चूत में तेल लगाया ससुर जी ने

मेरा नाम सुगंधा है और मैं गुजरात की रहने वाली हूँ। मैं एक शादीशुदा औरत हूँ, उम्र 37 साल। मेरे पति, मेरा चार साल का बेटा, और मेरे ससुर जी के साथ मैं सूरत में रहती हूँ। करीब दो महीने पहले मैंने कुछ इन्सेस्ट कहानियाँ पढ़ीं, जो मुझे बहुत पसंद आईं। उन कहानियों को पढ़कर मुझे इतना मज़ा आया कि मैंने सोचा, क्यों न मैं भी अपनी ज़िंदगी की एक सच्ची और मसालेदार घटना को आप सबके साथ साझा करूँ? ये मेरी पहली कहानी है, और मुझे पूरी उम्मीद है कि ये आपको उतना ही मज़ा देगी, जितना मुझे इसे लिखने में आ रहा है।

मेरी शादी को दस साल हो चुके हैं। जब मैं पहली बार अपने पति के घर आई थी, तब सब कुछ बहुत खूबसूरत था। मेरे पति मुझे हमेशा खुश रखते थे, और मेरे सास-ससुर भी मुझे अपनी बेटी की तरह प्यार करते थे। लेकिन दो साल पहले मेरी सास का देहांत हो गया, और तब से मेरे ससुर जी की नज़रें बदल गईं। वो अब रिटायर्ड ज़िंदगी जी रहे थे, पूरा दिन घर पर रहते, और मुझे बार-बार वासना भरी नज़रों से देखने लगे। कई बार मैंने देखा कि वो छत पर सुखाने रखे मेरे कपड़ों में से मेरी ब्रा और पैंटी को छूते, उनके साथ खेलते, और मुझे चोरी-छिपे ताकते।

मैंने कई बार सोचा कि अपने पति को ये सब बता दूँ, लेकिन फिर सोचा कि इससे बाप-बेटे के बीच झगड़ा हो जाएगा। मैं नहीं चाहती थी कि मेरे घर का माहौल खराब हो, इसलिए मैं चुप रही। लेकिन मेरे ससुर की हिम्मत दिन-ब-दिन बढ़ती गई। अब वो मुझे चाय बनाने को कहते, और जब मैं किचन में होती, तो मदद के बहाने मेरे पास आकर मुझे छूने की कोशिश करते। उनके स्पर्श से मुझे गुस्सा तो बहुत आता था, लेकिन मैं कुछ कह नहीं पाती थी। फिर एक दिन उन्होंने सारी हदें पार कर दीं, और जो हुआ, उसकी मुझे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी।

एक सुबह की बात है। मेरे पति अपने ऑफिस चले गए थे, और मेरे बेटे को स्कूल छोड़ने के लिए अपने साथ ले गए। सुबह के सात बज रहे थे, और मैं नहाने के लिए बाथरूम में जा रही थी। मैंने अपनी ब्रा, पैंटी, और तौलिया बाथरूम की खूँटी पर टांग दिए थे। जैसे ही मैंने अपने कपड़े उतारने शुरू किए और पूरी नंगी होकर नहाने के लिए बैठने वाली थी, तभी ससुर जी ने ज़ोर से आवाज़ लगाई, “आशी! आशी! जल्दी आओ!” घर में मुझे प्यार से सुगंधा की जगह आशी बुलाते हैं। उनकी ज़ोर की आवाज़ सुनकर मैं डर गई। मुझे लगा कि कहीं कुछ अनहोनी तो नहीं हो गई। मैंने जल्दी से अपनी मैक्सी पहनी—बस एक पतली सी मैक्सी, जिसमें मैंने न तो ब्रा पहनी थी, न पैंटी। मैक्सी इतनी पतली थी कि उसमें से मेरा पूरा बदन साफ दिख रहा था।

