Meri biwi sex story, Bhai ne choda sex story, Patni ki chudai kahani sex story: मेरी बेवफा बीवी ने मेरे ही घर में अपने ही भाई से सेक्स का मजा लिया। मेरा साला हमारे साथ ही रहता था। मैं नाइट ड्यूटी पर था। एक रात मैं जल्दी घर आ गया तो देखा कि मेरा बेड एकदम साफ था पर…
मेरा नाम अजय है। मैं पुणे का रहने वाला हूं। मेरी उम्र 48 साल है। मेरी वाइफ का नाम ज्योति है। उसकी उम्र 36 साल है। वह देखने में हॉट और सेक्सी है। उसकी गांड 34 साइज की है। बूब्स 32 इंच के हैं। ज्योति दिखने में इतनी ज्यादा सुंदर है कि उसे कोई भी बस एक बार देख ले तो उसका लंड खड़ा हो जाए। उसकी चिकनी और चमकदार त्वचा सुबह की धूप में भी निखर उठती थी। उसके घने काले बाल लहराते हुए उसकी कमर तक पहुंचते थे और उसकी बड़ी आंखों में एक ऐसी चमक थी जो किसी भी पुरुष को तुरंत अपनी ओर खींच लेती थी। उसकी मुस्कान इतनी आकर्षक थी कि कमरे में उसकी मौजूदगी महसूस होते ही हवा में एक मीठी खुशबू फैल जाती थी। उसका पूरा शरीर घंटे की तरह कटा हुआ था जिसमें हर कर्व एक परफेक्ट बैलेंस बनाता था और उसकी चाल में एक नेचुरल सेंसुअल स्विंग था जो देखने वाले को बिना छुए भी उत्तेजित कर देता था।
यह मेरी बेवफा बीवी की कहानी 14 साल पहले की है। तब ज्योति की उम्र 22 साल थी और मैं 34 का था। हमारा एक बेटा था जिसकी उम्र एक साल की थी। मैं एक कंपनी में जॉब करता था। मेरी ड्यूटी हर महीने 15 दिन रात की पाली में और 15 दिन दिन की पाली में होती थी। रात की पाली 11 बजे रात से सुबह 7 बजे तक और दिन की पाली दोपहर को 3 बजे से रात 11 बजे तक रहती थी। उन दिनों घर का माहौल अक्सर शांत और थोड़ा खाली सा लगता था क्योंकि मेरी लंबी शिफ्टों की वजह से मैं घर पर कम समय बिता पाता था। ज्योति को अकेले रहने की आदत पड़ रही थी और वह घर के हर कोने को साफ सुथरा रखकर अपना समय बिताती थी। मुन्ना छोटा सा था और उसकी मासूम हंसी घर में हल्की सी खुशबू फैलाती थी लेकिन मेरी अनुपस्थिति में ज्योति का दिन अकेलेपन से भरा होता था। रात की पाली में मैं कंपनी के ऑफिस में लाइट्स के नीचे काम करता रहता था जहां थकान शरीर में उतर जाती थी और घर की याद सताती थी।
उन्हीं दिनों एक ऐसी घटना हुई कि हमारी जिंदगी बदल गई। उस दिन ज्योति का चचेरा बड़ा भाई विजय मेरे घर आया था। विजय की उम्र 36 साल थी। उसकी जॉब पूना में ट्रांसफर हुई थी। वह 6 फीट का ऊंचे कद वाला बंदा था। दिखने में काला था। उसकी बॉडी किसी पहलवान जैसी थी। उसकी चौड़ी छाती और मोटी मांसपेशियों वाली बाहें उसके कपड़ों से भी साफ झलकती थीं और उसका कद कमरे में खड़े होते ही पूरा स्पेस भर जाता था। उसकी काली त्वचा पर पसीने की हल्की चमक उसे और भी मर्दाना बना देती थी। उसके कंधे इतने मजबूत थे कि लगता था कोई भी बोझ आसानी से उठा सकते हैं और उसकी टांगें लंबी और ताकतवर थीं जो उसकी पूरी बॉडी को बैलेंस्ड और पावरफुल लुक देती थीं। उसकी आवाज गहरी और भारी थी जो सुनते ही ध्यान खींच लेती थी।
