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दीदी की चूत की तड़प

Neighbor didi hot night sex story, sister didi lesbian sex story: मैं अपना परिचय करवा दूं। मेरा नाम कुमार है, उम्र अभी 26 साल है। वैसे तो मैं कोलकाता का रहने वाला हूं पर जॉब की वजह से अभी दिल्ली में हूं। मैं साधारण कद-काठी का हूं पर बचपन से ही जिम जाता हूं इसलिए अभी भी मेरी बॉडी अच्छे आकार में है। बाकी बॉडी के बारे में धीरे-धीरे पता चल जाएगा।

मैं जो कहानी आपसे बांटने जा रहा हूं वो सच्ची है या झूठी, यह आप ही तय करना।

बात उन दिनों की है जब मैंने अपनी स्नातकी पूरी की थी। उस वक्त मेरी उम्र 21 थी। मैं अपने मम्मी-पापा और अपनी बड़ी बहन के साथ कोलकाता में एक किराए के मकान में रहता था। मेरे पापा उस वक्त सरकारी जॉब में थे। मां घर पर ही रहती थीं और हम भाई-बहन अपनी-अपनी पढ़ाई में लगे हुए थे। मेरी और मेरी बहन की उम्र में बस एक साल का फर्क है। इसलिए हम दोस्त की तरह रहते थे। हम दोनों अपनी सारी बातें एक-दूसरे से कर लेते थे, चाहे वो किसी भी विषय में हो।

मैं बचपन से ही थोड़ा ज्यादा सेक्सी था और सेक्स की किताबों में मेरा मन कुछ ज्यादा लगता था। पर मैं अपनी पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहता था इसलिए मुझसे सारे लोग काफी खुश रहते थे।

हम जिस किराए के मकान में रहते थे उसमें दो हिस्से थे, एक में हम और दूसरे में एक अन्य परिवार रहता था, जिसमें एक पति-पत्नी और उनके दो बच्चे रहते थे। दोनों काफी अच्छे स्वभाव के थे और हमारे घर-परिवार में मिलजुल कर रहते थे। मेरी मां उन्हें बहुत प्यार करती थीं। मैं भी उन्हें अपनी बड़ी बहन की तरह ही मानता था और उनके पति को जीजा कहता था। उनके बच्चे मुझे मामा-मामा कहते थे।

सब कुछ ठीक-ठाक ही चल रहा था। अचानक मेरे पापा की तबीयत कुछ ज्यादा ही खराब हो गई और उन्हें अस्पताल में दाखिल करवाना पड़ा। हम लोग तो काफी घबरा गए थे पर हमारे पड़ोसी यानी कि मेरे मुंहबोले जीजाजी ने सब कुछ संभाल लिया। हम सब लोग अस्पताल में थे और डॉक्टर से मिलने के लिए बेताब थे। डॉक्टर ने पापा को चेक किया और कहा कि उनके रीढ़ की हड्डी में कुछ परेशानी है और उन्हें ऑपरेशन की जरूरत है। हम लोग फिर से घबरा गए और रोने लगे। जीजाजी ने हम लोगों को संभाला और कहा कि चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है, सब ठीक हो जाएगा। उन्होंने डॉक्टर से सारी बात कर ली और हम सब को घर जाने के लिए कहा। पहले तो हम कोई भी घर जाने को तैयार नहीं थे पर बहुत कहने पर मैं, मेरी बहन और अनीता दीदी मान गए। अनीता मेरी मुंहबोली बहन का नाम था।

हम तीनों लोग घर वापस आ गए। रात जैसे-तैसे बीत गई और सुबह मैं अस्पताल पहुंच गया। वहां सब कुछ ठीक था। मैंने डॉक्टर से बात की और जीजा जी से भी मिला। उन लोगों ने बताया कि पापा की शूगर थोड़ी बढ़ी हुई है इसलिए हमें थोड़े दिन रुकना पड़ेगा, उसके बाद ही उनकी सर्जरी की जाएगी। बाकी कोई घबराने वाली बात नहीं थी। मैंने मां को घर भेज दिया और उनसे कहा कि अस्पताल में रुकने के लिए जरूरी चीजें शाम को लेते आएं। मां घर चली गईं और मैं अस्पताल में ही रुक गया। जीजा जी भी अपने ऑफिस चले गए।

