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मामी ने पीठ पे साबुन लगाया

Mami sex story, aunt nephew sex story, Bathroom sex story: मेरा नाम भरत कुमार है। मैं उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूं। मैं 22 साल का हूं और सिंगल हूं। मेरा लंड 7 इंच लंबा और 2 इंच मोटा है, जिसे देखकर किसी के भी मुंह में पानी आ जाए।

गर्मी की छुट्टियां हो गई थीं, इसलिए मैंने नानी के यहां जाने का प्लान बनाया। अगले ही दिन अपना सामान पैक किया और नानी के घर पहुंच गया। शाम को करीब 7 बजे मैं वहां पहुंचा। मैंने बेल बजाई, तो दरवाजा एक खूबसूरत औरत ने खोला। उसके 36 साइज के भरे-भरे बूब्स, गोरी चिट्टी रंगत, गदराया हुआ मुलायम बदन, मस्तानी चाल और चेहरे पर हंसी भरे रसीले होंठ देखकर मैं एकदम पागल हो गया। यार, वो मेरी मामी थी।

मस्त माल है मेरी मामी। मेरा सारा रास्ते का थकान एक झटके में खत्म हो गया, उनकी मटकती कमर और झूमते हुए गोल-मटोल चूतड़ को देखकर। मैंने सबको बारी-बारी प्रणाम किया और सोफे पर बैठ गया। मामी ने चाय और बिस्कुट लाकर दिए। मैंने चाय पीते हुए नानी जी से बातचीत शुरू की, लेकिन मेरी नजर बार-बार मामी पर ही जा रही थी। वो रसोई में खाना बना रही थीं और बार-बार आ जा रही थीं। हर बार उनकी मुस्कुराहट मेरे दिल में कुछ हलचल मचा रही थी, जैसे हृदय के कमल खिल रहे हों।

मैंने हिम्मत करके मामी से पूछा, “मामी जी, मामा जी कब आते हैं घर पे?” वो हल्के से मुस्कुराईं और बोलीं, “उनका कुछ पता नहीं भरत। वो आजकल बहुत बिजी रहते हैं। कभी-कभी तो आते ही नहीं, क्योंकि ऑफिस में ही सोने की जगह है।”

उनकी आवाज में हल्की सी उदासी थी, लेकिन चेहरे पर वही आकर्षक मुस्कान बनी हुई थी। तभी बाहर बेल बज गई। मामा जी आ गए। मैंने जल्दी से उठकर उन्हें भी प्रणाम किया। मामा जी थके हुए लग रहे थे। उन्होंने मामी से कहा, “जल्दी खाना दे दो, मुझे अभी सूरत के लिए निकलना है। जरूरी काम आ गया है।”

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मामा जी ने जल्दी-जल्दी खाना खाया और बिना ज्यादा बात किए चले गए। अब घर में सिर्फ नानी जी, मामी और मैं रह गए। मैं खाने की मेज पर बैठ गया। मामी रोटी सेंककर ला रही थीं। हर बार जब वो झुककर रोटी मेरी थाली में रखतीं, तो उनके ब्लाउज के गले से बड़े-बड़े गोरे बूब्स झांकते नजर आते। वो इतने टाइट और सुडौल थे कि ब्लाउज उन्हें मुश्किल से समेट पा रहा था। मेरी नजर बार-बार वहीं टिक जाती।

मामी ने आखिरकार भांप लिया। इस बार वो रोटी देते हुए करीब आईं, मुस्कुराईं और धीरे से बोलीं, “क्या देख रहे हो भरत?”