उस दिन वह अचानक ही मेरे घर आया था तो मैंने उससे पूछा कि आज यहां कैसे? उसने कहा कि यहां मेरा ट्रांसफर हुआ है। अब यहीं कहीं किराए से एक घर देख रहा हूं। मैंने कहा अरे यार यहीं रहो ना। बड़ा घर है। दो बेडरूम हैं। तुम्हारा पैसा भी बचेगा और ज्योति को कंपनी भी हो जाएगी। वह तैयार हो गया और कल मैं अपना सामान लेकर आता हूं कहकर चला गया।
दूसरे दिन वह अपना सामान लेकर आ गया। मेरी बीवी ज्योति उसे देखकर बहुत खुश हुई। भैया भैया कहकर वह उसे सामान सहित दूसरे बेडरूम में ले गई।
ऐसे ही तीन महीने गुजर गए। ज्योति अब ज्यादा खुश लगती थी। उसकी आंखों में एक नई चमक आ गई थी जो पहले कभी नहीं देखी थी, वह हर सुबह उठकर घर के कामों में इतने उत्साह से लग जाती थी कि उसकी हल्की हंसी और गुनगुनाहट पूरे घर में गूंजने लगती थी। उसके चेहरे पर हमेशा एक संतुष्ट मुस्कान रहती थी, वह मेरे पास आकर प्यार से बातें करती थी और कभी-कभी मेरे कंधे पर सिर रखकर बैठ जाती थी। उसकी त्वचा पहले से ज्यादा चमकदार और नरम दिखने लगी थी, जैसे उसका पूरा शरीर किसी आंतरिक खुशी से भर गया हो।
एक दिन मैंने देखा उसने नई ब्रा और पैंटी खरीद ली थी जो एक जालीदार और वन पीस थी। वह जालीदार कपड़ा इतना पारदर्शी और महीन था कि उसकी निप्पल्स की आउटलाइन साफ दिखाई दे रही थी, पैंटी का हिस्सा उसके गुदे की दरार में गहराई तक धंसने वाला था और पूरा सेट उसके शरीर की हर वक्रता को उभारकर रखता था। इस तरह की अंडरगारमेंट्स को मैंने पोर्न एक्ट्रेस को पहने देखा था, जहां वे अपनी सेक्सी मुद्राओं में कैमरे के सामने घूमती थीं और उनके शरीर की गर्मी स्क्रीन से टपकती महसूस होती थी।
मैंने उससे पूछा कि ये कब लाई? मैंने तो लाकर नहीं दी! तब उसने कहा भैया की सैलरी की पेमेंट हुई तो उन्होंने मुझे रुपये दिए थे। उन्हीं रुपयों से मैं यह लेकर आई। मैं कुछ नहीं बोला। मैंने सोचा कि चलो अच्छा हुआ मेरे पैसे बच गए।
ऐसे ही चार महीने और गुजर गए। मुझे उसके बूब्स और गांड बड़े दिखने लगे। उसके स्तन अब पहले से कहीं भारी और उभरे हुए थे, कपड़ों के अंदर से उनकी गोलाई साफ झलकती थी और चलते वक्त वे हल्के-हल्के लहराते थे जैसे कोई नरम जेली की गेंदें हों। उसकी गांड अब और ज्यादा मोटी और गोल हो गई थी, टाइट कपड़ों में वह फटने को तैयार दिखती थी, हर कदम पर उसकी गांड की मांसलता लहराती और झूलती थी जिससे उसकी चाल में एक नई आकर्षक लचक आ गई थी। वह अब और ज्यादा हॉट लगने लगी थी।
एक दिन मेरी नाइट शिफ्ट थी। ग्यारह बजे मैं काम पर चला गया। सुबह सात बजे मुझे वापस आना था। पर सुबह के तीन बजे मुझे अपनी तबीयत ठीक नहीं लग रही थी तो छुट्टी लेकर घर आ गया। मेरे सिर में तेज दर्द था, पेट में हल्की उल्टी जैसी अनुभूति हो रही थी और शरीर थका हुआ महसूस हो रहा था, इसलिए मैंने तुरंत फैसला किया कि घर लौटना ही बेहतर होगा।
मैंने बेल बजाई कोई नहीं आया। दो तीन बार बजाई तो ज्योति आई। वह घबराई हुई थी। मैंने पूछा इतनी देर क्यों? उसने कहा मैं गहरी नींद में थी। तुम्हें क्या हुआ इस वक्त कैसे?
