Devar bhabhi fucking sex story, Horny bhabhi chudai sex story: मेरे घर में मैं मम्मी और भाभी ही रहते हैं. मेरे भैया सउदी अरब में रहते है और मुश्किल से 3 साल में एक बार ही घर आ पाते हैं. घर का माहौल अक्सर शांत और उदास रहता था क्योंकि भैया की लंबी अनुपस्थिति ने सबको प्रभावित कर रखा था. पापा भी हफ्ते बाद ही आते हैं. उनकी व्यस्तता के कारण घर में अकेलापन और भी गहरा हो जाता था.
यह पोर्न भाभी सेक्स कहानी मेरे और मेरी भाभी की है. भाई की शादी हुई थी, उसके एक महीने बाद ही वो सउदिया चले गए थे, फिर उनका 2 साल बाद आना हुआ था. उस दौरान भाभी की जवानी पूरी तरह से सूखी पड़ी थी. उनकी सेक्सी देह, भरे-भरे स्तन और पतली कमर हर किसी को लुभा सकती थी.
भाभी भी बहुत उदास व परेशान रहती थीं. उनकी आंखों में हमेशा एक अधूरी प्यास छाई रहती थी जो उनके गोरे चेहरे को और आकर्षक बना देती थी. भाई जब 2 साल बाद आए तो वो ज्यादा दिन नहीं रुक पाए क्योंकि उनको ज्यादा दिन की छुट्टी नहीं मिली थी. उनकी वापसी की टिकट अगले महीने की ही थी इसलिए मुश्किल से ही वो एक महीना घर पर रुक पाए थे.
भैया वापस चले गए. उनके जाने के बाद भाभी फिर से उदास रहने लगीं. घर की दीवारें उनकी अकेली सांसों से भर जाती थीं. मैं भी बाहर रह कर पढ़ाई करता था तो भाभी एकदम अकेली पड़ गई थीं. उनकी दिनचर्या अब और भी एकाकी हो गई थी.
जब लॉकडाउन लगा तो उसकी वजह से मैं घर आ गया था. अचानक घर में मेरी मौजूदगी ने कुछ हल्कापन ला दिया था. एक दिन मैंने देखा कि भाभी छत पर बैठी थीं और भैया से बात कर रही थीं. उनकी आवाज में छिपी हुई लालसा साफ महसूस हो रही थी. फिर मैं आया तो भाभी ने बात खत्म करके कॉल कट कर दिया.
वैसे तो मेरे मन में भाभी के लिए कोई ग़लत विचार नहीं था लेकिन भाभी बहुत सेक्सी भी थीं तो कभी कभी बस थोड़ा हंसी मज़ाक कर लेता था. उनकी नाजुक गर्दन, भारी छातियां और गोल नितंब देखकर मन मचल जाता था. हम दोनों के बीच मजाक की सीमा कुछ बढ़ गई थी तो अब जब भी मुझे उनकी ब्रा की स्ट्रिप दिखती, तो मैं खींच कर छोड़ देता और उन्हें चोट लग जाती.
ये मैंने कई बार कर दिया था. हर बार स्ट्रिप खींचते समय उनकी नरम त्वचा पर मेरी उंगलियों का स्पर्श होता और वे हल्के से कांप जाती थीं. इससे भाभी को बुरा नहीं लगता था. बल्कि वे मुस्कुराकर मुझे झिड़कती थीं और कभी-कभी जवाबी मजाक भी करती थीं.
एक दिन वो रूम में बैठ कर फोन चला रही थीं. कमरे में हल्की सी ठंडी हवा बह रही थी और उनकी साड़ी का पल्लू थोड़ा सरक गया था. उनकी ब्रा की स्ट्रिप दिख रही थी तो मैंने पीछे से बेड पर बैठ कर स्ट्रिप खींच दी. स्ट्रिप के खिंचने से उनकी ब्रा में दबे स्तन हल्के से उछल पड़े थे.
उस दिन मैं भाभी के रूम में था और भाग नहीं पाया क्योंकि भाभी आगे बैठी थीं. उन्होंने तुरंत मुड़कर मुझे पकड़ लिया और जोर से धक्का दे दिया. उनका स्पर्श गर्म और नरम था. मैं गिर कर बेड पर लेट गया. मैं उठने की कोशिश करने लगा लेकिन भाभी ने मुझे नीचे दबा रखा था.
वो मेरे ऊपर चढ़ गईं और मुझसे मज़ाक वाली लड़ाई करने लगीं. उनकी जांघें मेरी कमर के दोनों तरफ दब गई थीं और उनका वजन मुझे रोमांचित कर रहा था. मैं उनसे छूटने की कोशिश कर रहा था. भाभी मुझे पकड़ कर मेरे ऊपर चढ़ गई थीं और मेरा एक गाल खींचने लगी थीं. उनकी उंगलियों की नरमी से मेरी त्वचा सिहर उठी.
वो मुझे गुदगुदी करने लगीं. उनकी हंसी की आवाज कमरे में गूंज रही थी और उनके शरीर की हल्की पसीने की महक मेरे नाक तक पहुंच रही थी. मुझे उनके झुके होने से उनके दूध साफ़ दिखने लगे. ब्लाउज का गला थोड़ा खुला था जिससे उनकी गहरी वल्ली और गोरे, भरे हुए स्तन आधे नजर आ रहे थे.
मैंने उनकी कमर ज़ोर से पकड़ कर अपनी तरफ खींचा तो वो मेरे ऊपर कुछ ज्यादा ही झुक गईं और मेरे चेहरे पर उनके दूध दबने लगे. उनके नरम, गर्म स्तनों की नरमी मेरे गालों और होंठों पर महसूस हो रही थी. ब्रा के कपड़े के अंदर उनके निप्पल सख्त होकर मेरी त्वचा को छू रहे थे. उन्हें भी मज़ा आ रहा था और मुझे भी.
