Chachi ki chudai sex story, Kitchen sex story: दोस्तों, मेरा नाम शिखर है और मैं 19 साल का हूं। दिखने में मैं ठीक-ठाक हूं, लेकिन बचपन से ही सेक्स की तरफ मेरा बहुत ज्यादा आकर्षण रहा है। मैंने बार-बार पड़ोस की आंटियों और लड़कियों के बूब्स और गांड को छिपकर देखा है। उनकी हर छोटी-बड़ी हरकतों का मजा लिया है। वो चुपके-चुपके देखना मुझे इतनी संतुष्टि देता था कि कई बार मैं घंटों उसी में खोया रहता था।
मैं पुणे में रहता हूं और मेरी एक चाची भी यहीं रहती हैं। वो किसी प्राइवेट कंपनी में जॉब करती हैं। चाची की उम्र लगभग 35 साल है। उनका कुछ साल पहले तलाक हो गया था। उनकी दो बेटियां हैं – बड़ी वाली अब 18 साल की है और छोटी भी 18 साल की हो चुकी है। दोनों कॉलेज में पढ़ रही हैं।
लेकिन चाची का फिगर तो दोनों बेटियों से कहीं ज्यादा जबरदस्त है। उनका माप 40-32-36 है। भरी-भरी गांड, उभरे हुए गोरे बूब्स – बस देखते ही मन ललचा जाता है। जब भी मैं उनके घर जाता, मेरी नजरें सबसे पहले उनके बूब्स पर टिक जातीं। वो क्लिवेज जो ब्लाउज से बाहर झांकता रहता, वो मुझे घंटों घूरने पर मजबूर कर देता। उनकी बड़ी बेटी का फिगर भी 36-28-34 है, गांड बाहर निकली हुई और आकर्षक है, लेकिन चाची का तो अलग ही लेवल था।
मैं उन्हें हमेशा सेक्सी नजरों से देखता रहता था, लेकिन चाची मुझे अपना बेटा मानती थीं। वो कभी मेरी इन हरकतों पर ध्यान नहीं देतीं। घर के काम में इतनी व्यस्त रहतीं कि मुझे मौका मिल जाता था अपनी आंखों से उन्हें अच्छे से निहारने का। मैं इसी बात का फायदा उठाकर उनकी हर हरकत को ध्यान से देखता रहता।
एक दिन मैं उनके घर पहुंचा तो पता चला वो उस दिन पूरी तरह अकेली हैं। बेटियां कॉलेज गई हुई थीं। चाची ने हल्की नीली सिल्की साड़ी पहनी थी। साड़ी इतनी पतली और चिपकी हुई थी कि उनकी बॉडी की हर लाइन साफ दिख रही थी। ब्लाउज छोटा था और गला काफी गहरा था। जैसे ही वो मुड़ीं, बूब्स के बीच की गहरी लकीर साफ नजर आई। वो गोरी गहराई मुझे अपनी ओर खींच रही थी। मैं उसमें खो गया। लगातार घूरता रहा, मन ही मन कल्पना करता रहा कि अगर मैं इन बूब्स को हाथों से दबाऊं तो कितना मजा आएगा। मेरी सांसें तेज हो गईं, दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।
चाची ने मुझे सोफे पर बैठने को कहा और पूछा, “चाय पियोगे?” मैंने तुरंत हां कर दी। वो मुस्कुराकर किचन की तरफ चली गईं। उनकी साड़ी की सिल्की आवाज और गांड की हल्की-हल्की मटक देखकर मेरा मन और बेकाबू हो रहा था। मैं बेडरूम में चला गया, बेड पर जाकर बैठ गया और टीवी ऑन कर लिया। लेकिन मेरी आंखें टीवी पर नहीं, बस चाची के आने का इंतजार कर रही थीं।
कुछ देर बाद चाची चाय का कप लेकर आईं। वो टीवी पर चल रहे गाने में खोई हुई लग रही थीं। उनका ध्यान गाने पर था। मैंने जानबूझकर कप पकड़ने की कोशिश नहीं की। जैसे ही वो मेरे सामने झुकीं और कप आगे बढ़ाया, मैंने हाथ नहीं बढ़ाया। गरम चाय सीधे मेरी जांघ पर गिर गई।
