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फूफा ने दो जवान बहनों को छत पर पेला

Uncle fucked sisters sex story, Roof top sex story, Phupha sex story: मेरा नाम चाँदनी है मैं 20 साल की हूं और मेरी बहन मोना जो कि 18 साल की है। हम दोनों गांव में रहते हैं मेरे फूफा जी जो दिल्ली में रहते हैं। उन्होंने हम दोनों बहनों को जुलाई की एक रात छत पर जब बारिश हो रही थी तब उन्होंने चोदा। तो आज मुझे भी मौका मिला है अपने सेक्स कहानी कहने का इसलिए आपके सामने अपनी कहानी पेश कर रही हूं।

यह कहानी इसलिए भी खास है कि हम दोनों बहनों को बारी-बारी से चोदा और हम दोनों को भी खूब मजा आया। फूफा जी का मोटा लंड जब मेरी जांघों के बीच से गुजरा और मेरी चूत के पास पहुंचा तो मैं व्याकुल हो गई। फिर तो क्या हुआ दोस्तों पहले मैं उसके बाद मेरी छोटी बहन मोना चुदी।

यह सब कैसे हुआ अब मैं साफ-साफ आपका समय बर्बाद किए मैं लिख रही हूं। आप लोग अपने लंड को अपने हाथ में रख लें और लंड के सुपाड़ा पर थोड़ा सा थूक लगाकर गीला कर लें ताकि आगे पीछे करने में मजा आएगा।

मेरे फूफा जी दिल्ली में रहते हैं। मैं गांव में अपनी मम्मी दो बहन और एक छोटे भाई के साथ रहती हूं। मेरे पापा बाहर काम करते हैं वह गांव में रहना नहीं चाहते पर हम लोगों को भी ले जाना नहीं चाहते क्योंकि मेरी मम्मी से उनकी नहीं बनती है।

मम्मी और पापा में हमेशा झगड़ा होता रहता है इधर कुछ दिन पहले ही बहुत ज्यादा झगड़ा हुआ जब वह गांव आए थे तो। तो यहां छोड़ने छोड़ने की बात होने लगी मम्मी तलाक लेना चाह रही थीं और वह तलाक देना नहीं चाह रहे थे।

मेरे फूफा जी दिल्ली में रहते हैं मम्मी पापा के झगड़े को हटाने के लिए वह दिल्ली से गांव आए थे। सच बात यह दोस्तों है कि मुझे ऐसा लगता है कि मेरी मम्मी और फूफा जी में कुछ न कुछ चक्कर है। कई बार मुझे ऐसा लगा पर मैं यह कह नहीं सकती कि यह बात सच है या झूठ है।

क्योंकि जब मैं स्कूल जाती थी दोनों बहनें और जब वह यहां आते थे तो बड़े खुश रहते थे और कई बार तो मैं यह भी देखी कि जब मैं घर पहुंची तो वह दरवाजा बंद होता था आज तक मैंने कुछ देखा नहीं पर मुझे शक है कि मम्मी और फूफा जी में कुछ ना कुछ चक्कर है।

तो बात युवा दोस्तों की, जब फूफा जी गांव आए तो मेरे पापा जो कि गांव से करीब 200 किलोमीटर दूर रहकर काम करते हैं, उन्हें फोन किया गया लेकिन वे नहीं आए। इसलिए मेरी मम्मी ने रात को ही ट्रेन पकड़ ली। वे पापा से बात करने और उन्हें घर बुलाने के लिए चली गईं क्योंकि पापा मम्मी का फोन भी नहीं उठा रहे थे।

अब घर में सिर्फ मैं, मेरी छोटी बहन मोना, मेरा छोटा भाई और फूफा जी ही थे। परसों की रात की बात है। शाम से ही तेज हवा चल रही थी। अचानक गांव में बिजली चली गई। गर्मी इतनी ज्यादा थी कि नीचे कमरे में पसीना-पसीना हो रहा था। नीचे सोना नामुमकिन लग रहा था। इसलिए हम दोनों बहनें और फूफा जी ने फैसला किया कि छत पर ही सोएंगे। मेरा छोटा भाई शाम को मैदान में खेलकर थककर आया था। वह तो जैसे बिस्तर पर गिरते ही सो गया, इसलिए वह नीचे ही रह गया।

