सादीशुदा दीदी ने भाई को चोदना सिखाया

Bhai didi sex story, Pehli chudai sex story, Andhere me didi ki chudai sex story: हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम सुमित है और मेरी उम्र 18 साल है।

मैं बड़ौदा में अपनी मम्मी-पापा के साथ रहता हूँ।

दोस्तों, आज मैं आप सभी को जो आपबीती सुनाने जा रहा हूँ, उसको मैं पिछले कुछ महीनों से आप लोगों तक पहुँचाने के बारे में सोच रहा था।

लेकिन हर बार डर लगता था कि क्या लोग इसे स्वीकार करेंगे या नहीं।

वैसे तो इस पूरी घटना में मुझे बहुत ज्यादा मज़ा आया था।

क्योंकि इस चुदाई के दौरान मेरी दीदी ने मुझे हर एक काम बड़े प्यार और धैर्य से सिखाया था।

वो मुझे हर कदम पर गाइड करती रहीं।

बताती रहीं कि कैसे करना है, कहाँ छूना है, कितनी जोर से दबाना है।

और मैं ठीक वैसे ही करता रहा जैसा वो कहती थीं।

मुझे पूरा यकीन है कि फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर सेक्सी कहानियाँ पढ़ने वाले आप सभी दोस्तों को मेरी यह सच्ची घटना बहुत पसंद आएगी।

दोस्तों, मैं अपने साथ पढ़ने वाले दोस्तों के साथ अक्सर एक इंटरनेट कैफे पर चला जाता था।

खास तौर पर मेरे एक बहुत पक्के दोस्त का नाम निखिल है।

निखिल और मैं एक-दूसरे से हर छोटी-बड़ी बात शेयर करते थे।

मैं उसे अपनी जिंदगी की लगभग हर बात बता देता था और वो भी मुझसे कुछ नहीं छुपाता था।

निखिल को इंटरनेट की दुनिया मुझसे कहीं ज्यादा पता थी।

वो बहुत तेजी से साइट्स खोलता था, सही लिंक ढूंढता था।

जो भी देखना होता था उसे आसानी से ढूंढ लेता था।

इसलिए ज्यादातर समय कंप्यूटर की कुर्सी पर वही बैठता था।

और मैं उसके बगल में खड़ा होकर या दूसरी कुर्सी पर बैठकर देखता रहता था।

एक दिन मैं थोड़ी देर से उस इंटरनेट कैफे पर पहुँचा।

जैसे ही मैंने अंदर कदम रखा, मैंने देखा कि निखिल अपनी कुर्सी पर आराम से बैठा हुआ था।

उसका ध्यान पूरी तरह स्क्रीन पर टिका हुआ था।

मैंने पास जाकर देखा तो पाया कि वो फ्री सेक्स कहानी डॉट इन वाली साइट खोलकर बैठा था।

वहाँ इंडियन सेक्स कहानियाँ पढ़ रहा था।

मैंने थोड़ा और ध्यान से स्क्रीन पर नजर डाली तो समझ आया कि वो ज्यादातर उन कहानियों को चुन रहा था।

जो बहन-भाई के बीच के सेक्स संबंधों के बारे में थीं।

स्क्रीन पर एक कहानी खुली हुई थी जिसमें दीदी और छोटे भाई के बीच की चुदाई का विस्तार से वर्णन था।

निखिल उस कहानी में इतना खोया हुआ था कि उसे मेरे आने का भी पता नहीं चला था।

उसकी साँसें थोड़ी तेज चल रही थीं।

और उसका दायाँ हाथ मेज के नीचे अपनी जाँघ पर ही रुका हुआ था।

जैसे वो खुद को काबू में रखने की कोशिश कर रहा हो।

तभी मैंने उससे कहा, “यार तू अब ये सब बंद कर ले, मुझे तेरा ये काम अच्छा नहीं लगा।”