चाची घबरा गईं और उनके चेहरे पर डर और पछतावा साफ दिख रहा था। वो तेज आवाज में बोलीं, “अरे ओह भगवान! ये क्या हो गया? गरम चाय तुम्हारी जांघ पर गिर गई… सॉरी बेटा, मेरा ध्यान कहीं और था। रुको, मैं अभी कुछ करती हूं, जल्दी से ठीक कर देती हूं।” उनकी आवाज कांप रही थी, आंखें बड़ी-बड़ी हो गई थीं। वो डर के मारे तेजी से किचन की तरफ भागीं, जैसे कोई बड़ा हादसा हो गया हो।
कुछ सेकंड बाद वो पानी की बोतल लेकर लौटीं। बोतल का ढक्कन खोलकर ठंडा पानी मेरी जांघ पर डालने लगीं। पानी की ठंडक से जांघ पर लगी चाय की जलन थोड़ी कम हुई, लेकिन मेरी सांसें अभी भी तेज थीं – इस बार दर्द से नहीं, बल्कि उत्तेजना से। वो झुककर पानी पोंछने लगीं, लेकिन आसपास कोई कपड़ा नहीं दिखा। बिना सोचे उन्होंने अपनी साड़ी का पल्लू थोड़ा सा हटाया और उसी से मेरी जांघ को साफ करने लगीं।
पल्लू हटते ही उनके 40 साइज के बड़े-बड़े बूब्स आधे से ज्यादा बाहर आ गए। ब्लाउज का गहरा गला और ढीला हो चुका था। वो थोड़ा और झुकीं तो उनके दोनों गोरे, भारी पपीते जैसे बूब्स मेरे घुटनों पर पूरी तरह दब गए। उनकी मुलायम गरमी और वजन महसूस हो रहा था। मेरी जांघों के बीच मेरा लंड फटाफट सख्त हो गया, पैंट के अंदर तनकर उभर आया।
पानी पोंछते वक्त उनका हाथ बार-बार मेरे लंड पर लग रहा था। पहले तो अनजाने में, लेकिन फिर वो जानबूझकर पैंट के ऊपर से ही उसे रगड़ने-साफ करने लगीं। उनकी हथेली गरम थी, दबाव बढ़ता जा रहा था। उनके बूब्स मेरे घुटनों पर और जोर से दब रहे थे, जैसे वो खुद को मेरे करीब लाना चाह रही हों। उनकी सांसें भी अब तेज हो चुकी थीं, होंठ हल्के से कांप रहे थे।
मुझसे अब काबू बाहर हो चुका था। मैंने दोनों हाथों से उनकी कमर पकड़ी, उन्हें अपनी ओर खींचा और उनके रसभरे गुलाबी होंठों पर जोर से होंठ रख दिए। किस इतना गहरा था कि हमारी सांसें एक हो गईं। मैं जोश में उनके निचले होंठ को चूस रहा था, जीभ अंदर डालकर उनकी जीभ से खेल रहा था। उनका हाथ अभी भी मेरे लंड पर था, अब वो पैंट के ऊपर से ही उसे सहला रही थीं। मेरे घुटने उनके बूब्स को लगातार दबा रहे थे, निप्पल्स सख्त होकर ब्लाउज से महसूस हो रहे थे।
हम 8-10 मिनट तक ऐसे ही चूमते रहे। बीच-बीच में मैं उनका थूक चाटता, वो मेरा। होंठ पूरी तरह गीले और लाल हो गए थे। उनकी सांसें गरम-गरम मेरे मुंह में आ रही थीं। जब आखिरकार मैंने होंठ छोड़े तो उनकी आंखें पूरी तरह नशे में डूबी हुई थीं।
तब तक उन्होंने मेरी पैंट की जिप खोल दी थी और लंड बाहर निकाल लिया था। वो अब मेरे सामने घुटनों के बल बैठ गईं, जबकि मैं बेड के किनारे पर बैठा हुआ था, पैर नीचे लटक रहे थे। उनकी साड़ी अभी भी पूरी तरह पहनी हुई थी, सिर्फ ब्लाउज के हुक खुल चुके थे और बूब्स बाहर लटक रहे थे।