मैं घबरा गया। मन ही मन सोचा, मैं तो तुम्हारी चूचियां देख रहा हूं मामी जी। क्या मामा जी इन्हें दबाते नहीं हैं? ये तो एकदम टाइट और भरी हुई हैं, जैसे किसी ने हाथ नहीं लगाया हो। लेकिन मुंह से बस इतना निकला, “नहीं नहीं मामी जी, कुछ भी नहीं। बस यू ही। आज आप बड़े ही सुंदर लग रही हो।”

मामी हल्के से हंसीं। उनकी हंसी में शरारत थी। वो बोलीं, “अच्छा जी? शुक्रिया।” और फिर रसोई की तरफ चली गईं। लेकिन जाते वक्त उन्होंने पीछे मुड़कर एक नजर मुझे देखा, जैसे कह रही हों कि मैं सब समझ रही हूं।

नानी जी जल्दी ही सो जाती हैं। काफी गर्मी थी, पंखा भी पूरा स्पीड पर चल रहा था पर पसीना रुक नहीं रहा था। मामी जी ने अपनी साड़ी का पल्लू ठीक किया और बोलीं, “मैं नहा लेती हूं भरत, तब तक तुम मूवी देख लो। कोई अच्छी मूवी लगा लो।” मैंने हां में सिर हिलाया और टीवी ऑन करके कोई पुरानी बॉलीवुड मूवी लगा ली।

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मैं सोफे पर लेटकर मूवी देख रहा था, लेकिन दिमाग में बस मामी का चेहरा और वो मटकती चाल घूम रही थी। तभी बाथरूम से मामी की आवाज आई, “भरत… भरत…” मैं तुरंत उठा और बाथरूम के दरवाजे के पास पहुंच गया। पूछा, “हां जी मामी जी, क्या हुआ?”

वो अंदर से बोलीं, “अरे थोड़ा पीठ पे साबुन लगा देना ना। मेरी पीठ तक हाथ नहीं पहुंच रहा।” मेरे दिल की धड़कन एकदम तेज हो गई। मैंने धीरे से दरवाजा खोला। अंदर मामी खड़ी थीं, नीचे सिर्फ पेटीकोट पहने हुए, ऊपर दोनों बड़े-बड़े बूब्स को एक छोटे से तौलिए से ढक रखा था। तौलिया इतना छोटा था कि मुश्किल से दोनों को कवर कर पा रहा था। पानी से भीगी उनकी गोरी त्वचा चमक रही थी, खुले बाल गीले-गीले कंधों पर लिपटे हुए थे। क्या बताऊं दोस्तों, वो इतनी हॉट लग रही थीं कि मेरी सांसें रुक गईं।

मैं अंदर चला गया। मामी ने पीठ मेरी तरफ कर ली। मैंने साबुन हाथ में लिया और उनकी पीठ पर लगाना शुरू किया। उनकी त्वचा इतनी मुलायम थी कि हाथ फिसल रहा था। जैसे ही मैंने पीठ पर हाथ फेरा, मामी ने हल्के से सिहरकर कहा, “हां ऐसे ही… अच्छे से लगाओ।” मैं ऊपर से नीचे तक साबुन फैला रहा था, लेकिन मेरा लंड अब पूरी तरह खड़ा हो चुका था। पैंट में इतना दबाव पड़ रहा था कि दर्द होने लगा। मैं मन ही मन सोच रहा था, काश ये तौलिया गिर जाए।

मामी ने शायद मेरी सांसें तेज होने का अहसास कर लिया। वो हल्के से मुड़ीं और बोलीं, “क्या हुआ भरत? हाथ क्यों कांप रहे हैं?” मैं घबरा गया और बोला, “कुछ नहीं मामी जी, बस गर्मी है।” किसी तरह मैंने पीठ पर साबुन लगा दिया और जल्दी से बाहर निकल आया। लेकिन अब मेरे दिमाग में बस उनका गीला बदन, वो तौलिए के नीचे छिपे बूब्स और मुलायम पीठ नाच रही थी। लंड बार-बार खड़ा हो रहा था, मैं बार-बार ठीक कर रहा था।

कुछ देर बाद मामी नहाकर बाहर आईं। उन्होंने एक पतली सिल्क की नाइटी पहन रखी थी, जो बॉडी पर चिपकी हुई थी। अंदर ब्रा नहीं थी, इसलिए उनके 36 साइज के बूब्स आजाद थे और हर कदम के साथ हिल रहे थे। निप्पल्स की हल्की आउटलाइन साफ दिख रही थी। खुले गीले बाल कंधों पर फैले हुए थे, हल्की लिपस्टिक लगाई थी और टेम्पटेशन का डियोडोरेंट लगाकर आई थीं। कमरे में उनकी महक फैल गई। मैं तो देखते ही रह गया, मुंह खुला का खुला।

