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माँ ने बेटी को मालिक के लौड़े के लिए तैयार किया

maa beti chudai, naukarani ki chut, malik ka lund, maid sex story: मैं एक बिजनेसमैन हूँ। उम्र 65 साल, लंबा कद, गोरा रंग और अब भी मजबूत शरीर। 40 साल से बिजनेस कर रहा हूँ। इस उम्र में भी दिमाग तेज है, बॉडी फिट है। रोज जिम जाता हूँ, योग करता हूँ, इसलिए लौड़ा अब भी लोहे जैसा सख्त हो जाता है। इतने सालों में खूब पैसा और ताकत कमाई। पूरे शहर में लोग मुझे सम्मान से ‘साब’ कहकर बुलाते हैं। मेरा सबसे बड़ा शौक है औरत के जिस्म का, और मैंने अपना ये शौक कभी कम नहीं होने दिया। जवानी से लेकर अब तक सैकड़ों औरतों को चोदा है। मेरे लौड़े को हर रोज नई चूत चाहिए। अपनी बीवी सुधा को अब चोदने में बिल्कुल मजा नहीं आता। वो अब बूढ़ी हो चुकी है, शरीर ढीला पड़ गया है, मम्मे लटक गए हैं, चूत सूखी-सूखी लगती है। और सच कहूँ तो जितना किसी दूसरी की औरत को चोदने में मजा आता है, उतना अपनी बीवी को मारने में कभी नहीं आया। वो घर संभालती है, बच्चे बड़े हो चुके हैं, लेकिन मेरी आग को बुझाने में अब वो नाकाम है।

मैंने अपने बच्चों की टीचर को भी चोदा है, स्कूल की प्रिंसिपल को भी बिस्तर पर लिटाया है। घर में काम करने वाली हर नौकरानी को चखाया है। ये सब मैं बहुत चुपके-चुपके करता हूँ, कोई शोर नहीं, कोई सबूत नहीं। पैसे देता हूँ, डराता हूँ, या लालच देता हूँ – बस काम हो जाता है। मेरे बड़े बंगले में सात नौकर काम करते हैं। सबको पीछे क्वार्टर दिए हुए हैं। उनमें से एक है पाशा। पाशा की बीवी बानो 37 साल की है। वो घर की सफाई का काम करती है। बानो के मम्मे इतने बड़े-बड़े हैं कि ब्लाउज में मुश्किल से समाते हैं, जैसे दो बड़े तरबूज हों। उसकी गांड मोटी, गोल और इतनी भरी हुई कि चलते वक्त लहराती है, देखकर लौड़ा खुद-ब-खुद खड़ा हो जाता है। बानो को देखते ही लगता है कि पाशा जैसे मर्द उसकी आग नहीं बुझा सकता। पाशा दुबला-पतला है, शराबी है, रात को थककर सो जाता होगा, लेकिन बानो का जिस्म तो आग का गोला है – गोरा रंग, मोटी जांघें, और वो साड़ी पहनकर काम करती है तो पल्लू बार-बार गिरता है, जैसे जानबूझकर दिखाती हो।

एक दिन सुबह-सुबह बानो सफाई करने मेरे कमरे में आई। साड़ी को कमर में ऊपर बांध रखा था, जिससे मोटी गोरी टांगें पूरी नंगी होकर चमक रही थीं, जांघों पर हल्की-हल्की बालें भी नहीं, चिकनी जैसे क्रीम लगाकर आई हो। पल्लू इतना ढीला बंधा था कि बड़े-बड़े मम्मे आधे बाहर झांक रहे थे, निप्पल की छाप साफ दिख रही थी। जैसे जानबूझकर मुझे दिखा रही हो। मैं बिस्तर पर बैठा अखबार पढ़ रहा था, लेकिन नजरें उसी पर थीं। उसकी गांड झुककर झाड़ू लगाते वक्त हिल रही थी, और मैं सोच रहा था कि इसकी चूत कितनी रसीली होगी। मैंने अखबार रख दिया और बोला, “बानो, तू सफाई बाद में करना, पहले इधर आ।”

