Bhai bahan sex story, Chacheri bahan chudai sex story: दोस्तों, मेरा नाम सौरभ है। मेरा गोरा साफ रंग, अच्छे से गठा हुआ बदन और जवान उम्र का जोशीला जिस्म किसी भी लड़की का दिल आसानी से जीत सकता है। कॉलेज के दिनों में तो बहुत सी लड़कियां मुझे अपना बॉयफ्रेंड बनाने की ख्वाहिश मन में रखती थीं। लेकिन सच बताऊं तो मुझे सेक्स का शौक बहुत पुराना है। बचपन से ही ये आग मेरे अंदर सुलगती रहती थी। अपनी बहन के साथ पहली बार चुदाई करने के बाद तो मैंने कई लड़कियों के साथ जमकर मजा लिया और हर बार चुदाई के बाद पूरा बदन खुशी से झूम उठता था।
पिछले कुछ सालों से मैं सेक्सी कहानियां पढ़ने का दीवाना हो गया हूं। रात को अकेले में जब ये कहानियां पढ़ता हूं तो मन बहुत उत्तेजित हो जाता है। लंड तन जाता है, दिल की धड़कन तेज हो जाती है और पूरा जोश शरीर में दौड़ने लगता है। आज मैं आप सबके सामने अपनी एकदम सच्ची घटना लेकर आया हूं। इस घटना में मेरी चचेरी बहन दिव्या ने खुद मेरे साथ सेक्स करने की इच्छा जाहिर की। सच कहूं तो मैं कई महीनों से उसके साथ कुछ करने के ख्यालों में डूबा रहता था, लेकिन रिश्ते की वजह से हिम्मत नहीं जुटा पाता था।
दिव्या का जिस्म देखकर तो मेरी सांसें थम सी जाती थीं। उसकी गोरी चिकनी त्वचा, बड़े-बड़े गोल-मटोल बूब्स जो हमेशा ऊपर उठे रहते थे, पतली कमर और गदराए हुए गोल कूल्हे। 36-24-38 का फिगर, पांच फुट पांच इंच की लंबाई, लंबे काले घने बाल और वो कामुक अदा। लेकिन वो मेरी चचेरी बहन थी, इसलिए मैं बस दूर से निहारता रहता था और रात को अकेले में उसके बारे में सोचकर लंड सहलाता रहता था।
हम दोनों आगरा में एक ही किराए के कमरे में रहते थे। घर से दूर कॉलेज की पढ़ाई के कारण ऐसा इंतजाम हुआ था। कमरा छोटा सा था लेकिन हमारे लिए काफी। मैंने वहां कुछ सेक्सी कहानियों की किताबें भी छुपाकर रखी हुई थीं। जब कभी अकेला होता या पढ़ाई का बहाना बनाकर उन किताबों को खोलता, तो घंटों पढ़ता रहता और लंड को हाथ से रगड़ता रहता। आग लगी रहती थी, लेकिन बाहर निकालने की हिम्मत नहीं होती थी।
एक दिन दिव्या कमरे की सफाई कर रही थी। मैं उस वक्त बाहर था। सफाई करते-करते उसकी नजर मेरी उन किताबों पर पड़ गई। उसने किताब उठाई और बैठकर पढ़ने लगी। कहानियां पढ़ते-पढ़ते उसका चेहरा लाल हो गया, सांसें तेज हो गईं और बीच-बीच में वो अपनी जांघों को आपस में रगड़ने लगी। पूरी किताब पढ़ने के बाद वो बहुत गरम हो चुकी थी। उसे मेरी गंदी आदतों और मेरे मन की बातों का पूरा पता चल गया।
शाम को जब मैं कमरे में लौटा तो दिव्या का व्यवहार पूरी तरह बदल चुका था। वो मुझे देखते ही मुस्कुराई, आंखों में शरारत और चाहत दोनों थीं। वो मेरे पास आई, मेरी बांह पकड़ी और धीरे से मेरे कान में फुसफुसाई, “सौरभ, आज से तुम मुझे अपनी पत्नी समझो। मैं तुम्हारी पत्नी बनना चाहती हूं। जो मन करे मेरे साथ करो।”
उस वक्त वो टाइट जींस और हल्की शर्ट में थी। शर्ट के ऊपरी दो बटन खुले हुए थे। बूब्स की गहराई साफ दिख रही थी। वो शरमा भी रही थी और आंखों से मुझे निमंत्रण भी दे रही थी। फिर वो और करीब आई, मेरे गाल पर हाथ फेरा और धीरे से मेरे होंठों पर अपने मुलायम गुलाबी होंठ रख दिए।
मैं हैरान था लेकिन उसके होंठों की नरमी और गर्मी ने मुझे तुरंत जोश में ला दिया। मैंने उसे अपनी बाहों में कसकर जकड़ लिया। हम दोनों एक-दूसरे को गहराई से चूमने लगे। उसकी जीभ मेरे मुंह में घुस गई, मैंने भी उसकी जीभ चाटी और चूसी। हमारी सांसें मिल गईं। करीब दस मिनट तक हम ऐसे ही एक-दूसरे के होंठ चूसते रहे, जीभों से खेलते रहे। उसके मुंह से हल्की-हल्की सिसकारियां निकल रही थीं।
फिर मैंने उसे धीरे से पलंग पर लिटा दिया। खुद उसके ऊपर लेट गया। उसकी गर्दन पर होंठ रखे, धीरे-धीरे चूमने लगा। उसकी गर्दन की नरम त्वचा पर जीभ फेरता रहा। वो सिहर उठी और बोली, “आह्ह… सौरभ… कितना अच्छा लग रहा है… और करो…”
मैंने उसके कान की लौ चाटी, हल्के से काटा। वो तड़प उठी। फिर मैंने धीरे-धीरे उसकी शर्ट के बाकी बटन खोले। शर्ट पूरी तरह खोलकर अलग कर दी। सफेद लेस वाली ब्रा में उसके बड़े बूब्स उभरे हुए थे। ब्रा के ऊपर से ही मैंने दोनों बूब्स को दबाया। वो कांप गई। फिर मैंने ब्रा का हुक पीछे से खोला। जैसे ही ब्रा ढीली हुई, उसके गोरे-गोरे 36 साइज के गोल-मटोल बूब्स उछलकर बाहर आ गए। गुलाबी निप्पल्स पहले से ही सख्त हो चुके थे।
कहानी का अगला भाग: सेक्सी कहानियों की किताब बहन के हाथ लग गई – Part 2
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