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मामी मेरे पास आईं और बोलीं, “भरत, आज तो मामा जी नहीं हैं। मुझे अकेले डर लगता है। क्या तुम मेरे कमरे में सोओगे?” मुझे लगा जैसे लॉटरी लग गई हो। मैंने तुरंत कहा, “जैसी आपकी इच्छा मामी जी।” मेरा दिल बाग-बाग हो गया। हम दोनों उनके कमरे में चले गए। एक ही बेड पर लेट गए। टीवी ऑन था, मैं चैनल बदल रहा था। मामी की दोनों चूचियां गुम्बद की तरह ऊपर उठी हुई थीं, नाइटी का पतला कपड़ा उन्हें मुश्किल से ढक पा रहा था। भीनी-भीनी खुशबू आ रही थी, जो मुझे और पागल कर रही थी।

चैनल बदलते-बदलते एक इंग्लिश चैनल पर हॉट किसिंग सीन आ गया। एक लड़का-लड़की गहरी किस कर रहे थे, हाथ एक-दूसरे के बदन पर फिरा रहे थे। मामी ने चैनल नहीं बदला, बल्कि रुककर देखने लगीं। फिर बोलीं, “भरत, कोई गर्लफ्रेंड है?” मैंने कहा, “नहीं मामी जी।” तो बोलीं, “कभी किसी को किस किया हुआ?” मैंने शरमाते हुए कहा, “नहीं।”

वो हंस पड़ीं और बोलीं, “अरे बेकार लड़के हो यार आजकल के। कोई भी लड़का ऐसा नहीं जो ये सब न किया हो। कोई जरूरी नहीं गर्लफ्रेंड हो तभी ये होता है। तुम किसी को भी पटाकर कर सकते हो।”

मैंने हिम्मत जुटाई और बोला, “तो क्या मैं आपको भी पट सकता हूं?” मामी मेरी तरफ मुड़ीं, आंखों में शरारत थी। बोलीं, “चल बेवकूफ, बोल के थोड़े पटाया जाता है। और मेरे में है क्या जो मुझे पटाओगे? मैं तो शादीशुदा हूं। कोई टंच माल को पटाओ।”

मैंने तुरंत कहा, “आप तो सबसे टंच हो मामी जी। बाकी सभी लड़कियां आपके सामने फेल हैं।”

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मामी ने मेरी तरफ देखा, हल्के से मुस्कुराईं। फिर धीरे से बोलीं, “अच्छा? तो बताओ ना, क्या-क्या करना चाहते हो मुझे पटाकर?” मैं थोड़ा हिचकिचाया, लेकिन बोला, “जो आप कहेंगी वही।” वो करीब आईं, मेरे कान में फुसफुसाईं, “तो पहले तो ये बताओ… तुम्हारा वो कितना बड़ा है?”

मैंने हंसते हुए कहा, “आप खुद ही नाप लो ना।” मामी ने मेरी तरफ देखा, आंखों में चमक थी। फिर धीरे से अपना हाथ मेरी पैंट पर रख दिया। मेरे लंड को बाहर से महसूस किया और बोली, “हे भगवान… ये तो खुटा है यार। लंड और इतना बड़ा? मैं तो पागल हो जाऊंगी अगर ये मेरे अंदर चला गया तो।”

उनकी बात सुनकर मेरा जोश और बढ़ गया। मामी ने मेरे होंठों पर अपने रसीले होंठ रख दिए। मैंने भी उन्हें जोर से किस करना शुरू कर दिया। हमारी जीभें एक-दूसरे से खेल रही थीं। मेरे हाथ उनके बूब्स पर गए, नाइटी के ऊपर से मसलने लगा। वो इतने नरम और भरे हुए थे कि हाथ में समा नहीं रहे थे। मामी सिसकारीं भर रही थीं, “ह्म्म… भरत… ऐसे ही…”