मैं बाथरूम से बाहर निकली, लेकिन ससुर जी कहीं नज़र नहीं आए। मैंने बाहर गार्डन में देखा, तो वो वहाँ ज़मीन पर गिरे पड़े थे। मैं दौड़कर उनके पास गई और उन्हें उठाने की कोशिश करने लगी। तभी मैंने महसूस किया कि वो मेरी मैक्सी के पार मेरे बूब्स और निप्पल्स को घूर रहे थे। मैं शर्म से पानी-पानी हो गई। जैसे-तैसे मैंने उन्हें उठाया, और उठाते वक्त उन्होंने अपना एक हाथ मेरी गांड पर रख दिया। उनकी उंगलियों को मेरी गांड पर महसूस करके मुझे पता चल गया कि वो जान गए हैं कि मैंने अंदर कुछ नहीं पहना।

मैंने उनसे पूछा, “बाबूजी, क्या हुआ? आप कैसे गिर गए?” उन्होंने कहा, “बेटा, मेरा पैर अचानक फिसल गया, और मैं नीचे गिर गया। माफ़ करना, तुम्हें इस हालत में नहीं बुलाना चाहिए था।” मैंने कहा, “कोई बात नहीं, पिताजी। अब आप आराम करें, मैं नहाकर आती हूँ।”

लेकिन उन्होंने कहा, “बेटा, मैं पूरा कीचड़ में सन गया हूँ। तुम बाद में नहा लेना, पहले मुझे स्नान कर लेने दे।” उनकी बात सुनकर मैं सोच में पड़ गई, लेकिन फिर मैंने सोचा कि वो मेरे पिताजी जैसे हैं, तो मैंने कहा, “ठीक है, पिताजी, आप पहले नहा लें।” वो बाथरूम में गए और कुछ ही मिनटों में बाहर निकल आए। मैं अपनी मैक्सी में अपने गुप्तांगों को छुपाने की कोशिश करते हुए बाथरूम में चली गई। नहाने लगी, लेकिन जब मैंने तौलिया लेने के लिए हाथ बढ़ाया, तो मुझे ज़ोर का झटका लगा—तौलिया वहाँ था ही नहीं।

मुझे शक हुआ कि ये ससुर जी की कोई चाल है। फिर मैंने सोचा, शायद वो जल्दी में मेरा तौलिया ले गए हों। मैंने जैसे-तैसे अपने बदन को साफ किया और अपनी पैंटी पहनने लगी, तभी मुझे कुछ गीला-गीला सा लगा। मैंने पैंटी उतारी और देखा, तो उसमें कुछ चिपचिपा सा लगा था। मैं तुरंत समझ गई कि ससुर जी ने मेरी पैंटी पर मुठ मारकर अपना वीर्य निकाला था, और वो मेरी चूत पर भी थोड़ा-थोड़ा लग गया था। मुझे इतना गुस्सा आया कि मैंने वो पैंटी कचरे के डब्बे में फेंक दी। फिर मैंने अपनी ब्रा देखी, तो उसमें भी उनका वीर्य लगा था। मेरा गुस्सा सातवें आसमान पर था। मैंने ब्रा भी कचरे में फेंक दी और फिर से अपनी चूत को साफ करने के लिए नहाना शुरू किया।

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नहाने के बाद मैं सोचने लगी कि अब बाहर कैसे जाऊँ? मेरे पास न तौलिया था, न ब्रा, न पैंटी। मुझे बहुत पछतावा हो रहा था कि मैंने जल्दबाज़ी में अपनी ब्रा और पैंटी फेंक दी। मजबूरन मुझे ससुर जी को आवाज़ लगानी पड़ी, “पिताजी, आप मेरा तौलिया गलती से ले गए हैं। ज़रा दे दीजिए।” उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। कुछ मिनट बाद बोले, “हाँ, बेटा, माफ़ करना। मैं जल्दी में अपना तौलिया भूल गया और तुम्हारा ले आया। ठहरो, मैं दूसरा तौलिया देता हूँ।”

