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गोवा ट्रिप में पूरी फैमिली ने की चुदाई

Maa bete ki chudai, Family group sex story, Goa trip incest kahani, Bhai behan chudai sex story: दोस्तों घर में मेरे अलावा मम्मी-पापा और एक बड़ी बहन थी। पापा को अपने काम से फुर्सत ही नहीं मिलती थी। इस कारण हम दोनों भाई-बहन मम्मी के साथ ही घूमते-फिरते थे। मेरी बड़ी बहन अधिकतर घर से बाहर ही रहती थी। मौका मिलते ही वह कभी नाना-नानी, कभी दादा-दादी या किसी करीबी रिश्तेदार के पास चली जाती थी। उसकी पढ़ाई भी इस कारण अच्छी नहीं रह पाई।

हमारी मम्मी खुद अच्छी पढ़ी-लिखी महिला थीं। काफी मॉडर्न विचारों वाली थीं। वह कभी दकियानूसी विचार नहीं पालती थीं। उन्होंने हम भाई-बहन में कभी अंतर नहीं रखा। इस कारण हम आपस में काफी खुले हुए थे। यहां तक कि किसी भी बात पर अपने विचार खुलकर व्यक्त कर सकते थे। एक तरह से हममें किसी प्रकार का परदा नहीं था।

मम्मी और मेरी बहन ने कभी मुझसे शर्म या परदा नहीं किया। वह दोनों घर में मेरे सामने ही अपने ऊपरी कपड़े बदल लेती थीं। जैसे तौलिए की आड़ में या पीठ करके। जिस कारण मैं बड़ी सफाई से निगाहें चुराकर उन दोनों के मांसल बदन का भरपूर रसास्वादन करता था। इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि मैं बचपन से ही काफी सीधा-सादा, भोला-भंडारी सा दिखता था। लेकिन कोई नहीं जानता था कि मैं जितना जमीन के ऊपर हूं उससे कहीं ज्यादा जमीन के नीचे हूं।

अब मैं सीधे अपनी कहानी पर आता हूं। मेरी मम्मी की उम्र 37-38 होगी। क्योंकि मम्मी की शादी 17-18 साल की उम्र में ही हो गई थी और 19-20 साल में मेरी बड़ी बहन जन्मी थी। अपने कॉलेज की पढ़ाई मम्मी ने हम दोनों बच्चों के जन्म के बाद पूरी की। उनका बदन अब तक गठीला था। लंबाई लगभग 5.5 फीट और बदन पूरा मांसल। कहीं कोई ज्यादा चर्बी नहीं थी। इस कारण वह अब भी 30-32 से ज्यादा की नहीं लगती थीं।

ऐसी ही मेरी बहन भी थी। उस समय वह 18-19 साल की थी। उसका रूप-सौंदर्य देखते ही बनता था। गजब का नशीला जिस्म था उसका। मेरे दोस्त भी उसे चोरी-छिपे देखा करते थे और मेरी पीठ पीछे उसके बारे में गंदी-अश्लील बातें करते थे। जिन्हें सुनकर मैं थोड़ा खुश होता था कि चलो मेरे घर में मुझे क्या मस्त चीजें देखने को मिलती हैं। जिसके लिए ये सभी बेचारे तरसते हैं।

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उन दिनों मेरी बहन कुछ ज्यादा मोटी लगने लगी थी। असल में वह कुछ दिनों पहले दादा-दादी के यहां से आई थी और वहां लाड़-प्यार में खूब खाया-पिया था। यहां आने के बाद मम्मी ने उसे कहा कि रोज एक्सरसाइज करा कर नहीं तो फूलती ही चली जाएगी। उसने डरकर हामी भर दी। इसके बाद वह रोज हमारे रूम में सुबह और शाम कसरत करती।

हम दोनों बचपन से एक ही रूम में रहते और सोते थे जिसमें एक डबल बेड रखा था। अब वह रोज सुबह 6 बजे अलार्म लगाकर उठती थी और फ्रेश होकर केवल स्पोर्ट्स ब्रा और नेकर पहनकर एक्सरसाइज करती। मैं धीरे से आधी आंख खोलकर उसका भूगोल देखता रहता था। कभी-कभी मम्मी भी वहां कई बार कोई एक्सरसाइज सीखने के लिए हम दोनों के सामने ही अपनी साड़ी खोलकर केवल ब्लाउज-पेटीकोट में एक्सरसाइज सिखातीं। तब तो मेरा दिमाग ही खराब हो जाता और मैं अपना तना हुआ लौड़ा दबाया करता।

