैं हंस पड़ा, “दीदी, आप जैसी माल सामने आधी नंगी खड़ी हो तो लंड तो खड़ा हो ही जाएगा। इतना गोरा रंग, ऐसे भरे हुए बूब्स, मोटी जांघें, गोल चूतड़… सच में लगता है आपकी चूत भी उतनी ही गोरी होगी।”

दीदी धीरे-धीरे हाथ हटाने लगीं। उनके गुलाबी निप्पल्स छोटे-छोटे लेकिन पूरी तरह तने हुए, सख्त थे। वो मुस्कुराईं और धीरे से बोलीं, “जितनी तूने अब तक देखी होंगी या चोदी होंगी, उन सबसे ज्यादा गोरी हूं।”

बस इतना सुनते ही मैंने उन्हें अपनी बांहों में कसकर खींच लिया। उनके नरम, गर्म होंठ मेरे होंठों से जा टकराए। मैंने उनके निचले होंठ को हल्का सा काटा, फिर जीभ अंदर डालकर उनकी जीभ से खेलने लगा। दीदी ने भी जवाब दिया, उनकी जीभ मेरी जीभ से लिपट गई। साथ ही मेरे दोनों हाथ उनके बूब्स पर थे – उन्हें नीचे से ऊपर की तरफ दबाया, मसला, निप्पल्स को अंगूठे और तर्जनी से पकड़कर हल्का मरोड़ा। दीदी “म्म्म… आह्ह…” करके मेरे मुंह में ही सिसक रही थीं, उनकी सांसें तेज हो गई थीं।

मैंने उनके होंठ छोड़े और गर्दन पर होंठ रख दिए। जीभ से गर्दन की नस चाटी, हल्का सा काटा। नीचे आते हुए एक बूब मुंह में ले लिया। निप्पल को जीभ से घुमाया, चूसा, हल्का दांतों से दबाया। दूसरे बूब को हाथ से मसलता रहा, निप्पल को पिंच करता रहा। दीदी सिर पीछे करके “आह्ह… ओह्ह… ऋषभ… आह्ह… कितना अच्छा लग रहा है…” बोल रही थीं। उनके निप्पल्स और भी सख्त हो गए थे।

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मैंने तौलिया एक झटके में खींचकर फेंक दिया। अब वो सिर्फ बैंगनी पैंटी में थीं। मैं घुटनों पर बैठ गया। उनके पेट पर किस करने लगा, नाभि के चारों तरफ जीभ घुमाई, नाभि में जीभ डालकर चाटा। नीचे आते हुए पैंटी के ऊपर से ही चूत पर हाथ फेरा। दीदी की जांघें फड़फड़ा उठीं। मैंने पैंटी का किनारा मुंह से पकड़ा और धीरे-धीरे नीचे सरकाया। पैंटी जांघों से उतरी तो उनकी चूत मेरे ठीक सामने थी – एकदम चिकनी, बिना बाल वाली, गोरी-गोरी, होंठ हल्के गुलाबी और पहले से थोड़े फैले हुए, गीले। क्लिट छोटा लेकिन उभरा हुआ था।

मैंने उन्हें धीरे से घुमाया। पीछे से उनके बड़े गोरे चूतड़ों को दोनों हाथों से थामा, दबाया, चूमने लगा। जीभ से चूतड़ों की दरार चाटी, बीच-बीच में हल्का काटा। फिर उन्हें बेड पर आगे झुकाया, हाथ बेड पर टिकाए। पीछे से चूत पर जीभ फेरी – पहले बाहर से होंठ चाटे, फिर क्लिट पर जीभ रखकर दबाया। “आह्ह… ऋषभ… ओह्ह… क्या कर रहा है तू… आह्ह…” वो कांप रही थीं, जांघें सिकुड़ रही थीं।

मैंने जीभ अंदर डाली, चूत के अंदर घुमाई, चूसने लगा। क्लिट को होंठों से पकड़कर चूसा, जीभ से तेज-तेज फेरा। दीदी “आह्ह… इह्ह… ओह्ह… हां… ऐसे ही… आह्ह…” करके सिसक रही थीं। चूत से गर्म रस निकलने लगा, मेरे होंठों पर बह रहा था। मैंने उंगली भी डाली – पहले एक, फिर दो, अंदर-बाहर करके चूत को और गीला किया।

मैंने जल्दी से अपनी सारी कपड़े उतार फेंके। शर्ट, पैंट, अंडरवियर सब जमीन पर। अब मैं भी पूरी तरह नंगा था। मेरा 8 इंच लंबा, मोटा लंड सीधा खड़ा था, सुपारा लाल और चमकदार।