मैंने उसी वक्त उनके रसीले होंठ चूसना शुरू कर दिए। इतने मुलायम और मीठे होंठ मैंने अपनी पूरी जिंदगी में नहीं देखे थे। मामी भी मुझे पूरा रेस्पॉन्स दे रही थीं, उनकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी, जैसे सालों से भूखी हों। हर किस के साथ उनका मुंह मेरे मुंह में घुल रहा था। ये देखकर मुझमें और जोश भर गया। मैंने उनके बूब्स पर हाथ रखे और जोर-जोर से मसलने लगा। नाइटी के पतले कपड़े के ऊपर से भी वो इतने भरे हुए और टाइट लग रहे थे कि मेरे हाथों में समा नहीं रहे थे। मैंने निप्पल्स को अंगूठे से दबाया, मामी की सिसकारी निकल गई, “ह्म्म… भरत… आह…”

इतने में मामी ने मेरे होंठों से मुंह हटाया और गर्म सांसों के साथ बोलीं, “होंठ और चूच ही दबाएगा कि और भी कुछ करेगा?” उनकी आंखों में शरारत और भूख साफ दिख रही थी। ओह्ह, ये सुनते ही मेरे अंदर आग लग गई। मैंने तुरंत उनकी सिल्क नाइटी को कमर तक ऊपर खींच दिया। नीचे ब्लैक कलर की पतली पैंटी थी, जो उनकी चूत पर चिपकी हुई थी और गीली हो चुकी थी। मैंने पैंटी को धीरे से नीचे सरका दिया, वो खुद टांगें उठाकर उतरवा रही थीं।

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मैंने उनकी ब्लैक पैंटी को नाक के पास लगाया और गहराई से सूंघा। उनकी चूत की वो मादक, थोड़ी नमकीन-मीठी महक इतनी तेज थी कि पूरा दिमाग चकरा गया। जैसे कोई नशा हो गया हो। मामी ने मेरी तरफ देखकर हंसते हुए कहा, “इसको क्यों सूंघ रहा था बेवकूफ? असली चूत तो तेरे सामने खुली पड़ी है।” उनकी आवाज में शरारत और गर्मी दोनों थी।

मैंने तुरंत उनका मुंह चूम लिया, गहरा किस किया, जीभ अंदर डालकर उनकी जीभ से खेला। फिर धीरे-धीरे नीचे सरक गया। उनकी चूत बिल्कुल साफ थी, कोई बाल नहीं, हल्के गुलाबी होंठों वाली, क्लिट थोड़ी बाहर निकली हुई और सूजी हुई। वो पहले से ही गीली हो चुकी थी, चमक रही थी। मैंने पहले बाहर से जीभ फेरी, पूरे होंठों पर, फिर धीरे से होंठों को अलग किया और क्लिट को जीभ की नोक से छुआ। मामी एक झटके से सिहर गईं।

वो पागल सी हो गईं, कमर उठा-उठाकर मेरे मुंह पर दबा रही थीं। सिसकारियां निकलने लगीं, “आह… भरत… चाट डालो… पूरी चूत चाटो… हां… तुम्हारी ही है ये… तुम्हारे मामा से तो कुछ नहीं होता लाइफ में… आह्ह… बस चाटते रहो…” उनकी आवाज कांप रही थी, हाथ मेरे बालों में फंस गए थे, हल्का खींच रही थीं।

ये सुनकर मेरा जोश दोगुना हो गया। मैंने जीभ तेज-तेज चलानी शुरू की, क्लिट को चूसने लगा जैसे कोई मीठा लॉलीपॉप हो। जीभ को गोल-गोल घुमाता, कभी तेज चाटता, कभी हल्का काटता। मामी की सिसकारियां और तेज हो गईं, “ओह्ह… भरत… और जोर से… आह्ह… ऊह्ह… हां ऐसे ही… क्लिट को चूसो… मत छोड़ना… आह्ह…” वो कमर उठाकर मेरे मुंह से पूरी चिपक गईं, जैसे और गहरा चाह रही हों।

