desi bahu gangbang sex story: हेल्लो दोस्तों, मैं आबिदा खान आप सभी का बहुत बहुत स्वागत करती हूँ। मैं पिछले कई सालों से नियमित पाठिका रही हूँ और ऐसी कोई रात नहीं जाती जब मैं इसकी रसीली चुदाई कहानियाँ नहीं पढ़ती हूँ। आज मैं आपको अपनी स्टोरी सुना रही हूँ। मैं उम्मीद करती हूँ कि यह कहानी सभी लोगों को जरूर पसंद आएगी।
मैं बहुत गरीब घर की लड़की थी। मेरे अब्बा एक मजदूर थे जिनके हाथों में हमेशा मेहनत की गंध और मिट्टी लगी रहती थी। उनके पास मेरी शादी करने के पैसे भी नहीं थे। पर मैं बहुत खूबसूरत और जवान लड़की थी। मेरी गोरी चमकदार त्वचा, भरे हुए स्तन और पतली कमर देखकर लोग आकर्षित हो जाते थे। इसलिए मेरे अब्बा के पास अपने आप शादी के रिश्ते आने लगे।
कुछ दिनों बाद एक आदमी आया। वो अपने लड़के की शादी के लिए एक अच्छी और सुंदर लड़की ढूंढ रहा था। वो बार बार अपने खानदान का बखान कर रहा था कि उनका परिवार कितना बड़ा और सम्मानित है। उसका नाम सुलतान था। वो छह फुट का मोटा तगड़ा आदमी था। देखने में बिलकुल कसाई लगता था। उसकी आंखों में एक भूखी और क्रूर चमक थी।
मुझे वो आदमी कुछ ठीक नहीं लग रहा था। उसके शरीर से निकलती पुरुषी गंध और उसकी भारी सांसें मुझे डरा रही थीं। जब मेरे अब्बा ने पूछा कि वो कितना दहेज लेगा तो वो हंसने लगा। कोई दहेज लेने से मना कर दिया। मेरे अब्बा ने कहा कि उनके पास शादी करने के पैसे भी नहीं है। तो सुलतान ने अब्बू को दो लाख रुपया दे दिया। वो मेरा होने वाला ससुर था।
मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा था पर मुझे शादी करनी पड़ी। क्योंकि मेरी पांच बहनें और थीं। अगर मैं शादी नहीं करती तो बाकी बहनें भी बैठी रहतीं। मैंने दिल पर पत्थर रखकर शादी कर ली। निकाह होने के बाद मेरी विदाई हो गई। मैं ट्रेन से अपने होने वाले पति, ससुर, सास और बाकी परिवार के साथ औरंगाबाद आ गई।
यहां पर रात में मेरे ससुर मेरे कमरे में अचानक आ गए। मेरे पति को बाहर भेज दिया गया। कमरे में सिर्फ एक हल्की रोशनी थी। ससुर जी ने दरवाजा बंद किया और मेरी तरफ बढ़े। उन्होंने मेरे सलवार सूट को खींचकर उतारना शुरू किया। पहले सूट का ऊपरी हिस्सा, फिर सलवार की नाड़ा खोलकर नीचे सरका दिया। मैं कांप रही थी।
उन्होंने मेरी ब्रा के हुक खोलकर मेरे बड़े भरे स्तनों को आजाद कर दिया। फिर पैंटी को घुटनों तक उतार दिया। अब मैं पूरी तरह नंगी उनके सामने खड़ी थी। मेरी गोरी त्वचा रोमांच से कांप रही थी। उन्होंने मुझे बिस्तर पर धक्का देकर लिटा दिया। मेरी टांगें जोर से फैला दीं। अपना मोटा, सख्त लंड बाहर निकाला।
बिना किसी प्यार या तैयारी के उन्होंने अपना लंड मेरी सूखी चूत के मुंहाने पर रखा। एक जोरदार झटके से अंदर धकेल दिया। तेज दर्द की लहर मेरे पूरे शरीर में दौड़ गई। मैं चीख पड़ी। उन्होंने बेरहमी से तेज तेज धक्के मारने शुरू कर दिए। हर धक्के के साथ उनका मोटा लंड मेरी चूत को फाड़ता हुआ गहराई तक चला जा रहा था।