हम तीनों छत पर चले गए। छत पर एक छोटा-सा कमरा बना हुआ है, जिसकी छत पर हमने चादर बिछा ली। फूफा जी बीच में लेटे, मैं एक तरफ और मोना दूसरी तरफ। रात के करीब 1 बजे अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। बूंदें जोर-जोर से छत पर गिर रही थीं। मैं डर गई और जल्दी से नीचे भाग आई। फूफा जी और मोना छत पर ही रह गए। मोना भी थोड़ी देर बाद बारिश से बचने के लिए नीचे आ गई और सो गई।

मैं नीचे लेटी रही लेकिन नींद नहीं आ रही थी। मच्छर बहुत सताए जा रहे थे। गर्मी से तन बदबद कर रहा था। करीब आधे घंटे बाद मैंने सोचा कि छत पर चलकर देखूं, शायद वहां ठंडी हवा मिल जाए। मैं धीरे-धीरे सीढ़ियां चढ़कर छत पर पहुंची। जैसे ही मैंने सिर ऊपर किया, मैं ठिठक गई। अंधेरे में फूफा जी मेरी छोटी बहन मोना के साथ थे।

मोना के कपड़े पूरी तरह उतारे जा चुके थे। उसका नंगा जिस्म बारिश की बूंदों से चमक रहा था। फूफा जी उसके ऊपर झुके हुए थे। उनके दोनों हाथ मोना की छोटी-छोटी, गोल-गोल चूचियों पर थे। वे दोनों तरफ से चूचियों को दबा रहे थे, हथेलियों से गोल-गोल घुमा रहे थे। मोना की निप्पल्स सख्त हो चुकी थीं। फूफा जी एक निप्पल को उंगलियों से निचोड़ रहे थे और दूसरी चूची को मुंह में लेकर चूस रहे थे।

फिर उनका एक हाथ नीचे सरका। मोना की गोल, मुलायम गांड पर पहुंच गया। वे गांड के दोनों गालों को अलग-अलग करके सहला रहे थे। उंगलियां बीच की दरार में फिसल रही थीं। कभी हल्के से थपकी दे रहे थे, कभी निचोड़ रहे थे। मोना की सांसें तेज हो गई थीं। उसका जिस्म हल्का-हल्का कांप रहा था।

यह सब देखकर मेरे पैर जम गए। मैं छत के किनारे अंधेरे में खड़ी हो गई और चुपचाप देखती रही। धीरे-धीरे मोना भी जोश में आने लगी। उसने फूफा जी के गले में हाथ डाल दिए। दोनों एक-दूसरे के होंठ चूमने लगे। पहले हल्के से, फिर गहराई से। उनकी जीभें आपस में लिपट रही थीं। मोना के हाथ फूफा जी की कमर पर फिर रहे थे।

मेरा मन अब शांत नहीं रह सका। मेरी चूत में गर्मी बढ़ने लगी। वासना पूरी तरह भड़क गई थी। लेकिन देखने में भी अलग ही मजा आ रहा था। मेरी 18 साल की बहन की छोटी-छोटी चूचियां कितनी नरम और गोल थीं। उसकी गांड कितनी टाइट और आकर्षक लग रही थी।

मोना अब कच्ची कली की तरह फूफा जी को खुश कर रही थी। फूफा जी भी अपनी उम्र के हिसाब से बहुत उत्तेजित थे। उनकी उम्र करीब 45 साल होगी। एक मर्द के लिए इतनी छोटी उम्र की लड़की को छूने का मौका मिलना कितना बड़ा सौभाग्य होता है, आप खुद सोच सकते हैं।

