टेलीग्राम चैनल जॉइन करें - रोज़ाना नई कहानी अपडेट के लिए

सीनियर की भूखी बीवी को रात भर मोटे लंड से संतुष्ट किया

Dost ki biwi chudai sex story, Senior biwi hot sex story, Mota lund sex story: दोस्तो, मेरा नाम रोनित है और मैं राजस्थान के जयपुर शहर का रहने वाला हूं। आज मैं आपको अपने साथ घटी एक खूबसूरत घटना बताना चाहता हूं।

कॉलेज खत्म होने के बाद मेरी नौकरी एक कंपनी में लग गई। मैं बहुत खुश था और रोज़ काम पर जाने लगा था। मुझे काम पर जाते हुए लगभग तीन महीने हो चुके थे। इन दिनों में मेरी दोस्ती मेरे सीनियर राहुल के साथ हो गई। हम दोनों काफी अच्छे दोस्त बन गए थे और जॉब में लगभग हर समय साथ-साथ रहते थे। मैं उसके घर भी आने-जाने लगा था। राहुल अपनी बीवी वर्षा के साथ रहता था। मेरी और वर्षा की भी ठीक-ठाक बातें होती थीं।

फिर जो एक दिन हुआ वो मैंने कभी सोचा नहीं था।

एक रविवार की दोपहर थी। मौसम सुहाना था, हल्की ठंडी हवा चल रही थी। राहुल ने मुझे फोन करके बाहर घूमने के लिए बुलाया था। हम दोनों पार्क के पास वाली कैफे में बैठे थे, कॉफी पीते हुए गपशप कर रहे थे। अचानक उसका चेहरा गंभीर हो गया। उसने कप नीचे रखा और धीमी आवाज में बोला, “यार रोनित, मुझे एक बहुत बड़ी समस्या है… और इसमें बस तू ही मेरी मदद कर सकता है।”

मैंने कॉफी का घूंट लिया और मुस्कुराकर कहा, “बोल ना यार, क्या बात है? पैसे की जरूरत है क्या? कितने चाहिए, बता दे।”

आप यह Pati ke dost se chudai हमारी वेबसाइट फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर पढ़ रहे है।

राहुल ने सिर हिलाया, “नहीं यार, वो बात नहीं है।” वो थोड़ा झिझका, फिर गहरी सांस लेकर बोला, “मुझे शुगर की प्रॉब्लम है… और इसके कारण मुझे दूसरी बहुत बड़ी दिक्कत हो रही है। मैं वर्षा के साथ अच्छे से सेक्स नहीं कर पाता। मेरा लंड ठीक से खड़ा भी नहीं होता, और जब होता भी है तो ज्यादा देर टिकता नहीं। वर्षा पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो पाती। वो परेशान रहती है, चुप-चुप रहती है, लेकिन मुझे पता है वो कितनी भूखी है। मैं उसे खुश नहीं कर पा रहा… और मैं डरता हूं कि कहीं वो मुझे छोड़कर न चली जाए। मैं उसे बहुत प्यार करता हूं यार, उसे खोना नहीं चाहता।”

मैं स्तब्ध रह गया। इतनी खुलकर कोई अपनी पत्नी की ऐसी बात नहीं कहता। मैंने धीरे से कहा, “यार, ये तो बहुत सीरियस बात है। किसी अच्छे डॉक्टर को दिखा ले, दवा-इलाज से शायद ठीक हो जाए।”

राहुल ने सिर झुकाकर कहा, “डॉक्टर को दिखाया है यार, दवाइयां चल रही हैं, लेकिन अभी तक कोई फर्क नहीं पड़ा। और वर्षा… वो इंतजार नहीं कर सकती। वो रोज रात को मुझे छूती है, लेकिन मैं कुछ कर नहीं पाता। वो खुद रोती है कभी-कभी।”

फिर वो मेरी आंखों में देखकर बोला, “यार, मैंने एक-दो बार ऑफिस के वॉशरूम में तेरा लौड़ा देखा है। तेरा लंड बहुत मोटा है, लंबा भी अच्छा है। मैं सोचता हूं कि अगर तू वर्षा को एक बार… मतलब… चोद दे तो वो खुश हो जाएगी। उसकी सारी जरूरत पूरी हो जाएगी। वो संतुष्ट हो जाएगी और मुझे छोड़कर नहीं जाएगी। प्लीज यार, मेरी मदद कर दे।”

मैं एकदम से चौंक गया। मेरे मुंह से निकला, “क्या? तू पागल हो गया है क्या राहुल? ये क्या बोल रहा है?”

