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भैया के मोटे लंड ने बहन की कुमारी बुर फाड़ दी

Bhai Bahan ki Mast chudai sex story: दोस्तो, कैसे हैं आप लोग? मैं प्रिया सिंह आप सभी का स्वागत करती हूँ।

मेरी आवाज में एक गर्मी है जो आपको सीधे अपनी कहानी की दुनिया में ले जाएगी, जहां हर स्पर्श, हर सांस और हर इच्छा को महसूस किया जा सकता है।

यह मेरी पहली कहानी है तो कुछ गलती हो तो माफ करना।

मैं नई हूं इस क्षेत्र में लेकिन दिल से पूरी कोशिश करूंगी कि आप सबको हर पल का मजा आए।

मैं फ्री सेक्स कहानी और अन्तर्वासना साईट की नियमित पाठक रही हूं।

उन कहानियों ने मुझे रातों को जगाए रखा, मेरे शरीर को उत्तेजित किया जहां मैं अकेली में अपनी उंगलियों से खेलने लगती थी, कल्पना करती थी कि कोई मजबूत मर्द मुझे भरपूर प्यार दे।

अब टाइम ना वेस्ट करते हुए टीन गर्ल फर्स्ट सेक्स कहानी पर आती हूँ।

ये भाई बहन सेक्स कहानी तब की है, जब मैं बीटेक के फर्स्ट ईयर में थी।

उस समय मेरी उम्र सिर्फ बीस साल की थी और मेरे शरीर में जवानी का जोश पूरे जोरों पर था, मेरी त्वचा नई सी चमक रही थी और हर छोटी उत्तेजना मुझे कंपा देती थी।

मेरे घर में हम तीन भाई और दो बहन और मम्मी-पापा हैं।

घर का माहौल आमतौर पर शांत रहता था लेकिन जब मम्मी पापा बाहर होते तो हम भाई बहनों के बीच की हंसी मजाक और गुप्त इच्छाएं उभर आती थीं, कमरों में अकेलेपन की रातें लंबी हो जाती थीं।

सबसे बड़े भाई का नाम राजू है और उनकी आयु 26 साल की है।

वे घर के सबसे बड़े और जिम्मेदार लगते थे लेकिन अंदर से बहुत ही कामुक थे, उनकी मुस्कान में छिपी वासना को मैं महसूस कर चुकी थी।

उनके बाद मेरे दूसरे नंबर के भाई दीपक है।

उनकी आयु 24 साल की है।

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दीपक भैया थोड़े शांत स्वभाव के थे लेकिन उनका शरीर भी आकर्षक था, मजबूत कंधे और चौड़ी छाती।

तीसरे नंबर के भाई राहुल हैं, उनकी आयु 22 साल की है।

राहुल सबसे मस्ती करने वाले थे और हम सबके साथ अच्छा समय बिताते थे, उनकी हंसी से घर गूंज उठता था।

फिर अपने तीनों भाइयों के बाद मैं प्रिया हूँ और मेरी उम्र 20 साल है।

मेरे बाद सबसे छोटी बहन सोना है। वह अभी 18 साल की है।

सोना अभी स्कूल में थी और बहुत प्यारी और नटखट थी, उसकी मासूमियत घर को खुश रखती थी।

मेरे मम्मी पापा दोनों ही गवर्नमेंट जॉब में हैं तो वे दोनों ज़्यादातर समय घर से बाहर ही रहते हैं।

उनकी नौकरी की वजह से घर अक्सर खाली रहता था जिससे हमें पूर्ण स्वतंत्रता मिल जाती थी अपनी इच्छाओं को व्यक्त करने की, दीवारें गुप्त राजों की साक्षी बन जाती थीं।

ये सेक्स कहानी राजू भैया और मेरी है।

उनसे चुदने के बाद इस खेल में मैंने सबको शामिल कर लिया था।

लेकिन सब कुछ शुरू हुआ था राजू भैया के साथ ही, जब मैंने पहली बार उनकी कामुकता का राज देखा।

अब मैं आपको अपने राजू भैया के बारे में बता देती हूँ।

राजू भैया एक कंपनी में जॉब करते हैं और उनकी हाइट 6 फीट है।

उनका शरीर चौड़ा और मांसल था, छाती चौड़ी, बाजू मजबूत।

उनका लंड 8 इंच लंबा और 3.5 इंच मोटा है, जो पूरी तरह से खड़ा होने पर लोहे की तरह सख्त और नसों से भरा होता था, उसकी गर्माहट और मोटाई किसी भी औरत को पागल कर सकती थी।

