Sasuma chudai sex story: आज की कहानी उन तमाम फ्री सेक्स कहानी डॉट इन के पाठकों को समर्पित है जो रोजाना इस वेबसाइट पर आते हैं और सेक्सी कहानियां पढ़कर मूठ मारते हैं। क्योंकि मैं भी इस वेबसाइट की फैन हूँ। बहुत दिनों से कहानियां पढ़ती हूँ। इस वेबसाइट की कहानियां बहुत ही ज्यादा सेक्सी होती हैं। और सच पूछिए तो चुदाई कैसे की जाती है कैसे चुदाई में दुगुना मजा मिलेगा मुझे ये ज्ञान इसी वेबसाइट से मिली है। शुक्रिया अदा करती हूँ आप सबों का खासकर उन बहनों को जो इस वेबसाइट पर हॉट कहानियां पोस्ट करती हैं। इसलिए आज मैं अपनी भी कहानी आप सबों को सुनाने जा रही हूँ।
मेरी एक ही बेटी है किरण। पिछले साल ही उसकी शादी हुई है। किरण बंगलौर में रहती है जबकि मैं जयपुर में रहती हूँ। मेरे पति कनाडा में रहते हैं तो वो साल में सिर्फ एक महीने के लिए आते हैं। मैं अकेली ही रहती हूँ जयपुर में। दोस्तों मैं बहुत खुले विचार की महिला हूँ। मैं खूब मजे करती हूँ और अपनी ज़िंदगी शान से जीती हूँ। जब भी मन करता है दो तीन दिन दिल्ली घूमने जाती हूँ होटल में रहती हूँ खाती पीती हूँ मस्त रहती हूँ।
मेरा दामाद जो पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। वो अभी एक प्रोजेक्ट के लिए अमेरिका जा रहा था इसलिए वो मुझसे मिलने आ गया। जयपुर में मैं खुद एयरपोर्ट लेने गई थी उसे। करीब रात के आठ बजे वो घर पहुंचा। मैंने पहले से ही उसके लिए बिरयानी बना कर रखी थी। उसने रात को पीने के लिए एक वाइट रम लाया उसको पता था मुझे सफेद रम बहुत पसंद है। तो हम दोनों खाना पीना खाकर सोने चले गए। मैं उसी दिन एक सेक्सी ड्रेस अपने लिए ऑनलाइन मंगवाई थी। मैंने पहन ली थी तो उसकी नजर मेरे ऊपर थी। भले वो दामाद है पर मैंने कभी भी दामाद की दृष्टि से नहीं देखा। हमेशा खुले विचार में रही मजाक की। यहाँ तक कि मैं उसको ये भी पूछ लेती थी क्या हाल है आज रात को कितने बार किये। यानी मेरी बेटी को चुदाई। तो आप खुद ही समझ सकते हैं।
रात को जब सोने जाने लगे तो मैं बोल दी आ तुम्हे गर्मी कौन देगा ? तुम्हारी जानेमन तो बंगलौर में है। तो वो बोला आप मुझे गर्मी दे देना। मैं आपको सेक्स के लिए नहीं कह रहा हूँ। तो मैं बोली हां गर्मी तो दे सकती हूँ थोड़े देर साथ सुलाकर क्यों की सर्दी है पर सेक्स करने तो नहीं दे सकती। सेक्स के लिए तो तुम्हे अपनी बेटी दे दी हूँ। मजे लो मुझमे क्या रखा है। 40 की हो गई हूँ मानती हूँ की अभी जवान हूँ और किसी भी अठारह साल की लड़की को फेल कर सकती हूँ पर तुम्हे तो खुश नहीं कर सकती क्यों की तुम दामाद हो।
तो दामाद बोला ठीक है चलो थोड़ा देर मुझे सुला ही लो अपने साथ अपने रजाई में उसके बाद देखते हैं आप मुझे गरम करती हो या मैं गरम करता हूँ। मैं बोली ठीक है देखलेते हैं किसके शरीर में कितनी गर्मी है। और दोनों एक दूसरे को देखते हुए बेड पर आ गए और दोनों एक ही रजाई में घुस गए। वो टिक टोक देख देखने लगा। और तुरंत ही वो अपना फोएन रख दिया मुश्किल से पांच मिनट ही मोबाइल इस्तेमाल किया। मैं उस समय एक हॉट कहानी खोल कर देख रही थी की नई कहानी अपडेट हुई है या नहीं। पर एक बहुत सेक्सी कहानी पढ़कर मैं कामुक हो गई क्योंकि बहुत ही हॉट स्टोरी थी।