जैसे-तैसे शाम हुई और मां सारी चीजें लेकर वापस अस्पताल आ गईं। हमने पापा को एक निजी कमरे में रखा था जहां एक और बिस्तर था परिचारक के लिए। मां ने मुझसे घर जाने को कहा। मैं अस्पताल से निकला और टैक्सी स्टैंड पहुंच गया। मैंने वहां एक सिगरेट ली और पीने लगा। तभी मेरी नजर वहीं पास में एक बुक-स्टाल पर चली गई। मैंने पहले ही बताया था कि मुझे सेक्सी किताबें, खासकर मस्तराम की किताबों का बहुत शौक है। मैं उस बुक-स्टाल पर चला गया और कुछ किताबें खरीदी और अपने घर के लिए टैक्सी लेकर निकल पड़ा।

घर पहुंचा तो मेरी बहन ने जल्दी से आकर मुझसे पापा के बारे में पूछा और तभी अनीता दीदी भी अपने घर से बाहर आ गईं और पापा की खबर पूछी। मैंने सब बताया और बाथरूम में चला गया। सारा दिन अस्पताल में रहने के बाद मुझे फ्रेश होने की बहुत जल्दी पड़ी थी। मैं सीधा बाथरूम में जाकर नहाने लगा। बाथरूम में जाने से पहले मैंने मस्तराम की किताबों को फ्रिज पर यूं ही रख दिया। हम दोनों भाई-बहन ही तो थे केवल इस वक्त घर पर, और उसे पता था मेरी इस आदत के बारे में। इसलिए मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया।

जब मैं नहाकर बाहर आया तो मेरी बहन को देखा कि वो किताबें देख रही है। उसने मुझे देखा और थोड़ा सा मुस्कुराई। मैंने भी हल्की सी मुस्कान दी और मैं अपने कमरे में चला गया। मैं काफी थक गया था इसलिए बिस्तर पर लेटते ही मेरी आंख लग गई।

रात के करीब 11 बजे मुझे मेरी बहन ने उठाया और कहा, “खाना खा लो!”

मैं उठा और हाथ-मुंह धोकर खाने के लिए मेज पर गया, वहां अनीता दीदी भी बैठी थीं। असल में आज खाना अनीता दीदी ने ही बनाया था। मैंने खाना खाना शुरू किया और साथ ही साथ टीवी चला दिया। हम इधर-उधर की बातें करने लगे और खाना खाकर टीवी देखने लगे।

हम तीनों एक ही सोफे पर बैठे थे, मैं बीच में और दोनों लड़कियां मेरे आजू-बाजू। काफी देर बातचीत और टीवी देखने के बाद हम लोग सोने की तैयारी करने लगे। मैं उठा और सीधे फ्रिज की तरफ गया क्योंकि मुझे अचानक अपनी किताबों की याद आई। मुझे वहां पर बस एक ही किताब मिली जबकि मैं तीन किताबें लेकर आया था। सामने ही अनीता दीदी बैठी थीं इसलिए कुछ पूछ भी नहीं सकता था अपनी बहन से। खैर मैंने सोचा कि जब अनीता दीदी अपने घर में चली जाएंगी तो मैं अपनी बहन से पूछूंगा।

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थोड़ी देर तक तो मैं अपने कमरे में ही रहा, फिर उठकर बाहर हॉल में आया तो देखा मेरी बहन अपने कमरे में सोने जा रही थी। मैंने उसे आवाज लगाई, “नेहा, मैंने यहां तीन किताबें रखी थीं, एक तो मुझे मिल गई लेकिन बाकी दो और कहां हैं?”

