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बड़ी चूतड़ों वाली बहू को ससुर ने घोड़ी बनाकर पेला

वैसे तो यह आम सी बात है, बहुतों की जिंदगी आपसी समझ की कमी से इसी तरह की हो जाती है और अलगाव बढ़ता चला जाता है, लेकिन फिर कोई आ जाता है तो दुनिया फिर से महक उठती है, रंगीन हो जाती है। मेरी उम्र अब लगभग 46 वर्ष की हो चुकी है, मैं अपना एक छोटा सा बिजनेस चलाता हूँ।

20 साल की उम्र में शादी के बाद मेरी जिंदगी बहुत खूबसूरत रही थी, ऐसा लगता था कि यह रोमांस भरी जिंदगी यूं ही चलती रहेगी। उन दिनों हम दोनों जब देखो तब खूब चुदाई करते थे, मेरी पत्नी पल्लवी बहुत ही सेक्सी युवती थी। फिर समय आया कि मैं एक लड़के का बाप बन गया।

उसके लगभग एक साल बाद पल्लवी ने फिर से कॉलेज जॉइन करने की सोची, वो ग्रेजुएट होना चाहती थी। नए सेशन में जुलाई से उसने एडमिशन ले लिया, फिर शुरू हुआ एक खालीपन का दौर। पल्लवी कॉलेज जाती और आकर बस बच्चे में खो जाती।

मुझे जब भी चोदने की इच्छा होती तो वो बहाना बनाकर टाल देती, एक बार तो मैंने वासना में आकर उसे खींचकर बाहों में भर लिया, नतीजा गालियां और चिड़चिड़ापन। मुझे समझ नहीं आता था कि हम दोनों में ऐसा क्या हो गया कि छूना तक उसे बुरा लगने लगा। इस तरह सालों बीत गए।

उसकी इच्छा के बिना मैं पल्लवी को छूता भी नहीं था, उसके गुस्से से डर लगता था। मेरा लड़का भी 21 वर्ष का हो गया और उसने अपने लिए बहुत सुंदर सी लड़की चुन ली, उसका नाम रिया था। बी कॉम करने के बाद वो मेरे बिजनेस में हाथ बंटाने लगी थी।

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मेरी पत्नी के व्यवहार से दुखी होकर मेरा बेटा आलोक अलग घर ले लिया। घर में ज्यादा अलगाव होने से अब मैं और पल्लवी अलग-अलग कमरों में सोने लगे। पूरा अकेलापन, पल्लवी एक प्राइवेट स्कूल में नौकरी करने लगी थी, उसकी अपनी सहेलियां और दोस्त बन गए थे।

तब से उसके एक स्कूल के टीचर के साथ अफवाहें उड़ने लगीं, मैंने भी उन्हें होटल में, सिनेमा में, गार्डन में कई बार देखा था, लेकिन मजबूर था, कुछ कह नहीं सकता था। मेरे बेटे की पत्नी रिया दिन में अक्सर मुझसे बात करने आ जाती थी।

मेरा मन इन दिनों भटकने लगा था, मैं दिन भर सेक्सी कहानियां पढ़ता या पोर्न वीडियो देखता रहता, फिर मुठ मारकर संतोष कर लेता। रिया ही एक स्त्री के रूप में मेरे सामने थी, वो धीरे-धीरे मेरे मन में छाने लगी।

उसे देखकर मैं अपनी काम भावनाएं बुनने लगता, यह सोचे बिना कि वो मेरे घर की बहू है। रिया को देखकर लगता कि काश ये मुझे मिल जाती और मैं इसे खूब चोदता, लेकिन फिर लगता कि यह पाप है, पर पुरुष मन था और स्त्री के नाम पर सिर्फ रिया ही पास थी।

एक दिन रिया ने मुझे कुछ खास बताया, उससे दो बातें खुलकर सामने आईं। एक तो मेरी पत्नी का राज और दूसरा रिया खुद चुदने को तैयार हो गई। रिया के कहने पर मैंने रात एक बजे पल्लवी के कमरे में खिड़की से झांककर देखा तो सब समझ आ गया, वो अपना कमरा क्यों बंद रखती थी, यह राज भी खुल गया।

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एक व्यक्ति उसे घोड़ी बनाकर चोद रहा था, पल्लवी वासना में बेसुध थी और अपने चूतड़ हिलाकर उसका पूरा लंड ले रही थी, आह्ह्ह ओह्ह्ह भरते हुए। उस व्यक्ति को मैंने पहचान लिया, वो उसके कॉलेज टाइम का दोस्त था और उसी स्कूल में टीचर था।