वापस आई तो मैं ठंडी हो चुकी थी पर दामाद गरम हो चुका था मेरे हाथ पैर ठंढे पड़े थे पर वो गरम था। मैं उसका हाथ पकड़ी तो बोली अब तो तुम्हे ही गरम करना पडेगा। वो मेरा हाथ पकड़ लिया। और मेरे से चिपक गया। उसने अपना हाथ मेरे बूब पर रखा। मैं कुछ भी नहीं बोली पर वो धीरे धीरे कर दबाने लगा। मुझे उसका छुअन बहुत ही हॉट लग रहा था क्यों की मैं थोड़े शराब के नशे में भी थी और एक जवान लड़का मेरे साथ सोया था घर में कोई नहीं और वो मेरे करीब मेरी चूचियों को सहला रहा था। मैं धीरे धीरे कामुक हो गई। मेरी चुत तो पहले से ही गीली थी। क्यों की सेक्सी कहानियां पढ़ चुकी थी। अब तो वो आग लगा दिया थे मेरे बदन में।
मैं बोली तुमने मुझे गरम कर दिया है। अब मैं शायद रह नहीं पाऊँगी तुम थोड़े देर और सोये मेरे साथ तो इसलिए मैं कहती हूँ चले जाओ अपने बेड पर मैं अपनी बेटी को चीट नहीं करना चाहती। तो वो बोला मम्मी जी कोई देख थोड़े ना रहा है मैं आपको हालात देख रहा हूँ आपको अब कुछ बोलने की जरुरत नहीं और ना ही कुछ छुपाने को जरुरत ना किसी को कुछ बताने की जरुरत। रात गई बात गई क्यों न आज रात मैं आपको खुश कर दूँ।
इतना कहते ही मैं उसको होंठ पर अपना होंठ रख दी। वो मेरे होंठ को मैं उसके होंठ को चूसने लगी। आग दोनों तरफ लग चुकी थी।
उसके नरम लेकिन मोटे होंठ मेरे होंठों पर दब रहे थे। मैंने अपनी जीभ निकालकर उसके होंठों के बीच सरका दी और वो भी अपनी गर्म जीभ मेरे मुंह में घुसा दी। हम दोनों की जीभें एक दूसरे से लड़ रही थीं, लार का मीठा और गर्म स्वाद मिल रहा था। सांसें तेज और गर्म हो रही थीं, हर सांस के साथ उसकी छाती मेरी छाती से रगड़ खा रही थी।
उसके हाथ मेरी कमर पर कसकर पकड़ रहे थे और धीरे-धीरे ऊपर चढ़कर मेरी चूचियों को दबाने लगा। उसकी उंगलियां मेरी नरम मांसपेशियों को गहरे से दबा रही थीं, निप्पल सख्त होकर उसकी हथेलियों में दब रहे थे। मैं उसके माथे को पकड़ कर चूम रही थी, फिर उसके कंधों पर, गालों पर, होंठों पर और सीने पर गहरी चुम्बन दे रही थी।
उसने मेरी सेक्सी ड्रेस के पट्टे कंधों से उतार दिए। कपड़ा मेरी त्वचा पर सरकते हुए नीचे गिर गया और मेरी पूरी नंगी देह सामने आ गई। ठंडी हवा मेरी गर्म चूत और चूचियों पर लग रही थी। उसने खुद भी अपना कपड़ा उतार फेंका, उसका मोटा लौड़ा पूरी तरह खड़ा और नसों से फूला हुआ दिख रहा था।
अब वो मेरे ऊपर चढ़ गया। मेरे दोनों पैरों को फैला दिया, अपने घुटनों से मेरी जांघों को अलग किया। बीच में अपना लौड़ा पकड़कर मेरी चूत के मुंह पर रगड़ने लगा। मेरी चूत पहले से ही गीली और चिपचिपी थी।
उसने लौड़े का सिरा मेरी चूत के छेद पर दबाया और धीरे-धीरे अंदर धकेला। मैंने अपना पैर और फैला लिया और नीचे से हौले-हौले धक्के देने लगी। पर वो जोर-जोर से अपनी गांड उछाल-उछाल कर चूत में लौड़ा पेल रहा था।
दोस्तों अब मैं काफी ज्यादा कामुक हो गई। मैं अपनी चूचियों खुद ही दबाने लगी, मेरे होंठ खुद व खुद मेरे दांतों के अंदर आ रहे थे। मैं आह आह कर रही थी और वो जोर जोर से मुझे चोद रहा था।
अब उसने मुझे पेट के बल लिटा दिया और पीछे से ही मेरी चूत में लौड़ा घुसाने लगा। मैंने अपनी कमर को थोड़ा ऊपर कर दी ताकि उसका लौड़ा अंदर तक जा सके। अब वो मेरी गांड की तरफ से मुझे चोदने लगा।