मैंने दो उंगलियां उनकी गीली चूत में डाल दीं। अंदर गर्म और नरम था, रस से भरा हुआ। उंगलियां तेज-तेज अंदर-बाहर करने लगा, जीभ क्लिट पर रखी रही। हर बार उंगलियां अंदर जातीं तो चूत से चिपचिपी आवाज आती, रस मेरे मुंह पर टपक रहा था। मामी अब जोर-जोर से कराह रही थीं, “आह्ह… भरत… उंगलियां और तेज… क्लिट चूसो… ओह्ह… मैं पागल हो रही हूं… हां… ऐसे ही…” उनकी टांगें मेरे कंधों पर कस गईं, शरीर कांपने लगा।

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मैंने उंगलियों की स्पीड और बढ़ा दी, जीभ से क्लिट को तेज रगड़ा। मामी का पूरा शरीर तन गया, सांसें रुक-रुक कर आने लगीं। अचानक वो जोर से चिल्लाईं, “आआआह्ह… भरत… मैं झड़ रही हूं… ले लो… सब ले लो…” उनका रस मेरे मुंह में भर गया, गर्म-गर्म, मीठा। टांगें कांप रही थीं, कमर ऊपर उठी हुई थी। मैंने सब चाट लिया, जीभ से हर बूंद साफ की, एक भी नहीं छोड़ी। मामी धीरे-धीरे सांस लेने लगीं, आंखें बंद, चेहरा लाल, मुस्कुराहट के साथ बोलीं, “वाह भरत… इतना मजा कभी नहीं आया…”

मामी थोड़ी देर तक सांस लेती रहीं, छाती ऊपर-नीचे हो रही थी, चेहरा पसीने और संतुष्टि से चमक रहा था। फिर धीरे से मेरी तरफ मुड़ीं, आंखों में अभी भी वो भूख बाकी थी। मुस्कुराईं और बोलीं, “वाह भरत… इतना अच्छा किया तूने… अब तेरी बारी है।”

मैंने तुरंत पैंट और अंडरवियर उतार दिया। मेरा 7 इंच लंबा, 2 इंच मोटा लंड पूरी तरह खड़ा था, नसें फूली हुईं, टिप चमक रही थी। मामी ने जैसे ही देखा, उनकी आंखें फैल गईं। मुंह से निकला, “हे भगवान… इतना बड़ा… ये तो सच में खुटा है… मैं तो पागल हो जाऊंगी अगर ये अंदर गया तो…” उनकी आवाज में डर और उत्सुकता दोनों थे। वो बेड पर घुटनों के बल बैठ गईं, हाथ बढ़ाकर लंड को पकड़ लिया।

पहले उन्होंने टिप को होंठों से छुआ, हल्का सा चूमा। फिर जीभ निकालकर टिप पर फेरा, गोल-गोल घुमाया, जैसे स्वाद चख रही हों। लंड पर सलाइवा चमकने लगा। फिर धीरे-धीरे मुंह खोला और आधा लंड अंदर ले लिया। जैसे ही गला छुआ, ग्ग्ग्ग… गों… गों… की गहरी आवाजें आने लगीं। सलाइवा मुंह के किनारों से बहकर लंड पर टपक रहा था। मामी आंखें बंद करके मजा ले रही थीं, सिर ऊपर-नीचे हिला रही थीं। उनकी जीभ लंड के नीचे से लिपट रही थी, हर बार मुंह अंदर जाते वक्त जीभ से दबाव डाल रही थीं।

मैंने उनके खुले गीले बाल पकड़े, हल्का सा खींचा और धीरे से धक्का दिया। वो समझ गईं, और गहरा लेने लगीं। लंड गले तक चला गया, उनकी नाक मेरी जांघों से लग गई। वो गग्ग… गों… ग्ग्ग्ग… कर रही थीं, आंखों से पानी आ रहा था, लेकिन रुकने का नाम नहीं ले रही थीं। मुंह से निकलती आवाजें और सलाइवा की चमक देखकर मेरा जोश और बढ़ गया। मैंने उनके सिर को हल्का पकड़कर आगे-पीछे करना शुरू किया, धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाई। मामी अब जोर-जोर से चूस रही थीं, गला खोलकर पूरा लंड अंदर ले रही थीं। उनकी जीभ टिप पर घूम रही थी, नीचे से लंड को सहला रही थी।

