Coaching me sex story, Teacher student chudai sex story, kunwari ladki ki pehli chudai kahani: मैं निमरत आपको अपनी सेक्सी कहानी सुना रही हूँ, मैं शिमला की रहने वाली हूँ, मैं काफी सेक्सी और मस्त मौला लड़की हूँ। मेरा बदन कमाल का है, मेरे मम्मे 36 साइज़ के हैं, मेरे मम्मे खूब बड़े-बड़े हैं, मेरे बाल भी बहुत काले, लम्बे और घने हैं। जब मैं रोड से निकलती हूँ तो लड़के मुझे देखकर सीटी मारते हैं, मेरी कॉलोनी में हर जवान लड़का मुझे चोदना चाहता है।
तो मैं आपको अपनी कहानी सुनाती हूँ। मैंने बीकॉम फर्स्ट ईयर में एडमिशन ले लिया था, मेरे सारे टीचर्स बहुत बढ़िया थे, मैंने फर्स्ट ईयर बड़ी लगन से पढ़ा। मैंने कभी क्लास भी बंक नहीं की, पर फिर भी दोस्तों मेरी फर्स्ट क्लास नहीं आई।
मैं बड़ी जोर-जोर से रोने लगी, लोकेश सर ने मुझे देखा तो बोले, “मेरे केबिन में चलो।” मैं उसके केबिन में चली गई। लोकेश सर बहुत अच्छे थे, वो सभी बच्चों को बड़ी मेहनत से पढ़ाते थे, कॉलेज में हर कोई उनकी बड़ी तारीफ करता था। “देखो निमरत! अभी तुम्हारे पास सेकंड ईयर और थर्ड ईयर दो साल हैं।”
“एक काम करो, तुम हर शाम को 7 बजे मेरे घर आ जाया करो, मैं तुमको इतनी मेहनत से पढ़ाऊँगा कि तुम्हारी फर्स्ट डिवीज़न क्लियर हो जाएगी,” वो बोले और मेरे सर पर प्यार से हाथ फेर दिया। “सर, मैं आज से ही आपके घर आना शुरू कर देती हूँ, आप कितनी फीस लेंगे?”
मैंने पूछा, “अरे निमरत, पहले तुम आओ तो सही,” लोकेश सर बोले। दोस्तों, मैंने सुना था कि जो-जो लड़की उनसे ट्यूशन पढ़ती थी, सब टॉप करती थीं, इसलिए मैं भी बहुत खुश हो गई थी। दोस्तों, मैंने उसी शाम से लोकेश सर से ट्यूशन पढ़ना शुरू कर दिया, वो मुझे बड़ी मेहनत से पढ़ाने लगे, कोई फीस की बात भी नहीं की।
एक दिन मुझे पेशाब लगी, “सर, टॉयलेट जाना है, बाथरूम किधर है?” मैंने पूछा। “उधर आगे से बायीं तरफ,” लोकेश सर बोले। मैं अंदर बाथरूम में आ गई, मैंने अपनी सलवार खोली, चड्ढी उतारी और छुल-छुल मूतने लगी। जब मैं वापस गई तो पेशाब की 2-4 बूंदें मेरी सलवार में लगी थीं।
शायद लोकेश सर ने वो भीगी जगह देख ली थी, थोड़ा मुस्कुरा दिए, मैं भी थोड़ा हंस दी, हम दोनों गुरु-चेली फिर से पढ़ने लगे। दोस्तों, जब पढ़ते-पढ़ते बोर हो गए तो गुरु जी का चाय पीने का मन हुआ, “निमरत! अगर तुम्हारे हाथों की गर्म-गर्म चाय मिल जाए तो मजा आ जाए, तुम मुझे हर रोज एक प्याला चाय पिला दिया करो, समझ लो यही मेरी फीस होगी।”
“जैसा आप कहें सर,” मैंने कहा। मैं उनके किचन में गई और चाय बनाने लगी, मैं अपने और उनके लिए चाय बना लाई। हम फिर से पढ़ने लगे। एक महीना गुजर गया, उन्होंने कोई पैसा नहीं लिया, बस मैं हर रोज उनके लिए चाय बना देती थी। एक दिन बड़ी गर्मी पड़ रही थी।
पढ़ाई करने का मेरा जरा भी मन नहीं था, सर का भी मन नहीं था, “निमरत, तुम साथ चलो तो आज कोई फिल्म देख ली जाए, कितने दिन हो गए कोई पिक्चर नहीं देखी है।” मैं मान गई, सर और मैं उनकी कार में पिक्चर देखने गए, सर ने बालकनी की टिकट ली, ये कोई हॉरर पिक्चर थी।
