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नौकरी बचाई पत्नी ने चूत देकर

Seth ne biwi chudai sex story, naukri ke badle chudai sex story, desi ayyashi sex story, boss fucked wife sex story, cuckold sex story, wife paid debt with body sex story:मेरा नाम गौतम है और मेरी बीवी का नाम महक है, मेरी हाइट करीब 5 फुट है, बदन थोड़ा भरा हुआ, वजन 67 किलोग्राम, उम्र अब 56 साल हो गई है लेकिन ये कहानी करीब 26 साल पुरानी है जब मैं 30 साल का था और महक 24 साल की थी, महक की हाइट भी मेरे बराबर ही थी, वजन 52 किलोग्राम और फिगर 38-36-40 का इतना मादक कि देखने वाला देखता ही रह जाए, गोरी चिकनी त्वचा, भरे हुए बूब्स जो ब्लाउज में से झांकते रहते थे, मटकती हुई गांड और वो मुस्कान जो किसी को भी दीवाना बना दे, हमारी शादी को अभी 3-4 साल ही हुए थे और महक अभी भी वैसी ही तरोताजा लगती थी जैसे नई-नई दुल्हन हो.

उस समय मैं एक सेठ के यहां मुनीम का काम करता था, उनका नाम अशोक था लेकिन सब उन्हें सेठ ही कहते थे, मैं उनके पूरे खाते-बही का हिसाब रखता था, उधारी देना-लेना सब मेरे जिम्मे था, महक को मैं गांव से शहर लाया था ताकि वो मेरे साथ रहे, हम एक छोटे से किराए के मकान में रहते थे जो दो कमरों का था, एक बेडरूम और बाहर हॉल जहां हम बैठते-खाते थे, शहर की जिंदगी मुश्किल थी लेकिन हम खुश थे, महक घर संभालती थी और मैं शाम को लौटकर उसके साथ समय बिताता था, वो रातें कितनी हसीन होती थीं जब मैं उसके भरे बदन को सहलाता और वो शरमाती हुई मेरी बाहों में सिमट जाती.

एक दिन काम में बड़ी गड़बड़ी हो गई, मैंने एक उधारी वाले को गलत हिसाब से पैसे दे दिए और सेठ को करीब 50-60 हजार का चूना लग गया, उस जमाने में ये रकम बहुत बड़ी थी, सेठ को जब पता चला तो वो आग बबूला हो गए, उनके ऑफिस में मुझे बुलाया और जोर-जोर से डांटने लगे, “गौतम, तूने मेरा क्या हाल कर दिया है, इतना बड़ा नुकसान, या तो ये पैसे लाकर दे या नौकरी से निकल जा, मैं ऐसे लापरवाह आदमी को नहीं रख सकता”, मैं थर-थर कांप रहा था, घर कैसे चलता, महक को क्या मुंह दिखाता, मैंने गिड़गिड़ाकर माफी मांगी लेकिन सेठ नहीं माने, बोले “दो दिन का समय देता हूं, या तो पैसे ला या बाहर हो जा”.

घर लौटा तो महक ने मेरी उदासी देखी, वो चाय लेकर आई और मेरे कंधे पर हाथ रखकर पूछा, “क्या हुआ जी, आप इतने परेशान क्यों लग रहे हो”, मैंने सब बता दिया, वो भी चिंता में पड़ गई, हम दोनों रात भर सो नहीं सके, अगले दिन मैं ऑफिस गया लेकिन मन नहीं लग रहा था, सेठ का एक करीबी दोस्त था विजयबाबू, वो अक्सर सेठ के साथ आता-जाता था, दोनों मिलकर शराब पीते और अय्याशी की बातें करते थे, मैंने सुना था कि वो दोनों बाहर की लड़कियों के साथ मौज-मस्ती करते हैं, संयोग से उस दिन विजयबाबू मेरे घर के पास से गुजरे, मैं बाहर खड़ा था तो मैंने उन्हें रोक लिया और घर पर चाय के लिए बुलाया, वो मान गए.