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कभी वो लंड बाहर निकालकर टिप को चूसतीं, कभी गले तक लेतीं। सलाइवा इतना था कि लंड पूरी तरह चमक रहा था, उनकी ठोड़ी पर भी बह रहा था। मैंने कहा, “मामी… क्या कमाल कर रही हो… ऐसे चूस रही हो जैसे सालों से भूखी हों…” वो आंखें खोलकर मेरी तरफ देखीं, मुंह में लंड लिए हुए मुस्कुराईं और बोलीं, “हां… तेरे जैसा मोटा पहली बार… मजा आ रहा है… गला भर रहा है…” फिर फिर से मुंह में ले लिया, तेज-तेज सिर हिलाने लगीं।

क्या फीलिंग थी दोस्तों, जैसे स्वर्ग मिल गया हो। उनका गर्म मुंह, जीभ का दबाव, गले की टाइटनेस, सब कुछ परफेक्ट था। मैं उनके बालों में उंगलियां फेरता रहा, कभी धक्का देता, कभी उन्हें खुद करने देता। मामी अब पूरी तरह पागल हो चुकी थीं, लंड को ऐसे चूस रही थीं जैसे आखिरी बार हो। सलाइवा की चट-चट की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं।

फिर मैंने मामी को पीठ के बल लिटाया। उनकी टांगें फैलाईं, घुटनों को मोड़कर बिस्तर पर टिका दिया ताकि चूत पूरी तरह खुल जाए। उनकी चूत अभी भी पहले के रस से चमक रही थी, होंठ सूजे हुए, क्लिट बाहर निकली हुई। मैंने लंड की टिप उनकी चूत के मुंह पर रखी, हल्का सा रगड़ा। वो गीली थी, लेकिन मेरा मोटा 7 इंच लंड देखकर मामी थोड़ी घबरा गईं। उनकी सांसें तेज हो गईं, बोलीं, “भरत… धीरे से… इतना मोटा है… तेरे मामा का तो आधा भी नहीं है… मैं तो डर रही हूं…”

मैंने मुस्कुराकर कहा, “चिंता मत करो मामी, मैं संभाल लूंगा। तेरी चूत को आज वो मजा दूंगा जो मामा कभी नहीं दे पाए।” फिर धीरे से दबाया। टिप अंदर घुसी, उनकी चूत की दीवारें फैलने लगीं। मामी चीखीं, “आह… धीरे… ओह्ह… जलन हो रही है… तेरे मामा ने कभी इतना गहरा नहीं किया… बस दो-तीन धक्के और झड़ जाते थे… छोटा लंड वाला कायर…”

मैंने और दबाव डाला, एक ही जोरदार धक्के में पूरा 7 इंच लंड अंदर चला गया, जड़ तक। मामी का पूरा शरीर झटके से उछला, जोर से चिल्लाईं, “आआआह्ह… भरत… मार डालेगा क्या… इतना मोटा… ओह्ह… पूरी चूत फाड़ दी… तेरे मामा का तो पतला सा था… कभी फील ही नहीं हुआ… बस ढीला-ढाला… मैं सालों से तरस रही थी ऐसे लंड के लिए… ऊह्ह…” उनकी आंखें नम हो गईं, हाथ मेरी पीठ पर नाखून गड़ा दिए, लेकिन अब दर्द में भी मजा मिल रहा था।

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मैंने उनके कान में फुसफुसाया, “हां रंडी, तुझे चोद-चोद के मार डालूंगा आज। तेरी चूत मेरी है अब। मामा जैसे नामर्द को भूल जा।” फिर जोर-जोर से धक्के लगाने लगा। धप… धप… धप… की तेज आवाजें कमरे में गूंज रही थीं, बेड हिल रहा था। हर धक्के पर उनकी चूत मेरे लंड को कसकर निचोड़ रही थी, गर्म, गीली और चिपचिपी। मामी नीचे से कमर उठा रही थीं, मेरे धक्कों से मिलाकर, “आह्ह… ओह्ह… भरत… और तेज… फाड़ दो मेरी चूत… आह्ह्ह… हां… गहरा मारो… तेरे मामा ने कभी इतना गहरा नहीं मारा… बस सतह पर ही रहता था… छोटा लंड… बेकार आदमी… मैं तो रोज रात को उंगली करके सो जाती थी… ऊह्ह… तू तो असली मर्द है… चोद मुझे… पूरी रंडी बना दे…”

