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शादी से ठीक एक महीना पहले भाई ने दीदी की गोरी चूत का रस चखा

Didi ki chudai, bhai behen sex story, sister sex before marriage, brother sister incest sex story: हमारे घर में बस मैं और मेरी दीदी रहते थे, मम्मी-पापा तो गांव में रहते थे, हम दोनों शहर में पढ़ाई के लिए आकर रह रहे थे। दीदी की उम्र 24 साल थी और उनकी शादी ठीक एक महीने बाद तय हो चुकी थी। दीदी का नाम रिया था, फिगर 36-28-38, गोरी चिटकनी चमड़ी, लंबे बाल और सबसे खास उसके वो गोल-मटोल भारी बूब्स जो हर टाइट टॉप में बाहर आने को बेताब रहते थे। निप्पल्स हल्के गुलाबी, छोटे-छोटे, लेकिन जब सख्त होते तो ब्रा के ऊपर से ही उभर आते। मैं 21 का था, कॉलेज में पढ़ता था और दीदी को देखकर रोज रात को मुठ मारता था।

एक शाम मैं कॉलेज से थोड़ा जल्दी लौटा। घर पहुंचते ही पता चला दीदी अपने कमरे में हैं। दरवाजा थोड़ा सा खुला था। मैं चुपके से पीछे वाले गलियारे की खिड़की पर पहुंच गया जहां से पूरा कमरा दिखता था। दीदी आईने के सामने खड़ी थीं, खुद को निहार रही थीं। चेहरे पर वो शरारती मुस्कान थी, जैसे कोई राज छुपा रही हों।

उन्होंने धीरे से अपना सफेद टाइट टॉप ऊपर की तरफ खींचा। जैसे ही टॉप उतरा, मेरी सांस रुक गई। काली लेस वाली ब्रा में उनके दोनों बूब्स इतने भरे हुए थे कि ब्रा के कपड़े बाहर की तरफ खिंचे हुए थे। गोरी चमड़ी पर काली ब्रा का कंट्रास्ट देखकर मेरा लुंड तुरंत खड़ा हो गया। दीदी ने एक हाथ से बूब्स को ऊपर उठाया, जैसे वजन चेक कर रही हों, फिर हल्के से दबाया। निप्पल्स ब्रा के कपड़े से बाहर झांकने लगे।

“उफ्फ… कितने भारी हो गए हैं ये…” दीदी खुद से बड़बड़ाईं और फिर ब्रा के हुक खोल दिए। ब्रा गिरते ही दोनों बूब्स ऐसे उछले जैसे जेली हो। मैं बस देखता रह गया। दीदी ने दोनों हाथों से बूब्स पकड़े, मसले, निप्पल्स को उंगलियों से रगड़ा। “आह्ह… अच्छा लगता है…” उनकी आवाज में कराह थी।

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मैंने पैंट की चेन खोली, लुंड बाहर निकाला और धीरे-धीरे मुठ मारने लगा। दीदी ने अब जींस की बटन खोली, धीरे-धीरे नीचे सरकाई। अंदर काली लेस वाली पैंटी थी, इतनी टाइट कि चूत की पूरी शेप साफ दिख रही थी। जींस उतरते ही दीदी ने पैंटी के किनारे से हाथ डाला, हल्के से चूत को सहलाया। “शादी के बाद तो रोज मिलेगा… लेकिन अभी…” वो मुस्कुराईं।

फिर दीदी ने ब्रा और पैंटी दोनों एक साथ उतार दिए। अब वो पूरी नंगी आईने के सामने खड़ी थीं। मैंने पहली बार अपनी दीदी को इतने करीब से नंगा देखा था। चूत बिल्कुल साफ, चिकनी, हल्की गुलाबी। दीदी ने पास रखी लाल लिपस्टिक उठाई, टोपी खोली और धीरे-धीरे चूत के ऊपर, होंठों पर लगाने लगीं। जैसे-जैसे लिपस्टिक लगती गई, चूत लाल-लाल चमकने लगी। वो झुकीं तो मैंने साफ देखा, चूत के बीच में छोटा सा छेद, रस से गीला।

“कितनी सेक्सी लग रही हूं…” दीदी खुद से बोलीं और उंगली से चूत के ऊपर रगड़ने लगीं। तभी उनकी नजर खिड़की पर पड़ी। वो मुझे देख लिया। मैं घबरा गया, पीछे हटा लेकिन दीदी ने मुस्कुराकर इशारा किया कि अंदर आ जाऊं।

मैं सीधा कमरे में दाखिल हुआ। दीदी अभी भी नंगी खड़ी थीं, चूत पर लिपस्टिक लगी हुई। मैंने गुस्से का नाटक किया, “ये क्या कर रही हो दीदी? मैं सब मम्मी-पापा को बता दूंगा।”

