Sasur bahu chudai sex story, Haveli sex kahani, Devar bhabhi chudai sex story, Thakur family sex story: प्रियंका अपने गाँव की सबसे हसीन लड़की थी। रंग गोरा, शरीर ऐसा कि देखने वाला बस देखता रह जाए। पढ़ाई-लिखाई में वह सामान्य सी थी, लेकिन गाँव के सारे लड़के यही तमन्ना करते थे कि किसी तरह प्रियंका उन पर मेहरबान हो जाए।
ऐसा सुनने में आया है कि प्रियंका जब भी मेहरबान हुई तो उन्होंने जाति, धर्म, उम्र, कुंवारा या शादीशुदा में कोई भेद नहीं किया। मतलब यह कि उन्होंने चंदरपुर में यूनुस से चुदवाया जो १८ साल का नौजवान था और नुक्कड़ पर पंचर की दुकान चलाता था।
प्रियंका ने विवेक से पहली बार गांड मराने का अनुभव लिया जो कॉलेज का टॉपर था। उन्होंने एक बार ६० वर्षीय बेंछु से भी चुदवाया क्योंकि बेंछु की बीवी कई साल पहले भगवान को प्यारी हो चुकी थी। प्रियंका के मन में सबके लिए बड़ा प्यार था।
प्रियंका के लिए जब वसंत नगर से ठाकुरों के खानदान से रिश्ता आया, चंदरपुर जैसे राष्ट्रीय शोक में डूब गया। जो लोग प्रियंका को चोद रहे थे वे दुखी थे ही, उनसे ज्यादा वे दुखी थे जिन्हें उम्मीद थी कि कभी न कभी प्रियंका को भोगने का मौका मिलेगा।
प्रियंका के पिता श्री यसवंत सिंह ने उसकी शादी बड़ी धूमधाम से की। प्रियंका की माँ के मरने के बाद श्री यसवंत सिंह का जीवन कठिन रहा था और वे चाहते थे कि शादी के बाद वे अपने जीवन के बारे में फिर सोचें।
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शहनाइयों के बीच प्रियंका चौधरी से प्रियंका ठाकुर बनी और पति मयंक ठाकुर के साथ उनकी पुश्तैनी हवेली आई। ससुर जोखन सिंह ठाकुर वसंत नगर के जाने-माने ज़मींदार थे और हवेली के मालिक भी। ठाकुर परिवार में जोखन सिंह और उनके तीन बेटे थे।
मयंक सबसे छोटा बेटा था। रणवीर और सूर्य प्रताप मयंक के दो बड़े भाई थे। सबको अजीब लगा कि जोखन सिंह ने सबसे पहले छोटे बेटे की शादी क्यों की। जोखन सिंह की पत्नी भी कई वर्ष पहले इश्वर को प्यारी हो चुकी थी।
रणवीर और सूर्य प्रताप ने कुंवारा रहने का फैसला लिया था। सूर्य प्रताप और रणवीर खेतों का पूरा काम देखते थे। मयंक खेतों पर पार्ट टाइम ही काम करता था। वह बगल के शहर सहारनपुर में टेक्सटाइल मिल में नौकरी करता था।
प्रियंका ने शादी के बाद अपना काम ठीक से संभाला। शीघ्र ही वह हवेली और खेतों की मालकिन बन गई। खेतों के काम में उसने पूरा योगदान दिया, लेकिन परिवार में उसने और भी ज्यादा काम किए। उसे पता था कि पूरे ठाकुर खानदान में वह अकेली औरत है।
उसे पता था कि परिवार में चार मर्द हैं जिन्हें उसकी जरूरत है। प्रियंका के जीवन में यह नया अध्याय था। उस दिन शाम को मयंक की नाइट शिफ्ट थी। वह शाम को ६ बजे प्रियंका को अधरों पर चुम्बन देकर मोटरसाइकिल पर सवार होकर टेक्सटाइल मिल चला गया।
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प्रियंका ने शाम के सारे काम सामान्य तरीके से किए। उसने स्नान किया, टीवी देखा और गुलशन नंदा का उपन्यास पढ़ने लगी। जोखन सिंह और दोनों बेटों ने मिलकर बियर पी और टीवी देखा। उन्होंने प्रियंका के जिस्म को भूखी नजरों से देखा।
