Aunty chudai sex story, Chut choosna sex story: मेरा नाम आकाश है और मेरी हाईट 6 फुट है. आज मैं आपको अपनी एक नई कहानी सुनाने जा रहा हूँ. ये बात आज से 2 हफ्ते पहले की है. मैं हर रोज सुबह 6 बजे जिम जाता हूँ तो रास्ते में एक दूध डेयरी आती है, जहाँ पर एक 35-36 साल की लेडी बैठती है. मैंने कभी उस तरफ ध्यान नहीं दिया.
फिर एक दिन वो आंटी अपनी शॉप के बाहर खड़ी थी. मैंने आंटी को ध्यान से देखा तो वो क्या मस्त माल थी यारो? उस आंटी की हाईट 5 फुट 5 इंच थी, शरीर थोड़ा भरा हुआ, उसके बूब्स बड़े-बड़े थे और गांड तो बस कयामत थी. अब आंटी को देखकर एक बार तो मेरे मुँह से आह निकल गई.
फिर धीरे-धीरे मैंने आंटी पर लाइन मारनी स्टार्ट कर दी. अब उनकी शॉप के पास जाकर हॉर्न मारना तो उसका रिजल्ट ये हुआ कि अब आंटी भी मुझे नोटिस करने लगी और थोड़ी स्माइल करने लगी. फिर मैंने सोचा कि मेरा काम बन सकता है, अब आंटी की आँखों में एक प्यास सी थी.
फिर कुछ दिन के बाद आंटी के पति कहीं बाहर गये हुए थे तो आंटी शॉप पर अकेली ही होती थी. फिर एक दिन सुबह बारिश का मौसम था तो मैं जिम जाने के लिए घर से निकला तो आंटी की शॉप के पास जाकर बारिश स्टार्ट हो गई.
फिर मैंने अपनी बाइक को आंटी की शॉप के थोड़ा पीछे रोक दी. अब बारिश तेज हो गई थी और अब आंटी अपनी शॉप के बाहर खड़ी थी. फिर हम दोनों की नजरें मिली तो आंटी ने थोड़ी स्माइल दी. फिर मैंने भी जवाब में एक स्माइल कर दी. उस समय आंटी पजामा और टी-शर्ट पहने हुई थी जिसमें से आंटी की मस्त जवानी कयामत ढा रही थी.
अब आंटी मेरी तरफ ही देख रही थी और फिर 5 मिनट के बाद आंटी ने मुझे अपनी शॉप पर आने का इशारा किया तो मैं खुश हो गया. अब बारिश के कारण पूरा रोड खाली था और फिर मैं वहाँ पहुँच गया तो आंटी खुश हो गई. फिर कुछ देर तक हमारी नॉर्मल बातें हुई और फिर आंटी ने अपना नाम शर्मीला बताया.
जब आंटी बात कर रही थी तो मेरा ध्यान आंटी के बूब्स और गांड पर ही था, जिसे आंटी ने भी नोटिस कर लिया था. फिर आंटी ने कहा कि आज मौसम बहुत खराब हो गया है तो मैंने कहा कि ये तो रोमांटिक मौसम है और आपको तो अपने पति के साथ होना चाहिए.
ये सुनकर आंटी का मूड थोड़ा खराब हो गया और उन्होंने कहा कि उन्हें इस मौसम से क्या फर्क पड़ता है? वो तो बस पैसे के पीछे लगे हुए हैं. तो मैं समझ गया कि आंटी प्यासी है तो मैंने उन्हें सॉरी कहा और उन्होंने इट्स ओके कहा. फिर मैंने कहा कि आप तो इतनी स्मार्ट हैं और आपको देखकर लगता नहीं कि आप शादीशुदा हैं.
दोस्तों लेडीज की थोड़ी तारीफ कर दो तो वो पिघलने लगती हैं. फिर आंटी ने थैंक्स कहा और बोली कि मेरी भी तो कुछ इच्छा होती होगी. तो मैंने पूछा कि क्या मैं आपकी कोई मदद कर सकता हूँ? तो उन्होंने मुझे ऊपर से नीचे तक देखा और तब तक मेरा लंड भी खड़ा हो चुका था, जो आंटी ने देख लिया था.
फिर आंटी ने पूछा कि तुम क्या कर सकते हो? तो मैंने कहा कि कुछ भी जो आपको खुशी दे. फिर आंटी मेरे पास आकर खड़ी हो गई और वो अपनी शॉप का शटर नीचे करने लगी. जब वो शटर नीचे कर रही थी तो वो थोड़ी झुकी तो उनकी गांड मेरे लंड के साथ रगड़ने लगी.
