Sasur ne Bahu ko choda sex story: मेरा नाम अस्मिता है। मैं सहारनपुर यूपी की रहने वाली हूँ। मेरी शादी हो चुकी है और मैं अपने ससुर के साथ अकेली रहती हूँ। मेरे पति बंगलौर में नौकरी करते हैं। वो दो तीन महीने में एक बार ही घर आते हैं। जब भी आते हैं तो मुझे बहुत प्यार करते हैं। मेरे ससुर जी भी बहुत अच्छे हैं। मेरे देवर की नौकरी लखनऊ में लग गई है।
पहले वो हमारे साथ ही सहारनपुर में रहता था पर नौकरी लगने के बाद वो चला गया। अब घर में सिर्फ मैं और ससुर जी हैं। मैं आप लोगों को अपने बारे में बताना चाहती हूँ। मैं पैंतीस साल की जवान और बेहद सेक्सी औरत हूँ। अभी मेरे कोई बच्चे नहीं हुए हैं।
मैं सुंदर और जवान हूँ और मेरा व्यक्तित्व इतना आकर्षक है कि देखने वाला एक बार में ही मोहित हो जाए। मेरा कद पाँच फुट चार इंच का है। मेरा जिस्म भरा हुआ और गोल मटोल है। मैं काफी गोरी हूँ और मेरा चेहरा का फेस कट इतना सेक्सी है कि मर्दों की नजरें उस पर टिक ही नहीं पातीं। मेरी जवानी देखकर मर्दों के लंड अपने आप खड़े हो जाते हैं। मन ही मन वो मुझे चोद लेना चाहते हैं पर ये मौका तो कुछ ही चुनिंदा लोगों को मिला है। मुझे सेक्स और चुदाई करना बेहद अच्छा लगता है।
मेरे पति मेरे अड़तीस इंच के मम्मों को जोर जोर से दबाते हुए मेरी चूत मारते हैं। मेरा फिगर अड़तीस बत्तीस छत्तीस का है। मुझे अपनी चूचियाँ दबवाने में बहुत मजा आता है। जब कभी किसी पराए मर्द के साथ चुदाई करने का मौका मिलता है तो मैं बिना सोचे समझे चुदवा लेती हूँ। खाओ खुजाओ और बत्ती बुझाओ वाले कॉन्सेप्ट में मैं पूरी तरह विश्वास करती हूँ। दो दिन पहले की बात है मेरी बात मेरे पति से हुई थी।
जान क्या तुम करवाचौथ पर घर नहीं आ रहे हो हर बार तुम करवाचौथ पर नहीं आते हो देखो ये बुरी बात है मैं किसके साथ पूजा करूँगी मैंने अपने पति मल्लू से पूछा। फिर से उसने बहाना बना दिया। देखो मैं अपने बॉस से बात करूँगा और छुट्टी माँगूँगा अगर मिलती है तो आ जाऊँगा मल्लू बोला।
असल में कुछ महीनों से उसका उसकी सेक्रेटरी से चक्कर चल रहा था। मल्लू बंगलौर की एक फर्म में चार्टर अकाउंटेंट था। वो बस पैसे के पीछे भागने वाला मर्द था और खूबसूरत और जवान लड़कियों को देखकर फिसल जाता था।
मुझे कुछ दिन पहले उसके ऑफिस से किसी ने बताया था कि मल्लू का उसकी सेक्रेटरी से अफेयर चल रहा है और दोनों ऑफिस में ही मजे लूट लेते हैं। ये बात जानकर मैं काफी दुखी हो गई थी। आखिर दो दिन बाद करवाचौथ का त्योहार आ गया और मल्लू नहीं आया।
पापा जी वो नहीं आए मैंने कहा और रोने लगी। मेरे ससुर बहुत अच्छे आदमी थे। मेरा पति बहुत नालायक था पर ससुर जी बहुत अच्छे थे। मेरी बहुत देखभाल करते थे। उन्होंने मुझे सीने से लगा लिया। मैं फूट फूट कर रोने लगी।
रो मत मेरी बच्ची रो मत मेरा बेटा इतना नालायक निकलेगा मुझे नहीं मालूम था वो बोले और मेरे सिर पर बड़े प्यार से हाथ फिराने लगे। पापा जी अब मैं पूजा किसकी करूँ देखो चाँद भी निकल आया है मैंने आँसू बहाते हुए पूछा।
