Train me anjaan ladki ke sath sex ये बात कुछ दिन पहले की है, जब मुझे अपने काम के सिलसिले में लखनऊ जाना था। मैं सुबह-सुबह तैयार होकर स्टेशन पहुँचा, लेकिन बदकिस्मती से मेरी ट्रेन निकल चुकी थी। हार मानने का कोई सवाल ही नहीं था, सो मैंने तुरंत एक लोकल ट्रेन पकड़ ली। ट्रेन में इतनी भीड़ थी कि पैर रखने की जगह भी मुश्किल से मिल रही थी। बाद में पता चला कि किसी बड़े एग्जाम की वजह से इतनी भीड़ थी। लोग एक-दूसरे से चिपके खड़े थे, और मैं किसी तरह धक्का-मुक्की करके ट्रेन के दरवाजे के पास पहुँचा। वहाँ एक लड़की बैठी थी, जिसे सीट मिल गई थी। मैं उसके पास ही खड़ा हो गया, मेरी कमर उसके कंधे से टच हो रही थी। लेकिन मेरा ध्यान उसकी तरफ कम ही था, क्योंकि मेरी नजर दूसरी लड़की पर पड़ी, जो थोड़ी दूर भीड़ में खड़ी थी।
वो लड़की देखने में इतनी मस्त थी कि बस मन कर रहा था कि उसे अभी पकड़ लूँ। ऐसा लग रहा था जैसे वो किसी शादी के फंक्शन से आ रही हो। उसने लाल रंग की टाइट जीन्स और काली टी-शर्ट पहनी थी, जिसमें उसका फिगर पूरी तरह उभर रहा था। उसका फिगर करीब 32-30-32 का होगा, और चेहरा ऐसा कि किसी हीरोइन से कम नहीं। उसके बाल खुले थे, और वो ऊपर की रेलिंग पकड़कर खड़ी थी, जिससे उसकी बगल (अंडरआर्म) साफ दिख रही थी। उसकी बगल में हल्के-हल्के बाल थे, जो उसे और सेक्सी बना रहे थे। मौसम भी शादियों का था, और उसकी थकी हुई आँखों में एक अलग ही चमक थी। Public Place Risky Sex Story
मैं उसे देखकर बेकाबू हो रहा था। मन में बस एक ही ख्याल था कि काश उसे अभी चोद सकूँ। वो मेरे पास थोड़ी जगह देखकर मेरे और करीब आ गई। मेरे हाथ रेलिंग पर थे, और उसने अपने आपको मेरे इतने करीब एडजस्ट किया कि उसका बदन मेरे हाथ से टच होने लगा। उसकी चूची मेरे हाथ पर बार-बार रगड़ रही थी, और मैं तो जैसे सातवें आसमान पर था। पहले तो मुझे लगा कि शायद वो नींद में है, लेकिन वो बार-बार हिल-हिलकर और करीब आ रही थी। उसकी चूची मेरे हाथ पर पूरी तरह दब रही थी, और मैं धीरे-धीरे उसका मजा लेने लगा। पहले मैं थोड़ा डर रहा था, लेकिन जब उसने आँखें बंद करके मजे लेने शुरू किए, तो मेरी हिम्मत बढ़ गई।
मैंने धीरे से अपनी उंगलियाँ उसकी चूची पर फेरनी शुरू कीं। उसकी टी-शर्ट के ऊपर से ही मैंने उसकी ब्रा को हल्का सा खींचा और साइड में कर दिया। अब मैं उसकी चूची को और अच्छे से दबाने लगा। उसकी चूची मुलायम और गर्म थी, जैसे कोई गर्म रसगुल्ला। वो भी मजे में थी, उसकी साँसें तेज हो रही थीं। मैं एक ही चूची दबा पा रहा था, क्योंकि वो मेरे सामने खड़ी थी। फिर उसने करवट बदली, और उसकी पीठ मेरी तरफ आ गई। मैंने मौका देखकर उसकी ब्रा का हुक खोल दिया। अब उसकी चूचियाँ आजाद थीं, और मैंने दोनों हाथों से उन्हें पकड़ लिया। वो और मस्त हो रही थी, उसकी साँसें और तेज हो गई थीं। उसकी उम्र शायद 21 साल की होगी, और उसका बदन ऐसा था कि कोई भी उसे देखकर पागल हो जाए।
उसने मुझे मस्त होते देखा तो हल्का सा मुस्कुराई और आँख मार दी। मैं समझ गया कि वो भी पूरी तरह मूड में है। तभी एक स्टेशन आया, और भीड़ थोड़ी कम हो गई। मैंने मौका देखकर उसके और करीब जाकर खड़ा हो गया। अब मैं उसकी गांड को छूने लगा। उसकी जीन्स इतनी टाइट थी कि उसकी गांड का शेप साफ दिख रहा था। मेरा लंड तो पहले ही खड़ा हो चुका था, और अब बुरा हाल था। मन कर रहा था कि बस उसे अभी चूम लूँ और लंड उसकी चूत में डाल दूँ। मैंने धीरे से उसकी तरफ मुँह करके खड़ा हो गया। वो मेरे साइड में आकर तिरछी खड़ी हो गई। मैंने मौका देखकर अपनी जीन्स की जिप खोली और लंड को बाहर निकाला। मेरा लंड उसकी जांघ से टच हो रहा था, और उसे इसका पूरा अहसास हो रहा था।