आप यह Pati ke dost se chudai हमारी वेबसाइट फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर पढ़ रहे है।

वो बोला, “मैं पागल नहीं हूं यार। मैं बहुत सोच-समझकर बोल रहा हूं। वर्षा ने खुद मुझे कहा है… हां, खुद कहा है कि ‘अगर तू मुझे संतुष्ट नहीं कर पा रहा तो कोई और ढूंढ लाओ मेरे लिए। मैं किसी और से भी करवा लूंगी, लेकिन तुझे छोड़ना नहीं चाहती।’ वो इतनी ईमानदार है यार। मैं उसकी बात सुनकर टूट गया था, लेकिन अब मैं समझता हूं कि ये एकमात्र रास्ता है।”

मैं हैरान था। मेरे दिमाग में हजार सवाल घूम रहे थे। “लेकिन… वर्षा ऐसा क्यों मानेगी? मतलब… वो मुझे कैसे…?”

राहुल ने मेरी बात काटते हुए कहा, “वो मानेगी यार। मैंने उससे बात की है। मैंने कहा कि रोनित अच्छा लड़का है, भरोसेमंद है। वो तैयार है… बस एक बार तू हां कर दे।”

उसकी आंखें नम हो गईं। वो बोला, “यार देख, मेरे लिए ये बहुत शर्म की बात है। मैं अपनी बीवी को खुद संतुष्ट नहीं कर पा रहा। ये मेरी मर्दानगी पर सवाल है। अगर ऐसे ही चला तो वो सच में चली जाएगी। प्लीज मेरी हेल्प कर दे। मैं जानता हूं तू मेरा विश्वास नहीं तोड़ेगा। ये बात सिर्फ हम तीनों के बीच रहेगी। किसी को पता नहीं चलेगा।”

वो इतनी भावुकता से बोल रहा था कि मेरे मन में सहानुभूति जागी। और सच कहूं तो मेरे दिमाग में एक दूसरी आवाज भी थी। वर्षा… वो गोरी-चिट्टी, सेक्सी औरत, जिसकी चूत मैंने कई बार सोचकर हाथ हिलाया था। फ्री में ऐसी मौका मिल रहा था। मैं भला मना कैसे करता?

आप यह Pati ke dost se chudai हमारी वेबसाइट फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर पढ़ रहे है।

मैंने थोड़ी देर सोचा, फिर धीरे से कहा, “ठीक है यार… मैं हां करता हूं। लेकिन सब कुछ सावधानी से होना चाहिए।”

राहुल की आंखें चमक उठीं। वो मुस्कुराया, मेरे कंधे पर हाथ रखा और बोला, “थैंक यू यार… तूने मेरी जान बचा ली।”

हम दोनों वहां से उठे और अलग-अलग घर की तरफ चल पड़े।

घर जाने के कुछ देर बाद राहुल का मैसेज आया कि वर्षा चुदने के लिए मान गई है और वो एक बार मेरा लंड देखना चाहती है। मैंने बोला, “ठीक है।” फिर उसने मुझे वीडियो कॉल किया और वर्षा सामने थी। राहुल ने कैमरा वर्षा की तरफ कर दिया और खुद बाहर चला गया। वर्षा कैमरे के सामने बैठी थी, उसकी आंखों में उत्सुकता और हल्की शरम थी। वो बोली, “दिखाओ अपना हथियार!”