बहू चलो तुम मेरे साथ पूजा कर लो ससुर जी बोले। उनको मैं हमेशा पापा जी कहकर बुलाती थी।
फिर वो भी नये कपड़े पहनकर छत पर आ गये। उन्होंने सफेद कुर्ता और धोती पहनी थी जो उनकी चौड़ी छाती और मजबूत कद को और भी आकर्षक बना रही थी। मैंने अपनी शादी वाली लाल सुहाग साड़ी पहनी हुई थी जो मेरे भरे हुए जिस्म पर कस कर लिपटी हुई थी। उस साड़ी का पल्लू मेरी गोरी त्वचा पर चमक रहा था और मेरी कमर की घुमावदार लकीरें साफ दिख रही थीं। रात की ठंडी हवा मेरे खुले बालों को हल्का सा उड़ा रही थी। मैंने चाँद को देखकर पूजा की। मैंने हाथ जोड़कर अर्ध्य दिया और फिर छन्नी के माध्यम से ससुर जी को देखा। फिर किसी बीबी की तरह मुझे अपने पति के पैर छूने थे। पति तो थे नहीं इसलिए मैंने झुककर ससुर जी के पैर छू लिए।
वो अच्छे मूड में दिख रहे थे। उन्होंने मुस्कुराते हुए मुझे उठाया और खुद ही गिलास से पानी पिलाकर मेरा व्रत तुड़वाया। आज सुबह से हम दोनों ने कुछ भी नहीं खाया था क्योंकि ससुर जी भी मेरे साथ पूरा दिन व्रत रखे हुए थे। हम दोनों नीचे चले गए। मैंने उनको अपने हाथ से खाना खिलाने लगी। मैं पूरी तरह से नवविवाहिता दुल्हन लग रही थी। मेरे हाथों और पैरों में लगी गहरी लाल मेहंदी अभी भी ताजी महक रही थी और मेरी गोरी त्वचा पर खूबसूरती बढ़ा रही थी। रात के दस बज चुके थे।
घर में सन्नाटा छाया हुआ था। सिर्फ दो लोग होने की वजह से माहौल थोड़ा अजीब और रोमांच से भरा लग रहा था। ससुर जी बार बार मेरे दूध की तरफ देख रहे थे। मैंने बाहें खुला वाला कट स्लीव ब्लाउज पहना था और ब्लाउज आगे से काफी गहरा था। मेरी 38 इंच की गोल गोल चूचियां ब्लाउज के गहरे कट से साफ साफ उभरी हुई दिख रही थीं। उनके गोरे मांसल ऊपरी हिस्से और गहरी खाई ससुर जी की नजरों को बार बार खींच रही थी। ससुर जी मेरे मम्मों को ताड़ रहे थे और जैसे ही मैं उनकी तरफ देखने लगती वो नजरें दूसरी तरफ घुमा लेते।
मैं सुंदर और जवान औरत थी। आखिर वो क्यों नहीं मेरी जवानी देखते। फिर मैंने सोचा कि आज ससुर जी भी पूरा दिन व्रत रहे हैं। क्यों न मैं उनको अपने हाथ से खाना खिला दूं। मैंने पूड़ी का एक कौर तोड़ा और सब्जी में डुबोया और ससुर जी को खिलाने लगी। वो संकोच कर रहे थे। क्या पापा जी आप तो लड़कियों की तरह शरमा रहे हैं अब अपनी बहू से कैसी शर्म मैंने बिंदास लड़की की तरह चहक कर कहा और उनको खाना खिलाने लगी। पर दूसरी बार मेरा हाथ उनके मुंह में अंदर चला गया और जल्दबाजी में उन्होंने मेरी ऊँगली को काट दिया।
अई अई अई अहह्ह्ह्हह सी सी लग गई मैं चिल्लाई। ससुर जी ने जल्दी से मेरी ऊँगली अपने मुंह में दबा ली और चूसने लगे। उनकी गर्म नम जुबान मेरी ऊँगली के चारों ओर घूम रही थी। वो जोर से चूस रहे थे जिससे मेरी उंगली पूरी तरह उनके मुंह के अंदर गीली हो गई। शुरू में तेज दर्द था लेकिन धीरे धीरे आराम मिलने लगा। मेरी सांसें तेज हो गईं और मेरी चूत में हल्की सी गर्मी फैलने लगी। पर वो चूसते ही चले गए। फिर मुझे देखकर रुक गए और मेरी तरफ दूसरी नजर से देखने लगे। मैं भी उनको ही देख रही थी। कुछ अजीब अब होने वाला था।
