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प्रमोशन चक्कर में चुद गई आंगनबाड़ी टीचर

Anganwadi teacher promotion sex story: प्रफुल्ल राय को सरकार में संयुक्त शिक्षा निदेशक बनाकर भेजा गया। यह पद विभाग में सबसे बड़ा और सबसे प्रतिष्ठित पद होता है जिसमें जिले भर की समूची शिक्षा व्यवस्था का नियंत्रण संचालन और नीतिगत फैसले लेने का पूरा अधिकार होता है। जिला विद्यालय निरीक्षक के ऊपर का पद है यह जहां से नीचे के सभी अधिकारियों को निर्देश जारी होते हैं बड़े मामले सुलझाए जाते हैं और पूरे क्षेत्र की शिक्षा की गुणवत्ता पर नजर रखी जाती है। प्रफुल्ल राय अभी केवल अट्ठाईस साल के थे। वे पढ़ने में बेहद होनहार थे हमेशा किताबों और अध्ययन में डूबे रहते थे अपनी बुद्धिमत्ता और मेहनत से हर चुनौती पार करते थे। इसलिए पीसीएस की परीक्षा पास कर गए और संयुक्त शिक्षा निदेशक बना दिए गए।

प्रफुल्ल की गरीबी अब पूरी तरह धूल चुकी थी जैसे वह कभी उनके जीवन का हिस्सा ही नहीं रही हो। अब वे हर दिन कई हजार रुपये कमाने लगे थे क्योंकि जो भी बाबू चपरासी टीचर या प्रिंसिपल उनके पास आता वह कुछ न कुछ पैसे या उपहार देकर ही वापस जाता था ताकि अपना काम आसानी से और जल्दी हो जाए। इस तरह प्रफुल्ल के पास अब पैसा ही पैसा था उनके बैंक खाते में रकम लगातार बढ़ती जा रही थी जीवन स्तर ऊंचा हो गया था और हर जरूरत पूरी होने लगी थी। पर वे जवान थे बेहद खूबसूरत थे उनकी आकर्षक शक्ल और युवा ऊर्जा उन्हें हर जगह अलग बनाती थी। उनके कुशीनगर जैसे छोटे शहर में दिल नहीं लगता था जहां शामें उदास सी गुजरती थीं रातें अकेली और एकरस होती थीं कोई बड़ा मनोरंजन या रोमांच नहीं मिलता था।

वे ट्रांसफर करवाकर लखनऊ या वाराणसी आना चाहते थे जहां बड़े शहर की चमक दमक आधुनिक सुविधाएं और ज्यादा अवसर उपलब्ध हों। प्रफुल्ल का मन डोल ही रहा था कि एक सोमवार को मनीषा पांडेय नामक बड़ी गजब की महिला उनसे उनके ऑफिस में मिलने आई। वह आंगनबाड़ी में टीचर थी और मात्र तीन हजार रुपये महीने कमाती थी जिससे उसका गुजारा मुश्किल से होता था और परिवार की जरूरतें पूरी करने में भी दिक्कत आती थी। उसकी चाल ढाल बड़ी मतवाली थी जैसे हर कदम पर उसकी कमर लहराती हो पूरे शरीर में एक आकर्षक लय और मादकता भर जाती हो। छातियां बहुत बड़ी बड़ी और बेहद पुष्ट थीं जो उसके साधारण कपड़ों में भी उभरकर साफ नजर आती थीं और किसी भी पुरुष का ध्यान तुरंत खींच लेती थीं।

मनीषा पांडेय में गजब का आकर्षण था उसकी उपस्थिति मात्र से पूरा कमरा भर जाता था और हवा में एक अनोखी ऊर्जा फैल जाती थी। उससे मिलते ही प्रफुल्ल सब कुछ भूल गए उनकी आंखें उस पर टिक गईं सांस थम सी गई और दिमाग में सारे विचार अटक गए। वे मंत्रमुग्ध हो गए और उसके जाने के बाद वे मनीषा पांडेय के सिवा कुछ सोच नहीं सके बार बार उसकी याद उनकी मन में घूमती रही और उन्हें बेचैन कर देती रही। मनीषा से मिलने के बाद उन्हें अचानक कुशीनगर जैसे छोटे टाउन से प्यार हो गया जैसे वह शहर अब पहले से कहीं ज्यादा सुंदर रोमांचक और जीवंत लगने लगा हो। मनीषा गजब की सुंदरी थी। उनकी आंखें बड़ी तेज और कटिली थीं जो सीधे दिल में उतर जाती थीं एक गहरी नजर से व्यक्ति को जकड़ लेती थीं और लंबे समय तक याद रह जाती थीं।