मैंने धीरे से अपनी पैंट की बेल्ट खोली और पैंट उतार दी, फिर शर्ट के बटन खोलकर उतार फेंकी। अब मैं सिर्फ अंडरवियर में खड़ा था। मेरे लंड का उभार अंडरवियर पर साफ दिख रहा था, वो पहले से ही आधा तन चुका था। वर्षा स्क्रीन पर झुककर देख रही थी, उसकी सांसें तेज हो गईं थीं। उसकी आंखों में प्यास साफ नजर आ रही थी, जैसे कई दिनों से भूखी हो। मैंने धीरे-धीरे अंडरवियर की इलास्टिक पकड़ी और नीचे खींचना शुरू किया। पहले लंड का ऊपरी हिस्सा बाहर आया, फिर पूरा 7 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लंड फड़फड़ाता हुआ उसके सामने था। सिरा पहले से ही गीला था, प्रीकम की एक चमकदार बूंद टिप पर लटक रही थी।

आप यह Pati ke dost se chudai हमारी वेबसाइट फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर पढ़ रहे है।

ये देख वर्षा ने अपनी जीभ को होंठों पर धीरे से फिराया, होंठ चाटे जैसे वो उसे चख रही हो। उसकी आंखें चमक उठीं, वो बोली, “हाय… कितना मोटा है… और कितना सख्त…” मैं समझ गया कि मेरे लंड को देखकर उसके मुंह में पानी आ गया है, उसकी चूत में भी गर्मी बढ़ गई होगी। मैंने लंड को हाथ से पकड़कर हल्का सा हिलाया तो वो और झटके देने लगा। वर्षा ने एक गहरी सांस ली और फिर अचानक कॉल काट दी। स्क्रीन ब्लैक हो गई।

एक घंटे बाद राहुल का कॉल आया। वो बोला, “यार, मैं अपने गांव जा रहा हूं। कुछ जरूरी काम है, कल सुबह वापस आऊंगा। वर्षा अकेली है, तू उसका ध्यान रखना।” मैंने बिना सोचे कहा, “ठीक है।” दिल की धड़कन तेज हो गई। मैं जल्दी से नहाकर तैयार हुआ, एक अच्छी शर्ट-पैंट पहनी और उसके घर पहुंच गया। बेल बजाई तो दरवाजा वर्षा ने खोला।

वो लाल रंग की साड़ी में खड़ी थी, साड़ी हल्की सी पारदर्शी थी जिससे ब्लाउज की काली ब्रा की पट्टी साफ दिख रही थी। काले बाल खुले हुए कंधों पर लहरा रहे थे, होंठों पर गहरी लाल लिपस्टिक लगी थी। वो पूरी सेक्स की मूरत लग रही थी, जैसे किसी कामुक सपने से निकलकर आई हो। मुझे देखते ही उसकी आंखों में चमक आ गई। उसको देखते ही मेरा लंड पैंट में तनने लगा, दर्द होने लगा। अंदर घुसते ही लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था, पैंट पर उभार साफ दिख रहा था।

वर्षा ने मेरी पैंट की तरफ देखा, मुस्कुराई और हंसकर बोली, “तुम बैठ जाओ, मैं चाय लेकर आती हूं।” मैं सोफे पर बैठ गया, लेकिन मन तो उसकी मटकती गांड पर था। वो रसोई की तरफ गई तो साड़ी की प्लेट्स हिल रही थीं, गांड के गोल उभार साफ नजर आ रहे थे। मुंह में पानी आ गया। कुछ देर बाद वो चाय लेकर आई और मेरे बगल में बैठ गई। चाय टेबल पर रखी और मेरी तरफ देखने लगी।

मुझसे अब और नहीं रुका जा रहा था। जैसे ही वो चाय रखकर मुड़ी, मैंने उसकी कमर पकड़ी और अपनी ओर खींच लिया। वो मेरी गोद में आ गई। मैंने उसके गालों पर किस करना शुरू किया, पहले हल्के से, फिर गालों को चाटते हुए होंठों की तरफ बढ़ा। वो मेरी आंखों में हवस भरी नजरों से देख रही थी। हम दोनों के होंठ मिल गए। पहले हल्का किस, फिर गहरा। जीभ अंदर डालकर एक-दूसरे की जीभ चूसने लगे। साल्ट-स्वीट स्वाद था उसके होंठों का। हमारी ये किस लगभग पांच मिनट तक चली। मैं उसके निचले होंठ को हल्का काटता, वो ऊपरी को चूसती। अलग हुए तो दोनों जोर-जोर से हांफ रहे थे। मेरे लंड ने पैंट में झटके मार-मारकर प्रीकम निकाल दिया था, पैंट का आगे का हिस्सा गीला हो गया था।

आप यह Pati ke dost se chudai हमारी वेबसाइट फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर पढ़ रहे है।