मेरी चूत से खून बहने लगा। गर्म लाल धाराएं उनकी जांघों पर गिर रही थीं। लेकिन वो रुके नहीं। उन्होंने मेरी चूत को बेदर्दी से चोदा। मेरे स्तनों को जोर जोर से दबाते हुए। मेरे होंठों को चूसते और काटते हुए। मैं दर्द से तड़प रही थी। आंसू मेरी आंखों से बह रहे थे। लेकिन वो अपनी वासना में डूबे रहे।
पूरे एक महीने तक वो मेरी चूत मारते रहे। मेरी गांड भी ससुर जी ने मार ली। पहले हफ्ते तो हर रात मेरी चूत फाड़ते। बाद में उन्होंने मेरी गांड में भी अपना लंड घुसेड़ना शुरू कर दिया। गांड में लंड डालते समय दर्द इतना तेज होता कि मैं बिस्तर पर नाखून गड़ाए चीखती रहती। उन्होंने धीरे धीरे मेरी गांड को भी अपना बना लिया। लंड अंदर बाहर करते, थूक लगाकर चिकना करते और घंटों चोदते रहते।
बाद में मुझे पता चला कि उसके पूरे खानदान में ऐसा ही होता था। औरंगाबाद साइड नई नवेली दुल्हन को ससुर रखता था। वहां पर ऐसी प्रथा थी। ससुर ही बहू की नई चूत को चोदकर उद्घाटन करता था। यहां पर लड़कों को कम तरजीह दी जाती थी। ससुर का पहला हक बनता था। जब एक महीने बाद मेरे पति मुझे चोदने आए तो मेरी चूत और गांड दोनों ढीली हो चुकी थीं। मैं उसके बावजूद भी बहुत मस्त माल थी इसलिए मेरे पति को मेरी चुदाई मारने में बहुत मजा मिला।
मैं बहुत रोई भी थी इस बात पर। मन हुआ कि अपने पति को तलाक दे दूं पर फिर मैं कहां जाती। मैं चुपचाप सब कुछ सहती रही। मेरी ससुराल वाले तो मुझे नौकर ही समझते थे। सुबह उठकर मैं तीस लोगों का खाना बनाती थी। सबको खिलाती थी। सबके कपड़े धोती थी तब तक शाम हो जाती थी। रात का खाना बनाना शुरू हो जाता था।
ऊपर से मेरे ससुर रोज रात में मुझसे पैर दबवाते थे। तेल लगवाते थे। पूरे बदन में मालिश करवाते थे। जब मन करता था मेरी रसीली चूत में लंड डालकर चोद लेते थे।
अब्बू ये सब ठीक नहीं है। आप कैसे रोज रोज मेरे साथ ये गंदी हरकत कर सकते हैं। मैं कई बार विरोध करती थी तो वो तलाक देने की बात करते थे। बस यही समझिए कि मैं किसी तरह जिंदगी काट रही थी। फिर मेरे दो बच्चे भी हो गए। एक दिन मेरे ससुर ने खूब शराब पी ली और अपने एक दोस्त के साथ रात में दस बजे घर आए। उनका दोस्त भी एक मोटा सा काला कलूटा आदमी था। उसका नाम बशीर था। वो मेरे ससुर के साथ फलों की आढ़त का काम करता था। दूसरे शहरों से आम अमरूद केला सेब के बड़े बड़े ट्रक लाता था और औरंगाबाद की फल मंडी में छोटे छोटे दुकानदारों को बेचता था। वो मेरे ससुर के साथ ही बिजनेस पार्टनर था।
आबिदा आबिदा कहां मर गई। अब्बू ने मुझे आवाज लगाई। मैं सो रही थी। इसलिए मैं देर में सुन पाई थी। फिर मैं आई। क्या है अब्बू। मैंने कहा। मां की लौड़ी एक बार में सुन नहीं पा रही थी। क्या अपनी मां चुदा रही थी। जा हम दोनों के पीने के लिए गिलास लेकर आ और कुछ चखना भी लेकर आ। मेरे ससुर चिल्लाकर बोले। मैं दौड़ी दौड़ी गई और गिलास लाकर दिया। मेरे ससुर बहुत बदतमीज और बददिमाग आदमी थे। वो अक्सर मुझ पर हाथ उठा देते थे। इसलिए मैं