ऐसा कई महीनों तक चलता रहा और मैं बुद्धू बनकर मजे मारता रहा। इस बीच हम लोग पापा के पीछे पड़ गए कि हमें कहीं घूमने ले जाएं। तो वो बोले कि समय निकालने की कोशिश करता हूं। लेकिन समय यूँ ही बीतता गया। मेरी बहन ने चाचा-चाची के साथ बाहर घूमने का प्रोग्राम बनाया और वह उन लोगों के साथ 15-20 दिनों के लिए घूमने चली गई।

इससे हम मम्मी और मैं पापा से नाराज हो गए। तो कुछ ही दिन बाद पापा ने कहा कि उनके एक दोस्त का गोवा शहर के बाहर एक गेस्ट हाउस है और अभी वो खाली है। इसलिए हम लोग वहां चले जाएं और मजे करें। बाद में वो भी समय निकालकर वहां आ जाएंगे। लेकिन हम उनके बिना वहां जाना नहीं चाहते थे। पर उनके समझाने पर मैं और मम्मी गोवा चले गए। मेरी बहन का पापा के साथ वहां आना तय हुआ।

तय प्लान के अनुसार मैं और मम्मी ठीक समय गोवा पहुंच गए। उस समय वहां ऑफ सीजन चल रहा था और बारिश की वजह से टूरिस्ट्स नाम के ही थे। लेकिन वहां जाते ही रास्ते में सेक्सी नजारे देखकर मुझे लगा कि यहां आकर कोई गलती नहीं की। हमें लेने के लिए गेस्ट हाउस से एक आदमी आया था। उसने बताया कि यहां अंदर ही जरूरत की सभी चीजें हैं। यदि कुछ चाहिए तो उसकी दुकान गेस्ट हाउस पास ही है।

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अपना फोन नंबर देकर वो बोला कि बस हम उसे फोन कर दें और वो आकर सामान या जो भी चाहिए दे जाएगा। रोज सुबह-शाम सफाई वाली आएगी और बाकी सभी काम भी कर देगी। मम्मी इस बात से खुश थीं कि गेस्ट हाउस में रुकने से होटल का भारी रूम चार्ज नहीं लगेगा और यहां हम कम पैसों में कई दिन मजे कर सकते हैं।

गेस्ट हाउस में आकर पता चला कि यहां घूमने के लिए एक गाड़ी भी खड़ी है। किचन और फ्रिज पूरा खाने की चीजों से भरा हुआ है। सड़क से अंदर गेस्ट हाउस एक बड़े कंपाउंड में फैला हुआ था। जिसके चारों ओर बड़ी-बड़ी कंटेदार दीवारें थीं। पीछे की तरफ उफनता हुआ समंदर था और पूरा इलाका सुनसान था। जहां चारों तरफ केवल समंदर और बड़े-बड़े पत्थर थे।

अंदर अलमारी में शानदार कपड़े थे। जिनमें स्विमिंग कॉस्ट्यूम्स ऐसे थे कि हाथ में लेने में ही शर्म महसूस हो। एक बात थी कि यहां कोई अपना परिचित नहीं था। इस कारण शर्म और संकोच का यहां कोई काम नहीं था। मैंने मम्मी को खुशी से बहन से फोन पर बात करते सुना कि यहां इतनी आजादी है कि चाहे तो पूरे नंगे होकर सी बीच पर दौड़ लगाओ। कोई देखने वाला नहीं है।

गेस्ट हाउस के पीछे जो स्विमिंग पूल है उसमें नीला आसमान ऐसा दिख रहा था मानो जमीन पर उतर आया हो। कुल मिलाकर हमारा जैकपॉट ही लग गया था। अगली सुबह जब मैं सोकर उठा तो मम्मी नहीं दिखीं। मैं उन्हें ढूंढने दूसरे कमरे में गया। वहां अलमारी खोलकर अपने साइज के स्विमिंग कॉस्ट्यूम्स देख रही थीं। मुझे देखकर बोलीं कि चलो तुम भी चेंज कर लो और हम दोनों स्विमिंग करेंगे।