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मैं चूंकि इस फैमिली सेक्स की सूत्रधार हूँ तो आपको अपने बारे में भी बता देती हूँ।

मेरी हाइट साढ़े पांच फीट की है।

मेरा फिगर अभी 36-32-38 का हो गया है।

मेरे स्तन 36 साइज के गोल-गोल और भरे हुए थे जो टाइट कपड़ों में उभर कर आते थे, मेरी कमर 32 की पतली थी जो मेरे नितंबों को और आकर्षक बनाती थी और मेरे 38 इंच के मोटे नितंब चलते समय लहराते थे, मेरी त्वचा चिकनी और मुलायम थी।

मैं देखने में एकदम कांटा माल हूँ जो भी मुझे एक बार देख भर ले तो मेरा दावा है कि वह अपना लंड बिना हिलाए नहीं रहेगा।

मेरी आंखें बड़ी-बड़ी और आकर्षक थीं, होंठ गुलाबी और शरीर की खुशबू से कोई भी पुरुष दीवाना हो सकता था।

मेरे राजू भैया की अभी शादी नहीं हुई है जिस कारण वे मुठ मारते रहते हैं।

वे अकेले में अक्सर अपनी कामुक कल्पनाओं में खो जाते थे, उनके कमरे से कभी कभी हल्की आहें सुनाई देती थीं।

एक दिन राजू भैया मुठ मार रहे थे कि मैं उनके रूम में चाय लेकर चली गई।

मैं जैसे ही उनके कमरे की खिड़की के पास पहुंची तो मैंने खिड़की में से झांक कर देखा कि राजू भैया मेरा नाम लेते हुए मुठ मार रहे थे।

उस समय राजू भैया अपने बिस्तर पर पूरी तरह नंगे नीचे हिस्से के साथ लेटे हुए थे।

उनकी मजबूत जांघें फैली हुई थीं और उनका विशाल 8 इंच लंबा, 3.5 इंच मोटा लंड उनके हाथ में था।

वे अपनी दाहिनी मुट्ठी को लंड पर कस कर बंद किए हुए ऊपर से नीचे की ओर तेज गति से चला रहे थे।

लंड की मोटी नसें फूल गई थीं, लाल चमकदार सिरे से पारदर्शी प्री-कम रिस रहा था जो उनके हाथ को चिकना बना रहा था।

हर स्ट्रोक के साथ ‘प्रिया… आह प्रिया…’ की फुसफुसाहट उनके मुंह से निकल रही थी।

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उनके चेहरे पर वासना के भाव थे, आंखें बंद, होंठ किंचित खुले हुए और सांसें तेज और भारी हो रही थीं।

कमरे में हल्की सी वीर्य और पुरुषीय खुशबू फैली हुई थी।

मैं वहां खड़ी उनकी हर हरकत को निहार रही थी, मेरा दिल जोर से धड़क रहा था।

मैं उनके लंबे मोटे लवड़े को देख कर दंग रह गई और पूरा सीन देखने लगी।

मेरा मुंह सूख गया था, आंखें उस मोटे लंड पर टिकी हुई थीं जो उनके हाथ में फूल रहा था और सिकुड़ रहा था।

मैं खिड़की के पीछे छिपी हुई थी, मेरा शरीर कांप रहा था, मेरी जांघों के बीच गर्माहट बढ़ रही थी।

कुछ देर के बाद भैया ने अपने लंड से मलाई फेंक दी और ‘आह आह मेरी प्रिया रानी’ कहते हुए लंड को निचोड़ने लगे।

उनके लंड का सिरा फूल गया, नसें उभर आईं और फिर अचानक सफेद गाढ़ा वीर्य जोर-जोर से फूटने लगा।

पहली फुहार हवा में उछली और उनके पेट पर गिरी, फिर दूसरी, तीसरी… कुल मिलाकर कई फुहारें निकलीं जो उनके मजबूत शरीर पर फैल गईं।

वे हर फुहार के साथ कांप उठते थे, उनकी मुट्ठी लंड को अंतिम बूंद तक निचोड़ रही थी, लंड अभी भी थोड़ा थरथरा रहा था और वीर्य की आखिरी धार उनकी उंगलियों पर टपक रही थी।

उनके मुंह से लगातार आहें और मेरे नाम की पुकार निकल रही थी, उनका शरीर पूरी तरह से तनाव मुक्त होकर बिस्तर पर ढीला पड़ गया था।

मैं यह सब देख कर गर्म हो गई थी और अपने मन में ही बोल रही थी ‘आह मेरे प्यार भैया … अपने लंड की मलाई क्यों वेस्ट कर रहे हो? मेरे मुँह में डाल दो न!’