उन्होंने मेरे 6 इंच के सख्त लंड को दोनों हाथों से पकड़ा, पहले धीरे से सहलाया, फिर मुंह के पास ले जाकर जीभ से सुपाड़े को चाटा। फिर धीरे-धीरे लंड को मुंह में लिया। पहले सिर्फ सिरा, फिर आधी लंबाई, और फिर गहराई तक। ग्ग्ग्ग… गी… गों… गोग… जैसी गले से आने वाली आवाजें निकल रही थीं। लंड गले तक जा रहा था, वो डीपथ्रोट कर रही थीं।
मैं आह्ह्ह… उफ्फ्फ… आह्ह… कर रहा था, मेरी कमर खुद-ब-खुद ऊपर उठ रही थी। चूंकि वो घुटनों पर बैठी थीं और मैं बेड पर बैठा था, उनके बड़े बूब्स मेरे जांघों के ऊपर और घुटनों के पास दब रहे थे। हर बार जब वो आगे झुकतीं और लंड को गले तक ले जातीं, उनके भारी बूब्स मेरी जांघों पर जोर से दबते और रगड़ते। मैंने अपने दोनों हाथ नीचे करके उनके बूब्स को पकड़ लिया।
मैंने दोनों बूब्स को जोर से मसला, निचोड़ा, निप्पल्स को अंगूठे से दबाया। वो सिहर रही थीं, लेकिन मुंह से लंड नहीं निकाला। उनकी चूसने की रिदम और तेज हो गई। मैं उनके बूब्स को दबाता रहा, कभी हल्के से थपथपाता, कभी जोर से निचोड़ता। उनके निप्पल्स मेरी हथेलियों में कड़े होकर दब रहे थे। वो हर बार आगे झुकने पर बूब्स मेरी जांघों पर और ज्यादा दबाव डाल रही थीं, जैसे वो खुद को मेरे शरीर से चिपकाना चाह रही हों।
वो 15-20 मिनट तक लॉलीपॉप की तरह चूसती रहीं। जीभ से पूरी लंबाई चाटतीं, सुपाड़े को घुमाकर चूसतीं, दांतों से हल्का-हल्का काटतीं, फिर पूरी लंबाई मुंह में लेतीं। उनकी लार लंड पर बह रही थी, चमकदार और गीला हो गया था। मैं उनके बालों में हाथ फेर रहा था, हल्का सा दबाव डाल रहा था ताकि वो और गहराई तक ले जाएं।
फिर मैंने उनके ब्लाउज को पूरी तरह खोल दिया (हुक पहले से खुले थे) और दोनों बूब्स को पूरी तरह बाहर निकाल लिया। गोरे, मुलायम, इतने भारी कि मेरे दोनों हाथों में भी पूरी तरह नहीं समा रहे थे। हल्के भूरे निप्पल्स पूरी तरह तने हुए थे। मैंने दोनों हाथों से जोर-जोर से मसला, निचोड़ा। वो सिहर रही थीं, उनकी आंखें बंद हो गईं।
उन्होंने मेरे लंड को दांतों से और हल्का काटा, जैसे बदला ले रही हों। मैंने एक निप्पल को अंगूठे और तर्जनी से दबाया, जोर से मसला तो उनके मुंह से चीख निकली, “आह्ह्ह…!” लेकिन लंड मुंह से नहीं निकाला। वो और गरम हो गईं। मेरे होंठों को चूमने के लिए थोड़ा ऊपर उठीं, होंठ काटा, फिर वापस लंड मुंह में लेकर और जोर से चूसने लगीं।
बीच में रुककर बोलीं, “हां मेरे राजा… जोर से… उफ्फ्फ… वाह क्या मजा आ रहा है… इन बूब्स को पूरा निचोड़ो… रस पी जाओ… मैं कब से तरस रही थी इस पल के लिए।”
मैंने और जोर से दबाया, निप्पल्स को मसलता रहा। वो कहती रहीं, “आह्ह… और जोर से… तुम तो कमाल हो… इतने दिन कहां छुपे थे?” उनकी आवाज में अब सिर्फ कामुकता थी, कोई झिझक नहीं।
