बहकती बहू-26

Sasural me Bhai se chudai – कहानी का पिछला भाग: बहकती बहू-25

सन्नी समझ गया कि काम्या अब हर हाल में चुदना चाहेगी। उसने उसे और तड़पाने की सोची। उसने अपनी कमर नीचे की और अपने शिश्न के सुपाड़े को काम्या की चूत पर सेट कर हल्का-सा धक्का दिया। जरा-से पुश में ही सुपाड़ा कामरस से भीगी सुरंग में सरक गया। गर्म, कठोर सुपाड़े के अंदर जाते ही काम्या के मुँह से मादक कराह निकली।

काम्या: आह… उई माँ!

सन्नी ने हालात का जायजा लेते हुए फिर पूछा,

सन्नी: काम्या, बताओ ना, मुझे क्या करना है?

काम्या को समझ नहीं आ रहा था कि सन्नी ऐसा क्यों पूछ रहा है। क्या वो जानबूझकर पूछ रहा है, या उसे सचमुच कुछ पता नहीं? सन्नी चाहता था कि काम्या खुद बोले, ताकि बाद में उसे दोष न दे। उसने फिर पूछा,

सन्नी: काम्या, बताओ ना, तुम्हारी जलन दूर करने के लिए मुझे क्या करना है?

काम्या के लिए अब हर पल रुकना भारी पड़ रहा था। उसने मजबूर होकर समर्पण कर दिया। उसने हाथ नीचे ले जाकर सन्नी के लंड को पकड़ा और बोली,

काम्या: भैया, इसको और अंदर डालो! पूरा अंदर कर दो ना!

सन्नी ने एक तगड़ा झटका मारा, और उसका लंड पूरा जड़ तक समा गया। काम्या के मुँह से घुटी-सी चीख निकली,

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काम्या: उई माँ! मर गई! भैया, धीरे करो, बहुत दर्द दे रहा है! मार दोगे क्या?

काम्या की प्रेम गुफा में नए पथिक के आते ही वो जोश में आ गई। उसे महसूस हुआ कि सन्नी का टूल बाबूजी जितना ही बड़ा है, बल्कि ज्यादा कड़ा लग रहा था। सन्नी भी काम्या की चूत में अपना लंड घुसाकर मस्त हो गया। काम्या उसकी बचपन की फंतासी थी। उसने उसके दोनों संतरे दबाते हुए कहा,

सन्नी: दीदी, पूरा अंदर कर दिया, अब क्या करना है?

काम्या को लगा कि उसका सोचना सही था—ये अनाड़ी है। जिम जाकर सिर्फ डोले-शोले बनाए हैं, और कुछ नहीं सीखा।

काम्या: भैया, तुमने पहले कभी किया नहीं क्या?

सन्नी: नहीं, मैंने तो बताया था, मेरा किसी लड़की से दोस्ती नहीं है।

काम्या: तो क्या कोई फिल्म वगैरह भी नहीं देखी?

उसने अपनी कमर आगे-पीछे करते हुए पूछा।

सन्नी: एक-दो बार दोस्तों ने मोबाइल में दिखाया था।

काम्या: तो फिल्म में क्या करते हैं लड़के?

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सन्नी: उसमें तो आदमी लोग आगे-पीछे करके अंदर-बाहर कर रहे थे।

काम्या: तो तू भी वही कर ना, जो सब करते हैं!

सन्नी ने अनाड़ी होने का दिखावा करते हुए अंदर-बाहर पेलना शुरू किया। मगर खड़े-खड़े करने में दिक्कत हो रही थी। दोनों पलंग के किनारे खड़े थे। सन्नी ने काम्या के कंधों को दबाकर उसे बेड पर झुका दिया। अब काम्या स्टैंडिंग डॉगी पोजीशन में थी। सन्नी ने धुआँधार पेलाई शुरू कर दी। काम्या के मुँह से मादक सिसकारियाँ निकलने लगीं। सन्नी को स्ट्रोक लगाने में असुविधा देखकर काम्या ने एक पैर बेड पर रख लिया। अब सन्नी का लंड और गहराई तक पहुँच रहा था।

दोनों आनंद की चरम सीमा की ओर बढ़ रहे थे। काम्या को गर्व था कि वो एक फ्रेश लड़के का उद्घाटन कर रही है। अपने अनाड़ी भैया का जोश बढ़ाने के लिए वो सिसकारी लेते हुए बोली,

काम्या: आह… ओह… माय गॉड! इट फील्स सो गुड! येस, बेबी, फक मी हार्ड! यू आर रियली अ माचो मैन!

