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होटल कमरे में दीदी ने भाई का लंड हाथ में लेकर मुठ मारी

Tight choot peli sex story: मेरी उम्र 23 साल है। मेरी भाई-बहन की चुदाई की कहानी पढ़िए। मेरी हाइट 5 फुट 3 इंच है और मेरा रंग काफी गोरा है। मेरे बाल ब्राउन हैं और मेरा फिगर साइज़ 35-27-34 है। ये बात पिछले महीने की है। मेरी एक कजिन की शादी दिल्ली में थी। लेकिन उस दिन और भी कई शादियाँ थीं जिसकी वजह से परिवार का कोई सदस्य दिल्ली शादी में नहीं जा सकता था।

मेरी बुआ का लड़का जिसका नाम दिव्यांश है वह 3 बजे के आसपास मेरे घर आया। उसने पूछा कि कौन शादी में जाएगा। तब मेरी माँ ने मना किया कि कोई नहीं जाएगा। लेकिन उसकी ज़िद के आगे माँ ने कहा कि गरिमा से पूछ लो अगर वो जाना चाहे। फिर उसने मुझसे पूछा तो मैं जाने के लिए तैयार हो गई। दिव्यांश काफी हैंडसम और अमीर है। उसकी आकर्षक मुस्कान और मजबूत कद-काठी देखकर मेरे मन में कुछ अनजाना सा उत्तेजना का एहसास होने लगा।

फिर वो कार लेने घर जाने लगा तो माँ ने कहा कि कार से नहीं जाना है ट्रेन या बस से चले जाओ। तब मैंने उससे कहा कि तुम अपने कपड़े ले आओ तब तक मैं भी पैकिंग कर लूँगी। फिर हम लोग लगभग 4 बजे घर से निकले और स्टेशन गए। लेकिन ट्रेन में बहुत भीड़ थी तो वहाँ से हम बस स्टेशन गए। एसी बस जा रही थी अब तक 5 बज गए थे। बस में बैठते ही दिव्यांश की जांघ मेरी जांघ से हल्के से टकराई जिससे मेरे शरीर में एक गर्म सिहरन दौड़ गई।

फिर हम दिल्ली लगभग 8 बजे पहुँचे। शादी एक होटल में थी जो बस स्टैंड से 1 किलोमीटर दूर था। जब हम होटल पहुँचे तो काफी लेट हो चुके थे। फिर बुआ ने हमें केवल एक ही कमरा दिया और बाकी कमरे गेस्ट से भरे हुए थे। फिर हम तैयार होकर हॉल में आ गए। अभी बारात आने में टाइम था।

फिर हम लोग सबसे मिलने-जुलने लगे। हम पंजाबी हैं इसलिए हमारे यहाँ शादी में पीने-पिलाने का इंतजाम ज़रूर होता है। फिर कजिन ने चुपचाप जाकर पी ली। मैंने शादी में लहंगा चोली पहना था। अब रात के लगभग 12 बज गए थे। फिर जब फैरो का टाइम हुआ तो मैं ड्रेस चेंज करने कमरे में आई। तब कजिन वहीं पर था और बियर पी रहा था। उसकी आँखें लाल हो रही थीं और होंठों पर शराब की नशे भरी मुस्कान थी।

फिर मैं ड्रेस चेंज करने बाथरूम में चली गई और फिर मैंने वहाँ पंजाबी सूट पहना जो काफी टाइट होता है। सूट मेरी बड़ी-बड़ी 35 साइज़ की छातियों को कसकर दबा रहा था और मेरी पतली कमर व गोल गाँड को अच्छी तरह उभार रहा था। जब मैं बाहर निकली तो उसने कहा कि दीदी थोड़ी देर रुक जाओ मैं भी अभी चलता हूँ। और फिर उसने मुझसे बियर के लिए पूछा तो मैंने कहा कि शादी में बहुत लोग हैं ठीक नहीं रहेगा। लेकिन जब उसने थोड़ा कहा तो मैंने एक गिलास पी ली। वैसे मैं कभी-कभी पार्टी-शादी में पी लेती हूँ लेकिन बहुत ज़्यादा नहीं पीती हूँ।

उसने मुझे आधी बोतल और देते हुए कहा कि दीदी इसे और पी लो तब चलते हैं। खैर मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं थी तो मैंने वो आधी बोतल भी गटागट पी ली। शराब का गर्म नशा मेरे गले से होते हुए पेट तक उतर गया और मेरे पूरे शरीर में एक अजीब सी गर्माहट फैलने लगी। फिर वो मुझसे कहने लगा कि दीदी आप शादी में क्या सेक्सी लग रही थीं। उसके मुँह से निकले इस शब्द ने मेरे गालों को लाल कर दिया। तो मैं शर्मा गई और मैंने कहा कि अब ड्रिंक खत्म करो और चलो।