वो रुक गई, झाड़ू नीचे रखी, आँखें नीची करके बोली, “साब, अगर मेरा आदमी देख लेगा तो… मार डालेगा मुझे।” मैंने तुरंत फोन उठाया और पाशा को बाहर अकील के पास फाइल लाने भेज दिया। पाशा निकल गया, कार स्टार्ट की आवाज आई। अब कमरा सिर्फ हम दोनों का था। मैंने उसकी तरफ देखकर कहा, “बानो तू मुझे अपने मम्मे दिखा रही है, लगता है तेरे बदन में बहुत आग लगी हुई है। तेरी गांड देखकर तो लगता है, रोज चुदाई चाहिए तुझे।” वो थोड़ा शरमाई, फिर हल्के से मुस्कुराई और बोली, “साब, पाशा तो बिल्कुल बेकार है। उसका लंड खड़ा भी नहीं होता। जैसे ही घुसाता है, दो-चार झटके में पानी निकाल देता है। मैं तो हर बार गरम होकर रह जाती हूँ। पाशा मेरी खुजली कभी शांत नहीं कर पाता। रात को सोते वक्त भी सोचती हूँ कि कोई मोटा लौड़ा मिले जो मेरी चूत को ठंडा कर दे।”

मैंने पूछा, “तो तू किसका लगाती है? बताना, नहीं तो पाशा को निकाल दूंगा।” वो बोली, “पाशा के भाई का, लेकिन वो कई महीने पहले गाँव चला गया। अब तो बस उंगली से काम चलाती हूँ, लेकिन वो क्या मजा देती है साब।” मैंने तपाक से कहा, “तो अब मैं तेरी खुजली मिटाता हूँ। जल्दी कपड़े निकाल, पूरी नंगी हो जा। बेड पर लेट और मुझे अपनी चूत खोलकर दिखा। गांड का छेद भी अच्छे से दिखाना। देखूं कितनी गर्म है तेरी रंडी जैसी चूत।”

बानो ने बिना एक पल गंवाए साड़ी खींचकर उतारी, पेटीकोट का नाड़ा खोला और वो नीचे गिर गया। ब्लाउज के बटन खोले, ब्रा नहीं पहनी थी, मम्मे बाहर उछल पड़े। चड्डी भी उतार दी। नंगी होकर बेड पर लेट गई। दोनों हाथों से चूत की मोटी लबियाँ खींचकर खोल दीं। अंदर से गीला रस चमक रहा था, जैसे पहले से तैयार हो। गांड ऊपर करके छेद भी दिखाया, गुलाबी और टाइट लग रहा था। वो कराहते हुए बोली, “साब… मेरे बुर में अपना मोटा लौड़ा घुसाओ… मेरी खुजली मिटाओ… तुम्हारे लौड़े के लिए मैंने सब कुछ खोल दिया है। देखो कैसे रस टपक रहा है, पाशा ने महीनों से नहीं छुआ। फाड़ दो मेरी चूत को, मुझे रंडी बना लो।”

मैंने पैंट उतारी, अंडरवियर नीचे किया। मेरा 7 इंच का मोटा लौड़ा पूरी ताकत से खड़ा था, नसें फूली हुईं, सुपारा लाल। बानो की आँखें फैल गईं, बोली, “वाह साब, कितना बड़ा और मोटा है… पाशा का तो आधा भी नहीं।” मैंने लौड़ा उसकी चूत पर रखकर धीरे-धीरे घिसना शुरू किया, ऊपर-नीचे रगड़ता रहा। वो सिहरकर बोली, “आह्ह्ह… साब… कितना गरम है… अंदर डालो ना… जल्दी… मेरी चूत जल रही है… घुसाओ ना हरामी लौड़े को।” मैंने कमर पकड़कर एक जोरदार धक्का मारा। पूरा लौड़ा एक झटके में अंदर चला गया, चूत इतनी गीली थी कि फिसलकर घुस गया। “आआह्ह्ह्ह… ओह्ह्ह्ह… साब… कितना मोटा… फाड़ दो मेरी चूत… हाय… ऊंह्ह… ऐसा मजा कभी नहीं मिला।”