उनसे बहुत डरती थी। मेरे पति की तो घर में कोई इज्जत ही नहीं थी। वो पैसा नहीं कमा पाते थे इसलिए उसकी कोई वैल्यू नहीं थी। मेरे ससुर ही पूरे तीस लोगों का खर्चा उठाते थे। मेरी नई नई देवरानी की चूत भी वो नियम से मारते थे। हम दोनों बहुओं की चूत वो खूब चोदते थे क्योंकि हम दोनों को रोटी वही देते थे। इसलिए हम पर उनका हक था। ऐसा मेरे ससुर का सोचना था। मैं जल्दी जल्दी दो ग्लास में शराब उड़ेलने लगी। ससुर और उनका दोस्त बशीर मजे से शराब पीने लगे।
फिर बशीर बार बार मुझे घूरने लगा। यार तेरी बहू तो बहुत खूबसूरत है। बिस्तर गर्म करती है तेरा। बशीर हंसकर बोला। हां हां करती है। इसकी चूत देख लोगो तो चोदने का दिल करने लग जाएगा। मेरे ससुर ने कहा। तो भाई आज दिलवा दे इसकी रसीली चूत। बशीर बोला।
इसके बाद मेरे ससुर ने मुझे पकड़ लिया और मेरे गाल पर चुम्मी लेने लगे। मैं बार बार कह रही थी कि अब्बू प्लीज ऐसा मत करो प्लीज मुझे छोड़ दो पर वो शराब के नशे में आ चुके थे। कुछ देर बाद मेरे ससुर ने मुझे नंगा कर दिया और मेरे कपड़े उतार दिए। हम मुसलमानों में औरतें घर पर सलवार सूट ही पहनती हैं। इसलिए मैं भी घर पर सलवार सूट पहनती थी। धीरे धीरे मेरे ससुर ने मेरा सूट निकाल दिया। फिर सलवार की नाड़ा खोल दिया और मुझे पूरी तरह से नंगा कर दिया। फिर मेरी ब्रा और पैंटी भी उस दुष्ट आदमी से उतार दी। अब मैं पूरी तरह से नंगी हो गई थी। फिर मेरे ससुर और उनके दोस्त बशीर ने अपने अपने कपड़े उतार दिए। मैं सब समझ गई थी कि आज मेरा घर में ही गैंगरेप होने वाला था। मैं पूरी तरह से नंगी हो गई थी।
मैं बहुत खूबसूरत मस्त चोदने लायक माल लग रही थी। मेरे मम्मे का साइज चालीस इंच था जबकि कमर और पिछवाड़ा बत्तीस और छत्तीस का था। अब्बू छोड़ दो। प्लीज मुझे जाने दो। प्लीज मुझे मत चोदो। मैंने कई बार कहा तो अब्बू ने मेरे गाल पर कई तमाचे मार दिए। तेरी मां की चूत। रोज दस दस रोटियां सुबह से शाम तक पेलती है और अब चूत मांगो तो नौटंकी चोद रही है। ससुर बोले और उन्होंने मुझे चांटे चट चट मुंह पर जड़ दिए। मेरा गाल लाल हो गया। फिर ससुर ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया। वो मेरे रसीले होंठ चूसने लगे। दोस्तों मैं बहुत गोरी और भरे हुए जिस्म वाली लड़की थी। इसलिए मैं बहुत सेक्सी माल लग रही थी। मेरे मम्मे तो माशाअल्लाह इतने बड़े बड़े थे कि ससुर और उनके दोस्त बशीर दोनों के मुंह में पानी आ गया था। ससुर कुछ देर तक मेरे ऊपर चढ़े रहे और मेरे रसीले होंठ चूसते रहे। इमरान हाशमी की तरह वो मेरे साथ मजे करने लगे। वो हटे तो भैंचोद बशीर आकर मेरे होंठ चूसने लगा। फिर ससुर ने मेरी दाई चूची मुंह में भर ली और पीने लगे। उधर बशीर ने मेरी दाई चूची मुंह में भर ली और चूसने लगा। मैं पूरी तरह से नंगी थी। मैं अपनी भी रो रही थी पर इसका कोई असर दोनों भैंचोदों पर नहीं हो रहा था। वो दोनों मेरे मस्त मस्त चालीस इंच के आम दबा देते थे और मुंह में लेकर पी रहे थे। कुछ देर बाद मैंने रोना बंद कर दिया क्योंकि उससे कोई फायदा नहीं था। वो दोनों मेरी चूत तो मारके ही दम लेते।