प्रफुल्ल अब कुशीनगर में ही रहने की सोचने लगे क्योंकि मनीषा की वजह से यह जगह उनके लिए अचानक खास और प्यारी हो गई थी। प्रफुल्ल ने मन ही मन ठान लिया कि अगर उन्हें मनीषा पांडेय मिल जाती है तो उनकी लाइफ पूरी तरह सेट हो जाएगी सब कुछ परफेक्ट और खुशहाल लगेगा। प्रफुल्ल राय जिनको सब राय साहेब कहकर पुकारते थे उन्होंने मनीषा की फाइल खोली कागजों को ध्यान से पलट पलटकर देखा हर छोटी डिटेल को नोट किया और उसके बारे में ज्यादा जानने की कोशिश की। उनको पता चला कि मनीषा बहुत गरीब है उसके परिवार की आर्थिक हालत काफी खराब है और रोजी रोटी का संघर्ष चलता रहता है।

उसके पिता किसान थे और दो हजार रुपये महीना ही कमा पाते थे जिससे परिवार का पेट भरना भी मुश्किल हो जाता था और कई बार कर्ज लेना पड़ता था। मनीषा ने आंगनबाड़ी से कार्यकर्त्री बनने के लिए अप्लिकेशन दी थी ताकि थोड़ी अतिरिक्त आय हो सके और घर की जिम्मेदारियां कुछ हद तक संभाली जा सकें। उसी दिन प्रफुल्ल सपने के केंद्र को चेक करने पहुंच गए अपनी सरकारी गाड़ी में बैठकर लंबी धूल भरी सड़क पर निकल पड़े जहां गर्म हवा चेहरे पर लग रही थी और खेतों की महक हवा में फैली थी। मनीषा बच्चों को पढ़ा रही थी उसके चेहरे पर समर्पण भरी मुस्कान थी और आवाज में मिठास थी। घर में बस एक ही कमरा था जो सादगी से भरा हुआ था दीवारें पुरानी और फर्श साफ लेकिन साधारण था। उसके पिता जी बगल के खेत में फटे पुराने कपड़े पहनकर काम कर रहे थे धूप में पसीना बहा रहे थे पीठ पर मेहनत की लकीरें दिख रही थीं और हाथ मिट्टी से सने हुए थे।

अरे आप सर?? मनीषा उठ खड़ी हुई।

कल आप ऑफिस आइये प्रफुल्ल राय बोले और अपनी सरकारी बोलेरो गाड़ी में बैठकर चल दिए। वे शर्मा गए थे। नहीं चाहते थे कि और लोगों को उनके इरादे के बारे में पता चले कि वे मन ही मन मनीषा को अपना दिल दे बैठे हैं और उससे प्यार करने लगे हैं।

अगले दिन मनीषा बैंगनी साड़ी पहन कर राय साहेब यानी प्रफुल्ल से मिलने पहुंची। उनके केबिन में गई। मनीषा जी मैं आपसे प्यार करने लगा हूं। जब से आपको देखा है बस देखता ही रह गया हूं! मुझे आपसे प्यार हो गया है प्रफुल्ल राय ने हिम्मत करके बोल दिया।

मनीषा के पैरों से जमीन निकल गयी। उसकी सांस अचानक रुक सी गई जैसे कोई भारी पत्थर सीने पर रख दिया गया हो और पूरा कमरा उसके चारों ओर घूमने लगा हो। उसने दूसरी आंगनवाड़ियों से सुन रखा था कि बड़े बड़े अधिकारी बड़े चरित्रहीन और ठरकी होते हैं जिनकी नजर हमेशा कमजोर और गरीब महिलाओं पर टिक जाती है। अनाप शनाप पैसा होने के कारण ये इश्कबाज, लड़कीबाज, सिटियाबाज और रंडीबाज हो जाते हैं जहां पैसा और पावर उन्हें अंधा बना देता है। जहां जहां इन बड़े अधिकारियों का ट्रांसफर होता है वहां वहां ये अपनी एक रखैल बना लेते हैं और उससे हर तरह की शारीरिक इच्छा पूरी करवाते हैं।

फिर दूसरे शहर में ट्रांसफर और दूसरी रखैल। यही सिलसिला चलता रहता है जिसमें महिलाओं की इज्जत सिर्फ एक रात या कुछ महीनों की चीज बनकर रह जाती है। मनीषा अचानक से आग बबूला हो गयी उसके चेहरे पर गुस्से की लालिमा छा गई आंखें सिकुड़ गईं और मुट्ठियां अनजाने में ही भींच गईं। आप क्या समझते हैं कि मैं गरीब हूं तो आप मेरी इज्जत से खेलेंगे? ये हरगिज नहीं हो सकता। मैं भूखी मर जाऊंगी पर आपको अपनी इज्जत नहीं खेलने दूंगी मनीषा चिल्लाकर बोली और अपनी सैंडल्स को खटपट खटपट करती हुई प्रफुल्ल के केबिन से चली गयी जहां उसके कदमों की आवाज तेजी से गूंज रही थी और पूरा ऑफिस थोड़ी देर के लिए सन्नाटे में डूब गया।