कुछ देर बाद मेरा वीर्य उनके मुंह में फूट पड़ा। गरम-गरम धार निकली, वो उसे पूरी तरह निगल गईं। लंड को चाटती रहीं, चमका दिया। मैं थककर बेड पर लेट गया। उन्होंने मेरे सारे कपड़े उतारे – शर्ट, पैंट, अंडरवियर सब। अब मैं पूरी तरह नंगा था। वो मेरे बदन पर किस करने लगीं – छाती पर, पेट पर, निप्पल्स पर। उनकी साड़ी अभी भी पूरी तरह पहनी हुई थी, सिर्फ ब्लाउज खुला था और बूब्स बाहर लटक रहे थे।
मैं उठ खड़ा हुआ। उनका ब्लाउज पहले से ही खुला हुआ था, मैंने उसे पूरी तरह खींचकर उतार फेंका। काली सिल्की ब्रा अभी भी उनके बूब्स को ढके हुए थी। मैंने ब्रा के हुक पीछे से खोले और उसे धीरे से कंधों से सरकाकर उतार दिया। अब उनके गोरे, भारी 40 साइज के बूब्स पूरी तरह आजाद थे, हल्के से लहरा रहे थे। फिर मैंने उनकी साड़ी का पल्लू खींचा, धीरे-धीरे साड़ी को खोलते हुए पेटीकोट की नाड़ी खींची। साड़ी फर्श पर गिर गई, पेटीकोट भी उतार दिया। अब वो पूरी तरह नंगी थीं। उनका गोरा, चिकना बदन मेरी आंखों के सामने था – उभरे हुए बूब्स, पतली कमर, भरी-भरी गांड और बीच में वो गीली, तड़पती चूत। देखते ही मेरी लार टपकने लगी, लंड फिर से सख्त हो गया।
मैंने उन्हें बेड पर लिटाया और चूमना-चाटना शुरू कर दिया। पहले उनके होंठों पर, फिर गर्दन पर, कंधों पर। मेरी जीभ उनके निप्पल्स पर घूमी, मैंने उन्हें मुंह में लेकर चूसा। वो सिहर रही थीं। फिर मैं उठा और फ्रिज से एक बड़ा बर्फ का टुकड़ा लाया। मैंने उसे उनके बदन पर फेरना शुरू किया – पहले छाती पर, बूब्स के चारों ओर। ठंडक से उनके निप्पल्स और भी सख्त हो गए। मैंने बर्फ को निप्पल्स पर रगड़ा, हल्के से दबाया। वो कराह उठीं।
फिर मैंने बर्फ को नीचे ले जाकर उनकी चूत पर लगाया। ठंडा टुकड़ा उनकी गर्म, गीली चूत पर रखा तो वो तड़प उठीं। “आह्ह्ह… उफ्फ्फ… ये क्या कर रहे हो… ऊईई… मां… जान निकाल दोगे… तुम तो बहुत कुछ जानते हो।” उनकी गांड ऊपर-नीचे होने लगी, जैसे वो ठंडक और गरमी के मेल से पागल हो रही हों। मैंने बर्फ को चूत के होंठों पर रगड़ा, फिर धीरे से छेद पर दबाया। अचानक बर्फ का टुकड़ा उनकी गीली चूत में फिसलकर अंदर चला गया।
वो उछल पड़ीं, “उह्ह्ह… आह्ह्ह… मर गई… जल्दी बाहर निकालो!” उनकी आवाज में दर्द और मजा दोनों थे। मैंने अपनी उंगली उनकी चूत में डाली, बर्फ को बाहर निकालने की कोशिश की। लेकिन वो बोलीं, “नहीं… रहने दो… अब बहुत अच्छा लग रहा है… ठंडक और गरमी का मेल… आह्ह…” उनकी आंखें बंद हो गईं, होंठ काट रही थीं।
मैंने बर्फ को अंदर रहने दिया और उनकी चूत चाटने लगा। जीभ से चूत के होंठ चाटे, क्लिटोरिस पर घुमाई। बर्फ धीरे-धीरे पिघल रहा था, ठंडा पानी और उनकी चूत का रस मिलकर बह रहा था। मैंने वो खट्टा-ठंडा मिश्रण चाटा, जीभ अंदर डालकर चूसा। स्वाद कमाल का था – ठंडक, नमकीन और मीठा।