मेरी चूत पूरी तरह गीली हो चुकी थी, पैंटी पर नमी का बड़ा धब्बा बन गया था, मेरे निप्पल सख्त होकर ब्लाउज से चिपक गए थे और मेरा पूरा शरीर आग की तरह जल रहा था।

मैं अपनी जांघें दबा रही थी ताकि उत्तेजना सहन हो सके, मेरी सांसें भारी हो गई थीं और होंठों पर काटने का दबाव बढ़ गया था।

तब तक भैया ने अपने औज़ार को चड्डी के अन्दर बंद कर दिया और फोन चलाने लगे।

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उसके बाद मैंने अपना दुपट्टा हटा दिया और चाय देने चली गई.

मैंने दरवाज़ा खोला और अन्दर आ गई, भैया से कहा- लीजिए भैया चाय पी लीजिए!

मेरी आवाज में हल्की सी शरारत भरी हुई थी और मैं जानबूझकर थोड़ा सा आगे झुक गई थी ताकि मेरा गहरा ब्लाउज और भी नीचे खुल जाए।

भैया ने मेरे दूध देखते हुए कहा- टेबल पर रख दो!

उनकी नजरें मेरे 36 साइज के भरे हुए दूधों पर जमी हुई थीं, उनकी सांसें थोड़ी भारी हो गई थीं और चेहरा हल्का लाल पड़ गया था।

मैं झुक कर टेबल पर चाय रखने लगी और भैया मेरे गहरे गले में से झांकते मेरे दूध देखने लगे।

मेरे स्तन आगे की ओर लटक गए थे, उनकी गोलाई और गहरी खाई पूरी तरह दिख रही थी, मेरे गुलाबी निप्पल कपड़े के नीचे सख्त होकर उभर आए थे और हर सांस के साथ हल्के से हिल रहे थे।

मैं भी और मस्ती के मूड में आ गई और मैंने टेबल पर रखी हुई भैया की बाइक की चाबी नीचे गिरा दी ताकि जब मैं चाबी उठाने के लिए नीचे झुकूं तो भैया को मेरे रसीले आमों के भरपूर दर्शन हो जाएं।

वही हुआ, मैं झुकी तो भैया मेरे दूधिया मम्मों को बड़ी गौर से देख रहे थे।

जब मैं नीचे झुकी तो मेरे भारी स्तन और भी आगे लटक गए, कपड़े का कट और गहरा हो गया, मेरी चिकनी त्वचा की खुशबू हवा में फैल गई और भैया की आंखें पूरी तरह खुली रह गई थीं।

उसके बाद मैंने चाबी उठा कर उनकी मेज़ पर रख दी और गांड मटकाती हुई अपने रूम में चली गई।

मेरे मोटे 38 इंच के नितंब हर कदम पर लहरा रहे थे, मैं जानबूझकर और जोर से हिला रही थी ताकि भैया का लंड फिर से खड़ा हो जाए।

अपने कमरे में जाते ही मैंने दरवाज़ा बंद किया और अपनी चूत में वाइब्रेटर डाल कर ऑन कर दिया।

मैं बिस्तर पर लेट गई, अपनी जांघें चौड़ी करके पैंटी उतार दी और वाइब्रेटर का एक इंच वाला डिल्डो पहले अपनी गीली चूत की पुत्तियों पर रगड़ने लगी।

मैं उस वाइब्रेटर में लगे एक इंच वाले डिल्डो को अन्दर-बाहर करने लगी।

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यह एक स्पेशल किस्म का वाइब्रेटर है, जिससे चुत की पुत्तियां मस्त रसीली हो जाती हैं … जो किसी भी मर्द को चूसने में बड़ा मजा देती हैं और साथ ही साथ चुत भी भोसड़ा नहीं बनने पाती है।

बस चुत का दाना रगड़ कर चुत को मजा मिलता है।

वाइब्रेटर से मेरी वासना भड़क उठी और मैं अपने दूध मसलती हुई मुठ मारने लगी।

मैंने अपना ब्लाउज ऊपर किया, ब्रा हटा दी और दोनों हाथों से अपने भरे हुए स्तनों को जोर जोर से मसलने लगी, निप्पलों को उंगलियों से खींचती हुई।

मेरे मुँह से भी मेरे भैया का नाम निकल रहा था।

कुछ देर तक बुर में नकली लंड को अन्दर बाहर करने के बाद मैंने पानी छोड़ दिया और भाई से बुर चुदाने का प्लान बनाने लगी।