मैं तो कब से मौका देख रहा था। जल्दी से फ्रेश होकर पूल साइड पर पहुंचा तो देखा कि मम्मी ने पहले ही ब्रेकफास्ट का सारा सामान पूल साइड पर रखवा दिया था। काम वाली बाई से सभी काम करवा कर उसे चलता कर दिया था। अब वहां मेरे और मम्मी के अलावा कोई नहीं था। थोड़ी देर बाद मम्मी आईं तो मेरा दिमाग खराब हो गया।

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उस समय उन्होंने जो स्विमिंग कॉस्ट्यूम पहना था वो शायद उनके साइज से एक साइज छोटा था। इसीलिए उनका पूरा बदन कॉस्ट्यूम फाड़कर बाहर आने को मचल रहा था। मेरे तो होश उड़ गए और मैं फटी-फटी आंखों से उन्हें देखने लगा। तभी मम्मी ने मुझे आवाज देकर जगा दिया और एक कॉस्ट्यूम देते हुए कहा कि मैं भी यही पहन लूं।

मैंने वहीं तौलिए में अपना कॉस्ट्यूम चेंज किया। लेकिन उसका कट ऐसा था कि मेरा पूरा तना हुआ लिंग बाहर से दिख रहा था। जिस कारण मैं शरमा रहा था। मम्मी ताड़ गईं और बोलीं कि क्या तू तो लड़कियों से भी बदतर है। तेरी जगह मैं या तेरी बहन होती तो अब तक सी बीच पर टू पीस में दौड़ लगा आती। ऐसा कहकर उन्होंने मेरा तौलिया खींच लिया।

अब मैं केवल जरा सी कॉस्ट्यूम में था और शरमाते हुए पानी में पैर डालकर बैठ गया क्योंकि मुझे तैरना नहीं आता था। मम्मी को भी तैरना इतने अच्छे से नहीं आता था। इसलिए उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर धीरे-धीरे पानी में उतरना शुरू किया और जल्दी ही हम दोनों सीने तक पानी में समा गए।

मम्मी को मैंने पहली बार इतने बिंदास अंदाज में देखा था। उन्हें शर्म नाम की कोई चीज ही नहीं थी और वो अपने जवान लड़के के साथ पानी में मस्ती कर रही थीं। उनकी कॉस्ट्यूम जो थोड़ी टाइट थी पानी में भीगने से और ज्यादा बदन से चिपक गई और उनकी निप्पल भी थोड़ी-थोड़ी दिखने लगी थीं। जिसे देखकर मेरा लंड चड्डी फाड़कर बाहर आने को बेताब हो गया। बड़ी मुश्किल से मैंने दबाए रखा।

लगभग 2 घंटे बाद जब भूख सताने लगी तो हम दोनों पूल से बाहर आए। मम्मी ने मेरे सामने ही जरा से तौलिए की आड़ करके अपनी बिकनी चेंज कर एक बड़े गले की पारदर्शी नाईटी पहन ली। जो उनके घुटने से भी छोटी थी और अंदर कुछ नहीं पहना। जिस वजह से नाईटी उनकी गांद के अंदर घुस रही थी और खड़ी निप्पल्स साफ दिख रही थीं। मुझे लगता है उन्होंने जानबूझकर ऐसा किया। वो अपनी दबी इच्छा पूरी करना चाहती थीं।

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इसके बाद हमने पूरे समय टीवी देखा। जिसमें लोकल चैनल पर विदेशी टूरिस्ट्स के नंगे बीच पर मजे दिखाते थे। ऐसे-ऐसे सीन दिखाए कि मैं शरमाता रहा। लेकिन मम्मी ने चैनल चेंज करना जरूरी नहीं समझा। शाम को जब मम्मी मेन गेट पर नाईटी में खड़ी थीं तो मैं पीछे से चुपचाप खड़ा हो गया। सामने सुनसान बीच पर एक विदेशी जोड़ा संभोग की मुद्रा में पत्थरों के बीच मस्ती कर रहा था।