तब उसने मेरा हाथ पकड़कर मुझे ज़ोर से बेड पर बैठाते हुए कहा कि अभी रुको चलते हैं। और फिर वो मेरी तारीफ के पुल बाँधने लगा। उसने कहा कि दीदी अपना दुपट्टा उतार दो मैं ऐसे ही आपको देखकर बताता हूँ कि आप कैसी लग रही हो। तो तब मैंने उससे कहा कि तुम पागल हो क्या मैं तुम्हारी बहन हूँ कोई गर्लफ्रेंड नहीं। मेरी आवाज़ में हल्का कंपन था लेकिन शरीर में शराब का असर बढ़ता जा रहा था।

तब वो कहने लगा कि एक दिन के लिए बन जाओ। फिर जब मैं गुस्से से कमरे के बाहर जाने लगी तो उसने मेरा हाथ पकड़कर खींच लिया और मुझे ज़ोर से गले लगा लिया। उसकी मजबूत बाहों में मेरी नरम छातियाँ उसके सीने से दब गईं। अब मैंने भी पिछला सेक्स 31 दिसंबर को किया था और उसके बाद नहीं इसलिए थोड़ी उत्तेजित तो मैं भी थी। लेकिन मैं सेक्स के लिए तैयार नहीं थी क्योंकि दिव्यांश मेरा भाई था। फिर भी उसकी गर्म साँसें मेरे गाल पर पड़ रही थीं और मेरी चूत में हल्की नमी आने लगी थी।

अब मैं यहाँ तक तैयार हो गई थी कि वो मुझे कपड़ों के ऊपर से जो करना चाहे कर सकता है। फिर वो मुझे लिप्स किस करने लगा और काफी देर तक करता रहा। उसके गर्म होंठ मेरे होंठों को चूस रहे थे। उसकी जीभ मेरे मुँह के अंदर घुसकर मेरी जीभ से खेल रही थी। तब मैंने उससे कई बार कहा कि ये गलत है। लेकिन मेरी आवाज़ अब कमज़ोर पड़ चुकी थी। फिर तब वो कहने लगा कि एक बियर और पीते हैं सब गलत सही हो जाएगा। अब तक लगभग मैं भी मूड बना चुकी थी कि कर ही लेती हूँ जो होगा देखा जाएगा।

हम बेड पर आकर बैठ गए और वो मुझे किस करने लगा। उसके हाथ मेरी कमर पर घूम रहे थे। और फिर उसने अपना एक हाथ मेरे बूब्स पर रख दिया तो मैं एकदम से शर्मा गई। उसके उँगलियों का दबाव मेरी बड़ी-बड़ी छातियों पर महसूस हो रहा था। अब मैं शर्म के मारे खुलकर एंजॉय नहीं कर पा रही थी। फिर मैंने दिव्यांश से कहा कि मुझे और ड्रिंक करनी है तो वो कमरे के बाहर गया और बियर ले आया। फिर हम दोनों ने लगभग डेढ़ बियर पी और डेढ़ बियर बच गई थी।

अब वो अपना सूट उतारने लगा था। अब वो अंडरवियर और बनियान में मेरे सामने खड़ा था। उसका मजबूत शरीर और उभरी हुई छाती देखकर मेरी साँसें तेज़ हो गई थीं। फिर उसने मेरे कपड़े उतारने चाहे तो मैंने कहा कि लाइट बंद कर दो तब उतारूँगी। तब उसने कहा कि क्या दीदी बिना लाइट के क्या मज़ा आएगा। और मेरा ऊपर का उतार दिया और मेरी ब्रा के ऊपर से ही मेरे दोनों बूब्स दबाने लगा था। उसके मोटे उँगलियों का दबाव मेरी नरम छातियों को कुचल रहा था। अब तक मैं काफी उत्तेजित होकर कर रही थी।

फिर उसने मुझे बेड पर लिटाकर मेरी ब्रा खोल दी। मेरी बड़ी-बड़ी 35 साइज़ की छातियाँ अब पूरी तरह आज़ाद होकर उछल पड़ीं। वो मेरे बड़े-बड़े बूब्स देखकर एकदम पागल हो गया था और उन्हें बुरी तरह मसलने लगा था। उसकी हथेलियाँ मेरी छातियों को जोर-जोर से दबा रही थीं। अब काफी दिनों के बाद सेक्स करने की वजह से मेरे निप्पल एकदम टाइट और पिंक हो गए थे। वो उन्हें चुटकियों में पकड़कर खींच रहा था जिससे मेरी चूत में गर्म चूड़ियाँ छूटने लगीं।

