Boss and Office girl sex story, Hotel sex story, Bangalore sex story: मेरा नाम लवली है। मैं नॉएडा की रहने वाली हूं। मैं आपको अपनी सेक्स कहानी सुनाने जा रही हूं। ये कहानी ज्यादा दिन पहले की नहीं है। जून की है। कैसे मेरे बॉस ने मुझे बंगलौर के होटल में चोदा था वही आपको बताने जा रही हूं।
मैं नॉएडा के एक आईटी कंपनी में काम करती हूं जहां हर दिन की तेज रफ्तार वाली व्यस्तता का माहौल रहता है। ऑफिस की नीली रोशनी वाली स्क्रीन्स की चमक आंखों को थका देती है लेकिन साथ ही ऊर्जा भी भर देती है। मैं मार्केटिंग में हूं और ऑफिस के कई काम संभालती हूं। रिपोर्ट तैयार करने की देर रात की बैठकों से लेकर क्लाइंट कॉल्स तक सब कुछ मेरे जिम्मे रहता है। मेरे सर ने मुझे काफी जिम्मेदारियां दी हुई हैं। यहां तक कि कंपनी के कई काम को मैं देखती हूं जिससे कभी-कभी कंधों पर बोझ महसूस होता है लेकिन मन में गर्व का सुखद एहसास भी होता है कि मेरी मेहनत अब पहचानी जा रही है।
जून में बंगलौर में तीन दिन का कॉन्फ्रेंस था। ऑफिस के गलियारों में इस खबर से हलचल मच गई थी और हर कोई चर्चा कर रहा था। तो सर ने मुझे बोला लवली क्या तुम बंगलौर चलोगी। उनके मजबूत और आत्मविश्वास भरी आवाज ने मेरे दिल की धड़कनें अचानक तेज कर दीं। कमरे की एयर कंडीशनर की ठंडी हवा मेरी गर्दन पर लग रही थी और मैं थोड़ा सिहर उठी थी। तो मैं बोली मुझे एक बार अपने घर में बात करना होगा। मैं कल बताऊंगी। मेरी आवाज में हल्की घबराहट थी लेकिन अंदर से उत्साह की लहर दौड़ रही थी।
तो सर बोले देखो आगे बढ़ने के लिए तुम्हें कई जिम्मेदारियां लेनी होंगी। और मैं चाहता हूं तुम कंपनी का कामकाज अच्छे से हैंडल करो। उनके शब्दों में प्रोत्साहन की गर्माहट थी जो मेरे मन को छू गई। तो मैं बोली हां सर मैं भी जिंदगी में आगे बढ़ना चाहती हूं। मेरे होंठों पर एक अनायास मुस्कान आ गई और मन में सपनों की दुनिया खुलने लगी।
तो सर बोले देखो एक प्रोजेक्ट अगले साल है और मुझे एक अपने एम्प्लॉयी को अमेरिका भी भेजना है। इतना सुनते ही मैं खुश हो गई। लगा कि मुझे आगे काफी मेहनत और ईमानदारी से काम करना होगा। मेरे शरीर में रोमांच की लहर दौड़ गई और मैंने मन ही मन सोचा कि यह मौका मेरी किस्मत बदल सकता है।
फिर सर बोले अभी बंगलौर तीन दिन के लिए जाना है। सारा खर्चा कंपनी की तरफ से होगा। और साथ में तुमको दस हजार और भी मिलेंगे। यह सुनकर मेरी आंखें चमक उठीं और दिल में खुशी का तूफान आ गया।
तो मैं बोली ठीक है सर मैं जाऊंगी। अपने घरवालों को मना लूंगी। मैं घर गई और बातचीत की अपने पेरेंट्स से। घर की परिचित दीवारों की गंध और मम्मी के हाथों का बना चाय का स्वाद मुझे थोड़ा आश्वस्त कर रहा था। उन्होंने कहा देखो बेटी जो भी करना अपने लिए सही करना और सोच समझकर करना। जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए तो तुम्हें अलग होना ही पड़ेगा। उनकी आंखों में ममता और समर्थन दोनों थे जिससे मेरी आंखें नम हो गईं लेकिन मन में राहत का सुखद एहसास हुआ। तो मम्मी पापा आराम से मुझे जाने की परमिशन दे दिए।