मम्मी सूर्यास्त की रोशनी में खड़ी थीं। नाईटी में से सूरज की लाइट ऐसे पास हो रही थी कि उनका पूरा भूगोल आर-पार दिखाई दे रहा था। जब मैं ठीक पीछे पहुंचा तो देखा कि वो अपना एक हाथ नाईटी के अंदर डालकर अपनी चूत रगड़ रही थीं और हल्के-हल्के कराह रही थीं। मुझे पीछे देखकर बेशर्म की तरह हंसकर बोलीं – देख कैसे मजे मार रहे हैं वो दोनों बीच पर और एक तू है कि अंदर भी शरमा रहा है। लगता है मैंने तेरे साथ आकर गलती की। मुझे तू पूरा चंपू लगता है।

मैंने कहा कि नहीं मम्मी यह बात नहीं है। मैं शुरू में थोड़ा झिझक रहा था लेकिन यदि आप साथ हो तो कहे की शर्म। इस पर मम्मी बोलीं – देख आदमी को बार-बार ऐसा मौका नहीं मिलता। जब हम खुलकर अपनी दबी इच्छा पूरी कर सकें और मजे मार सकें। इस मजे के लिए लाखों रुपये भी खर्च करें तो इतनी आजादी और प्राइवेसी नहीं मिलेगी। तू तो जवान है। मुझे तो ये मौका अब जाकर बुढ़ापे में मिला। इसलिए शरमाना छोड़ और यह भूल जा कि हम यहां मां-बेटे हैं। समय और जवानी का लुत्फ उठा जितना हो सके। फिर ऐसा वक्त नहीं आएगा।

अगले दिन सुबह से जबरदस्त बारिश हो रही थी। सामने बीच पर समंदर मचल-मचलकर बाहर आने को बेताब नजर आ रहा था। तभी कीपर का फोन आया कि आज सफाई वाली नहीं आएगी और हम बाहर न निकलें क्योंकि पानी बढ़ भी सकता है। इसलिए गेस्ट हाउस में अंदर ही रहें। यदि कोई चीज चाहिए तो फोन कर दें वो अरेंज कर देगा।

मम्मी ने कहा ठीक है हम आराम करेंगे। आप भी ज्यादा परेशान न हों। फिर बोलीं कि आज दिन भर टीवी देखेंगे खूब खाएंगे और सोना स्टीम बाथ लेंगे जो गेस्ट हाउस के बेसमेंट में है। मुझे अब तक पता ही नहीं था। मम्मी एक-दो बार पापा के साथ टूर्स पर गई थीं और बड़ी होटलों में इसका मजा लूट चुकी थीं।

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सुबह के हेवी ब्रेकफास्ट के बाद हम दोनों नीचे बेसमेंट में गए। मम्मी ने सोना बाथ का इलेक्ट्रिक स्विच चालू किया। सेमी ट्रांसपेरेंट ग्लास केबिन में हॉट स्टीम बनने लगी। तब मम्मी बोलीं कि आओ अपनी बॉडी पर स्किन क्रीम लगा लो। तब मम्मी ने अपनी नाईटी खोल दी। अंदर केवल ब्रा-पैंटी थी। जब टांगें चौड़ी कीं तो पैंटी में से चूत की झांटें बाहर आने को मचल रही थीं।

वो हल्की मुस्कुराईं और बोलीं – बेटा देख तो ड्रॉर में हेयर रिमूवर रखा है क्या। मैंने अनवांछित हेयर रिमूवर दे दिया। अब मम्मी बोलीं – चल जल्दी अंदर जा तापमान देख ले मैं भी आती हूं। मैं केबिन में जाते समय तिरछी निगाह डाली तो वे अपनी पैंटी थोड़ा नीचे करती दिखीं। मेरा दिमाग खराब हो रहा था। समझ नहीं आ रहा था कि मम्मी मुझ पर इतनी मेहरबान क्यों हैं और मुझे उत्तेजित करके क्या चाहती हैं।

क्या मैं खुद आगे बढ़कर हिम्मत करूं। उनका मजा मारने का शब्द मुझे कन्फ्यूज कर गया। केबिन में स्टीम की भाप से बाहर कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। अचानक मम्मी अंदर आईं और बोलीं कि ऐसी मत बैठो। बदन पर हाथ फेर-फेरकर पसीना और भाप की मालिश करो। स्टीम बाथ से खराब स्किन साफ होकर नई स्किन बनती है।