यार पता नहीं उस वक्त मुझे क्या हो गया … मेरा मूड बनने लगा और मेरा लंड खड़ा हो गया. मेरे लंड में खून की तेज धारा बहने लगी थी और वह पूरी ताकत से तनकर उनकी जांघों के बीच दबने लगा. भाभी को मेरे कड़क लंड का आभास हो गया … वो एक पल को रुकीं. उनकी सांसें भारी हो गईं, चेहरा हल्का लाल पड़ गया और उनकी आंखों में एक पल के लिए वासना की चमक दिखी. पर अगले ही पल वो मुझे फिर से गुदगुदी करने लगीं. उनकी रगड़ से मेरे लंड पर और दबाव पड़ रहा था.
मैंने उन्हें दबोच लिया तो वो मुझसे छूटने की कोशिश करने लगीं. उनकी कोशिश में हमारी शरीर की रगड़ बढ़ गई और उनके स्तन मेरे सीने पर और जोर से दबने लगे. वो कहने लगीं- छोड़ दो प्लीज़. उनकी आवाज में हल्की सी कांपन थी.
मैंने नहीं छोड़ा. वो बोलीं- अच्छा सॉरी, चलो अब छोड़ो मुझे जाने दो, काम करना है. उनकी सांसें अब भी तेज चल रही थीं.
मैंने भाभी को छोड़ दिया और वो चली गईं. मैं आसपास टहलने निकल गया.
फिर दोपहर को मैं घर आया. दोपहर की तेज धूप में सड़क पर चलते हुए मेरे शरीर पर पसीना चमक रहा था लेकिन घर की ठंडी हवा ने तुरंत राहत पहुंचा दी. मैं अपने रूम में था और थकान से बेड पर बैठ गया. कमरे में हल्की सी खामोशी थी जो मेरे मन को और शांत कर रही थी.
वो आईं. उन्होंने मैगी बनाई थी तो वही गरमागरम प्लेट लेकर आई और पंखे के नीचे बैठ कर हवा लेने लगीं. उनकी साड़ी पसीने से पूरी तरह भीग गई थी जिससे ब्लाउज की पतली कपड़े की परत उनके भरे हुए स्तनों से चिपक गई थी. हर सांस के साथ उनकी छाती ऊपर नीचे हो रही थी और पसीने की छोटी छोटी बूंदें उनकी गर्दन से नीचे सरक रही थीं.
भाभी पसीने से भीग गई थीं तो उनकी स्ट्रिप फिर से दिख गई. ब्रा की सफेद स्ट्रिप उनके गोरे कंधे पर चमक रही थी और उनके नरम कंधे की त्वचा पसीने से चिकनी हो गई थी. हवा के झोंके से उनकी साड़ी का पल्लू हल्का सा सरक गया जिससे उनकी कमर की नरम चमड़ी झलकने लगी.
मैंने जोर से खींच दी तो स्ट्रिप टूट गई. खिंचाव की तेज आवाज के साथ ब्रा का कपड़ा उनके एक स्तन पर से हट गया और उनका नरम गर्म दूध आधा उजागर हो गया. मेरी उंगलियां उनके कंधे की नरम त्वचा को छू गई थीं और उस स्पर्श से उनके शरीर में हल्की सी सिहरन दौड़ गई थी.
वो मेरी तरफ देखने लगीं और बोलीं- कर दिया ना नुकसान, अब भरपाई कौन करेगा? उनकी आंखों में नाराजगी के साथ एक शरारती चमक थी. उनके गाल हल्के लाल हो गए थे और सांसें थोड़ी तेज चल रही थीं.
मैंने बोला- पैसे ले लेना और नई ले लेना ओके. लेकिन मेरी नजर उनके खुलते ब्लाउज और उजागर होते स्तन पर अटकी रह गई थी.
वो बोलीं- नहीं रहने दो. बड़े आए पैसे देने वाले. उनकी यह बात सुनकर मेरे अंदर पुरानी मस्ती फिर से जाग उठी और दिल की धड़कन तेज हो गई.
उनकी इस बात से मैंने दूसरी तरफ की स्ट्रिप भी खींच दी. इस बार ब्रा पूरी तरह ढीली हो गई और उनके दोनों भरे हुए दूध हल्के से उछल पड़े. उनकी नरम त्वचा मेरी उंगलियों को छू गई और गर्मी का एक झटका मेरे हाथ तक पहुंच गया.
इस पर भाभी मुझसे फिर से लड़ने लगीं. वे हंसते हुए मेरी तरफ झपटीं और अपने हाथों से मेरे कंधे पकड़कर जोर से धक्का देने लगीं. उनके शरीर की गर्मी और पसीने की महक मेरे नाक तक पहुंच रही थी.
आज मैंने शॉर्ट्स पहना था. मैंने भागने की कोशिश की मगर वो मेरे ऊपर चढ़ गईं. उनकी जांघें मेरी कमर के दोनों तरफ दब गई थीं और उनका पूरा वजन मेरे ऊपर आ गया था. उनकी नरम जांघों की गर्मी मेरे शॉर्ट्स के कपड़े से सीधे मेरी त्वचा को छू रही थी.
शायद उनको मेरे साथ चिपकने में मज़ा आने लगा था. उनकी सांसें अब और तेज हो गई थीं और उनके स्तन मेरे सीने से हल्के हल्के टकरा रहे थे. हर बार उनकी देह की हलचल से मेरे शरीर में एक अनोखी सिहरन दौड़ रही थी.
फिर से पहले जैसा ही हुआ. हम दोनों फिर से उसी जोरदार मजाक वाली लड़ाई में उलझ गए और कमरे में हंसी की आवाज गूंजने लगी.
मैंने ज़ोर से कमर पकड़ ली. मेरी उंगलियां उनकी पतली कमर की नरम चमड़ी को मजबूती से घेर रही थीं और उनकी कमर की गर्मी मेरी हथेलियों में समा रही थी.
वो मेरे ऊपर आ गईं और उनके दूध मेरे मुँह के पास आ गए थे. उनके भरे हुए स्तन मेरे चेहरे से सिर्फ कुछ इंच ऊपर थे और ब्रा के ढीले कपड़े से उनके सख्त निप्पल साफ महसूस हो रहे थे.
उनको मेरी सांसों की गर्मी महसूस हुई तो वो मेरे ऊपर झुक गईं. उनकी गर्म सांसें मेरे चेहरे पर पड़ रही थीं और उनकी खुशबू मेरे मुंह तक पहुंच रही थी.