मैंने कहा कुछ तबियत ठीक नहीं लग रही थी इसलिए आ गया। मैं अंदर आ गया और सोफे पर बैठ गया। मैंने ज्योति से कहा चाय बनाकर लाओ जान!
ज्योति किचन की तरफ जाने लगी तो मेरा ध्यान उसकी गांड की तरफ गया। उसने सिल्की गाउन पहना था। लेकिन मेरा ध्यान गया कि पीछे से उसका गाउन गांड के चीरे पर अटका था। गाउन का पतला सिल्की कपड़ा उसकी मोटी गांड की दरार में गहराई तक फंस गया था, जिससे उसकी गांड की दोनों गोलाकार लोअर चीक्स पूरी तरह उभरकर दिख रही थीं और उनकी चिकनी त्वचा पर हल्की पसीने की चमक थी। मैंने देखा कि उसके पैर के पीछे पांव के पास से कुछ बह रहा है। वह जमीन पर गिर रहा था।
ज्योति किचन में गई तो मैंने उस जगह पर जाकर देखा। वह कुछ चिपचिपा पदार्थ था। मैंने उंगली से टच करके देखा तो वह ज्योति की चूत का पानी था। मैं स्तब्ध रह गया।
मैं जल्दी से अपने बेडरूम की तरफ गया। उधर मुन्ना सो रहा था। बेड के ऊपर की बेडशीट ऐसी साफ सुथरी बिछी हुई थी मानो उस पर कोई सोया ही नहीं हो। यदि ऐसा था तो फिर ज्योति कहां सोई थी। अब मुझे शक हुआ।
मैं धीरे से ज्योति के विजय भैया के बेडरूम की तरफ गया। उसके बेडरूम की लाइट चालू थी और विजय दूसरी तरफ मुंह करके सोया था या शायद सोने का बहाना कर रहा था। लेकिन उसके बेड की हालत ऐसी थी जैसे वहां कुश्ती हुई हो। चादरें पूरी तरह सिकुड़ी हुई थीं, तकिए इधर-उधर बिखरे पड़े थे, गद्दा बीच में धंस गया था और हवा में पसीने, चूत के रस और वीर्य की मिली-जुली भारी महक फैली हुई थी।
तभी मेरा ध्यान बेड के नीचे गया तो वहां ज्योति की रेड कलर की वन पीस ब्रा पैंटी पड़ी थी। साथ में विजय की अंडरवियर भी पड़ी थी। यानी भाई बहन की चुदाई पार्टी हुई थी।
न जाने क्यों गुस्सा होने की जगह मैं उत्तेजित हो रहा था। मेरा लंड खड़ा होकर फनफनाने लगा था। मुझे खुशी हो रही थी।
मैं अब किचन की तरफ गया। ज्योति चाय बना रही थी। मैं पीछे से गया और पीछे से ही उसे अपनी बांहों में भर लिया। मैं उसके मम्मे दबाने लगा तो वह कसमसाने लगी।
ज्योति धीरे से बोली भैया जाग जाएंगे। उसकी आवाज़ फुसफुसाती हुई थी जिसमें डर का कंपन और उत्तेजना की गर्मी दोनों घुली हुई थी। उसके गाल पूरी तरह लाल हो चुके थे और उसकी सांसें तेज़ चल रही थीं जैसे अभी-अभी किसी गहरी चुदाई से उठी हो। बेडरूम में चलिए वहीं आकर मुझे चोद लेना पर यहां नहीं।
मैंने ज्योति को अपनी बांहों में उठाया और बेडरूम की ओर ले गया। उसके नरम गर्म शरीर को अपनी छाती से सटाकर उठाते वक्त मैं महसूस कर रहा था कि उसके भारी बूब्स मेरी छाती पर दब रहे हैं और उसकी मोटी गांड मेरी बांहों पर लहरा रही है। उसकी चूत से अभी भी गर्म चिपचिपा रस टपक-टपक कर मेरी कमर और जांघों पर गिर रहा था जिसकी नमकीन महक मेरी नाक में भर रही थी। उसके पैर मेरी कमर के चारों ओर लिपट गए थे और वह हल्के-हल्के कसमसा रही थी।
