Di ka seduction – chudai ki planning sex story: हाय दोस्तों, मैं नील फिर से हाजिर हूँ अपनी कहानी का दूसरा हिस्सा लेकर। आप सबके पिछले भाग के लिए इतने सारे कमेंट्स और प्यार के लिए दिल से शुक्रिया। आपने पढ़ा कि कैसे राशि दीदी ने मेरी दीदी नेहा को अपने भाई के साथ चुदाई की बात बताई। नेहा दीदी पहले तो हैरान हुईं, लेकिन फिर उनके मन में भी मेरे साथ चुदाई का खयाल आया। अब वो मुझे सेड्यूस करने की ठान चुकी थीं। तो चलिए, बिना टाइम वेस्ट किए, कहानी को आगे बढ़ाते हैं।
कहानी का पिछला भाग: बहेन की चुदाई की तलब का शिकार भाई-1
अगली सुबह थी रविवार की। दीदी जल्दी उठ गईं। उनके चेहरे पर एक अजीब सी खुशी थी। वो बेड पर लेटे-लेटे सोच रही थीं कि जब वो मुझे अपने जाल में फँसाएँगी, तो कितना मज़ा आएगा। राशि दीदी की तरह वो भी जब चाहे मेरे साथ चुदाई कर पाएँगी। ये खयाल उनके बदन में सिहरन पैदा कर रहा था। उनकी चूत में हल्की सी गीलापन महसूस हो रहा था। दीदी ने अपने आपको शीशे में देखा। उन्होंने अपनी टाइट टी-शर्ट और छोटी सी शॉर्ट्स पहनी थीं, जो उनकी गोरी जाँघों और मटकती गांड को और हाईलाइट कर रही थीं। वो मुस्कुराईं और सोचने लगीं, “नील आज बच नहीं पाएगा। आज से उसका लंड मेरी चूत का मेहमान बनेगा।”
दीदी तैयार हुईं। उन्होंने जानबूझकर एक पुरानी, टाइट टी-शर्ट चुनी, जो उनके 34 इंच के बूब्स को पूरी तरह से उभार रही थी। उनकी ब्रा के निशान साफ दिख रहे थे। नीचे उन्होंने एक छोटी सी शॉर्ट्स पहनी, जो उनकी गांड को आधा ढक रही थी। हर कदम पर उनकी गांड मटक रही थी, और वो जानती थीं कि ये मेरे होश उड़ा देगी। दीदी ने अपने बाल खुले छोड़े, जो उनकी कमर तक लहरा रहे थे। वो शीशे के सामने खड़ी होकर पोज़ दे रही थीं, और अपने आपको चेक कर रही थीं कि कहीं कुछ कमी तो नहीं। फिर वो मेरे रूम की तरफ बढ़ीं।
मैं रविवार की सुबह अपनी आदत के मुताबिक देर तक सो रहा था। रात को दोस्तों के साथ गेम खेलते-खेलते देर हो गई थी। दीदी धीरे से मेरे रूम में आईं। उन्होंने दरवाजा हल्का सा खुला छोड़ा और मेरे बेड के पास खड़ी हो गईं। वो मुझे प्यार भरी नजरों से देख रही थीं। उनके मन में बस एक ही खयाल था कि कैसे मुझे अपने करीब लाएँ और अपनी चुदाई की प्यास बुझाएँ। दीदी जानती थीं कि मैं शरीफ लड़का हूँ, और शायद सेक्स के बारे में ज्यादा नहीं जानता। लेकिन वो ये भी जानती थीं कि अगर मुझे थोड़ा उकसाया जाए, तो मैं भी उनकी आग में जलने को तैयार हो जाऊँगा।
दीदी मेरे पास आईं और मेरे सिर पर प्यार से हाथ फेरने लगीं। उनकी उंगलियाँ मेरे बालों में धीरे-धीरे घूम रही थीं, और उनकी साँसों की गर्मी मेरे चेहरे पर महसूस हो रही थी। मैं आँखें मलते हुए उठा और दीदी को देखकर चौंक गया। “दी, आप यहाँ? क्या हुआ? कोई काम है क्या?” मैंने नींद भरी आवाज में पूछा।
दीदी ने शरारती मुस्कान के साथ कहा, “क्या, मैं अपने प्यारे भाई को उठाने नहीं आ सकती? बिना काम के तेरे रूम में नहीं आ सकती?” उनकी आवाज में एक अजीब सी मिठास थी, जो पहले कभी नहीं सुनी थी।
मैंने हँसते हुए कहा, “अरे, आ सकती हो ना। कभी भी आओ, दी।” फिर मैं बेड पर बैठ गया। तभी मेरा ध्यान दीदी के कपड़ों पर गया। वो इतनी टाइट और छोटी टी-शर्ट में थीं कि उनके बूब्स साफ उभर रहे थे। उनकी शॉर्ट्स इतनी छोटी थी कि उनकी गोरी जाँघें और गांड का उभार मेरे सामने था। मैंने हैरानी से पूछा, “दी, आज आपको क्या हुआ? रविवार है, तो क्या हुआ? ये इतने छोटे और पुराने कपड़े क्यों पहने?”
