Malish sex story: मेरा नाम सुप्रिया है। मैं देवरिया की रहने वाली हूँ। मैं आज पहली बार अपनी इस कहानी को लिख रही हूँ और आज मैं बहुत हिम्मत करके अपने जीवन का सच लिखने जा रही हूँ। मैं सुप्रिया अठारह साल की हूँ और एकदम भरपूर हुस्न की मालकिन हूँ। मेरा रंग हल्का सांवला है जो मेरी त्वचा को चमकदार और आकर्षक बनाता है। मेरी छाती के उभरे हुए 36 साइज के स्तन भरे भरे और नुकीले हैं जिनकी निप्पल्स हल्के दबाव पर भी सख्त हो जाते हैं और कपड़ों के नीचे भी उनकी आकृति साफ झलकती है। मेरी कमर पतली और कसी हुई है जबकि मेरे नितंब 38 इंच के मोटे गोल और नरम हैं जो चलते वक्त लहराते हैं और हर कदम पर मेरी गांड़ की दरार को थोड़ा खोलते हुए मेरे अंदर एक गुदगुदी पैदा करते हैं।
हमारे मोहल्ले के लड़के मुझे देखकर अपनी पैंट के अंदर हाथ डाल लेते हैं और अपने लंड पर हाथ फेरने लगते हैं क्योंकि मेरी देह की मादकता उन्हें बेकाबू कर देती है। मेरी चाल में एक अनोखी लचक है जो उनकी सांसें तेज कर देती है और उनकी आँखें मेरे मोटे कूल्हों और भारी स्तनों पर टिक जाती हैं। मेरा फिगर 36-27-38 है जो हर मर्द का ध्यान अपनी ओर खींच लेता है और मुझे खुद भी अपने शरीर से बहुत प्यार है।
मैंने पहले अपने बॉयफ्रेंड के साथ सेक्स के खूब मजे लिए हैं। हम घंटों तक नंगी होकर एक दूसरे के शरीर को चूमते चाटते थे। वह मेरे स्तनों को जोर जोर से मसलता मेरी निप्पल्स को चूसता और काटता जिससे मेरे पूरे शरीर में बिजली सी दौड़ जाती। मेरी चूत को उंगलियों और जीभ से गीला करता और फिर अपना सख्त लंड मेरी भीगी चूत में धीरे धीरे घुसाकर जोरदार धक्के लगाता। उसके तेज धक्कों से मेरी चूत की दीवारें फड़कतीं गर्म रस बहने लगता और मैं जोर जोर से चीखती हुई झड़ जाती। लेकिन फिर वो पढ़ाई करने के लिए बाहर चला गया और अब मैं यहाँ अकेली रह गई हूँ। मेरे शरीर में अब भी उसकी यादों से गर्मी उठती है और रातों को अकेले में मैं अपनी उंगलियों से अपनी चूत को सहलाती हूँ।
खैर ये तो मेरा परिचय था। मेरी फैमिली में हम चार लोग हैं पापा माँ बड़ा भाई और मैं। ये कहानी मेरी और मेरे भाई के बीच की है।
मैं कॉलेज में पहली वर्ष में पढ़ती हूँ और मेरा बड़ा भाई उम्र इक्कीस साल का है और वह तीसरे वर्ष का छात्र है। वह दिखने में एकदम मस्त है और उसकी बॉडी अच्छी है। उसके मजबूत बाइसेप्स चौड़ी छाती और सपाट पेट को देखकर मेरे मन में अक्सर गर्म विचार आ जाते हैं। उसकी हाइट पाँच फुट छह इंच है। हम दोनों का कॉमन रूम है।
हम आपस में बहुत लड़ाई करते रहते हैं और एक दूसरे को चिढ़ाते रहते हैं। माँ भी हमें डाँटती रहती है।
फिर एक दिन मैं कॉलेज से लेट हो गई और जब घर आई तो भाई पूछने लगा कि कहाँ गई थी। तो मैंने कहा कि फ्रेंड्स के साथ थी। फिर वो लड़ने लगा तो मैं भी चिल्ला पड़ी। उसने मुझ पर हमला कर दिया और मुझे पकड़कर नीचे गिरा दिया। फिर मैंने भी उल्टा जवाब दिया और उसे गिरा दिया और उसके पेट के ऊपर बैठ गई।
