माँ की चुदाई देखकर, बेटे का लंड खड़ा हो गया

Mother uncle sex story, Maa mausa chudai sex story, Beta ne maa ki gand chudai dekhi sex story: मेरा नाम अरुण है और मैं 19 साल का हूँ। आज मैं आपको अपनी जिंदगी की सबसे हैरान करने वाली घटना के बारे में बताने जा रहा हूँ, जो मेरे साथ कुछ महीने पहले हुई थी। इस एक रात ने मेरी पूरी सोच और जिंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया। पहले थोड़ा अपना और परिवार का परिचय दे देता हूँ ताकि आप सबको पूरी बात समझ आए।

मैं एक छोटे से शहर में रहता हूँ। यहाँ कोई अच्छा कॉलेज नहीं होने की वजह से मैं पास के बड़े शहर में बी.कॉम सेकंड ईयर की पढ़ाई कर रहा हूँ। वहाँ हॉस्टल में रहता हूँ और सिर्फ छुट्टियों में ही घर आ पाता हूँ। मैं माँ-पापा का इकलौता बेटा हूँ, इसलिए घर में सब कुछ मेरे इर्द-गिर्द ही घूमता था।

पापा सरकारी दफ्तर में क्लर्क थे। कुछ समय पहले उन्हें अचानक हार्ट अटैक आया और वो चल बसे। उनकी मौत के बाद उनकी जगह मम्मी को ही नौकरी मिल गई। अब घर में सिर्फ हम दोनों रहते हैं। मम्मी बहुत मेहनत करती हैं, घर संभालती हैं और मुझे पढ़ाई के लिए भी पूरा सपोर्ट करती हैं। हम दोनों एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे और खुशी-खुशी रहते थे।

फिर एक दिन कॉलेज में सभी प्रोफेसरों ने हड़ताल कर दी। पढ़ाई पूरी तरह बंद हो गई और एक हफ्ते की छुट्टी मिल गई। हॉस्टल का वो बेकार खाना खा-खाकर मैं तंग आ चुका था। मम्मी से मिलने का भी बहुत मन कर रहा था। मैंने सोचा क्यों न अचानक घर चला जाऊँ और मम्मी को सरप्राइज दूँ। फोन करके बताने की बजाय मैंने चुपके से प्लान बनाया।

दोस्तों से मिला, थोड़ी बात की और शाम की बस पकड़ ली। रास्ते भर मैं कल्पना करता रहा कि मम्मी मुझे दरवाजे पर देखकर कितनी खुश होंगी। उनके हाथ का गरमा-गरम खाना खाऊँगा, मम्मी से गपशप करूँगा। बस में आँखें बंद करके सपनों में खोया रहा।

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शाम करीब सात बजे मैं अपने शहर के बस स्टैंड पर उतरा। घर बस स्टैंड से लगभग चार किलोमीटर दूर था। रिक्शा लेने की बजाय मैंने पैदल चलना पसंद किया। मुझे पैदल घूमना पसंद है, एक्सरसाइज भी हो जाती है। धीरे-धीरे चलते हुए रात के करीब आठ बजे मैं घर के पास पहुँच गया।

घर के बाहर एक कार खड़ी दिखी। मैंने सोचा शायद कोई रिश्तेदार आया होगा, लेकिन कार को देखकर भी कुछ समझ नहीं आया। हमारा मोहल्ला थोड़ा अलग-थलग है। आस-पास घर बहुत कम हैं, बीच-बीच में खाली प्लॉट पड़े रहते हैं। इसलिए रात में काफी सुनसान रहता है।

मैं चुपचाप मुख्य दरवाजे की तरफ बढ़ा। घंटी बजाने से पहले ही अंदर से मम्मी की जोर-जोर से हँसी की आवाज आई। मुझे बहुत अजीब लगा। मम्मी को इस तरह बेफिक्र होकर हँसते मैंने शायद ही कभी सुना था। दिल में कुछ शक हुआ। मैंने सोचा पहले जरा देख तो लूँ क्या माजरा है।

मैं धीरे से घर के पीछे की तरफ चला गया। वहाँ बेडरूम की एक खिड़की पीछे की साइड में खुलती है। पर्दा थोड़ा सा सरका हुआ था। मैंने झुककर अंदर झाँका और मेरी साँसें थम सी गईं।