तब मम्मी ने मेरी तरफ पीठ की और कहा कि चल मेरी ब्रा का हुक खोल दे और पीठ पर अच्छी तरह मालिश कर दे। अब मैं भी बेशर्म होकर मम्मी की मांसल पीठ पर हाथ फेरता जा रहा था। लेकिन अभी तक उनके निप्पल्स और बड़े-बड़े बोबों के खुलकर दर्शन नहीं कर पाया था क्योंकि मम्मी ने दूध पर हाथ रख रखा था।

आधा घंटा स्टीम बाथ लेने के बाद हम बाहर आए। मम्मी ने कंधों पर तौलिया रखा था जिससे रसीले आमों को देखने का मौका नहीं मिला। उसी शाम पापा का फोन आया कि वह और मेरी बड़ी बहन अगले दो दिनों में पहुंचने वाले हैं। यह सुनकर मैं थोड़ा उदास हो गया क्योंकि तब शायद पापा के सामने मम्मी का ऐसा सेक्सी रूप नहीं देख पाऊंगा।

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रात में मम्मी ने हल्का-फुल्का डिनर बनाया। खाकर टीवी के सामने जम गए। बाहर बारिश में भी कमी महसूस होने लगी थी। तभी मम्मी बोलीं कि चलो टीवी देखते हुए मेरी पीठ पर हल्की मालिश कर दो। शायद बेड चेंज होने से दर्द हो रहा है। मम्मी ने टी-शर्ट और नेकर पहन रखा था। टी-शर्ट ऊपर उठाई तो अंदर ब्रा थी। हुक खोलकर मैंने पीठ पर ऑयल मसाज शुरू कर दिया।

मम्मी बोलीं – ऐसा कर मैं नेकर थोड़ा नीचे करती हूं। मेरे हिप्स की भी थोड़ी मालिश कर दे। मैं सेक्सी सपने देखते हुए मालिश करता जा रहा था। कुछ देर में मम्मी मस्त सो गईं। उनकी पीठ और हिप्स खुले थे। मैं बहुत देर तक गौर से देखता रहा और नींद आने पर उनके पास ही डबल बेड पर सो गया।

रात में 2-3 बजे मम्मी के करवट लेने पर मेरी आंख खुल गई। देखा कि मम्मी अब चित सो रही थीं। गहरी नींद में होने का पक्का करके मैंने उनका टी-शर्ट थोड़ा ऊपर किया और ब्रा भी ऊपर करके मस्त रस भरे स्तनों के दर्शन करने लगा। उनकी निप्पल्स भूरे रंग की थीं। मैं उनको देखकर पागल सा हो गया और आहिस्ता से मुंह में लेकर धीरे-धीरे चूसने लगा।

एक हाथ उनकी नेकर में डाल दिया। नेकर का हुक खुला होने से वह योनि के पास तक सरक गई थी। दो उंगलियां धीरे से अंदर डालीं तो अंदर सफाचट चिकना स्पर्श लगा। ध्यान आया कि सुबह स्टीम बाथ में मम्मी ने बाल साफ किए थे। मम्मी की चूत गर्म भट्टी सा तप रही थी। निप्पल्स पहले से ज्यादा कड़ी हो गई थीं। मैं चूसते-चूसते थककर सो गया।

अगले दिन सुबह आसमान साफ था। धूप खिल उठी थी। मल्लिका बाई ने पूरा गेस्ट हाउस साफ कर दिया। मम्मी साड़ी पहनकर पास के मंदिर का पता पूछ रही थीं। मैंने सोचा शायद पापा के आने का सुनकर नाटक कर रही हैं। बाई के जाने के बाद मम्मी बोलीं कि चलो नाश्ते के बाद बीच पर चलेंगे।

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मैं सोचने लगा कि साड़ी पहनकर बीच पर क्या करेंगी। लेकिन जाने के समय देखता रह गया। मम्मी ने काली कलर की बिकनी ढूंढ निकाली। साइज पहले की तरह छोटा था। उनका मांसल बदन बिकनी फाड़ने को तैयार लग रहा था। रास्ते में मम्मी बोलीं कि रात में ऐसी ही सो गई। सुबह जाकर समझ आया कि रात में क्या हुआ।