“मेरे पास हैं, पढ़कर लौटा दूंगी मेरे भैया!” और उसने बड़ी ही सेक्सी सी मुस्कान दी।

मैंने कहा, “लेकिन तुम्हें दो-दो किताबों की क्या जरूरत है? एक रखो और दूसरी लौटा दो, मुझे पढ़नी है।”

उसने मेरी बात का कोई जवाब नहीं दिया और बस कहा कि आज नहीं कल दोनों ले लेना।

मैं अपना मन मारकर अपने कमरे में गया और किताब पढ़ने लगा। पढ़ते-पढ़ते मैंने अपना लंड अपनी पैंट से बाहर निकाला और मुठ मारने लगा। किताब में लिखी गर्म कहानी पढ़ते हुए मेरा लंड और सख्त हो गया, मैंने उसे ऊपर-नीचे करके सहलाया, आह… कितना मजा आ रहा था, धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाई और आखिरकार झड़ गया। मैंने अपना लंड साफ करके सो गया।

रात को अचानक मेरी आंख खुली तो मैं पानी लेने के लिए हॉल में फ्रिज के पास पहुंचा। जैसे ही मैंने फ्रिज खोला कि मुझे बगल के कमरे से किसी के हंसने की आवाज सुनाई दी। मैंने ध्यान दिया तो पता लगा कि मेरी बहन के कमरे से उसकी और किसी और लड़की की आवाज आ रही थी। नेहा का कमरा हॉल के पास ही है। मैं उसके कमरे के पास गया और अपने कान लगा दिए ताकि मैं यह जान सकूं कि अंदर कौन है और क्या बातें हो रही हैं।

जैसे ही मैंने अपने कान लगाए मुझे नेहा के साथ वो दूसरी आवाज भी सुनाई दी। गौर से सुना तो वो अनीता दीदी थीं। वो दोनों कुछ बातें कर रही थीं। मैंने ध्यान से सुनने की कोशिश की, और जो सुना तो मेरे कान ही खड़े हो गए।

अनीता दीदी नेहा से पूछ रही थीं, “हाय नेहा, ये कहां से मिली तुझे? ऐसी किताबें तो तेरे जीजा जी लाते थे पहले, जब हमारी नई-नई शादी हुई थी!”

“अच्छा तो आप पहले भी इस तरह की किताबें पढ़ चुकी हैं?”

“हां, मुझे तो बहुत मजा आता है। लेकिन अब तेरे जीजू ने लाना बंद कर दिया है। और तुझे तो पता है कि मैं थोड़ी शर्मीली हूं इसलिए उन्हें फिर से लाने को नहीं कह सकती, और वो हैं कि कुछ समझते ही नहीं।”

“कोई बात नहीं दीदी, जब भी आपको पढ़ने का मन करे तो मुझसे कहना, मैं आपको दे दूंगी।”

“लेकिन तेरे पास ये आई कहां से?”

“अब छोड़ो भी न दीदी, तुम बस आम खाओ, पेड़ मत गिनो।”

“पर मुझे बता तो सही!”

“लगता है तुम नहीं मानोगी!”

“मैं कितनी जिद्दी हूं, तुझे पता है न। चल जल्दी से बता!”

“तुम पहले वादा करो कि तुम किसी को भी नहीं बताओगी!”

“अरे बाबा, मुझ पर भरोसा रखो, मैं किसी को भी नहीं बताउंगी।”

“ये किताबें सोनू लेकर आता है।”

“हे भगवान!” अनीता दीदी के मुंह से एक हल्की सी चीख निकल गई, “तू सच कह रही है? सोनू लेकर आता है?”

नेहा उनकी शकल देख रही थी, “तुम इतना चौंक क्यों रही हो दीदी?”

अनीता दीदी ने एक लंबी सांस ली और कहा, “यार, मैं तो सोनू को बिलकुल सीधा-साधा और शरीफ समझती थी। मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा कि वो ऐसी किताबें भी पढ़ता है।”

“इसमें कौन सी बुराई है दीदी, आखिर वो भी मर्द है, उसका भी मन करता होगा!”

“हां यह तो सही बात है!” दीदी ने मुस्कुराते हुए कहा, “लेकिन एक बात बता, ये किताब पढ़कर तो सारे बदन में हलचल मच जाती है, फिर तुम लोग क्या करते हो? कहीं तुम दोनों आपस में ही तो……?”