मैंने यह बात रिया को बताई तो उसने कहा, मैंने कहा था ना, मां जी का महेंद्र के साथ चक्कर है और रात को वो अक्सर घर आता है।

“हाँ रिया, आज रात तू यहीं रह जा और देखना तेरी सासू मां क्या करती है।”

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“जी, मैं आलोक को बोलकर रात को आ जाऊंगी।”

शाम को ही रिया घर आ गई, साथ में अपना नाइट सूट भी ले आई। उसका नाइट सूट ऐसा था कि छोटे टॉप में उसके स्तन आधे बाहर छलक रहे थे, पजामा नीचे उसके चूतड़ों की दरार तक दिखा रहा था, लेकिन उसके लिए ये सामान्य था।

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उसे देखकर मेरा लौड़ा कुलांचे भरने लगा, मैं कब तक छुपाता, रिया की तेज नजरों से बच न सका, वो मुस्करा उठी। रिया ने मेरी वासना को और भड़काया, “पापा, मम्मी से दूर रहते हुए कितना समय हो गया?”

“बेटी, करीब 16-17 साल हो चुके हैं।”

“क्या? इतना समय, साथ भी नहीं सोए?”

“साथ सोए? हाथ भी नहीं लगाया।”

“तभी तो!”

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“क्या तभी?” मैंने आश्चर्य से पूछा।

“पापा, कभी इच्छा नहीं होती क्या?”

“होती तो है, पर क्या करूं, पल्लवी छूने पर ही गंदी गालियां देती है।”

“तू नहीं तो और सही, पापा प्यार की मारी औरतें तो बहुत हैं।”

“चल छोड़, अब आराम कर ले, अभी उसे आने में एक घंटा है, चल लाइट बंद कर दे।”

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“एक बात कहूं पापा, आपका बेटा तो मुझे घास भी नहीं डालता, वो भी मेरे साथ ऐसे ही करता है।” रिया ने दुखी मन से कहा।

“क्या, तू भी ऐसे ही?”

“हाँ पापा, मेरे मन में भी तो इच्छा होती है ना।”

“देखो तुम भी दुखी, मैं भी दुखी।” मैंने उसके मन की बात समझ ली, उसे भी चुदाई चाहिए थी, पर किससे चुदवाती, बदनाम हो जाती। कहीं इसे मुझसे चुदना तो नहीं, नहीं मैं तो इसका बाप समान हूं, छी, पर मन के कोने में हूक उठ रही थी कि इसे चोदना ही है।

रिया ने बत्ती बंद कर दी, मैं बिस्तर पर लेटे-लेटे उसकी तरफ देखा, उसकी बड़ी प्यासी आंखें मुझे घूर रही थीं। मैंने भी उसकी आंखों से आंखें मिला दीं, रिया बिना पलक झपकाए मुझे प्यार से देख रही थी, वो मुझे देखती और आह भरती, मेरे मुंह से भी आह निकल जाती।

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आंखों से आंखें चुद रही थीं, यह चक्षु-चोदन काफी देर तक चला, लेकिन जरूरत तो लंड और चूत की थी। आधे घंटे बाद पल्लवी के कमरे में रोशनी हुई, रिया उठ गई, उसकी वासना भरी निगाहें मैं पहचान गया।

“पापा वो लाइट देखो, आओ देखें।”

हम दोनों दबे पांव खिड़की पर आ गए, कल की तरह खिड़की का पट थोड़ा खुला था। रिया और मैंने एक साथ झांका, महेंद्र ने कपड़े उतार रखे थे और पल्लवी के कपड़े उतार रहा था, नंगे होकर दोनों एक दूसरे के अंग सहला रहे थे।

अचानक लगा रिया ने अपनी गांड हिलाकर मुझे से चिपका ली, अंदर का दृश्य और रिया की हरकत ने मेरा लौड़ा खड़ा कर दिया, मेरा खड़ा लंड उसकी चूतड़ों की दरार में रगड़ खाने लगा। उधर पल्लवी ने लंड पकड़कर मसलना शुरू किया और बार-बार चूत में घुसाने की कोशिश कर रही थी।

अनायास मेरा हाथ रिया की चूचियों पर गया, मैंने उसकी चूचियां दबा दीं, उसके मुंह से आह्ह्ह निकल गई। मुझे पता था रिया का मन भी बेचैन था, मैंने नीचे लंड और गड़ा दिया, उसने चूतड़ और खोल दिए और लंड को दरार में फिट कर लिया। रिया ने मुड़कर मुझे देखा।

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फुसफुसाती हुई बोली, “पापा प्लीज अपने कमरे में।”