मेरी मम्मी और मेरे दूर के मौसा जी एक ही बेड पर थे। दोनों पूरी तरह नंगे। एक पतली चादर उनके शरीर पर लिपटी हुई थी, लेकिन वो भी आधी सरकी हुई थी। दोनों एक-दूसरे से चिपके हुए थे। पास की छोटी टेबल पर बियर की बोतल, गिलास और कुछ नमकीन रखे थे। दोनों धीरे-धीरे एक-दूसरे को सहला रहे थे, प्यार भरी नजरों से देख रहे थे।

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मम्मी ने मुस्कुराकर मौसा जी से कहा, “मैं अभी आई।”

फिर उन्होंने चादर पूरी तरह हटाई और नंगी ही बेड से उठकर बाथरूम की तरफ चली गईं। उनके बड़े-बड़े गोरे चूतड़ हिलते हुए ऊपर-नीचे हो रहे थे। कमर पतली, चूतड़ गोल-गोल, चिकने और बेदाग। इतने गोरे और मुलायम कि देखते ही मेरा लंड एकदम खड़ा हो गया। मैं 19 साल का हूँ और आज पहली बार किसी औरत को पूरी तरह नंगी देख रहा था – वो भी अपनी माँ को।

मैंने पैंट की चेन खोली और अपना लंड बाहर निकाल लिया। वो पहले से ही कड़क था। मैं धीरे-धीरे उसे सहलाने लगा।

करीब पाँच मिनट बाद मम्मी बाथरूम से लौटीं। बालों को पीछे हल्का सा बाँध लिया था। उनका चेहरा गोरा, गोल, सुंदर। बड़ी-बड़ी आँखें, तीखी नाक, फूले हुए गुलाबी होंठ। नीचे से देखें तो बड़े, भरे हुए, नुकीले बूब्स – इस उम्र में भी पूरी तरह कसे हुए। कमर पतली, नाभि गहरी और गोल। नीचे बिना एक बाल के चिकनी चूत। पैर लंबे, चिकने और भरे हुए। पूरा बदन ऐसा गदराया हुआ कि देखकर मन करता था छू लूँ।

मम्मी बेड के पास आकर खड़ी हो गईं और मौसा जी को देखकर मुस्कुराईं। मौसा जी बोले, “सचमुच मोनिका, जब से तुम मेरी जिंदगी में आई हो, खुशी लौट आई है। अपनी बीवी से कभी खुश नहीं था। बाप के कहने पर मजबूरी में शादी की थी। वो न सुंदर है, न तुम जैसा सेक्सी और गदराया बदन।”

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मम्मी ने पास की टेबल से बियर की बोतल उठाई, गिलास में डाला और मौसा जी को देते हुए बोलीं, “भाई साहब, अगर आप न होते तो हमारा क्या होता? अरुण के पापा के जाने के बाद नौकरी तो मिल गई, लेकिन इन पैसों से आज की महंगाई में गुजारा बहुत मुश्किल था। अरुण की पढ़ाई, हॉस्टल का खर्चा – सब सोचकर रातों की नींद उड़ जाती थी। आपने वक्त पर साथ दिया।”

मौसा जी ने गिलास लिया और बोले, “तुमने मेरी जरूरत पूरी की, मैंने तुम्हारी। कोई एहसान नहीं हुआ। बस मुझे वो प्यार मिल गया जिसके लिए मैं सालों तरसता रहा। अरुण के लिए मैं वही करूँगा जो एक बाप करता है। लेकिन ये बात सिर्फ तुम्हारे और मेरे बीच रहेगी।”

मम्मी उनकी तरफ झुकीं, लिपट गईं और बोलीं, “हाँ जी, ये हमारे बीच ही रहेगी। मैं अच्छी तरह जानती हूँ कि आप अरुण से कितना प्यार करते हो। इसलिए मैंने खुद को आपकी पत्नी ही मान लिया है।”

मौसा जी ने मम्मी के गाल पर प्यार से एक चुम्बन लिया और मुस्कुराकर बोले, “क्यों, आज दूसरी बार चुदाई का खेल खेल लें?”