डर के मारे मैंने लोकेश सर का हाथ पकड़ लिया, फिर एक सीन में बड़ा डेंजर भूत था, मैं सर के सीने से चिपक गई। दोस्तों, इस तरह हम आए दिन पिक्चर, मॉल, मेले, नुमाइश जाने लगे, धीरे-धीरे मुझे भी अच्छा लगने लगा।
एक दिन एक मॉल में मैं लोकेश सर के साथ घूम रही थी, उन्होंने मेरा हाथ चूम लिया, मुझे बुरा नहीं लगा, मुझे अच्छा लगा। फिर इसी तरह कभी वो मेरा हाथ चूम लेते, कभी मैं उनका हाथ चूम लेती, धीरे-धीरे मुझे उनसे प्यार हो गया।
एक दिन जब शाम को मैं पढ़ने गई तो उन्होंने मुझे पकड़ लिया, “निमरत! मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ, अब मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता,” सर बोले। “सर, मैं भी आपसे प्यार करने लगी हूँ,” मैंने भी कहा। हम दोनों एक-दूसरे के करीब आ गए, सर ने मुझे गले से लगा लिया, मैंने भी उनको गले लगा लिया।
हम दोनों उनके बेडरूम में चले गए, सर ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया, खुद भी मेरे पास आ गए। अब हम दोनों एक-दूसरे से पूरी तरह लिपटे थे, वो मेरे रसीले मधुर होंठ पीने लगे, मैंने भी उसके होंठ पीने लगी। मेरी सांसों की सुगंध उनके बदन में समा गई, धीरे से सर ने अपनी डेनिम जींस की बेल्ट खोल दी, उसका लंड बाहर निकल आया।
पता नहीं दोस्तों, मैं कब उनके लंड से खेलने लगी, जब मुझे होश आया तब मैं लोकेश सर के लंड को चूस रही थी, मैं रंडियों की तरह बर्ताव कर रही थी। मैं पढ़ते-पढ़ते 20 साल की हो गई थी, मगर कभी लंड के दर्शन नहीं किए थे, आज मैं पहली बार किसी मर्द का जवान बड़ा सा मोमबत्ती जैसा लंड हाथ में ले हुई थी।
आज मेरे हाथ में एक अजूबा लग गया था, शायद अंदर ही अंदर मैं लंड की प्यासी थी, मेरी अन्तर्वासना आज भड़क गई थी, शायद लोक-लाज के डर से मैंने आज तक किसी लड़के से नहीं कहा कि मुझे एक बार चोद दो। जब मुझे होश आया तो मैंने सर का लंड चूसने में मस्त थी।
मैं जल्दी-जल्दी अपने हाथों से उनके लंड पकड़ कर लंड ऊपर-नीचे रगड़ रही थी, खूब फेट रही थी, फिर मुंह में लेकर चूस रही थी, “आह्ह… सर, आपका लंड कितना मोटा है,” मैंने धीमी आवाज में कहा, जबकि मेरे मन में हेजिटेशन था कि ये सही है या नहीं, लेकिन बॉडी गर्म हो चुकी थी। उधर सर ने मेरी सलवार खोल दी थी, मेरी पैंटी के अंदर हाथ डाल के चला रहे थे, “निमरत, तुम्हारी चूत कितनी गर्म है, बिलकुल मेरे लिए बनी है,” सर बोले, उनकी उंगलियां मेरी क्लिट को रगड़ रही थीं, मैं सिहर उठी, “ओह्ह… सर, धीरे,” मैंने कहा, लेकिन मन में मजा आ रहा था।
धीरे-धीरे हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए, हम दोनों अब नंगे हो गए थे, लोकेश सर मस्ती से मेरी बुर पी रहे थे, उनकी जीभ मेरी चूत की दरारों में घूम रही थी, “आह्ह… इह्ह… सर, कितना अच्छा लग रहा है,” मैं सिसक रही थी, और मैं उनका लंड पी रही थी, सर को जब मेरी चूत कुछ सूखी लगी तो उन्होंने मेरी बुर में थोड़ा थूक दिया।
अब मेरी बुर गीली हो गई और वो मजे से पीने लगे, “निमरत, तुम्हारी चूत का स्वाद कितना मीठा है, मैं तो रोज पीना चाहता हूँ,” सर बोले, उनकी जीभ अंदर-बाहर हो रही थी, मैं जोश में आ गई, “ओह्ह… आह्ह… सर, और चाटो,” मैंने कहा, मैंने भी उनके लंड पर खूब सारा थूक दिया।