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मैंने लंड उनकी जांघों पर रगड़ा, चूतड़ों पर हल्का ठोका। दीदी मुड़कर बेड पर बैठ गईं। मेरे लंड को हाथ में लिया, सहलाया, सुपारे पर उंगली फेरी। “इतना बड़ा और मस्त लंड पहली बार देखा है।” फिर मुंह में ले लिया। पहले सुपारे को जीभ से चाटा, फिर धीरे-धीरे आधा मुंह में लिया। ग्ग्ग्ग… गी… गों… गोग… आवाजें आने लगीं। वो गले तक ले रही थीं, हाथ से जड़ को सहला रही थीं, लंड को चूसते हुए आंखों से मुझे देख रही थीं।

मैंने कहा, “दीदी, 69 बनाते हैं।” मैं बेड पर लेट गया। दीदी मेरे ऊपर चढ़ीं, उनकी चूत मेरे मुंह के ठीक ऊपर। मैंने चूत चाटनी शुरू की – जीभ अंदर-बाहर, क्लिट चूसा, उंगली डालकर घुमाई। वो मेरा लंड मुंह में लेकर जोरों से चूस रही थीं, गले तक ले जा रही थीं। उनकी चूत मेरे मुंह पर रगड़ रही थी, रस मेरे चेहरे पर बह रहा था।

फिर दीदी उठीं। मेरे लंड को हाथ से पकड़ा, अपनी चूत के होंठों पर सेट किया और धीरे से बैठ गईं। “आह्ह… ओह्ह… कितना मोटा है… आह्ह…” लंड धीरे-धीरे अंदर गया। वो रुक गईं, आंखें बंद, सांसें तेज। फिर धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगीं। मैंने उनके बूब्स पकड़े, मसले, निप्पल्स को पिंच किया। नीचे से धक्के देने लगा। वो तेज हो गईं, “आह्ह… हां… ऐसे ही… ओह्ह… गहरा… आह्ह…”

मैंने उन्हें अपनी तरफ खींचा, होंठ चूसे। नीचे से जोर-जोर से पेलने लगा, लंड पूरी तरह अंदर-बाहर। थोड़ी देर बाद उन्हें घोड़ी बनाया। पीछे से लंड सेट किया, एक धीमा धक्का देकर पूरा अंदर। दीदी “आह्ह… ओह्ह… धीरे… आह्ह…” चिल्लाईं। मैंने कमर पकड़ी, तेज-तेज धक्के मारे। चूतड़ों पर थप्पड़ मारे – चटाक… चटाक… लाल निशान पड़ गए। “आह्ह… मार… और जोर से… ओह्ह… हां…”

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आधा घंटा ऐसे चोदने के बाद मैंने पूछा, “दीदी कहां झाड़ूं?” वो घुटनों पर बैठ गईं, “मुंह में… सब पीना है।” मैंने लंड उनके मुंह में डाला, जोर से झटके मारे। सारा गाढ़ा, गरम माल मुंह में झाड़ दिया। वो गटक गईं, लंड को चूसती रहीं, आखिरी बूंद तक साफ करती रहीं।

फिर मैंने कहा, “अब मुझे भी चाटना है।” वो लेट गईं। मैं ऊपर आया, फिर 69। मैं उनकी चूत चाट रहा था, वो मेरा लंड फिर से सख्त कर रही थीं। 20 मिनट बाद मैंने उन्हें दीवार के सहारे खड़ा किया। पीछे से लंड डाला, जोरों से पेला। उनकी चूत से रस टपक रहा था, जांघों पर बह रहा था। “आह्ह… हां… ऐसे… ओह्ह… और तेज…”

फिर मैंने उन्हें पास की टेबल पर लिटाया। पैर अपने कंधों पर रखे। लंड पूरी तरह अंदर डाला और तेज-तेज धक्के मारे। “आह्ह… इह्ह… ओह्ह… तेज… आह्ह… फाड़ दो… ओह्ह…” वो चिल्ला रही थीं, नाखून मेरी पीठ पर गड़ा रही थीं, शरीर कांप रहा था। दूसरे राउंड में डेढ़ घंटा ऐसे चोदा, कई बार पोजीशन बदली – कभी वो ऊपर, कभी मैं पीछे से, कभी साइड में। आखिर में चूत के अंदर गहराई तक लंड डालकर सारा माल झाड़ दिया।

दीदी खुशी से चमक रही थीं। हम देर तक एक-दूसरे से लिपटे रहे, चूमते रहे। दोबारा मिलकर चुदाई करने का वादा किया। फिर मैं कपड़े पहनकर वापस शादी वाली जगह लौट आया। सुबह तक रहा और अगले दिन दीदी दिल्ली चली गईं।

तो दोस्तों, ये थी मेरी और करुणा दीदी की चुदाई की कहानी। कमेंट करके जरूर बताना कैसी लगी।

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