मम्मी शरमाकर मुस्कुराईं और बेड पर घुटनों के बल बैठ गईं। कुतिया बनकर चूतड़ ऊपर उठा दिए। मौसा जी उठे, ड्रेसिंग टेबल से तेल की छोटी बोतल उठाई। अपने लंड पर अच्छे से तेल मला। उनका लंड मोटा, लंबा और कड़क था – करीब सात-आठ इंच का।

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मैं समझ गया कि आज मम्मी की गांड मारी जाएगी। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। लंड पर हाथ और तेज हो गया।

मौसा जी ने मम्मी के गोरे-गोरे, गोल-गोल चूतड़ों पर हाथ फेरा। उन्हें प्यार से चूमा। फिर लंड का सुपाड़ा गांड के छेद पर रख दिया। मम्मी ने आँखें बंद कर लीं, होंठ काटे और चूतड़ और ऊपर उठा दिए। मौसा जी ने हल्का सा धक्का मारा। सुपाड़ा अंदर चला गया।

मम्मी के मुँह से निकला, “आह्ह्ह… धीरे जी… आह्ह…”

मौसा जी रुके, फिर फिर धक्का दिया। आधा लंड अंदर। मम्मी की सिसकी बढ़ी, “ओह्ह… वाह… अच्छा लग रहा है… आह्ह…” मैं अपना लंड जोर से मसल रहा था।

मौसा जी ने एक और जोरदार धक्का दिया। पूरा लंड जड़ तक अंदर। मम्मी की पीठ पर झुककर बोले, “मोनिका… कितनी टाइट है तेरी गांड… आह्ह… स्वर्ग है ये…”

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दो मिनट तक वो ऐसे ही रहे। मम्मी की साँसें तेज थीं। फिर मौसा जी ने धीरे-धीरे लंड बाहर-भीतर करना शुरू किया। हर धक्के के साथ मम्मी की आवाज निकलती, “आह्ह… मौसा जी… और गहरा… ओह्ह… ह्ह्ह… अच्छा… ऊऊ…”

मौसा जी की रफ्तार बढ़ती गई। धक्के तेज और जोरदार। बेड हिलने लगा। “ले मेरी जान… तेरी गांड मारता हूँ… कितनी हॉट है तू… आह्ह… मोनिका… चूतड़ पकड़… और जोर से…”

मम्मी भी कमर हिलाने लगीं, “हाँ जी… फाड़ दो मेरी गांड… आह्ह… ओह्ह… और तेज… ह्ह्ह… ऊईई…” उनकी सिसकियाँ कमरे में गूँज रही थीं।

मैं खिड़की के पास खड़ा था और ये सब देखकर मेरा दिमाग पागल हो रहा था। मेरा हाथ लंड पर इतनी तेजी से चल रहा था कि मैं काबू नहीं कर पाया। अचानक गरम-गरम पानी मेरे हाथ पर छलक आया। बहुत ज्यादा, बहुत गरम। मैंने पहले कभी इतना मजा नहीं लिया था।

उधर मौसा जी भी जोर-जोर से धक्के मार रहे थे। “आह्ह… मोनिका… ले… ले मेरे सारे रस… आह्ह…” और उन्होंने मम्मी की गांड के अंदर ही झड़ दिया। मम्मी की सिसकी के साथ वो उनके ऊपर लेट गए। पीठ और गर्दन पर चुम्बन लेते रहे।

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मैं डर गया कि कहीं कोई देख न ले। जल्दी से खिड़की से हटा, रुमाल से हाथ साफ किया और चुपचाप घर से बाहर निकल आया।

थोड़ी दूर जाकर मैंने सिगरेट सुलगाई। सोचने लगा। मौसा जी की कार जाते देखी। मन में बहुत कुछ चल रहा था। फिर फैसला किया – मम्मी ये सब मेरे और घर के लिए कर रही हैं। उनकी भी तो इच्छाएँ हैं, जरूरतें हैं। मैं इस बात को हमेशा के लिए भूल जाऊँगा। मम्मी को कभी पता नहीं चलेगा कि मैं जान गया हूँ।

कुछ देर बाद मैं सामान्य बनकर घर पहुँचा। मम्मी ने दरवाजा खोला। मुझे देखकर पहले तो एकदम हैरान हो गईं। चेहरा सफेद पड़ गया, पसीना था। लेकिन फिर शायद राहत मिली। बोलीं, “अरुण… तू अचानक? कुछ हुआ क्या?”

मैंने कहा, “हाँ माँ, सर में तेज दर्द हो रहा था। हॉस्टल में रह नहीं पाया तो आ गया।”

मम्मी ने मुझे अंदर बुलाया। मैं कमरे में जाकर लेट गया। मन में माँ की समझदारी और प्यार को सलाम किया।

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ये थी वो रात, जिसने मुझे बहुत कुछ सिखा दिया।

कहानी पूरी पढ़ने के बाद बताओ – अगर तुम्हारे साथ ऐसा होता तो क्या करते? माँ से बात करते या चुप रहते? अपनी राय और फीलिंग्स कमेंट में जरूर लिखना। क्या ऐसी और कहानियाँ सुनना चाहते हो?

1983
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