उसे मैंने बेड पर लिटा दिया और उसके कपड़े उतारने लगा। मैंने धीरे-धीरे उसके सिल्की गाउन के बटन एक-एक करके खोले। उसकी चिकनी त्वचा को उजागर करते हुए हर इंच पर हाथ फेरता गया जहां पसीने की हल्की परत और विजय के वीर्य की सूखती हुई परत चिपकी हुई थी। वह बोली ऐसे नहीं पहले लाइट बंद करो। मैंने कहा तुझे तो उजाले में चुदना पसंद है ना! वह बोली हां लेकिन अरे भैया घर पर हैं।
वे जाग गए तो एक काम करती हूं कि तुम्हारी आंखों पर पट्टी बांध देती हूं। फिर जितना चाहे चोद देना मुझे। मुझे उसका यह बोलना आज कुछ अजीब सा लग रहा था कि साला आंख पर पट्टी बांध देने से इसका भैया कैसे नहीं जागेगा। पर आज मुझे उसे चोदना ही था। मैं ओके कहकर अलग हो गया। वह अलमारी में से पट्टी लेकर आई और उसने वह पट्टी मेरी आंखों में बांध दी।
अब वह मेरे सामने आई और मुझे किस करने लगी। उसके गर्म होंठ मेरे होंठों से चिपक गए। उसकी जीभ मेरे मुंह में घुसकर मेरी जीभ को लपेटने लगी और उसके मुंह में विजय के वीर्य का हल्का खारा स्वाद अभी भी बचा हुआ था जो मुझे और उत्तेजित कर रहा था। उसे किस करते करते मैंने अपनी आंखों की पट्टी ढीली कर दी। मुझे पट्टी के नीचे से साफ दिखाई देने लगा।
मैंने उसका गाउन ऊपर करके निकाला। सामने नजारा देखकर मैं चौंक गया। उसके मम्मों पर दांतों के काटने के निशान थे जो ताजा तरीन थे। लाल-नीले गोल घाव जहां विजय ने जोर-जोर से काटा था और निप्पल्स सूजी हुई तथा खड़ी थीं जिनके चारों ओर छोटी-छोटी खरोंचें थीं। मैं अब पूरी तरह से समझ गया था कि ज्योति को विजय ने जमकर चोदा है।
लेकिन अब भी मुझे गुस्से की जगह यह सब मस्त लग रहा था। मैं उसके बूब्स दबाकर चूस रहा था और ज्योति मचल रही थी। मैंने दोनों हाथों से उसके भारी गोल बूब्स को मजबूती से पकड़ा। उंगलियां उनकी नरम मांसलता में धंस गईं और अंगूठों से निप्पल्स को रगड़ते हुए उन्हें और सख्त किया। वह मस्ती में कह रही थी आहहह ओह मजा आ रहा है जानू और जोर से दबा कर चूसो जानू खा खाओ मेरे मम्मे को आह काटो जोर जोर से।
मैं दूध को चूसने लगा और काटने लगा। मैंने बाएं निप्पल को मुंह में लेकर जोर से चूसा। जीभ से चारों ओर घुमाया फिर दांतों से हल्का-हल्का काटा जिससे उसका स्तन हिल गया और ताजा निशान बन गए। ज्योति सिसियाई जा रही थी आह इस्स आहह ऑऑ ओऊ ऊऊ ओह जान मजा आ रहा है। उसके मम्मों को दबाते और जीभ चाटते हुए मैं नीचे आ रहा था।
मैं उसकी नाभि के अंदर जीभ डालने लगा। मुझे उसकी नाभि भी आज बड़ी हुई नजर आ रही थी। नाभि के अंदर जीभ डालते ही वह तड़पने लगी। वह अपने हाथों से बेडशीट खींचने लगी और अपने सर को यहां वहां करने लगी। उसके बाद मैं नीचे चूत तक आने लगा। चूत साफ सुथरी की हुई थी। उस पर झांट का एक भी बाल नजर नहीं आ रहा था।