मैं धीरे-धीरे उसे धक्का दे रहा था, और वो भी मूड में आकर मुझसे और सट गई। हम दोनों अब दीवार के पास थे, जहाँ थोड़ी प्राइवेसी थी। मैंने उसके बूब्स पर फिर से हाथ रखा, और वो मेरे लंड को छूने की कोशिश करने लगी। मैंने अपनी गर्म साँसें उसके चेहरे पर मारीं, और वो और करीब आ गई। अब वो मेरी तरफ मुँह करके खड़ी थी। इतना सब कुछ हो रहा था, लेकिन हमने अभी तक एक-दूसरे का नाम तक नहीं पूछा था। मैंने अपनी शर्ट बाहर निकाली, और उसने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया। वो धीरे-धीरे उसे हिलाने लगी। उसका हाथ इतना मुलायम था कि मेरा लंड और सख्त हो गया। मैं भी मूड में था और उसकी चूत को जीन्स के ऊपर से सहलाने लगा।
उसकी चूत इतनी गर्म थी कि जीन्स के ऊपर से ही उसकी गर्मी महसूस हो रही थी। मैंने धीरे से उसकी जीन्स की जिप खोली और अंडरवियर के ऊपर से ही उसकी चूत में उंगली फेरनी शुरू की। उसकी चूत पूरी गीली थी, और मेरी उंगलियाँ फिसल रही थीं। मैंने उसका अंडरवियर साइड में किया और अंदर हाथ डाला। उसकी चूत किसी भट्टी की तरह गर्म थी, और उसकी झांटें इतनी घनी थीं कि उंगलियाँ उनमें उलझ रही थीं। मैंने उसकी झांटें धीरे-धीरे खींचीं, और वो बेकरार होकर सिसकारियाँ लेने लगी, “आह्ह… उफ्फ…”। मैंने उसकी चूत में एक उंगली डाली, और वो इतनी गीली थी कि उंगली आसानी से अंदर-बाहर हो रही थी। मैंने दूसरी उंगली भी डाली और उसे और तेजी से रगड़ने लगा। उसकी साँसें और तेज हो गईं, और वो मेरे लंड को और जोर से हिलाने लगी।
“आह्ह… और करो… उफ्फ…” वो धीरे-धीरे सिसकार रही थी। मैं उसकी चूत को और तेजी से रगड़ रहा था, और उसका पानी निकलने लगा। उसकी चूत से निकला पानी इतना गर्म था कि मेरे हाथ में जैसे लावा आ गया हो। मैं तो बस उसकी चूत को चूसना चाहता था, लेकिन इतनी भीड़ में ये मुमकिन नहीं था। मैंने उसकी चूत में उंगलियाँ और तेजी से चलाईं, और वो मेरे लंड को कसकर पकड़कर जोर-जोर से हिलाने लगी। “हाय… कितना मोटा है ये…” उसने धीरे से कहा, और उसकी आवाज में एक अजीब सी कामुकता थी। मैंने उसकी चूत को और जोर से रगड़ा, और वो सिहर उठी। उसका शरीर अकड़ने लगा, और उसकी साँसें रुक-रुक कर चल रही थीं। “आह्ह… बस… उफ्फ… निकल रहा है…” वो बुदबुदाई, और तभी उसका पानी मेरे हाथ पर छूट गया।
वो थोड़ा रिलैक्स हुई, लेकिन मेरे लंड को हिलाने की स्पीड बढ़ा दी। मैं अभी भी उसकी चूत और झांटों से खेल रहा था। उसकी चूत इतनी गीली थी कि मेरी उंगलियाँ बार-बार फिसल रही थीं। मैंने उसकी चूत को कसकर पकड़ लिया, और वो समझ गई कि अब मेरा पानी छूटने वाला है। “हाय… छोड़ दो ना… मेरे हाथ पर…” उसने धीरे से कहा। मैंने सारा पानी उसके हाथ और उसकी जीन्स पर छोड़ दिया। उसकी जीन्स और हाथ पूरी तरह गीले हो गए। उसने अपने स्टोल से सब कुछ पोंछ लिया, और हम दोनों के चेहरों पर एक अजीब सी ख़ुशी थी।
मैंने उसका नंबर माँगा, लेकिन उसने पीछे देखकर धीरे से कहा, “पापा हैं।” मैंने मौका देखकर अपना एक कार्ड निकाला और उसके अंडरवियर में डाल दिया। “मुझे कॉल करना,” मैंने धीरे से कहा। तभी हमारा स्टेशन आ गया, और हम अपने-अपने रास्ते चले गए। रात में करीब 10 बजे उसका कॉल आया। उसने अपना नाम सोनी बताया। उसके बाद हम मिले और जमकर सेक्स किया।
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