मैं चुप रहा और समझ गया कि मम्मी सब जान गई हैं। सी बीच पर कोई नहीं था। चारों तरफ सुनसान था। इतना अकेलापन डर का कारण भी हो सकता है। कल की जोरदार बारिश से समंदर में पानी काफी जोर मार रहा था और रेत ज्यादा थी। जिससे पानी गंदा महसूस हो रहा था।

मम्मी बोलीं – चलो पत्थरों की ओर चलो। अंदर जाने में डूबने का डर रहेगा। हम उथले पानी में सीने तक डूबकर पत्थरों पर बैठ गए। लेकिन तेज लहरें हमें डुबाने की कोशिश करतीं और हम चिपककर फिर बैठ जाते। मम्मी से इतना चिपकने का मौका मैं खोना नहीं चाहता था। मौका मिलते ही उन्हें सीने से लगा लेता।

तभी एक बाइक आकर रुकी। उस पर एक अधेड़ आदमी उम्र 50 के आसपास और 25 साल की लड़की थी। दोनों के हाथ में शराब की बॉटल्स थीं। बिकनी और बरमूडा में थे। गाड़ी खड़ी करके पत्थरों के बीच आड़ में चूमा-चाट करने लगे।

यह देख मम्मी बोलीं कि हम चुपचाप पत्थरों के पीछे से वॉच करते हैं। यह लड़की उसकी बेटी की उम्र की लग रही है और इस बूढ़े को जवानी चढ़ी है। मजा आने वाला है आज। वो दोनों दारू पीते हुए बात करते रहे। बाद में बूढ़े ने लड़की के होंठ चूसने शुरू किए। धीरे से ब्रा निकाल दी और मस्ती करने लगा।

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लड़की जोर से हंसते हुए भागी और हमारी तरफ आने लगी। मम्मी बोलीं कि ऐसा दिखना कि हमने देखा ही नहीं। हम भी पानी में मस्ती करने लगे। वो लोग हमारी तरफ आ गए। लड़की ने दूध पर हाथ रखकर ब्रा पहनने की कोशिश की। आदमी मुस्कुराया और बोला – क्या आप भी जिंदगी का मजा उठा रहे हो।

मम्मी बोलीं – जी हां बिल्कुल। तभी पानी में एक बड़ी बॉल तैरकर आई। लड़की ने पकड़ ली और बोली आओ हमारे साथ खेलो। मम्मी के इशारे पर हम भी इंजॉय करने लगे। एक तरफ वो दोनों दूसरी तरफ हम मां-बेटे। मम्मी बॉल लेने के लिए झुकतीं तो वह आदमी उनके बूब्स घूरता। पीठ करतीं तो गांद घूरता।

एक घंटा मस्ती के बाद वो जाने लगे। उसने कहा कि आप किस होटल में रुके हो। मम्मी बोलीं ताज रिजॉर्ट्स में हैं और कल वापस चले जाएंगे। जब वो बाइक के पास गया तो मुझसे धीरे बोला कि मैंने पैसे देकर लड़की को किया है इसलिए ज्यादा नाटक कर रही है। लेकिन तू बच्चा होकर मस्त माल बटोर लाया है। तेरी बड़ी बहन लगती है क्या। ऐसी चीज पूरे गोवा बीच पर नहीं देखी यार।

मैंने सोचा क्या वाकई मम्मी इतनी सेक्सी हैं। कुछ देर बाद हम वापस लौट आए। मम्मी बोलीं कि चलो गेस्ट हाउस के पीछे स्विमिंग पूल में तैरकर रेत साफ कर लें। मैं बोला आप पूल में उतरो मैं तौलिए और कपड़े लेकर आता हूं।

जब तौलिए लेकर आया तो मम्मी ने बिकनी उतारकर पूल साइड पर रख दी थी और नंगी होकर मेरी तरफ पीठ करके पानी में खड़ी थीं। मैं चौंक गया। तभी फोन की घंटी बजी और मैं अंदर चला गया। फोन बहन का था। वो बोली कि कल सुबह पापा के साथ पहुंच जाएगी। आज पापा उसे स्विमिंग कॉस्ट्यूम्स दिलाएंगे।