फिर मैं चूत की पंखुड़ियों के पास गया। उधर देखा तो चौंक गया। ओह माई गॉड मेरी बीवी की चूत की पंखुड़ियां फूली हुई थीं और उसके ऊपर भी दांतों के काटने के निशान थे। न जाने क्यों मुझे यह सब देखकर मजा आ रहा था। मैं उसकी चूत की पंखुड़ियों को चाटने लगा। मुझे मस्त लग रहा था।
मैंने जीभ बाहर निकाली और लंबी लिक से नीचे से ऊपर तक चाटा। फूली हुई लेबिया को चूसते हुए क्लिटोरिस पर रुककर उसे घुमाया। स्वाद मीठा-नमकीन और चिपचिपा था। दस मिनट तक चाटने के बाद ज्योति चिल्लाई आह मेरी चूत को काटो भैया! मैं स्तब्ध रह गया लेकिन वह चुदाई के नशे में थी। मैं और जोर जोर से काटने लगा।
ज्योति गांड उठा उठा कर अपनी चूत मेरे मुंह पर दबाने लगी। फिर मैंने उसके दोनों पैर फैला दिए। ओह माई गॉड उसकी चूत पूरी तरह से फैल गई थी। ऐसा लग रहा था जैसे वह घोड़े के लंड से चुदी हुई हो। उसकी चूत में से पानी बह रहा था।
ज्योति फिर से चिल्लाई चूत को चाटो भैया खा जाओ मेरी चूत को चाटो चाटो। मैं फिर से चूत चाटने लगा। वह गांड उठा उठा कर चूत चटवाने लगी थी। लेकिन मुझे चूत में से आने वाला पानी मिक्स लगने लगा था जैसे ज्योति का और विजय का वीर्य मिक्स हुआ हो।
तभी ज्योति बोली भैया चूत का पानी मेरे मुंह में डालो। मैंने चूत में का पानी अपने मुंह में भर लिया जिसमें विजय का वीर्य भी मिक्स था। मैं उस पानी को अपने मुंह में लेकर ज्योति के पास गया। उसने मुंह खोलने के लिए आंखें खोलीं और मुझे देखकर सकपका गई। मैंने जानबूझकर उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया ताकि उसे ऐसा लगे कि मैंने जैसे भैया का जिक्र सुना ही ना हो।
उसने मुंह खोला तो मैंने सब पानी उसके मुंह में डाल दिया और उसके मुंह को चूसने लगा। ज्योति की चूत का पानी और विजय का वीर्य हम दोनों के मुंह में घुलने लगा। अब ज्योति जैसे पागल हो गई वह जोर जोर से उस पानी को पीने लगी। उसने इस बार विजय नाम तो नहीं लिया लेकिन शायद वह भी मेरे जैसे ही विजय के नाम को याद करके गर्मा गई थी।
कुछ देर बाद मैंने उसकी जीभ को अपने मुंह में भर लिया और जीभ को चूसने लगा। मैंने उसकी गर्म नम और मोटी जीभ को अपने होंठों के बीच पूरी तरह कसकर दबा लिया। जोर जोर से चूसने लगा जिससे हमारे दोनों के मुंह में लार की गर्म धार बहने लगी। उसकी जीभ मेरी जीभ से लिपट रही थी और मैं उसे बार बार खींचकर चूस रहा था।
वह भी कामातुर हो गई थी और उसकी चुदास लगातार बढ़ती ही जा रही थी। उसकी सांसें भारी और तेज हो चुकी थीं। वह बार बार गहरी सांस लेकर कराह रही थी। उसका पूरा शरीर मेरे शरीर से चिपका हुआ था और हल्के हल्के कसमसा रहा था।