और मैं दूसरे दिन आकर सर को बोल दी कि मुझे जाने की अनुमति मिल गई है। सर जी ने मेरा टिकट करवा दिया अपना भी। हम दोनों ही जा रहे थे। पर घर में मैं ये बोल दी थी कि और भी दो एम्प्लॉयी जा रहे हैं।
और दोस्तों हम दोनों बंगलौर पहुंच गए। तीन दिन होटल में जो कि एक फाइव स्टार होटल है बंगलौर में उसमें कॉन्फ्रेंस था और एक दिन अपने घूमने के लिए रखे थे।
कॉन्फ्रेंस का पहला दिन। सुबह सुबह ही बंगलौर पहुंचे थे। उसी फाइव स्टार होटल में सर ने रूम बुक किया था रहने के लिए। जैसे ही मैं कमरे में गई दंग रह गई। आलीशान होटल का आलीशान कमरा। दो बेड लगे थे जो गजब के थे। मजा आ गया था देखकर।
विशाल कमरे की दीवारें नरम बेज रंग की थीं जिन पर सुनहरी रोशनी पड़ रही थी और फ्लोर टू सीलिंग वाली खिड़कियों से बाहर बंगलौर शहर की सुबह की चमकती रोशनी अंदर आ रही थी। हवा में ताज़ा फूलों की हल्की खुशबू मिली हुई थी साथ ही महंगे लिनन और वेनिला की मादक महक फैली हुई थी। एयर कंडीशनर की ठंडी हवा मेरी त्वचा को चूम रही थी और कमरा पूरी तरह शांत और लग्जरी महसूस हो रहा था। दो किंग साइज बेड नरम सफेद बेडशीट्स से ढके हुए थे जिन पर मोटे-मोटे तकिए और सॉफ्ट ब्लैंकेट्स रखे थे। बेड के पास एक बड़ा सा मिरर था जो पूरे कमरे को और भी बड़ा दिखा रहा था। कमरे में एक लक्जरी सोफा, फ्लैट स्क्रीन टीवी और मिनी बार भी था जिसकी शीशे की अलमारी में चमकती बोतलें दिख रही थीं। इतना शानदार वातावरण देखकर मेरा मुंह खुला रह गया और दिल में एक अनोखा रोमांच दौड़ गया।
मुझे काफी खुशी हुई अपनी कामयाबी पर कि मैं इस मुकाम तक पहुंची तो सही कि मैं ऐसी जगह पर रुक सकूं। मेरे मन में गर्व का सुखद एहसास भर गया था जैसे कि मैंने कोई बहुत बड़ा लक्ष्य हासिल कर लिया हो। मैं तुरंत ही तैयार हो गई। मैं गजब की हॉट लग रही थी। मैं एयर होस्टेस की तरह बाल बनाई और कपड़े पहनी। मैंने अपने लंबे बालों को स्लीक हाई पोनटेल में बांध लिया जिसमें कुछ लूज स्ट्रैंड्स मेरे चेहरे पर गिर रहे थे। हल्का मेकअप किया जिसमें ग्लॉसी लिप्स और स्मोकी आईज थे। मैंने एक टाइट ब्लैक ब्लाउज पहना जो मेरी छाती को अच्छे से उभार रहा था और नीचे एक शॉर्ट स्कर्ट जो मेरी जांघों को आधा दिखा रहा था। मेरी त्वचा पर हल्का परफ्यूम छिड़का था जो मेरे हर मूवमेंट के साथ फैल रहा था।