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मैंने कहा पैसे मत बिगाड़ो यहां वॉर्डरोब भरे पड़े हैं। बस जल्दी आ जाओ। वो बोली हां पापा भी कह रहे थे जल्दी गोवा चलते हैं। अगले दिन लंच के समय पापा और बहन पहुंच गए। मम्मी ने घुटनों ऊपर का पतला स्कर्ट और टॉप पहना था। बहन टाइट व्हाइट टॉप और जीन्स में आई थी जिसमें उसके बड़े बूब्स साफ दिख रहे थे। गांद पर से फिगर कयामत ढा रही थी।

उसने बताया कि पापा ने ऐसे कपड़े दिलाए हैं कि यहां तो पहनने की हिम्मत नहीं होती। लंच के बाद हम चारों गेस्ट हाउस घूमे और पूल साइड पर गपशप की। पापा ने बताया कि यह गेस्ट हाउस उनके बॉस का है। केवल खास लोगों को देते हैं। किराए पर लिया तो फाइव स्टार होटल के बराबर पड़ता। फिर भी इतनी प्राइवेसी नहीं मिलती।

तेज हवाओं से मम्मी का स्कर्ट बार-बार उड़कर थाइस पर चढ़ रहा था। लेकिन मम्मी बेफिक्र अंदाज में सीधा करतीं। पापा कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दे रहे थे। शाम को हमने होटल में डिनर का प्लान बनाया। मम्मी ने काले रंग का बैकलेस ब्लाउज पहना जिसमें गोरी पीठ देखने वालों पर बिजली गिर रही थी। बहन ने लंबे कट वाला लॉन्ग स्कर्ट पहना था जिसमें सफेद जांघें बाहर आ रही थीं। कुर्सी पर बैठने पर पूरी दिख रही थीं।

ये ड्रेस वॉर्डरोब से मिली थीं और काफी कीमती थीं। शानदार लंच के बाद गोवा के नाइट स्पॉट्स घूमे। रात में मम्मी ने छोटी नाईटी पहन ली। बहन ने सिल्क का कुर्ता डाला जिसमें बोबे आकर्षक दिख रहे थे। टीवी देखते हुए बहन पैर ज्यादा फैलाकर बैठी थी। जांघें और पैंटी का साइड भाग दिख रहा था। पापा मम्मी की जांघों को दबाते हुए बहन को देख रहे थे।

अगली सुबह नजारा अलग था। पापा पहली बार स्विम कॉस्ट्यूम में थे। उनका तना हुआ लिंग अजीब लग रहा था। बहन और मम्मी ने छोटी बिकनी पहनी थी। पापा बोले कि सब खूब मजे करो। पता नहीं ये मौका दोबारा मिले या नहीं। हम चारों ने खूब मजे किए। फिर बीच पर गए और समंदर में काफी डीप तक तैरते रहे। पापा मम्मी और बहन की बिकनी खींच-खींचकर रेत पर घसीट रहे थे। जिससे उनके बूब्स बाहर निकलने को होते।

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काफी देर बाद पूल साइड आए। मम्मी ने कल की तरह बिकनी उतार फेंकी और पूल में कूद गईं। यह देख मैं अंदर चला गया। पीछे बहन अधनंगे चुत्तड़ हिलाती हुई आई और बोली तुम पागल हो जो शरमाते हो। मजे लूटो। ऐसे खुले विचारों वाले मां-बाप नहीं मिलेंगे। तुम्हारी जगह मैं होती तो कपड़े खोलकर नंगी कूद जाती।

कुछ देर बाद रूम से झांका तो मम्मी-पापा नंगे होकर पूल में मस्ती कर रहे थे। बहन खंबे की आड़ में देखकर अपनी चूत मसल रही थी। शाम को हम अधनंगे नाइट क्लब में घुसे। वहां शराब और शबाब का नंगा नाच हो रहा था। मेरा लंड फटने वाला था। पापा-मम्मी बोले कि जिसे जिसके साथ जोड़ी बनानी हो बना लो। कोई शर्म मत पालना।

इसके बाद मैं और बहन खूब नाचे। बहन ने स्पोर्ट्स ब्रा और मिनी स्कर्ट पहना था। बोली क्यों न बियर या वाइन टेस्ट करें। मैंने कहा ठीक है तू बियर पी मैं वाइन लाता हूं। नशा करने के बाद कान फोड़ू डिस्को साउंड में हम केवल औरत-मर्द महसूस कर रहे थे। खून का रिश्ता नहीं बचा था।