प्रियंका को बिलकुल पता नहीं था कि ससुर और दोनों देवर उसके बदन को वासना से निहार रहे हैं। सब उसे शीशे में उतारने की योजना मन ही मन बना रहे थे। प्रियंका इन बातों से अनजान थोड़ा जल्दी बिस्तर पर चली गई।
उसे पता नहीं चला कि कब आँख लग गई। जवानी कैसे-कैसे स्वप्न दिखाती है। प्रियंका को चुदाई का स्वप्न आया। स्वप्न में उसके गर्म बदन में मादक आनंद की लहरें दौड़ रही थीं। उसे बड़ा आनंद आ रहा था। उसे लगा मानो कोई गरम और बड़ा लंड उसकी चूत में अंदर-बाहर हो रहा हो।
घने अँधेरे कमरे में प्रियंका की नींद टूट गई। उसने तुरंत महसूस किया कि कोई चीज उसके पैरों के बीच थी जो उसकी चूत चूस रही थी। शीघ्र ही उसे पता चला कि कोई उसे जीभ से चोद रहा है। उसे लगा कि यह उसका पति मयंक है। उसने गहरी साँसों में गुहार लगाई, “ओह राजा, चूसो मेरी चूत को।”
प्रियंका ने अपनी गांड पूरी उठा ली ताकि वह अपनी चूत पूरी तरह चुसाई के लिए समर्पित कर सके। उसी समय उसने महसूस किया कि चूत चूसने वाले ने दोनों हाथ उसकी जाँघों पर रखे और अपना लंड उसकी चूत के मुहाने पर रख दिया। उसकी साँसें भारी हो रही थीं। एक ही ठाप में पूरा लंड प्रियंका की चूत में चला गया।
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प्रियंका अब पूरी तरह जाग चुकी थी। उसे अच्छी तरह पता था कि उसे चोदने वाला उसका पति नहीं है। शादी से पहले उसने कई लोगों से चुदवाया था, लेकिन शादी के बाद मयंक के प्रति वफादारी का फैसला लिया था।
पर इस समय जो भी उसे चोद रहा था, उसकी चूत को पूरी तरह संतुष्ट कर रहा था। चूत पूरी तरह भरी हुई थी। लंड चूत को भकाभक चोद रहा था। प्रियंका महसूस कर सकती थी कि यह लंड उसके पति से बड़ा है और उसे ज्यादा वासना से चोद रहा है।
कमरे में इतना घुप्प अँधेरा था कि प्रियंका समझ नहीं पाई कि उसकी चूत में जिसका लंड घुसा है वह कौन है। चुदाई का पूरा आनंद लेते हुए वह सोच रही थी कि यह ससुर हो सकता है या देवरों में से कोई। चेहरा तो नहीं देख पा रही थी, पर हाँफने की आवाज सुन सकती थी।
चुदाई में इतना मजा आ रहा था कि प्रियंका ने सोचना बंद कर दिया कि चोदने वाला कौन है। उसने टाँगे चोदने वाले के कंधों पर रखीं और चूत ऊपर उठाई ताकि पूरा लंड अंदर जाए। चोदने वाले ने रफ्तार पकड़ ली। भकाभक चूत छोड़नी शुरू की।
“हाय मार डाला… फाड़ दी तूने साले मेरी चूत।” प्रियंका हाँफते हुए बोली।
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प्रियंका ने गांड उठा-उठाकर धक्के स्वीकार किए। चोदने वाले ने बड़ा लौड़ा भकाभक पेश किया और ऐसा झड़ा कि प्रियंका की चूत से सामान बह-बहकर निकलने लगा।
प्रियंका बोली, “ओ ओह… मार ले मेरी… मैं गई रे… मेरी चूत का मक्खन निकला रे…”
चोदने वाला बड़ा महीन कलाकार निकला। उसने झड़ते लंड को प्रियंका की गरम चूत में अंदर तक पेल दिया। लंड का रस सबसे अंदर जाकर जमा हुआ। प्रियंका को इतना घनघोर तरीके से किसी ने नहीं चोदा था। वह संतुष्ट और परिपूर्ण महसूस कर रही थी।
उसने लंड बिना कुछ कहे निकाला और गायब हो गया। प्रियंका बिस्तर पर लेटी सोच रही थी कि उसे इतना खुश किसी ने नहीं किया।
अगले दिन प्रियंका पूरे दिलो-दिमाग से जानने की कोशिश करती रही कि रात को चोदने वाला कौन था। उसे पता था कि वह ससुर या देवरों में से कोई है। उसने पूरे दिन ससुर, रणवीर और सूर्य प्रताप को ध्यान से परखा।