अब वो अपने एक हाथ से मेरे बूब्स दबा रहा था और दूसरे हाथ से मेरा सलवार खोल रहा था। सलवार के साथ मेरी पैंटी भी आधी खिसक गई थी। अब सलवार उतारने के बाद मैंने शर्म की वजह से अपनी आँखें बंद कर ली थीं। मेरी गोरी जाँघें काँप रही थीं। फिर जब उसने मेरी पैंटी उतारी तो मैंने अपने दोनों हाथ अपनी चूत पर रख लिए और पैर एक के ऊपर एक चढ़ा लिए थे। मेरी चूत अब पूरी तरह गीली हो चुकी थी।

फिर उसने अपने बाकी के कपड़े उतार दिए। मेरी आँखें अब भी बंद थीं। फिर उसने अपना लंड मेरे लिप्स पर रखा तो जब मैंने आँखें खोलीं तो उसे मना कर दिया कि मैं चुसाई नहीं करूँगी।

फिर तब उसने कोई ज़ोर-ज़बरदस्ती नहीं की और कहा कि ठीक है लेकिन हाथ में तो ले सकती हो ना। उसका लंड काफी बड़ा और मोटा था। गाढ़ी नीली नसों वाला वो खड़ा लंड मेरे हाथ में आते ही गरम और फड़कता महसूस हो रहा था। अब मैं उसका लंड अपने एक हाथ में लेकर आगे-पीछे करने लगी थी। मेरी उँगलियाँ उसके मोटे लंड को कसकर जकड़ रही थीं और ऊपर-नीचे रगड़ रही थीं। फिर थोड़ी देर के बाद वो उठा और मेरी दोनों टाँगें फैलाकर मेरी चूत चाटने लगा और अपने दोनों हाथों से मेरे बूब्स दबाने लगा था।

अब वो बहुत तेज़ी से कर रहा था। उसकी गर्म जीभ मेरी चूत की फाकी लबी को चाट रही थी। अब मुझे एक अजीब सी गुदगुदी हो रही थी। मेरी चूत से रस टपक रहा था और वो उसे चूस-चूसकर पी रहा था। फिर थोड़ी देर के बाद उसे लगा कि मैं सेक्स के पूरे मूड में आ गई हूँ तो तब उसने मेरे दोनों पैर फिर से फैलाकर अपना लंड मेरी चूत पर रखा और धीरे से थोड़ा आगे किया तो मैं कसमसा कर रह गई थी। उसके लंड का मोटा सिरा मेरी तंग चूत को फैलाते हुए अंदर घुस रहा था।

फिर उसने थोड़ी तेज़ी से एक धक्का मारा तो मैं चिल्लाई कि रुक जाओ। मेरी तंग चूत में तेज़ जलन और फटने जैसा दर्द हो रहा था। तो फिर वो अपना मोटा लंड वहीं पर थोड़ा-थोड़ा अंदर-बाहर करने लगा।

मैंने उससे पूछा कि अभी कितना बाहर है तो तब उसने कहा कि दीदी अभी गया ही कितना है। तो तब मैंने कहा कि मैं शायद अब और अंदर नहीं ले पाऊँगी मुझे इतने में ही काफी दर्द हो रहा है। मेरी चूत पूरी तरह फैलकर जल रही थी। फिर वो कहने लगा कि एक काम करो आप अपनी आँखें बंद करके लेट जाओ और थोड़ा सा और बर्दाश्त करो थोड़ी देर में सब सही हो जाएगा और मज़ा भी आएगा।

अब मैंने अपनी आँखें बंद की ही थी कि उसने मेरा दुपट्टा मेरे मुँह पर ठूँस दिया और मेरे दोनों हाथ पकड़कर एक ज़ोरदार धक्का लगाया। उसके मोटे लंड ने मेरी चूत को एक झटके में चीर दिया तो मेरे मुँह से दबी हुई चीख निकली। अब वो लगभग अपना पूरा लंड मेरी चूत के अंदर ठूँस चुका था। फिर जैसे ही उसने मेरा एक हाथ छोड़कर मेरे बड़े बूब्स को जोर से मसलने शुरू किए तो मैंने दुपट्टा मुँह से निकाल लिया। अब वो ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगा रहा था। उसके भारी अंडकोष मेरी गाँड से टकरा रहे थे।