मेरे गोरे भरे हुए स्तन हवा में लहरा रहे थे। उनकी निप्पल्स सख्त होकर खड़े हो गए थे। ससुर और बशीर दोनों ने उन्हें जोर जोर से दबाया। उनकी उंगलियां मेरी नरम चमड़ी में धंस रही थीं। दर्द और वासना की मिली जुली सनसनी मेरे बदन में दौड़ रही थी।
ससुर और बशीर दोनों मेरी रसीली चूचियों को बार बार दबा देते थे। मैं चीख जाती थी। मैं अहह्ह्ह्हह सीईईईई अअअअअ आहा हा हा हा बोलकर चिल्ला रही थी। वो दोनों मेरी चूचियों को दांत से काट रहे थे चबा रहे थे और मस्ती से पिए जा रहे थे। इधर मुझे काफी दर्द हो गया था। फिर ससुर जी ने अपना आठ इंच का लौड़ा मेरे मुंह में डाल दिया। मुझे सांस भी नहीं आ पा रही थी। मजबूरन मुझे उनका लौड़ा चूसना पड़ रहा था। उधर उनका चुदासा और वासना का पुजारी दोस्त बशीर मेरी चूत पर आ गया। उसने मेरी दोनों खूबसूरत और गोरी टांगें खोल दीं और मेरी चूत में जीभ डालने लगा। अब मुझे डबल उत्तेजना महसूस हो रही थी। मैं हाथ से जल्दी जल्दी ससुर का लंड फेरने लगी और चूसने लगी उधर भैंचोद बशीर मेरी चूत पी रहा था। मैं आई आई आई इसस्स्स्स्स्स्स् उहह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह की आवाज बार बार निकाल रही थी। कुछ देर बाद मुझे ये सब अच्छा लगने लगा। मैं हाथ से जल्दी जल्दी अब्बू ससुर जी का लंड फेरने लगी। बहुत मोटा लौड़ा था दोस्तों।
उनकी जीभ मेरी चूत की फुदकियों को चाट रही थी। नमकीन रस उनकी जीभ पर फैल रहा था। बशीर ने अपनी मोटी जीभ को मेरी चूत के छेद में घुसेड़ दिया और तेज तेज अंदर बाहर करने लगा। मेरी चूत गीली होकर चमक रही थी। उसकी लार मेरी जांघों पर बह रही थी।
इस लौड़े को मैं बहुत अच्छी तरह से पहचानती थी क्योंकि इसी ने सुहागरात पर मेरी चूत की सील तोड़कर मुझे चोदा था। मैं मुंह में लेकर जल्दी जल्दी लंड चूस रही थी। मैं मुंह को दबाकर लंड चूस रही थी जिससे उसपर ज्यादा दबाव बने और ससुर जी को ज्यादा मजा आए। नीचे बशीर ने मेरी चूत में कोहराम मचा दिया था। जल्दी जल्दी मुंह लगाकर वो चूत को पिए जा रहा था। उसकी जीभ मेरी चूत को बड़ी कायदे से चाट रही थी। मेरी चूत का नमकीन स्वाद बशीर की जवान पर आ गया था। फिर उस भैंचोद ने मेरी चूत में अपना अंगूठा ही ठेल दिया और जल्दी जल्दी अंगूठे से मेरी चूत मारने लगा। मैं आई आई आई अहह्ह्ह्हह सी सी सी सी हा हा हा की आवाज के साथ सिसकारियां लेने लगी। मैं तड़प रही थी। अब मैं जल्दी से लंड खाना चाहती थी क्योंकि मैं अब बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। बशीर तो किसी पागल आदमी की तरह जल्दी जल्दी मेरी चूत में अंगूठा अंदर बाहर करने लगा। मुझे लगा कि कहीं मेरा माल ना निकल जाए।