कुछ देर बाद वह मेरे लंड को पकड़ने लगी और उसे मुठियाने लगी। उसकी नरम गर्म उंगलियों ने मेरे सख्त और फड़कते लंड को मजबूती से घेर लिया। वह ऊपर नीचे तेज गति से मुठिया रही थी। कभी कभी अपनी अंगूठी से लंड के सुपाड़े को रगड़ रही थी जिससे मेरा पारदर्शी प्री कम उसके हाथ पर चिपचिपा फैलने लगा।
मैंने अब उसे चित लिटाया और उसकी चूत में लंड पेल दिया। उसने बड़े आराम से लंड लील लिया और गांड ऊपर करके मेरे लंड को अपनी चूत की जड़ तक लेने की कोशिश करने लगी। उसकी चूत इतनी गीली गर्म और ढीली थी कि मेरा पूरा लंड बिना किसी रुकावट के अंदर चला गया। फिर भी उसे पूरा भराव महसूस नहीं हो रहा था।
उसकी हरकत देखकर मुझे समझ आ गया कि विजय का लंड मुझसे काफी बड़ा होगा और शायद मोटा भी ज्यादा होगा जिस वजह से ज्योति को मोटा लंड लेने की आदत हो गई है। उसकी चूत की दीवारें मेरे लंड को ढीले ढंग से घेर रही थीं।
आज तो उसकी चूत अभी कुछ समय पहले ही अपने भाई के मोटे लंबे लंड से चुदकर आई थी तो उसकी चूत ढीली थी। मेरा लंड उसकी चूत को शायद मजा नहीं दे रहा था। तो मैंने आसन बदला और उसे अपने ऊपर आने का कहा। वह लपककर मेरे लौड़े पर बैठ गई और पूरा लंड चूत में खाकर गांड उछाल उछाल कर लंड लेने लगी। उसकी चूचियां गजब हिल रही थीं।
मैं उसकी आंखों में वासना से देखे जा रहा था और वह भी मेरी आंखों में किसी भूखी रांड सी देखे जा रही थी। मैंने एक हाथ से उसके एक दूध को पकड़ा तो वह मेरे ऊपर झुक गई और अपने एक दूध को मेरे मुंह में देने की कोशिश करने लगी। मैंने भी उसके सूजे हुए निप्पल को अपने होंठों में दबाया और जोर से खींचते हुए अपनी गांड उठाने लगा।
वह तुरंत स्थिर हो गई और उसने अब मेरे लौड़े पर अपनी गांड को घिसना शुरू कर दिया था। उसकी चूत की गीली दीवारें मेरे लंड पर रगड़ खा रही थीं।
कुछ देर बाद मैंने उसके दूध को छोड़ दिया और दूसरे दूध की तरफ होंठ बढ़ाने लगा। वह भी मेरे मुंह में अपना दूसरा निप्पल देकर आह आह करने लगी। मैंने दूध खींचकर एक बार छोड़ा और कहा साली तुझे तो आगे पीछे एक साथ चोदने की इच्छा हो रही है। वह तुरंत बोली दोनों छेद में डालने के लिए दो लौड़े चाहिए होंगे।
मैंने कहा हां मेरे पास इंतजाम है दूसरे लंड का वह तेरी गांड को फाड़कर रख देगा! वह हंसी और बोली ठीक है राजा तेरी खातिर फड़वा भी लूंगी। इस तरह की बातों से हम दोनों की उत्तेजना बढ़ गई और वह झड़ने लगी। वह झड़कर मेरे सीने पर ढुलक गई।
अब मैंने सही मौका समझा और उसके कान में कह दिया कि यदि तुम चाहो तो एक छेद में विजय भाई का लंड भी ले सकती हो। मुझे कोई ऐतराज नहीं है। मेरी बेवफा बीवी एकदम से मेरी तरफ देखने लगी और मैं उसे मजे से चोदता गया। मेरा लंड भी उसकी चूत में झड़ गया और वह चुपचाप मेरे लौड़े पर चूत फंसाए पड़ी रही।
आगे की सेक्स कहानी को मैं आप सभी के कमेंट्स मिलने के बाद बताऊंगा।
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