कहानी का पिछला भाग: पति ने बीवी को दो लंड दिए – Part 1
तब हम दोनों चुदाई में मग्न हो गए। हम दोनों जोश में थे, तब उन्होंने मुझसे बोला, “रचना आज तो दो हो जाएं?” मैं उनका इशारा समझ चुकी थी, मैंने ना में इशारा किया। परंतु वे नहीं माने। कुछ देर बाद उन्होंने मुझसे फिर कहा। मेरा मन खूब चुदवाने को कर रहा था तो मैंने बोल दिया, “जाओ, बुला लाओ।”
मेरे पति सच में चले गए तो मैं एकदम से सहम गई, मैंने उन्हें आवाज लगाकर रोकने की कोशिश की लेकिन उन्होंने मेरी नहीं सुनी। मैं डर की वजह से अपने कपड़े पहनने लगी लेकिन थोड़ी देर बाद ही वे दोनों कमरे में आ गए। मैं अपने कपड़े नहीं पहन पाई थी इसलिए मैंने अपने आप को रजाई से ढक लिया।
मेरे पति मुझसे कहने लगे, “रचना, अब मान भी जाओ!”
और उनका दोस्त भी कहने लगा, “भाभी जी, अब मान भी जाओ ना… हमें भी तो मौका दो आपकी सेवा करने का। आप चाहो तो मैं अगली बार अपनी पत्नी को भी लेकर आऊंगा और फिर हम चारों मजे लेंगे।”
धीरे-धीरे वो दोनों मुझे मनाने लगे। मेरा मन तो खूब कर रहा था परंतु मैं अपने पति के सामने नहीं चुदवाना चाहती थी। मेरे मन में कई तरह के सवाल उठ रहे थे परंतु वे दोनों मेरे पास आकर बैठे। मेरे पति ने मुझे पीछे से बांहों में भर लिया और मेरी गर्दन पर किस करने लगे।
मैं छटपटाने लगी और उनका दोस्त मेरे पैरों पर हाथ फिराने लगा। अब मैं अपना कंट्रोल खोती जा रही थी। धीरे-धीरे उनका दोस्त हाथ फिराते-फिराते मेरी चूत तक आ गया। फिर तो मैंने सोच लिया कि आज तो हो ही जाने दो। फिर हम तीनों चुदाई में मग्न हो गए।
कभी उनका दोस्त मेरी चूची को काटता, कभी मेरी चूत पर किस करता। मैं तो मानो पागल सी हो जा रही थी, आह… उह्ह… मैं सिसकारियां भर रही थी। फिर धीरे से उनके दोस्त ने मेरे सर पर हाथ लगाकर अपने लंड की तरफ इशारा किया। मैं समझ गई कि वह मुझसे अपना लंड चुसवाना चाहता है।
मैं भी जोश में थी, मैंने उसका सारा लंड मुंह में ले लिया और गपागप चूसने लगी, ग्ग्ग्ग… ग्ग्ग्ग… गी… गी… गों… गों… गोग… मैं चूसते हुए आवाजें निकाल रही थी। मेरे पति यह नजारा देखकर एकदम भौचक्के से रह गए क्योंकि आज से पहले मैं इतने जोश में कभी नहीं चुदी थी। लेकिन वो जानते थे कि यह सारा खेल उन्होंने ही रचा है तो अब एतराज भी क्या करना!