फिर अचानक उन्होंने मुझे कुर्सी पर बैठे बैठे ही पकड़ लिया और मेरे होठ पर अपने होठ रख दिए। उनके मजबूत हाथ मेरी कमर को जकड़ चुके थे। वो जल्दी जल्दी मेरे रसीले होठ चूसने लगे। उनकी गर्म सांस मेरे चेहरे पर पड़ रही थी और उनकी दाढ़ी मेरी नरम त्वचा को खुजला रही थी। उन्होंने मेरे निचले होंठ को दांतों से हल्का दबाया और फिर अपनी जीभ मेरे मुंह के अंदर घुसा दी। मेरी जीभ से उनकी जीभ टकराई और लार का मिश्रण हमारे मुंह में फैल गया। मैं मना कर रही थी पर तब तक बहुत देर हो गई थी। ससुर जी से पूरे पांच मिनट तक मेरे रसीले होठ चूस डाले। मेरे स्तन उनके सीने से दब रहे थे और मेरी चूत में पसीना और रस बहने लगा था। फिर अपना मुंह मेरे मुंह से हटाया। वो मुझे चोदना चाहते थे मैं जान गई थी।
आगे के पंद्रह मिनट कैसे गुजरे मुझे याद नहीं है। पापा ने मुझे गोद में उठा लिया। उनकी मजबूत बाहें मेरी पीठ और घुटनों के नीचे थीं। वो मुझे सीधा अपने बेडरूम की तरफ बढ़ने लगे। मैं चुप थी। मैं सोच नहीं पा रही थी कि क्या करूं। उन्होंने मुझे बेड पर लिटा दिया। सॉफ्ट गद्दा मेरी पीठ के नीचे दब गया। उन्होंने जल्दी से अपनी शर्ट की बटन खोलकर शर्ट उतारकर फेंक दी। उनकी चौड़ी छाती और सफेद बालों वाली त्वचा अब नंगी थी। वो मेरे ऊपर लेट गए और जल्दी जल्दी मेरे गालों पर किस करने लगे। उनके गर्म होंठ मेरी त्वचा पर बार बार दब रहे थे।
मैं परेशान थी। मैं बहुत हैरान थी। पर न जाने क्यों मैंने उनको मना नहीं किया। मैं चाहती तो ससुर जी को रोक सकती थी। पर शायद इस काली सुनसान रात में चुदाई के मजे लूटना चाहती थी। ससुर जी ने मेरी साड़ी का पल्लू मेरे ब्लाउज से हटा दिया और मुझे बाहों में भर लिया। उनके हाथ मेरे ब्लाउज पर घुमाने लगे। वो मेरी 38 इंच की चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से जोर जोर से दबा रहे थे। उनकी उंगलियां गहरे कट में घुसकर मेरे निप्पल को चुटकी में ले रही थीं। वो आज मेरी जवानी और खूबसूरती के आशिक हो गए थे। मैं पूरी तरह से नई दुल्हन की तरह सजी धजी थी और ससुर जी अब मेरे पति का रोल निभा रहे थे। वो मेरे गाल गले कान चेहरे सब जगह किस कर रहे थे। मैं भी साथ दे रही थी।
बहू आज तुमने करवाचौथ की पूजा मेरे साथ की है। छन्नी में तुमने मेरा चेहरा देखा है। तो आज मुझसे प्यार करके तुम अपने व्रत को पूरा कर दो ससुर जी बोले। तो क्या आप चाहते हैं कि मैं आपको अपनी रसीली चूत चोदने दे दूं मैंने हांफते हुए और लंबी लंबी सांसें खींचते हुए कहा। हां बहू मैं बिलकुल यही चाहता हूं। तुम्हारा पति वहां बंगलौर में अपनी सेक्रेटरी के साथ मजे लूट रहा होगा और तुम यहां पर प्यासी रह जाओ। ये तो सरासर गलत है। बोलो बहू क्या ख्याल है ससुर जी ने चमकती आँखों से इस तरह से पूछा कि मैं मना नहीं कर पाई।