मेरे ससुर ने मेरे मुंह को बीस मिनट चोदा फिर हट गए। अब वो भैंचोद बशीर का गया और उसने अपना नौ इंच का मोटा और तगड़ा लंड मेरे मुंह में घुसेड़ दिया। दोस्तों अब मैं पूरी तरह से चुदासी कुतिया बन गई थी। मैंने अपनी शर्म हया छोड़ दी थी इसलिए मैं भी किसी छिनाल की तरह जल्दी जल्दी बशीर का नौ इंच का लंड हाथ में लेकर फेरने लगी और मुंह में लेकर चूसने लगी। उसे तो बहुत मजा मिल रहा था लंड चुसाने में। कई बार तो वो लंड मेरे मुंह में घुसेड़ देता और कई कई मिनट तक अंदर ही बनाए रखता। बाहर निकालता ही नहीं। फिर अचानक से जब निकालता तब मेरी अटकी सांस आती। मेरी खूबसूरत भरी भरी चालीस इंच की चूचियों की निप्पल्स को उसने अपनी उंगली से खुद ऐंठा। मेरे मुंह को उसने पंद्रह मिनट तक चोदा। उधर मेरे चूत के आशिक ससुर मेरी चूत पी रहे थे। वो एक बहुत हब्सी आदमी थे। मेरी देवरानी की चुदाई भी वो नियम से मारते थे। हम बहुओं की घर में कोई इज्जत नहीं थी।
बशीर ने मेरे मुंह से लंड कुछ देर बाद निकाल लिया। मैं लंबी लंबी सांसें ले रही थी। मेरी छाती तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी। मुंह से लार की धार बह रही थी। गले में जलन हो रही थी। फिर वो मेरी चूचियों को फिर से पीने लगा। उसने दोनों बड़े भरे स्तनों को हाथों में भर लिया। उंगलियां नरम मांस में गहरी धंस गईं। निप्पल्स को जीभ से चाटते हुए जोर जोर से चूसने लगा।
फिर मेरे ससुर बेड के सिरहाने पर आ गए। वो सिरहाने से पीठ लगाकर बैठ गए। उन्होंने मुझे अपने ऊपर बिठा लिया। मेरी पीठ उनकी तरफ थी। मेरी नंगी गांड उनके मोटे लंड के ठीक ऊपर थी। धीरे धीरे मेरे ससुर ने मेरी गांड में अपना आठ इंच का लौड़ा डाल दिया। पहले लंड का सिरा मेरे गांड के छेद पर रगड़ा। फिर थूक लगाकर चिकना किया। एक जोरदार धक्का देकर आधा लंड अंदर घुसा दिया। मुझे बहुत दर्द हो रहा था। तेज जलन और खिंचाव महसूस हुआ। मेरी आंखें फट गईं।
फिर उनका वासना का पुजारी दोस्त बशीर भी आ गया और मेरे ऊपर चढ़ गया। उसने अपने मोटे घुटनों से मेरी जांघों को और फैला दिया। उसकी भारी सांसें मेरे चेहरे पर गर्म हवा की तरह पड़ रही थीं। उसने अपना नौ इंच का ताकतवर लंड मेरी चूत के छेद में डाल दिया। पहले लंड की नोक मेरी गीली चूत पर रगड़ी। उसकी लंड की नोक मेरी फुदकियों को चीरती हुई आगे बढ़ रही थी। फिर एक झटके से पूरा लंड अंदर धकेल दिया। मैं चिल्लाने लगी। दोनों छेद एक साथ भरे हुए थे। चूत और गांड में भारी खिंचाव और दर्द की लहर दौड़ गई। मैं आऊ आऊ हममममअहह्ह्ह्हह सी सी सी सी हा हा हा की आवाज कर रही थी क्योंकि मुझे बहुत दर्द हो रहा था। मेरी चूत और गांड में एक एक मोटा लौड़ा घुसा हुआ था। धीरे धीरे ससुर और बशीर दोनों अपने अपने लौड़े चलाने लगे।