महक को आवाज दी, “महक, चाय बना ना, विजयबाबू आए हैं”, महक उस दिन घरेलू कपड़ों में थी लेकिन फिर भी बहुत सुंदर लग रही थी, हल्की सी साड़ी, ब्लाउज जो उसके बूब्स को कसकर पकड़े हुए था, वो चाय लेकर आई तो विजयबाबू की नजरें उस पर टिक गईं, वो बोले, “वाह गौतम, तेरी बीवी तो बहुत खूबसूरत है, जैसे कोई अप्सरा हो”, महक शर्मा गई और चाय देकर चली गई, फिर मैंने विजयबाबू से अपनी परेशानी बताई, “बाबूजी, सेठ बहुत नाराज हैं, नुकसान की भरपाई मांग रहे हैं, मैं कहां से लाऊं इतने पैसे, आप उनके करीबी हैं, मेरी मदद कीजिए, उन्हें समझाइए”, विजयबाबू ने सिर हिलाया और बोले, “अशोक बहुत पक्का आदमी है, बिजनेस में नुकसान बर्दाश्त नहीं करता, लेकिन उसका एक शौक है अय्याशी का, उसमें वो पैसे भूल जाता है, अगर उसे कोई अच्छी चीज मिल जाए तो सब माफ”.

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मैंने पूछा, “मैं क्या कर सकता हूं, लड़की कहां से लाऊं, मुझे तो कुछ पता नहीं”, विजयबाबू ने मुस्कुराकर कहा, “तेरे पास तो सबसे कीमती चीज है, तेरी बीवी महक, अगर वो अशोक को एक रात के लिए मिल जाए तो वो सब भूल जाएगा, नौकरी भी बनी रहेगी और शायद कुछ इनाम भी दे दे”, मैं सन्न रह गया, मन में उथल-पुथल मच गई, लेकिन मजबूरी थी, नौकरी चली गई तो हम भूखे मरते, मैंने हिम्मत करके विजयबाबू को बैठने को कहा और अंदर महक के पास गया, वो रसोई में काम कर रही थी, मैंने उसे बाहों में लिया और सब बता दिया, पहले तो वो रोने लगी, “नहीं जी, ये क्या कह रहे हो, मैं कैसे कर सकती हूं”, लेकिन मैंने अपनी मजबूरी बताई, “महक, अगर नौकरी गई तो हम कहां जाएंगे, बस एक रात की बात है, मेरे लिए कर लो”, वो बहुत देर तक सोचती रही, आंसू पोछे और बोली, “ठीक है जी, आपके लिए कुछ भी”.

विजयबाबू से कहा कि ठीक है, वो खुश हो गए, बोले “आज रात 8 बजे हम दोनों आएंगे, कल रविवार है तो पूरे दिन रहेंगे, मैं अशोक को मना लूंगा”, शाम हुई तो महक ने खुद को तैयार किया, अच्छे से नहाई, हल्की मेकअप लगाई, लाइट ब्लू साड़ी पहनी उल्टे पल्लू वाली, लो-कट ब्लाउज जो उसके बूब्स की लाइन दिखा रहा था, ब्रा और पेंटी भी नई वाली पहनी, मैं उसे देखता रह गया, वो शर्माकर बोली, “जी, ऐसे मत देखो, मैं आपके लिए कर रही हूं”, मैंने उसे गले लगाया और बोला, “तुम बहुत अच्छी हो महक”.

रात ठीक 8 बजे डोरबेल बजी, मैंने दरवाजा खोला तो अशोक सेठ और विजयबाबू खड़े थे, हाथ में एक सूटकेस, मैंने मुस्कुराकर उनका स्वागत किया, “आइए सेठ जी, विजयबाबू”, वो अंदर आए, अशोक ने कड़क आवाज में कहा, “गौतम, तूने मेरा बहुत नुकसान किया है, लेकिन विजय ने तेरी बहुत तारीफ की है, इसलिए एक मौका दे रहा हूं, अगर आज खुश कर दिया तो सब माफ”, मैंने सिर झुकाकर हां कहा, महक अंदर से आई, ट्रे में गिलास और पानी लेकर, वो देखते ही रह गए, अशोक की आंखें चमक उठीं, “वाह, ये तो बहुत मस्त माल है गौतम, तेरी बीवी तो कमाल की है”, महक शर्मा गई लेकिन मुस्कुराई.