अब उनका लंड चिकना हो गया, मैं मजे से रंडियों जैसे हुनर के साथ उनका लंड चूसने लगी, ग्ग्ग्ग… ग्ग्ग्ग… गी… गी… गों… गों… गोग, मेरे मुंह से आवाजें निकल रही थीं, जैसे मैं डीपथ्रोट कर रही हूँ, सर की आंखें बंद हो गईं, “आह्ह… निमरत, तुम तो कमाल हो, और चूसो मेरे लंड को,” वो बोले। लोकेश सर को बड़ी जोर की चुदास चढ़ गई, उन्होंने मुझे 2-4 थप्पड़ जड़ दिए, “चल छिनाल! मुंह खोल,” वो बोले, मेरे मुंह में उन्होंने अपना लंड पेल दिया।
मैं सांस नहीं ले पा रही थी, सर मेरे मुंह चोदने लगे, हप्प-हप्प करके वो मेरे छोटे से मुंह को बुर का छेद समझ के चोदने लगे, “आह्ह… सर, धीरे… ग्ग्ग्ग… गों… मैं चोक हो रही हूँ,” मैंने मुश्किल से कहा, लेकिन मेरी चूत तो बिलकुल गीली हो गई, दोस्तों मेरी चूत बहने लगी, फिर सर ने अपना बड़ा सा लंड निकाला और मेरे मुंह पर थपकी देने लगे, अपने हट्टे-कट्टे लंड से थपकी देने लगे।
मैं तो निहाल हो गई, लोकेश मेरे मुंह को अपने लंड से खूब जोर-जोर से मारने लगे, फिर उन्होंने मेरे मम्मों को भी अपने लंड से खूब थपकी दी, फिर से एक बार मेरे मुंह को बुर समझ के वो चोदने लगे, “ओह्ह… सर, कितना मजा आ रहा है, लेकिन डर भी लग रहा है,” मैंने हेजिटेशन से कहा, मुझे इतना अच्छा लगा कि मेरी बुर बिलकुल गीली-गीली हो गई।
दोस्तों, सर ने 2-4 तमाचे मुझे और जड़ दिए, अब उन्होंने मेरी चूत पर फोकस किया, मेरी बुर खूब बड़ी सी फूली हुई थी। मैंने कुछ दिन पहले ही झांटें बनाई थीं, सर ने अब मुझे पूरी तरह नंगा कर दिया था, मेरी पुसी बिलकुल हीरो हौंडा जैसी खूबसूरत और शानदार थी, सर मेरी बुर को गहरी नजर से देखने लगे, जैसे उसको खा जाएंगे।
एक सेकंड को तो मैं डर गई, मैंने डर से आंखें बंद कर लीं, सर मेरी पुसी को छूने लगे, मेरी पुसी मेरे गर्म जिस्म का सबसे संवेदनशील हिस्सा थी, आज तक मैंने किसी लड़के को अपनी पुसी तक नहीं पहुंचने दिया था। इसलिए लोकेश सर ही वो किस्मतवाले मर्द थे जो मेरे सबसे संवेदनशील अंग तक पहुंचे थे।
मेरा दिल जोर से धक-धक करने लगा, पता नहीं सर मेरी पुसी के साथ कैसा व्यवहार करें, सर ने एक बार मेरी शानदार बड़ी सी चूत को पप्पी ले ली। वो मस्त हो गए, मेरी बुर की फांकों और दरारों को अपनी उंगलियों से छूकर देखने लगे, मेरी बुर काली चमकदार थी और बड़ी शानदार थी, लोकेश सर तो जैसे मेरी चूत से बातें ही करने लगे।
उन्होंने 2-4 बार मेरी चूत को पप्पी दे दी, “इस चूत के लिए कितना झगड़ा-लड़ाई होता है, कितने कत्ल हो जाते हैं,” सर बोले, इसलिए मैं बार-बार कह रही थी कि सर बहुत किस्मत वाले थे, जब सर ने काफी देर तक मेरी बुर के दीदार कर लिए तो अब वो उसको बड़े प्यार से चाटने लगे, मैं सिसकियां लेने लगी, “आह्ह… ओह्ह… सर, आपकी जीभ कितनी गर्म है, मैं पिघल रही हूँ,” मैंने कहा।
सर ने मेरी बुर को खोल के देखा, मैं कुंवारी थी, सर की खुशी दोगुनी हो गई, मैं सर की नजरों में उनकी ललचाई नजरें देखी थीं। इतनी शानदार ऊपर उठी हुई बड़ी सी चूत सर ने आज पहली बार देखी थी, जब उन्होंने मेरी चूत से खूब प्यार-मुहब्बत कर ली तो अब वो मुझे चोदने लगे।