मैंने धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाई, कमर हिलाकर धक्के मारने लगा। उसके बड़े मम्मे उछल-उछल रहे थे, जैसे जेली हों। मैंने दोनों मम्मों को जोर से मसला, निप्पल मुंह में लेकर चूसा, हल्का काटा। “आह्ह… साब… जोर से चूसो… काटो निप्पल… मज़ा आ रहा है… ह्ह्ह… मेरे दूध निकाल लो, पी लो सारा।” चूत से फच-फच की आवाज आने लगी, रस बह रहा था, बेडशीट गीली हो गई। मैं उसकी मोटी गांड को दबाता, थप्पड़ मारता, लाल निशान पड़ गए। वो दोनों पैरों से मेरी कमर लपेटकर कसकर चुदवा रही थी, बोली, “साब… बहुत चोदो… मेरे बुर की सारी गर्मी निकालो… मेरा दूध पियो… तुम्हारा लौड़ा पूरा अंदर डालो… और चोदो… और चोदो… बानो की चूत अब सिर्फ तुम्हारे लिए है… मारो साब… आह्ह्ह… हाय… ऊंह्ह… मुझे रंडी कहकर चोदो, मैं तुम्हारी गुलाम हूँ।”

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उसकी गंदी बातों से मेरा जोश सातवें आसमान पर पहुँच गया। मैं और तेज धक्के मारने लगा, पूरा कमरा थरथरा रहा था। तभी दरवाजा खुला और मेरी बीवी सुधा अंदर आ गई। वो स्तब्ध रह गई, आँखें फटी की फटी। मैं अपनी नौकरानी की बीवी को नंगा करके पेल रहा था, धक्के जारी थे। बानो घबरा गई, लेकिन मैं रुका नहीं, लौड़ा अंदर-बाहर करता रहा। सुधा गुस्से से बोली, “मेरे होते हुए तुम नौकर की बीवी… एक नौकरानी के साथ? क्या हो गया है तुम्हें?” मैंने बिना रुके कहा, “देख सुधा, तेरी उम्र हो गई। मुझे जवानी चाहिए। बानो नौकरानी है लेकिन जवान है।” बानो के मम्मे और चूत दिखाते हुए बोला, “देख कैसी गरम है, कैसी जवान है। इसको मेरे लौड़े से खुजली मिटानी थी। तू अब जा, मुझे जवानी का मजा लेने दे। तेरी चूत तो अब ढीली हो गई, मजा नहीं आता।”

सुधा बोली, “मैं ये बर्दाश्त नहीं करूंगी। घर में ये सब?” मैं बानो को पेलते हुए बोला, “सुधा, तू अपने कमरे में जा और आराम कर। मुझे चोदने दे, रंडियों का मजा लेने दे।” मैंने बानो की चूत में लौड़ा घुसाकर और तेज चोदा, फच-फच की आवाज और तेज हो गई। आखिर में मेरा गाढ़ा पानी उसके बुर के अंदर गिरा, पूरा भर दिया। बानो भी जोर से झड़ गई, शरीर कांप गया, बोली, “आह्ह… साब… कितना गरम पानी… मेरी चूत भर गई…” जाने से पहले वो फुसफुसाई, “साब… मेरे बुर को भूलना मत… मुझे अपनी रंडी बनाकर रखना। रोज चोदना मुझे।”

पाशा लौटा तो बानो चली गई। मैंने बानो को मेरे और सुधा दोनों के कमरे की सफाई का जिम्मा दे दिया। मालकिन और नौकरानी, दोनों एक ही लौड़े से चुदती रहीं, लेकिन सुधा चुप थी, शायद डरती थी या आदत पड़ गई थी। बानो रोज आती, चुदाई होती, और चली जाती।

एक दिन शाम को पाशा मेरा ड्रिंक बना रहा था, व्हिस्की में बर्फ डाल रहा था। तभी 19 साल की लड़की आई और बोली, “बाबा, अम्मा ने बुलाया है।” पाशा ने बताया ये उसकी बेटी मनु है। मनु को देखते ही मेरा लौड़ा तन गया। 19 साल की जवान लड़की, बड़े-बड़े दूध, मोटी गांड, भरा-पूरा जिस्म। गोरा रंग, लंबे बाल, सलवार कमीज में मम्मे उभरे हुए, चलते वक्त गांड की लहरें मुझे पागल कर रही थीं। मनु की चूत देखने की तलब लग गई, सोचा ये कुंवारी होगी, टाइट और ताजा।