मैंने हां में सिर हिला दिया।
उसके बाद तो ससुर जी शुरू हो गये। उनके दोनों बड़े मजबूत हाथ सीधे मेरे बड़े बड़े कसे हुए मम्मों पर आ गिरे। उन्होंने ब्लाउस के ऊपर से ही मेरी 38 इंच की भरी हुई चूचियों को लप्प लप्प करके जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया। उनकी उंगलियां मेरे नरम मांसल स्तनों को गहरे तक दबा रही थीं और उन्हें आकार बदल रही थीं। मैं तुरंत अनियंत्रित होकर “..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ….अअअअअ….आहा …हा हा हा” की ऊंची कामुक आवाजें निकालने लगी। मेरी सांसें तेज हो गईं और मेरी छाती ऊपर नीचे होने लगी।
ससुर जी मुझे प्यार करने लगे। ब्लाउस के गहरे कट से जितना भी गोरा दूध दिख रहा था, उस पर उन्होंने गर्म चुम्बनों की लगातार बारिश कर दी। उनके होंठ मेरी चिकनी त्वचा पर चिपक रहे थे और बार बार चूस रहे थे। मैं भी धीरे धीरे गर्म होने लगी। मुझे अब सच्चा मजा आने लगा था। मेरी चूत गीली होने लगी और शरीर में एक अजीब सी गुदगुदी फैलने लगी।
फिर उन्होंने अपना मुंह मेरे मुंह पर रख दिया और मेरे रसीले होंठों को काटते हुए गहरे गहरे किस करने लगे। उनकी जीभ मेरे मुंह के अंदर घुस कर मेरी जीभ से उलझ गई। लार का मिश्रण दोनों के मुंह में फैल गया। अब मैं पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी। मेरे अंदर की छुपी हुई वासना जाग चुकी थी और मैं भी अब ससुर जी से खुलकर चुदना चाहती थी।
वो अपने दोनों हाथों को गोल गोल घुमाते हुए मेरे ब्लाउस पर मेरी चूचियों को दबा दबा कर पूरा मजा लूट रहे थे। उनकी हथेलियां मेरे स्तनों की गर्मी और नरमी को महसूस कर रही थीं। “प्यार करो पापा जी!! आज मुझसे खुलकर प्यार करो” उतेजना में मैंने हांफते हुए कह दिया।
वो मेरे ब्लाउस की बटन ढूंढने लगे लेकिन अपनी जल्दबाजी में बार बार फंस रहे थे। ससुर जी ने धैर्य खोकर मेरे ब्लाउस को बीच से दोनों हाथों से पकड़ लिया और जोर से खींच दिया। ब्लाउस के कपड़े चीर चीर कर फट गए और अलग हो गए। अब लाल ब्रा में मेरी कसी कसी 38 इंच की रसीली चूचियों के पूरे दर्शन ससुर जी को हो गए।
“आह बहू!! तुम तो बहुत खूबसूरत हो” वो उत्तेजित स्वर में बोले और फिर ब्रा को भी दोनों हाथ से पकड़कर फाड़ दिया और दूर फेंक दिया। अब मैं पूरी तरह से ऊपर से नंगी हो गई थी। पापा जी वासना से भरी आंखों से मेरे मम्मों के दर्शन करने लगे। मेरी चूचियां बेहद सुंदर थीं – कसी हुईं, गोल मटोल, भारी और संगमरमर जैसी चिकनी व सफेद।

ससुर जी की आँखें वासना में चमक उठीं। उन्होंने दोनों हाथों से मेरे दूध को पकड़ लिया और जोर से सहलाने तथा मसलने लगे। मैंने आँखें बंद कर लीं और “……अई…अई….अई……अई….इसस्स्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….” की लगातार कामुक आवाजें निकालने लगी। मेरे निप्पल्स सख्त हो गए थे और उनकी उंगलियों के स्पर्श से बिजली सी दौड़ रही थी।