लड़कियों के इस छेद के लिए सारी दुनिया मरती है, सर भी मरे जा रहे थे, सर ने अपना पहलवान लंड मेरी बुर के दरवाजे पर रखा। मेरी दिल धक-धक करने लगा, डर से मैंने आंखें बंद कर लीं, सर ने शुरुआती धक्का मारा पर लंड फिसल के ऊपर भाग गया। मैंने आंखें बंद की कर रखी थीं क्योंकि आज तक मैंने किसी से नहीं चुदवाया था।
सर ने एक बार और कोशिश की, इस बार भी लंड दाएं-बाएं फिसल गया, सर ने अबकी बार ज्यादा फोकस किया। उसने मेरे भोसड़े पर ढेर सारा थूक दिया, अब मेरी बुर गीली हो गई, सर ने अबकी बार पूरे फोकस से धक्का मारा, लंड किसी बर्फ तोड़ने वाली मशीन की तरह मेरी बुर में अंदर घुस गया।
मेरी तो दोस्तों गांड ही फट गई, लगा कि किसी ने मुझे चाकू मार दिया हो, मुझे बहुत दर्द हुआ, “आह्ह… ह्ह्ह… सर, निकालो, बहुत दर्द हो रहा है,” मैं चिल्लाई, सर ने नीचे देखा, मेरी बुर से खून बह रहा था, मैं तड़प रही थी, सर ने एक धक्का और मारा, लंड सीधा मेरी चूत में गच से उतर गया।
मैंने सर को हटाने लगी, “निमरत बेबी! बस थोड़ा बर्दाश्त करो, अभी तुम भी मजा पाओगी,” सर बोले। मेरे तो पसीने छूट गए, मेरे सर में भी जोर का दर्द होने लगा था, बुर में तो पहले ही था। लोकेश सर अब मुझे बड़े प्यार से धीरे-धीरे चोदने लगे, वो भी चाहते थे कि मुझे कम से कम दर्द हो, मैंने किसी तरह बर्दाश्त किया।
सर मुझे होले-होले चोदने लगे, कुछ देर बाद दर्द कम हो गया और मुझे मजा मिलने लगा, “ओह्ह… सर, अब अच्छा लग रहा है, धीरे-धीरे करो,” मैंने कहा। सर ने लंड निकाल लिया और मेरी बुर पीने लगे, अब सब कुछ नॉर्मल हो गया था। जब दोबारा उन्होंने मेरे अंदर अपना लंड डाला तो मुझे दर्द नहीं हुआ, अब मुझे मजा आने लगा था।
अब लोकेश सर मुझे जल्दी-जल्दी पेलने लगे तो मेरी कमर भी ऊपर उठने लगी, मैंने अपनी टांगें और फैला लीं, जिससे सर मेरे अंदर पूरा अंदर तक घुस सकें, मैं कामयाब रही, सर अब जोर-जोर से गहरे फटके मारने लगे, “आह्ह… इह्ह… सर, और जोर से, मैं आपकी हो गई हूँ,” मैं सिसक रही थी, अब तो जैसे मैं चरम सुख में डूब गई, पर ये तो अभी शुरुआत थी।
जब 1 घंटा गुजर गया तो मैंने ही खुद चिल्लाने लगी, “सर, चोद लीजिए आज मुझे, आप मुझे कितनी मेहनत से पढ़ाते हैं, मुझसे कोई फीस भी नहीं लेते हैं, इसलिए सर, मुझपर आपका पूरा हक बनता है, आज चोद लीजिए जी भरके मुझे,” मैंने जोर-जोर से गर्म सिस्कारियां भरके कहा।
लोकेश सर मुझे धिन्चक-धिन्चक राजी खुशी से पेलने लगे, मैंने अपनी दोनों टांगें उनकी पीठ में लपेट दीं, उनका जोश दोगुना बढ़ गया, हच-हच वो मुझे चोदने लगे, “निमरत, तुम्हारी चूत कितनी टाइट है, मैं तो रोज चोदूंगा अब,” सर बोले, मैं चिल्ला रही थी, “आह्ह… ओह्ह… ह्ह्ह… सर, और जोर से, फाड़ दो मेरी चूत को,” उस दिन दोस्तों मैं खूब चूदी अपने प्यारे लोकेश सर से, उसके बाद तो जैसे चुदवाने की मुझे लत ही लग गई थी। मुझे अब मैं शाम 5 बजे ही आ जाती थी और पहले 2-4 राउंड चुदाई हो जाती थी फिर मैं पढ़ती थी।
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