अगले दिन बानो आई। मैंने उसे बेड पर धकेला, कपड़े उतारकर पूरी नंगी कर दी। उसके मम्मे चूसे, चूत में उंगलियाँ डालीं, क्लिट पर जीभ फिराई। वो तड़प उठी, बोली, “आह्ह… साब… जीभ से चाटो… मेरी चूत खा लो… ऊंह्ह…” जब उसकी चूत पूरी गीली हो गई तो मैंने कहा, “साली, अपने मर्द को छोड़कर मालिक से चुदवाती है। कमीनी रंडी, जा अपने मर्द का ढीला लंड ले बुर में।” वो डर गई, बोली, “साब आप ही चोदो, मेरा मर्द तो दो झटके में खत्म हो जाता है। आपका मोटा लौड़ा चाहिए मुझे।”

मैंने कहा, “अब तेरी चूत मारने में मजा नहीं आता हरामजादी। इतनी ढीली हो गई है।” चोदने के बाद पैसे दिए। बानो घबरा गई। बोली, “साब, अब तो मैं तुम्हारी रंडी हूँ। तुम ही लगाओ मुझे।” मैंने कहा, “मैं तेरी प्यास बुझाऊंगा, लेकिन तुझे मेरा एक काम करना होगा। मनु को मेरे लिए चुदवाना। तेरी बेटी की चूत मुझे चाहिए।”

वो चौंक गई, “साब, वो मेरी बेटी है… ये कैसे? वो अभी बच्ची है।” मैंने सख्ती से कहा, “मैं तुम सबको नौकरी और घर से निकाल दूंगा। पाशा को जेल भिजवा दूंगा।” वो डरकर बोली, “जो बोलोगे वो करूंगी… मेरी चूत चोदो साब।” मैंने उसकी चूत को जानवर की तरह पेला, धक्के पर धक्का मारा। माँ और बेटी दोनों मिलेंगी, ये सोचकर मेरा लौड़ा लोहे जैसा सख्त हो गया। बानो बोली, “मैं मनु को काम पर भेज दूंगी। बस धीरे करना साब, वो कुंवारी है।”

दूसरे दिन मनु सफाई करने आई। सफेद सलवार कमीज में, मम्मे कमीज से दबे हुए, गांड कमीज के नीचे हिल रही थी। सुधा भी खुश थी कि बानो अब नहीं आती। मैं ड्रिंक लेकर मनु को निहार रहा था, उसकी कमर पतली, लेकिन कूल्हे चौड़े। बोला, “मनु, सफाई छोड़, इधर आ।” मैंने उसे शरबत दिया, जिसमें हल्की शराब मिलाई थी, ताकि रिलैक्स हो जाए। वो पीने लगी, चेहरे पर लाली आ गई। मैंने कहा, “मनु तू बहुत खूबसूरत है। इतनी गोरी, जैसे दूध।” वो शरमाई, सिर झुका लिया। मैंने कहा, “तू इतनी गोरी है, क्या पूरा बदन ऐसा ही गोरा है? जांघें, चूत सब?”

वो बोली, “साब पहले मैं बहुत पतली थी, अब थोड़ी भरी हुई हूँ। अम्मा कहती है अब शादी लायक हो गई हूँ।” मैंने कहा, “पास आकर दिखा तो सही।” वो पास आई, मैंने उसकी कमर छुई, वो कांप गई। मैंने उसके मम्मों की तरफ देखकर कहा, “तू तो बहुत बड़ी हो गई है। मम्मे कितने भरे हैं।” वो और शरमाई। मैंने कहा, “बड़ी होने के बाद तूने वो सब किया जो बड़े लोग करते हैं। तुझे पता है ना? चुदाई का मजा?” वो डर गई। मैंने कहा, “डर मत, बता।”

वो धीरे से बोली, “मैंने अम्मा और काकू को देखा है। रात को कमरे में।” मैंने कहा, “तू होशियार है। तूने भी किसी के साथ किया?” वो बोली, “काकू कभी-कभी मुझे हाथ लगाता था। इसलिए अम्मा ने उसे निकाल दिया।”

मैंने पूछा, “काकू क्या करता था? विस्तार से बता।” वो बोली, “काकू फ्रॉक ऊपर करके देखता था। मस्ती का खेल खेलेंगे बोलकर पजामा खोलता था। मेरा हाथ उसके लंड पर रखता था, हिलाता था। मम्मे दबाता था, चूसता था। अम्मा को पता चला तो निकाल दिया। लेकिन मुझे अच्छा लगता था साब, गुदगुदी होती थी।”