उनकी चूत हर धक्के पर चिपचिपाती आवाज कर रही थी, रस बहकर मेरी जांघों पर टपक रहा था। मैंने उनकी टांगें अपने कंधों पर रख लीं, अब एंगल और गहरा हो गया। लंड जड़ तक घुस रहा था, हर बार बाहर निकलते वक्त उनकी चूत की दीवारें लंड को चूस रही थीं। मामी बार-बार झड़ रही थीं, शरीर कांप रहा था, “आह… मैं फिर झड़ रही हूं… भरत… ओह्ह… मत रुकना… चोदते रहो… तेरे मामा ने कभी मुझे झड़वाया ही नहीं… बस खुद झड़ जाता था… नामर्द… मैं तो सालों से भूखी हूं… तू मुझे संतुष्ट कर… आह्ह… ओह्ह… तेरे लंड ने तो मुझे पागल कर दिया… ऊह्ह… फाड़ दो… और जोर से…” उनकी आंखें बंद थीं, मुंह खुला हुआ, सिसकारियां और चीखें मिलकर कमरे भर रही थीं।

मैं तेज-तेज ठोकता रहा, पसीना हम दोनों पर बह रहा था, बदन चिपचिपे हो गए थे। हर धक्के के साथ मामी मामा को गालियां दे रही थीं, “तेरे मामा जैसे बेकार मर्द से बेहतर है तू… छोटा लंड वाला… कभी मजा नहीं दिया… तू तो हर बार झड़वा रहा है… हां… ऐसे ही… चोद मुझे… मैं तेरी रंडी हूं अब…” उनका शरीर बार-बार तनकर ढीला पड़ रहा था, लेकिन मैं रुकने का नाम नहीं ले रहा था।

उसके बाद मैंने मामी की गांड मारना शुरू कर दिया। मैंने उन्हें बेड पर घुटनों के बल घोड़ी बनाया। उनकी कमर नीचे झुकी हुई थी, गोल-मटोल चूतड़ ऊपर उठे हुए थे। मैंने पहले उनकी गांड पर दो जोरदार थप्पड़ मारे, आवाज कमरे में गूंजी, उनकी गोरी त्वचा लाल हो गई। मामी सिहरकर बोलीं, “आह… भरत…” मैंने लंड पर थूक लगाया, अच्छे से गीला किया ताकि आसानी से घुसे। फिर लंड की टिप उनकी टाइट गांड के छेद पर रखी और धीरे-धीरे दबाया।

मामी चीखीं, “आऊ… ऊह्ह… धीरे भरत… ओह्ह… बहुत मोटा है…” उनका शरीर कांप रहा था, लेकिन मैं रुक नहीं सका। धीरे-धीरे आधा लंड अंदर गया। वो दर्द से कराह रही थीं, “ओह्ह… रुक… आह…” पर जैसे ही पूरा लंड उनकी गांड में समा गया, उनका दर्द मजा में बदल गया। वो खुद पीछे धक्का देने लगीं, कमर हिलाकर बोलीं, “अब ठीक है… अब जोर से…”

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मैंने कमर पकड़ी और तेज-तेज ठोकना शुरू कर दिया। धप… धप… धप… की आवाजें आने लगीं। उनकी गांड मेरे लंड को इतनी कसकर चूस रही थी कि हर धक्के पर मजा दोगुना हो रहा था। मामी चिल्ला रही थीं, “ओह्ह… ओह्ह… आह्ह… फाड़ दो मेरी गांड… हां रंडी बनाओ मुझे… चोदो जोर से…” उनकी आवाज में भूख थी। बीच-बीच में मैंने एक हाथ नीचे सरकाया और दो उंगलियां उनकी चूत में डालकर तेज-तेज हिलाने लगा। चूत से रस बह रहा था, उंगलियां चिपचिपा रही थीं। वो लगातार झड़ रही थीं, “आह्ह… फिर झड़ गई… भरत… मत रुकना… ऊह्ह…” उनका शरीर बार-बार तनकर ढीला पड़ रहा था।