सर देखकर देखते ही रह गए। उनकी आंखें मेरे शरीर पर ऊपर से नीचे तक घूम रही थीं और चेहरे पर एक गहरी प्रशंसा के साथ भूख भरी नजर थी। वो बोले गजब लग रही है। ऐसी ही एम्प्लॉयी की जरूरत थी जो सुंदर लगे। उनकी आवाज में प्रशंसा थी लेकिन उसमें एक गर्म और इच्छुक पुट भी था जो मेरी रीढ़ में सिहरन पैदा कर गया। मैं बोली अब तो आपके साथ हूं आपके कंपनी के साथ हूं। तो वो बोले हां हां तुम आगे बढ़ो मैं यही चाहता हूं। उनके शब्दों में एक छिपा हुआ इशारा था जो मेरे मन को छू गया।
शाम चार बजे तक हम लोग कॉन्फ्रेंस में ही रहे। वहां बड़े हॉल में एसी की ठंडी हवा चल रही थी और स्पीकर्स की आवाज गूंज रही थी। हम बैठे हुए नोट्स लेते रहे और नेटवर्किंग करते रहे। उसके बाद आकर थोड़ा आराम किया फिर मॉल घूमने चले गए। मॉल की चमकती लाइट्स और भीड़ के बीच सर जी ने मेरे लिए एक बेहतरीन ड्रेस ली। वह एक काला स्लीक ड्रेस था जो मेरी कर्व्स को पूरी तरह हाइलाइट करता था और काफी रिवीलिंग था।
मैं बहुत खुश हुई। वहां से आकर डिनर किया। ये मेरा पहला डिनर था किसी बड़े होटल में। रेस्टोरेंट में मद्धम रोशनी थी लाइव पियानो म्यूजिक बज रहा था और खाने की स्वादिष्ट खुशबू चारों तरफ फैली हुई थी। स्वादिष्ट डिशेज और महंगे वाइन के ग्लास ने पूरे माहौल को रोमांटिक बना दिया था। फिर हम दोनों अपने कमरे में चले गए। कमरे में वापस आते ही एयर कंडीशनर की ठंडी हवा ने हमें और भी आरामदायक महसूस कराया।
सर जी ने एक शराब की बोतल निकाली और दो पेग बनाए। व्हिस्की की तीखी मादक खुशबू पूरे कमरे में फैल गई थी। मैं बोली नहीं पीती तो उन्होंने कहा पहले नहीं पीती थी पर अब पीना ही होगा। उनकी आवाज में दृढ़ता और प्रोत्साहन दोनों थे।
ऐसे कोई इतने बड़े मुकाम तक पहुंचता है उसके लिए तो तुम्हें मॉडर्न बनना पड़ेगा। खुले विचार का होना होगा। और बियर व्हिस्की सिगरेट तो आम बात होने चाहिए। तुम खुद ही देख लो जितनी भी लड़कियां आई हुई थीं कॉन्फ्रेंस में करीब-करीब सिगरेट पी रही थीं। उनकी बातें मेरे कान में गूंज रही थीं।

और वो सब अपने बॉस के साथ रात में एक ही बिस्तर पर सोएंगी तभी तो उन सबकी सैलरी ज्यादा होती है क्योंकि वो बॉस के करीब होती हैं। मैं समझ गई वो क्या कहना चाह रहे थे। उनके शब्द मेरे मन में गहराई तक उतर गए और मेरे शरीर में एक अनोखी गर्माहट फैल गई।
मैं उनके बात से सहमत थी। मुकाम पाने के लिए अपना कई चीज शेयर करना होता है। तो मैंने भी उनको शराब के लिए हां कह दी। वो दो पेग बनाए और फिर हम दोनों मिलकर पीने लगे। गर्म व्हिस्की मेरे गले से नीचे उतरते ही मेरे पेट में आग सी लग गई और पूरे शरीर में एक मादक नशा फैलने लगा।
इससे पहले मैं एक दो बार ही पी थी अपने दोस्तों के साथ। फिर क्या था वो अपनी बात बताने लगे कि वो अपनी बीवी से खुश नहीं हैं। वो सेक्स में संतुष्ट नहीं करती है मॉडर्न नहीं है। उनकी आवाज में निराशा थी लेकिन आंखों में मेरे लिए भूख साफ दिख रही थी।
