हाय दोस्तो, आप सब लोग कैसे हैं, उम्मीद है सब अच्छे होंगे. मेरा नाम वरुण है और मैं दिल्ली का रहने वाला हूं. मैं एमबीए का स्टूडेंट हूं और अपना टेक्सटाइल बिजनेस भी चलाता हूं. दिखने में मैं नॉर्मल हूं लेकिन काफी अट्रैक्टिव हूं. बिजनेस की भागदौड़ में मुझे कभी यूनिवर्सिटी में दोस्त बनाने का मौका नहीं मिला.
मेरे बचपन के दोस्त ही मेरे असली दोस्त रहे. लेकिन लड़कियों से दोस्ती करने का मुझे बहुत पुराना शौक था. एक दिन मेरी जिंदगी में असली बहार आई, जब मेरी पहली मुलाकात मेरी कजिन संजीता से हुई. मैंने उसे पहले कभी नहीं देखा था क्योंकि वो कनाडा में रहती थी और अपनी पूरी जिंदगी वहीं गुजारी थी. एक दिन पापा बोले, “बेटा, एयरपोर्ट जाओ और अपनी कजिन को पिक कर लाओ.” मैं बोला, “पापा, मैंने तो उसे देखा ही नहीं.”
पापा ने कहा, “कोई बात नहीं, बैनर पर उसका नाम लिख लो, वो खुद पहचान लेगी.” मैंने ठीक कहा और एयरपोर्ट पहुंच गया. जैसे ही वो सामने आई, उफ्फ, मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया. इतनी खूबसूरत लड़की मैंने पहले कभी नहीं देखी. गोरे गाल, ब्राउन बाल, इतने बड़े चूचे कि बताऊं कैसे, और गांड चलते वक्त अलग से हिल रही थी. वो मेरे पास आई और बोली, “वरुण?” मैंने हां कहा, फिर वो कार में बैठी और हम घर आ गए. मेरे घर में सिर्फ मम्मी-पापा हैं, कोई और नहीं. वो घर आकर बहुत खुश हुई.
लेकिन मैं जब भी उसे देखता, कमरे में जाकर उसके नाम की मुठ मारता. रात को जब वो सो जाती, तो चुपके उसके कमरे में जाता, उसकी कमीज ऊपर करके छोटे-छोटे मम्मों को दबाता, चूत की खुशबू सूंघता और मुठ मारकर वापस आ जाता. जब वो नहाने जाती, तो दरवाजे के सुराख से उसे नंगी देखता. उसका जिस्म संगमरमर जैसा मुलायम, ब्राउन निप्पल, बड़े चूचे, मोटी गांड, उफ्फ.
मैं बस देखकर ही झड़ जाता और चला आता. फिर एक रात वो सो गई तो मैं रूटीन की तरह उसके कमरे में पहुंचा. आज सोचा, हिम्मत कर ही लूं. मैंने धीरे से उसकी कमीज में हाथ डाला, उसके नरम मम्मों को दबाया. दोस्तो, वो नरमी का मजा कुछ और ही था. फिर पेट से होते हुए शलवार में हाथ डाला. इलास्टिक टाइट था, हल्का खींचा और चूत के बालों पर हाथ फेरने लगा. इतना मजा आ रहा था कि बयान नहीं कर सकता. फिर चूत के सूराख पर उंगली फेरी, तभी उसने मेरा हाथ पकड़ लिया.
मैं डर गया, कन्फ्यूज हो गया. वो भी घबरा गई कि ये क्या हो रहा है. मैंने हिम्मत की और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए. फिर मम्मों को जोर से दबाने लगा. मुझे पता था अगर आज ये निकल गई तो कभी नहीं मिलेगी. वो छुड़वाने की कोशिश करती रही, 15 मिनट तक. फिर धीरे-धीरे वो गर्म होने लगी और मेरा साथ देने लगी. मेरी शलवार पहले ही उतर चुकी थी, मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया. मैंने उसका हाथ अपने लंड पर रखा. वो चौंकी और बोली, “ये क्या है, इतनी गर्म चीज?” फिर लंड को टटोलने लगी, टोपे को छूकर देखने लगी, सूराख में उंगली डालने की कोशिश करने लगी.