अब दोनों एक-दूसरे को और फैलाकर प्यार करने लगे। फूफा जी का लंड पूरी तरह तना हुआ था। वह मोटा, लंबा और सख्त हो चुका था। उन्हें मोना की कच्ची, टाइट चूत चाहिए थी। उन्होंने मोना के दोनों पैरों को धीरे से फैलाया। मोना की चूत पूरी तरह खुल गई। फूफा जी ने अपना लंड हाथ में पकड़ा। सुपाड़े को मोना के चूत के मुंह पर रगड़ा। फिर धीरे-धीरे अंदर घुसाने की कोशिश की।

मोना ने दर्द से कहा, “फूफा जी, जोर से मत डालना… बहुत दर्द हो रहा है।” फूफा जी ने प्यार से कहा, “अरे बेटी, दर्द नहीं होगा। मैं बहुत धीरे-धीरे डालूंगा। बस थोड़ा सब्र कर।” वे कोशिश करते रहे। लेकिन मोना की चूत बहुत टाइट थी। लंड मुश्किल से आधा ही अंदर जा पा रहा था।

फूफा जी ने पास रखा मोबाइल उठाया। टॉर्च जलाई। मोना की चूत की रोशनी में देखा। छोटा-सा गुलाबी छेद, चारों तरफ हल्के बाल, और बीच में चमकता हुआ रस। उन्होंने लंड का सुपाड़ा ठीक छेद पर सेट किया। फिर एक मजबूत लेकिन कंट्रोल्ड धक्का दिया।

मोना जोर से चीखी और रो पड़ी। दर्द से उसकी आंखों से आंसू बहने लगे। फूफा जी रुक गए। उन्होंने मोना के माथे पर हाथ फेरा। दो-तीन मिनट तक वे सिर्फ हल्के-हल्के आगे-पीछे करते रहे। धीरे-धीरे मोना का दर्द कम हुआ। उसकी चूत गीली हो गई। अब लंड आसानी से अंदर-बाहर होने लगा।

फूफा जी ने धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाई। उनका पूरा मोटा लंड अब मोना की चूत में पूरी तरह समा रहा था। मोना अब दर्द भूल चुकी थी। वह गांड ऊपर उठाकर चुदाई का जवाब दे रही थी। फूफा जी जोर-जोर से धक्के मारने लगे। चूत से चिकचिक की आवाज आने लगी।

मोना बीच-बीच में सिसकारी भरते हुए कह रही थी, “फूफा जी… धीरे करो… बहुत जोर से हो रहा है… फूफा जी… दे दे करो…” लेकिन फूफा जी कहां मानने वाले थे। उनकी आंखों में पूरी तरह वासना छा गई थी। वे और तेज हो गए। उनका मोटा, सख्त लंड मोना की चूत में जोर-जोर से पेल रहा था। हर धक्के के साथ मोना की चूत से चिकचिक की आवाज निकल रही थी। मोना की गांड ऊपर-नीचे हो रही थी, लेकिन फूफा जी की स्पीड कम नहीं हो रही थी। उनका लंड पूरी तरह अंदर तक जा रहा था और बाहर निकलते वक्त मोना की चूत की दीवारों को रगड़ रहा था। मोना अब दर्द की बजाय मजा ले रही थी, लेकिन फिर भी बीच-बीच में “आह… धीरे…” कहकर सिसक रही थी।

मेरे से अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं हो रहा था। मैं देखते-देखते ही इतनी गर्म हो चुकी थी कि मेरी चूत से रस टपकने लगा था। मेरी सांसें तेज थीं। मैं खुद को रोक नहीं पाई और धीरे से छत पर आगे बढ़ गई। जैसे ही मैं उनके करीब पहुंची, दोनों अचानक रुक गए। फूफा जी ने मेरी तरफ देखा। मोना भी हैरान होकर उठने लगी। मैंने हल्की आवाज में कहा, “रुको नहीं… मैं काफी देर से सब देख रही हूं।”

फूफा जी की आंखों में चमक आ गई। उन्होंने मुस्कुराते हुए मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अपनी तरफ खींच लिया। वे मुझे नीचे चादर पर बैठा दिए। फिर बिना कुछ कहे मेरे कपड़े उतारने शुरू कर दिए। पहले मेरी कुर्ती ऊपर की, ब्रा के हुक खोले और मेरी चूचियां बाहर निकाल लीं। फिर मेरी सलवार का नाड़ा खींचकर उतार दिया। अब मैं भी पूरी तरह नंगी हो गई थी।