मैंने उसे 100 रुपये दिए। वो खुश होकर चली गई, बोली, “साब, कल फिर आऊंगी।” अगले दिन मैंने कहा, “मनु, मेरे बदन पर तेल लगा दे। पीठ में दर्द है।” मैं सिर्फ अंडरवियर में बेड पर लेट गया। दरवाजा बंद करवाया। मनु तेल लगाने लगी। उसका मुलायम हाथ मेरे बदन पर घूम रहा था, पीठ से कंधों तक, फिर जांघों पर। मेरा लौड़ा अंडरवियर में खड़ा हो गया, टेंट बन गया। मैंने पैर फैलाए। मनु जांघों पर तेल लगा रही थी, उसकी उंगलियाँ करीब आ रही थीं।

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मैंने कहा, “मनु, तेरा काकू का अच्छा है या मेरा?” वो डर गई। मैंने कहा, “देख के बता।” मैंने लौड़ा बाहर निकाला, मोटा और तना हुआ। मनु शरमाकर देखने लगी, आँखें चमक उठीं। मैंने कहा, “इस पर तेल लगा, डर मत। छूकर देख।”

वो हल्के हाथ से तेल लगाने लगी, ऊपर-नीचे हिलाने लगी। मैंने कहा, “मनु, अम्मा और काकू क्या करते हैं सब बता।” वो बोली, “अम्मा काकू को कमरे में ले जाती है। मैं खिड़की से देखती हूँ। अम्मा साड़ी ऊपर करती है, ब्लाउज खोलती है। काकू लंड निकालकर अम्मा की चूत में डालता है। ऊपर-नीचे होता है। अम्मा के मम्मे चूसता है। फिर सफेद पानी निकलता है, अम्मा कराहती है – आह्ह… चोदो… और चोदो।”

मैंने पूछा, “देखकर तुझे दिल करता है?” वो शरमा गई, बोली, “हाँ साब, मेरी चूत गीली हो जाती है। उंगली करती हूँ।” मैं समझ गया उसे अच्छा लगता है। मनु तेल लगाकर हिला रही थी, स्पीड बढ़ गई। मैं उसके हाथ में ही झड़ गया, गाढ़ा पानी निकला। बोला, “देख, जो तेरी अम्मा की चूत में जाता है वो तेरे हाथ में आ गया। स्वाद चख।”

मैंने कहा, “मनु, तू मेरा ध्यान रख। मैं तुझे अच्छे कपड़े, गहने दूंगा।” वो खुश होकर चली गई, बोली, “साब, आपका लौड़ा बहुत अच्छा है।”

काम के सिलसिले में बाहर गया। छह दिन बाद लौटा, थका हुआ लेकिन मनु की याद में लौड़ा तना था। मनु आई, सफाई करने। मैंने उसके लिए नए कपड़े लाए – सलवार कमीज, ब्रा, चड्डी। वो बहुत खुश हुई, बोली, “साब, आप कितने अच्छे हैं।” उसने बताया, “अम्मा मुझे बाहर भेजती है और वॉचमैन के साथ वो सब करती है जो काकू के साथ करती थी। मैंने देखा, अम्मा की चूत में वॉचमैन का लंड जाता है, वो चिल्लाती है – आह्ह… पेलो… मेरी चूत फाड़ो।”

मैंने कहा, “मनु, अब हिसाब बराबर कर। तूने मेरा लौड़ा देखा, अब मुझे तेरी चूत दिखा।” वो शरमाई। मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोला, कमीज ऊपर की, चड्डी नीचे की। उसकी चूत गोरी, कोमल बालों वाली, छोटी-सी फांक। मैंने मुंह लगाया, सुंघा – मीठी खुशबू, जीभ से चाटा। वो तड़प उठी, “आह्ह… साब… हाय… क्या कर रहे हो… ऊंह्ह… बहुत अच्छा लग रहा है… अम्मा को भी ऐसे ही करते हैं?”