फिर गांड मारते-मारते मैं झड़ने ही वाला था। मैंने जल्दी से लंड निकाला और मामी के मुंह की तरफ घुमा दिया। वो समझ गईं, मुंह खोल लिया। मैंने लंड उनके मुंह में डाल दिया और जोर-जोर से धक्के देने लगा। वो गले तक ले रही थीं, ग्ग्ग्ग… गों… गों… की आवाजें आ रही थीं। सलाइवा बह रहा था, आंखों में आंसू आ गए थे लेकिन वो रुक नहीं रही थीं। मैंने उनके बाल पकड़े और अंतिम धक्के दिए। सारा माल उनके मुंह में निकल गया, गर्म-गर्म। मामी ने सब निगल लिया, जीभ से लंड साफ किया और बोलीं, “मजा आया… कितना गाढ़ा है…”

तब भी हम दोनों एक-दूसरे को सहला रहे थे। मेरे हाथ उनके बूब्स पर, उनके हाथ मेरे लंड पर। मामी जी तभी उठीं, अलमारी से एक छोटी सी टेबलेट निकाली और बोलीं, “ले, इससे खा ले। रात अभी बाकी है।” मैंने बिना सोचे टेबलेट निगल ली। 5 मिनट बाद ही मेरे अंदर आग लग गई। लंड फिर से पत्थर की तरह तन गया, जैसे कभी थका ही न हो।

अब मैंने मामी की चूत को फिर से चोदना शुरू किया। क्या बताऊं दोस्तों, फिर तो रात भर मामी ने चुदवाया और मैंने चोदा। पहली राउंड के बाद वो मेरे ऊपर चढ़ गईं। खुद लंड पकड़ा, चूत पर सेट किया और धीरे से बैठ गईं। पूरा लंड अंदर चला गया। वो कूदने लगीं, ऊपर-नीचे। उनके 36 साइज के बूब्स मेरे चेहरे पर लहरा रहे थे। मैंने दोनों को मुठ्ठी में भरा और जोर से मसला, निप्पल्स को चूसा। नीचे से मैं भी धक्के दे रहा था। मामी सिसकारियां भर रही थीं, “आह… इह्ह… ओह्ह… भरत… गहरा… ऊह्ह… हां ऐसे ही… चोदो मुझे…” उनकी चूत लंड को निचोड़ रही थी, रस बह रहा था मेरी जांघों पर।

दूसरी राउंड में मैंने उन्हें कमरे की कुर्सी पर झुकाया। पीछे से लंड घुसाया, चूत में। हाथ से कमर पकड़कर जोर-जोर से ठोका। कुर्सी हिल रही थी, मामी चिल्ला रही थीं, “आह्ह… फाड़ दो… हां… पीछे से… और तेज…” तीसरी राउंड में फिर घोड़ी बनाकर गांड मारी। मैंने लंड पर थूक लगाया और पूरा घुसा दिया। वो अब बिना दर्द के ले रही थीं, खुद पीछे धक्का दे रही थीं। चौथी राउंड सुबह तक चली। हम अलग-अलग पोजीशन्स में चुदाई करते रहे – मिशनरी, डॉगी, काउगर्ल, स्पूनिंग। पसीने से तर थे, सांसें फूल रही थीं, बदन चिपचिपा हो गया था, लेकिन मजा कम नहीं हो रहा था।

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जब चार बार पूरी चुदाई हो गई, तो दोनों थककर चूर हो गए। उस समय सुबह के पांच बज गए थे। रात भर की जंगली चुदाई के बाद मैं बेड पर लेट गया और नींद आ गई।

जब आंख खुली तो देखा मामी जी नहा-धोकर तैयार थीं, रसोई में खाना बना रही थीं। उनकी नाइटी फिर से पहनी थी, लेकिन चेहरे पर संतुष्टि की मुस्कान थी। वो मेरी तरफ देखकर बोलीं, “अभी तीन दिन तक मामा जी नहीं आएंगे।” मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “ठीक है, मैं हूं ना।” और वो जोर से हंस पड़ीं।

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Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।


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1 thought on “मामी ने पीठ पे साबुन लगाया”

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