हर थ्रस्ट के साथ चूत से पच पच की आवाज आ रही थी, रस मेरी जांघों पर बह रहा था, पूरा कमरा मेरी चूत की मीठी खुशबू से भर गया था और मेरा शरीर झुरझुरी से कांप रहा था।

मेरे दिमाग में एक प्लान बन गया था।

मैं बुर से माल फेंकने के बाद थक गई थी तो गांड दबा कर सो गई।

उस दिन मैंने बहुत दिन बाद अपनी बुर का पानी निकाला था तो काफी थकान हो गई थी।

मैंने दो घंटे तक बहुत ही गहरी नींद में सोती रही।

फिर रात को जाग गई तो अपने भैया से बुर चुदवाने के प्लान के बारे में सोच-सोच कर फिर से गर्मा गई और एक बार फिर से बुर में वाइब्रेटर लगा कर उसका पानी निकालने लगी।

उसके बाद मैं सो गई।

सुबह भैया के नहाने से पहले मैं बाथरूम में नहाने चली गई।

मैंने बाथरूम का दरवाज़ा खुला छोड़ दिया और नंगी होकर नहाने लगी।

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तभी भैया आ गए।

मैंने नाटक करते हुए कहा- सोना, अभी मैं नहा रही हूँ … मेरी आंख में साबुन लगा है. तू मेरे बाद नहा लेना!

जबकि मुझे मालूम था कि मेरे भैया बाथरूम के बाहर हैं।

मैंने थोड़ी सी आंख खोल कर देख लिया कि वे मुझे एकटक देख रहे हैं।

मैं अपने चूचे रगड़ती हुई उन्हें दिखाती रही और वे काफी देर तक मेरे मस्त कातिल हुस्न को देखते रहे थे।

पानी मेरे नंगे शरीर पर बह रहा था, मेरे गीले स्तन चमक रहे थे, निप्पल सख्त और लाल हो गए थे, मैं जानबूझकर साबुन लगाकर उन्हें धीरे धीरे मसल रही थी ताकि भैया को पूरा मजा आए।

फिर जब मैंने अपने चेहरे और आंखों पर पानी डाला तो वे उधर से चले गए।

मैं भी मुस्कुराती हुई अपनी बुर में उंगली करके पानी निकालने लगी और नहा कर बाहर चली आई।

मैंने जाते जाते एक हरकत और की; अपनी उतारी हुई पैंटी और ब्रा वहीं छोड़ आई.

जाते-जाते मैंने जानबूझकर अपनी गीली पैंटी और ब्रा बाथरूम के फर्श पर ही छोड़ दी थी ताकि भैया उन्हें देख सकें और उनकी कल्पना और उत्तेजित हो जाए।

मेरे बाहर निकलते ही भैया नहाने आ गए।

उनके नहा कर बाहर आने के बाद मैं बाथरूम से अपनी पैंटी और ब्रा लाने गई तो मेरी काली पैंटी में भैया का सफेद वीर्य लगा हुआ था।

मैंने पैंटी उठाई तो उस पर कई मोटी-मोटी सफेद धारियां चिपकी हुई थीं, भैया का गाढ़ा वीर्य अभी भी थोड़ा गर्म और चिपचिपा था।

मैंने अपनी जीभ निकाल कर उसे चाट लिया, स्वाद मीठा-खारा था और उसकी गंध मेरी नाक में घुस गई, जिससे मेरी चूत फिर से सिकुड़ने लगी।

मैंने उसे चाट लिया और पैंटी धोकर बाहर आ गई।

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उसके बाद मैंने भैया को खाना खिलाया और देखा कि घर में कोई नहीं है।

अब मैं प्लान के मुताबिक़ अपने कमरे में आ गई और बिस्तर पर लेट कर भैया का नाम लेती हुई अपनी चूत में उंगली करने लगी।

मैं पूरी तरह नंगी होकर बिस्तर पर लेट गई, अपनी जांघें चौड़ी करके दो उंगलियां अपनी गीली चूत के अंदर डालने लगी, तेजी से अंदर बाहर कर रही थी।

मैंने दरवाज़ा खुला छोड़ दिया था ताकि भैया अन्दर आ सकें और मुझे अपना नाम लेते हुए मुठ मारते देख लें।

यही हुआ भी … भैया ने देख लिया और वे मेरे कमरे में आ गए।

मैं उनको आया देख कर अपने शरीर को छुपाने लगी, पर कितना छुपाती?

मैं तो पूरी नंगी थी।

भैया अंदर आए और बोले- अरे, मेरी बहन जवान हो गई है … मुझे पता भी नहीं चला!

