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पहले चुदाई फिर प्यार

मेरा नाम तनिषा है। 23 साल की हूँ। आईटी कंपनी में जॉब करती हूँ। सुबह 9 बजे ऑफिस, शाम 7 बजे घर। जिंदगी ठीक-ठाक चल रही थी, बस रात की भूख बाकी रह जाती थी। टिंडर पर करुणेश से मैच हुआ। 24 साल का, सरकारी नौकरी। 3 दिन बातें हुईं। फिर मैंने साफ लिख दिया – “शनिवार शाम 7:30 मेरे फ्लैट आ जा। सिर्फ सेक्स के लिए। कोई ड्रामा नहीं।” उसने मान लिया।

शनिवार को 7:25 पर दरवाजा खटखटाया। मैंने खोला। काली टी-शर्ट और जींस में खड़ा था। अंदर बुलाया। पानी पिया। फिर मैंने उसका हाथ पकड़ा और दीवार से सटा दिया।

मैंने उसके कॉलर से पकड़ा। अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए। पहले हल्के से दबाया, फिर जोर से। जीभ उसके होठों के बीच से अंदर घुमाई। उसकी जीभ से मिलाया। दोनों की साँसें तेज हो गईं। मैंने उसका हाथ उठाकर अपने स्तनों पर रखा। टॉप के ऊपर से उसने दबाया। मैंने टॉप ऊपर खींचकर गर्दन से निकाल दिया। ब्रा के ऊपर से उसके दोनों हाथ घूमने लगे। उसने स्तनों को दबाया, उंगलियों से घुमाया। मैंने उसकी बेल्ट खोली। एक-एक करके बटन खोले। जिपर नीचे सरकाया। पैंट को घुटनों तक ले गई। अंडरवियर भी साथ में खींच लिया। उसका लंड बाहर निकल आया – सख्त, गर्म, और सीधा।

मैंने उसे हाथ में लिया। ऊपर से नीचे तक धीरे-धीरे फेरा। अंगूठे से आगे के हिस्से पर गोलाई में घुमाया। वो हल्के से कराह उठा। मैं घुटनों के बल बैठ गई। पहले सिर्फ जीभ से आगे के हिस्से को चाटा। ऊपर से नीचे तक लिक किया। फिर मुँह में लिया। पहले थोड़ा सा, फिर और गहरा। ऊपर-नीचे करने लगी। कभी धीरे, कभी तेज। जीभ घुमाती रही। उसके हाथ मेरे बालों में थे, लेकिन जोर नहीं पकड़ रहा था। रफ्तार पूरी मेरी थी। थोड़ी देर बाद मैंने मुँह छुड़ाया। खड़ी हो गई।

अपनी जींस का बटन खोला। जिपर नीचे किया। जींस को नीचे सरकाया। पैंटी को भी साथ में खींचकर एक साथ उतार दिया। ब्रा खोलकर फेंक दी। अब मैं पूरी नंगी थी। उसकी आँखें मेरे शरीर पर घूम रही थीं। मैंने उसे सोफे की तरफ धकेला। वो बैठ गया। मैं उसके ऊपर चढ़ी। दोनों घुटनों को सोफे पर टिकाया। उसके लंड को अपने हाथ से पकड़कर सही जगह पर रखा। धीरे-धीरे अपने अंदर लेना शुरू किया। पहले सिर्फ आगे का हिस्सा अंदर गया। फिर और नीचे बैठी। पूरा अंदर लेने में थोड़ा समय लगा। जब पूरी तरह अंदर हो गया तो मैंने कुछ पल रुककर साँस ली। दोनों की साँसें तेज चल रही थीं।

फिर कमर हिलानी शुरू की। पहले धीरे-धीरे ऊपर-नीचे। उसके लंड के पूरे हिस्से को महसूस करते हुए। फिर रफ्तार बढ़ाई। जोर-जोर से बैठने लगी। सोफे से आवाज आने लगी। उसके हाथ मेरे कूल्हों पर आ गए। मैंने उसके बाल पकड़कर हल्का खींचे। उसकी आँखों में देखा। वो मुँह खोलकर कराह रहा था।