मैं धीरे से पीछे हटा, उसने मेरा हाथ पकड़ा और कमरे में ले चली।

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“पापा शर्म छोड़ो और अपने मन की प्यास बुझा लो, मेरी खुजली भी मिटा दो।” उसकी विनती मुझे वासना में बहा ले जा रही थी।

“पर तुम मेरी बहू हो, बेटी समान।” मेरा धर्म रोक रहा था, लेकिन लौड़ा सर उठा चुका था, बेकाबू हो रहा था, मन कह रहा था प्यारी रिया को चोद डालूं।

“ना पापा ऐसा क्यों सोच रहे हो, अब मैं सम्पूर्ण औरत हूं और आप सम्पूर्ण मर्द, हम वही कर रहे हैं जो मर्द और औरत के बीच होता है।”

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रिया ने मेरा लंड थाम लिया और मसलने लगी, मेरी आह्ह्ह ओह्ह्ह निकल पड़ी, जवानी लंड मांग रही थी। मेरा शरीर कांप उठा, “देखा कैसा तना रहा है बहू।”

“बहू घुस गई गांड में पापा, रसीली चूत का आनंद लो पापा।” रिया पूरी वासना में डूब चुकी थी, उसने मेरा पजामा नीचे खींच दिया, मेरा लौड़ा फुफकार उठा।

“सच है रिया, आजा अब जी भर के चुदाई कर ले, जाने ऐसा मौका फिर मिले न मिले।” मैं रिया को चोदने को बेताब हो उठा।

“मेरा पजामा उतार दो ना और ये टॉप खींच दो ऊपर, मुझे नंगी करके चोद दो हाय।”

“पापा मार दो गांड, जरा जोर से मारना, मेरी गांड भी बहुत प्यासी है अह्ह्ह्ह।”

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मैंने पहले उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों को खूब मसला, चुचुक चुटकियों से मरोड़ा जिससे रिया ओह्ह्ह इह्ह्ह करने लगी, फिर उसका पजामा उतारकर उसकी बड़ी गांड पर जोरदार थप्पड़ मारे, हर थप्पड़ पर उसकी गांड लाल होकर हिलती और वो आह ह ह ह्हीईई भरती। मैंने लंड खींचकर उसकी गांड के छेद पर रखा और धीरे से दबाया।

रिया ने होंठ भींच लिए, उसे दर्द हुआ, “हाय राम मर गई, जरा नरमाई से ना।”

“ना अब यह जोश में आ गया है, मत रोको इसे, मरवा लो ठीक से अब।”

दूसरा झटका और तेज था, उसने आंखें बंद कर लीं और दर्द से होंठ काट लिए। मैंने लंड निकालकर उसकी गांड के छेद पर थूक लगाया और फिर जोर से घुसा दिया, इस बार पूरा अंदर तक चला गया, उसकी गांड की टाइट दीवारें मेरे लंड से रगड़ खा रही थीं, मुझे जबरदस्त मजा आने लगा। रिया की सिसकारियां नहीं रुक रही थीं, आह्ह्ह ओह्ह्ह दर्द में मिश्रित।

मुझे गांड मारने का पूरा मजा आ चुका था, लेकिन उसे तकलीफ न देकर मैंने चूत चोदना बेहतर समझा। जैसे ही लंड गांड से बाहर निकाला, रिया ने चैन की सांस ली।

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“रिया चल टांगें खोल दे, अब चूत का मजा लें।” रिया ने आंसू भरे चेहरे से मुझे देखा और हंस पड़ी।

“बहुत रुलाया पापा, अब मस्ती दे दो ना।” मुझे उसकी हालत नहीं देखी गई।

“सॉरी रिया, आगे से ध्यान रखूंगा।”

“नहीं पापा, यही तो गांड मराने का मजा है, दर्द और चुदाई, नहीं तो क्या मजा।”

उसकी हंसी ने महौल फिर वासनामय बना दिया। मैंने उसकी चूत के होंठ खोल दिए और गुलाबी चूत में लंड घिसना शुरू किया, उसका दाना लंड के सुपाड़े से रगड़ते ही वो किलकारियां भरने लगी, आह इह्ह ओह्ह्ह ऊउइ। चूत की गुदगुदी से खिलखिलाकर हंस पड़ी।

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ये वासना भरी किलकारियां मुझे और उत्तेजित कर रही थीं, उसकी गुलाबी चूत पर लंड का घिसना उसे भी सुहा रहा था। मैं बीच-बीच में लंड धक्का देकर जड़ तक चोद देता, फिर निकालकर रस भरी चूत को लंड से घिसता।

उसकी चूत से पानी टपकने लगा, उसने मेरा लौड़ा पकड़कर अपने दाने पर कई बार रगड़ा और मस्त हो उठी, ऊऊ ऊईईई। वो मेरे टट्टों को भी धीरे-धीरे सहलाती रही।

अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था, मैं चूत में लंड अंदर दबाने लगा और पूरा जड़ तक पहुंचा दिया, लगा अभी और घुस सकता है। मैंने थोड़ा बाहर निकाला और जोर से पूरा दम लगाकर घुसेड़ मारा।

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उसके मुंह से चीख निकल पड़ी, “आय हाय पापा, फाड़ ही डालोगे क्या?”