उस समय शायद उसका लंड खड़ा हो गया था। मैं स्पष्ट रूप से महसूस कर रही थी कि उसका गर्म और बहुत सख्त लंड मेरी मोटी गांड़ की गहरी दरार के बीच में जोर से दब रहा था और कपड़ों के ऊपर से भी उसकी मोटाई और नब्ज मेरी गांड़ की नरम चमड़ी पर साफ महसूस हो रही थी। मेरी सांसें तेज हो चुकी थीं और मेरा दिल जोर जोर से धड़क रहा था। मेरी चूत धीरे धीरे गर्म होने लगी थी और उसमें से हल्का सा गीलापन निकलने लगा था जो मेरी पैंटी को नम कर रहा था। मेरे कूल्हों के नीचे उसका लंड थपक थपक कर फड़क रहा था जैसे कोई गर्म लोहे की छड़ हो और मेरी गांड़ की दरार उसे पूरी तरह घेर रही थी। मैंने अपनी कमर को थोड़ा हिलाया तो उसकी मोटाई और भी गहरे तक दब गई और मेरे पूरे शरीर में एक अजीब सी लहर दौड़ गई।
मैं समझ गई थी कि ये गलत है लेकिन मेरा उस जगह से हटने का मन बिल्कुल नहीं कर रहा था। मेरे पूरे शरीर में एक अनजानी उत्तेजना और खुजली फैल रही थी जो मुझे और भी ज्यादा गीला कर रही थी। मेरी सांसें भारी हो रही थीं और मेरे स्तन ऊपर नीचे हो रहे थे। ये बात शायद भाई भी समझ गया था क्योंकि उसका लंड मेरी गांड़ पर और भी ज्यादा सख्त और बड़ा महसूस हो रहा था।
फिर उसने मुझे धक्का दिया तो मैं नीचे गिर गई और वो मेरे ऊपर आ गया।
मेरे पैर खुले होने की वजह से उसका लंड मुझे सीधा चूत पर महसूस होने लगा तो मैं झट से उसे धकेलकर वहाँ से जाने लगी। उस पल मेरे दोनों पैर पूरी तरह फैले हुए थे और भाई का पूरा वजन मेरे ऊपर आ गया था जिससे उसका गर्म सख्त लंड मेरी पतली सलवार और पैंटी के कपड़े के ऊपर से सीधे मेरी चूत की नरम फूली हुई लिप्स पर दब रहा था। मैं महसूस कर रही थी कि उसका लंड की मोटी नोक मेरी चूत के ऊपरी हिस्से पर जोर से रगड़ खा रही है और उसकी गर्मी मेरी चूत की भीगी चमड़ी तक पहुंच रही है। मेरी सांस अटक गई थी और मेरे पूरे शरीर में एक अजीब सी गर्म लहर दौड़ गई थी। मेरी चूत की दीवारें फड़कने लगी थीं और अंदर से गर्म रस बहने लगा था जो मेरी पैंटी को और भी नम कर रहा था। मैंने अपने कूल्हों को हल्का सा हिलाया तो उसका लंड मेरी चूत की दरार में और गहरे तक दब गया जिससे मेरी निप्पल्स सख्त हो गईं और मेरे स्तन भारी होकर ऊपर नीचे हिलने लगे।
मैं झट से उसे दोनों हाथों से धकेलकर उठने लगी क्योंकि मेरे मन में शर्म और उत्तेजना का मिश्रण हो रहा था लेकिन मेरे शरीर का हर हिस्सा उस लंड के स्पर्श को और ज्यादा महसूस करने के लिए तड़प रहा था। मेरी जांघों के बीच की नमी अब मेरी सलवार तक पहुंच चुकी थी और मैं उठते वक्त भी उसकी मोटाई को अपनी चूत पर आखिरी बार महसूस कर रही थी।
जब मैंने पीछे मुड़कर देखा तो भाई की पैंट में बहुत मोटा सा हिस्सा उभरा हुआ था। मैंने देखा कि उसकी पैंट का कपड़ा पूरी तरह तना हुआ था और उस मोटे उभरे हिस्से में उसका लंड की नब्ज साफ दिख रही थी जो अभी भी सख्त और लंबा लग रहा था। उसकी पैंट के ऊपर से ही उसकी लंड की मोटाई करीब तीन अंगुल की लग रही थी और सिरा थोड़ा ऊपर की ओर उठा हुआ था। मेरी आंखें उस उभरे हुए हिस्से पर अटक गईं और मैं कल्पना करने लगी कि अगर कपड़े हट जाएं तो वह कितना मोटा और लंबा होगा। मेरी सांसें तेज हो गईं और मेरी चूत फिर से गीली होने लगी थी।