दीदी ने मासूमियत भरे अंदाज में कहा, “बस, मन हुआ तो पहन लिया। क्या, अच्छे नहीं लग रहे? मैं चेंज कर लूँ?” लेकिन उनके मन में कुछ और ही चल रहा था। वो सोच रही थीं, “ये कपड़े तेरे लिए ही पहने हैं, नील। तू हँस रहा है, लेकिन जल्दी ही तू मेरे सामने घुटने टेकेगा।”
मैंने हँसते हुए कहा, “नहीं, अच्छे हैं। बस थोड़े छोटे हैं। आपकी बॉडी ज्यादा दिख रही है। ऐसा लग रहा है जैसे किसी बच्चे के कपड़े पहन लिए।” मैंने ये मजाक में कहा, लेकिन दीदी की आँखों में एक चमक थी।
वो मन में सोच रही थीं, “तूने इतनी जल्दी नोटिस कर लिया। अब बस तुझे और उकसाना है।” फिर वो बोलीं, “चल, बहुत बातें हो गईं। अब तू उठ और तैयार हो जा। आज मैं तुझे पढ़ाऊँगी।”
मैंने कहा, “ठीक है, दी। मैं नहाकर आता हूँ।” और मैं बाथरूम की तरफ चला गया। दीदी ने सोचा कि मैं हमेशा नहाकर तौलिया लपेटकर रूम में आता हूँ। ये उनकी बॉडी देखने का अच्छा मौका होगा। वो मेरे रूम में ही रुक गईं और मेरे बेड पर बैठकर मेरा इंतज़ार करने लगीं।
मैं नहाकर तौलिया लपेटे रूम में आया। हमेशा की तरह रूम खाली होता था, तो मैं बिना सोचे तौलिया खोलने लगा। जैसे ही मैंने तौलिया खोला, मुझे दीदी दिखीं। वो बेड पर बैठी मुझे घूर रही थीं। मैंने झट से तौलिया वापस लपेट लिया और बोला, “दी, आप यहाँ क्या कर रही हो?”
दीदी का ध्यान मेरे तौलिया पर था। उन्हें मेरे लंड की एक झलक मिल गई थी। मेरा लंड 7 इंच का, मोटा और सख्त था। दीदी के मुँह से बस “हाय…” निकला, और वो खो सी गईं। मैंने चुटकी बजाकर कहा, “दी, कहाँ खो गईं? आप यहाँ क्यों हैं?”
दीदी हड़बड़ाते हुए बोलीं, “वो… मैं तुझे पढ़ाने आई थी। लेकिन तुझे ऐसे देखकर ध्यान भटक गया।” उनकी आवाज में शरम और उत्सुकता दोनों थीं।
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मैंने कहा, “सॉरी दी, मुझे नहीं पता था आप रूम में हो। मैं तो रोज़ तौलिया खोलकर कपड़े बदल लेता हूँ।” मैं थोड़ा शर्माया, लेकिन दीदी की आँखों में वो चमक देखकर मुझे अजीब सा लगा।
दीदी ने मस्ती भरे अंदाज़ में कहा, “अच्छा, बच्चू! कल जब मैं ब्रा-पैंटी में थी, तब तूने भी तो मुझे घूरा था। मैंने तुझे कुछ नहीं कहा। अब तू शरमा रहा है?”