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पर तीनों ने कोई हिंट नहीं दिया। लंच के बाद जब ससुर और देवर खेतों पर गए, मयंक ने उसे नंगा करके जमकर चोदा।
प्रियंका पतिव्रता नारी की तरह जाँघें और चूत खोलकर लेटी रही। मयंक पूरी सामर्थ्य से चोदता रहा, पर उसका लंड छोटा था। मयंक झड़ गया लेकिन प्रियंका असंतुष्ट रही। वह सोच रही थी कि रात की चुदाई और पति की चुदाई में कितना फर्क है।
उस शाम मयंक फिर नाइट ड्यूटी पर गया। प्रियंका ससुर और देवरों के बारे में सोच रही थी। वह परेशान थी कि इस रात चुदाई होगी या नहीं।
उस रात प्रियंका सोने गई तो गाउन के नीचे चड्ढी नहीं पहनी। वह मन ही मन चुदवाने का प्लान कर रही थी। थोड़ी देर में उसी तरह जगाई गई। चूत पर गीली जीभ लग रही थी।
प्रियंका ने पैर उठाए, चूसने वाले का सिर पकड़ा और तेजी से चूत में गड़ा दिया। जीभ पूरी लगन से चूत में घुस रही थी। प्रियंका की चूत जैम की तरह पानी छोड़ रही थी।
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“ओह उम् आह।” प्रियंका सिसकारी भरी।
प्रियंका ने चोदने वाले का लंड पकड़ा और सोंटना शुरू किया। चोदने वाला ऊपर आया और लंड चूत के मुहाने पर लगाकर ठाप मारी। लंड आधा घुस गया।
“ये ले मेरा लंड।” चोदने वाले ने कान में फुसफुसाया।
प्रियंका ने आवाज पहचानी। यह ससुर जोखन सिंह था।
“ओह जोखन सिंह पापा जी!” वह चुदवाते हुए बोली।
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प्रियंका ने हाथ-पैर जोखन सिंह पर रखकर चूत पर भकाभक धक्के लगाने शुरू किए।
“साली हरामजादी तुझे तेरे ससुर की चुदाई पसंद है…”
जोखन सिंह बेरहमी से लंड के धक्के लगाते हुए बोला।
“हाँ जी ससुर जी… आपका लंड कितना अच्छा है… मेरी चूत पानी छोड़ रही है…” प्रियंका बोली।
जोखन सिंह ने भाभी की चूत में भालाभाक धक्के लगाए।
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“तुम्हारा लंड कितना बड़ा है… फाड़ दो मेरी चूत को… मैं झड़ रही हूँ… पापा आ…आ…आ…” प्रियंका चिल्लाते हुए झड़ रही थी।
“मेरा लंड भी तेरी चूत में पानी छोड़ रहा है… मैं झड़ रहा हूँ।” जोखन सिंह झड़ते हुए बोला।
इस घटना के बाद प्रियंका ने महसूस किया कि इस परिवार में उसका स्थान काफी ऊपर है।
सुबह प्रियंका पहले उठी। मयंक के लिए नाश्ता बनाया। मयंक नाइट ड्यूटी से आकर नाश्ता करके सो जाता था। उसके बाद ससुर और देवरों के लिए नाश्ता बनाती थी।
सामान्य तौर पर ससुर और देवर सात बजे तक नाश्ता करके खेतों को जाते थे। पर आज ससुर ने रणवीर और सूर्य प्रताप को खेतों पर भेज दिया पर खुद नहीं गया। प्रियंका रसोई में बर्तन धो रही थी। तभी उसने गांड की दरार पर खड़ा लंड महसूस किया।
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मुड़कर देखा तो ससुर जी मुस्करा रहे थे। प्रियंका ने गोल चूतड़ पीछे फेंके जैसे चूतड़ों से ससुर के लंड की मालिश कर रही हो। जोखन सिंह खुद को किस्मत वाला मान रहे थे कि ऐसी चुदाक्कड़ बहू मिली। उन्होंने बहू की चुंचियां दबानी और सहलानी शुरू कीं।
“ओह ओह पापा जी…” प्रियंका भारी आवाज में बोली।
“मेरा लंड बहुत जोर से खड़ा है बहू। क्या तुम्हारी चूत के पास थोड़ा टाइम है?”