विजयबाबू ने सूटकेस खोला, व्हिस्की की बोतल निकाली, “पैग बनाओ महक”, महक ने गिलास भरे, आधा व्हिस्की और पानी, पहले उन्हें दिए, फिर सेठ ने कहा, “तुम दोनों भी पियो, आज पार्टी है”, हमने मना किया लेकिन वो नहीं माने, हम सब बैठकर पीने लगे, स्नैक्स भी महक ने बनाए थे, चिकन टिक्का और चटनी, नशा धीरे-धीरे चढ़ने लगा, अशोक और विजयबाबू तो आदतन थे लेकिन हमें पहली बार था, सिर घूमने लगा, बातें होने लगीं, अशोक बोले, “गौतम, तू खुशकिस्मत है, ऐसी बीवी मिली है, देख कितनी गोरी चिकनी है”, विजयबाबू हंसकर बोले, “हां अशोक, आज तो मजा आएगा”.

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पीने के बाद महक ने खाना लगाया, दाल, चावल, सब्जी, चिकन करी, सबने खूब तारीफ की, “महक, तू खाना भी कमाल का बनाती है”, खाना खत्म हुआ तो माहौल गरम हो गया, अशोक ने महक को अपनी तरफ खींचा और गोद में बैठा लिया, उसके गाल पर हाथ फेरते हुए बोला, “कितनी नरम है तू, जैसे मखमल”, महक शर्मा रही थी, विजयबाबू ने आगे बढ़कर महक का चेहरा उठाया और होंठों पर किस कर लिया, गहरा किस, जीभ अंदर डालकर, महक की सांस तेज हो गई, फिर विजयबाबू ने उसके बूब्स पर हाथ रखा और दबाने लगा, “वाह, कितने भरे हुए हैं ये, जैसे आम”, महक की सिसकारी निकली, “आह्ह… सेठ जी…”.

मैं ये सब देख रहा था, मन में जलन थी लेकिन लंड भी खड़ा हो रहा था, अशोक ने महक की साड़ी का पल्लू खींचा, धीरे से नीचे गिरा दिया, अब उसके ब्लाउज में बूब्स उभरे हुए दिख रहे थे, अशोक ने ब्लाउज के ऊपर से ही बूब्स दबाए, “कितने टाइट हैं रे, महक, तू रोज चुदवाती होगी गौतम से”, महक ने शर्म से सिर झुका लिया, विजयबाबू ने महक को खड़ा किया और साड़ी की गांठ खोल दी, साड़ी सरसराती हुई नीचे गिर गई, अब वो सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी, उसके हिप्स मटक रहे थे, अशोक ने पीछे से ब्लाउज के हुक खोले, एक-एक करके, ब्लाउज ढीला हो गया, महक ने उसे उतार फेंका, अब ब्रा में उसके बूब्स झूल रहे थे, गोरे-गोरे, निप्पल ब्रा से उभरे हुए.

विजयबाबू ने पेटीकोट का नाड़ा खींचा, वो भी नीचे आ गया, अब महक ब्रा और पेंटी में थी, विजयबाबू ने ब्रा के ऊपर से बूब्स चूसे, जीभ से निप्पल को सहलाया, महक कराह उठी, “ओह्ह… विजयबाबू… धीरे…”, अशोक ने पीछे से ब्रा का हुक खोला, ब्रा गिर गई, अब महक के बूब्स खुले थे, दोनों ने मिलकर उन्हें मसला, चूसा, एक बूब अशोक के मुंह में, दूसरा विजयबाबू के, महक की आंखें बंद हो गईं, “आह्ह… ह्ह्ह… कितना अच्छा लग रहा है… ओह्ह… चूसो और जोर से…”.

विजयबाबू ने कपड़े उतारने शुरू किए, शर्ट, पैंट, अंडरवियर, उनका बदन हट्टा-कट्टा था, 5 फुट 6 इंच, सीना 36 इंच, लंड 8 इंच लंबा, मोटा, काला, फनफनाता हुआ, अशोक ने भी उतारे, वो थोड़े मोटे थे, पेट निकला हुआ, लंड 5 इंच का लेकिन तना हुआ, मुझे कहा, “गौतम, तू क्या देख रहा है, उतार ना कपड़े”, मैंने भी उतार दिए, मेरा 7 इंच का लंड खड़ा था, अशोक ने देखा और हाथ में लिया, “वाह विजय, इसका लंड तो बड़ा है, महक को रोज ऐसे लंड से मजा मिलता होगा, चूत फैल जाती होगी”, विजयबाबू हंसकर बोले, “हां, आज हम सब मिलकर मजा लेंगे”.