मैंने हँसते हुए कहा, “हाँ, अब तो दोनों ने एक-दूसरे को बिना कपड़ों के देख लिया। अब शरम कैसी?” फिर मैंने कहा, “अच्छा, आप अब जाओ। मैं कपड़े बदलकर आपको बुला लूँगा।”
दीदी बाहर चली गईं, और मैंने कपड़े बदले। फिर मैंने दीदी को आवाज़ दी। दीदी नाश्ता लेकर आईं और बोलीं, “चल, तू पढ़ाई कर। मैं तुझे अपने हाथों से खिलाती हूँ।” उनके मन में था कि वो मेरे पास बैठकर मुझे अपनी क्लीवेज दिखाएँगी। वो जानबूझकर मेरे सामने झुकीं, ताकि उनकी ढीली टी-शर्ट में से उनके बूब्स की गहरी क्लीवेज दिखे। उनकी ब्रा का लाल रंग साफ झलक रहा था। लेकिन मेरा ध्यान किताब पर था, और मैंने उनकी क्लीवेज की तरफ नहीं देखा।
दीदी मन में सोच रही थीं, “ये नील भी ना, कितना शरीफ है। मैं इतनी कोशिश कर रही हूँ, और ये देख ही नहीं रहा। लगता है इसे सेड्यूस करने में टाइम लगेगा।” वो थोड़ा निराश हुईं, लेकिन हार नहीं मानीं।
थोड़ी देर बाद मम्मी ने हमें खाना खाने बुलाया। मैं नीचे चला गया, लेकिन दीदी बोलीं, “नील, तू जा। मैं 10 मिनट में आती हूँ।” वो वॉशरूम गईं और अपनी शॉर्ट्स और पैंटी उतार दीं। सुबह मेरे लंड की झलक उनके दिमाग में बार-बार आ रही थी। वो शीशे के सामने खड़ी हो गईं और अपनी चूत को सहलाने लगीं। उनकी चूत पहले से ही गीली थी। वो मेरे लंड को इमेजिन करने लगीं। “हाय… नील, तेरा लंड कितना मोटा है। इसे अपनी चूत में लेने का मज़ा ही कुछ और होगा,” वो धीरे-धीरे बुदबुदा रही थीं। उनकी उंगलियाँ उनकी चूत के दाने को रगड़ रही थीं, और वो “आह… उह…” की सिसकारियाँ ले रही थीं।
वो सोच रही थीं कि मैं उनकी चूत में अपना लंड डाल रहा हूँ। “हाँ नील, और ज़ोर से… मेरी चूत मार,” वो कल्पना में चिल्ला रही थीं। उनकी उंगलियाँ तेज़ी से अंदर-बाहर हो रही थीं, और उनकी चूत से गीलेपन की ‘पच-पच’ की आवाज़ आ रही थी। 10 मिनट में उनका पानी निकल गया, और वो “आह… नील…” कहते हुए झड़ गईं। फिर उन्होंने सब साफ किया और नीचे खाना खाने चली गईं।
खाना खाने के बाद हम अपने-अपने रूम में चले गए। तभी दीदी के पास राशि दीदी का कॉल आया। राशि दीदी बोलीं, “नेहा, वो कल वाले नोट्स भेज दे।”
दीदी ने कहा, “हाँ, ठीक है। मैं भेजती हूँ।”
राशि दीदी ने शरारती अंदाज़ में पूछा, “और बता, उस बात का क्या हुआ? कुछ डिसाइड किया? अपने भाई का लंड लेगी, या उंगलियों से ही काम चलेगा?”
दीदी ने हँसते हुए कहा, “हाँ यार, डिसाइड कर लिया। अब मैं नील का लंड ही लूँगी। उंगलियाँ चलाते-चलाते थक गई हूँ। अब भाई का लंड चाहिए।”
राशि दीदी ने ताली बजाते हुए कहा, “ये हुई ना बात! तो कुछ शुरू किया?”
दीदी ने उत्साह से कहा, “हाँ, शुरू कर दिया। आज मैंने छोटे कपड़े पहने, उसकी क्लीवेज दिखाने की कोशिश की। लेकिन वो शरीफ इतना है कि देखा ही नहीं। हाँ, आज सुबह मुझे उसके लंड की झलक मिली। यार, क्या मोटा और सख्त लंड है उसका!”
राशि दीदी ने हँसते हुए कहा, “वाह, तू तो तेज़ी से बढ़ रही है। बस, ऐसे ही उसे उकसाती रह। वो जल्दी ही तेरे जाल में फँसेगा।”
दीदी ने कहा, “हाँ, बस उसी दिन का इंतज़ार है।”
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राशि दीदी बोलीं, “चल, मैं रखती हूँ। मेरा भाई आ गया है, और घर में सब बाहर गए हैं। आज दिन में एक बार चुदाई कर लूँगी।”
दीदी ने हँसते हुए कहा, “हाँ, जा, अपने भाई के लंड के मज़े ले। मैं भी नील को सेड्यूस करके उसका लंड लेने की प्लानिंग कर रही हूँ।”
उस दिन रविवार था, तो मैं अपने दोस्तों के साथ बाहर चला गया। रात को देर से लौटा, तो दीदी से कोई बात नहीं हुई। लेकिन दीदी पूरे दिन मेरे बारे में सोचती रहीं। वो प्लान कर रही थीं कि कैसे मुझे अपनी बॉडी दिखाकर उकसाएँगी और मेरे लंड को अपनी चूत में लेंगी। रात को वो बेड पर लेटीं और फिर से मेरे लंड की कल्पना करने लगीं। उनकी चूत फिर से गीली हो गई, और वो “आह… नील, जल्दी आ मेरी चूत में…” बुदबुदाते हुए सो गईं।
तो दोस्तों, ये था कहानी का दूसरा हिस्सा। अगले हिस्से में पढ़िए कि दीदी ने मुझे सेड्यूस करने के लिए क्या-क्या किया और क्या हमारी चुदाई की शुरुआत हुई। अपनी राय ज़रूर बताएँ। आपको दीदी का सेडक्शन कैसा लगा? क्या आप भी ऐसी हॉट स्टोरीज़ पढ़ना पसंद करते हैं? कमेंट में बताएँ।
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