सन्नी अपने सालों के अनुभव का बखूबी इस्तेमाल कर रहा था। थोड़ी देर में काम्या अपने क्लाइमेक्स पर आ गई और पानी छोड़ दिया। ऑर्गेज्म के बाद उसे अपने भाई से चुदने में थोड़ा असमंजस लगा, मगर सन्नी के लंड का जादू फिर उसके सिर चढ़ने लगा। सन्नी भी चार-पाँच दिन से भरा था, इसलिए उसे रिलीज की जल्दी थी। उसने ताकतवर स्ट्रोक की बरसात शुरू कर दी। जवान मर्द के शक्तिशाली धक्कों ने काम्या को फिर चरम पर पहुँचा दिया। कमरा दोनों की साँसों और काम्या की आहों से गूँज उठा। पाँच मिनट की नॉनस्टॉप पेलाई के बाद सन्नी ने अपना माल काम्या की कोख में भर दिया। उसकी गर्म बौछार काम्या को गीजर-सा सुख दे रही थी। काम्या भी साथ-साथ फिर बहने लगी।

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दोनों कुछ देर डॉगी पोज में हाँफते रहे। फिर सन्नी ने उसे धक्का देकर बेड पर लिटाया और खुद उसके बगल में लेट गया। काम्या आँखें बंद किए लेटी थी, अभी-अभी मिले आनंद को याद कर रही थी। कई दिन बाद उसकी जमकर ठुकाई हुई थी, वो भी एक जवान मर्द से। आज कई दिन बाद उसकी कोख में मर्द का बीज गया था। बाबूजी पिछले दो बार समय से पहले चूककर माल बाहर बर्बाद कर रहे थे। काम्या को लग रहा था कि पिक्चर खत्म हो गई, मगर उसे नहीं पता था कि असली पिक्चर अब शुरू होगी।

वो सोच रही थी कि सुनील और बाबूजी एक बार करके सो जाते थे, इसलिए मर्दों को दूसरी बार के लिए चार-पाँच घंटे चाहिए। मगर सन्नी असली मर्द था, जो पूरी रात ऐसी चुदाई करता कि लौंडिया अगले दिन चल भी नहीं पाती। काम्या इस नए रिश्ते की अच्छाई-बुराई सोच रही थी कि सन्नी ने उसके मम्मों से खेलना शुरू कर दिया। वो चुपचाप पड़ी रही। ऐसा सुनील और मदनलाल भी करते थे। मगर सन्नी ने अब उसके बूब्स मुँह में लेकर चूसना शुरू किया। काम्या के जिस्म में फिर काम लहर बनने लगी। उसे लगा कि इस लहर का कोई फायदा नहीं, क्योंकि अब कोई सरफिंग करने वाला नहीं है।

सन्नी कुछ देर करवट में दूध पीता रहा, फिर काम्या के ऊपर आकर चूसने लगा और उसकी टाँगें फैलाकर अपने को बीच में सेट कर लिया। वो किसी बछड़े की तरह उसके बूब्स जिझोड़ रहा था। काम्या कामानंद से सिहर रही थी। तभी सन्नी ने अपना लंड उसकी चूत में सेट किया। ठोस मांस को अपनी चूत में फील करते ही काम्या चौंक गई। उसने सोचा, “हे भगवान, इतने जल्दी फिर से! अभी तो 15 मिनट हुए होंगे!” सन्नी का लंड फिर तैयार था। वो उसके जोश के बारे में सोच रही थी कि सन्नी ने एक झटका मारा। दोनों के कामरस से भरी चूत में उसका औजार पूरा सरक गया।

काम्या: उई माँ! मर गई!

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सन्नी: क्या हुआ, जान?

काम्या: भैया, बोल नहीं सकते थे? झटके से डाल दिया!

सन्नी: दीदी, तुमने सिखाया कि अंदर-बाहर करना है, तो बार-बार क्या बोलना?