उनकी गर्म सांसों से आज मुझे भी अजीब सा लग रहा था. मेरे शरीर में एक अजीब सी लहर दौड़ गई और मेरे लंड में खून की तेज धारा बहने लगी.
शायद उन्हें भी मज़ा आ रहा था. उनकी आंखें आधी बंद हो गई थीं और उनके होंठों पर एक मादक मुस्कान खेल रही थी.
कुछ मिनट ऐसे ही ज़ोर ज़बरदस्ती वाली लड़ाई चलती रही और मेरा फिर से मूड बन गया. हमारी देह एक दूसरे से रगड़ खा रही थी और हर रगड़ के साथ रोमांच बढ़ता जा रहा था.
आज भाभी जी भी शायद पूरे मूड में ही थीं. वे जोर से हंस रही थीं लेकिन उनकी हंसी में अब वासना का पुट साफ महसूस हो रहा था.
उनको महसूस होने लगा कि मेरा लौड़ा खड़ा हो गया है. मेरे शॉर्ट्स के अंदर मेरा लंड पूरी ताकत से तन गया था और उनकी जांघों के बीच सख्त होकर दब रहा था.
वो और भी ज़ोर ज़बरदस्ती करने लगीं जिससे हम दोनों में रगड़न कुछ ज्यादा हो गई. हर बार उनकी जांघें मेरे लंड पर ऊपर नीचे रगड़तीं और मुझे तीखी सनसनी का झटका लगता.

मेरा लंड पूरा तन कर खड़ा हो गया और पूरा साफ़ असर दिखाने लगा. अब यह उनके पेट और जांघों के बीच सख्त होकर दबाव बना रहा था और हर हलचल से और सख्त होता जा रहा था.
भाभी थोड़ी ढीली हुईं और मेरे लंड पर थोड़ी सी हिलकर उठने को हुईं. उनकी हिलने से रगड़ और तेज हो गई और मेरे लंड की नसें फड़कने लगीं.
तभी मैंने उन्हें ज़ोर से खींच दिया और वो मेरे ऊपर आ गिरीं. उनकी पूरी देह मेरे सीने पर लिपट गई और उनके स्तन मेरे सीने पर पूरी तरह दब गए.
इस बार उनका मुँह बिल्कुल मेरे मुँह के पास आ गया. उनके गर्म होंठ मेरे होंठों से सिर्फ एक इंच दूर थे और उनकी सांसें मेरे मुंह में समा रही थीं.
मेरे ज़ोर से पकड़ने की वजह से वो मुझसे बिल्कुल से चिपक गई थीं, ऐसा लग रहा था मानो वो किस कर रही हों. उनके निप्पल मेरे सीने पर सख्त होकर दब रहे थे और उनकी देह की हर मांसपेशी मेरी त्वचा से सट गई थी.
यार मेरा बुरा हाल था. अभी कुछ खेल हो पाता कि तभी मम्मी उन्हें बुलाने लगीं. फिर भाभी को जाना पड़ा. लेकिन मुझे आज पूरा यकीन हो गया था कि अब भाभी को भी मज़ा आने लगा है. मेरा लंड खड़ा था तो मुझसे रहा नहीं जा रहा था. मेरी आज हालत बहुत खराब हो गई थी. मैं बाथरूम में गया और मुठ मारने लगा. शाम को मैं चिकन ले आया और मैंने बोला- भाभी, आज आप ही बना दो. भाभी नॉनवेज नहीं खाती थीं और ना ही बनाती थीं. लेकिन मैंने बोला तो आज भाभी ने बोला- ठीक है, बना तो दूँगी पर मुझे क्या मिलेगा? मैं इशारा समझने लगा. मैंने भी हंस कर जवाब दे दिया- साफ़ बता दो क्या चाहिए, जो भी चाहिए आपको मिल जाएगा. भाभी बोली- एक बार सोच लो. जो मांगूंगी, देना पड़ेगा. मैंने कहा- हां ठीक है. मैं अपने फ्रेंड्स के साथ बाहर चला गया. फिर शाम को आने में मैं थोड़ा लेट हो गया. सबने खाना खा लिया था. मैं देर से आया और अपने रूम में गया तो भाभी खाना लेकर आ गईं.
मैंने आज थोड़ी पी ली थी, तो मुझे शायद थोड़ा सा नशा हो गया था. नशे की वजह से मेरा सिर हल्का सा घूम रहा था, कमरे की हल्की रोशनी आंखों में थोड़ी धुंधली पड़ रही थी और पूरे शरीर में एक गर्माहट फैल गई थी जो शराब की वजह से मेरी नसों में और तेज बह रही थी. मेरी सांसें थोड़ी भारी हो गई थीं और होंठों पर एक मंद मुस्कान खेल रही थी.
ये भाभी को पता लग गया कि मुझे नशा चढ़ा है. उन्होंने मेरी लाल आंखें और थोड़ी लड़खड़ाती चाल को एक नजर में भांप लिया, उनकी भौंहें हल्की सी उठ गईं और चेहरे पर चिंता के साथ एक शरारती मुस्कान आ गई.
मैंने बोला- भाभी आप खाना रख दो, मैं खा लूँगा. मेरी आवाज थोड़ी भारी और धीमी निकली थी क्योंकि नशा मेरी जीभ पर भी असर कर रहा था.
लेकिन भाभी ने मेरी हालत देख कर कहा- मेरे सामने खाओ, नहीं तो बिना खाए ही सो जाओगे. उनकी आवाज में ममता थी लेकिन आंखों में एक अलग सी चमक थी जो मुझे और गर्म कर रही थी.
मैं खाने लगा. चम्मच से मैगी उठाते हुए हर कौर निगलने में मेरे मुंह में गर्मी और मसाले का स्वाद फैल रहा था लेकिन नशे की वजह से स्वाद और भी तीखा लग रहा था.
मैंने भाभी से पूछा- आपने खा लिया है? मेरी नजर उनकी ओर उठी और उनके गोरे चेहरे पर पसीने की हल्की सी चमक देखकर मन मचल गया.
भाभी ने कहा- नहीं. उनकी आवाज नरम थी और वे मेरी प्लेट की तरफ देख रही थीं.