मैं सोच में पड़ गई कि भाई का लंड कितना बड़ा होगा? उस दिन मैंने बाथरूम में जाकर अपनी पैंटी उतारी तो उसमें से ढेर सारा पानी निकाला। बाथरूम के शीशे के सामने खड़े होकर मैंने अपनी सलवार उतारी और पैंटी को नीचे सरकाया तो देखा कि उसकी पूरी गद्दी भारी पानी से तरबतर थी। वह गर्म चिपचिपा रस मेरी चूत की लिप्स से लेकर गांड़ की दरार तक फैला हुआ था और उसकी महक हल्की मीठी और उत्तेजक थी। मैंने पैंटी को हाथ में लिया तो उसमें से कई बूंदें मेरी उंगलियों पर टपकीं और मैंने उसे सूंघा जिससे मेरे शरीर में फिर से वही गर्मी उठी।
मैं सोच में पड़ गई कि अपने सगे भाई को टच करते ही मुझे आज क्या हो गया है? और मुझे खुद पर शर्म भी आ रही थी और वो पल याद करके मजा भी आ रहा था। मैं शर्म से लाल हो रही थी लेकिन उस पल की याद में मेरी चूत फिर से फड़कने लगी थी जहां भाई का लंड मेरी चूत पर दबा था। उसकी गर्मी अभी भी मेरी चूत की त्वचा पर महसूस हो रही थी और मेरे स्तन भारी लग रहे थे।
उस दिन मुझे बहुत खुजली हुई लेकिन मैंने उस खुजली को अपनी चूत में उंगली से शांत कर लिया। मैं बाथरूम के फर्श पर बैठ गई और अपने पैरों को फैला दिया। मेरी दो उंगलियां सीधे मेरी भीगी चूत की लिप्स पर रखीं और मैंने धीरे धीरे उन्हें अंदर सरकाया। मेरी चूत की दीवारें उन उंगलियों को चूस रही थीं और गर्म रस बाहर निकल रहा था। मैंने अपनी क्लिटोरिस को अंगूठे से रगड़ना शुरू किया जिससे मेरे कूल्हे खुद ब खुद ऊपर नीचे हिलने लगे। मेरे मुँह से हल्की आहें निकल रही थीं और मैंने अपनी आंखें बंद करके उस पल को याद किया जब भाई का लंड मेरी चूत पर दबा था। कुछ ही मिनटों में मेरी चूत सिकुड़ने लगी और मैं जोर से झड़ गई जिससे मेरी उंगलियां पूरी तरह गीली हो गईं और मेरे पैर कांपने लगे।
फिर मैंने सोच लिया कि मैं भाई को गर्म करके देखूंगी। अगर हो गया तो घर की बात घर में रहेगी और खुजली भी मिट जाएगी। अब मैं भाई के सामने छोटे-छोटे कपड़े पहनने लगी और उसे अपने 36 साइज के बूब्स भी दिखाने लग गई। मैंने टाइट टॉप्स पहनना शुरू किया जिनमें मेरे भरे हुए स्तन ऊपर से आधे दिखते थे और निप्पल्स कपड़े के नीचे सख्त उभरे रहते थे। मैं जानबूझकर बिना ब्रा के घूमने लगी ताकि मेरे स्तनों की लहर हर कदम पर दिखे।
वो भी मुझे गौर से देखता था लेकिन ऐसे बर्ताव करता था जैसे उसने कुछ न देखा हो। मैं अपनी मोटी गांड़ मटकाती थी और उसके सामने जानबूझकर ऐसे चलती थी। मेरे कूल्हे हर कदम पर लहराते थे और मेरी सलवार की पतली कपड़े की गांड़ की दरार साफ झलकती थी। मैं जानबूझकर झुककर कुछ उठाती ताकि मेरी गांड़ उसकी तरफ फैल जाए और वह मेरी मोटी नितंबों को अच्छे से देख सके।