दोनों फिर काम सफर पर चल पड़े। सन्नी तेजी से रन बना रहा था, और काम्या को उसके साथ चलना मुश्किल हो रहा था। तभी सन्नी ने अंदर डाले ही काम्या को पलट दिया। अब काम्या ऊपर थी, और सन्नी नीचे से शॉट मार रहा था। सीन ऐसा था, मानो काम्या सन्नी को चोद रही हो। इस पोज में काम्या अपने को मर्द फील करने लगी और जल्दी निपट गई। सन्नी को ये आसन पसंद था, क्योंकि इसमें वो काम्या की गांड जी भरकर सहला रहा था। उसकी चूचियाँ सन्नी के सीने में पिचक रही थीं। सन्नी काफी देर तक उसे चोदता रहा। जब फारिग होने का समय आया, उसने काम्या को फिर पलटाया और उसकी कोख में बीज डाल दिया।

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15 मिनट में दूसरी चुदाई ने काम्या के सारे कस-बल निकाल दिए। वो बदहवास-सी बिस्तर पर पड़ी रही। आधे घंटे तक दोनों थके हुए लेटे रहे। रिश्ते की शर्म के कारण कोई बात नहीं कर रहा था। काम्या तृप्त थी। उसे यकीन था कि सन्नी की इच्छा पूरी करके वो बड़ी मुसीबत से बच गई। वो सोच रही थी कि सन्नी उसे बदनाम नहीं करेगा। आखिर कोई भाई अपनी बहन को कैसे बदनाम कर सकता है?

जब काम्या की थकान कम हुई, वो बेड से उठने लगी। सन्नी ने उसका हाथ पकड़ लिया।

काम्या: अब क्या है?

सन्नी: दीदी, थोड़ी देर और रुको ना।

काम्या: क्यों, तूने अपनी मनमानी कर ली ना? अब क्यों रोक रहा है?

सन्नी: दीदी, ऐसा क्यों बोल रही हो? ये मनमानी नहीं है। मैं बचपन से तुम्हारा दीवाना हूँ। तुम मेरी फंतासी हो।

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काम्या: झूठ मत बोल, सन्नी। तूने वो सब देखकर मौके का फायदा उठाया है।

सन्नी उसे फुसलाना चाहता था। उसे पता था कि काम्या थोड़ा अपसेट है, मगर मदनलाल से अधूरी चुदाई के बाद उसने उसे पूरी तृप्ति दी थी।

सन्नी: दीदी, मेरा विश्वास मानो। मैं तुम्हें सबूत दे सकता हूँ।

काम्या: क्या सबूत है तेरे पास?

सन्नी ने मोबाइल निकाला और एक वीडियो चलाकर काम्या को दे दिया। वीडियो में काम्या टॉपलेस होकर बाथरूम में नहा रही थी, सिर्फ छोटी-सी पैंटी में। वो स्कूल गर्ल-सी क्यूट, मगर बेहद सेक्सी लग रही थी। काम्या की आँखों में शर्म उतर आई।

काम्या: ये कब खींचा तूने?

सन्नी: दीदी, तुम शुरू से मुझे अच्छी लगती थी। मैं दिल ही दिल में तुमसे प्यार करने लगा था। जब तुम एंट्रेंस एग्जाम के बाद हमारे घर आई थीं, तब मैंने रोशनदान से खींच लिया था।

काम्या को कुछ याद आया। उस समय उसे लगा था कि रोशनदान में मामाजी हैं, क्योंकि वो अक्सर मौके तलाशते थे। आज उसे पता चला कि बाप-बेटा दोनों उसके दीवाने हैं।

काम्या: मुझे भी तब लगा था कि कोई देख रहा है। मैंने ऊपर देखा, मगर तू डरकर भाग गया होगा।

सन्नी: सॉरी, दीदी। मैं तुम्हारे प्यार में पागल था। तब से आज तक इसे देखे बिना नींद नहीं आती।

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काम्या: चुप, बदमाश! बहन को ऐसे देखते शर्म नहीं आती? मुझे नहीं पता था कि तू इतना गंदा बच्चा है।

सन्नी: दीदी, मेरी मजबूरी भी देखो। प्यार भी हुआ, तो बहन से। काम्या: सन्नी, ये गलत है। जो हुआ, सो हुआ। मगर मैं तुम्हारी बहन हूँ। इसे यहीं खत्म कर देते हैं।

सन्नी: दीदी, प्यार रिश्ते-नाते नहीं देखता। तुम बोलो, क्या तुम अंकल से रिश्ता तोड़ दोगी?