“और जोर से,” मैंने कहा।

मैंने कमर और तेज पटकनी शुरू कर दी। हर बार पूरी तरह नीचे बैठती और फिर ऊपर उठती। पसीना दोनों के शरीर पर चमकने लगा। मेरे स्तन उसके चेहरे के पास आ-जा रहे थे। उसने मुँह में एक स्तन ले लिया। जीभ से चाटा, हल्का काटा। मैंने रफ्तार और बढ़ा दी। अंदर गहरी सनसनाहट फैल रही थी। मैं पहुँचने के करीब थी। कमर और तेज हिलाने लगी। वो भी जोर से कराहने लगा। एकदम से उसके शरीर ने जोर का धक्का दिया। गर्म तरल अंदर तक फैल गया। उसी पल मेरा भी शरीर कांप उठा। दोनों हाथ उसके कंधों पर दबा दिए। शरीर अकड़ गया, फिर ढीला पड़ गया।

मैं उसके ऊपर ही लेटी रही। साँसें सामान्य होने तक रुकी रही। फिर धीरे से उतर गई। पानी पिया। उसने भी पिया। मैंने कहा, “बेडरूम चलो।”

वो मेरे पीछे आया। बिस्तर पर मैंने उसे पेट के बल लिटा दिया। उसके कंधों को दबाया। फिर उसके कूल्हों को थोड़ा ऊपर उठाया। अपने घुटनों को उसके दोनों तरफ टिकाया। लंड को सही जगह पर रखा और पीछे से अंदर ले लिया। पहले धीरे। पूरा अंदर जाने के बाद रुकी। फिर जोर-जोर से कमर पटकनी शुरू कर दी। हर धक्के के साथ बिस्तर की आवाज तेज होती गई। मेरे दोनों हाथ उसके कंधों पर थे। वो आसानी से हिल नहीं सकता था। मैंने उसकी गर्दन पर झुककर दांत गड़ा दिए। हल्का काटा। नाखून उसकी पीठ पर फेरे। लाल रेखाएँ बन गईं। मुझे उसका ये हाल बहुत अच्छा लग रहा था – मेरे नीचे, मेरी मर्जी से।

बहुत देर तक चलता रहा। पसीने से दोनों शरीर चिपक गए। मैंने रफ्तार बदली। कभी धीमे लंबे धक्के लगाए, कभी तेज और छोटे। जब फिर से पहुँची तो उसके बाल जोर से पकड़कर खींच लिए। वो भी उसी समय छोड़ गया। दोनों थककर बिस्तर पर गिर पड़े। मैं उसकी पीठ पर ही लेटी रही। उसका हाथ पीछे आकर मेरे बालों में घूमने लगा।

रात में 2:15 के आसपास फिर से शुरू हुआ। मैंने उसे अपनी तरफ खींचा। इस बार आमने-सामने। मैंने उसके दोनों हाथ पकड़कर सिर के ऊपर दबा दिए। खुद ऊपर चढ़ी। धीरे-धीरे अंदर लिया। फिर रफ्तार बढ़ाई। उसकी आँखों में देखा। वो भी मुझे देख रहा था। जब दोनों पहुँचे तो आँखें मिली हुई थीं।

सुबह 8:10 पर आँख खुली। वो बगल में सो रहा था। मैं बाथरूम चली गई। पानी गरम किया। थोड़ी देर बाद वो भी आ गया। मैं शॉवर के नीचे खड़ी थी। पानी गिर रहा था। उसने देखा। मैंने इशारा किया। वो नंगा अंदर आ गया। पानी दोनों पर गिरने लगा। मैंने उसे दीवार से सटाया। गीली टाइल्स ठंडी लग रही थीं। उसके लंड को हाथ में लिया। ऊपर-नीचे किया। सख्त हो गया। फिर खुद को उसके सामने मोड़ लिया। दोनों हाथ दीवार पर रखे। कमर पीछे की तरफ की। उसने मेरी कमर पकड़ी। धक्के लगाने लगा। मैंने कहा, “मेरी रफ्तार से।” उसने मान लिया। मैं खुद पीछे धक्का दे रही थी। हर बार अंदर तक महसूस कर रही थी। पानी और शरीर की आवाजें गूंज रही थीं। जब दोनों पहुँचे तो पैर कांप रहे थे। एक-दूसरे को पकड़ना पड़ा।

2 दिन बाद फिर आया। इस बार किचन में। मैंने उसे काउंटर पर लिटाया। ठंडी सतह उसकी पीठ पर लगी। उसके पैर फैलाए। अंदर लिया। खड़े-खड़े जोर-जोर से धक्के लगाने लगी। बर्तनों की हल्की आवाज आने लगी। मैंने उसका मुँह अपने हाथ से दबा लिया। वो मेरे हाथ के नीचे कराह रहा था। कंट्रोल पूरा मेरा था।