फूफा जी ने हम दोनों बहनों को एक साथ चादर पर लिटा दिया। मोना मेरी बगल में लेटी थी। फूफा जी पहले मेरी तरफ मुड़े। उन्होंने मेरी दोनों चूचियों को दोनों हाथों से पकड़ा। खूब जोर से दबाया, मसल दिया। मेरी निप्पल्स पहले से ही सख्त हो चुकी थीं। उन्होंने एक निप्पल को मुंह में लिया और जोर से चूसने लगे। जीभ से गोल-गोल घुमाते, दांतों से हल्का सा काटते। दूसरी चूची को उंगलियों से निचोड़ते रहे। फिर उनका हाथ मेरी गांड पर चला गया। गांड के दोनों गालों को अलग करके सहलाया, निचोड़ा, हल्के से थपकी दी। उनका छूना मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।

फिर फूफा जी ने मोना को छोड़कर अब पूरी तरह मेरे जिस्म पर ध्यान दिया। उन्होंने मुझे ऊपर से नीचे तक चाटना शुरू किया। पहले मेरे होंठ चूमे, जीभ अंदर डालकर चूसी। फिर गर्दन पर चाटा, कानों में जीभ डाली। मेरे गोर-गोर गालों पर दांत काटे, हल्के निशान छोड़ दिए। फिर नीचे आकर मेरी चूचियों को फिर से पीने लगे। वे इतने जोर से चूस रहे थे कि मैं पागल हो रही थी। मेरी चूत से गर्म-गर्म पानी निकलने लगा था। मेरी सांसें बहुत तेज हो गई थीं। पूरा जिस्म कांप रहा था।

मैं उनका लंड पाने के लिए बेकरार हो चुकी थी। फूफा जी ने भी अब इंतजार नहीं किया। उन्होंने मेरे दोनों पैरों को चौड़ा किया। मेरी चूत पूरी तरह खुल गई थी। उनका मोटा लंड मेरी चूत के मुंह पर रगड़ा। चूत पहले से ही बहुत गीली थी। उन्होंने एक जोरदार धक्का दिया। लंड आराम से अंदर चला गया। कोई दर्द नहीं हुआ, सिर्फ भरपूर मजा आया। उनका पूरा लंड मेरी चूत में समा गया।

फिर वे जोर-जोर से धक्के मारने लगे। मैं भी गांड ऊपर उठाकर हर धक्के का जवाब दे रही थी। हमारी चुदाई की आवाजें छत पर गूंज रही थीं। मेरी बहन मोना पास में लेटी थी। वह कभी मेरी चूचियों को छू रही थी, निप्पल्स को सहला रही थी। कभी फूफा जी की गांड पर हाथ फेर रही थी, उनकी गांड को दबा रही थी। हम दोनों बहनें पूरी तरह पागल हो चुकी थीं।

फूफा जी अब हम दोनों को बारी-बारी से चोदने लगे। पहले कुछ देर मुझे पेलते, फिर मोना की चूत में लंड डाल देते। हम दोनों इतनी गर्म हो चुकी थीं कि बारी-बारी चुदवाने में भी मजा ले रही थीं। कभी मैं चुद रही होती, मोना मेरी चूचियां चूसती। कभी मोना चुद रही होती, मैं फूफा जी के लंड को सहलाती या उनकी गांड को दबाती। तीनों का जिस्म एक-दूसरे से सटा हुआ था। वासना की कोई सीमा नहीं रह गई थी।

फूफा जी ने हम दोनों बहनों को छत पर करीब एक घंटे तक लगातार चोदा। पहले मुझे पेला, फिर मोना को, फिर फिर से मुझे। हमारी चूतें अब पूरी तरह गीली और ढीली हो चुकी थीं। हर धक्के के साथ चिकचिक की आवाजें छत पर गूंज रही थीं। हम दोनों बहनें सिसकारियां भर रही थीं, “आह… फूफा जी… और जोर से… बस ऐसे ही…” फूफा जी का मोटा लंड बारी-बारी से हमारी चूतों में घुस-निकल रहा था। हमारा पसीना और चूत का रस मिलकर चादर गीली कर चुका था।