मुझे उन पर बहुत गुस्सा आ रहा था, लेकिन मैं कर भी क्या सकती थी? उन्होंने कहा, “लो, बेटा, ये तौलिया।” मैंने बाथरूम का दरवाज़ा थोड़ा सा खोला और हाथ बाहर निकाला। उन्होंने मेरे हाथ को छूते हुए तौलिया दिया। जब मैंने तौलिया देखा, तो मेरा गुस्सा और बढ़ गया। वो तौलिया इतना छोटा था कि उसमें दो छोटे-छोटे छेद भी थे। मैं समझ गई कि आज ससुर जी मुझे छोड़ने वाले नहीं। मैंने उस तौलिए से अपने बदन को साफ किया और उसे अपने बूब्स के ऊपर लपेट लिया। लेकिन तौलिया इतना छोटा था कि मेरी चूत पूरी तरह ढक नहीं रही थी। मैंने उसे थोड़ा नीचे किया, तो मेरे निप्पल्स और आधे बूब्स दिखने लगे। वो दो छेद मेरी गांड के पास थे, जिससे मेरी गांड का गोरा रंग साफ दिख रहा था।

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मैं जल्दी से बाहर निकली और अपने कमरे में जाकर दरवाज़ा बंद कर लिया। लेकिन बाहर निकलते वक्त ससुर जी ने मेरे गोरे बदन को जी भरकर देख लिया था। मेरी नज़र उनके पाजामे पर गई, और मैंने देखा कि उनका लंड तन गया था, जो उनके पाजामे से साफ दिख रहा था।

रात को जब मेरे पति घर आए, तो मैंने कई बार सोचा कि उन्हें सब बता दूँ, लेकिन मेरे मुँह से कुछ निकला ही नहीं। मैं रोने लगी। उन्होंने पूछा, “क्या हुआ?” लेकिन मैं कुछ नहीं बता सकी। अगली सुबह जब मैं उठी, तो देखा कि मेरे पति तैयार हो रहे थे। मैंने पूछा, “आप कहाँ जा रहे हैं?” उन्होंने कहा, “ऑफिस के काम से मुझे तीन दिन के लिए दिल्ली जाना है।” ये सुनकर मेरे ऊपर जैसे आसमान टूट पड़ा। मैंने गुस्से में कहा, “आप मुझे अभी बता रहे हैं?” उन्होंने कहा, “डार्लिंग, तुम कल रात रो रही थी। मैं तुम्हें और परेशान नहीं करना चाहता था।”

मैंने जिद की, “मुझे भी आपके साथ जाना है।” लेकिन वो गुस्सा हो गए और बोले, “क्या बच्चों जैसी हरकत कर रही हो?” फिर उन्होंने मुझे अपनी बाहों में लिया, मेरी मैक्सी उतारी, और मुझे नंगा करके किस करने लगे। लेकिन जैसे ही उन्होंने मेरी पैंटी उतारी, वो बोले, “सुगंधा, तुम अपनी चूत तो साफ रखा करो। तुम्हें पता है मुझे झांटों वाली चूत चोदना पसंद नहीं।” मैंने कहा, “आज के लिए माफ़ कर दो, अगली बार साफ रखूँगी।” लेकिन उन्होंने मना कर दिया और अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया। वो मेरे मुँह को ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगे। कुछ देर बाद उनका वीर्य मेरे मुँह में भर गया। मैंने जल्दी से कपड़े पहने और उन्हें बस स्टैंड तक छोड़ने गई।

वापस आने के बाद घर में सिर्फ मैं और ससुर जी थे। मुझे उनसे बहुत डर लग रहा था। मैं फिर से नहाने चली गई, लेकिन इस बार मैंने पहले ही चेक कर लिया कि मेरी ब्रा, पैंटी, और तौलिया सही जगह पर हैं। नहाने के बाद मैंने खाना बनाया और ससुर जी के साथ दोपहर का खाना खाया। खाने के बाद मैंने कहा, “पिताजी, मैं अब सोने जा रही हूँ।” उन्होंने कहा, “ठीक है, बेटा।”

रात को ज़्यादा रोने की वजह से मुझे नींद नहीं आई थी, तो दोपहर में लेटते ही मेरी आँख लग गई। मेरा बेटा स्कूल से लौटकर बाहर खेलने चला गया था। तभी मेरे कमरे के दरवाज़े पर खटखट की आवाज़ आई। मैं उठी और देखा कि गहरी नींद में मेरी साड़ी कमर तक सरक गई थी, और मेरी पैंटी दिख रही थी। मेरा पल्लू भी नीचे गिर गया था। मैंने जल्दी से कपड़े ठीक किए और दरवाज़ा खोला। बाहर ससुर जी खड़े थे। उन्होंने मुझे चाय का कप देते हुए कहा, “बेटा, तुम आज कुछ ज़्यादा ही देर तक सोई थी। मैंने सोचा, क्यों न मैं ही चाय बना लूँ। मैंने चिंटू को भी दूध पिला दिया।”