फिर निखिल मुझसे बोला, “यार अभी तुझे उसके बारे में बिल्कुल भी मालूम नहीं है और तू इसलिए मुझसे यह बात कह रहा है। तू भी कभी एक बार अपनी दीदी को ऐसी ही गंदी नजर से देख। उनके लिए अपने मन में ऐसे ही गंदे विचार लेकर आ। फिर देख तुझे भी इस काम में बड़ा मज़ा आएगा।”

उसके मुंह से यह बात सुनते ही मैंने तुरंत उससे कहा, “नहीं यार, यह सब गलत काम है। मैं ऐसा कभी भी नहीं सोच सकता, करना तो बहुत दूर की बात है। चल अब यार मैं अपने घर जाता हूँ।”

फिर निखिल मुझसे बोला, “बैठ ना यार, कुछ देर बाद चला जाना। तू अभी तो आया है और तुझे ऐसा कौन सा जरूरी काम याद आ गया है, जो तू इतनी जल्दी लगा रहा है?”

तो मैंने उससे कहा, “नहीं यार ऐसा कुछ भी काम नहीं है और वैसे हाँ, आज शाम को मेरी दीदी मुंबई से आने वाली है। वो उनकी शादी के बाद पहली बार हमारे घर पर आ रही है।”

अब वो मुझसे कहने लगा, “तू इस बार अपनी दीदी के बारे में एक बार जैसा मैंने तुझसे कहा है, वैसे ही सोचकर जरूर देखना।”

फिर मैंने उसके मुंह से वो बात सुनकर उसे पागल कहते हुए वहां से अपने घर की तरफ निकल पड़ा।

और मैं जैसे ही अपने घर पहुंचा, तब मैंने एक बड़ा सा बैग अपने कमरे में रखा हुआ देखा।

मुझे मेरे कमरे के बाथरूम से पानी के टपकने गिरने की आवाज भी आ रही थी।

उस समय मेरी मम्मी किचन में हमारे लिए शाम का खाना बना रही थीं।

और मेरे पापा उस समय कहीं बाहर गए हुए थे।

अब मैं तुरंत किचन में चला गया और मैंने मम्मी से पूछा, “क्या दीदी आई है?”

तो मम्मी बोलीं, “हाँ वो आ चुकी है।”

दोस्तों मैं आप लोगों को अपनी दीदी के बारे में भी थोड़ा विस्तार से बता देता हूँ।

मेरी दीदी का नाम सेजल है और उनकी उम्र 28 साल है।

उनका रंग गोरा है, दिखने में बड़ी ही सुंदर लगती हैं।

वैसे मेरी दीदी की शादी आठ महीने पहले ही हुई थी और दीदी उनकी शादी के बाद उस दिन पहली बार बड़ौदा आई थीं।

तभी अचानक से किसी ने पीछे से मुझे हग कर लिया और मेरे गालों को चूमा।

फिर मैंने तुरंत पीछे मुड़कर देखा तो वो मेरी सेजल दीदी थीं।

वो अपने भीगे हुए बालों पर टॉवल लपेटे हुए हरे रंग की मैक्सी पहने हुए थीं।

वो बिल्कुल एक औरत की तरह दिख रही थीं।

उनके बूब्स पहले से कहीं ज्यादा भरे हुए, गोल और उभरे हुए लग रहे थे।

उनके कूल्हे चौड़े और गोल, कमर पतली और शरीर का हर एक हिस्सा ज्यादा सेक्सी और आकर्षक नजर आ रहा था।

जिसको देखकर मैं बड़ा चकित रह गया था।

अब मैंने अपनी दीदी से कहा, “दीदी तुम तो बिल्कुल बदल चुकी हो। जब हम मिले थे तब आप कैसी थीं और आज कैसी हो गई हो। इतना बदलाव परिवर्तन कैसे आया?”

और फिर दीदी ने मुझसे पूछा, “तुम्हारे पेपर कैसे रहे?”