जोखन सिंह पैशनेट आवाज में बोला और टाँगों के बीच हाथ डालकर चूत सहलाने लगा।
“ओह पापा जी… प्लीज… आपको चोदने का बड़ा दिल कर रहा है… पर मयंक घर में है… वो बेडरूम में सो रहा है… कभी भी जग सकता है… हम यहाँ नहीं चोद सकते…” प्रियंका बोली।
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“तुम ठीक कहती हो बहू… यहाँ ठीक नहीं है… मैं तबेले में तुम्हारा इंतजार करता हूँ… जल्दी से आओ…”
जोखन सिंह चुंचियां दबाते हुए आँख मारते हुए बोला।
प्रियंका बेडरूम गई और देखा मयंक अच्छे से सो रहा है। वह किचन से निकलकर तबेले में गई। शरीर में अजीब इच्छा थी जिससे चूत गीली थी। तबेले में ससुर पूर्ण नग्न होकर लंड सोंट रहे थे।
प्रियंका ने कपड़े उतारे और ससुर के पास गई। जोखन सिंह घुटनों पर बैठ गया और प्रियंका उसके लौड़े पर चढ़ गई। प्रियंका ने चुंचियां ससुर के मुंह में दीं। जोखन सिंह ने चुंचियां चूसीं और लंड चूत की गहराई में डुबाया।
“ओह… ओह… मर गई रे… पापा जी तुम्हारा औजार तुम्हारे बेटे से बड़ा है… चोदो मुझे… मेरी फाड़ दो पापा जी…”
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जोखन सिंह ने लंड लपालप चूत के हवाले किया और तब तक चोदा जब तक मजा न आ जाए।
प्रियंका बोली, “पापा प्लीज मेरी चूत में अपना पानी डाल के झड़ो… प्लीज…”
जोखन सिंह ने लंड अंदर-बाहर करते हुए निकाला और प्रियंका के मुंह में डालकर बोला, “ये ले बहू चूस ले इसे… पी ले इसका रस…”
प्रियंका ने लंड जमकर चूसा पर ससुर को चूत में लंड डालकर ही झाड़ना पड़ा।
“ये ले चख ले मेरा वीर्य।” जोखन सिंह ने झड़कर बोला।
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“ओह मेरे मुंह में सारा माल जमा कर दो पापा जी जानेमन।” प्रियंका आँख मारते हुए बोली।
दोनों थक चुके थे। प्रियंका ने साड़ी ठीक की और घर चली गई। जोखन सिंह ने गीला लंड जाँघिये में डाला और खेतों पर राउंड मारने निकल गए। प्रियंका को पता था कि उसके अच्छे दिन आ चुके हैं। वह बहुत खुश थी।
प्रियंका जब से शादी कर वसंत नगर आई थी, हर रात कोई उसकी चोरी से चुदाई कर रहा था। शुरू में पता नहीं चला कि गुप्त प्रेमी कौन है, पर एक-दो सप्ताह में पता चल गया कि वह ससुर जोखन सिंह खुद थे।
ऐसी बातें जब परदे से बाहर आ जाएँ तो चुदाई कहीं भी और कभी भी हो जाती है। प्रियंका और जोखन सिंह के बीच ऐसा ही होने लगा। पति मयंक को सोता छोड़कर और देवरों की आँखों में धूल झोंककर प्रियंका ससुर के साथ वासना के खेल खेल लेती थी।
पर ऐसी बातें ज्यादा दिन छुप नहीं पातीं। एक दिन जोखन सिंह प्रियंका को घोड़ी बनाकर पीछे से चोद रहा था तो रणवीर और सूर्य प्रताप ने देख लिया। ऐसा दृश्य देख दोनों का लंड खड़ा हो गया और उन्होंने तय किया कि वे भी जल्दी मौका देखकर प्रियंका का भोग लगाएंगे।
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और ऐसा मौका दो दिन बाद मिल गया। उस दिन जोखन सिंह पंचायत के काम से सुबह शहर निकल गए। मयंक नाइट ड्यूटी से थककर आया था। उसने प्रियंका को छोड़ा भी नहीं और खाकर सो गया।
प्रियंका को बुरा लग रहा था कि चोदने वाले उपलब्ध नहीं थे। वह घर के काम करने लगी। उसे आभास नहीं था कि दो लंड उसके शरीर में घुसने को लालायित थे।
जब वह पौधों को पानी दे रही थी, सूर्य प्रताप और रणवीर तबेले में काम कर रहे थे। सूर्य प्रताप ने मदद के लिए बुलाया। प्रियंका जैसे ही तबेले में घुसी, दोनों ने पकड़कर चारपाई पर लिटा दिया। प्रियंका ने विरोध किया।