दीदी हंस पड़ीं, “बता दे… लेकिन पहले ये देख कि तू क्या कर रहा था खिड़की के बाहर।” उन्होंने मेरी पैंट की तरफ देखा जहां लुंड अभी भी खड़ा था।

फिर मैंने कहा, “जीजू को भी बता दूंगा कि शादी से पहले आप क्या-क्या करती हो।”

दीदी मेरे बहुत करीब आईं, मेरे लुंड को हाथ में पकड़ा और धीरे से सहलाने लगीं। “जिसको कहना है कह दे… लेकिन अब जो करूंगी वो भी सबको बता देना।”

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उन्होंने मेरी पैंट पूरी उतार दी। मैंने अंडरवियर पहले ही उतार रखा था। दीदी घुटनों पर बैठ गईं और मेरा लुंड मुंह में ले लिया। गर्म मुंह की सनसनी से मैं कांप उठा। वो जोर-जोर से चूसने लगीं। ग्ग्ग्ग… ग्ग्ग्ग… गी… गों… गोग… आवाजें पूरे कमरे में गूंजने लगीं। दीदी ने लुंड को गले तक लिया, फिर बाहर निकाला, जीभ से चाटा। “लगता तो छोटा है… लेकिन लुंड तो बहुत मोटा और तगड़ा है भाई… उफ्फ…”

मैंने उनके भारी बूब्स पकड़े, मसले, निप्पल्स को चुटकी काटी। दीदी कराहीं, “आह्ह… हां… और जोर से दबा… दीदी के बूब्स तो तेरे लिए ही हैं आज…”

मैं झड़ने वाला था। “दीदी… मैं… आने वाला हूं…” “मेरे मुंह में ही छोड़ दे… टेस्ट करना है तेरा रस…”

मैंने जोर से झटके दिए और सारा गर्म रस दीदी के मुंह में छोड़ दिया। वो सब निगल गईं, फिर जीभ से होंठ चाटे। “मजा आया… पहली बार किसी का रस पिया…”

मैं थोड़ा थक गया लेकिन दीदी को कुर्सी पर बैठाया। उनकी चूत बिल्कुल सामने थी। मैं घुटनों पर बैठ गया। “कितनी प्यारी चूत है दीदी की… जी करता है बस देखता रहूं…”

मैंने चूत को चूम लिया। दीदी मचल उठीं, “आह्ह… हां… चाट ना… अपनी दीदी की चूत चाट…”

मैंने जीभ निकाली, धीरे-धीरे चाटना शुरू किया। लिपस्टिक का स्वाद, चूत का रस, सब मिलकर कमाल का था। जीभ अंदर डाली तो दीदी चीखीं, “ओह्ह… अंदर… और अंदर… जीभ से चोद मुझे…” आह्ह… इह्ह… ऊउइई… उनकी आवाजें बढ़ती गईं।

मैंने चूत के क्लिट को चूसा, उंगली डाली। दीदी कांप रही थीं। “हां… उंगली अंदर… और तेज… आह्ह… मैं झड़ रही हूं…” और उन्होंने मेरा मुंह रस से भर दिया। मैंने सब पी लिया। “पहली बार चूत का रस… कितना स्वादिष्ट है दीदी…”

मेरा लुंड फिर खड़ा हो गया। मैंने दीदी के पैर फैलाए। “अब असली खेल शुरू… अपनी चूत में डाल रहा हूं…”

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दीदी बोलीं, “तड़पा मत भाई… जल्दी डाल… तेरी दीदी की चूत तरस रही है…”

मैंने लुंड का सुपारा चूत पर रखा, धीरे से दबाया। टाइट थी बहुत। सुपारा घुसा तो दीदी की आंखों में आंसू आ गए। “आह्ह… दर्द हो रहा है… बहुत मोटा है… धीरे…”

लेकिन मुझे रोकना मुश्किल था। मैंने धीरे-धीरे धक्के मारे। हर धक्के के साथ चूत और गीली होती गई। 5 मिनट बाद पूरा 8 इंच अंदर था। दीदी रो रही थीं लेकिन मजा भी ले रही थीं। “हां… अब तेज… फाड़ दे अपनी दीदी की चूत…”

मैंने स्पीड बढ़ाई। चूत से खून भी निकलने लगा, मेरा लुंड लाल हो गया। मैंने उनके होंठ चूमे, बूब्स चूसे। “तेरे होंठ कितने सेक्सी हैं दीदी… और ये बूब्स… उफ्फ…”

15 मिनट तक मैंने जमकर चोदा। दीदी दो बार झड़ चुकी थीं। “आह्ह… ऊईई… और जोर से… फाड़ दे… तेरी दीदी तेरे लिए ही है…”

आखिर मैं भी झड़ गया। पूरा रस उनके बूब्स पर छोड़ दिया। दोनों थककर लेट गए।

उसके बाद उनकी शादी हो गई। अब वो अपने पति के साथ है, लेकिन वो शाम हम दोनों की जिंदगी का सबसे यादगार पल बन गया।

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