मैं रोने लगी क्योंकि आज तक मैंने डबल लंड नहीं खाया था। बशीर का चेहरा मेरे सामने था। जब ससुर जी मेरे ठीक नीचे थे। दोनों के लौड़े मेरे दो छेदों में आपस में जंग कर रहे थे। बशीर मुझे वासना से घूर रहा था और मेरी चूत चोद रहा था। नीचे से ससुर जी मेरी गांड चोद रहे थे। मैं उंह उंह उंह हूं हूं हूं हममममअहह्ह्ह्हह अई अई अई कर रही थी। मेरी आंखों के सामने तो अंधेरा ही छाया जा रहा था। पहले तो दोनों गांडू मुझे धीरे धीरे लेते रहे। पर फिर कुछ देर बाद वो दोनों भैंचोद मुझे बेरहमी से चोदने लगे। मैं मरी जा रही थी। लग रहा था कि आज चुदवाते चुदवाते मेरी जान ही निकल जाएगी। दोनों ने मुझे आधे घंटे इस तरह चोदा। बशीर नीचे चला गया और ससुर ऊपर आ गए। अब बशीर मेरी गांड चोद रहा था और ससुर चूत बजा रहे थे। कुछ देर बाद मुझे खूब मजा मिलने लगा। मैं भी मजा करने लगी। फिर आधे घंटे मेरी ठुकाई हुई। बशीर मेरी गांड में झड़ गया और ससुर मेरी चूत में झड़ गए।
उसके बाद ससुर ने मुझे बिस्तर से उठा दिया और जमीन पर खड़ा कर दिया। मेरी टांगें अभी भी कांप रही थीं। चूत और गांड से दोनों के गर्म वीर्य की धार बह रही थी। मेरे घुटने कमजोर हो चुके थे। फिर ससुर ने मुझे मेज की तरफ घसीट लिया। एक मेज पर ससुर ने मुझे झुका दिया। मेरे बड़े भरे स्तन ठंडी लकड़ी पर दब गए। मेरे गोल मटोल पुट्ठों पर वो जल्दी जल्दी कस कसके चांटे मारने लगे। हर चांटा जोरदार था। चट चट चट की तेज आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। मेरी नाजुक गुलाबी दूधिया पुट्ठे बिलकुल लाल हो गए थे। जलन इतनी तेज थी कि आंसू मेरी आंखों से बहने लगे। त्वचा जल रही थी। हर चांटे के साथ मेरा पूरा बदन हिल रहा था।
फिर ससुर ने मेरे दोनों पुट्ठों को हाथ से खोलकर मेरी गांड का छेद चेक किया। उनकी मोटी उंगलियां मेरी लाल पुट्ठों को फैला रही थीं। गांड का छेद अभी भी थोड़ा सिकुड़ा हुआ था। बहन की लौड़ी का गांड का छेद अब भी बड़ा नहीं हुआ है। ससुर बोले। उनकी आवाज में घोर वासना और तिरस्कार था।
फिर उन्होंने मेरी गांड में थूक दिया। गर्म लार सीधे छेद पर गिरी। उन्होंने जीभ लगाकर छेद को पीने और चूसने लगे। उनकी गर्म जीभ मेरे गांड के छेद के चारों ओर घूम रही थी। जोर जोर से चूस रहे थे। जीभ अंदर घुसेड़कर अंदर बाहर कर रहे थे। स्वाद ले रहे थे। मैं सिसकारियां भर रही थी। एक बार फिर से वो जानवर बन गए और अपना आठ इंच का मोटा लंड मेरी गांड में डाल दिया। पहले सिरा रगड़ा। फिर एक झटके से पूरा लंड अंदर धकेल दिया। जलन और खिंचाव इतना तेज था कि मैं चीख पड़ी। उन्होंने जल्दी जल्दी मेरी गांड चोदने लगे। हर धक्के के साथ उनके अंडकोश मेरी जांघों से टकरा रहे थे। मेज हिल रही थी।
बशीर दूसरी तरफ से आ गया और मेरे मुंह में उसने लौड़ा दे दिया। उसका नौ इंच का मोटा लंड मेरे गले तक घुस गया। मैं दम घुटने लगा। ससुर ने चालीस मिनट मेरी गांड चोदी मेज पर झुकाकर खड़ा करके मुझे। हर मिनट वे तेज और गहरे धक्के दे रहे थे। फिर बशीर ने भी मेरी गांड एक घंटा तक चोदी। अब बारी बारी से दोनों मेरी गांड फाड़ रहे थे। मेरा पूरा बदन पसीने से तर था। चूत से रस बह रहा था। दोस्तों आज भी हर रविवार वो लोग रात में आकर मेरी चूत और गांड चोदते हैं। मेरी गांड का छेद अब बहुत चौड़ा हो गया है। पूरा दो इंच चौड़ा हो गया है।
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