“सॉरी, पर लंड पूरा घुसाए बिना मजा नहीं आता ना।”

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“चोदो पापा, आपका लंड तो पुराना पापी लगता है।” और हंस पड़ी।

चुदाई जोरों से शुरू हो गई, रिया मस्ती में तड़प उठी, वो घोड़ी की तरह हिनहिनाने लगी, सिसकारियां भरने लगी, आह्ह्ह ह्ह्ह ओह्ह्ह। मेरी भी सिसकारियां निकल रही थीं।

“हाय बिटिया चूत है या भोसड़ी, साली मजे की, क्या मजा आ रहा है, चला गांड जोर से।”

“पापा जोर से चोद डालो ना, दे लंड, फोड़ दो चूत को, माईई रे आह्ह्ह्ह ऊईईई।”

उसकी कठोर हुई नरम चूचियां मैं मसल-मसल कर लाल कर रहा था, चुचुक कठोर हो गए थे, दोनों स्तनों को भींचकर चुदाई चल रही थी। चूचियों को मलने से वो अति उत्तेजित हो चुकी थी, दांत भींचकर कसकर कमर हिला कर चुदवा रही थी।

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“पापा मैं गई, अरे रे चुद गई, वो वो निकला हाय रे माऽऽऽऽऽऽ” कहते हुए रिया ने अपना रस छोड़ दिया, वो झड़ने लगी। मैंने उसके बोबे छोड़ दिए और लंड पर ध्यान केंद्रित किया, लंड को जड़ तक घुसाकर दबाव डाला और दबाते गया, उसे अंदर टक्कर लग रही थी।

“पापा बस ना अब नहीं।”

“चुप हो जा रे, मेरा निकलने वाला है।”

“पर मेरी तो फट जाएगी ना।”

“आह आअह्ह्ह रे मैं आया आह्ह्ह्ह निकल रहा है कोमलीईईई।” मैंने लंड बाहर निकाल लिया।

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“रिया रिया इधर आ।”

मैंने रिया के बाल पकड़कर जल्दी से उसके मुंह को लंड पर रख दिया, रिया समझ गई थी, उसने वीर्य छूटते ही मुंह में लौड़ा घुसा लिया, ग्ग्ग्ग ग्ग्ग्ग गी गी गों गों गोग की आवाजें करते हुए मेरा रस पिचकारी की तरह निकला, रिया वीर्य को गटागट निगलने लगी, फिर अंत में गाय का दूध निकालने जैसे लंड दुहकर बचा हुआ माल भी चट कर गई।

“पापा आपके रस से तो पेट ही भर गया।”

मैंने उसे नंगी ही लिपटा लिया।

“रिया बेटी शुक्रिया, तूने मेरे मन को समझा, मेरी आग बुझा दी।”

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“पापा मैं तो बहुत पहले से आपकी इच्छा जानती थी, आपके पीसी में नंगी तस्वीरें और डाउनलोड की गई सेक्सी कहानियां तक मैंने पढ़ी हैं।”

“सच, तो पहले क्यों नहीं बताया।”

“शर्म और धर्म के मारे, आज तो सब कुछ अपने आप हो गया और मैं आपसे चुद बैठी।”

रिया के और मेरे होंठ आपस में मिल गए, उम्र का तकाजा था, मुझे थकान चढ़ गई और मैं सो गया। सुबह उठते ही रिया ने चाय बनाई।

मैंने उसे समझाया, “रिया देखो, आपस में चोदा-चोदी करने से घर की बात घर में ही रहती है, प्लीज किसी सहेली से भी इस बात का जिक्र मत करना, सब ठीक चलता रहे तो ऐसे गुप्त रिश्ते मस्ती से भरे होते हैं।”

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“पापा मेरी एक आंटी को चोदोगे, बेचारी का मर्द बहुत पहले शांत हो गया था।”

“ठीक है तू माल ला और मुझे मस्त कर दे बस।” हम दोनों एक दूसरे का राज लिए मुस्कुरा उठे, अब मैं उसे अपने दोस्तों से चुदवाता हूं और वो मेरे लिए नई-नई आंटियां चोदने के लिए दोस्ती कराती है, दुखिया की गति दुखिया जाने और ना जाने कोय।

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