मैंने कहा- मेरे साथ ही खा लो. जाओ अपने लिए भी खाना ले आओ. मेरे शब्दों में जिद थी और नशे की वजह से मैं थोड़ा ज्यादा बोल रहा था.
भाभी बोलीं- आप खा लो, मैं बाद में खा लूँगी. वे मुस्कुराईं लेकिन उनकी आंखें मेरे चेहरे पर टिकी रहीं.
मैं उनको अपने हाथ से खिलाने लगा. मैंने एक कौर मैगी उठाकर उनके मुंह की तरफ बढ़ाया, मेरी उंगलियां उनके होंठों को हल्का सा छू गईं और उस स्पर्श से मेरी उंगलियों में सिहरन दौड़ गई.
उन्होंने मना कर दिया. वे सिर हिलाकर हंसीं लेकिन उनकी नजर मेरी उंगलियों पर अटकी रह गई.
वो बोलीं- मैं नॉनवेज नहीं खाती. उनकी आवाज में हल्की शर्म थी लेकिन चेहरे पर एक नई लालिमा छा गई.
मैंने ज़बरदस्ती करने लगा और बोला- आप नहीं खाओगी तो मैं भी नहीं खाऊंगा. मैंने प्लेट को थोड़ा पीछे खींच लिया और उनकी आंखों में सीधे देखा.
थोड़ी देर के बाद उन्होंने अपने हाथ से ही खा लिया. वे झुककर कौर मुंह में ले रही थीं और हर कौर के साथ उनकी गर्दन की नरम त्वचा हिल रही थी.
यार मुझे बहुत अजीब लगा कि जो नॉनवेज नहीं खाती हैं, फिर कैसे खा लिया. मेरा मन अंदर ही अंदर चौंक रहा था लेकिन नशे की वजह से यह अजीब सा रोमांच भी लग रहा था.
कुछ देर बाद उन्होंने मुझे खुद अपने हाथ से खिलाया और खुद भी खाया. उनकी उंगलियां मेरे होंठों को छू रही थीं, नरम और गर्म, और हर बार स्पर्श के साथ मेरे शरीर में एक तीखी सनसनी दौड़ जाती थी.
खाने के बाद मैं लेटने लगा. मेरा शरीर थकान और नशे से भारी हो गया था.
मैंने ड्रेस भी नहीं चेंज की थी. जीन्स अभी भी मेरे पैरों पर चिपकी हुई थी.
मैं अपनी जीन्स उतारने लगा. मेरी उंगलियां बेल्ट पर गईं और धीरे से खोलने लगा.
भाभी ने इसमें भी हेल्प की. वे झुककर मेरी जीन्स को नीचे खींचने लगीं, उनकी उंगलियां मेरी जांघों की त्वचा को हल्का सा छू रही थीं.
मुझे शार्ट्स भी पहनाया. वे शॉर्ट्स को मेरे पैरों से चढ़ाते हुए मेरी कमर को हल्का सा सहला रही थीं.
अब मैं लेट गया. बेड पर फैलकर मैंने आंखें बंद कर लीं लेकिन नशा और भाभी की मौजूदगी मेरे मन को जगा रही थी.
तभी भाभी आईं और मुझे अच्छे से सुला कर एक किस किया और जाने लगीं. उनके होंठ मेरे माथे पर पड़े, नरम और गर्म, और उस स्पर्श से मेरी त्वचा सिहर उठी.
मैंने उनको खींच लिया और मैं भी किस करने लगा. मेरे हाथ उनकी कमर पर गए और मैंने उन्हें अपनी तरफ खींच लिया.
भाभी बोलीं- शराब क्यों पी ली? उनकी सांसें मेरे चेहरे पर पड़ रही थीं और आवाज में हल्की चिंता थी.
मैंने कहा- यार, दोस्तों ने पिला दी. मेरी आवाज भारी थी लेकिन मेरी नजर उनके होंठों पर अटकी रह गई.
वो कुछ नहीं बोलीं. वे बस मेरी आंखों में देखती रहीं.
मैंने भाभी को खींच लिया. मेरी पकड़ अब और मजबूत हो गई थी.
आज हमारे बीच कुछ ज्यादा ही होने लगा. हमारी सांसें एक दूसरे से मिल रही थीं और कमरे का तापमान बढ़ता जा रहा था.
मैं भाभी को ज़ोर से हग करके किस करने लगा. मेरे होंठ उनके होंठों से टकराए, पहले हल्के से फिर गहरे, मेरी जीभ उनके होंठों को चीरकर अंदर घुस गई और उनकी जीभ से लिपट गई.
भाभी भी कुछ नहीं बोल रही थीं. उनके शरीर ने मेरे हग का जवाब दिया और वे मेरे सीने से और चिपक गईं.
अब मुझे पूरा भरोसा हो गया था कि भाभी मुझे बिल्कुल भी मना नहीं करेंगी. उनकी देह की गर्मी और सांसों की तेजी ने मेरे हर शक को मिटा दिया.
मैंने भाभी कि गर्दन पर किस स्टार्ट कर दिया. मेरे होंठ उनकी नरम गर्दन की त्वचा पर घूमे, चूमे, हल्के से काटे और फिर चूसने लगा.
भाभी भी मज़े लेने लगीं. उनकी गर्दन थोड़ी पीछे झुक गई और उनके मुंह से हल्की सी आह निकली.
तभी मैंने उनके मम्मों को दबाना चाहा पर भाभी ने मेरा हाथ पकड़ लिया. उनकी उंगलियां मेरी कलाई पर कस गईं लेकिन दबाव ढीला था.
उन्होंने मेरे हाथ को पकड़ा और कहा- ये क्या कर रहे हो? उनकी आवाज कांप रही थी लेकिन आंखें बंद हो गई थीं.
मैंने अपने हाथ को रोका नहीं और उनके मम्मों की तरफ बढ़ाने लगा. मेरी हथेली उनके ब्लाउज के ऊपर से उनके भरे हुए स्तनों को छू गई.
उन्होंने मुझसे ऐसे बोला जरूर था मगर उनका मुझे मना करने का मन नहीं दिख रहा था. उनके शरीर ने मेरे स्पर्श का स्वागत किया और उनकी छाती हल्की सी ऊपर उठी.