एक रात मैंने कुछ अलग किया। पहले से तैयार रखी थी। पहले सामान्य रफ सेक्स किया। उसके बाद उसे पेट के बल लिटाया। आँखों पर रूमाल बाँध दिया। हाथ हल्के से पकड़ लिए।

“चुप रहना,” मैंने कहा। “आज मेरी पूरी बारी है।”

मैंने उसके कूल्हों को थोड़ा ऊपर किया। धीरे-धीरे तैयारी की। फिर बहुत धीरे से अंदर प्रवेश किया। वो तनाव में आ गया। शरीर अकड़ गया। मैंने कंधा सहलाया – “धीरे… आराम से।” उसने साँस छोड़ी। मैंने और अंदर बढ़ाया। कमर बहुत धीरे-धीरे हिलानी शुरू की। पहले बहुत धीमी। उसकी पीठ पर हाथ फेरते हुए। वो चादर पकड़े हुए था। दबी आवाज निकल रही थी। मैंने रफ्तार थोड़ी बढ़ाई। बाल पकड़कर हल्का खींचा। नाखून पीठ पर फेरे। वो मेरे नाम पुकारने लगा। मुझे उसका ये रूप बहुत पसंद था – पूरी तरह मेरे नीचे।

बहुत देर तक चलता रहा। कभी धीमी, कभी थोड़ी तेज। जब वो करीब आया तो रफ्तार बढ़ा दी। वो कांप उठा। शरीर अकड़ गया और उसने उसी हाल में छोड़ दिया। मैंने भी उसी समय अपनी संतुष्टि पाई। धीरे से बाहर निकाला। रूमाल हटाया। वो पलटा। आँखें मिलीं। कुछ नहीं बोला। बस मुझे पास खींच लिया। मैं उसके सीने पर लेट गई। दिल की धड़कन तेज चल रही थी। मेरे बालों में उँगली घूम रही थी।

अब कई हफ्ते हो गए। वो हफ्ते में 2-3 बार आता है। सेक्स हमेशा होता है। कभी बहुत रफ – दीवार से सटाकर, फर्श पर, बाल खींचकर, नाखून फेरकर। कभी बाथरूम में पानी के नीचे। कभी रात के 3 बजे अचानक। और कभी वो वाली बात भी दोहराई जाती है जहाँ मैं पूरी तरह कंट्रोल में रहती हूँ।

लेकिन बीच-बीच में कुछ और भी होने लगा है। एक दिन थककर आई तो उसने खाना गरम किया, पैर दबाए। सेक्स नहीं हुआ। बस उसके कंधे पर सिर रखकर सो गई। एक दिन बारिश में उसने पीछे से बाँहों में ले लिया। सेक्स नहीं किया। बस कहा – “अच्छी लगती हो।”

अब जब वो जाता है तो कमरा खाली लगता है। उसकी चैट का इंतजार रहता है। रात को सोचती हूँ – पहले तो सिर्फ चुदाई चाहिए थी। अब उसके जाने के बाद भी खयाल रहता है।

मैं खुद से कहती हूँ – ये सिर्फ सेक्स है। पहले चुदाई हुई। प्यार नहीं।

लेकिन रात को जब वो सो जाता है और मैं उसका हाथ पकड़कर लेटी रहती हूँ, तो सवाल उठता है। क्या सिर्फ इतना ही है? क्या आगे भी यूँ ही चलेगा?

जवाब अभी नहीं पता। वो अभी भी आता है। मैं अभी भी बुलाती हूँ। सेक्स अभी भी होता है – रफ और मेरी मर्जी का। और बीच में वो चुपचाप पल भी आ जाते हैं।

शायद यूँ ही चलता रहे। या शायद एक दिन कोई बात हो जाए। अभी तो बस इतना ही है।

पहले चुदाई हुई। बाकी सब… अभी खुला हुआ है।

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⚠️ महत्वपूर्ण अस्वीकरण

ये सभी कहानियाँ केवल काल्पनिक हैं।
इनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है।

सेक्स हमेशा सहमति पर आधारित होना चाहिए।
बिना सहमति के कोई भी कार्य गलत और दंडनीय है।

इन कहानियों से प्रेरित न हों।
बस पढ़ें, आनंद लें और भूल जाएं।