उसके बाद भैया ने मुझे पकड़ा और बोले- चल आज मैं तेरी मदद कर देता हूँ!

मैंने भैया को ‘सॉरी’ बोला।

भैया बोले- कोई बात नहीं … इस उम्र में होता है!

मैंने देखा तो उनका लंड पैंट को फाड़ कर निकलने वाला था।

उनकी पैंट के सामने बड़ा सा टेंट बन गया था, 8 इंच का मोटा लंड खड़ा होकर कपड़े को तान रहा था।

उसके बाद भैया ने मुझे पकड़ा और मेरे चूचे दबाने लगे।

उनके बड़े-बड़े हाथों ने मेरे 36 साइज के भरे हुए स्तनों को जोर से दबाया, उंगलियां गद्देदार मांस में धंस गईं, मेरे निप्पल सख्त होकर उनकी हथेलियों से रगड़ खा रहे थे।

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मैं उनसे दूर भागने की कोशिश करने लगी लेकिन भैया ने नहीं भागने दिया।

धीरे-धीरे मैं भी गर्म हो गई और भैया का साथ देने लगी।

भैया ने मेरे मम्मों को खूब दबाया, फिर मुँह में लेकर चूसने लगे।

वे मेरे एक निप्पल को मुंह में लेकर जोर-जोर से चूस रहे थे, जीभ से घुमाते हुए काट भी रहे थे, जिससे मेरे शरीर में बिजली सी दौड़ रही थी।

वे अपनी पैंट खोलने लगे।

फिर जब उनका लंड अंडरवियर से बाहर निकला, मैं डर गई।

मेरे मुँह से निकला- आह … इतना बड़ा मैं कैसे लूँगी?

उनका 8 इंच लंबा और 3.5 इंच मोटा लंड पूरी तरह खड़ा था, नसें उभरी हुईं, सिरा चमकदार और लाल, प्री-कम टपक रहा था।

वे कुछ नहीं बोले।

फिर उन्होंने अपने सारे कपड़े उतारे और मुझे बिस्तर पर सीधा लेटा कर मेरे ऊपर चढ़ कर मुझे किस करने लगे।

वे कभी मेरे माथे पर चूमते तो कभी होंठों पर, तो कभी मम्मों पर, पेट पर, नाभि पर … इस तरह से वे मेरे बदन को चूमते हुए नीचे को आने लगे।

उनके गर्म होंठ और जीभ मेरी त्वचा पर हर जगह निशान छोड़ रहे थे।

फिर वे मेरे पैरों पर आ गए और उसके बाद मेरी बुर पर आ गए।

उन्होंने पहले मेरी बुर पर किस किया, फिर अपनी जीभ को मेरी बुर पर रगड़ने लगे।

उनकी गर्म जीभ मेरी चूत की पुत्तियों पर ऊपर से नीचे तक लहरा रही थी, मेरी क्लिटोरिस पर बार-बार रगड़ रही थी।

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मैं मचलने लगी. मुझे अपनी बुर रगड़वाने में बहुत मज़ा आ रहा था।

जब भैया ने मेरे दूध को दबाते हुए मेरी चूत को पीना चालू किया तो मेरी हालत खराब होने लगी।

वे दोनों हाथों से मेरे स्तनों को मसलते हुए अपनी जीभ मेरी चूत के अंदर डालने लगे, फिर क्लिट को चूसने लगे, तेजी से ऊपर नीचे कर रहे थे।

मैं उनके सर को अपनी चूत पर दबाने लगी और पूरे कमरे में मेरी मदभरी सिसकारियां गूँजने लगीं।

करीब आधा घंटा तक रुक रुक कर मेरी चूत चाटने के बाद भैया हटे, तब तक मैं 3 बार झड़ चुकी थी।

मेरा सारा पानी निकल गया था, जिसको वे हर बार पूरा पी गए.

फिर वह मेरे सिरहाने पर आकर खड़े हो गए और अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया.

भैया के 8 इंच लंबे और 3.5 इंच मोटे लंड का गर्म और सख्त सिरा मेरे होंठों को पूरी तरह फैलाते हुए मेरे मुंह के अंदर घुस गया।

मैंने अपना मुंह जितना खोल सकी उतना खोला ताकि उनका मोटा लंड आसानी से अंदर जा सके।

उनकी लंड की नसें मेरी जीभ पर रगड़ खा रही थीं और प्री-कम का नमकीन स्वाद मेरे गले तक पहुंच रहा था।

मैंने भी उनका लंड खूब चूसा.