फिर मैंने उसके गले पर किस करना शुरू किया। जीभ से गले की लकीर चाटी, कान के पीछे चूमा। वो आंखें बंद करके मदहोश हो गई, सिर पीछे झुकाकर मजा ले रही थी। उसने अपना जिस्म मेरी बांहों में ढीला छोड़ दिया। मेरी नाक उसकी चूचियों की घाटी में थी, हल्की मीठी खुशबू आ रही थी। चूचियां ब्लाउज से बाहर झांक रही थीं, उभार इतना कामुक कि कोई भी मर्द पागल हो जाए। मैंने पीछे से ब्लाउज के हुक खोलने शुरू किए। एक-एक करके हुक खोले, ब्लाउज ढीला हो गया। मैंने ब्लाउज को कंधों से नीचे सरका दिया। फिर ब्रा के हुक खोले, काली ब्रा भी उतार दी।

अब उसकी गोरी-गोरी, भरी हुई चूचियां पूरी नंगी मेरे सामने थीं। निप्पल्स हल्के गुलाबी, पहले से ही थोड़े तने हुए। वो ऊपर से पूरी नंगी थी, नीचे साड़ी अभी भी लिपटी हुई थी, पेट पर साड़ी की लेयरें थीं। उसके बाल चूचियों पर बिखरे हुए थे, जैसे कोई कामुक देवी हो। फिगर 36-28-34 का परफेक्ट था। मैंने दोनों चूचियों को हाथों में भरा, हल्का दबाया। नरम लेकिन सख्त, जैसे रबड़ की गेंदें। मैंने एक चूची को मुंह के पास लाकर निप्पल पर जीभ फेरी। वो सिहर उठी। फिर निप्पल मुंह में लिया और धीरे-धीरे चूसना शुरू किया। जीभ से निप्पल को घुमाया, हल्का काटा। दूसरी चूची को हाथ से मसलता रहा, निप्पल को अंगूठे-तर्जनी से पिंच करता।

वर्षा सिसकारियां भरने लगी, “आह्ह… रोनित… हाय… कितना अच्छा लग रहा है… चूसो जोर से… ओह्ह… मेरे निप्पल काट लो… आह्ह…” मैंने और जोर से चूसा, निप्पल को मुंह में घुमाया, लार से चिकना कर दिया। निप्पल्स पूरी तरह तनकर खड़े हो गए, जैसे छोटे-छोटे दाने। मैं एक चूची से मुंह हटाकर दूसरी पर लगा, वैसा ही चूसना जारी रखा। वो मेरे बालों में उंगलियां फंसाकर सिर दबा रही थी, “ओह्ह… हाय… और… आह्ह… कितने दिन हो गए ऐसे…” उसकी सांसें तेज हो गईं, शरीर कांप रहा था। चूचियां मेरे मुंह और हाथों में लाल हो गई थीं, निप्पल्स सूजे हुए चमक रहे थे।

अब मेरा हाथ धीरे-धीरे नीचे पहुंचा और पहले उसकी साड़ी को उसके शरीर से अलग किया। साड़ी के पल्लू को कंधे से सरकाकर नीचे गिराया, फिर पूरी साड़ी को कमर से खोलते हुए धीरे-धीरे खींचकर अलग कर दिया। साड़ी फर्श पर गिर गई और अब वो सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में थी, लेकिन ब्लाउज और ब्रा पहले ही उतर चुके थे, तो ऊपर से वो पूरी नंगी थी। मैंने उसके पेटीकोट का नाड़ा पकड़ा, धीरे से खींचा और नाड़ा ढीला हो गया। पेटीकोट कमर से सरकने लगा, मैंने दोनों हाथों से उसे जांघों तक नीचे सरकाया और फिर पैरों से धीरे-धीरे उतार दिया। पेटीकोट भी फर्श पर गिर गया।