मैं भी अपने लंड को आंटी की गांड पर दबाने लगा और आंटी ने कुछ नहीं कहा. फिर जब आंटी ने शटर बंद किया तो आंटी झुकी हुई थी और मैंने पीछे से उसके बूब्स पकड़ लिए तो उनके मुँह से आआआआआहह निकल गई. फिर आंटी सीधी हुई तो मैंने आंटी को किस करना स्टार्ट कर दिया.
अब आंटी भी मेरा साथ देने लगी थी। मेरे दोनों हाथ अब उसके बड़े-बड़े बूब्स पर थे। मैंने उन्हें धीरे-धीरे दबाना शुरू किया। आंटी के निप्पल्स पहले से ही सख्त हो चुके थे। मैंने अपनी उंगलियों से उन्हें सहलाया तो आंटी के मुंह से हल्की सिसकारी निकल गई। उधर आंटी का हाथ मेरे लंड पर था। वो उसे पैंट के ऊपर से ही सहला रही थी। फिर उसने धीरे से मेरी जिप खोली और हाथ अंदर डालकर लंड को बाहर निकाला। अब वो मेरे लंड को नरमी से पकड़कर ऊपर-नीचे कर रही थी। उसकी हथेली गर्म थी और उसका स्पर्श मुझे और उत्तेजित कर रहा था। अब आग दोनों तरफ बराबर लगी हुई थी।
फिर मैंने आंटी को नंगा करने की कोशिश की। मैंने उसकी टी-शर्ट ऊपर की तो आंटी ने मेरी तरफ देखकर कहा, “अरे रुक जाओ, यहां बाहर कोई देख लेगा। अंदर एक छोटा कमरा है, वहाँ चलो।” मैंने हामी भरी और आंटी का हाथ पकड़कर उसे अंदर ले गया। कमरा छोटा था लेकिन साफ-सुथरा। वहाँ एक पुरानी चादर बिछी हुई थी।
मैंने आंटी को धीरे से जमीन पर लिटा दिया। आंटी ने अपनी आँखें बंद कर लीं। मैंने पास रखे दूध के डिब्बे से थोड़ा दूध अपनी हथेली में लिया। फिर मैंने पहले आंटी के गले पर दूध लगाया और जीभ से चाटना शुरू किया। दूध की ठंडक और मेरी गर्म जीभ से आंटी सिहर उठी। फिर मैंने धीरे-धीरे नीचे आकर उसके बूब्स पर दूध डाला। दूध की बूंदें उसके निप्पल्स से होकर बहने लगीं। मैंने एक बूब को मुंह में लिया और दूध चूसते हुए निप्पल को जीभ से घुमाया। आंटी के मुंह से लगातार आहें निकल रही थीं।
अब आंटी तो जैसे पागल हो गई थी। वो बोली, “ऊऊऊऊहह जान ये क्या कर दिया… मैं पागल हो जाऊँगी… ओह्ह्ह्ह्हह ओह मैं मर गई।” मैंने उसके दूसरे बूब को भी वैसा ही चूसा। फिर मैंने उसकी पेटी और पजामा उतार दिया। अब आंटी पूरी नंगी मेरे सामने लेटी थी। मैंने उसकी पूरी बॉडी पर दूध फैलाया। गर्दन से लेकर नाभि तक, जांघों तक। फिर मैंने एक-एक करके सब जगह चाटना शुरू किया। आंटी की कमर उठ रही थी और वो मेरे बालों को पकड़कर और जोर से दबा रही थी।
फिर मैंने थोड़ा दूध अपनी उंगलियों पर लिया और आंटी की चूत पर लगाया। चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी। मैंने दूध को चूत के होंठों पर फैलाया और फिर मुंह लगा दिया। मैंने जीभ से बाहर से चाटना शुरू किया। फिर जीभ को अंदर डालकर चूसने लगा। आंटी ने तुरंत मेरा सिर अपनी चूत पर दबा लिया। वो चिल्लाई, “हहाआआआआआ वाऊऊऊऊऊऊववववव… चूसो साली… इसमें बहुत गर्मी है… और जोर से चूसो।” मैंने और तेजी से चाटना शुरू किया। मेरी जीभ क्लिटोरिस पर घूम रही थी और आंटी की कमर उछल रही थी।