मैं मन ही मन सोचने लगी कि ये वही ससुर जी हैं, जो कल मेरी पैंटी पर अपना वीर्य छोड़ आए थे, और आज मेरे लिए चाय बना रहे हैं? मैंने चाय पी और अपने काम में लग गई। लेकिन शाम को करीब सात बजे, चाय पीने के एक घंटे बाद मुझे अजीब सी बैचेनी होने लगी। मेरे शरीर में हल्का-हल्का दर्द शुरू हुआ, और मुझे नींद सी आने लगी। मुझे शक हुआ कि ससुर जी ने चाय में कुछ मिलाया है। तभी मैं किचन में ही गिर गई। ससुर जी आए और मेरी तरफ देखकर हँसने लगे। मैं थोड़ी बेहोशी की हालत में थी, मेरे हाथ-पैर नहीं हिल रहे थे। मैं सिर्फ महसूस कर सकती थी।

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वो ज़ोर से हँसे और बोले, “बेटा, अब तुम कुछ भी कर लो, कुछ देर तक तुम अपने आप को नहीं संभाल सकती। मैंने चाय में ड्रग मिला दिया था।” मैं उन्हें देखती रही। वो मुझे उठाकर मेरे कमरे में ले गए और बिस्तर पर पटक दिया। मैं सब कुछ देख रही थी, लेकिन कुछ कर नहीं पा रही थी।

ससुर जी मेरे पास आए और मेरे गले पर किस करने लगे। फिर उन्होंने मेरे होंठों को चूमा और काटने लगे। मुझे बहुत घिन आ रही थी। उन्होंने मेरी साड़ी उतार दी, और अब मैं सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज़ में थी। मैं साड़ी हमेशा नाभि के नीचे बाँधती हूँ, तो मेरी नाभि उनके सामने नंगी थी। वो मेरी नाभि को चूमने लगे। मैं मुँह हिलाकर और हल्की आवाज़ निकालकर विरोध करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन मेरे हाथ-पैर जैसे लकवे के शिकार हो गए थे।

वो मुझसे बोले, “आज मैं तुझे जी भरकर चोदूँगा, सुगंधा। दो साल से मैं इस प्यास का भूखा हूँ।” मैंने कहा, “पिताजी, ये क्या कर रहे हैं? ये सब गलत है।” वो बोले, “कुछ भी गलत नहीं है।” मैंने कहा, “मैं मेरे पति को सब बता दूँगी।” उन्होंने हँसते हुए कहा, “मैं तुझे उस लायक छोड़ूँगा ही नहीं।” इतना कहकर उन्होंने मेरे ब्लाउज़ के हुक खोल दिए और मेरा पेटीकोट भी उतार दिया। अब मैं सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी।

उन्होंने मेरी रोती हुई आँखों पर ज़रा भी रहम नहीं किया। फिर उन्होंने मेरी ब्रा और पैंटी भी उतार दी। अब मैं उनके सामने पूरी नंगी बिस्तर पर पड़ी थी। मुझे रोना आ रहा था, लेकिन वो बिल्कुल बेरहम थे। वो मेरी झांटों वाली चूत को देखकर बोले, “साली रंडी, कितनी बार मेरे बेटे ने तुझे कहा कि चूत के बाल साफ रख, लेकिन तू मानती ही नहीं। चल, आज मैं तेरी चूत को चिकना करता हूँ।”