वो अब पूरी नंगी थी। उसके बदन पर केवल एक काले रंग की जालीदार पैंटी थी, जो उस जन्नत के छेद को छुपाए हुए थी। पैंटी का जालीदार फैब्रिक इतना पतला था कि चूत की आउटलाइन साफ दिख रही थी, और बीच में एक गहरा गीला धब्बा फैल चुका था। मैंने अपनी हथेली को उसके पेट पर रखा, फिर धीरे से नीचे सरकाया और पैंटी के ऊपर से ही चूत पर हाथ फेरा। जैसे ही मेरी उंगलियां पैंटी के कपड़े पर रुकीं, वो मेरे होंठों को चूसने लगी, जीभ अंदर डालकर गहरा किस करने लगी। मैंने होंठ चूसते हुए ही पैंटी के किनारे से हाथ अंदर डाला और सीधे उसकी चूत को मसलने लगा।

आप यह Pati ke dost se chudai हमारी वेबसाइट फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर पढ़ रहे है।

उसकी चूत पहले से ही गरम और गीली थी। पैंटी पूरी गीली हो चुकी थी, चूत के रस से भिगोई हुई। मैंने पैंटी के ऊपर से ही क्लिटोरिस को उंगली से दबाया, हल्के गोल-गोल घुमाया। वो कांप उठी, होंठों से अलग होकर सिसकारी, “आह्ह… इह्ह… रोनित… वहां… हाय… कितना अच्छा लग रहा… उंगली अंदर डालो ना… ओह्ह… कितनी गर्म हो गई हूं मैं…” उसकी आवाज कांप रही थी, आंखें बंद, होंठ कटे हुए। उसकी प्यास और ज्यादा बढ़ गई।

मैंने अब पैंटी के दोनों तरफ उंगलियां डालीं और धीरे से नीचे खींची। पैंटी जांघों तक सरक गई, मैंने उसे पैरों से उतारकर फेंक दिया। अब वो पूरी तरह नंगी थी। मैं घुटनों के बल बैठ गया और उसकी चूत की तरफ बढ़ा। उसकी पाव जैसी चूत पर एक भी बाल नहीं था, बिल्कुल चिकनी और साफ। शायद उसने कुछ देर पहले ही शेव किया था। गुलाबी चूत के होंठ फूले हुए थे, बीच में से रस टपक रहा था, क्लिटोरिस छोटा-सा उभरा हुआ और चमक रहा था। चूत की खुशबू इतनी मीठी और उत्तेजक थी कि मेरा लंड और सख्त हो गया।

मेरे होंठ उसकी चूत पर लगने के लिए फड़फड़ा रहे थे। बिना सोचे समझे मैंने सीधे उसकी चूत पर होंठ रख दिए। पहले हल्के से चूमा, फिर होंठों से चूत के होंठों को दबाया। उसकी चूत की खूशबू बहुत मस्त थी, खाने का मन कर रहा था। मैंने जीभ निकालकर धीरे-धीरे चूत के ऊपरी हिस्से पर फेरी, क्लिटोरिस को छुआ। वो सिहर उठी। अब मैंने जीभ को चूत के होंठों के बीच घुसाया, धीरे-धीरे अंदर-बाहर किया। चूत का रस मेरी जीभ पर फैल गया, नमकीन-मीठा स्वाद।

मैंने जोर-जोर से चाटना शुरू किया, जीभ को पूरी चूत पर फेरा, क्लिटोरिस को जीभ की नोक से दबाया और चूसा। क्लिटोरिस को होंठों में लेकर हल्का सा काटा, फिर जीभ से तेजी से घुमाया। दोस्त की बीवी की सेक्सी चूत को चाटते हुए मेरी उत्तेजना बहुत ज्यादा बढ़ गई। मैं उसकी चूत को जैसे खा रहा था, जीभ अंदर डालकर चूत की दीवारों को चाटा, फिर बाहर निकालकर क्लिटोरिस पर हमला किया।

वो जोर-जोर से सिसकारियां भरने लगी, “आह्ह… रोनित… फक… आह्ह… अम्म… ओह्ह… चाटो… और जोर से चाटो… हाय… जीभ अंदर… आऊ… ऊऊ… ओह्ह… कितना अच्छा… मत रुको…” वो अपने दोनों हाथों से मेरे सिर को अपनी चूत में धकेल रही थी, जैसे जन्नत मिल गई हो। उसके नाखून मेरे स्कैल्प में गड़ रहे थे। मगर असली जन्नत का अहसास तो मुझे हो रहा था, चूत का गरम रस मुंह में भर रहा था।

आप यह Pati ke dost se chudai हमारी वेबसाइट फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर पढ़ रहे है।