और अब हम दोनों इधर-उधर की अपनी बातें करने लगे।

जब मैं दीदी के साथ हंस-हंसकर बातें कर रहा था, तभी मुझे मेरे दोस्त निखिल की बातें याद आने लगीं।

जिसकी वजह से मुझे बड़ा ही अजीब सा महसूस होने लगा था।

और मेरे ना चाहते हुए भी मैं अब अपनी दीदी के उभरे हुए गोरे गोलमटोल बूब्स को घूर-घूरकर देखने लगा।

ऐसा करने में मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था।

फिर उसी समय बाहर से मेरे पापा आ गए।

वो भी हमारे पास बैठकर मेरी दीदी के साथ बातें करने लगे और उनके हालचाल पूछने लगे।

फिर मैं उनको बातें करता हुआ देखकर वहां से चुपचाप सरकते हुए फोन करने बाहर चला गया।

फिर मैंने तुरंत अपने उसी दोस्त निखिल को फोन करके मेरे साथ घटी घटना बताई।

अपनी दीदी के बूब्स को देखकर जो मेरी हालत थी, वो सब मैंने अपने दोस्त को बता दिया।

फिर निखिल मेरी पूरी बात को ध्यान से सुनकर मुझसे बोला, “मैं तुझसे कहता था ना कि ऐसा ही मेरे साथ भी पहले हुआ था। सुन, ऐसा सबके साथ होता है, क्योंकि हम पहले इंसान हैं। उसके बाद में हमारे सारे रिश्ते होते हैं। तुम तो लगे रहो, इसी का नाम जिंदगी है।”

उसके बाद मैंने फोन रख दिया।

अब कुछ देर बाद मैं, मेरी दीदी, मम्मी और पापा हम सभी लोग खाना खाने बैठ गए। खाना खाते समय मैंने देखा कि मेरी दीदी बिल्कुल टीवी सीरियल की हीरोइन जैसी लग रही थीं। पहले दीदी बहुत पतली थीं, लेकिन अब सेजल दीदी की गांड इतनी भरी हुई थी कि वो कुर्सी के दोनों तरफ से बाहर निकल रही थी। उनकी दोनों गांड की गोलाई कुर्सी पर फैली हुई साफ दिख रही थी। मेरी दीदी के वो दोनों बूब्स बड़े आकार के आम की तरह फूले हुए थे, जो मैक्सी के कपड़े के ऊपर से भी उभरे हुए नजर आ रहे थे। उनकी निप्पल्स कपड़े पर हल्की सी उभार बना रही थीं। उन्हें देखकर मैं बिल्कुल पागल हो चुका था। मुझे नहीं पता था कि मेरे जीजू ने मेरी दीदी के साथ ऐसा क्या किया था कि जिसकी वजह से वो इतनी भरी-भरी, सेक्सी और आकर्षक हो गई थीं।

फिर हम लोग खाना खाने के बाद टीवी देखने लगे। मैं और मेरी दीदी उस समय एक ही सोफे पर बैठे हुए थे। मम्मी-पापा पास वाले सोफे पर थे। तब रात के करीब दस बज चुके थे। कुछ देर टीवी देखने के बाद मम्मी और पापा अपने कमरे में सोने के लिए चले गए।

फिर दीदी ने खुद को सोफे के एक तरफ कर लिया। उन्होंने अपना सिर सोफे के तकिए पर रखा और दोनों पैर मोड़कर सोफे पर लेट गईं। अब दीदी ने मुझसे कहा, “सुमित, मेरे पैर बहुत जोर से दर्द कर रहे हैं। प्लीज तुम इनको दबा दो।”

मैंने तुरंत कहा, “जी दीदी, मैं अभी दबा देता हूँ।”

फिर दीदी ने अपने दोनों पैर मेरी गोद में रख दिए। उसके बाद मैंने दीदी के पैर दबाना शुरू किया। दोस्तों, अपनी दीदी के नरम, भरे हुए, गोरे पैरों को दबाते हुए मैं अब गरम हो रहा था। अब मेरा उनको देखने और छूने का नजरिया बिल्कुल बदल चुका था। मेरे मन में उनके लिए गलत विचार आने लगे थे।