एक दिन माँ पापा एक हफ्ते के लिए मौसी के घर शादी में चले गए और हम दोनों परीक्षा की वजह से घर में ही रह गए। ये मेरे लिए एक गोल्डन चांस था। मैंने इसके लिए एक प्लान बनाया और उसी के मुताबिक रात को छत से आते वक्त मैं सीढ़ियों से फिसल गई और ज़ोर ज़ोर से चिल्लाकर रोने लगी। मैं जानबूझकर सीढ़ी पर पैर रखकर फिसली ताकि गिरते वक्त मेरी सलवार थोड़ी ऊपर चढ़ जाए और मेरे घुटने और कमर पर चोट का बहाना बन सके।
फिर भाई दौड़ता हुआ आया और मुझे उठाकर पूछने लगा कि कहीं चोट तो नहीं लगी। तो मैंने बताया कि घुटने और कमर में मोच आ गई है। तो वो डॉक्टर के पास जाने के लिए कहने लगा लेकिन मुझसे उठा नहीं गया तो मैंने कहा कि ऐसे ही ठीक हो जाएगा। मैं उसके कंधों पर हाथ रखकर लंगड़ाते हुए चल रही थी और मेरे स्तन उसके सीने से हल्का हल्का टच हो रहे थे जिससे मेरी निप्पल्स फिर से सख्त हो गईं।
फिर उसने मुझे दर्द की गोली दी और मुझे सुला दिया। लेकिन रात को दस बजे मेरी आँख खुली तो मैंने भाई को बुलाया और उसे मालिश करने के लिए कहा तो उसने हाँ कर दिया और किचन में तेल लेने चला गया। मैंने उस दिन सूट और खुली वाली सलवार पहन रखी थी। मेरा सूट इतना ढीला था कि मेरे बूब्स का आधा हिस्सा ऊपर से दिख रहा था और सलवार की नाडी ढीली थी ताकि आसानी से ऊपर सरकाई जा सके।
फिर मैंने कहा कि मेरे घुटने और कमर की मालिश कर दे तो वो आकर मेरे पास बैठ गया। फिर मैंने अपनी सलवार को घुटने के ऊपर तक उठा लिया और भाई मालिश करने लगा तो मुझे बहुत मजा आने लगा। उसके गर्म हाथ मेरी जांघ की नरम चमड़ी पर फिसल रहे थे और तेल की चिकनाई से मेरी त्वचा चमक रही थी। हर दबाव के साथ मेरी चूत में फिर से गर्मी उठ रही थी।
फिर मैंने कहा भाई थोड़ा और ऊपर तक कर। फिर वो अपना हाथ मेरी जाँघ तक लाकर मालिश करने लगा। मैंने जब तिरछी नज़रों से देखा तो वो मेरी गांड़ को घूर रहा था और उसके पजामे में बहुत मोटा टेंट बना हुआ था। उसके पजामे का कपड़ा पूरी तरह तना हुआ था और उस टेंट के बीच में उसका लंड की मोटी आकृति साफ दिख रही थी जो बार बार फड़क रही थी। मेरी तो चूत टपकने लगी थी।
फिर मैं ऊपर कमर करके लेट गई और उसे कमर की मसाज करने के लिए कहा तो वो तुरंत बोल पड़ा कि उसके कपड़े गंदे हो जाएंगे। तो मैंने कहा कि भाई पजामा को उतार दे और फिर मालिश कर। तो उसने सुनते ही अपना पजामा हटा दिया और मेरे पास आ गया। फिर मैंने अपना सूट और ब्रा स्ट्रिप्स तक हटा लिया और उसे इशारा किया। वो तो जैसे इस पल के लिए तड़प रहा था।
फिर अपने हाथ में तेल लेकर मेरी कमर पर मलने लगा तो मेरे मुँह से आह निकल गई। उसके गर्म तेल से भरे हाथ मेरी नंगी कमर की मुलायम चमड़ी पर धीरे धीरे घूम रहे थे। तेल की चिकनाई मेरी त्वचा में गहराई तक उतर रही थी और हर दबाव के साथ मेरी मांसपेशियां आराम से ढीली पड़ रही थीं। मेरे पूरे शरीर में एक सिहरन दौड़ गई थी जिससे मेरी निप्पल्स सख्त हो गईं और मेरी चूत में हल्की सी खुजली महसूस होने लगी। मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और उसकी उंगलियों के स्पर्श का पूरा मजा लेने लगी।