प्रफुल्ल हक्के बक्के रह गए उनके मुंह से एक भी शब्द नहीं निकला और वे कुर्सी पर जैसे जड़ होकर बैठे रह गए। वो तो सच में मनीषा से प्यार करने लगे थे उनकी नजर में वह सिर्फ एक खूबसूरत और सच्ची लड़की थी जिसके लिए वे कुछ भी कर सकते थे। पर वो तो गलत समझ गयी। मनीषा ने सोचा कि प्रफुल्ल उसे जमकर खाएंगे पिएंगे चोद चोदकर उसकी बुर फाड़ देंगे और चलते बनेंगे जैसे वह कोई सस्ता खेल हो। वो सकते में आ गए उनकी आंखें नीची हो गईं और दिल में एक तेज दर्द उठने लगा जो उन्हें चुभता जा रहा था। कुछ दिन और बीते पता नहीं क्या गड़बड़ी हुई।

मनीषा के साथ काम करने वाली दिव्या यादव जो कि बड़ी काली कलूटी और बदसूरत थी हमेशा मनीषा से जलती थी उसके दिल में ईर्ष्या की आग लगातार जलती रहती थी। उसने झूठी शिकायत कर दी कि मनीषा केंद्र नहीं खोलती है और इस वजह से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। मनीषा का वेतन रुक गया जिससे उसके घर में अनाज तक की कमी हो गई और रोज की रोटी भी मुश्किल से जुट पाती थी। उसके भूखों मरने के दिन आ गए जहां हर रात नींद नहीं आती थी और पेट की भूख आंखों में साफ दिखने लगी थी। एक बार फिरसे मनीषा प्रफुल्ल राय के पास आना पड़ा।

प्रफुल्ल अपने ऑफिस में बड़े गुमसुम उदास बैठे दिन काट रहे थे कि मनीषा आ पहुंची। उसे देखते ही उनका दिन बन गया जैसे अंधेरे कमरे में अचानक सूरज की किरण घुस आई हो। वो मारी खुशी के पागल हो गए और चपरासी को चाय पानी लाने को कहा जहां उनकी आवाज में एक अनोखी उमंग छलक रही थी। मनीषा अब अपने बुरे दिनों के कारण थोड़ा दबने लगी उसके कंधे झुक गए थे और नजर नीची रहती थी। उसने समस्या प्रफुल्ल को बताई जहां उसके शब्दों में मजबूरी और हताशा साफ झलक रही थी।

प्रफुल्ल तो कबसे मनीषा को दिल दे बैठे थे। उन्होंने मनीषा का वेतन पास कर दिया। साइन कर दिया। और चाय पानी के बाद मनीषा को एक लिफाफा भी पकड़ा दिया। मनीषा ने घर आकर लिफाफा खोला तो प्रेम पत्र था। प्रफुल्ल ने अपने टूटे दिल का हाल बयान किया था।

अब मनीषा प्रफुल्ल को पसंद करने लगी। और मन ही मन चाहने लगी। एक दिन उसने प्रफुल्ल के मोबाइल पर आई लव यू वाला मैसेज भी भेज दिया। अगले दिन प्रफुल्ल ने अपने ड्राइवर को भेज दिया मनीषा को लाने के लिए। वो इतना खुश हुए जा रहे थे कि उन्होंने शाम की चाय भी नहीं पी। कुछ देर में मनीषा पीली साड़ी और काले ब्लाउज में प्रकट हुई।

प्रफुल्ल को बड़ा सा सरकारी बंगला मिला था। मनीषा बंगला देखकर बहुत खुश हुई। तरह तरह के फूल बगीचे में लगे थे। जैसे ही प्रफुल्ल ने मनीषा को देखा उसके दिल की धड़कन बढ़ गयी। उन्होंने नौकरों को जाने को कह दिया। मनीषा सीधे अंदर चली गयी। प्रफुल्ल इश्कबाजी तो जरूर करना चाहते थे पर जमाने से छिपकर। वो शिक्षा विभाग के सबसे बड़े अधिकारी थे।