मैंने हिम्मत करके अपना हाथ थोड़ा ऊपर ले जाकर दीदी के घुटनों को भी दबाना शुरू किया। मेरे हाथ कभी-कभी उनकी गोरी, मुलायम जांघों तक पहुंच जाते थे और वहां घूमने लगते थे। तब मुझे महसूस हुआ कि दीदी की जांघें नरम होने के साथ-साथ बहुत चिकनी और गरम भी थीं। अब मेरा लंड तनकर पूरी तरह खड़ा हो चुका था और दीदी के पैरों के नीचे दबा हुआ था। मैं उसे रोक नहीं पा रहा था। उसकी सख्ती और गरमी मुझे और उत्तेजित कर रही थी।

फिर अचानक मेरी दीदी ने मुझसे पूछा, “सुमित, क्या तुमने कोई गर्लफ्रेंड बनाई है या नहीं?”

मैंने उनकी बात सुनकर शरमाते हुए कहा, “जी नहीं दीदी।”

फिर दीदी मुस्कुराकर बोलीं, “हाँ, इसलिए तुम मेरे पैरों को मेरे घुटनों से ऊपर तक भी दबा रहे हो।”

उनकी उस बात को सुनकर मैं तुरंत उसका मतलब समझ गया और शरमाते हुए बोला, “सॉरी दीदी।”

फिर दीदी ने कहा, “अरे पागल, इसमें कोई बड़ी बात नहीं है। वैसे भी इस उम्र में ऐसा हर किसी के साथ होता है।”

फिर दीदी ने मुस्कुराकर मुझसे कहा, “चलो अब तुम मेरी कमर भी दबा दो।”

उन्हें मुस्कुराते हुए यह सब बोलते देख मुझे बहुत अच्छा लगा। फिर दीदी और मैं वहां से उठकर हमारे कमरे में चले गए।

अब दीदी ने अपनी कमर मेरी तरफ की और वो बेड पर लेट गईं। मैं दीदी के पास बैठकर उनकी कमर को मसलने लगा।

अब दीदी मुझसे बोलीं, “सुमित, मैं देख रही हूँ कि जब से मुंबई से आई हूँ, तब से तुम मुझे कुछ अलग ही नजर से देख रहे हो। क्या तुम मुझे इतना ज्यादा पसंद कर रहे हो?”

उनकी उन बातों को सुनकर मैं बड़ा आश्चर्यचकित हुआ और मैंने उनकी उस बात का कोई जवाब नहीं दिया।

फिर दीदी दोबारा बोलीं, “तुम बिल्कुल शरमाओ मत। मैं अपने छोटे से भाई को डांटने वाली नहीं हूँ।”

फिर मैंने अपनी दीदी को मेरे दोस्त निखिल और मेरे बीच हुई सारी बातें बता दीं।

फिर दीदी ने मुस्कुराते हुए कहा, “तो अब तुम बोलो, मेरे नादान भाई, मैं तुम्हारे लिए क्या कर सकती हूँ?”

फिर मैंने अपना सिर शरम से नीचे झुका दिया।

फिर दीदी बोलीं, “अच्छा एक काम करो। तुम रूम की लाइट और दरवाजा बंद करके यहां आओ।”

मैंने उनके कहने पर उठकर लाइट बंद की, दरवाजा भी बंद कर दिया और वापस पलंग की तरफ आ रहा था। तब रूम में बहुत अंधेरा था। जैसे ही मैं पलंग के करीब पहुंचा, दीदी ने अचानक मेरा हाथ पकड़कर मुझे अपनी गोद में बैठा दिया। उस समय रूम में इतना अंधेरा था कि जब मैंने अपने दोनों हाथ दीदी की जांघों पर रखे, तब छूकर पता चला कि दीदी ने अंधेरा होते ही तुरंत अपनी मैक्सी उतार दी थी। वो सिर्फ ब्रा और पेंटी में थीं। उनके गोरे, गरम जिस्म को छूकर मुझे बहुत मजा आया।