मैंने कहा- भाभी, प्लीज़ आज थोड़ी हेल्प कर दो. प्लीज़ भाभी, मुझे मत रोको. मेरी आवाज में विनती थी और नशे की वजह से और भी गहरी लग रही थी.
वो बोलीं- ठीक है पर ज्यादा कुछ नहीं ओके? उनकी सांसें अब पूरी तरह भारी हो चुकी थीं.
मैंने ओके कहा और उनके ब्लाउज में हाथ डाल दिया. मेरी उंगलियां उनके गर्म, नरम स्तनों की त्वचा को सीधे छू गईं.
मुझे जन्नत का सुख मिलने लगा. भाभी के नर्म दूध मुझे लज्जत देने लगे. उनकी त्वचा रेशम जैसी नरम थी, गर्म और थोड़ी पसीने से चिपचिपी, और मेरी हथेली पूरी तरह भर गई.
मैं उनके दूध जोर से दबाने लगा. मेरी उंगलियां उनके स्तनों को मल रही थीं, दबा रही थीं और फिर हल्का सा खींच रही थीं.
भाभी भी मादक भाव से मेरी तरफ देखने लगीं और उनकी आंखों में वासना साफ़ झलकने लगी. उनकी पुतलियां फैल गईं, होंठ थोड़े खुले और सांसें फुलाती हुई चल रही थीं.
मैंने उन्हें चूम लिया. भाभी ने भी मेरे चुम्बन में साथ दिया. हमारे होंठ फिर से मिले, इस बार और गहरे, जीभें एक दूसरे को चाट रही थीं और लार का मिश्रण हमारे मुंह में घुल रहा था.
थोड़ी देर मैं भाभी को ऐसे ही किस करता रहा और उनके दूध दबाता रहा. मेरी उंगलियां उनके निप्पलों को घेरकर मल रही थीं और हर दबाव पर वे सख्त होते जा रहे थे.
फिर भाभी बोलीं- ब्लाउज उतार दो. उनकी आवाज में अब पूरी लालसा थी.
मैंने पीछे से हुक खोल दिया. मेरी उंगलियां उनके ब्लाउज के हुक पर गईं और एक एक करके खोल दिए.
भाभी ब्रा में हो गईं. उनके भरे हुए स्तन अब सिर्फ ब्रा के पतले कपड़े में कैद थे और ऊपर नीचे हो रहे थे.
भाभी बोलीं- रूको, पहले दरवाजा बंद करके आ जाओ. वे थोड़ी हिचकिचाईं लेकिन शरीर मेरे पास ही रहा.
मैंने बोला- क्यों कौन आ जाएगा? … मम्मी तो सो गई हैं, बाद में बंद कर देना. मैंने उनकी बात को अनसुना कर दिया और आगे बढ़ गया.
ये कह कर मैंने भाभी की ब्रा खोल दी और उनके एक निप्पल को अपने मुँह में भर लिया. मेरा मुंह उनके स्तन पर गया, होंठों ने निप्पल को घेर लिया और मैंने जोर से चूसना शुरू कर दिया.
मैं भाभी के दूध चूसने लगा और दूसरे को दबाने लगा. मेरी जीभ निप्पल को घुमा रही थी, चाट रही थी और हल्के से काट रही थी जबकि दूसरा हाथ दूसरे स्तन को पूरी ताकत से मल रहा था.
भाभी भी फुल मूड में आ गई थीं. उनकी पीठ कमान की तरह झुक गई, हाथ मेरे बालों में फंस गए और मुंह से लगातार आहें निकलने लगीं.
मैंने कहा- भाभी आज फुल मस्ती हो जाए. मेरी आवाज उनके कान के पास फुसफुसाई.
उन्होंने कुछ नहीं बोला. वे बस मेरे सिर को अपने स्तनों पर और दबा रही थीं.
मैं समझ गया कि भाभी की तरफ से हां है. उनके शरीर की हर हलचल ने मुझे और आगे बढ़ने का इशारा दिया.
मैं अपना हाथ नीचे लगाया और चूत टटोल कर कहा- यार भाभी आपको तो गीली हो रही है. मेरी उंगलियां उनकी साड़ी और पेटीकोट के अंदर घुसीं, पैंटी के ऊपर से उनकी चूत को छुआ और महसूस किया कि कपड़ा पूरी तरह भीगा हुआ है.
वो कुछ नहीं बोलीं. उनकी जांघें हल्की सी कांपीं और वे मेरे स्पर्श में और खुल गईं.
मैंने भाभी के कान में धीरे से कहा- यार, पहले ही बता देतीं. मेरी सांसें उनके कान पर गर्म पड़ रही थीं.
अब भाभी बोलीं- दो दिन से तुमने गीला कर दिया था रगड़ कर, आज भी कर दिया. अब इतने नासमझ भी न बनो. उनकी आवाज कांप रही थी और आंखें आधी बंद थीं.
मैंने कहा- तो फिर ठीक है, आज बोला है आपने तो गीला ही नहीं, कुछ और भी होगा. मेरी उंगलियां अब उनकी पैंटी के अंदर घुस गईं और सीधे उनकी गीली चूत की फांकों को छूने लगीं.
भाभी मेरा साथ देने लगीं. उनका एक हाथ मेरी पीठ पर घूमने लगा और दूसरे हाथ से वे मेरी कमर को पकड़ रही थीं.
उनका हाथ मैंने अपनी अंडरवियर में डाल दिया और कहा- लो पकड़ो इसे! मैंने उनकी कलाई पकड़कर अपना लंड उनकी हथेली पर रख दिया.
उन्होंने लंड पकड़ लिया ओर अंडरवियर से बाहर निकाल लिया. उनकी नरम, गर्म उंगलियां मेरे लंड की मोटी छड़ को घेर रही थीं और हल्का सा दबाव डाल रही थीं.
मेरा लंड पूरा खड़ा था.