सब इतना अचानक हुआ कि आवाज निकलने से पहले रणवीर ने साड़ी-पेटीकोट खींच फेंका। सूर्य प्रताप ब्लाउज खोल रहा था। प्रियंका ससुर की सहूलियत से चड्ढी नहीं पहनती थी। दो मिनट में वह नंग-धड़ंग पड़ी थी।
प्रियंका ने शर्म से आँखें बंद कर लीं। उसे पता था अब क्या होने वाला है। वह दूध की धुली नहीं थी, पर देवरों के सामने बल प्रयोग से नंगा होना अच्छा नहीं लगा। चुदाई तो बहुत की थी, पर दो लंडों का स्वाद पहली बार।
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इस सोच से चूत में प्यास जग गई। सूर्य प्रताप ने लंड बिना निमंत्रण के चूत के मुंह पर टिकाया और सुपाड़ा अंदर किया। प्रियंका सिहर उठी। चूत थोड़ी गीली थी तो लंड दो-तीन धक्कों में पूरा अंदर।
रणवीर चुंचियां चूस रहा था जैसे पके आम हों। प्रियंका को मजा आने लगा और सिसकारी लेने लगी। सूर्य प्रताप का लंड पिता से छोटा पर मोटा था। धक्के से चूत ज्यादा फैलती थी और आनंद ज्यादा आ रहा था।
प्रियंका ने आँखें खोलीं, टाँगे सूर्य प्रताप की गांड के दोनों तरफ फंसाईं और गांड उठाकर लंड लेने लगी। फचफच की आवाज तबेले में गूँज रही थी।
“चोदो मुझे सूर्य प्रताप…” प्रियंका मुंह खोलकर बोली।
सूर्य प्रताप ने रफ्तार बढ़ाई। रणवीर ने खुले मुंह में लंड घुसा दिया। प्रियंका मजे से चूसने लगी। दो लंडों का अनुभव से भाव-विभोर हो गई।
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“अरे क्या मस्त चूत है तुम्हारी भाभी। पूरे गाँव में इतनी मौज किसी ने नहीं दी।” सूर्य प्रताप चोदते हुए बोला।
“ये ले… मेरा ल…अ…अं…न्ड…”
प्रियंका समझ गई कि सूर्य प्रताप झड़ने वाला है। वह जोर से गांड उठाकर मरवाने लगी। ४-५ धक्कों बाद सूर्य प्रताप ने चूत में पानी उड़ेल दिया।
सूर्य प्रताप ने लंड निकाला और रणवीर को इशारा किया। रणवीर ने प्रियंका को उल्टा किया और गांड पकड़कर उठाया। प्रियंका समझ गई कि कुतिया पोज में चोदना चाहता है। वह घुटनों के बल हो गई। सूर्य प्रताप का वीर्य चूत से निकलकर जाँघों पर बह रहा था।
रणवीर ने लंड एक झटके में डाला और फुर्ती से चोदने लगा। मोटा लंड चूत को बुरी तरह चोद रहा था। पीछे से चोदते हुए चुंचियां सहलाते हुए फुसफुसाया, “मैं और सूर्य प्रताप तुम्हें रोज इसी तरह चोदेंगे। तुम्हारी चूत में लंड डाल-डालकर क्रीम निकालेंगे। ठीक है न भाभी?”
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“हाँ… हाँ… मुझे तुम दोनों इसी तरह मजे देना रोज… आह… आह… रोज…” प्रियंका आनंदित स्वर में बोली।
रणवीर ने रफ्तार बढ़ाई। जाँघें चूतड़ों से टकरा-टकराकर संगीत बना रही थीं।
“ओह… ओह… मैं गया… ये ले… मेरा सारा रस… अपनी चूत में…”
रणवीर ने जोर से घुसाकर झड़ गया। प्रियंका को लगा जैसे चूत की गहराई में वाटर जेट चला हो। वह बड़ी खुश थी। उसके पास तीन मर्द थे जो रोज जवानी का सुख देने को तैयार थे।
“हाँ मैं बिलकुल ठीक हूँ और बहुत खुशी से हूँ पापा। ससुराल वाले मेरा अच्छी तरह ख्याल रखते हैं।” प्रियंका चहकते हुए बोली।
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बेटी की आवाज सुनकर यसवंत सिंह समझ गए कि बेटी ने ससुराल में जलवा दिखा दिया है। उन्हें पता नहीं था कि जलवा किस तरह का है। वे जानते थे कि प्रियंका खुश है और यही काफी था।
उन्होंने बोला, “मतलब लगता है पूरा ख्याल रख रहे हैं ससुराल वाले?”