वो मेरे ऊपर लेट गए और अपना चेहरा मेरे मम्मों के बीच गाड़ दिया। मेरी चूचियां किसी बड़े बड़े सॉफ्ट गेंद की तरह थीं। उन्होंने हाथ से दबाना शुरू किया और फिर मुंह से चूसना शुरू कर दिया। उनकी दाढ़ी मेरी नरम त्वचा को खुजला रही थी।
“आह पापा जी!! आज रात के लिए मैं आपकी औरत हूँ। आज चोद लो मुझे आप। ले लो मजा मेरी भरी जवानी का” मैंने नशे में भरकर कहा।
उसके बाद वो जल्दी जल्दी मेरी चूचियों को हाथ से आटे की तरह गूथने लगे। फिर बारी बारी से दोनों निप्पल्स को मुंह में ठूस कर जोर जोर से चूसने लगे। मैं “…..ही ही ही……अ अ अ अ .अहह्ह्ह्हह उहह्ह्ह्हह….. उ उ उ…” की आवाजें निकालती रही।
कामुकता में आकर मैंने उनके सिर के बाल पकड़ लिए और अपनी उंगलियों से नोचने लगी। मैंने दो जोरदार चांटे भी उनके गाल पर मार दिए। वो समझ गए कि मैं अब पूरी तरह गर्म हो चुकी हूं। ससुर जी ने अगले 15 से 20 मिनट तक मेरी दोनों चूचियों का रस चूसा, दांतों से निप्पल खींचे और खूब मुंह चलाकर पिया।
इसी गरमा गर्मी में उन्होंने मेरी उभरी हुई गद्देदार निप्पल्स को कई बार दांत से पकड़कर ऊपर की तरफ खींच खींच कर चूसा। मुझे तेज दर्द हुआ लेकिन साथ में बहुत मजा भी मिला। मेरे दोनों बूब्स पर उनके दांतों के गहरे निशान बन गए थे।
“चोदिये पापा जी!! आज करवाचौथ है। आज मैं आपको बीबी हूँ। पति धर्म आज निभा दीजिये। आज चोद लीजिये मुझको” मैंने बार बार हांफते हुए कहना शुरू कर दिया।
ससुर जी ने अपनी पेंट और अंडरवियर उतार दी। अब वो भी नीचे से नंगे हो गए थे। उन्होंने मेरी साड़ी मेरी कमर से खोल दी और पूरी उतार दी। मैंने लाल पेटीकोट पहना था जिसे उन्होंने मुंह से नारा खींचकर उतार दिया। मेरी पेंटी पहले से ही मेरे चूत के रस से पूरी भीग चुकी थी।
जब उन्होंने पेंटी उतारी तो वो मेरे घुटनों तक फंस गई। फिर उन्होंने उसे भी निकाल दिया। मैं शर्म से भर गई और अपने दोनों हाथों से अपना चेहरा छुपा लिया।
ससुर जी पागल हो गए थे। मेरी गोरी जांघें और चिकने पैर देखकर वो और भी उत्तेजित हो गए। उन्होंने मेरे पैरों को हाथ से सहलाया और फिर दोनों पैर खोल दिए। उन्होंने दो सेकंड तक मेरी रस से तर और पूरी तरह भीगी गुलाबी चूत को देखा। फिर वो लेट गए और अपना मुंह मेरी चूत पर टिका दिया।
उन्होंने जल्दी जल्दी मेरी चूत की चटनी पीना शुरू कर दिया। उनकी गर्म जीभ मेरी फूली हुई चूत की लेबिया पर घूम रही थी। कामुकता के नशे में मैं “अई…..अई….अई… अहह्ह्ह्हह…..सी सी सी सी….हा हा हा…” की आवाजें निकाल रही थी। मेरी आँखें बंद थीं और मैं उनकी नजरों से बच रही थी।
वो मेरी तर चूत को रबड़ी की तरह चाट रहे थे। उनकी जीभ मेरी चूत के छेद के अंदर तक बार बार घुस रही थी। मेरी चूत से लगातार रस निकल रहा था जो वो चाट चाट कर पी रहे थे।
ससुर जी ने पूरे 10 मिनट तक मेरी चूत चाटी। अंत में उन्होंने अपना सख्त और मोटा 8 इंच का लंड मेरी चूत के मुंह पर सेट कर दिया और एक जोरदार धक्का दिया। लंड पहले 4 इंच अंदर घुस गया। मुझे तेज दर्द हुआ।