मैंने उंगली डाली, क्लिट चाटी। उसका रस मेरे मुंह में आया। वो कराह रही थी, “और… साब… और चाटो… आह्ह… मेरी चूत खा लो…” तभी सुधा आती दिखी, दरवाजे पर नॉक। मैंने मनु को जाने दिया। वो खुश थी, बोली, “साब, कल फिर।”

मेरा लौड़ा अब भी तना था। मैंने बानो को बुलाया। बानो ने दरवाजा बंद किया, मेरी पैंट खोली, लौड़ा मुंह में लिया। “ग्ग्ग्ग… गी… गी… साब का लौड़ा कितना मोटा… गों… गों… पूरा गले तक घुसाओ।” वो चूसती रही, लार टपक रही थी।

वो नंगी होकर लेट गई। बोली, “साब, अपनी रंडी की चूत पेल दो।” मैंने लौड़ा घुसाया और जोरों से चोदा। बोला, “तेरी चूत तो भोसड़ा हो गई, कितनों का लंड खाया?” वो बोली, “साब, मेरा मर्द नहीं चोदता। मेरी बेटी भी मेरे पहले साब की है। पाशा से नहीं।” मैं स्तब्ध, लेकिन जोश बढ़ गया।

मैंने कहा, “रंडी, मेरे दोस्तों को भी खुश कर।” वो बोली, “जिसका कहो, पैर खोल दूंगी। बस मनु को तैयार कर रही हूँ।” मैंने जोर-जोर से पेला और उसके बुर में पानी डाल दिया। अब मनु को चोदने का मजा और बढ़ जाएगा।

मनु की चूत का स्वाद जीभ पर लगा रह गया था। वो गोरी, मुलायम, थोड़े कोमल बालों वाली चूत देखकर मेरा लौड़ा हर वक्त तनाव में रहने लगा। मैं सोचता रहता कि कब वो पूरी तरह मेरे नीचे आएगी, कब मैं उसकी कुंवारापन तोड़ूंगा। बानो को मैंने साफ कह दिया था – या तो मनु को मेरे लिए तैयार कर, या सबको घर से निकाल दूंगा। बानो डर गई थी। उसकी आँखों में वो डर और मजबूरी दोनों दिखते थे, लेकिन उसकी चूत को मेरे लौड़े की आदत पड़ चुकी थी। वो रोज आती, कपड़े उतारती और बिना कुछ कहे बेड पर लेट जाती। मैं उसे पेलता, वो चिल्लाती – “आह्ह… साब… फाड़ दो… मेरी चूत तुम्हारी है” – फिर चुपचाप चली जाती। लेकिन अब समय आ गया था मनु को भी लेने का। मैंने बानो से कहा, “तेरी बेटी की चूत अब मेरी होगी। माँ-बेटी दोनों मेरी रंडियां बनेंगी।”

एक शाम बानो अकेली आई। उसने दरवाजा बंद किया, साड़ी ऊपर करके बैठ गई और बोली, “साब… मनु तैयार है। वो डर रही है, लेकिन मैंने समझा लिया है। मैंने उसे बताया कि साब कितने अच्छे हैं, पैसे देंगे, सुख देंगे। आज वो सफाई के बहाने आएगी। आप धीरे करना… वो कभी किसी ने छुआ भी नहीं है। कुंवारी है, टाइट चूत है।”

मैंने मुस्कुराकर कहा, “अच्छा किया बानो। तू अपनी बेटी को मेरे लिए ला रही है, इनाम मिलेगा। आज रात दोनों माँ-बेटी मेरे बिस्तर पर होंगी। मैं दोनों की चूत एक साथ चोदूंगा।”

बानो ने सिर झुकाकर कहा, “जो आप कहेंगे साब… बस मेरी नौकरी और घर मत छीनना। मनु को मैंने कहा है कि साब का लौड़ा लेगी तो मजा आएगा, दर्द पहले होगा लेकिन बाद में स्वर्ग।”

रात के 9 बज गए। घर में सब सो चुके थे, पाशा क्वार्टर में शराब पीकर सो गया था। मनु सफाई के बहाने ऊपर आई। सफेद सलवार कमीज में वो और भी गोरी लग रही थी। मम्मे कमीज से बाहर झांक रहे थे, निप्पल की छाप साफ। वो झाड़ू लेकर कमरे में घुसी तो मैंने कहा, “मनु, झाड़ू रख। इधर आ। आज तेरी अम्मा भी है।”

वो डरते-डरते पास आई, देखा बानो पहले से कमरे में थी। मैंने उसे बेड पर बिठाया। उसके कंधे पर हाथ रखा। वो कांप रही थी, हाथ ठंडे हो गए थे। मैंने धीरे से कहा, “मनु, तू डर मत। तुझे कुछ नहीं होगा। तेरी अम्मा ने तुझे मेरे पास भेजा है। तू मेरी अच्छी लड़की बनेगी तो बहुत सुख मिलेगा। नए कपड़े, गहने, पैसे… सब कुछ। और मजा भी आएगा, जैसे तेरी अम्मा को आता है।”