प्रियंका ने निचला होंठ दांत में दबाकर बताया, “हाँ पापा, मैंने सोचा भी नहीं था कि तीन महीने में सभी इतना ख्याल रखने लगेंगे।”
श्री यसवंत सिंह बोले, “बेटे मैं बड़ा खुश हूँ कि तू खुश है। अब वही तेरा घर है। शादी हो गई, अच्छा घर मिल गया। वहाँ सबका अच्छे से ख्याल रखना। अब तेरे भाई रविन्द्र की शादी हो जाए। बस मैं मुक्त हो जाऊँ।”
प्रियंका ने कहा, “हाँ पापा अब रविन्द्र की शादी जल्दी कराइए।”
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प्रियंका शीशे के सामने खड़ी थी। उसने खुद को आँख मारते हुए बोला, “यहाँ मैं सबका ख्याल इतनी अच्छी तरह रख रही हूँ कि आपकी बहू कभी नहीं रख पाएगी।”
श्री यसवंत सिंह बोले, “अच्छा बेटे, मेरा काम पर जाने का वक्त हो गया, मैं फोन रखता हूँ। खुश रहो।”
श्री यसवंत सिंह ने फोन रखा नहीं था, बल्कि रखना पड़ा। क्योंकि विमला उनकी नौकरानी उनका लंड लेमन चूस की तरह चाट रही थी। जब फोन पर थे, विमला काम खत्म कर आई, धोती से लंड निकाला और मुंह में डालकर चूसने लगी।
लंड चुसवाने में आवाज संयत नहीं रहती, इसलिए बेटी का फोन जल्दी काटना पड़ा।
“विमला, तेरी मुंह बड़े कमाल का है। चूस इसे जोर से। बड़ा आनंद आ रहा है।”
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विमला ने लंड मुंह में लिया और नजरें मिलाकर मुस्कराई, जोर से चाटने लगी। यसवंत सिंह का लंड शबाब पर था। वे कुर्सी से उठे तो लंड मुंह से निकला।
उन्होंने धोती-कच्छा उतारा, कुरता फेंका और दीवान पर लेट गए। विमला घुटनों पर बैठकर लंड चूसने लगी। उसकी गांड ऊपर उठी थी। वह पूरी नंगी थी।
दोनों बेखबर थे कि खिड़की पर रविन्द्र सब देख रहा है। रविन्द्र दौड़ से जल्दी आया था। पापा को बात करते सुना तो सोचा दीदी से बात कर ले।
पर खिड़की से देखा कि विमला पापा के लंड से बात कर रही है तो ठहर गया। दृश्य सनी लियोन की फिल्म से ज्यादा कामुक था। उसका हाथ शॉर्ट्स में था और लंड सहला रहा था।
विमला का गदराया बदन वह कई बार देख चुका था। वह खुले में नहाती थी। रविन्द्र को उसके बड़े मम्मे और गोल चूतड़ बहुत पसंद थे। विमला का पति शम्भू यसवंत सिंह के खेतों का प्रमुख था।
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रविन्द्र को पता नहीं था कि विमला की चुदाई शम्भू की रजामंदी से हो रही है। लंड चुसवाते-चुसवाते यसवंत की साँसें तेज हो गईं। विमला की चूत में तीन उँगलियाँ डाल चुके थे।
चूत गीली हो चुकी थी। उन्होंने उँगलियाँ निकालीं और गांड पर चपत मारी। विमला को इशारा पता था। उसने लंड मुंह से आजाद किया और फर्श पर झुककर कुर्सी के हैंडल पकड़ लिए।
उसकी गांड आमंत्रण दे रही थी। यसवंत उसके पीछे आए और लंड चूत के मुंह पर टिकाया। विमला ने गांड हिलाकर थोड़ा अंदर लिया। सुपाड़ा अंदर था।
आज चूत कसी लग रही थी। एक धक्के में पूरा लंड अंदर। विमला के मुंह से चीख निकली। लौड़ा कसा और गरम लग रहा था। उसे याद है जब वह शम्भू से ब्याह कर आई थी तब से यसवंत नियमित चोद रहे थे।
आदमी की भूख जितना बढ़ाओ उतनी बढ़ती है। विमला अब रोज चूत में लंड चाहती थी। यसवंत और शम्भू दोनों जानते थे। कई बार दोनों ने मिलकर छोड़ा था।
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जब यसवंत किसी नेता या अफसर को बुलाते तो विमला उनकी भूख का इंतजाम करती थी। इसी से कॉन्ट्रैक्ट मिलते थे। यसवंत ने चोदते हुए चुंचियां दबानी शुरू कीं।
“मालिक जोर से पेलो अपना लंड… पेलो रजा पेलो…”
“साली तू तो रंडी हो गई है। ये ले… मेरा पूरा लंड… तेरी चूत अब गधे का लौड़ा भी ले सकती है…”