समाज में उनकी बड़ी इज्जत थी। अंदर आते ही मनीषा जी भी पागल हो उठी। मनीषा कुंवारी थी और बिलकुल फ्रेश माल थी। आज प्रफुल्ल राय जैसा बड़ा अधिकारी उसका दिलबर बना दे। प्रफुल्ल सीधे सादे थे। कभी फैशन नहीं करते थे। वहीं मनीषा बड़ी फैशन वाली थी। प्रफुल्ल ने मनीषा को सीने से लगा लिया। मनीषा के परफ्यूम से उनका तन मन भीग गया।

मनीषा! आई लव यू! मनीषा! आई लव यू! प्रफुल्ल कहने लगे।

मनीषा ने भी आज पहली बार किसी पुरुष को बाँहों में कसा था। उसकी बांहें प्रफुल्ल की पीठ के चारों ओर लिपट गईं और उसने अपनी छाती को उनकी चौड़ी छाती से पूरी ताकत से दबा दिया जहां उनकी गर्म सांसें उसके गालों पर पड़ रही थीं और उसका दिल तेजी से धड़क रहा था। प्रफुल्ल मचल उठे उनका पूरा शरीर एक अजीब सी बेचैनी से कांपने लगा जैसे बिजली की लहर दौड़ गई हो। वे मनीषा को जगह जगह चूमने लगे पहले उसके गालों पर नरम चुंबन दिए फिर माथे पर और फिर उसके ठुड्डी पर जहां उनकी होंठों की नमी उसकी नरम त्वचा पर फैल गई। मनीषा उनका पूरा सहयोग करने लगी वह अपनी बांहों को और कसकर जकड़ती गई और उसकी सांसें भी तेज हो गईं। पीली साड़ी और काले ब्लाउज में मनीषा क्या कयामत ढा रही थी। उसने अपने बालों में जूड़ा बड़े सलीके से बांध रखा था जो उसके चेहरे को और भी आकर्षक बना रहा था।

प्रफुल्ल मनीषा पर लट्टू हो गए और बेडरूम में खींच ले गए। आज मनीषा जैसी कुंवारी लौंडिया चुदने वाली थी। वह चुदासी भी हो गई थी। प्रफुल्ल उसे बेडरूम में ले गए और दरवाजा बंद कर लिया जहां ताला बंद होने की हल्की सी क्लिक की आवाज गूंज गई और कमरे में एकांत की गहराई छा गई। मनीषा भी बिलकुल दीवानी थी और अपने नए नए दिलबर के साथ चुदने को बिलकुल तैयार थी उसकी आंखों में इच्छा की चमक थी और शरीर में एक अनोखी गर्मी फैल रही थी।

प्रफुल्ल ने उसे मुलायम मखमली बिस्तर में पटक दिया और खुद भी मनीषा पर चढ़ गए जहां बिस्तर का नरम गद्दा उसके शरीर के नीचे दब गया और उसकी पीली साड़ी चारों ओर फैल गई। उन्होंने मनीषा के रसीले संतरे जैसे होंठों को पीना शुरू कर दिया उनके होंठ उसके होंठों से चिपक गए और वे धीरे धीरे चूसने लगे। मनीषा बहुत मेकअप करती थी। उसने ढेर सारी लाल लिपस्टिक अपने होंठों पर लगा रखी थी जो अब उनके होंठों पर फैलने लगी थी। प्रफुल्ल मनीषा के होंठ चूसने लगे तो सारी लाल लिपस्टिक उनके होंठ और चेहरे पर लगने लगी और उसकी मीठी चिपचिपी स्वाद उनकी जीभ पर फैल गई।

मनीषा प्रफुल्ल को पूरी तरह मदद करने लगी। वह आज सोचकर आई थी कि अगर उसका दिलबर आज उसे चोदने का निवेदन करेगा तो वह नखरे नहीं करेगी और आराम से चुदवा लेगी। प्रफुल्ल ने मनीषा के संतरे जैसे रसीले होंठों को इच्छा भरके चूसा उनकी जीभ उसके होंठों के बीच घुस गई और दोनों की सांसें एक दूसरे में मिल गईं। अब मनीषा के गले की ओर बढ़े। क्या सुराही जैसी लंबी गर्दन थी। एक तिल भी गर्दन पर था।

प्रफुल्ल पागल हो उठे और उस तिल को चूमने चाटने लगे उनकी जीभ गर्दन की नरम त्वचा पर घूम रही थी और वे हल्के से चूस रहे थे जिससे मनीषा के शरीर में सिहरन दौड़ गई। प्रफुल्ल के हाथ अब मनीषा जैसी विश्व सुंदरी के पुष्ट स्तनों पर रेंगने लगे वे धीरे धीरे दबाते हुए महसूस कर रहे थे कि कितनी नरम और भारी हैं वे। वह अब मनीषा को जल्द से जल्द पाना चाहते थे। काले ब्लाउज में मनीषा पांडेय के फूले फूले स्तन देखकर तो ब्रह्मा भी पागल हो जाता। प्रफुल्ल आपा खो बैठे और काले ब्लाउज पर ही ऊपर से अपनी जीभ निकालकर मनीषा के स्तनों को पीने की कोशिश करने लगे जहां ब्लाउज का कपड़ा उनके मुंह से भीगने लगा।