भाभी बोलीं- थोड़ी शर्म करो, ठीक है मैंने बोला है मगर इतनी बेशर्मी ठीक नहीं है. उनकी आवाज में शर्म की हल्की कांपन थी लेकिन उनकी आंखों में वासना की चमक साफ झलक रही थी, उनकी सांसें तेज चल रही थीं और गालों पर लालिमा फैल गई थी. उनके नंगे स्तन अभी भी मेरे हाथों से थोड़े दबे हुए थे और निप्पल सख्त होकर खड़े थे.
मैंने कहा- अब शर्म की बात मत करो. मेरी आवाज नशे और उत्तेजना से भारी हो गई थी, मैंने उन्हें और करीब खींच लिया ताकि उनकी गर्म त्वचा मेरी त्वचा से पूरी तरह सट जाए.
भाभी- क्यों? वे मेरी आंखों में देखते हुए पूछ रही थीं, उनकी जांघें अभी भी मेरी कमर के आसपास लिपटी हुई थीं और उनकी चूत की गर्मी मेरे लंड पर महसूस हो रही थी.
मैंने कहा- जिसने की शर्म उसके फूटे कर्म. मैंने मुस्कुराते हुए कहा और अपनी उंगलियों को उनकी कमर पर घुमाते हुए उनकी नितंबों को हल्का सा दबाया.
भाभी हंस दीं. उनकी हंसी कमरे में गूंजी, उनकी छाती हिली और स्तन मेरे सीने पर हल्के से टकराए जिससे मेरे लंड में और खून की धारा दौड़ गई.
मैं भाभी का पेटीकोट खोलने लगा और साड़ी हटा कर पेटीकोट भी हटा दिया. मेरी उंगलियां उनकी साड़ी की गांठ पर गईं, धीरे से खोलीं और पेटीकोट की डोरी खींचकर नीचे सरका दी, उनकी गोरी जांघें और पतली कमर अब पूरी तरह नजर आ रही थीं.
अब भाभी पैंटी में थीं. उनकी लाल रंग की पैंटी उनके भरे हुए नितंबों और गोल चूत के ऊपर चिपक गई थी, कपड़े पर पहले से ही गीलेपन का निशान साफ दिख रहा था.
यार रेड कलर की पैंटी में क्या कमाल लग रही थीं. उनकी गोरी त्वचा के साथ लाल पैंटी का कंट्रास्ट इतना आकर्षक था कि मेरा लंड और सख्त हो गया, उनकी जांघों के बीच की गर्मी और पैंटी का गीला कपड़ा देखकर मेरा मुंह सूखने लगा.
मैंने कहा- अब रूको, दरवाजा और खिड़की बंद कर आओ, फिर करना. मेरी आवाज में जल्दी थी लेकिन मैं उन्हें जाने नहीं देना चाहता था.
भाभी धीरे से इधर उधर देख कर अपने रूम में गईं और नाइटी पहन कर सब दरवाजे बंद करके आईं और कमरे का गेट लॉक करके आ गईं. वे वापस आईं तो उनकी नाइटी हल्की सी थी, नीचे से उनकी लाल पैंटी झांक रही थी और उनकी सांसें अभी भी तेज थीं.
आज बस नशे का बहाना था. नशा तो थोड़ा ही था पर मैंने भाभी को ज्यादा दिखाने का नाटक किया था. मैंने जानबूझकर अपनी आंखें लाल दिखाईं ताकि वे और पास आएं.
भाभी आईं और मेरे सामने नाइटी उतार दी. वे एक झटके में नाइटी सिर के ऊपर से उतारकर फेंक दीं, अब वे सिर्फ लाल पैंटी में खड़ी थीं और उनके भरे स्तन हवा में हल्के से लहरा रहे थे.
मैंने उनको अपनी बांहों में खींचा और उन्हें चूमने लगा, फिर से उनके निप्पलों से खेलने लगा, एक को मुँह में ले लिया और दूसरे को उंगलियों में दबा कर मींजने लगा. मेरे होंठ उनके निप्पल को घेरकर जोर से चूसने लगे, जीभ उसे घुमा रही थी और हल्के से काट रही थी, दूसरा हाथ दूसरे स्तन को पूरी हथेली से मल रहा था और निप्पल को अंगूठे से दबा रहा था.
भाभी की आंह आह निकलने लगी. उनके मुंह से लगातार हल्की आहें और कराह निकल रही थीं, उनकी पीठ कमान की तरह झुक गई और जांघें कांपने लगीं.
मैंने उनकी पैंटी भी उतरवा दी. मेरी उंगलियां पैंटी की कमर पर गईं, धीरे से नीचे खींची और उनकी गीली चूत अब पूरी तरह नंगी हो गई, उनके बालों वाली चूत की फांके गीली चमक रही थीं.
अब वो बिल्कुल नंगी थीं और मैं गंजी अंडरवियर में था. उनकी पूरी देह मेरे सामने थी, गोरी त्वचा पसीने से चमक रही थी और उनकी चूत से हल्की सी चिपचिपाहट निकल रही थी.
उन्होंने मेरे कपड़े उतार दिए और मुझे किस करने लगीं. वे मेरी अंडरवियर खींचकर नीचे सरका दीं, मेरे लंड को हाथ में पकड़ लिया और गहरे किस करने लगीं, उनकी जीभ मेरी जीभ से लड़ रही थी.
हम दोनों को मज़ा आने लगा. हमारी सांसें मिल रही थीं, शरीर रगड़ खा रहे थे और कमरे में सिर्फ हमारी कराह और चुंबन की आवाजें गूंज रही थीं.
कुछ देर बाद मैंने कहा- भाभी, मेरा थोड़ा सा मुँह में ले लो. मैंने उनका सिर नीचे दबाते हुए कहा, मेरा लंड पूरी तरह खड़ा और नसों से फड़क रहा था.
वो मना करने लगीं और कहने लगीं- मुँह में अच्छा नहीं लगता मुझे! उनकी आंखें शर्म से नीचे झुक गईं लेकिन उनके हाथ अभी भी मेरे लंड को हल्का सा दबा रहे थे.
मैंने थोड़ी देर मनाया तो मान गईं और घुटनों के बल बैठ कर मेरा लंड मुँह में ले लिया. वे घुटनों पर बैठ गईं, मुंह खोला और मेरे लंड का सिरा पहले होंठों से छुआ फिर धीरे से मुंह में ले लिया.