तो उसने पूछा कि क्या हुआ? फिर मैंने कहा कि आराम मिल रहा है भाई ऐसे ही कर। फिर वो अपना हाथ मेरी ब्रा तक लाने लगा और कहने लगा कि सुप्रिया तेरी ये अटक रही है। मैं: क्या भाई? भाई: ये बनियान। मैं: इसे बनियान नहीं कहते हैं। भाई: तो क्या कहते हैं? मैं: भाई इसे ब्रा कहते हैं। भाई: तो ये मालिश करने में अटक रही है।
फिर मैंने उसे हटा दिया और उसे लगातार मालिश करने का इशारा किया। फिर वो मेरे कूल्हों को टच करने लग गया और ऊपर मेरे बूब्स पर उंगलियां लगाने लगा। उसकी गर्म उंगलियां मेरे मोटे कूल्हों की नरम चमड़ी को सहलाती हुई ऊपर की ओर बढ़ रही थीं। हर बार जब वह मेरे कूल्हों को दबाता तो मेरी गांड़ की दरार थोड़ी खुल जाती और मेरी चूत से हल्का गर्म रस रिसने लगता। उसकी उंगलियां मेरे भारी 36 साइज के बूब्स के नीचे पहुंचकर उन्हें हल्के से छूने लगीं जिससे मेरे स्तनों में एक गुदगुदी सी लहर दौड़ गई और मेरी निप्पल्स और भी सख्त हो गईं।
मैं: भाई थोड़ा बीच में कमर पर करो आराम मिल रहा है। भाई: मुझसे ऐसे नहीं हो रहा उसके लिए तेरी कमर के दोनों तरफ पैर रखने पड़ेंगे। मैं: कुछ सोचते हुए तो रख लो।
फिर उसने अपने दोनों पैर मेरी कमर के दोनों तरफ रख लिए और मालिश करने लगा। आह बहुत आराम मिल रहा है भाई ऐसे ही करो। फिर वो मेरे कूल्हों पर बैठ गया और उसका लंड मेरी मोटी गांड़ में अटकने लगा। मैं तो जैसे मर रही थी। मेरा मन कर रहा था कि वो अभी अपना लंड मेरी चूत में पेल दे और खूब चोदे लेकिन ऐसा नहीं हो सकता था। उसका भारी वजन मेरे कूल्हों पर बैठने से मेरी गांड़ पूरी तरह फैल गई थी और उसके गर्म लंड की मोटाई मेरी गांड़ की दरार में गहराई तक दब रही थी। मैं महसूस कर रही थी कि उसका लंड कपड़े के ऊपर से भी बहुत मोटा और सख्त है जो मेरी चूत की लिप्स को छू रहा था।
वो अपना हाथ ऊपर से लेकर नीचे मेरी गांड़ तक लाता था और जब हाथ ऊपर जाता तो उसका लंड मेरी सलवार में से अंदर घुसा जा रहा था। उसने अपने लंड को शायद मेरी गांड़ के छेद पर सेट कर दिया था और हल्का हल्का पुश करने लगा था। हर पुश के साथ उसका लंड मेरी गांड़ की नरम चमड़ी को दबाता और मेरी चूत से और ज्यादा गर्म रस निकलने लगता। मेरी सांसें तेज हो चुकी थीं और मेरे मुँह से बार बार हल्की आहें निकल रही थीं।
फिर मैंने अपनी गांड़ को थोड़ा और ऊपर उठा लिया तो भाई का लंड मेरी सलवार के ऊपर से चूत को टच होने लगा और आह के साथ मैं झड़ गई। मेरी चूत फड़कने लगी थी और भाई के लंड को भी गीलेपन का एहसास होने लगा था। मेरी चूत की दीवारें जोर जोर से सिकुड़ रही थीं और गर्म रस मेरी सलवार को पूरी तरह भिगो रहा था। उसका लंड मेरी चूत की लिप्स पर रगड़ खा रहा था जिससे मेरा पूरा शरीर कांप उठा। फिर मेरी आँखें थोड़ी देर के लिए बंद हो गईं और मैं सो गई। फिर मुझे सोती देख भाई भी चला गया।