मनु ने नीची नजरों से कहा, “साब… मुझे डर लग रहा है… मैंने कभी… अम्मा, क्या होगा?” बानो ने मनु का हाथ पकड़ा, बोली, “बेटी, डर मत। साब बहुत प्यार से करते हैं। मैं रोज चुदवाती हूँ, देख कितना मजा आता है।”

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मैंने कहा, “शश्श… कुछ नहीं होगा। पहले तेरी अम्मा को देख।” मैंने बानो को इशारा किया। बानो ने साड़ी उतारी, पेटीकोट गिराया, ब्लाउज खोला और नंगी होकर बेड पर लेट गई। उसके बड़े मम्मे फैल गए, चूत खुली पड़ी थी। उसने मनु से कहा, “बेटी, डर मत। साब बहुत प्यार करते हैं। देख, अम्मा कैसे चुदवाती है। साब, मेरी चूत में उंगली डालो, मनु देखे।”

मैंने बानो की चूत में उंगली डाली, अंदर-बाहर किया। वो कराह उठी, “आह्ह… साब… मनु देख रही है… ऊंह्ह… और गहरा… मेरी बेटी को सिखाओ कैसे चोदते हो।” फिर मैंने मनु का हाथ पकड़ा और अपने लौड़े पर रख दिया। वो कांपते हुए छू रही थी। मैंने पैंट उतारी, लौड़ा बाहर – 7 इंच का मोटा, नसों से भरा हुआ। मनु की आँखें फैल गईं, बोली, “साब… इतना बड़ा… अम्मा, ये कैसे जाएगा?”

मैंने कहा, “देख मनु, ये तेरा इंतजार कर रहा है। धीरे-धीरे जाएगा, मजा आएगा।” मैंने उसकी कमीज के बटन खोले। गोरे मम्मे बाहर आए। छोटे नहीं, बल्कि भरे हुए, निप्पल गुलाबी, सख्त हो गए थे। मैंने एक मम्मा मुंह में लिया और चूसने लगा, जीभ से घुमाया। मनु सिहर उठी, “आह्ह… साब… हाय… गुदगुदी हो रही है… अम्मा, देखो साब क्या कर रहे हैं।”

बानो ने मनु की सलवार का नाड़ा खोला। सलवार नीचे गिर गई। गोरी जांघें चमक रही थीं। मैंने चड्डी भी उतार दी। मनु की चूत फिर से सामने थी – गोरी, थोड़े बाल, बिल्कुल ताजा, हल्का गीला हो चुका था। मैंने मुंह लगाया और धीरे-धीरे चाटना शुरू किया। जीभ से क्लिट को छुआ तो वो चीखी, “आआह्ह्ह… साब… क्या कर रहे हो… ऊंह्ह… बहुत… बहुत अच्छा लग रहा है… अम्मा, तुम भी ऐसे करवाती हो?”

मैंने उंगली अंदर डाली। वो कसी हुई थी। कुंवारी चूत टाइट। मैंने धीरे-धीरे अंदर-बाहर किया। मनु तड़प रही थी, “आह्ह… साब… दर्द हो रहा है… लेकिन रुकना भी नहीं… ओह्ह… और करो… मेरी चूत गीली हो गई।” बानो ने मनु के होंठ चूमे, बोली, “बेटी, मजा आ रहा है ना? अब साब का लौड़ा ले।”

मैंने मनु को लेटाया। पैर फैलाए। लौड़ा उसकी चूत पर रखा। धीरे से दबाया। सुपारा अंदर गया। मनु चीखी, “आह्ह्ह्ह… साब… दर्द… बहुत दर्द… अम्मा, पकड़ो मुझे।” मैं रुक गया। उसके मम्मे चूसते रहा, निप्पल काटा। बानो ने मनु के हाथ पकड़े, बोली, “बेटी, थोड़ा सहन कर, बाद में स्वर्ग लगेगा।”