अनीता दीदी की आवाज में एक अजीब सा उतावलापन था। उन्हें शायद ऐसा लग रहा था कि हम भाई-बहन आपस में ही चुदाई का खेल न खेलते हों।

इधर उन दोनों की बातें सुनकर मेरी आंखों की नींद ही गायब हो गई। मैंने अब हौले से अंदर झांका और उन्हें देखने लगा। वो दोनों बिस्तर पर एक-दूसरे के साथ लेटी हुई थीं और दोनों पेट के बल लेट कर एक साथ किताब को देख रही थीं।

तभी दीदी ने फिर पूछा, “बोल न नेहा, क्या करते हो तुम दोनों?” अनीता दीदी ने नेहा की बड़ी-बड़ी चूचियों को अपने हाथों से मसल डाला।

“ऊंह, दीदी… क्या कर रही हो? दर्द होता है…” नेहा ने अपने उरोजों को अपने हाथों से सहलाया और अनीता दीदी की तरफ देख कर मुस्कारने लगी।

अनीता दीदी की आंखों में एक शरारत भरी चमक थी और एक सवाल था। नेहा ने उनकी तरफ देखा और कहा, “आप जैसा सोच रही हैं वैसा नहीं है दीदी। हम भाई-बहन चाहे जितने भी खुले विचार के हों, पर हमने आज तक अपनी मर्यादा को नहीं लांघा है। हमारा रिश्ता आज भी वैसे ही पवित्र है जैसे एक भाई-बहन का होता है।”

यह सच भी है, हम भाई-बहन ने कभी भी अपनी सीमा को लांघने की कोशिश नहीं की थी। खैर, अनीता दीदी ने नेहा के गालों पर एक चुम्बन लिया और कहा, “मैं जानती हूं नेहा, तुम दोनों कभी भी ऐसी हरकत नहीं करोगे।”

“अच्छा नेहा एक बात बता, जब तू यह किताब पढ़ती है तो तुझे मन नहीं करता कि कोई तेरे साथ कुछ करे और तेरी चूत को चोद-चोद कर शांत करे, उसकी गर्मी निकाले?” अनीता दीदी के चेहरे पर अजीब से भाव आ रहे थे जो मैंने कभी भी नहीं देखा था। उनकी आंखें लाल हो गई थीं।

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“हाय दीदी, क्या पूछ लिया तुमने, मैं तो पागल ही हो जाती हूं। ऐसा लगता है जैसे कहीं से भी कोई लंड मिल जाए और मैं उसे अपनी चूत में डाल कर सारी रात चुदवाती रहूं!”

“फिर क्या करती हो तुम?”

नेहा ने एक गहरी सांस ली और कहा, “बस दीदी, कभी-कभी उंगली या मोमबत्ती से काम चला लेती हूं!”

दीदी ने नेहा को अपने पास खींच लिया और उसके होठों पर एक चुम्मा धर दिया। नेहा को भी अच्छा लगा। दोनों ने एक-दूसरे को पकड़ लिया और सहलाना शुरू कर दिया। अनीता दीदी ने धीरे से नेहा के होठों को चूमा, उनकी जीभ नेहा की जीभ से मिली, दोनों की सांसें तेज हो गईं। आह… ऊंह… दीदी ने नेहा की गर्दन पर चुम्बन किया, फिर नीचे उतरते हुए उसके कंधों को चाटा। नेहा की सिसकारियां निकल रही थीं, “आह दीदी… इतना अच्छा लग रहा है…” दीदी ने नेहा की चूचियों को सहलाया, निप्पल्स को उंगलियों से दबाया। नेहा की आंखें बंद हो गईं, “ऊंह… हां दीदी, और जोर से…” दोनों की बॉडी में गर्मी बढ़ रही थी। नेहा ने भी दीदी की पीठ सहलाई, उनकी गांड पर हाथ फेरा। दोनों एक-दूसरे को कसकर पकड़ रही थीं, उनकी चूतें गीली हो रही थीं। दीदी ने नेहा की चूत पर हाथ रखा और धीरे से रगड़ना शुरू किया। नेहा चिल्लाई, “आह… दीदी, उंगली अंदर डालो न…” दीदी ने अपनी उंगली नेहा की चूत में डाली, अंदर-बाहर करने लगीं। नेहा की सांसें तेज हो गईं, “ऊंह… हां… आह… और तेज…” दीदी, मुझे चाटो न… दीदी ने नेहा को लिटाया और उसकी चूत पर मुंह लगाया, जीभ से चाटने लगीं। नेहा की बॉडी कांप रही थी, “आह… ऊंह… दीदी, कितना मजा आ रहा है…” नेहा ने दीदी की चूत को सहलाया, दोनों 69 पोजिशन में आ गईं, एक-दूसरे की चूत चाट रही थीं। गी… गी… की आवाजें आ रही थीं। दीदी की सिसकारियां, “आह नेहा… हां… और गहराई से…” दोनों की बॉडी में आग लगी थी। नेहा ने दीदी की क्लिट को चूसा, दीदी चिल्लाई, “ऊंह… हां… मैं झड़ने वाली हूं…” दोनों एक साथ झड़ीं, “आह… ऊंह… ह्ह… इह…” उनकी सांसें तेज चल रही थीं, बॉडी पसीने से भीगी थी।