अरे रुकिए जरा! इतनी भी क्या जल्दी? मनीषा बोली।

उनकी गोल गोल छातियों की निपल्स काले ब्लाउज पर बाहर से साफ साफ दिख रही थीं। उभरी हुई चमक रही थीं। शायद तभी प्रफुल्ल होश गंवा बैठे थे। मनीषा जान गई कि उनके नए नए दिलबर राय साहेब उसे चोदे बिना नहीं मानेंगे। उसने अपना हाथ बढ़ाया और ब्लाउज के हुक खोल दिए।

मनीषा की बड़ी बड़ी छातियां जिनको आज तक किसी लड़के ने नहीं हाथ लगाया था प्रफुल्ल के सामने प्रकट हो गईं। अचानक प्रफुल्ल का लिंग खड़ा हो गया। उनका पानी बाहर लिंग के सुपाड़े से बाहर आने लगा। मनीषा जैसी विश्व सुंदरी को सफेद ब्रा में देखकर प्रफुल्ल पागल हो गए।

मनीषा ने अपने हाथ नीचे किए और ब्रा के हुक खोल दिए। ब्रा निकल गई। उस विश्व सुंदरी के लाल लाल बड़े बड़े स्तन अचानक से प्रफुल्ल के सामने प्रकट हो गए। सपनी की छातियां इतनी दूधभरी गोरी और सफेद थीं कि उसकी रगों में बह रहा लाल खून भी ऊपर से दिखाई दे रहा था।

एक बार तो प्रफुल्ल को लगा कि कहीं उन्हें चोदने से पहले ही आउट न हो जाए। वे उसकी छातियों पर टूट पड़े। अपनी जीभ निकाली और सीधे मनीषा की छातियों को मुंह में ले लिया। और हपर हपर कर पीने लगे। मनीषा भी मस्त हो गई। उसकी बेहद खूबसूरत छातियों को आज पहली बार कोई आदमी पी रहा था।

उसे भी बड़ा सुख मिलने लगा। उसकी चिकनी चूत गीली और चिपचिपी होने लगी। प्रफुल्ल काफी देर तक मनीषा की सफेद छातियों को पीते रहे। आज पहली बार उन्होंने किसी औरत को बाहुपाश में लिया था। मनीषा की निपल्स काली थीं और उसके चारों ओर बड़े बड़े गोल गोल घेरे थे।

प्रफुल्ल मनीषा की रसीली छातियां पीने लगे और सारी दुनिया भूल गए। मनीषा की चूत पानी पानी हो गई। उसका वीर्य मक्खन की तरह पूरी चूत में चुपड़ गया। प्रफुल्ल ने अपने कपड़े उतार फेंके और सीधे मनीषा की साड़ी ऊपर उठा दी। एक ही पल में उनकी पीली रंग की पैंटी उतार फेंकी।

कुछ समय अपनी प्रेमिका की पैंटी सूंघते रहे। उफ़्फ़ उसकी चूत की मादक बेहोश कर देने वाली सुगंध पीली रंग की पैंटी में समा गई थी। रच बस गई थी। जब मनीषा की रसीली चूत की सुगंध इतनी नशीली है तो चूत मारने में कितना मजा मिलेगा प्रफुल्ल सोचने लगे।

उन्होंने अपनी नाक को पीली पैंटी के गीले हिस्से पर और गहराई से दबाया जहां से मनीषा की चूत की गर्म और मीठी महक सीधे उनके दिमाग में घुस रही थी। उनकी सांसें भारी हो गईं और आंखें आधे बंद होकर उस नशीले सुगंध में खो गईं। प्रफुल्ल ने पैंटी को एक बार फिर से अपनी नाक पर रगड़ा और फिर धीरे से अपने होंठों पर लगाया जहां मनीषा की चूत का रस अभी भी चिपचिपा महसूस हो रहा था। उन्होंने अपने होंठ जिन पर मनीषा जी की लाल लिपस्टिक जगह जगह लग गई थी मनीषा की चूत पर लगा दिए और रेगिस्तान में किसी प्यासे की तरह बुर चाटकर पानी पीने लगे। उनकी जीभ पहले चूत की ऊपरी सिलवटों पर घूमी फिर धीरे से नीचे की ओर सरकते हुए पूरी लंबाई में चाटने लगी। मनीषा की चूत के मक्खन को वे देसी घी की तरह चाटने लगे जहां हर चाट के साथ एक गाढ़ा और मीठा स्वाद उनकी जीभ पर फैल जाता था। उफ्फ्फ! आज तक उन्होंने ऐसा नजारा नहीं देखा था।