वो चीख रही थीं, “उफ्फ्फ… आह्ह… हां मादरचोद… मेरी चूत खा जा… पूरी जीभ डाल… चूस ले… ओह्ह… इह्ह… चोद दे इसे… आह्ह्ह…!” मैंने दांतों से हल्का काटा क्लिटोरिस पर, जीभ तेजी से घुमाई। मेरे दोनों हाथ उनके 40 साइज के बूब्स पर थे, जोर-जोर से मसल रहा था। बूब्स लाल हो गए, निप्पल्स सूज गए। अचानक उनके बूब्स से दूध की पतली धार निकलने लगी।
फिर उन्होंने मुझे अपनी ओर खींचा और लिटाया। “चल राजा… मेरा दूध पी ले।” मैंने उनके बूब्स मुंह में लिए, जोर से चूसा। दूध मीठा-गरम था, मुंह में भर गया। मैं 15 मिनट तक एक-एक करके दोनों बूब्स चूसता रहा, दूध पीता रहा। वो मेरे सिर को दबा रही थीं, “हां… और जोर से… पूरा पी जा…”
फिर मैंने उन्हें कुत्ते स्टाइल में बिठाया। उनकी गांड ऊपर थी, मैंने ड्रेसिंग टेबल से मक्खन की डिब्बी ली और ढेर सारा मक्खन उनकी गांड के छेद पर लगाया। उंगली से अंदर तक फैलाया। फिर अपना 6 इंच का मोटा लंड गांड के छेद पर रखा और जोर से धकेला।
वो चीखीं, “उफ्फ्फ… आह्ह्ह… दर्द हो रहा है… बाहर निकालो… मैं मर जाऊंगी… प्लीज!” उनकी गांड टाइट थी, लेकिन मक्खन की वजह से धीरे-धीरे अंदर गया। मैं रुका नहीं, धक्के मारने लगा। पहले धीमे, फिर तेज। थोड़ी देर बाद दर्द कम हुआ, उन्हें मजा आने लगा। वो गांड पीछे करके मिलने लगी, “आह्ह… अब अच्छा लग रहा है… जोर से…” 10 मिनट बाद मैंने गांड के अंदर ही वीर्य छोड़ दिया। लंड बाहर आया तो उन्होंने मुंह में लेकर चाटकर साफ किया, जीभ से हर बूंद चाट ली।
हम किचन में चले गए। थोड़ा जूस और पानी पिया। मेरी नजर बेलन पर पड़ी। मैंने उसे उठाया, उनकी अभी भी गीली चूत पर रगड़ा और धीरे से अंदर धकेल दिया। वो सिहर उठीं, “ये बेलन छोटा है… अब अपना मोटा लंड डालो… मेरी चूत की प्यास बुझाओ… सालों से जल रही हूं… ठंडा कर दो इसे।”
मैंने उन्हें किचन के फर्श पर लिटाया। दोनों पैर अपने कंधों पर रखे। लंड चूत के मुंह पर रखा, पहले धीरे से अंदर लिया। उनकी गरम-गीली चूत ने लंड को कसकर निचोड़ा। फिर जोर-जोर से धक्के मारे। वो चीखीं, “मादरचोद… जोर से… फाड़ दो मेरी चूत… आह्ह… ओह्ह… इह्ह… मर गई… और तेज…!”
लंड पूरी तरह अंदर-बाहर हो रहा था, चूत का रस बहकर फर्श पर गिर रहा था। मैंने स्पीड बढ़ाई, उनके बूब्स उछल रहे थे। मैंने हाथ बढ़ाकर उन्हें मसला, निप्पल्स दबाए। वो तड़प रही थीं, “हां… ऐसे ही… चोदो मुझे… मेरी चूत फाड़ दो… आह्ह… ऊईई…!” 8-10 मिनट बाद मैंने कहा, “झड़ने वाला हूं… कहां डालूं?”
बोलीं, “अंदर ही… चूत में भर दो… अपना गरम माल डालो!” मैंने जोर से अंतिम धक्का मारा और चूत के अंदर फव्वारा छोड़ दिया। गरम वीर्य उनकी चूत में भर गया। मैं उनके ऊपर लेट गया, धीरे-धीरे उनके बूब्स चूसता रहा। वो संतुष्ट मुस्कुरा रही थीं, मेरे बाल सहला रही थीं।
कुछ घंटे बाद बच्चों के आने से पहले मैंने उन्हें फिर से चोदा। हर बार वो पूरा साथ देतीं, जोश में आकर चीखतीं-कराहतीं। अब मौका मिलते ही मैं उन्हें चोदता हूं, खूब मजे लेता हूं।
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