मैंने अपनी जीभ को उनके लंड के नीचे वाले हिस्से पर घुमाया और सिरे को जोर-जोर से चूसने लगी।

भैया ने मेरे बाल पकड़ लिए और मेरे सिर को हल्का-हल्का आगे-पीछे करने लगे।

हर थ्रस्ट के साथ उनका लंड मेरे गले तक पहुंच रहा था और मैं गैग होने की कोशिश रोक रही थी।

काफी देर तक लंड चूसने के बाद उनके लौड़े की मलाई निकल गई और मैं उनके लंड की पूरी मलाई खा गई.

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भैया का शरीर अचानक तन गया, लंड फड़कने लगा और गाढ़ा गर्म वीर्य मेरे मुंह में फूट पड़ा।

फुहार के बाद फुहार मेरे गले में भरी जा रही थी, स्वाद खारा-मीठा और थोड़ा नमकीन था।

मैंने बिना एक बूंद गिराए सब निगल लिया और लंड को अंत तक चूसती रही।

लंड झड़ने के बाद भैया मेरे साथ लेट गए और मुझे प्यार करने लगे, मेरे होंठों का रस पीने लगे.

वे मेरे बगल में लेट गए और अपने मजबूत हाथों से मुझे अपनी ओर खींच लिया।

उनके गर्म होंठ मेरे होंठों पर लगे और वे मेरे निचले होंठ को धीरे-धीरे चूसने लगे।

मुझे बेहद सुकून मिल रहा था।

भैया मेरे निप्पलों को अपने होंठों में दबा कर खींच खींच कर चूसने लगे.

उन्होंने मेरे एक निप्पल को मुंह में ले लिया और जीभ से घुमाते हुए जोर-जोर से चूसने लगे।

दूसरे निप्पल को उंगलियों से दबाते हुए खींच रहे थे जिससे मेरे स्तन में मीठा दर्द और खुजली दोनों हो रही थी।

काफी देर तक रोमांस करने के बाद भैया का लंड फिर से खड़ा हो गया.

उनका लंड मेरी जांघ से टकरा रहा था और फिर से पूरी तरह सख्त और गर्म हो चुका था।

उसके बाद उन्होंने मुझको उठा कर नीचे फर्श पर लिटा दिया और मेरी चूत पर लंड सैट करके एक झटका दे मारा.

वे मेरे ऊपर आ गए और मेरी जांघें चौड़ी करके लंड का सिरा मेरी चूत की पुत्तियों पर रख दिया।

उनका मोटा लंड मेरी बुर से फिसल गया और वह अन्दर नहीं गया.

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भैया ने मुझसे पूछा- क्या तू वर्जिन है?

मैंने ‘हां’ में सिर हिला दिया और आंखों में थोड़ा डर था।

भैया खुश हो गए और उन्होंने मेरे होंठों पर एक चुम्बन किया.

उसके बाद लंड पर थूक लगाकर अपने लंड को मेरी चूत पर सैट करके मुझसे बोले- लंड को पकड़ कर छेद पर सैट करके पकड़ी रहना!

मैंने उनकी बात का अनुसरण किया और अपने भैया के मोटे लंड को अपने हाथ से पकड़ कर अपनी बुर पर टिका कर पकड़ी रही.

मेरी उंगलियां उनके लंड की गर्म नसों पर कस गई थीं।

तभी भैया ने एक तेज झटका मारा और मेरी चीख निकल पड़ी.

अभी उनके लौड़े का सिर्फ टोपा ही अंदर गया था कि मेरी चूत की दीवारें फट गईं और उसमें से खून निकलने लगा।

मैंने लंड छोड़ दिया और भैया को अपने ऊपर से हटाने की कोशिश करने लगी.

मैं बोली- भैया निकालो इसे … बहुत दर्द हो रहा है!

पर वे नहीं माने और उन्होंने मेरे मुँह को दबा कर वापस से जोर का झटका मार दिया.

इस बार उनका शायद पूरा लंड अन्दर चला गया था, जिस वजह से मैं बेहोश हो गई.

भैया रुक गए और उन्होंने मेरे चेहरे पर पानी के छींटे मारे.

मैं होश में आ गई और मैंने हाथ लगा कर महसूस किया कि भैया का पूरा लंड मेरी चूत में घुस गया था और ज़मीन पर पूरा खून-खून हो गया था.

मुझे काफी दर्द भी हो रहा था.

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अब भैया ने धीरे-धीरे से अपने लंड को मेरी चुत में अन्दर-बाहर करना शुरू किया.