फिर ससुर जी ने एक और जोर का धक्का दिया। अब उनका पूरा 8 इंच का लंड मेरी चूत के अंदर पूरी तरह घुस गया।
मैं दर्द से “आऊ…..आऊ….हमममम अहह्ह्ह्हह…सी सी सी सी..हा हा हा..”बोलकर चिल्ला पड़ी।
मैंने अपने हाथ अपने चेहरे से हटा दिए और उनको मुंह पर मुक्के मारने लगी। मैं पूरी तरह उत्तेजित और शर्मिंदा थी, इसलिए मैंने ससुर जी के चेहरे पर बार बार मुक्के मारने शुरू कर दिए। मेरी नाजुक मुट्ठियां उनके मजबूत गालों पर, ठोड़ी पर और छाती पर लगातार पड़ रही थीं। हालांकि वो मुक्के ज्यादा जोरदार नहीं थे लेकिन वे उनकी उत्तेजना को और बढ़ा रहे थे और मेरे अंदर का संघर्ष साफ दिखा रहे थे।
ससुर जी भी असली मर्द के बच्चे थे। उन्होंने बड़ी ताकत से मेरे दोनों हाथ कसके पकड़ लिए और बिस्तर पर ऊपर की तरफ दबाकर रख दिए। उनकी मजबूत उंगलियां मेरी नाजुक कलाइयों को लोहे की तरह जकड़ चुकी थीं जिससे मेरी हथेलियां बिस्तर से चिपक गईं और मेरी बाहें अब पूरी तरह पिन हो चुकी थीं। मेरी नाजुक कलाई पकड़कर उन्होंने चुदाई स्टार्ट कर दी। मुझे धका धक जोरदार तरीके से पेलने लगे।
आज पूरे 3 महीनों बाद मैं चुद रही थी क्योंकि मेरा पति मल्लू घर ही नहीं आया था। इस वजह से मेरी चूत का रास्ता काफी टाइट और सूखा सा हो गया था। पर आज मेरे मर्दाना मिजाज वाले ससुर जी मुझे बेरहमी से पेल रहे थे। उनका मोटा और सख्त 8 इंच का लंड मेरी गीली चूत में मुश्किल से घुस रहा था लेकिन हर जोरदार धक्के के साथ वह गहराई तक फाड़ता हुआ अंदर जा रहा था।
वो कमर उठा उठाकर मुझे चोद रहे थे। हर बार उनकी कमर ऊपर उठती और फिर पूरे जोर से नीचे गिरती जिससे उनका लंड मेरी चूत की सबसे गहराई तक धंस जाता और उनके अंडकोष मेरी नितंबों से चुट चुट की आवाज के साथ टकराते। मैं लंबी लंबी सांसें ले रही थी। मेरे 38 इंच के भारी दूध जोर जोर से हिल रहे थे और ऊपर नीचे डांस कर रहे थे। हर थ्रस्ट के साथ मेरी चूचियां लहरा रही थीं और ससुर जी की चौड़ी छाती से टकरा रही थीं।
ससुर जी सिर्फ मेरी चूत की तरफ देखकर पेल रहे थे। मैं मर रही थी। दर्द और आनंद का ऐसा तूफान था कि मेरी आंखों से आंसू निकल आए और मेरी चूत से चिकनाई की आवाजें पूरे कमरे में गूंजने लगीं। 15 मिनट बीतते ही मेरी चूत रंवा हो गई। अब ससुर जी का लंड आराम से अंदर बाहर होने लगा। दिल खोलकर चुदी जा रही थी।
फिर हांफते हांफते ससुर जी ने मुझे और 10 मिनट तक लगातार चोदा। उनके धक्के अब और तेज और गहरे हो गए थे। उनकी सांसें तेज थीं और पसीना उनकी छाती से मेरे स्तनों पर टपक रहा था। फिर उनका चेहरा ढीला पड़ गया। उनकी आंखें बंद हो गईं और पूरा शरीर अकड़ गया। मेरी चूत में गर्म गर्म माल उन्होंने छोड़ दिया। उनकी वीर्य की गर्म धारें मेरी चूत की गहराई में फूट पड़ीं और कई जोरदार झटकों के साथ उन्होंने अपना पूरा माल मेरी चूत के अंदर उंडेल दिया। मेरे ऊपर थक कर गिर गए। मैंने उनके होठ फिर से चूमने लगी।
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