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पांच लंडों से गांव की लड़की की सामूहिक चुदाई

Gaon sex story, Gangbang sex story, Khet me chudai sex story, Paanch(5) ladke sex story: गांव की सेक्स कहानी तो आपने बहुत पढ़ी होगी, जो आपको हर तरह की उलझनों और रिश्तों की जटिलताओं से रूबरू कराती हैं। आप जानते भी होंगे कि ये उससे फंसा है, वो उससे फंसा है, जैसे हर कोई किसी न किसी के साथ जुड़ा रहता है। कब कौन किसको चोद कर जाता है, वो सारी खबर आपको पता होगा अगर आप गांव में रहते हैं, जहां हर छोटी-बड़ी बात जल्दी फैल जाती है।

तो आजकल गांव में चुदाई का प्रचलन बढ़ गया है, हर तरफ एक नई उत्तेजना और चाहत का माहौल है। पहले गांव की लड़कियां सेफ होती थीं और शहर की लड़कियों की चूत पहले ही खुल जाती थी, पर जमाना बदल गया है, अब गांव की हवा में भी वो गर्माहट घुल गई है।

आजकल गांव की लड़कियां ही चुदने लगी हैं, अपनी इच्छाओं को खुलकर जीने लगी हैं। ऐसे में अभी चुदना नहीं चाहती थी मैं, अभी क्यों कि मेरी जवानी अभी कमसिन है, नाजुक और ताजा जैसे सुबह की ओस। पर क्या करें जब मुझे पांच अपने यानी कि जान-पहचान के लड़कों ने मुझे गन्ने के खेत में चोद दिया तो क्या करें, वो पल इतना अप्रत्याशित और उत्तेजक था कि विरोध करने का मन ही नहीं हुआ।

आपको अपनी सेक्स कहानी बताने जा रही हूं, जो मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसे याद करके आज भी मेरी सांसें तेज हो जाती हैं। ये मेरी पहली कहानी है, और इसे शेयर करते हुए थोड़ी घबराहट भी हो रही है। अब मैं आपको अपने बारे में बता देती हूं, ताकि आप मुझे बेहतर समझ सकें। मेरी उम्र अठारह साल है, मैं गांव की गोरी हूं, खूबसूरत नैन-नक्श हैं मेरे, जो हर किसी को आकर्षित कर लेते हैं। पतली दुबली हूं पर चीज बड़ी ही मस्त हूं, मेरी कमर पतली है लेकिन कूल्हे भरे-भरे, जो चलते हुए लहराते हैं और लड़कों की नजरें चुरा लेते हैं।

मैं बहुत पहले से ही सेक्स के बारे में जानकारियां रखती हूं, किताबों से, दोस्तों की बातों से, और कभी-कभी छिपकर देखी गई फिल्मों से। और सेक्स की इच्छा भी रखती थी, रातों में अकेले में अपनी चूत को सहलाते हुए कल्पनाएं करती थी, पर गांव में कई बार चुदना और चोदना बहुत आसान होता है, पर कई बार बहुत मुश्किल भी हो जाती है इसलिए मैं कभी चुदी नहीं, चुदाई की चाहत रखते हुए भी, डर था कि कहीं बात फैल न जाए या कोई गलत इंसान न मिल जाए।

पर एक दिन मौका मुझे मिल गया, वो भी इतना बड़ा कि मैं सोच भी नहीं सकती थी। वह भी एक से नहीं, पांच-पांच लड़कों से मैं चुदी, और वो अनुभव इतना गहरा था कि हर पल की याद आज भी मेरी चूत को गीला कर देती है। मैं नहीं चाहती थी उन पांचों लड़कों से चुदना, और उन लोगों ने मुझे चोदा, लेकिन शुरू में थोड़ी हिचकिचाहट के बाद मैं खुद ही इसमें डूब गई। सच तो यह है दोस्तों कि मैं मना भी नहीं कर पाई और मैं भी गन्ने के खेत में अपनी गांड उठा-उठा कर खूब चुदी, हवा में गन्नों की सरसराहट के बीच अपनी सिसकारियां मिलाकर। और सच तो यह है कि वह कोई और नहीं थे, वह मेरी जान-पहचान के थे, कुछ तो मेरे चचेरे भाई थे और कुछ गांव के लड़के थे, जिनके साथ बचपन से खेली-कूदी थी लेकिन अब वो सब बड़े हो चुके थे और उनकी नजरें मेरी जवानी पर थीं।