मैं उसके होंठ चूसता रहा, एक हाथ शलवार में था. वो सिसकारियां ले रही थी. मुझे चूत की खुशबू बहुत पसंद है. वो बोली, “उफ्फ…” मैं पागल हो गया. फिर मैंने उसकी शलवार उतारी, कमीज भी. वो पूरी नंगी हो गई. मैंने भी अपनी कमीज उतारी. फिर बोला, “मेरे लंड को चूसो.” वो फौरन मान गई. 10 मिनट तक चूसा, ग्ग्ग्ग… गी… गों… गोग… जीभ से टोपा चाटती, गले तक ले जाती. मैं उसके बाल पकड़कर धक्के दे रहा था. “आह संजीता, कितना अच्छा चूस रही हो, और जोर से…” वो और जोर से चूसने लगी, थूक से लंड गीला हो गया.
फिर उसने कहा, “अब मेरी चूत चाटो ना.” मैंने तुरंत जीभ उसकी चूत पर रखी और जोर-जोर से चाटने लगा. वो सिसकने लगी, “आह्ह… ओह्ह… वरुण… और जोर से…” वो गांड उठाकर चूत मेरे मुंह में दबा रही थी. मैं क्लिट को चाट रहा था, उंगली अंदर-बाहर कर रहा था. “आह इह्ह… ओह्ह… कितना अच्छा लग रहा है…” उसकी चूत से रस बह रहा था, बेड गीला हो गया. वो मेरे सिर को दबा रही थी, “आह्ह… ह्हीई… और अंदर…” मैं जीभ अंदर घुसेड़ रहा था, वो कांप रही थी, “ऊऊ… उईई… आऊ…”
फिर मैंने अपना लंड निकाला और सीधा उसकी गुलाबी चूत में पूरा ठेल दिया. जैसे ही अंदर गया, वो जोर से चीखी, “आआआह्ह्ह्ह…!” मैंने उसके होंठों पर होंठ रख दिए और जोर-जोर से धक्के मारने लगा. इतना जोर से चोदा कि मेरा लंड उसके खून से सन गया. फिर उसके चूचों को दबाया, निप्पल चूसा, “आह्ह… क्या मजे हैं…” वो भी अब साथ दे रही थी, “वरुण… और जोर से… फाड़ दो मेरी चूत…” मैंने स्पीड बढ़ाई, धक्के तेज किए. वो चीख रही थी, “ओह्ह… आह्ह… हां… ऐसे ही…”
मैंने उसे पलटा, पीछे से पकड़ा, गांड ऊपर करके फिर से घुसेड़ा. “आह्ह… कितनी टाइट है…” वो बोली, “वरुण… मैं तुम्हारी हूं… जो चाहो करो…” मैंने जोरदार धक्के मारे, चूत से फटाफट आवाज आने लगी. आखिर में मैंने जोर से झटका मारा और उसकी चूत में पूरा पानी डाल दिया. फिर कुछ और झटके और मुंह पर भी फेंक दिया. हम दोनों थककर लेट गए. फिर साथ नहाए, वहां भी चुंबन चलते रहे.
हम एक-दूसरे के जिस्म का मजा ले रहे थे जैसे पति-पत्नी. संजीता बोली, “वरुण, तुम जानते हो मैं तुम्हें बचपन से पसंद करती थी. जब मामा ने तुम्हारी तस्वीर दिखाई तो मैं तुमसे मोहब्बत में पड़ गई.” ये सुनकर हम गले लग गए. कुछ दिनों बाद बात पक्की हुई और हमारी शादी हो गई. वैसे भी शादी करनी थी, इसलिए चुदाई के वक्त मैंने उसे प्रेग्नेंट कर दिया था.
तो दोस्तो, मेरी ये कहानी कैसी लगी? अगर अच्छी लगी तो कमेंट में जरूर बताना और शेयर करना मत भूलना.
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