यह चूत नहीं बल्कि किसी देवी की शक्तिपीठ थी। प्रफुल्ल को आज इस शक्तिपीठ की पूजा अर्चना करनी थी। आज उनको इस पर जल चढ़ाना था। मनीषा जैसी विश्व सुंदरी की चूत कितनी रसीली और कितनी मखमली होगी शायद प्रफुल्ल ने इसका आकलन कर लिया था। वे अपनी जीभ मनीषा की शक्तिपीठ पर ऊपर से नीचे फिराने लगे जहां हर फेर के साथ मनीषा की चूत से और ज्यादा रस निकलने लगा और उनकी जीभ पूरी तरह भीग गई।

मनीषा पागल होने लगी। वह और चुदासी होने लगी। अब वह जल्दी से जल्दी चुदवाना चाहती थी। पर प्रफुल्ल तो जैसे सुध बुद्ध खोकर उसकी चूत चाटने में लगे थे। बिलकुल नई कुंवारी चूत ऊपर से इतनी रसीली इतनी मक्खनी इतनी मखमली। प्रफुल्ल भर भरके मनीषा की चूत चाटने लगे उनकी जीभ अंदर बाहर घुसती थी और क्लिटोरिस को हल्के हल्के चूसती थी जिससे मनीषा की कमर बार बार ऊपर उठने लगी। मनीषा से रहा न गया। वह अब चुदासी हो गई। साथ ही बेचैन भी।

प्रफुल्ल जी चाटते ही रहेंगे या कुछ करेंगे भी? मनीषा बोल पड़ी।

प्रफुल्ल को होश आया कि बुर चाटने के सिवा भी और बहुत कुछ होता है। उन्होंने अपना लिंग देखा तो वह पत्थर हो गया था। प्रफुल्ल समझ गए कि उनकी नई नई प्रेमिका मनीषा जी खुद चुदवाने का निवेदन कर रही है।

वे तो अपनी नई नवेली प्रेमिका को अभी और चूमना चाटना चाहते थे पर उसने खुद ही चुदवाने का निमंत्रण दे दिया। प्रफुल्ल अब अपनी प्रेमिका को चोदने की तैयारी करने लगे। उन्होंने अपने लेदर पर्स से एक कंडोम निकाला और फाड़ने लगे।

अरे यह क्या प्रफुल्ल जी ऐसे ही चोदिए। आपसे कैसा परायापन? आप तो मेरे अपने हैं! रूप की रानी मनीषा कहने लगी।

प्रफुल्ल असल में कोई रिस्क नहीं लेना चाहते थे। वे हमेशा सुरक्षित तरीके से संबंध बनाने के पक्ष में थे ताकि कोई अनचाही गर्भावस्था या स्वास्थ्य समस्या न हो। कभी कभार वे वेश्याओं को भी चोद लिया करते थे जहां वे पैसे देकर पूरा आनंद लेते थे लेकिन फिर भी कंडोम का इस्तेमाल जरूर करते थे। वही पाजामा पहनकर चोदने वाली आदत थी जो उन्हें आरामदायक लगती थी और जल्दी से जल्दी काम पूरा करने में मदद करती थी। प्रफुल्ल बेहद खुश हो गए क्योंकि आज मनीषा जैसी खूबसूरत और कुंवारी लड़की उनके सामने नंगी लेटी थी और पूरी तरह तैयार थी। उन्होंने मनीषा की दोनों चिकनी टांगों को पकड़ फैला दिया जहां उनकी मजबूत उंगलियां उसकी नरम जांघों की त्वचा को दबाती हुई महसूस कर रही थीं और उसकी त्वचा पर हल्की सिहरन दौड़ गई। लिंग उसके खूबसूरत भोंसड़े पर रखा जहां गर्म और गीला स्पर्श महसूस होते ही उनका लिंग और भी सख्त हो गया। और गच्च से धक्का मारा।

प्रफुल्ल का मोटा और कड़ा लिंग पहले तो उसके तंग कुंवारी छेद की बाहरी सिलवटों को धीरे से दबाता हुआ अंदर घुसने लगा जहां मनीषा की चूत की दीवारें इतनी सिकुड़ी हुई थीं कि हर मिलीमीटर आगे बढ़ने पर जोरदार प्रतिरोध महसूस हो रहा था। फिर अचानक एक तेज और तीखा दबाव बढ़ा जैसे कोई पतली झिल्ली खिंच रही हो और प्रफुल्ल ने अपनी कमर को एक और जोरदार झटका दिया। उस पल मनीषा की नई नई सील यानी हाइमन टूट गया और एक हल्का सा खिंचाव के साथ अंदर की ओर फट गया जहां थोड़ा सा गर्म खून का रिसाव उनके लिंग पर लग गया और मनीषा के मुंह से एक तेज चीख निकली जो दर्द और अचानक खुशी के मिश्रण से भरी थी।