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गलती मेरी भी है कि जब आप लोगों को तरसायेंगे, अपनी सेक्सी अदा दिखाएंगे, आप ऐसे करेंगे जिससे उन लोगों का लंड खड़ा हो जाए तो दोस्तों कोई भी चोदेगा, मैं भी अपनी टाइट सलवार में घूमती थी, कभी जानबूझकर झुकती तो चूचियां दिखतीं, जिससे उनकी आंखें चमक उठतीं। मेरे साथ भी यही हुआ और मैं तो यही कहती हूं होना भी यही चाहिए, जो ज्यादा चुदक्कड़ बनने की कोशिश करें, उसकी चुदाई जरूर होनी चाहिए, क्योंकि वो तरसाना भी एक तरह की उत्तेजना है जो आखिरकार फूट पड़ती है।

एक दिन की बात है, मेरे घर का टॉयलेट रूम किसी कारण से बंद था, पानी की कमी या पाइप की समस्या से, उस दिन हमारे परिवार वालों को घर से बाहर ही जाना था, किसी रिश्तेदार के यहां। घर के बगल में ही गन्ने का खेत है, वही जाते हैं जब कभी ऐसी बातें हो जाती हैं, वो घना खेत जहां कोई आसानी से नजर नहीं आता। घर में ऐसे भी मैं और मेरे मम्मी-पापा हैं, लेकिन उस दिन वो बाहर गए थे। मेरा बड़ा भाई शहर में जाकर पढ़ाई कर रहा है, कॉलेज में।

मेरा घर सभी के घरों से थोड़ा अलग है यानी कि दूरी पर है, चारों तरफ खेतों से घिरा, शाम की शांति में सिर्फ हवा की सरसराहट। शाम के करीब 7 बजे मैं खेत में गई, सूरज डूब चुका था लेकिन अभी अंधेरा नहीं हुआ था, हल्की रोशनी में गन्नों की पत्तियां चमक रही थीं। और जब वापस आने को तैयार हो गई, अपनी सलवार को ठीक करके खड़ी हुई। तो खेत में से कुछ आवाज आई, जैसे कोई फुसफुसा रहा हो, जब पीछे मुड़ कर देखी तो दो लड़के जो मेरी जान-पहचान के ही थे, उन्होंने मेरे पास आकर बोला, “आज मुझे अपनी रसीली जवानी पीने दे। बहुत दिनों से तुम सभी लड़कों को अपनी जिस्म दिखा-दिखा कर पागल बना दी है,” उनकी आवाज में वो भूख थी जो मुझे डराने के बजाय उत्ता रही थी।

“आज मौका मिल गया है, तुम हमारी सेक्स की भूख को शांत करवाओ,” उन्होंने कहा, उनके हाथ मेरी कमर पर सरकने लगे, उनकी सांसें मेरे गाल पर महसूस हो रही थीं, गर्म और तेज। दोस्तों सच तो ये था मुझे डर नहीं लगा, मैं आराम से उससे बोली, “है तेरे में हिम्मत कि मेरी चूत की भूख को शांत कर दे,” मेरी आवाज में चुनौती थी लेकिन अंदर से मैं कांप रही थी उत्तेजना से। उसने कहा, “क्यों, पांच-पांच लंड हैं तेरे लिए, दो तीन देख वहां बैठ कर लंड निकाल कर हिला रहा है। जब से तुम खेत में बैठी थीं तब से ही हम पांचों तुम्हारी गांड को देख-देख कर लंड हिला रहे थे, थूक लगा-लगा कर,” मैंने देखा तो सच में तीन और लड़के गन्नों के बीच छिपे थे, उनके लंड बाहर निकले हुए, सख्त और लाल, शाम की रोशनी में चमकते हुए।

मैं थोड़ी डर गई क्यों कि दो लंड को तो मैं संभाल लेती, पर पांच लंड से चुदना थोड़ा रिस्की है, मेरी दिल की धड़कन तेज हो गई, लेकिन साथ ही एक अजीब सी सिहरन मेरी चूत में दौड़ गई। इसलिए मैंने कहा, “नहीं नहीं, मुझे पांच का लंड नहीं चाहिए, अगर दो लेना चाहते हो तो ले लो मुझे,” मेरी आवाज कांप रही थी।