फिर अगले दिन भाई मेरे लिए चाय लेकर आया और मुझे देखकर मुस्कुराने लगा। फिर वो चाय देकर कॉलेज चला गया और शाम को घर आया तो वो होटल से खाना लाया था। उसने मुझे उठाकर खाना खिलाया और पूछा कि अब दर्द कैसा है? तो मैंने कहा कि कल की मालिश से बहुत आराम मिला है।
भाई: ठीक है मैं आज भी मालिश कर दूँगा और सारा दर्द ठीक हो जाएगा। मैं: ठीक है भाई।
फिर रात हुई और मैंने जानबूझकर आज घुटनों तक की लंबाई की स्कर्ट पहनी और ऊपर टॉप पहना और अंदर मैंने ब्रा और पैंटी नहीं पहनी। फिर वो रात को साढ़े दस बजे रूम में आया तो मैंने दर्द का नाटक किया और उसे मालिश करने के लिए कहा तो वो तुरंत कटोरी में तेल ले आया। आज उसने शॉर्ट और ऊपर बनियान पहन रखी थी। उसका लंड आज अलग ही शेप में दिख रहा था शायद उसने भी आज अंदर अंडरवियर नहीं पहना था। फिर वो मेरे घुटने की मालिश करने लगा और मैं पेट के बल लेट गई और फिर वो मेरी स्कर्ट को धीरे धीरे ऊपर करने लगा और मालिश करने लगा।
मैं फिर से तड़पने लगी। अब मेरी मोटी गांड़ का ऊभार दिखना शुरू हो गया था। फिर मैंने जब उसकी तरफ देखा तो वो मेरी गांड़ को ललचाई नज़रों से देख रहा था। फिर मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और हल्के हल्के से कराहने लगी। अब उसकी उंगलियां मेरे कूल्हों की लाइन को छूने लगी थीं।
उसे पता चल गया था कि मैंने पैंटी नहीं पहनी है। अब फिर मैंने उसे अपनी कमर की मालिश करने को कहा तो उसने मेरा टॉप ऊपर कर दिया वो भी मेरी गर्दन तक और अब टॉप सिर्फ मेरे बूब्स में अटका हुआ था। फिर भाई पूरी कमर पर हाथ फेरने लगा और नीचे मेरी स्कर्ट को भी नीचे सरकाकर गांड़ को छूने लगा। अचानक से लाइट चली गई और पूरे कमरे में अंधेरा हो गया।
भाई: मोमबत्ती जला दूँ क्या? मैं: नहीं रहने दो भाई वैसे भी मालिश ही तो करनी है तो ऐसे ही कर दो।
अब वो मेरी कमर के दोनों तरफ पैर रखकर बैठ गया और पूरी कमर को अपने हाथों से मालिश करने लगा। वो आज मेरे कूल्हों के थोड़ा नीचे बैठ गया और धीरे धीरे ऊपर होने लगा। उसका लंड अब मेरी स्कर्ट के ऊपर से सीधा मेरी चूत को खटखटाने लगा। उसकी मोटी लंड की नोक मेरी चूत की नंगी लिप्स पर बार बार टकरा रही थी और हर टकराहट से मेरी चूत से गर्म रस बाहर निकल रहा था।
फिर मैंने अपने कूल्हों को थोड़ा ऊपर की तरफ उछाल दिया और मजे लेने लगी। भाई के बार बार ऊपर नीचे होने से मेरी स्कर्ट ऊपर होने लगी और मेरी पूरी गांड़ नंगी हो गई। अब तो मुझसे सहन करना मुश्किल हो रहा था और शायद भाई से भी सहन करना मुश्किल हो गया था। फिर उसके मुँह से भी एक हल्की सी आह निकली।
फिर मैंने महसूस किया कि अब वो सिर्फ एक हाथ से मेरी गांड़ और चूचियों को छू रहा है। मैं सोच में पड़ गई कि इसका दूसरा हाथ कहाँ है। अचानक ही मुझे कुछ गर्म हार्ड और मोटा सा अपनी गांड़ पर महसूस हुआ। मेरे तो होश उड़ गए थे। मुझे समझने में देर नहीं लगी कि भाई का दूसरा हाथ कहाँ था और मेरी गांड़ पर क्या टच हो रहा है? उसका लंड अब पूरी तरह बाहर निकला हुआ था और उसकी गर्मी मेरी नंगी गांड़ की चमड़ी को जला रही थी।