उसकी आंखें बंद हो गईं नाखून प्रफुल्ल की पीठ में गड़ गए और उसकी कमर अनजाने में ही ऊपर उठ गई। प्रफुल्ल को भी उस टूटने का एहसास हुआ जहां उनकी लिंग की नसें और भी फूल गईं और चूत की अंदरूनी गर्मी ने उन्हें पूरी तरह जकड़ लिया। प्रफुल्ल उसे मजे से चोदते रहे। उन्होंने अपनी कमर को पहले धीमी गति से आगे पीछे किया जहां हर थ्रस्ट के साथ लिंग पूरी गहराई तक घुसता और बाहर निकलता और चूत के रस की चिकनी आवाज कमरे में गूंजने लगी। फिर गति तेज हुई उनकी सांसें भारी हो गईं पसीना उनकी पीठ पर बहने लगा और मनीषा की छातियां हर धक्के पर उछल उछलकर उनके सीने से टकरातीं।

उसकी चूत अब पूरी तरह खुल गई थी गीला मक्खन जैसा रस उनके लिंग को चिकना बनाता जा रहा था और हर बार अंदर जाते ही एक चिपचिपी चूचू की आवाज निकलती थी। प्रफुल्ल कभी गहराई तक रुककर उसके क्लिटोरिस को अपनी हड्डी से रगड़ते कभी तेजी से छोटे छोटे धक्के मारते जहां मनीषा की सांसें फूल गईं उसका चेहरा लाल हो गया और वह बार बार कराहने लगी।

उस दिन प्रफुल्ल को स्वर्ग सा मिल गया। वे घंटों तक लगातार चोदते रहे कभी मिशनरी पोजीशन में कभी उसकी टांगें अपने कंधों पर रखकर और कभी उसे थोड़ा घुमाकर पीछे से जहां हर पोजीशन में मनीषा की चूत उनकी लिंग को अलग अलग तरीके से जकड़ती थी। रात के नौ बजे तक मनीषा को खूब चोदा खाया जहां मनीषा कई बार झड़ चुकी थी उसकी चूत से बार बार गाढ़ा रस निकल रहा था पूरा बिस्तर गीला और चिपचिपा हो गया था और उसके शरीर पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं। फिर उसे ढंग से साड़ी पहनकर फिर से सजा सजाकर ड्राइवर से घर भेज दिया। इस तरह मनीषा प्रफुल्ल के दिल में जा बैठी। यह मोहब्बत का सिलसिला चल निकला।

हर रविवार या सरकारी छुट्टी के दिन प्रफुल्ल अपना ड्राइवर भेजकर मनीषा को बुलवा लेते और सूरज की रोशनी में दोपहर से शाम तक मनीषा पांडेय को खूब चोदते खाते। बंगले के बेडरूम में खिड़कियां खुली रहतीं जहां सूरज की किरणें उनके नंगे शरीरों पर पड़तीं और पसीने की चमक बढ़ा देतीं। उसे महंगी महंगी साड़ियां सोने की ज्वेलरी गिफ्ट करते जहां हर गिफ्ट के साथ मनीषा की आंखों में खुशी चमक उठती थी। एक साल तक मनीषा पांडेय को खूब चोदने खाने के बाद प्रफुल्ल ने अपनी पावर से मनीषा को एक इंटर कॉलेज में सरकारी नौकरी दे दी वो भी बिना टीईटी पास किए। उन्होंने फाइल पर साइन किए और ऊपरी अधिकारियों से बात करके पूरा मामला निपटा दिया।

अब मनीषा चालीस हजार रुपये हर महीने कमाने लगी। उसकी लाइफ स्टाइल अब बदल गई जहां पहले की गरीबी अब सिर्फ याद बनकर रह गई थी। अगले साल भी प्रफुल्ल उसे अपने बंगले पर लाकर चोदते खाते रहे। इस तरह दो और साल गुजर गए। मनीषा ने अपनी नौकरी से बढ़कर खूबसूरत घर बना लिया वरना उसका किसान बाप तो उसे सारी जिंदगी झोपड़ी में भी रखता।

मनीषा के बाप उसकी अम्मा भी प्रफुल्ल राय को बहुत मानने लगे। प्रफुल्ल मनीषा के घर जाते तो उसकी मां उन्हें कभी बिना खाना खिलाए नहीं भेजती। एक दिन तो प्रफुल्ल मनीषा के घर गए। सिर्फ उसकी मां थी। उसके पिता खेत में काम करने गए थे।