तो उन्होंने कहा, “कोई बात नहीं, हम पांचों आराम-आराम से तुम्हारी चुदाई करेंगे, दर्द नहीं होगा, ये मेरी गारंटी है,” एक ने मेरे कंधे पर हाथ रखा, धीरे से सहलाते हुए। मैंने कहा, “नहीं नहीं, मुझे डर लग रहा है,” लेकिन मेरे शब्द कमजोर थे। तभी उन दोनों ने मुझे चूमने लगा, एक मेरी चूचियां दबाने लगा, धीरे-धीरे मसलते हुए, मेरी ब्रा के ऊपर से निप्पल्स को रगड़ते, जो सख्त हो चुके थे, दूसरा मेरे होंठ को चूसने लगा, उसकी जीभ मेरे मुंह में घुस गई, गर्म और गीली, मैं सिसकार उठी, आह.. इह्ह.. ओह्ह। मैं भी कहां कम थी, मौके का फायदा उठाना तो मेरी पुरानी आदत है, मैंने उनकी किस का जवाब दिया, अपनी जीभ से खेलते हुए।

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मैंने तुरंत ही उन दोनों को किस देने लगी, मेरे हाथ उनके सीने पर सरक गए, उनकी मांसपेशियां महसूस करते हुए, तभी वहां वो तीनों जो थोड़ा दूर बैठे थे आ गए, अब सब मुझे घेर चुके थे। मेरे कपड़े उतार दिए और फिर पांचों ने अपने-अपने कपड़े उतारे, शाम की ठंडी हवा मेरी नंगी त्वचा पर लगी, मेरी गोरी चमड़ी पर हल्के रोंगटे खड़े हो गए, मेरी चूचियां सख्त, निप्पल्स उभरे हुए, और चूत पहले से गीली, रस टपक रहा था। पहले लड़के ने मुझे घुटनों पर बिठाया और अपना लंड मेरे मुंह में डाल दिया, “चूस साली, देख कितना बड़ा है, तेरे लिए खड़ा है,” उसका लंड गर्म था, नसों से भरा, मैंने जीभ से चाटा, नमकीन स्वाद महसूस किया, फिर मुंह में लिया, ग्ग्ग्ग.. ग्ग्ग्ग.. गी.. गी.. गों.. गों.. गोग, धीरे-धीरे गहराई तक, वो मेरे बाल पकड़कर धक्के देने लगा, आह.. हां ऐसे चूस, अच्छी लड़की।

दूसरा लड़का मेरे पीछे आया, मेरी गांड पर हाथ फेरा, नरम मांस को दबाते हुए, फिर उंगली से मेरी चूत को सहलाने लगा, “कितनी गीली है तेरी चूत, साली पहले से तैयार है चुदने को,” उसकी दो उंगलियां अंदर सरकीं, गीलेपन में फिसलती हुईं, मैं सिसकारी, आह.. इह्ह.. ओह्ह.. ओह, कमर हिलाने लगी। तीसरा मेरी चूचियों को मसल रहा था, निप्पल्स को चूस रहा था, जीभ से घुमाते हुए, “ये चूचियां कितनी मस्त हैं, दबाने से मजा आ रहा है,” दांतों से हल्के से काटा, मीठा दर्द हुआ। चौथा मेरी गर्दन चूम रहा था, कान में फुसफुसाते हुए, “तू कितनी सेक्सी है, आज तुझे पूरा मजा देंगे,” उसका हाथ मेरी जांघों पर सरक रहा था।

पांचवां मेरी पीठ सहला रहा था, उंगलियां रीढ़ पर दौड़ाते, सिहरन पैदा करते हुए। अब फोरप्ले और लंबा चला, सब बारी-बारी से मुझे चूमते, सहलाते, मेरी चूत को उंगलियों से चोदते, मैं हांफ रही थी, आह्ह.. ह्ह.. आऊ.. ऊऊ, शरीर पसीने से चिपचिपा हो गया।

अब पहले लड़के ने मुझे नीचे लिटा दिया, मेरी टांगें फैलाईं, “अब ले मेरा लंड, साली,” उसने अपना 7 इंच का लंड मेरी चूत पर रगड़ा, गीलेपन में फिसलता हुआ, फिर धीरे से अंदर धकेला, आह्ह.. ह्ह.. आऊ.. ऊऊ.. ऊउइ.. ऊई.. उईईई, मैं चीखी लेकिन मजा आ रहा था, वो धक्के मारने लगा, फच.. फच.. की आवाजें गन्नों की सरसराहट में मिल गईं, मैं अपनी गांड उठा-उठा कर साथ दे रही थी, “आह.. हां चोदो मुझे, जोर से,” मेरी चूत उसकी मोटाई से भरी हुई महसूस हो रही थी। बाकी लड़के देख रहे थे, एक ने अपना लंड मेरे मुंह में डाल दिया, मैं चूस रही थी, ग्ग्ग्ग.. ग्ग्ग्ग.. गी.. गी, जबकि नीचे चुदाई चल रही थी, दूसरा मेरी चूचियां चूस रहा था।