वे सब देख रहे थे कि कैसे उनकी प्रिय पत्नी को कोई गैर मर्द नोच रहा था। कभी वह मेरी कमर पर किस करता, कभी मेरे मम्मे दबाता। वह मेरी छाती को खाए जा रहा था और मैं पूरे जोश में उसका साथ दे रही थी, आह… ह्ह्ह… इह्ह… मैं तड़प रही थी। फिर मैंने अपने पति के दोस्त को अपने ऊपर सीधा कर लिया।
और उसका लंड पकड़कर अपनी चूत में ले लिया क्योंकि हमें बहुत दिन हो गए थे तो उनका दोस्त मुझे अपनी बांहों में लेकर गपागप चोदने लगा और मैं मस्त होकर उसका साथ दे रही थी, आह ह ह ह ह्हीईई आअह्ह्ह्ह… आह्ह… ह्ह… आऊ… ऊऊ… ऊउइ… ऊई… उईईई… मैं चिल्ला रही थी, वह तेज-तेज झटके मार रहा था, मेरी चूत में उसका लंड अंदर-बाहर हो रहा था, हर धक्के के साथ मेरी चूत गीली होती जा रही थी, वह मेरे बूब्स दबा रहा था, मेरे निप्पल चूस रहा था, मैं उसकी पीठ पर नाखून गड़ा रही थी, “और तेज… चोदो मुझे… फाड़ दो मेरी चूत!” मैं डर्टी टॉक कर रही थी, हिचकिचाहट महसूस कर रही थी लेकिन नशे में सब भूल गई थी।
कुछ देर बाद वो झड़ने वाला था। मैंने भी अपने हाथों से उसके कंधों को पकड़ रखा था और उसके पैरों को अपने पैरों से जकड़ रखा था। मैं उसकी बांहों में झड़ना चाहती थी। फिर हम दोनों चरम सीमा पर आ गए।
तो मैंने उससे कहा, “अपना पानी मेरी चूत में ही निकाल दे!”
उसने सारा वीर्य मेरी चूत में भर दिया। उसका वीर्य चूत से निकलकर जांघ पर बह निकला। मैं पहली बार अपने पति के अलावा किसी दूसरे के लंड से झड़ी थी, आह… इह्ह… ओह्ह… ओह! मैं सिसकारियां भरकर झड़ रही थी। मेरे पति इन सबके बीच थोड़े से अलग हो गए थे, वे जानते थे कि आज मैं उनके दोस्त के लंड से झड़ना चाहती हूं।
फिर मैंने अपने पति को कहा, “जल्दी से आ जाओ और मेरी प्यास बुझा दो।”
वीर्य से भरी हुई चूत में फिर मेरे पति ने अपना लंड डाल दिया और गपागप चोदन करने लगे मेरी गीली चुदी हुई चूत का… वह धीरे से लंड अंदर डालते हुए मेरी चूत की दीवारों को महसूस कर रहे थे, जो पहले से ही गर्म और गीली थी, वह मेरे ऊपर झुके और मेरे होंठ चूसते हुए धक्के मारने लगे, मैं उनकी कमर पकड़कर उन्हें और करीब खींच रही थी, “हां… ऐसे ही… चोदो मुझे… तुम्हारा लंड कितना अच्छा लग रहा है!” मैं बोल रही थी, वह तेज होते जा रहे थे, मेरी चूत में पहले वाले वीर्य की वजह से चप-चप की आवाजें आ रही थीं, मैं अपनी गांड उचकाकर उनका साथ दे रही थी, आह्ह… ह्ह… आऊ… ऊऊ… उईई… मैं फिर से तड़प रही थी, वह मेरे बूब्स मसल रहे थे, मेरी गर्दन पर काट रहे थे, मैं हिचकिचा रही थी लेकिन मजा ले रही थी, थोड़ी देर बाद वे भी झड़ गए, उनका वीर्य मेरी चूत में मिल गया, दो मर्दों का वीर्य मेरी चूत में समा नहीं रहा था।
यह पहली बार था जब मैंने किसी और का लंड अपनी चूत में लिया था। यह एक सच्ची कहानी है। इससे ज्यादा और मैंने उस समय पर कुछ नहीं किया था। जैसा उस दिन घटित हुआ था, वैसा मैंने आपको बता दिया। क्योंकि पहली बार था इसलिए हम सब थोड़े नर्वस भी थे। फिर सुबह उनका दोस्त चला गया और मेरे पति मुझसे पूछने लगे, “कैसी रही रात?”
मैं बस हल्की सी मुस्कुराती रही और रात के बारे में सोचती रही। उसके बाद ऐसा फिर कभी नहीं हुआ। ना कभी उन्होंने मुझसे कुछ कहा, ना मैंने अपने पति से कुछ कहा कि उसे फिर बुला लो या नहीं! क्योंकि मैं एक पतिव्रता औरत थी इसलिए मैं अपने पति की नजर में गिरना नहीं चाहती थी। उस रात भी जो कुछ हुआ था, वह सब मेरे पति की मर्जी थी। लेकिन मैं अब सोचती हूं कि काश ऐसा फिर हो जाए, अबकी बार में बिल्कुल रंडी की तरह चुदूंगी। क्या आप मेरी इस कहानी से सहमत हैं?
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