यहां बाहर मेरी हालत ऐसी हो रही थी जैसे मैं तेज धूप में खड़ा हूं, मैं पसीने-पसीने हो गया था और मेरे लंड की तो बात ही मत करो एक दम खड़ा होकर सलामी दे रहा था। मैंने फिर उनकी बातें सुननी शुरू कर दी।

तभी अचानक मैंने देखा कि अनीता दीदी ने नेहा की टी-शर्ट के अंदर अपना हाथ डाल दिया और उसकी चूचियों को पकड़ लिया और धीरे-धीरे सहलाने लगी। नेहा को बहुत मजा आ रहा था। उसके मुंह से प्यार भरी सिसकारियां निकल रही थीं।

“ऊफ दीदी… मुझे कुछ हो रहा है… आपकी उंगलियों में तो जादू है।”

फिर अनीता दीदी ने पूछा, “अच्छा नेहा एक बात बता, तूने कभी किसी लंड से अपनी चूत की चुदाई करवाई है क्या?”

“नहीं दीदी, आज तक तो मौका नहीं मिला है। आगे भगवान जाने कौन सा लंड लिखा है मेरे चूत की किस्मत में।” नेहा अपनी आंखें बंद करके बातें किए जा रही थी, “दीदी, तुमने तो खूब चुदाई करवाई होगी अपनी, बहुत मजे लिए होंगे जीजाजी के साथ… बताओ न दीदी कैसा मजा आता है जब सचमुच का लंड अंदर जाता है तो…?”

“यह तो तुझे खुद ही महसूस करना पड़ेगा मेरी बन्नो रानी… इस एहसास को शब्दों में बताना बहुत मुश्किल है…”

“हाय दीदी मुझे तो सच में जानना है कि कैसा मजा आता है इस चूत की चुदाई में… तुमने तो बहुत मजे किए है जीजाजी के साथ, बोलो न कैसे करते हो आप लोग? क्या जीजा जी आपको रोज चोदते हैं?”

तभी अनीता दीदी थोड़ा सा उदास हो गई और नेहा की तरफ देख कर कहा, “अब तुझे क्या बताऊं, तेरे जीजा जी तो पहले बहुत रोमांटिक थे। मुझे एक मिनट भी अकेला नहीं छोड़ते थे। जब भी मन किया मुझे जहां मर्जी वहां पटक कर मेरी चूत में अपना लंड डाल देते थे और मेरी जमकर धुनाई करते थे।”

“क्या अब नहीं करते?” नेहा ने पूछा।

“अब वो पहले वाली बात नहीं रही, अब तो तेरे जीजाजी को टाइम ही नहीं मिलता और मैं भी अपने बच्चों में खोई रहती हूं। आजकल तेरे जीजाजी मुझे बस हफ्ते एक या दो बार ही चोदते हैं वो भी जल्दी-जल्दी से, मेरी नाइटी उठा कर अपना लंड मेरी चूत में डाल कर बस 10 मिनट में ही लंड का माल चूत में झाड़ देते हैं।”