फिर उसने अपना लंड शायद बाहर निकाल लिया था। मेरी तो कंपकंपी छूट गई थी लेकिन बहुत ज्यादा आनंद भी आ रहा था। अंधेरे में कुछ दिख तो नहीं रहा था लेकिन टच होने से ये पता चल रहा था कि उसका लंड बहुत ताकतवर और लंबा मोटा है। उसकी लंड की मोटाई मेरी गांड़ की दरार को पूरी तरह भर रही थी और उसकी नोक मेरी गांड़ के छेद पर दबाव डाल रही थी। खैर मैं ऐसे ही लेटी रही और उसका लंड अब मेरी गांड़ के छेद को टच कर रहा था और ऐसा लग रहा था जैसे अभी अंदर घुस के मेरी गांड़ ही फाड़ देगा।
फिर मैंने अपनी गांड़ को थोड़ा ऊपर किया तो उसका लंड चूत के छेद पर टच होने लगा और हम दोनों के अंग आपस में मिल गए। आह वो क्या एहसास था? जैसे ही उसका लंड मेरी चूत पर टच हुआ उसने वही सेट कर दिया और अब सिर्फ उसका ऊपर का हिस्सा हिल रहा था और नीचे का एक जगह ही था। उसकी लंड की गर्म नोक मेरी चूत की भीगी लिप्स को खोल रही थी और मेरी चूत का रस उसकी लंड पर चिपक रहा था।
फिर मैंने कहा कि भाई थोड़ा ऊपर कंधों तक मालिश करो तो अब जब वो अपने हाथों को ऊपर तक लाया तो उसके लंड का प्रेशर मेरी चूत पर बढ़ने लगा और हल्का सा पुश होने लगा। जैसे ही उसने दोबारा ऊपर की तरफ हाथ किए तो उसका लंड फिर आगे की तरफ हुआ। उसका मोटा सुपड़ा मेरी चूत के छेद को धीरे धीरे खोल रहा था और मैं महसूस कर रही थी कि मेरी चूत की दीवारें उसकी मोटाई को अंदर लेने के लिए फैल रही हैं।
और तभी मैंने भी अपनी गांड़ को नीचे की तरफ धक्का दिया। आह मुझे हल्की हल्की moan आने लगी थी। उसका मोटा सुपड़ा आधा मेरे अंदर जा चुका था। अब हम दोनों ही ऐसे बर्ताव कर रहे थे जैसे किसी को कुछ नहीं पता हो। तीसरी बार फिर ऐसा ही हुआ और मुझसे रुका नहीं गया।
और इस बार थोड़ा ज़ोर से गांड़ को उसके लंड पर पटक दिया और एकदम से उसका लंड चिकनाई की वजह से तीन इंच अंदर चला गया। अब भी हम दोनों हल्की हल्की moan कर रहे थे। ऐसे ही धीरे धीरे उसका सात इंच का पूरा लंड मेरी चूत में समा गया। फिर मैंने अपनी गांड़ को हवा में उठा लिया और फिर वो अब धीरे धीरे अंदर बाहर करने लग गया। आह ऊ ओ माँ आह ओह म्म्म आह। फिर मेरे मुँह से आवाजें आने लगीं तो भाई समझ गया कि मुझे मजा आने लगा है। उसका पूरा लंड मेरी चूत को भर चुका था और हर धक्के के साथ मेरी चूत की दीवारें उसकी मोटाई को चूस रही थीं। मेरी चूत से गर्म रस बाहर निकलकर उसकी लंड और मेरी जांघों को भिगो रहा था।
अब उसने धक्कों की स्पीड तेज कर दी और मेरी गांड़ पर ठप ठप ठप की आवाज आने लगी और अंधेरे में कमरे में गूंजने लगी। मैं अब तेज तेज moan करने लगी थी आह एम्म ऊ ओ और तेज या आह। फिर मैंने अपने हाथ पीछे ले जाकर भाई के कूल्हों पर रख दिए और अपनी तरफ पुश करने लगी। वो भी ताबड़तोड़ धक्के लगाने लगा। फिर हम दोनों ने पानी छोड़ दिया। इतना मजा मुझे आज तक नहीं आया। अब हम रोजाना सेक्स करके मजे लेते हैं।
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