फिर दीदी ने मेरी टी-शर्ट निकाल दी। उसके बाद उन्होंने मेरी पैंट भी उतार दी। फिर दीदी ने अपनी ब्रा खोलकर मेरे कान में कहा, “सुमित, तुम बस एक मिनट खड़े हो जाओ, तो मैं अपनी पेंटी उतार दूं।”

मैं दीदी की गोद से उठकर खड़ा हो गया। दीदी ने अपने बड़े आकार के कूल्हों को ऊपर करके सफेद पेंटी को उतारा। उस सेक्सी नजारे को देखकर और छूकर महसूस करके मेरा लंड बहुत कड़क हो चुका था।

फिर दीदी ने अपनी दोनों भरी हुई जांघों से मेरी कमर को जोर से जकड़ लिया। उन्होंने मुझे घुटनों के बल पलंग के किनारे आधा झुकाकर खड़ा कर दिया। उसके बाद दीदी ने अपना एक हाथ नीचे ले जाकर अपनी हथेली को मेरे दोनों आंडों और लंड पर घुमाने लगी। मेरे लंड पर उनकी गरम हथेली की छुअन से वो और सख्त हो गया। अब मेरा लंड ऊपर-नीचे होने लगा।

तभी दीदी ने मेरे कान में पूछा, “क्यों सुमित, तुम्हें अब अच्छा लग रहा है ना?”

मैंने शरमाकर हंस दिया। तभी दीदी भी हंसने लगीं। उन्होंने हंसते हुए मेरा एक हाथ पकड़कर अपने नरम, मुलायम बूब्स पर रख दिया। मैंने छूकर महसूस किया कि दीदी के बूब्स बहुत गरम और बड़े थे। उनकी निप्पल्स छोटी लेकिन पूरी तरह उठी हुई थीं। उन्हें छूकर मैं बहुत अच्छा महसूस कर रहा था।

फिर दीदी ने मेरा दूसरा हाथ पकड़कर अपनी गीली, बालों वाली चूत पर ले जाकर रख दिया। तब मैंने महसूस किया कि दीदी की चूत का वो हिस्सा बहुत गरम और उभरा हुआ था। चूत के दोनों होंठ सूजे हुए थे, जैसे वो रोजाना जमकर चुदाई सहती हों।

फिर दीदी ने अपना नरम, गरम हाथ मेरे कड़क लंड पर रखा। उन्होंने अपनी उंगलियों से मेरे लंड की पूरी लंबाई को सहलाया, फिर धीरे-धीरे उसे अपनी चूत की तरफ ले गईं। मेरे लंड का सुपारा उनकी चूत के खुले हुए, गीले छेद पर लगा। दीदी की चूत के होंठ गरम और फूले हुए थे, और वहां से निकलने वाली गीलापन मेरे लंड के सुपारे पर महसूस हो रही थी। वो हंसते हुए, थोड़ी शरारत भरी आवाज में बोलीं, “सुमित, एक बात का ध्यान रखना। जब तेरा वीर्य बाहर निकलने को आए, तब तू अपने लंड को मेरी चूत से तुरंत बाहर करके वीर्य बाहर निकाल देना। क्योंकि अभी तेरे जीजू को कोई बच्चा नहीं चाहिए।”

उसके बाद दीदी ने अपने दोनों मजबूत, भरी हुई जांघों को मेरी कमर के चारों तरफ लपेट लिया। उन्होंने अपनी एड़ियों से मेरी कमर को अपनी तरफ जोर से खींचा। मेरी कमर उनके शरीर से पूरी तरह चिपक गई। जिसकी वजह से मेरा पूरा लंड, एक लंबी, फिसलती हुई हरकत के साथ, दीदी की खुली हुई, बहुत गीली और गरम चूत के अंदर चला गया। लंड की पूरी लंबाई अंदर जाते ही मुझे उनकी चूत की तीव्र गरमी, नरम लेकिन टाइट दीवारें और अंदर की गीलापन महसूस हुई। उनकी चूत ने मेरे लंड को चारों तरफ से कसकर जकड़ लिया, जैसे वो मुझे अंदर ही रोकना चाहती हो। मुझे एक गहरी सिहरन हुई और सांसें तेज हो गईं।