यह बात सुनकर मेरा दिमाग ठनका। मैंने पहले कभी भी अनीता दीदी को सेक्स की नजरों से नहीं देखा था। अब मेरे दिमाग में कुछ शैतानी घूमने लगी। मैं मन ही मन उनके बारे में सोचने लगा… ऐसा सोचने से ही मेरा लंड अब बिल्कुल स्टील की रॉड की तरह खड़ा हो गया।

अनीता दीदी को उदास देख कर नेहा ने उनके गालों पर एक चुम्मा लिया और कहा, “उदास न हो दीदी, अगर मैं कुछ मदद कर सकूं तो बोलो। मैं तुम्हारे लिए कुछ भी करूंगी, मेरा वादा है तुमसे।”

दीदी हल्के से मुस्कुराई और कहा, “मेरी प्यारी बन्नो, जब जरूरत होगी तो तुझसे ही तो कहूंगी, फिलहाल अगर तू मेरी मदद करना चाहती है तो बोल!”

“हां हां दीदी, तुम बोलो मैं क्या कर सकती हूं?”

“चल आज हम एक-दूसरे को खुश करते हैं और एक-दूसरे का मजा लेते हैं…” नेहा थोड़ा सा मुस्कुराई और अनीता दीदी को चूम लिया।

अनीता दीदी ने नेहा को बिस्तर से उठने के लिए कहा और खुद भी उठ गई। दोनों बिस्तर पर खड़े होकर एक-दूसरे के कपड़े उतारने लगीं। नेहा की पीठ मेरी तरफ थी और अनीता दीदी का चेहरा मेरी तरफ। नेहा ने अनीता दीदी की नाइटी उतार दी और दीदी ने उसकी टी-शर्ट।

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हे भगवान! मेरे मुंह से तो सिसकारी ही निकल गई, आज से पहले मैंने अनीता दीदी को इतना खूबसूरत नहीं समझा था। वो बिस्तर पर सिर्फ अपनी ब्रा और पैंटी में खड़ी थीं। दूधिया बदन, सुराहीदार गर्दन, बड़ी-बड़ी आंखें, खुले हुए बाल और गोरे-गोरे जिस्म पर काली ब्रा जिसमें उनके 36 साइज के दो बड़े-बड़े उरोज ऐसे लग रहे थे जैसे किसी ने दो सफेद कबूतरों को जबरदस्त कैद कर दिया हो। उनकी चूचियां बाहर निकलने के लिए तड़प रही थीं। चूचियों से नीचे उनका सपाट पेट और उसके थोड़ा सा नीचे गहरी नाभि, ऐसा लग रहा था जैसे कोई गहरा कुआं हो। उनकी कमर 26 से ज्यादा किसी भी कीमत पर नहीं हो सकती। बिल्कुल ऐसी जैसे दोनों पंजों में समां जाए। कमर के नीचे का भाग देखते ही मेरे तो होंठ और गला सूख गया। उनकी गांड का साइज 36-37 के लगभग था। बिल्कुल गोल और इतना खूबसूरत कि उन्हें तुरंत जाकर पकड़ लेने का मन हो रहा था। कुल मिलाकर वो पूरी सेक्स की देवी लग रही थीं।

हे भगवान मैंने आज से पहले उनके बारे में कभी भी नहीं सोचा था।

इधर नेहा के कपड़े भी उतार चुकी थी और वो भी ब्रा और पैंटी में आ चुकी थी। उसका बदन भी कम सेक्सी नहीं था। 32/26/34… वो भी ऐसी थी किसी भी मर्द के लंड को खड़े-खड़े ही झाड़ दे।

“हाय नेहा, तू तो बड़ी खूबसूरत है रे, आज तक किसी ने भी तुझे चोदा कैसे नहीं। अगर मैं लड़का होती तो तुझे जबरदस्ती पटक कर तुझे चोद देती।”

“ओह दीदी, आप के सामने तो मैं कुछ भी नहीं, पता नहीं जीजाजी आपको क्यों नहीं चोदते…”