दोस्तों अब मैं ऊपर आ गई और वो नीचे। मैं पहले उसको अपना चूत चटवाई। सफेद क्रीम जो मेरी चूत से निकल रहा था वो उसके पूरे मुंह में, नाक पर और होंठ पर लग गया था। वो मेरी चूत चाट रहा था।
मैं अपने मुंह से आह आह आह उफ उफ उफ की आवाज निकाल रही थी पर वो चुपचाप अपना काम कर रहा था। वो जोर-जोर से अपनी जीभ मेरी चूत में डाल रहा था।
उसके बाद मैं नीचे सरक गई और उसका लौड़ा पकड़कर अपने चूत में ले ली। जोर से उठने बैठने लगी। मेरी चूचियां फुटबॉल की तरह हिल रही थीं और पूरा कमरा फच फच कर रहा था। बीच-बीच में मेरी आवाज निकल रही थी आह आह आह आह।
मैं उसके ऊपर चढ़ गई, घुटनों को उसके दोनों तरफ फैलाकर बैठ गई। उसका मोटा, गर्म लौड़ा अपने हाथ में पकड़कर अपनी चूत के छेद पर रगड़ने लगी। मेरी चूत पहले से ही उसकी थूक और मेरी सफेद क्रीम से चिकनी और पूरी तरह गीली थी। जब मैं धीरे-धीरे नीचे बैठी तो उसका पूरा मोटा सिरा मेरी चूत की दीवारों को फैलाते हुए अंदर चला गया।
मुझे लगा जैसे कोई गर्म लोहे का रॉड मेरी चूत को भर रहा हो। हर इंच अंदर जाते ही मेरी चूत की मांसपेशियां सिकुड़-सिकुड़ कर उसे जकड़ रही थीं। मैं जोर-जोर से ऊपर-नीचे होने लगी। मेरी भारी चूचियां फुटबॉल की तरह तेजी से उछल-उछल रही थीं, निप्पल सख्त होकर हवा में हिल रहे थे।
हर बार जब मैं नीचे बैठती तो उसका लौड़ा मेरी चूत के सबसे अंदर तक धंस जाता। मेरी सफेद क्रीम उसके लौड़े पर और उसके पेट पर फैल जाती। पूरा कमरा फच-फच, फच-फच की तेज आवाज से भर गया था। मेरी गीली चूत और उसके लौड़े की टकराहट की आवाज हर तरफ गूंज रही थी।
मैं आह आह आह की तेज आवाजें निकाल रही थी। मेरे होंठ दांतों में दब रहे थे, आंखें बंद हो गई थीं और पूरा बदन पसीने से चमक रहा था।
दोस्तों तब तक मेरी गांड भी काफी गीली हो गई थी। मैंने अपने चूत से उसका गर्म और चिपचिपा लौड़ा धीरे से निकाला। मेरी चूत की सफेद क्रीम उसके पूरे लौड़े पर लगी हुई थी, जो अब मेरी गांड की तरफ ले जाकर मैंने सेट किया।
धीरे-धीरे मैं नीचे बैठने लगी। उसका मोटा सिरा मेरी टाइट गांड के छेद पर दबाव डाल रहा था। मैंने सांस रोकी और अपनी कमर को धीरे से नीचे किया। पहले तो तेज जलन और दर्द की लहर उठी, मेरी गांड की रिंग बहुत तंग थी और लौड़े की मोटाई उसे खींच रही थी। मेरी आंखें भींच गईं, दांत कस गए और मैंने हल्की सी आह भर दी।
पूरा लौड़ा मेरी गांड में घुस गया पर अब वैसे नहीं उछाल पा रही थी क्यों की काफी दर्द होने लगा था। शरीर में कंपन हो रहा था, सांसें भारी हो गई थीं। मेरी गांड की दीवारें उसके मोटे लौड़े को जकड़ रही थीं और हर छोटी सी हलचल से तेज जलन महसूस हो रही थी।
पर धीरे धीरे करके गांड की मांसपेशियां ढीली पड़ने लगीं और दर्द में मिठास आने लगी। अब मैं धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी, हर बार लौड़ा अंदर-बाहर होता और मेरी गांड पूरी तरह भर जाती। दर्द कम होने लगा और जगह-जगह गर्म सुखद एहसास फैलने लगा। और फिर चुदवाने लगी।
दोस्तों रात में हम दोनों फिर से दारु पिए और फिर चुदवाए। बहुत ही हसीन रात थी वो सर्दी की। दूसरे दिन ही दामाद जी चले गए। अब मैं चुदना चाह रही हूँ पर कोई जुगाड़ नहीं बन रहा है। मैं जल्द ही आपको दूसरी कहानी इस वेबसाइट पे लिखूंगी आप जरूर पढ़ियेगा.
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