काम्या निरुत्तर हो गई और उठकर जाने लगी। सन्नी ने फिर उसका हाथ पकड़ा।

काम्या: सन्नी, अब तो जाने दे।

सन्नी: दीदी, कल मैं जा रहा हूँ। प्लीज, एक बार और करने दो ना।

काम्या को सन्नी पर तरस आ गया। उसने नकली इनकार करते हुए कहा,

काम्या: सन्नी, बगल में मम्मी-पापा सो रहे हैं। मैं तेरे तैयार होने तक दो घंटे यहाँ नहीं रुक सकती।

सन्नी: दीदी, मैं रुकने को नहीं कह रहा। ये देखो, ये तो कब का तैयार है!

उसने काम्या के हाथ में अपना लंड पकड़ा दिया। काम्या ताज्जुब में रह गई। वो फिर सिपाही-सा खड़ा था। उसने सन्नी के हथियार को देखा। वो प्यारा, मगर खूंखार लग रहा था। पहली बार वो सन्नी के लंड को देख रही थी। पहले दो बार उसने शर्म के मारे नहीं देखा था। सन्नी का हथियार बाबूजी से कम नहीं था—लंबा, चौड़ा, और ज्यादा नसों वाला, जो इसे मस्कुलर और खतरनाक बनाता था।

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लंड उसकी मुट्ठी में था। वो सम्मोहित-सी उसे देख रही थी। अचानक उसकी मुट्ठी कस गई। सन्नी की सिसकारी निकल गई।

सन्नी: दीदी, चूसो ना!

काम्या: नहीं, मैं वो सब नहीं करूँगी। मुझे शर्म आ रही है।

सन्नी: दीदी, प्लीज करो ना।

काम्या: नहीं, सन्नी, मुझे वो अच्छा नहीं लगता।

सन्नी: दीदी, तुम झूठ बोल रही हो। तुमने अंकल को दो-दो बार किया था—शुरू में और आखिर में तो जबरदस्त।

काम्या को कुछ बोलते नहीं बना। उसे पता था कि सन्नी ने उसे माल गटकते देखा है।

सन्नी: दीदी, प्लीज करो ना।

काम्या: सन्नी, जिद मत कर।

सन्नी: ठीक है, दीदी, तुम अपने भाई को कोई सुख नहीं देना चाहती। तुम्हारे दिल में मेरे लिए प्यार नहीं।

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उसने रुआँसे होकर कहा। काम्या उसका उतरा चेहरा देखकर पिघल गई। अंदर से वो खुद लंड निगलना चाहती थी, मगर मानिनी होने के कारण पहल नहीं कर रही थी।

काम्या: ठीक है, पर थोड़ा-सा ही करूँगी। ज्यादा की जिद मत करना।

सन्नी: ठीक है, जितना तुम्हें करना है, उतना करो।

सन्नी उसकी झिझक तोड़ना चाहता था। उसे पता था कि एक दिन काम्या इशारे पर उसके लंड पर टूट पड़ेगी। काम्या ने थोड़ी देर उसके हथियार को स्ट्रोक किया, फिर झुककर सुपाड़े को चूम लिया। सन्नी के मुँह से सिसकारी निकली। काम्या मुस्कराई। उसने सोचा, “आज तक जो बाबूजी से सीखा, वो सब अपने भाई को दे देती हूँ।” उसने सुपाड़े पर अपनी गीली, खुरदरी जीभ फेरनी शुरू की। सन्नी उत्तेजना से काँपने लगा। थोड़ी देर उसे तड़पाने के बाद काम्या ने पूरा सुपाड़ा गटक लिया। उसके मुँह की भाप से सन्नी को लगा जैसे उसका लंड गीजर में रख दिया गया हो। वो आहें भरने लगा। काम्या अब लंबे-लंबे स्ट्रोक मारकर लंड को गहराई तक उतारने लगी।

काम्या ब्लोजॉब में मास्टर थी। वो मर्दों के इस नाजुक अंग की कमजोरियाँ जानती थी। उसने सन्नी के लंड की ऐसी हालत की कि वो बिस्तर से उछलने लगा। उसके पूरे जिस्म में उबाल आ गया। उसे आज पता चला कि बाजारू औरत और प्यार करने वाली औरत में कितना फर्क होता है। जब उसे संभालना मुश्किल हुआ, उसने काम्या को बिस्तर पर पटका और उस पर चढ़ बैठा। इससे पहले कि काम्या संभल पाती, सन्नी ने एक पहलवानी शॉट मारा। काम्या के मुँह से दर्दभरी चीख निकली,

काम्या: उई मम्मी! मर गई! ओफ्फो, भैया, आहिस्ते से नहीं डाल सकते थे? जालिम कहीं के!

कहानी का अगला भाग: बहकती बहू-27

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