हर धीमे थ्रस्ट के साथ दर्द कम होने लगा और मेरी चूत उनके लंड के आकार में ढलने लगी।

कुछ देर के दर्द के बाद मुझे अच्छा लगने लगा और मेरी मादक आवाज निकलने लगी ‘आह आह सी सी सी चोदो मुझे भैया चोदो … आह चोद बहनचोद फाड़ दे मेरी चूत!’

भैया का लंड इतना बड़ा था कि मेरी बच्चेदानी में टकरा रहा था और मैं ‘आह आह सी सी’ की मदभरी आवाज़ें निकाल रही थी.

उनके हर जोरदार धक्के से मेरे स्तन हिल रहे थे और कमरे में पच-पच की आवाज गूंज रही थी।

भैया ने 15 मिनट चोदने के बाद मुझे अपने लंड पर बैठाया और लौड़े की सवारी करवाई.

वे लेट गए और मुझे ऊपर खींच कर अपने लंड पर बिठा लिया।

इस पोज़ में उनका पूरा लंड अंदर तक जाता और बाहर आता.

मैं जन्नत की सैर कर रही थी.

मैं दो बार झड़ चुकी थी, लेकिन भैया झड़ने का नाम नहीं ले रहे थे.

काफी देर के बाद भैया झड़ने को हुए, तो वे मुझसे पूछने लगे- कहां निकालूँ?

मैं बोली- अन्दर मत निकालना … नहीं तो मैं प्रेग्नेंट हो जाऊंगी!

तो वे बोले- कहां निकालूँ? जल्दी बता न!

मैं बोली- मेरे मुँह में!

तो भैया उठे और बेड के सहारे मेरा सिर करके मेरे मुँह में लंड डाल कर लंड को मुठियाने व हिलाने लगे.

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मैं भी उनके लौड़े को अपने होंठों में दबा कर चूसने लगी.

कुछ ही पलों बाद उनके लंड का माल निकलने को हुआ, तो वे बोले- अभी पीना मत … जब बोलूँ तब पीना!

फिर भैया ‘आह आह … मेरी बहन पी ले मेरे लंड का रस आह!’ कहते हुए मेरे मुँह में झड़ गए.

मेरा मुँह उनके वीर्य से भर गया, बहुत सारा माल निकला.

उन्होंने लंड का सारा वीर्य मेरे मुँह में टपका देने के बाद कहा- अब मुँह खोल कर दिखा!

मैंने मुँह खोल कर दिखाया.

वे बोले- हम्म मेरी बहुत सारी एनर्जी निकाल ली तूने … चल अब किसी रंडी की तरह सारा रस पी जा!

मैं भी मुस्कुरा दी और घूंट घूंट करके अपने भैया को दिखाती हुई उनका सारा माल पी गई.

फिर मैं उनका लंड साफ करके बोली- भैया, आज आपने जो मेरी एनर्जी निकाली, वह भी तो सोचो!

वे हंस कर बोले- मैंने तेरी कौन सी एनर्जी निकाली?

मैंने अपनी चुत पर हाथ रख कर कहा- ये इतना सारा खून किसने निकाला?

वे बोले- अरे यह तो फर्स्ट टाइम ही होता है बस … इसमें चिंता की कोई बात नहीं है!

टीन गर्ल फर्स्ट सेक्स का मजा लेने के बाद मैंने और उन्होंने मिल कर सारा खून साफ किया और साथ में नहाने चले गए.

बाथरूम में जब फव्वारे का पानी हमारे नंगे बदन पर पड़ा, तो हम दोनों फिर से गर्म हो गए.

मैं नीचे घुटनों के बल बैठ कर अपने भैया का लंड चूसने लगी.

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काफी देर तक लंड चूसने के बाद भैया बोले- अब घोड़ी बन जा!

मैं तुरंत चारों हाथ-पैरों के बल घोड़ी बन गई।

अपनी कमर को नीचे करके मोटी गांड ऊंची कर दी और जांघें थोड़ी चौड़ी कर लीं।

मेरी चूत पूरी तरह खुली और पहले से ही गीली चमक रही थी।

भैया ने पीछे से लंड मेरी भोसड़ी में डाल दिया और ताबड़तोड़ चोदने लगे.

उनका मोटा 8 इंच लंबा और 3.5 इंच मोटा लंड एक ही तेज झटके में आधा अंदर चला गया।

मेरी चूत की दीवारें उनके लंड के आकार में फैल गईं और हर नस मेरी अंदरूनी त्वचा से रगड़ खा रही थी।

हर जोरदार धक्के के साथ उनके भारी अंडकोष मेरी मोटी गांड से जोर से टकरा रहे थे।

पच-पच-पच की तेज आवाज पूरे बाथरूम में गूंज रही थी और मेरी चूत से रस छलक-छलक कर उनकी जांघों पर बह रहा था।

मैं झड़ गई.