कुछ देर बाद मैंने मुंह हटाया। फिर मैंने अपने लंड पर थोड़ा दूध लगाया। लंड पहले से ही पूरी तरह खड़ा और चमक रहा था। मैंने आंटी को कहा, “अब 69 में आ जाओ।” आंटी ने मुस्कुराकर हामी भरी। वो मेरे ऊपर आ गई। उसकी चूत मेरे मुंह के ठीक सामने थी और उसका मुंह मेरे लंड पर। आंटी ने मेरे लंड को मुंह में लिया और ऐसे चूसना शुरू किया जैसे उसे पूरा खा जाएगी। उसकी जीभ लंड के सुपारे पर घूम रही थी। वो गहराई तक ले जा रही थी और फिर बाहर निकालकर चाट रही थी।
मैं भी नीचे से उसकी चूत चूस रहा था। हम दोनों एक-दूसरे का रस पी रहे थे। आंटी की चूत से निकलने वाला रस मीठा-मीठा था। कुछ देर बाद आंटी ने लंड मुंह से निकाला और बोली, “मुझे इतना मज़ा आज तक कभी नहीं आया।” मैंने कहा, “असली मज़ा तो अभी बाकी है मेरी जान।” आंटी मेरे लंड को फिर से सहलाने लगी। उसकी उंगलियां लंड पर फिसल रही थीं। सिर्फ 5 मिनट में मेरा लंड फिर से पूरी तरह सख्त हो गया।
फिर मैंने आंटी को पीठ के बल लिटाया। उसके पैरों को चौड़ा खोल दिया। आंटी की चूत गीली और लाल हो चुकी थी। मैंने थोड़ा थूक अपनी हथेली में लिया और चूत पर लगाया। फिर अपने लंड को चूत के मुंह पर रखा। धीरे से जोर लगाया। लंड का सुपारा अंदर गया। आंटी ने आँखें बंद कर लीं। फिर मैंने एक झटके में पूरा लंड अंदर डाल दिया। आंटी की आँखों में आंसू आ गए। मैंने पूछा, “क्या हुआ?”
उसने कहा, “वो 6 महीने के बाद आज चुद रही हूँ… तो थोड़ा दर्द हो रहा है।” मैंने धीरे-धीरे हिलना शुरू किया। आंटी अपने नाखून मेरी पीठ पर रगड़ रही थी। पहले दर्द था लेकिन धीरे-धीरे मज़ा आने लगा। आंटी बोली, “आआआआऊउऊहह… माँ… औआआआआररर… और जोर से चोदो मुझे… फाड़ दे इसे… इसने बहुत तंग किया।”
अब आंटी भी नीचे से जोर-जोर से धक्के मार रही थी। उसकी कमर ऊपर-नीचे हो रही थी और वो मेरे हर थ्रस्ट का जवाब दे रही थी। उसकी चूत मेरे लंड को इतनी कसकर पकड़ रही थी कि हर बार अंदर-बाहर होने में मजा आ रहा था। आंटी ने अपने दोनों हाथों से अपने बूब्स को दबाना शुरू कर दिया। वो उन्हें जोर से मसल रही थी, निप्पल्स को उंगलियों से पकड़कर खींच रही थी। उसके मुंह से लगातार सिसकारियां निकल रही थीं, “आह्ह्ह… ओह्ह… और जोर से… हाँ ऐसे ही…”
मैंने अपनी रफ्तार बढ़ा दी। लंड पूरी तरह अंदर-बाहर हो रहा था। आंटी की चूत से रस बह रहा था और हर धक्के के साथ चटक-चटक की आवाज आ रही थी। अचानक आंटी की बॉडी सख्त हो गई। उसने अपनी कमर ऊपर उठाई, पैरों को मेरी कमर पर जकड़ लिया और चीखी, “आआआआह्ह्ह्ह… मैं झड़ रही हूँ… ओह्ह्ह जान…!” उसकी चूत ने मेरे लंड को और जोर से दबाया और गर्म रस मेरे लंड पर बहने लगा। वो पहली बार झड़ गई।
मैंने रुककर उसे थोड़ा सांस लेने दिया लेकिन धीरे-धीरे हिलता रहा। कुछ ही मिनट बाद आंटी फिर से उत्तेजित हो गई। उसने फिर से नीचे से धक्के मारे और अपने बूब्स को और जोर से दबाया। उसकी सांसें तेज हो गईं। फिर दूसरी बार वो कांप उठी। “ओह्ह्ह… फिर से… मैं फिर झड़ रही हूँ… आआआह्ह्ह!” उसकी चूत ने फिर से संकुचन किया और गर्म तरल मेरे लंड के चारों ओर फैल गया। आंटी दो बार झड़ चुकी थी और अब वो थककर भी पूरी तरह संतुष्ट लग रही थी।