धीरे-धीरे मैंने फिर दबाया। आधा लौड़ा अंदर। मनु की आँखों में आंसू, लेकिन वो कराह रही थी, “ऊंह्ह… साब… और… धीरे… अम्मा, साब का लौड़ा कितना मोटा है।” एक जोरदार धक्का। पूरा लौड़ा अंदर। मनु चिल्लाई, “आआआह्ह्ह्ह… फट गई… साब… हाय… मेरी चूत फट गई…” खून थोड़ा सा निकला, बेड पर दाग लग गया। मैंने रुककर उसके आंसू पोंछे, चूमता रहा। फिर धीरे-धीरे हिलना शुरू किया। धीरे… धीरे… स्पीड बढ़ाई।

मनु अब दर्द से ज्यादा मजा ले रही थी। “आह्ह… साब… अब अच्छा लग रहा है… और चोदो… ऊंह्ह… अम्मा, देखो साब मुझे चोद रहे हैं… कितना गहरा जा रहा है।” मैंने जोर-जोर से पेलना शुरू किया। फच… फच… फच… चूत से रस और खून मिलकर निकल रहा था। बानो पास बैठी देख रही थी, खुद की चूत में उंगली कर रही थी, बोली, “बेटी, मजा आ रहा है ना? साब, मेरी बेटी की चूत कैसी लगी? टाइट है ना?”

मैंने मनु को घोड़ी बनाया। गांड ऊपर। पीछे से लौड़ा घुसाया। मनु चिल्लाई, “आह्ह… कितना गहरा… साब… मारो… मेरी चूत मारो… अम्मा, तुम भी आओ ना।” मैंने गांड पर थप्पड़ मारे। उसकी गांड लाल हो गई, वो बोली, “आह्ह… थप्पड़ मारो… मुझे रंडी बना लो साब।”

फिर मैंने उसे गोद में उठाया। सामने बैठाकर चोदा। उसके मम्मे मेरे मुंह में। वो ऊपर-नीचे हो रही थी। “आह्ह… साब… मैं… मैं झड़ रही हूँ… आआह्ह्ह्ह…” वो पहली बार झड़ी। पूरा शरीर कांप गया, चूत ने लौड़े को कस लिया।

मैं भी जोर से धक्का मारकर उसके अंदर झड़ गया। गाढ़ा पानी भर गया। मनु थककर लेट गई। बानो ने उसे गले लगाया। बोली, “बेटी, अब तू भी साब की रंडी हो गई। मजा आया ना?”

मैंने दोनों को देखा। माँ और बेटी, दोनों नंगी, मेरे पानी से भरी। बोला, “अब से तुम दोनों रोज आएंगी। कभी अलग, कभी साथ। मेरी दो रंडियां। माँ-बेटी की चूत एक साथ चोदूंगा।”

मनु शरमाकर बोली, “साब… अब मेरी चूत सिर्फ आपके लिए… अम्मा, आप सही कहती थीं, दर्द के बाद मजा है।”

बानो हंसकर बोली, “साब, अब हम दोनों आपकी हैं। जो कहेंगे, वो करेंगे। मेरी बेटी को और चोदो, मैं देखूंगी।”

उस रात मैंने दोनों को एक साथ चोदा। बानो नीचे लेटी, मनु ऊपर। मैं बारी-बारी दोनों की चूत में लौड़ा डालता रहा। दोनों कराह रही थीं – “आह्ह… साब… और… चोदो… हमारी चूत फाड़ दो… माँ-बेटी दोनों तेरी रंडियां हैं… पेलो… आह्ह… ऊंह्ह… कितना मोटा लौड़ा… भर दो पानी से।” कमरा उनकी चीखों से गूंज रहा था, लेकिन बाहर कोई नहीं सुनता था।

अब बंगला मेरी रंडियों का अड्डा बन चुका था। मालकिन सुधा को पता था, लेकिन वो चुप थी। शायद अब उसे भी आदत पड़ गई थी, या वो जानती थी कि मेरी आग नहीं रुकेगी। माँ-बेटी दोनों रोज आतीं, कभी सुबह, कभी रात। मनु अब बिंदास हो गई थी, बोली, “साब, अम्मा की चूत ढीली है, मेरी टाइट चोदो।” बानो हंसती, “बेटी, दोनों मिलकर साब को खुश करेंगी।” और मैं दोनों को पेलता रहता, जैसे जिंदगी का असली मजा यही हो।

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1 thought on “माँ ने बेटी को मालिक के लौड़े के लिए तैयार किया”

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