“मालिक आपके लंड के सामने गधे का लंड भी फेल है… आ… आ… उई… सी… मर गई मैं।”
रविन्द्र ने लंड शॉर्ट्स से बाहर निकाला और सडक मारने लगा। यसवंत जोर-जोर से चोद रहे थे। बीच-बीच में गांड पर चपत लगा देते।
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“ये ले साली… मैं छूट रहा हूँ… ऊ… ऊ… ऊ…”
यसवंत ने चूत में सारा पानी छोड़ दिया। रविन्द्र के लंड से भी फव्वारा निकला। यसवंत दीवान पर बैठे और विमला के पेटीकोट से लंड पोंछने लगे।
उनकी नजर फोन पर गई। फोन कटा नहीं था। उन्होंने सुनने की कोशिश की कि किसी ने सुना तो नहीं। उधर से आवाज नहीं आई। पर साँसें फोन से टकराईं तो प्रियंका ने फोन काट दिया।
यसवंत को पक्का नहीं पता कि प्रियंका ने सुना या नहीं। पर प्रियंका ने पिता की गरम चुदाई सुनकर खुद गरम हो चुकी थी। वह मयंक को जगाकर चुदने का प्लान बना रही थी। उसे पता चल गया कि चुदाक्कड़ आदतें बाप से ली हैं।
प्रियंका के शादीशुदा जीवन में आनंद की कोई सीमा नहीं थी। एक विडंबना यही थी कि पति मयंक उसके मादक शरीर का असली हकदार कम इस्तेमाल कर रहा था। रात में मयंक नाइट ड्यूटी जाता तो ससुर पेटीकोट उठाकर नियमित लेते थे।
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देवर कभी पिता की चुदाई के बाद चोदते थे या सुबह तबेले में चारपाई पर लिटाकर लेते थे। कुल मिलाकर घर के सारे मर्द प्रियंका की मुट्ठी में थे। जोखन सिंह मालिक भले हों, पर हवेली की असली मालकिन प्रियंका थी।
एक गर्मी की सुबह जोखन सिंह खेतों के राउंड पर निकले थे। सूर्य प्रताप और रणवीर को प्रियंका की चुदाई को एक सप्ताह हो गया था। जैसे ही पिता निकले दोनों प्रियंका के कमरे में गए। रणवीर ने बाँह पकड़ी, सूर्य प्रताप ने कमर में हाथ डाला और खींचते हुए तबेले में ले गए। प्रियंका हंस रही थी, विरोध का नाटक कर रही थी।
“देवर जी, मयंक सो रहे हैं। और पापा जी कहीं आ गए तो?”
“भाभी देवरों को इतना न तड़पाओ। आज अगर हमारे खड़े लंडों को खाना नहीं मिला तो गर्मी से फट जाएंगे।”
रणवीर ने पजामे की तरफ इशारा किया। प्रियंका ने देखा पजामा टेंट की तरह तना हुआ था। सूर्य प्रताप का भी वैसा ही। तीनों दौड़ते हुए तबेले में पहुंचे। हाँफ रहे थे, हंस रहे थे और कपड़े उतार रहे थे।
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प्रियंका रणवीर के सामने नंगी खड़ी थी। रणवीर झांटों से भरी चूत सहला रहा था। पीछे सूर्य प्रताप ने गांड दोनों हाथों से पकड़ी थी। रणवीर ने होंठ प्रियंका के होंठों पर रख दिए और गीला चुम्बन लेने लगा। दो उँगलियाँ गीली चूत में थीं और जीभ मुंह में।
सूर्य प्रताप पीछे चिपका था। एक हाथ गांड पर, दूसरा चुंचियों पर। वह गले के पीछे जीभ से चाट रहा था। प्रियंका चरम आनंद में थी।
रणवीर ने उँगलियाँ निकालीं और प्रियंका के मुंह में दीं। प्रियंका कुतिया की तरह चूत का रस चाट रही थी। तीनों खड़े थे। रणवीर ने लंड चूत में डाल दिया।
सूर्य प्रताप पीछे चिपका था। रणवीर के धक्के उसे महसूस हो रहे थे। प्रियंका की चूत चप्प-चप्प की आवाज कर रही थी। रणवीर का लंड पतला और लंबा था।
सूर्य प्रताप को लगा कि चूत में दूसरा लंड की जगह है। उसने टाँगों के बीच से लंड चूत के मुंह पर टिकाया। अगले धक्के में रणवीर ने थोड़ा बाहर लिया तो सूर्य प्रताप ने सुपाड़ा अंदर किया।
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दोनों लंड चूत में थे। प्रियंका को जोर का दर्द हुआ। उसने हटाने की कोशिश की पर दोनों ने जोर से पकड़ा था।