फिर अशोक ने महक की पेंटी उतारी, धीरे से नीचे सरकाई, महक की चूत गोरी, हल्की झांटों वाली, गीली हो चुकी थी, विजयबाबू ने महक को बिस्तर पर लिटाया, उसके बूब्स चूसने लगा, जीभ से निप्पल घुमाता, महक तड़प रही थी, “आह्ह… ओह्ह… विजयबाबू… कितना अच्छा… और चूसो…”, अशोक महक के सिर की तरफ आया, अपना लंड उसके मुंह पर रखा, “चूस ना रंडी, मेरा लंड चाट”, महक ने जीभ निकाली, सुपाड़े को चाटा, ग्ग्ग्ग… गी… गोग… की आवाजें आने लगीं, धीरे-धीरे पूरा मुंह में लिया, अशोक आहें भरने लगा, “वाह महक, तू तो उस्ताद है चूसने में, जैसे रोज प्रैक्टिस करती हो”.

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मैं देख रहा था, विजयबाबू ने कहा, “गौतम, तू क्या खड़ा है, आ महक की चूत चाट”, मैं बिस्तर पर गया, महक की टांगें फैलाईं, चूत पर जीभ रखी, दाने को चाटा, महक उछल पड़ी, “आह्ह… जी… ओह्ह… और जोर से… इह्ह… कितना मजा…”, मैं जीभ अंदर डालकर चाटने लगा, महक की चूत से रस टपकने लगा, अशोक महक के मुंह में धक्के मारने लगा, “ले रंडी, पूरा अंदर ले, गले तक”.

फिर विजयबाबू ने अशोक को कहा, “अशोक, तू लेट जा सीधा”, अशोक लेट गए, महक को उनके लंड पर झुकाकर चूसने को कहा, महक गांड उठाकर चूसने लगी, गोग… गोग… आह्ह…, विजयबाबू पीछे घुटनों पर बैठे, महक की चूत पर लंड रगड़ा, “कितनी गीली है तेरी चूत महक, जैसे लंड की भूखी हो”, एक धक्का मारा, सुपाड़ा अंदर, महक चीखी, “आआआ… विजयबाबू… धीरे… मोटा है आपका…”, लेकिन चूसती रही, विजयबाबू ने पूरा धक्का दिया, जड़ तक लंड अंदर, अब जोर-जोर से चोदने लगा, थप थप की आवाजें, महक कराह रही थी, “ओह्ह… फाड़ दो मेरी चूत… और जोर से… आह्ह… ह्ह्ह… मजा आ रहा है…”.

अशोक महक के मुंह में झड़ गए, वीर्य मुंह से बहा, महक ने थूका, अशोक हांफते हुए नीचे उतरे, विजयबाबू जोर से धक्के मार रहे थे, महक चीख रही थी, “और जोर से… मेरी चूत तेरे लंड की गुलाम है… फाड़ दे साले…”, विजयबाबू ने पोजीशन बदली, महक को पीठ के बल लिटाया, टांगें कंधों पर रखीं, लंड फिर अंदर, बाहर निकालकर जोर से धकेला, महक की चूत चिकनी हो गई थी, “आआआ… ऊईई… मैं गई… पानी निकल रहा है…”, महक झड़ गई, चूत से रस बहा.

विजयबाबू नहीं रुके, लगातार चोदते रहे, “ले रंडी, तेरी चूत में मेरा रस डालूंगा”, आखिर झड़ गए, महक की चूत में वीर्य भर दिया, महक फिर से पानी छोड़कर कांप गई, “ओह्ह… कितना गर्म है… भर दो मुझे…”.

उधर अशोक ने मेरा लंड चूसा, “गौतम, तेरा लंड कितना स्वादिष्ट है”, मैं उसके मुंह में धक्के मारे, आखिर झड़ गया, वीर्य जमीन पर गिरा.

हम सब थककर लेट गए, लंबी सांसें, अशोक बोले, “गौतम, तुमने और महक ने बहुत खुश कर दिया, नुकसान माफ, नौकरी पक्की, महक को भी नौकरी देता हूं”, उसके बाद हम दोनों सेठ के यहां काम करने लगे, मैं खाते देखता, महक कमरे में सेठ की सेवा करती.

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