थोड़ी देर तक तो मैं आह्हह… आह्हह… धीरे-धीरे… रुक्कक… अब नहीं… करती रही। मेरी चूत से चुदाई का पानी निकलकर बेड गीला कर रहा था। और फिर थोड़ी देर बाद मैं भी पूरी जोश में आ गई और नीचे से अपनी कसमसाती चूत को उछाल-उछालकर उसके लंड का स्वागत करने लगी थी। अब टाइमिंग बिल्कुल मैच हो गई थी। जब मैं नीचे से उछलती तो वो पूरा लंड मेरी चूत में घोंप देता। अब इस वजह से उसका मोटा लंड मेरी चूत के सबसे अंदर तक पहुँच रहा था और मेरी गर्भ नली को रगड़ रहा था।

अब मेरे मुँह से आह मैं मर गई… मर गई… अब नहीं सहा जा रहा… रोक लो… मैं मर जाऊँगी… फट जाएगी चूत… और जाने क्या-क्या गंदी-गंदी बातें निकल रही थीं। फिर लगभग 15-20 मिनट की जोरदार चुदाई के बाद 1 मिनट के अंतर पर हम दोनों झड़ गए। पहले मैं अपनी चूत का गरम पानी छोड़कर झड़ गई और बाद में दिव्यांश ने मेरी चूत के अंदर अपना गाढ़ा वीर्य उड़ेल दिया। और फिर हम दोनों थककर लेट गए।

फिर थोड़ी देर के बाद मैं उठी और अपने कपड़े पहनने लगी तो तब दिव्यांश ने मना किया। मेरी चूत अभी भी उसकी चुदाई से दर्द कर रही थी और उसका वीर्य मेरी जाँघों के बीच से रिस रहा था। फिर मैंने मना किया और उससे कहा कि जो भी हुआ ये गलत ही है ना। तब वो कहने लगा कि दीदी गलती-गलती ही होती है, एक बार की हो या ज़्यादा बार।

मैंने पूछा कि कहते क्या हो तो वो कहने लगा कि बस आज रात के बाद मैं कभी भी आपसे सेक्स के लिए नहीं कहूँगा, ये वादा है। तो तब उसने कहा कि 5 मिनट सोच लो, तब तक बियर पीते हैं। फिर मैंने भी सोचा कि जो नहीं करना था, वो तो कर ही लिया, चलो अब एक रात की ही तो बात है, जो होगा देखेंगे। अब मैं भी पूरी तरह तैयार हो गई थी और फिर उसने उस रात मुझे 3 बार और जमकर चोदा। पहली बार उसने मुझे कुत्ते की तरह घुटनों के बल चोदा और मेरी चूत को जोर-जोर से ठोकते हुए मेरे बूब्स को मसलता रहा। दूसरी बार मैं ऊपर बैठकर उसके मोटे लंड पर खुद उछली और अपनी चूत को पूरी तरह भर लिया। तीसरी बार सुबह होने से पहले उसने मुझे दीवार से सटाकर खड़े-खड़े बुरी तरह चोदा और मेरी चूत में अपना गाढ़ा वीर्य भर दिया। मैं बता नहीं सकती कि कितना मज़ा आया था।

फिर आखिरी में दिव्यांश ने कहा कि अगर आप मेरी दीदी नहीं होती तो मैं आपसे शादी कर लेता। अब सुबह होने को थी। फिर मेरे मोबाइल पर कॉल आई कि लड़की विदा होने जा रही है। अब मैं जाने के मूड में नहीं थी, मैं काफी थक गई थी, लेकिन फिर भी तैयार होकर नीचे जाना पड़ा।

जैसे ही लड़की विदा हुई तो मैं कमरे पर आकर सो गई। फिर जब कजिन ने मुझे जगाया तब तक 11 बज गए थे। फिर मैं नहाकर तैयार हुई और हम वापस कानपुर के लिए लौट गए। अब दिव्यांश और मैं एक दूसरे से बस में आँख भी नहीं मिला पा रहे थे। फिर मैंने दिव्यांश से कहा कि इसे एक सपने की तरह भूल जाना। और हुआ भी ऐसा ही। उस दिन के बाद दिव्यांश मेरे घर कभी नहीं आया और ना मैं उससे कभी मिली।

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⚠️ महत्वपूर्ण अस्वीकरण

ये सभी कहानियाँ केवल काल्पनिक हैं।
इनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है।

सेक्स हमेशा सहमति पर आधारित होना चाहिए।
बिना सहमति के कोई भी कार्य गलत और दंडनीय है।

इन कहानियों से प्रेरित न हों।
बस पढ़ें, आनंद लें और भूल जाएं।