यार बहुत मज़ा आया मुझे … वो बहुत तेजी से लंड चूसने लगीं. उनके होंठ मेरे लंड की मोटी छड़ को घेरकर ऊपर नीचे सरक रहे थे, जीभ नीचे की नसों पर घूम रही थी और हर बार गहरे मुंह में लेते समय गला तक धक्का दे रही थीं, सक्शन की आवाज कमरे में गूंज रही थी.
ऐसा लग ही नहीं रहा था कि भाभी को लंड चूसने में मजा नहीं आता. उनकी आंखें ऊपर मेरी तरफ देख रही थीं, मुंह से लार की धार निकल रही थी और वे तेजी से सिर हिला रही थीं.
उनके लंड चूसने से तो ऐसा लग रहा था कि ये तो शादी के पहले से ही लंड चूसने की कला में निपुण थीं. वे बिना रुके चूस रही थीं, कभी गहरी थ्रोट करतीं तो कभी सिर्फ सिरे को चाटतीं और हाथ से अंडकोष को हल्का मल रही थीं.
मैं 69 में आ गया और उनकी चूत में उंगली करना शुरू कर दिया. मैं लेट गया, उन्हें ऊपर खींचकर अपनी छाती पर बिठाया, उनका मुंह मेरे लंड पर और मेरा मुंह उनकी चूत पर.
वो भी गीली होने लगी थीं, कहने लगीं- अब देर न करो. उनकी चूत की फांके पहले से ही भीग चुकी थीं, क्लिटोरिस सख्त हो गया था और वे मेरे मुंह की तरफ हिल रही थीं.
मैंने कहा- पहले मुझे भी कुछ कर लेने दो भाभी. मैंने उनके नितंब पकड़े और मुंह उनकी चूत पर लगा दिया.
अपना मुँह मैंने उनकी चूत पर रख दिया और एकदम से चूत रगड़ दी. मेरी जीभ उनकी फांकों के बीच घुसी, क्लिटोरिस को चाटा और पूरा मुंह चूत पर दबाकर जोर से रगड़ा.
वो पूरी तरह से मचल गईं. उनके नितंब कांपे, जांघें मेरे सिर को दबाने लगीं और मुंह से जोर की आह निकली.
मैं भाभी की चूत चूसने लगा. मेरी जीभ अंदर बाहर हो रही थी, क्लिटोरिस को चूस रही थी और उनके रस को पी रही थी.
उनकी चूत का टेस्ट बहुत गजब का था. नमकीन अमृत जैसा स्वाद मिल रहा था. उनका रस मीठा नमकीन था, गर्म और चिपचिपा, मेरे मुंह में फैल रहा था और मैं और जोर से चूसने लगा.
मैंने कहा- अब पेल दूँ क्या? मेरी आवाज उनकी चूत पर दबी हुई थी.
भाभी बोलीं- क्यों निमंत्रण देना होगा क्या? वे मेरे लंड को और तेज चूसते हुए बोलीं, उनकी आवाज में बेसब्री थी.
मैंने चुदाई की पोजीशन बनाई और अपना लंड उनकी चूत पर रगड़ने लगा. मैंने उन्हें पीठ के बल लिटाया, उनकी जांघें फैलाईं और लंड की नोक उनकी गीली चूत की फांकों पर रगड़ने लगा, क्लिटोरिस पर घुमाया.
वो तड़प गईं और बोलीं- अब डाल भी दो. उनकी कमर उठ रही थी, हाथ मेरी पीठ पर नाखून गड़ा रही थीं.
मैंने एक ही झटके में पूरा लंड चूत में घुसा दिया. मेरा मोटा लंड उनकी तंग गीली चूत को चीरता हुआ पूरा अंदर चला गया, उनकी दीवारें मेरे लंड को कसकर दबा रही थीं.
वो तड़प गईं और बोलीं- आराम से करो. उनकी आंखें बंद हो गईं, मुंह खुला और कराह निकली लेकिन उनका शरीर मेरे लंड को अंदर खींच रहा था.
पर मैं उन्हें धकापेल चोदने लगा. मैं तेजी से अंदर बाहर करने लगा, हर झटके पर उनके स्तन हिल रहे थे और चूत से चुटकने की आवाज आ रही थी.
वो भी मज़े लेने लगी और बोलने लगीं- यार, कितने दिन से आपको पटा रही थी. उनकी जांघें मेरी कमर पर लिपट गईं, नितंब ऊपर उठाकर मेरे हर झटके का जवाब दे रही थीं.
मैंने कहा- पहले ही बोल देतीं. मैं और तेज धक्के मारता गया, मेरा लंड उनकी गर्भाशय तक पहुंच रहा था.
वो हंसने लगीं. हंसी के बीच उनकी आहें निकल रही थीं.
मैंने कहा- जब नॉनवेज खाती नहीं थीं, तो क्यों खाया. मैंने उनके स्तन दबाते हुए पूछा.
भाभी बोलीं- पहले खाती थी मगर बाद में छोड़ दिया था. अब आपके प्यार में खाना पड़ा. मैंने नॉनवेज न खाने की कसम खाई थी. वे मेरी पीठ पर नाखून गाड़ रही थीं और उनकी चूत मेरे लंड को और कस रही थी.
मैंने कहा- मुझसे सच्चा प्यार करती हो? मैंने गति तेज कर दी.
भाभी बोलीं- तभी तो चिकन खाकर अपनी कसम तोड़ दी. उनकी चूत सिकुड़ने लगी, वे चरम पर पहुंच रही थीं.
अब मैं उन्हें मस्ती से चोद रहा था. मेरे झटके तेज और गहरे थे, कमरे में चूत की चुटकने और उनकी आहों की आवाज भर गई थी.
थोड़ी देर के बाद उनका रस निकल गया और वो निढाल हो गईं. उनकी चूत मेरे लंड को जोर से दबाई, गर्म रस बाहर निकला और उनकी देह कांप उठी.
मेरा अभी नहीं हुआ था, मैं भाभी को चोदता ही गया. मैं रुक नहीं, गति बनाए रखी और उनके स्तनों को चूसता रहा.