अब मैंने दीदी की तरफ से वो हाँ सुनकर मन ही मन बहुत खुश होकर दोनों हाथों से उनकी गदराई हुई, नरम कमर को कसकर पकड़ लिया। मेरी उंगलियां उनकी कमर की मोटी चर्बी में धंस गईं। मैंने धीरे-धीरे अपनी कमर को पीछे खींचा और फिर जोर से आगे धकेला। पहला धक्का देने पर दीदी की चूत से एक हल्की सी चटकीदार आवाज आई और वो थोड़ा सिहर उठीं। दीदी ने भी अपनी चूत को दोनों हाथों से नीचे से दबाकर मेरे लंड पर और जोर से लगाया। वो भी अपनी कमर ऊपर-नीचे करके धक्के देने लगीं। उनकी चूत की हरकत से मेरा लंड और गहराई तक जाता और बाहर निकलता।

मेरा लंड बहुत जोर से उनकी गीली, चिपचिपी चूत में फिसलकर अंदर-बाहर हो रहा था। हर धक्के पर उनकी चूत की दीवारें मेरे लंड को मसलतीं, और चूत से निकलने वाला रस मेरे लंड की जड़ तक बहता। मैं लगातार, तेज-तेज धक्के देता रहा। हमें दोनों को बहुत ज्यादा मजा आ रहा था। हम बड़े जोश और उत्तेजना में थे। मेरी सांसें तेज हो रही थीं, पसीना छूट रहा था और मैं अपने पहले सेक्स अनुभव का पूरा आनंद ले रहा था। दीदी की आंखें बंद थीं, होंठ काट रही थीं और हर धक्के पर हल्की-हल्की सिसकारियां निकल रही थीं।

फिर ज्यादा जोश, पहली चुदाई का उत्साह और लगातार तेज धक्कों की वजह से कुछ ही देर बाद मुझे महसूस होने लगा कि अब मैं झड़ने वाला हूं। मेरे लंड की नसें फड़कने लगीं, सुपारा और सख्त हो गया और वीर्य बाहर आने की तैयारी में था। तभी मैंने बहुत हिम्मत करके अपना लंड दीदी की चूत से तुरंत बाहर निकाल लिया। मेरे लंड पर उनकी चूत का रस चमक रहा था। मैंने जल्दी से मुठ मारनी शुरू की और सारे गाढ़े, गरम वीर्य की धारें उनकी गोरी, मुलायम जांघ पर गिरा दीं। वीर्य की मोटी-मोटी बूंदें उनकी जांघ पर फैल गईं और कुछ उनकी चादर पर भी गिर गईं।

फिर दीदी ने भी अपनी चूत में अपनी दो उंगलियां तेजी से अंदर-बाहर करना शुरू किया। उनकी उंगलियां चूत के अंदर फिसल रही थीं, और कुछ ही सेकंड में उन्होंने अपनी चूत को रगड़कर अपना पानी निकाल लिया। उनका चूत का रस उनकी उंगलियों से बहकर चादर पर गिरा। हम दोनों अब पूरी तरह शांत हो चुके थे। हमारी सांसें धीमी हो गई थीं। दीदी की चूत अब संतुष्ट और थोड़ी खुली हुई नजर आ रही थी, जहां से अभी भी हल्का रस निकल रहा था।

फिर दीदी ने मुझे अपने साथ पूरा नंगा बदन सुला लिया। वो मुझसे एकदम चिपककर लेट गईं। उनके बूब्स मेरी छाती से चिपके हुए थे। मैं बहुत खुश था। फिर पहली चुदाई को सोचकर ना जाने कब मैं गहरी नींद में चला गया।।

धन्यवाद।

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