मैंने हदें तोड़ते हुए उसके शरीर के उभारों को जी भरकर छुआ और दबाया। वह बोली भाई अब मत रुको तोड़ दो सारी हदें और एक हो जाओ। मम्मी जीन्स और शर्ट में उत्तेजक डांस कर रही थीं। शर्ट के आधे बटन खुले थे। ब्रा और स्तन बाहर आने को बेताब थे। मम्मी के चारों ओर नशे में धुत्त लोगों का घेरा था। जो उनके शरीर को छूने-दबाने की कोशिश कर रहे थे।

उनमें वह आदमी भी था जो दो दिन पहले बीच पर मिला था। वो पागलों की तरह मम्मी के ब्रा में बंद कबूतरों को पकड़ने की कोशिश में था। पापा मुझे नहीं दिखे। खोजा तो एक 20-22 साल की लड़की के चक्कर में थे। उसके स्कर्ट में हाथ डालकर चुत्तड़ों पर चिकोटी काट रहे थे। पापा उसी लड़की के साथ रंग-रेलियां मना रहे थे।

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आधी रात के बाद रात पूरे शबाब पर थी। तेज म्यूजिक में मम्मी ने शर्ट हाथ में लेकर हिलाकर भद्दे स्टेप्स करने शुरू किए। बहन नशे में कोने के सोफे पर पैर चौड़े करके पैंटी दिखा रही थी। दो लड़के उसके पैरों में बैठकर पैंटी टच कर रहे थे। हम 4-5 बजे गेस्ट हाउस पहुंचे और मास्टर बेडरूम में घुस गए।

किसी को कपड़ों का ख्याल नहीं था। मम्मी हाथ में शर्ट लेकर घूम रही थीं। बहन ने स्कर्ट और जैकेट उतार फेंका। नशा कम हो रहा था लेकिन पापा बची दारू मुंह से लगाए थे। गर्मी लग रही थी इसलिए सारे कपड़े खोल दिए। पापा बहन को ब्रा-पैंटी में देखकर टूट पड़े। मम्मी ने मुझे ऊपर खींचकर लपेट लिया।

मैं मौका नहीं छोड़ने वाला था। कपड़े खोलकर मम्मी के ऊपर चढ़ गया। जीन्स उतारकर उनकी चिकनी चूत मुंह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगा। यह देख बहन ने पैंटी उतारी और पापा के मुंह पर बैठ गई। जैसे ही पापा ने चाटा वह आनंद से मूतने लगी। पापा जवान बेटी की चूत का सारा रस भरा मूत पी गए।

मम्मी दोनों हाथों से स्तनों को दबाती हुई बोलीं – बेटा यह हिम्मत दो दिन पहले क्यों नहीं की। मैं कब से तड़प रही थी। अब तक कितने दौर मार चुके होते। अगली सुबह 10 बजे मल्लिका बाई आई तो मम्मी ने बेडरूम छोड़कर बाकी गेस्ट हाउस साफ करवा लिया। क्योंकि बेडरूम में हम तीनों नंगे पड़े थे। पापा का लौड़ा बहन की चूत में खाली होकर लटक रहा था। बहन के दूध पर मेरा हाथ था।

दोपहर के भोजन के बाद हम बड़े बिस्तर पर एकत्रित हुए। इस बार बिना नशा के मैंने बहन को चोदा। मम्मी पापा से चुदवाने के बाद मेरे लंड को खड़ा करने के लिए चूसने लगीं। पापा बहन की छोटी चूत की फांकें चाट रहे थे। इस तरह हम अगले कुछ दिन गोवा में रहे। दिन में कई बार आपस में सेक्स का नंगा नाच करते। पूरे घर में नंगे नाचते रहते।

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घर वापस आने के बाद हम कभी अलग-अलग नहीं सोए। सभी कॉमन रूम में डबल किंग साइज बेड पर सोते हैं और मजे मारते हैं। अब घर में कपड़ों का खर्च कम हो गया है क्योंकि कपड़े केवल बाहर जाने के लिए पहनते हैं। घर में हमेशा नंगे रहते हैं। मम्मी पापा से एक बात कहती हैं कि जल्दी ऐसी ही कोई और ट्रिप का इंतजाम करो।

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