मेरा पूरा शरीर झुरझुरी से कांप उठा।

चूत ने उनके लंड को कसकर दबाया और गर्म पानी की धार निकलकर उनकी जांघों पर बहने लगी।

काफी देर तक अपने भैया के लौड़े से चुदवाने के बाद मेरा मन लंड चूसने का हुआ तो मैं भैया से बोली- भैया लंड चूसने दे दो!

वे बोले- अभी देता हूँ … बस माल निकलने वाला है!

मैं बोली- ठीक है.

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काफी देर तक चोदने के बाद भैया ने लंड मेरे मुँह में डाला.

मैं लॉलीपॉप की तरह उनके लौड़े को चूसने लगी और उनका वीर्य निकाल कर पी गई.

भैया बोले- तू दूसरी बार में झड़ी नहीं है … चल, तुझे चूस कर झाड़ दूँ!

भैया ने दो उंगली मेरी चुत में डाल दीं और मेरी चुत की माँ चोदने लगे.

उनकी मोटी उंगलियां तेजी से अंदर-बाहर हो रही थीं।

अंगूठा मेरी क्लिटोरिस को जोर-जोर से रगड़ रहा था जिससे मेरी चूत फिर से रस से लबरेज हो गई।

मैं बाथरूम में ‘सी सी सी सी सी सी आह आह आह आह’ करने लगी.

कुछ टाइम के बाद मैं झड़ गई और मेरा पूरा पानी भैया पी गए.

उसके बाद भैया ने मुझे नहलाया.

मैंने भैया को नहलाया.

नहाने के बाद भैया ने मेरा शरीर पौंछ कर मुझे एक गहरा चुंबन लिया.

मैं नंगी ही रूम में जाकर कपड़े पहन रही थी कि तब तक भैया आ गए.

वे बोले- ये क्या कर रही हो?

मैं बोली- कपड़े पहन रही हूँ!

वे बोले- शाम को 4 बजे तक कपड़े मत पहनो!

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मैं बोली- भैया अभी 11 बज रहे हैं, चार बजे तक तो आप पता नहीं मेरे साथ क्या-क्या करोगे?

वे बोले- अब कुछ नहीं करेंगे … बस कपड़े मत पहन!

मैंने कपड़े नहीं पहने और भैया मेरी पैंटी और ब्रा ले गए.

मैं उनके पीछे उनके रूम में गई तो उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया और मुझे बेड पर पटक दिया.

मैं हंस कर बोली- अब नहीं दूँगी … बहुत ज्यादा ले ली है आपने … मुझे दर्द हो रहा है!

वे बोले- अब नहीं लूँगा!

मैं डर गई और पूछने लगी कि क्या अब मेरी कभी नहीं लोगे?

वे बोले- इस टाइम नहीं लूँगा … रात को लूँगा!

दोस्तो, चार बजे तक हम दोनों नंगे रहे.

हम दोनों ने चुदाई के अलावा सब कुछ किया.

उसके बाद कपड़े पहन कर हम दोनों अलग हो गए और मैं अपने कमरे में आ गई.

फिर शाम तक घर वाले भी आ गए.

उसके बाद मैं रात को 11 बजे चुपके से भैया के कमरे में आ गई.

उधर सुबह के 5 बजे तक 4 राउंड मेरी जबरदस्त चुदाई हुई.

मैं अपने भैया के लौड़े से चुदवा कर बहुत खुश थी.

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मैंने भैया को ‘आई लव यू’ बोला और अपने कमरे में जाकर सो गई.

उसके बाद तो मेरी रोज़ चुदाई होने लगी.

दोस्तो, यह मेरी भाई बहन सेक्स कहानी आपको कैसी लगी?

टीन गर्ल फर्स्ट सेक्स कहानी में खूब मज़ा आया होगा न?

बाकी की सेक्स कहानी बाद में लिखूँगी कि कैसे हम सब भाई बहन आपस में सेक्स करने लगे थे.

मेरे साथ अन्तर्वासना और फ्रीसेक्स कहानी से जुड़े रहिए और अपने अपने लंड चुत हिलाते रहिए.

बाय.

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⚠️ महत्वपूर्ण अस्वीकरण

ये सभी कहानियाँ केवल काल्पनिक हैं।
इनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है।

सेक्स हमेशा सहमति पर आधारित होना चाहिए।
बिना सहमति के कोई भी कार्य गलत और दंडनीय है।

इन कहानियों से प्रेरित न हों।
बस पढ़ें, आनंद लें और भूल जाएं।