वो फिर से चार्ज हो गईं और मज़े लेने लगीं. उनकी जांघें फिर से मेरी कमर पर कस गईं.
वो बोलीं- आज पूरा रस निकाल दो. उनकी आंखें वासना से भर गई थीं.
मैं और तेज गति से चोदने लगा और अब चरम पर आ गया था. मेरा लंड फड़कने लगा, अंडकोष सिकुड़ने लगे.
मेरा भी काम होने वाला था. मुझे लगा जैसे सारा तनाव एक जगह जमा हो रहा हो.
मैंने बोला- भाभी, मेरा होने वाला है. मैंने झटके और तेज कर दिए.
वो बोलीं- तेज़ तेज़ करो. वे अपनी कमर उठाकर मेरा साथ दे रही थीं.
मैंने तेज़ करने के साथ ही पूछा- कहां लोगी? मेरा लंड पूरी तरह फूल चुका था.
वासना के नशे में बोलीं- अन्दर ही करो, बहुत दिन से सूखी पड़ी है … आज इसको गीली कर दो. उनकी चूत मेरे लंड को और जोर से दबा रही थी.
मैंने फुल स्पीड में किया और मेरा निकल गया. मेरे साथ ही उनका भी एक बार फिर से निकल गया. मेरा गर्म रस उनकी चूत के अंदर फूट पड़ा, धार-धार निकलता रहा, उनकी दीवारें इसे पी रही थीं और उनका रस भी मेरे लंड पर मिल गया.
थोड़ी देर मैं उनके ऊपर ही पड़ा रहा. मेरा लंड अभी भी उनके अंदर था, दोनों की सांसें तेज थीं और पसीना एक दूसरे पर बह रहा था.
जब हटा, तो वो खड़ी हुईं. वे उठीं तो उनकी जांघें कांप रही थीं.
उनकी चूत से रस निकल कर बाहर आ रहा था. मेरा सफेद रस उनकी लाल चूत से धीरे धीरे टपक रहा था, जांघों पर बह रहा था.
मुझे बहुत अच्छा लगा. देखकर मेरे मन में फिर से उत्तेजना जाग गई.
मैंने भाभी से कहा- टपक रहा है … साफ़ कर लो और फिर से आ जाओ अभी मन नहीं भरा. मैंने मुस्कुराते हुए कहा.
भाभी बोलीं- अभी फिर से करना है क्या? वे हंसते हुए बाथरूम की तरफ गईं.
मैंने कहा- हां. मेरा लंड फिर से आधा खड़ा हो चुका था.
भाभी बोलीं- कहीं भागी नहीं जा रही हूँ. कल कर लेना. वे बाथरूम से वापस आईं, चूत साफ करके.
मैंने कहा- आओ पहले आज मन भरके कर लेने दो. कल का कल देखा जाएगा. मैंने उन्हें खींचकर बेड पर बिठाया.
वो बाथरूम से आईं और हम दोनों थोड़ी देर किस करते रहे. हमारे होंठ फिर मिले, जीभें एक दूसरे को चाट रही थीं.
मैं उनके मम्मों को चूसता रहा, वो अपने हाथ से पकड़ कर अपने चुचे चुसवाती रहीं. वे अपने स्तन पकड़कर मेरे मुंह में ठूंस रही थीं, मैं जोर से चूस रहा था.
थोड़ी देर में मेरा फिर से खड़ा हो गया. मेरा लंड पूरी ताकत से तन गया.
मैंने कहा- भाभी, फिर से तैयार हो गया. मैंने उन्हें दिखाते हुए कहा.
भाभी बोलीं- तो आ जाओ. वे लेट गईं और जांघें फैला दीं.
मैं भाभी के ऊपर चढ़ गया. मैंने फिर से उनकी चूत में लंड घुसाया.
इस बार बहुत देर तक चुदाई चली. हम दोनों बार बार पोजीशन बदलते, कभी वे ऊपर चढ़ जातीं तो कभी मैं उन्हें घोड़ी बनाकर चोदता, लेकिन ज्यादातर मिशनरी में ही गहरे झटके मारता रहा.
भाभी भी पूरी खुश हो गई थीं. उनके चेहरे पर संतोष और खुशी छा गई थी, वे बार बार चरम पर पहुंच रही थीं.
इस बार भी मैं रस अन्दर ही छोड़ दिया था. मेरा गर्म वीर्य फिर से उनकी चूत के अंदर भर गया.
भाभी पूरी रात मेरे रूम में ही नंगी सोईं. वे मेरी बांहों में लिपटकर नंगी सो गईं, उनकी नंगी देह मेरे सीने से सटी हुई थी.
सुबह जल्दी उठ कर चली गईं और जाते जाते मुझे अंडरवियर भी पहना दिया था. वे धीरे से उठीं, मुझे अंडरवियर चढ़ाई और मुंह चूमकर चली गईं.
अगले दिन मैंने भाभी की गांड भी मारी. मैंने उन्हें घोड़ी बनाया, लंड पर थूक लगाया और धीरे से उनकी गांड में घुसाया.
उस दिन भाभी को ज्यादा दर्द हुआ. वे कराह रही थीं लेकिन धीरे धीरे मजा लेने लगीं, उनकी गांड की दीवारें मेरे लंड को कस रही थीं.
अब लगभग एक साल से ज्यादा हो गया. समय बीतता गया लेकिन हमारी भूख नहीं मिटी.
मेरा जब मन होता मैं भाभी से सेक्स का मजा लेता हूँ. हर मौके पर हम एक दूसरे को छूते, चूमते और चोदते.
कभी कभी तो हम दोनों किचन में ही खाना बनाते बनाते सेक्स कर लेते हैं. वे बर्तन धो रही होतीं तो मैं पीछे से उनकी साड़ी उठाकर चूत में लंड घुसा देता, वे काउंटर पकड़कर झुक जातीं.
वो दवा ले लेती हैं तो बच्चे होने की कोई टेन्शन नहीं रहती. वे गोली खा लेतीं या इंजेक्शन लगवा लेतीं.
अब तो इंजेक्शन आ गया है, एक बार लगवाओ और तीन महीने तक खुल कर चुदाई का मजा लो.
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