फिर आंटी ने मेरी तरफ देखा और हांफते हुए बोली, “मैं आज पूरी तरह संतुष्ट हो गई हूँ… इतना मजा कभी नहीं आया।” मैंने मुस्कुराकर कहा, “अभी तो मेरा नहीं हुआ है मेरी जान।” आंटी ने हल्के से हंसकर कहा, “तो कर लो जो करना है।”
मैंने आंटी को पलटा और घोड़ी बनाया। आंटी ने घुटनों और हाथों के बल खुद को संभाला। उसकी गांड ऊपर उठी हुई थी और चूत पीछे से पूरी तरह खुली हुई दिख रही थी। मैंने पीछे से अपने लंड को फिर से चूत पर रखा और एक झटके में पूरा अंदर डाल दिया। आंटी ने जोर से आह भरी, “आह्ह्ह… हाँ… ऐसे ही… पीछे से बहुत अच्छा लग रहा है।”
मैंने दोनों हाथों से उसकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से धक्के मारने लगा। हर धक्के के साथ उसकी गांड मेरे पेट से टकरा रही थी और चटक-चटक की आवाज गूंज रही थी। आंटी भी पीछे से कमर हिला रही थी और बोली, “और तेज… फाड़ दो इसे… जोर से चोदो!” मैंने स्पीड बढ़ा दी। लंड पूरी गहराई तक जा रहा था। आंटी के बूब्स नीचे लटककर हिल रहे थे। मैंने एक हाथ से उसके बूब्स को पकड़कर दबाया और दूसरे से कमर को और कसकर पकड़ा।
कुछ देर बाद मुझे लगने लगा कि अब मेरा होने वाला है। मैंने कहा, “जान… मैं झड़ रहा हूँ…” आंटी ने तुरंत पीछे मुड़कर कहा, “मेरे अंदर ही झड़ जाओ… पूरा अंदर डाल दो अपना पानी!” मैंने और जोर से धक्के मारे। आखिरी कुछ धक्कों में मेरी सारी ताकत लग गई। फिर अचानक मैं कांप उठा और गर्म पानी की धार आंटी की चूत के अंदर छोड़ दी। 5 मिनट तक मैं लगातार झड़ता रहा। मेरे पानी से आंटी की चूत पूरी तरह भर गई। कुछ बूंदें बाहर भी निकलकर उसकी जांघों पर बहने लगीं।
हम दोनों कुछ देर ऐसे ही रहे। फिर मैंने धीरे से लंड बाहर निकाला। आंटी की चूत से मेरा पानी बह रहा था। हम दोनों उठे और कपड़े पहनने लगे। आंटी ने पहले अपनी टी-शर्ट और पजामा पहना। फिर मेरे पास आई, मेरे गाल पर हाथ रखा और गहरा किस किया। वो बोली, “तुम बहुत अच्छे हो… इतना प्यार से चोदा कि मैं कभी नहीं भूलूंगी।”
मैंने कहा, “अब तो मैं हमेशा तुमसे ही चुदवाऊंगी।” मैंने हंसकर जवाब दिया, “जब भी इच्छा हो तो याद कर लेना मेरी जान।” फिर मैंने आंटी से कहा, “मैं आपकी गांड मारना चाहता हूँ।” आंटी ने शरमाकर मुस्कुराई और बोली, “आज तो संभव नहीं है… थक गई हूँ… लेकिन अगली बार पक्का मार लेना। मैं तैयार रहूंगी।” मैंने कहा, “ओके, वादा रहा।”
फिर मैंने आंटी को लंबा स्मूच किया। हमारी जीभें एक-दूसरे से खेल रही थीं। किस खत्म होने के बाद आंटी ने अपना फोन निकाला और मेरा नंबर लिया। वो बोली, “अगली बार पूरा दिन तुमसे चुदवाऊंगी… कोई जल्दबाजी नहीं… पूरे आराम से।” मैंने वादा किया और मुस्कुराकर बाहर निकल गया।
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