उसके हाथों की पकड़ अब और तेज हो गई। वो मेरे सिर को चूत पर दबाते हुए अपनी गांड को भी नीचे से उठाने लगी, चूत मेरे मुंह पर पूरी दबा रही थी। मैंने जीभ को और तेज चलाया, क्लिटोरिस को बार-बार चूसा, एक उंगली चूत में डालकर अंदर-बाहर की। उंगली चूत की गर्मी और टाइटनेस से लिपट गई। वो कांपने लगी, “आह्ह… रोनित… उंगली… और अंदर… ओह्ह… मैं… आ रही हूं… हाय…”

एकदम से उसकी “आआह्ह…” करके जोर की चीख निकली। उसकी चूत सिकुड़ने लगी, पूरी कांप गई और खूब सारा गरम पानी मेरे मुंह पर छोड़ दिया। रस की धार मेरे होंठों से बह रही थी। मैंने उसकी चूत का वो पानी एक बूंद भी नीचे नहीं जाने दिया, जीभ से साफ चाट लिया, क्लिटोरिस को हल्का चूसकर आखिरी बूंदें निकालीं। वो हांफ रही थी, शरीर कांप रहा था, आंखें बंद, मुंह खुला हुआ। “ओह्ह… रोनित… कितना मजा आया… पहली बार इतना झड़ी हूं… हाय… तू कमाल है…” उसकी सांसें तेज थीं, चूत अभी भी हल्के-हल्के सिकुड़ रही थी।

अब मैंने वर्षा को खड़ी किया। उसकी कमर पर हाथ रखकर उसे थोड़ा सा झुकाया और फिर दोनों हाथों से उसकी जांघों को मजबूती से पकड़ लिया। एक झटके में मैंने उसे उछालकर अपनी गोद में उठा लिया। उसके पैर मेरी कमर के दोनों ओर लिपट गए, और उसके बड़े-बड़े, गोरे मम्मे ठीक मेरे मुंह के सामने आ गए। मैंने तुरंत एक निप्पल को मुंह में भर लिया और जोर से चूसने लगा, जैसे कोई बच्चा भूखा हो। दूसरा मम्मा मेरे हाथ में था, उसे दबाता, मसलता, निप्पल को उंगलियों से कुरेदता। वर्षा की सांसें तेज हो गईं, वो मेरी गर्दन में मुंह छुपाकर सिसकार रही थी, “आह्ह… रोनित… कितना जोर से चूस रहे हो… हाय… दांत लगा दो… ओह्ह…”

वो मेरी गोद में पूरी तरह लटकी हुई थी, उसका वजन मुझे महसूस हो रहा था, लेकिन उसकी चूत मेरे पेट पर रगड़ खा रही थी, गीली और गर्म। मैं चूसते-चूसते उसे उठाकर बेडरूम की ओर चल पड़ा। हर कदम के साथ उसके मम्मे मेरे मुंह में उछल रहे थे, मैं उन्हें बारी-बारी चूसता रहा। वो मेरी पीठ पर नाखून गाड़ रही थी, “आह्ह… ले चलो मुझे… जल्दी… चूत जल रही है…”

बेडरूम पहुंचते ही मैंने उसे पलंग पर पटक दिया। वो उछलकर लेट गई, उसके बाल बिखर गए, चूचियां ऊपर-नीचे हो रही थीं, चूत से रस की एक पतली धारा बह रही थी। मैंने जल्दी से अपनी शर्ट उतारी, पैंट खोली, अंडरवियर नीचे किया। दो मिनट में मैं उसके सामने पूरी तरह नंगा खड़ा था। मेरा 7 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लंड सीधा तना हुआ, सुपारा चमक रहा था, नसें फूली हुईं। वो उसे देखकर आंखें फाड़कर देख रही थी, होंठ चाट रही थी।

आप यह Pati ke dost se chudai हमारी वेबसाइट फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर पढ़ रहे है।

कहानी का अगला भाग: सीनियर की भूखी बीवी को रात भर मोटे लंड से संतुष्ट किया – Part 2

1980
2000 लोगों को पसंद आया • 99%
टेलीग्राम चैनल जॉइन करें - रोज़ाना नई कहानी अपडेट के लिए