माँ जी प्रफुल्ल के लिये खाना बनाने लगी और प्रफुल्ल ने मौका पाकर मनीषा को उसी के घर में चोद लिया। मां जी रसोई में चूल्हे पर रोटियां सेंक रही थीं जहां से गरम गरम आटा की महक और तेल की खुसबू पूरे घर में फैल रही थी उनकी पीठ मुड़ी हुई थी और वे पूरी तरह व्यस्त थीं। प्रफुल्ल ने मनीषा की ओर देखा उसकी आंखों में शरारत और इच्छा की चमक थी फिर दोनों चुपके से बगल के छोटे कमरे में चले गए जहां पुराना बिस्तर पड़ा था और हल्का सा अंधेरा था। प्रफुल्ल ने मनीषा को दीवार से सटा दिया उसकी पीली साड़ी को तेजी से ऊपर उठाया और उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा जहां वह पहले से ही गीली और गर्म थी। मनीषा ने अपनी सांस दबाई ताकि मां को आवाज न जाए उसकी उंगलियां प्रफुल्ल की पीठ पर कस गईं और वह चुपचाप कराहने लगी। प्रफुल्ल ने अपना लिंग निकाला उसे मनीषा की चूत के मुंह पर रगड़ा फिर एक जोरदार धक्का देकर अंदर घुसा दिया जहां उसकी चूत की दीवारें उसे कसकर जकड़ रही थीं। उन्होंने तेज तेज थ्रस्ट किए कभी खड़े होकर कभी उसे बिस्तर पर लिटाकर और मनीषा की चूत से निकलता गीला रस उनके लिंग को चिकना बनाता जा रहा था। मनीषा ने मुंह पर हाथ रखकर अपनी चीख दबाई उसके स्तन उछल रहे थे और प्रफुल्ल उन्हें चूसते हुए चोदता रहा जब तक दोनों एक साथ झड़ नहीं गए।

मनीषा के पिताजी कभी कभार शक करते थे कि कहीं मनीषा प्रफुल्ल से फंस तो नहीं गई है। फिर चुप्पी मार लेते थे। क्योंकि प्रफुल्ल की कृपा से ही उनकी दरिद्रता दूर हो गई थी। अगर लड़की थोड़ा बहुत चुदवा भी ले तो कौन सा हर्ज है।

जवानी और खूबसूरती का फायदा तो इंसान सदियों से उठाता आ रहा है। उसके पिता सोचते थे। कुछ दिनों बाद प्रफुल्ल का बनारस ट्रांसफर हो गया। पर चुदाई का रिश्ता खत्म नहीं हुआ। मनीषा ने एक लल्लू बैंक क्लर्क से शादी कर ली। वो लल्लू सुबह नौ बजे बैंक जाता तो रात बारह बजे आता।

उसके पास अपनी विश्व सुंदरी को पेलने और चोदने खाने का समय ही नहीं था। मनीषा फोन से पूरे पूरे दिन प्रफुल्ल से चिपकी रहती। बीच बीच में काम की बात कहकर बनारस चली जाती और प्रफुल्ल के नए बंगले पर खूब जी भरकर चुदवाती। कुछ दिनों बाद प्रफुल्ल की शादी हो गई।

एक बड़ी सुंदर बीबी उसे मिली। पर प्रफुल्ल और मनीषा की चुदाई नहीं रुकी। पंद्रह दिन में एक बार मनीषा बनारस जरूर आती थी। प्रफुल्ल अपनी सरकारी गाड़ी भेज देते थे। आकर खूब चुदती थी। नौ महीने बाद मनीषा प्रेग्नेंट हो गई। उसका पति थोड़ा हैरान था कि वो तो कम ही चुदाई करता है। पर तेज तर्रार मनीषा ने कहा कि यह उसी का बच्चा है। उसका आदमी बिलकुल लल्लू था। हर बात पर विश्वास कर लेता था।

बच्चा होने के बाद एक दिन मनीषा फिर बनारस गई। बिलकुल तुमको पड़ा है!! मनीषा बोली। प्रफुल्ल ने अपने लड़के को चूम लिया। लखनऊ में एक करोड़ का एक प्लॉट उन्होंने अपने काले धन से लिया था। वो अपने नाजायज लड़के के नाम कर दिया। क्योंकि प्रफुल्ल मनीषा को शुरू से ही बहुत प्यार करते थे। उस दिन फिर से प्रफुल्ल ने मनीषा को नंगा करके जमकर उसकी चूत फाड़ी और सदा।सदा के लिए अपनी रखेल बना लिया।

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