तभी अचानक बारिश फिर से शुरू हो गई। पहले हल्की-हल्की बूंदें गिरने लगीं। छत पर अंधेरा बहुत गहरा था, सिर्फ दूर-दूर की बिजली की चमक से थोड़ी रोशनी मिल रही थी। बारिश की बूंदें हमारे नंगे जिस्म पर गिर रही थीं, ठंडी और सिहरन देने वाली। मैंने थोड़ा डरते हुए कहा, “फूफा जी… चलो नीचे चलते हैं… यहां बारिश होने लगी है।”

फूफा जी ने मुस्कुराकर मेरी कमर पकड़ी और बोले, “अरे चाँदनी, बारिश में तो चुदने और चुदाने का मजा ही कुछ और होता है। ठंडी बूंदें जिस्म पर गिरती हैं तो और भी जोश आ जाता है।” उन्होंने हमें दोनों को फिर से चादर पर लिटाया। बारिश अब थोड़ी तेज हो गई थी। हम तीनों भीग रहे थे। पानी हमारे जिस्म से बह रहा था, चूचियां चमक रही थीं, चूतें और भी गीली हो गई थीं।

फूफा जी ने फिर से चुदाई शुरू कर दी। बारिश की बूंदों के बीच वे हमें बारी-बारी चोद रहे थे। कभी मोना की चूत में लंड डालकर जोर-जोर से धक्के मारते, तो कभी मेरी। हम तीनों एक-दूसरे को खुश कर रहे थे। फूफा जी कभी किसी की चूत में लंड घुसाते, कभी गांड की दरार में उंगली डालकर सहलाते। कभी किसी की चूचियां मुंह में लेकर जोर से चूसते, निप्पल्स को दांतों से काटते, उंगलियों से दबाते। कभी दोनों बहनों के होंठ बारी-बारी चूसते, जीभ अंदर डालकर खेलते। कभी हम दोनों बहनें उनके लंड को सहलातीं, चूमतीं, चाटतीं। बारिश की बूंदें हमारे मुंह में, जिस्म पर, चूत पर गिर रही थीं। सब कुछ गीला, ठंडा और बेहद उत्तेजक था।

हम तीनों मिलकर एक-दूसरे को इतना खुश कर रहे थे कि समय का पता ही नहीं चल रहा था। फूफा जी की ताकत कम नहीं हो रही थी। बारिश में भीगकर उनका लंड और भी सख्त लग रहा था। हम दोनों बहनें अब पूरी तरह संतुष्ट हो चुकी थीं। हमारी चूतें कई बार झटके लेकर झड़ चुकी थीं। फूफा जी ने आखिर में जोर-जोर से धक्के मारकर हम दोनों को एक साथ संतुष्ट कर दिया।

फिर तो क्या था दोस्तों। मम्मी अगले दिन शाम तक आईं। लेकिन तब तक फूफा जी हम दोनों बहनों को दो-दो, तीन-तीन बार रोज चोद चुके थे। उनके पास एक छोटी-सी टेबलेट थी। वे उसे खा लेते और उनका लंड फिर से मोटा, लंबा और सख्त हो जाता। फिर वे हमें बिस्तर पर या छत पर या कभी-कभी कमरे में ही पेल देते। हम दोनों बहनें भी खूब मजे ले रही थीं। कभी मैं अकेले चुदवाती, कभी मोना अकेले, कभी दोनों साथ में।

चुदाई का आनंद ही कुछ और होता है। और खासकर अपने से दुगने उम्र के मर्द से चोदवाने का मजा तो और भी अलग होता है। फूफा जी का अनुभव, उनकी ताकत, उनका मोटा लंड – सब कुछ हमें पागल कर रहा था। हम दोनों बहनें अब हर रात उनकी राह देखने लगी थीं।

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