“अरे कमीनों छोड़ो मुझे… एक-एक करके करो… मेरी चूत फट गई… मैं मर गई…”
प्रियंका गुहार लगाई। पर दोनों गजब के चोदू थे। प्रियंका को लगा जैसे हजार चींटियाँ चूत में काट रही हैं। दो-तीन मिनट में दर्द काफूर हो गया और मजा आने लगा।
प्रियंका बोली, “चोदो हरामियों… जोर से चोदो… दो-दो लंड से फाड़ डालो… आ… आ… बड़ा मजा आ रहा है।”
तीनों के बदन पसीने से सने थे। चाप-चाप की आवाज आ रही थी। तबेले में गाय-बैल उन्हें देखकर मुश्किल में पड़ गए कि सबसे बड़ा जानवर कौन है।
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“भाभी, हम हर बार नहीं सिखाएंगे… दो लंड इकट्ठे चूत को बड़ी किस्मत से मिलते हैं मेरी जान।” सूर्य प्रताप बोला।
प्रियंका ने टाँगे फैलाईं ताकि दोनों को जगह मिले। दोनों लंड आपस में रगड़ रहे थे जैसे कुश्ती हो रही हो।
प्रियंका ने बायीं चुंची रणवीर के मुंह में दी। दायीं सूर्य प्रताप पीछे से दबा रहा था। सूर्य प्रताप लंड चूतड़ों के बीच से आते-जाते देख रहा था।
“दो-दो लौड़े खाने वाली भाभी… दो लौड़े खा ले… अपनी चूत का भक्काड़ा बनवा ले…”
रणवीर चोद भी रहा था और गा भी रहा था। प्रियंका को गंदी बातें सुनना पसंद था। चुदाई, गंदी बातों और गानों से चूत का रस निकलने लगा।
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इसी बीच जोखन सिंह को याद आया कि बहन रेनू का फोन आने वाला है। जेब टटोली तो फोन घर में छूट गया था। अनजान कि घर में क्या चल रहा है, वह समय से पहले लौट आए।
जैसे-जैसे कदम घर के पास आए, जानी-पहचानी आवाज सुनाई दी। उन्हें लगा बहू कुछ गुल खिला रही है। संशय हुआ कि कहीं कोई नौकर तो नहीं छोड़ रहा। गुस्सा आया।
वे घर में घुसे, प्रियंका के कमरे तक गए। कोई नहीं था। आवाज का पीछा करते हुए तबेले में पहुंचे।
वहाँ का दृश्य देख दिल हिल गया। दोनों बेटे बहू को एक साथ चोद रहे थे। प्रियंका आनंद में आँखें बंद किए थी। दोनों पूरी रफ्तार से चोद रहे थे।
जोखन सिंह का मन किया जूते उतारकर बेटों को मारें। पर जवान बेटों से अब दोस्तों जैसा बर्ताव ठीक था। वे दरवाजे के पीछे छिप गए।
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प्रियंका दो बार झड़ चुकी थी। वह देवरों से गुहार लगा रही थी कि रस जल्दी निकालें।
दोनों ने लौड़े निकाले और प्रियंका को जमीन पर बिठाया। दोनों चेहरे के दोनों साइड में आए और लौड़ा हिलाने लगे। प्रियंका ने एक-एक हाथ में लंड लिया और हिलाने लगी।
पहले सूर्य प्रताप झड़ा। प्रियंका ने हर बूंद मुंह में ली। रणवीर ने चेहरे और मम्मों पर फव्वारा छोड़ दिया।
जोखन सिंह का लंड खड़ा हो रहा था। वे बिना आवाज निकले चले गए। सूर्य प्रताप और रणवीर कपड़े पहन रहे थे। प्रियंका वीर्य और पसीने से सनी चारपाई पर पड़ी थी। साँसें भरी थीं।
उसे आनंद का नया अहसास मिला था। दो मर्दों ने रंडी की तरह इस्तेमाल किया और बहुत मजा आया।
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उधर जोखन सिंह के मन में दृश्य फिल्म की तरह चल रहा था। वे बैठकर बहन रेनू के फोन का इंतजार कर रहे थे। जोखन सिंह और रेनू जवानी से करीब थे। रेनू की सील भाई ने ही खुलवाई थी। शादी के बाद भी चुदाई करते थे।
प्रियंका आने के बाद रेनू के यहाँ जाने की तलब नहीं हुई। प्रियंका तबेले से उठी, कपड़े पहने और बाथरूम चली गई।
बाथरूम में याद आया कि ससुर जी के जूते बाहर हैं। मतलब ससुर वापस आ चुके थे। कहीं ससुर ने देख तो नहीं लिया। सोचकर दिल धक् से रह गया।
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