फिर बारी-बारी से सबने मुझे चोदा, दूसरा आया, उसका लंड थोड़ा मोटा था, 6 इंच, लेकिन घुसते ही मैं सिसकारी, आह ह ह ह ह्हीईई आअह्ह्ह्ह, “ओह.. कितना मोटा है, फाड़ देगा मेरी चूत को,” वो हंसकर बोला, “फटने दे, साली, तू तो चुदने लायक है,” धक्के मारते हुए, मेरी जांघें थरथरा रही थीं। तीसरा मेरी गांड की तरफ मुड़ा, लेकिन मैंने मना किया, “नहीं, गांड में नहीं, सिर्फ चूत में,” तो उसने चूत ही ली, धक्के मारते हुए, फचक.. फचक.. की आवाजें, मैं आंखें बंद करके मजा ले रही थी, आह्ह.. ह्ह.. इह्ह.. ओह्ह, उसका लंड मेरी दीवारों को रगड़ रहा था। चौथा लड़का मुझे घोड़ी बना कर चोदा, पीछे से लंड डाला, मेरी गांड पर थप्पड़ मारते हुए, “ले साली, गांड हिला, मजा आ रहा है?” मैं हांफते हुए, “हां.. जोर से चोदो, आह.. ऊई.. उईईई,” मेरी पीठ पर पसीना बह रहा था।

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पांचवां सबसे आखिर में आया, उसका लंड सबसे लंबा था, 8 इंच, मैं थक चुकी थी लेकिन फिर भी गांड उठाई, वो अंदर घुसा, आह्ह.. ह्ह.. आऊ.. ऊऊ, मैं चिल्लाई, “धीरे.. धीरे करो, दर्द हो रहा है,” लेकिन वो बोला, “अब सहन कर, साली, हम सब तेरे लिए हैं,” गहराई तक पहुंचकर रगड़ता हुआ। अब पांचों एक लाइन में लेट गए और मैं बारी-बारी से सबके लंड पर बैठती, दो-दो मिनट सबको टाइम देती, ऊपर-नीचे उछलते हुए, आह.. इह्ह.. ओह्ह, फिर हरेक को चूमती, एक से चुदती तो किसी का लंड चूस रही होती थी, ग्ग्ग्ग.. ग्ग्ग्ग.. गी.. गों, मेरी चूत रस से भरी थी। पांचों ने मुझे आराम-आराम से चोदा, ऐसा लगा नहीं कि मेरा गैंगबैंग हो गया, बल्कि एक लंबा कामुक सत्र था। मैं जो चाहती थी वैसा ही वो पांचों मेरे साथ करते थे, कोई जोर, कोई जबरदस्ती नहीं, पांचों आराम-आराम से मेरी जिस्म को सहलाया, चूमा और मुझे चोदा, हर स्पर्श में उत्तेजना थी।

एक-एक करके सभी का वीर्य बाहर आ गया, पहले ने मेरी चूत में झड़ दिया, गर्म-गर्म रस महसूस हुआ, आह्ह.. ह्ह.. इह्ह, भरता हुआ, फिर बाकी ने बाहर या मुंह में, मैं थक कर लेट गई, शरीर सुन्न लेकिन तृप्त। धीरे-धीरे हटते गए, बाद में मैं भी अपनी पेंटी, ब्रा, सलवार और कमीज पहनी और वापस अपने घर आ गई।

उस दिन जब घर आ गई तब मुझे बहुत दर्द होने लगा था, जैसे शरीर टूट रहा हो। रात भर मेरी चूतड़ में दर्द, मेरी टांगों में दर्द, हर कदम पर सुई चुभती सी। मेरी चूचियां सूज गई थीं, छूने से दर्द होता। मेरी चूत लाल हो गई थी, जलन और सूजन से। चला नहीं जा रहा था, लंगड़ाती हुई बिस्तर तक पहुंची। होंठ भी मेरे सूज गए थे, चूमने से।

पर जो भी हुआ मुझे बहुत अच्छा लगा और मैं तृप्त हो गई उन पांचों की चुदाई से, वो मजा आज भी याद आता है। में अपनी दूसरी कहानी भी जल्द ही लेके आउंगी तब तक के लिए धन्यवाद।

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