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वो मर्दों वाला रेज़र और क्रीम ले आए। मैंने पहले कभी रेज़र इस्तेमाल नहीं किया था, हमेशा क्रीम से बाल साफ करती थी। मुझे रेज़र देखकर डर लगने लगा। वो मेरी चूत पर क्रीम लगाने लगे, और इस दौरान कई बार अपनी उंगली मेरी चूत में डाल दी। उनकी उंगली मेरी चूत के अंदर-बाहर हो रही थी, और ना चाहते हुए भी मेरा शरीर गर्म होने लगा। कुछ देर बाद मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया। वो हँसने लगे और बोले, “साली, नखरे कर रही थी, और अब देख, तेरी चूत तो गीली हो गई।”

फिर उन्होंने मेरी चूत की क्रीम साफ की और बोले, “साली, तूने मुझे बहुत तड़पाया है। आज मैं तेरी चूत के बाल बिना क्रीम के साफ करूँगा।” उन्होंने रेज़र को मेरी चूत पर घुमाना शुरू किया। मुझे डर लग रहा था कि कहीं मेरी चूत की चमड़ी न कट जाए। दर्द भी हो रहा था। कुछ देर बाद मेरी चूत पूरी तरह चिकनी हो गई। फिर वो कमरे से बाहर चले गए, मुझे नंगी छोड़कर।

कुछ देर बाद वो सिर्फ अंडरवियर में वापस आए। 65 साल की उम्र में भी उनका शरीर 45 साल के मर्द जैसा चुस्त था। वो मेरे सामने हँसने लगे और एक कैमरा निकाला। उन्होंने मेरी चूत और बूब्स की तस्वीरें खींचीं। फिर बोले, “अगर तूने किसी को कुछ बताया, तो मैं जेल तो चला जाऊँगा, लेकिन पहले तेरी इज्ज़त के चीथड़े उड़ा दूँगा।”

उसके बाद वो तेल की शीशी ले आए और मेरे पूरे बदन पर तेल मलने लगे। मेरे बूब्स को वो ज़ोर-ज़ोर से मसल रहे थे। ना चाहते हुए भी मेरा शरीर गर्म होने लगा, और मेरे निप्पल्स टाइट हो गए। वो समझ गए कि मैं अब गर्म हो रही हूँ। उन्होंने अपना अंडरवियर उतारा और अपना लंड मेरी चूत के ऊपर रगड़ने लगे। उनका लंड करीब चार इंच का था, और अभी पूरी तरह तना नहीं था। वो मेरी चूत में उंगली डाल रहे थे, और मेरा शरीर उनका साथ देने लगा। मेरे मुँह से “उफ्फ्फ… आह्ह्ह…” की आवाज़ें निकलने लगीं। मेरी चूत ने फिर से पानी छोड़ दिया। वो हँसने लगे, और मैं शर्म से मर रही थी।

उन्होंने कहा, “ले, मुँह में ले ले।” मैंने मुँह फेर लिया और ना कहा। वो बोले, “क्यों, सुबह तो तू मेरे बेटे का लंड बड़े मज़े से चूस रही थी। अब क्या हुआ?” उन्होंने ज़ोर से मेरा मुँह खोलने की कोशिश की, लेकिन मैंने मुँह नहीं खोला। फिर उन्होंने मेरी नाक दबा दी, जिससे मेरा दम घुटने लगा। मजबूरन मुझे मुँह खोलना पड़ा, और जैसे ही मैंने मुँह खोला, उन्होंने अपना मोटा लंड मेरे मुँह में डाल दिया। उनका लंड मेरे गले तक जा रहा था, और मेरी नाक बंद होने की वजह से मुझे साँस लेने में तकलीफ हो रही थी।

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मैंने सोचा, क्यों न उनके लंड को काट लूँ? मैंने ज़ोर से उनके लंड को काट लिया। वो दर्द से चिल्ला उठे, और उनके लंड से थोड़ा खून निकलने लगा। वो गुस्से में आगबबूला हो गए और मुझे थप्पड़ मारने लगे। वो चिल्लाए, “रुक, रंडी! तू मुझे काटती है? देख, अब मैं तुझे सजा देता हूँ!” वो बाहर चले गए, और जब वापस आए, तो उनके हाथ में एक 15 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लकड़ी का डंडा था।