“उनकी बातें छोड़ो, वो तो हैं ही बेवकूफ!” अनीता दीदी ने नेहा की ब्रा खोल दी और नेहा ने भी हाथ बढ़ा कर दीदी की ब्रा का हुक खोल दिया।

मेरी तो सांस ही रुक गई, इतने सुंदर और प्यारे उरोज मैंने आज तक नहीं देखे थे। अनीता दीदी के दो बच्चे थे पर कहीं से भी उन्हें देख कर ऐसा नहीं लगता था कि दो-दो बच्चों ने उनकी चूचियों से दूध पिया होगा…

खैर, अब नेहा की बारी थी तो दीदी ने उसकी ब्रा का हुक भी खोल दिया और साथ ही साथ उसकी पैंटी को भी उसके बदन से नीचे खिसकाने लगी। दीदी का उतावलापन देख कर ऐसा लग रहा था जैसे उन्हें कई जन्मों की प्यास हो।

नेहा ने भी वैसी ही फुर्ती दिखाई और अनीता दीदी के पैंटी को हाथों से निकालने के लिए खींच दिया।

संगमरमर जैसी चिकनी जांघों के बीच में फूले हुए पावरोटी के जैसे बिल्कुल चिकनी और गोरी चूत को देखते ही मेरे लंड ने अपना माल छोड़ दिया…

मेरे होठों से एक सेक्सी सिसकारी निकली और मैंने दरवाजे पर ही अपना सारा माल गिरा दिया… मेरे मुंह से निकली सिसकारी थोड़ी तेज थी। शायद उन लोगों ने सुन ली थी, मैं जल्दी से आकर अपने कमरे में लेट गया और सोने का नाटक करने लगा। कमरे की लाइट बंद थी और दरवाजा थोड़ा सा खुला ही था। बाहर हॉल में हल्की सी लाइट जल रही थी जिसमें मैंने एक साया देखा। मैं पहचान गया। यह नेहा थी जो अपने बदन पर चादर डाल कर मेरे कमरे की तरफ ये देखने आई थी कि मैं क्या कर रहा हूं और वो सिसकारी किसकी थी।

थोड़ी देर वहीं खड़े रहने के बाद नेहा अपने कमरे में चली गई और उसके कमरे का दरवाजा बंद हो गया, जिसकी आवाज मुझे अपने कमरे तक सुनाई दी। शायद जोर से बंद किया गया था। मुझे कुछ अजीब सा लगा, क्योंकि आमतौर पर ऐसे काम करते वक्त लोग सारे काम धीरे-धीरे और शांति से करते हैं। लेकिन यह ऐसा था जैसे जानबूझ कर दरवाजे को जोर से बंद किया गया था। खैर जो भी हो, उस वक्त मेरा दिमाग ज्यादा चल नहीं पा रहा था। मेरे दिमाग में तो बस अनीता दीदी की मस्त चिकनी चूत ही घूम रही थी।

थोड़ी देर के बाद मैं धीरे से उठा और वापस उनके दरवाजे के पास गया, और जैसे ही मैंने अंदर झांका…

दोस्तों, अब मैं ये कहानी यहीं रोक रहा हूं। मुझे पता है आपको बहुत गुस्सा आएगा, कुछ खड़े लंड खड़े ही रह जाएंगे और कुछ गीली चूत गीली ही रह जाएगी। पर यकीन मानिए अभी तो इस कहानी की बस शुरुआत हुई है। अगर मुझे आप लोगों ने मेरा उत्साह बढ़ाया तो मैं इस कहानी को आगे भी लिखूंगा और सबके सामने लेकर आऊंगा।

वैसे भी यह मेरी पहली कहानी है, तो मुझे यह भी देखना है कि मेरी कहानी छपती भी है या नहीं और लोगों को कितनी पसंद आती है। मुझे इंतजार रहेगा आपके जवाब का। अगर आपको लगे कि यह कहानी आगे बढ़े तो मुझे अपने विचार भेजें।

आपको कैसी लगी? कृपया कमेंट के माध्यम से बताएं

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