मैं डर गई और ज़ोर-ज़ोर से रोने लगी। उन्होंने मुझे घोड़ी बनाया और मेरी गांड पर तेल लगाने लगे। मैं चीख रही थी, “पिताजी, प्लीज़, ऐसा मत करो!” लेकिन वो गुस्से में थे। उन्होंने मेरी गांड के छेद में भी तेल डाला और उस डंडे को मेरी गांड पर रखकर ज़ोर का धक्का मारा। मेरे मुँह से एक ज़ोरदार चीख निकली, “आआआह्ह्ह…!” दर्द इतना था कि मेरी जान निकल रही थी। उन्होंने फिर से धक्का मारा, और मुझे लगा कि मेरी गांड फट गई। दर्द की वजह से मेरा पेशाब निकल गया, और बिस्तर गीला हो गया।

उन्होंने डंडा बाहर निकाला, और उस पर खून लगा था। वो बोले, “देख, रंडी, मुझे काटने का नतीजा। अब पहले मैं तेरी चुदाई करूँगा, फिर तेरी चूत को इस डंडे से भोसड़ा बनाऊँगा।” मैं पूरी तरह टूट चुकी थी। उन्होंने फिर से अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया, और इस बार मैंने विरोध नहीं किया। मैं उनके लंड को चूसने लगी। कुछ देर बाद उन्होंने अपने वीर्य की पिचकारी मेरे मुँह पर मारी। उनका वीर्य मेरे बूब्स पर भी गिरा। फिर उन्होंने कहा, “चल, अब इसे चूसकर फिर से खड़ा कर।”

मैंने वैसा ही किया, और कुछ देर बाद उनका लंड फिर से तन गया। मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि 65 साल के बूढ़े का लंड इतनी जल्दी फिर से खड़ा हो सकता है। वो मेरे ऊपर आए और अपना लंड मेरी चूत पर रखा। वो मेरे बूब्स को ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगे, मेरे निप्पल्स को मसलने लगे। फिर उन्होंने एक ज़ोरदार धक्का मारा। मेरे मुँह से चीख निकली, “आह्ह्ह… ऊईईई…!” उनका लंड मेरी चूत में पूरा घुस गया। वो ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगे, “थप… थप… थप…” की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी।

मैं दर्द और मज़े के बीच झूल रही थी। उनकी हरकतों से मेरी चूत गीली हो रही थी, और मैं “उफ्फ्फ… आह्ह्ह… स्स्स्स…” की आवाज़ें निकाल रही थी। वो बोले, “साली, मज़ा आ रहा है ना? बोल, रंडी!” मैं चुप थी, लेकिन मेरी चूत उनके धक्कों का जवाब दे रही थी। उनका लंड मेरी चूत के आखिरी हिस्से तक जा रहा था, और हर धक्के के साथ मेरी चूत में आग सी लग रही थी। मैं शर्म से मर रही थी, लेकिन मज़ा भी आ रहा था।

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उन्होंने करीब 20 मिनट तक मुझे चोदा। मेरी चूत ने इस दौरान तीन बार पानी छोड़ा। आखिरकार, उन्होंने अपना वीर्य मेरी चूत में छोड़ दिया। जब उन्होंने लंड बाहर निकाला, तो उस पर खून लगा था। मैं डर गई, लेकिन फिर मुझे याद आया कि मैं पीरियड्स में हूँ। मेरे पीरियड्स का खून मेरी चूत से निकल रहा था, और बिस्तर गंदा हो गया था। लेकिन ससुर जी ने मुझे कपड़े पहनने नहीं दिए। वो मुझे नंगा रखकर अगले दिन दोपहर तक अलग-अलग स्टाइल में चोदते रहे।

मैं अब टूट चुकी थी और उनका साथ देने लगी थी। एक बार उन्होंने मुझे कांच में मेरी गांड का छेद दिखाया। मैं देखकर हैरान रह गई—मेरी गांड का छेद फट चुका था और चूत जैसा दिख रहा था। मेरे शरीर में अब थोड़ी जान आ रही थी, लेकिन मैं अभी भी पूरी तरह उठ नहीं पा रही थी। फिर भी ससुर जी का मन नहीं भरा था। वो पूरी रात और दिन मुझे नए-नए तरीकों से चोदते रहे, और मैं भी उनके साथ मज़े लेने लगी थी।

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