और धीरे धीरे वो मेरे करीब आ गए। उनकी सांसों की गर्माहट मेरे गालों पर पड़ रही थी और उनकी बॉडी से पुरुषाना परफ्यूम की खुशबू आ रही थी। मैं बोली सर ये सब फिर कभी तो वो बोले फिर कभी क्या इससे बढ़िया मौका कब आएगा। तुम्हारी ये पहली सीढ़ी है आगे बढ़ने की।
मैं चुप रही क्योंकि मैं भी अपनी जिंदगी में एक नया मुकाम चाहती थी। तभी मैं उनको देखी अपना नजर उठाकर। फिर बोली धोखा तो नहीं दोगे मुझे। वो बोले नहीं नहीं कभी नहीं। मैं तुम्हें किसी चीज की कमी नहीं होने दूंगा। उनकी आंखों में ईमानदारी और गहरी इच्छा दोनों थीं।
मैं बोली खाओ मेरी कसम। वो बोले तुम्हारी कसम। तुमको मैं आगे बढ़ाऊंगा। और मैं उनके होठ पर अपना होठ रख दी। हम दोनों एक दूसरे को हौले हौले से किस करने लगे। उनके नरम लेकिन दबाव भरे होंठ मेरे होंठों से चिपक गए और धीरे-धीरे दबाव बढ़ने लगा।
और फिर लिप लॉक कर लिए। मैं अपना जीभ सर के मुंह में डाल दी। वो मेरी जीभ को चूसने लगे। उनकी गर्म और नम जीभ मेरी जीभ को लपेट रही थी और हम दोनों की सांसें तेज हो गई थीं। उनका हाथ मेरी स्तन पर आ गया। वो हौले हौले से दबाने लगे। मेरी चूचियां उनके हाथों में नरम लेकिन टाइट महसूस हो रही थीं।
मैं अपनी आंख बंद कर चूमती रही और उनको सहलाती रही। उनकी उम्र 43 साल है और मैं 21 की। अब वो मुझे अपने तरफ खींच लिए और पीठ को सहलाते हुए चूतड़ को सहलाने लगे। उनकी मजबूत उंगलियां मेरे नितंबों को दबा रही थीं जिससे मेरे शरीर में बिजली सी दौड़ गई और मेरी सांसें भारी हो गईं।
हम दोनों खड़े हो गए और एक दूसरे के जिस्म को टटोल रहे थे चूम रहे थे। फिर उन्होंने मेरा नाइट ड्रेस उतार दिया। मैं ब्रा और पैंटी पर थी। वो भी अपना कपड़ा खोल दिए। उनके चौड़े सीने और खड़े लंड को देखकर मेरी सांस अटक गई।
वो मुझे बेड पर ले गए। अब मुझे चूमने लगे। मेरे पैर की उंगलियों से शुरू किया था चाटना और मेरे सिर तक पहुंच गए। उनकी गर्म जीभ मेरी उंगलियों को एक-एक करके चूस रही थी फिर पिंडलियों को चाटती हुई जांघों तक पहुंची। हर चुम्बन के साथ मेरी त्वचा पर सिहरन दौड़ रही थी।
मैं पानी पानी हो गई थी। मेरे बदन में आग जल रही थी। चूत गरम हो गई थी। चूचियां बड़ी बड़ी और टाइट हो गई थीं। मेरे मुंह से आवाज आने लगी आए आ आ आ आ आ आए आ ओह्ह ओह्ह ओह्ह। मेरी आवाज अनियंत्रित रूप से निकल रही थी और कमरे की दीवारें उसे गूंजा रही थीं।
उन्होंने मेरी पैंटी और ब्रा उतार दी और मेरे बूब्स को मसलते हुए मेरे होठ को चूसने लगे। मेरे स्तनों को उन्होंने दोनों हाथों से मजबूती से दबाया निप्पल को उंगलियों से नोचा और फिर मुंह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगे। उनकी जीभ निप्पल के चारों तरफ घूम रही थी और दांत हल्के-हल्के काट रहे थे। मैं पागल होने लगी। अंगड़ाई लेने लगी। मेरे रोम रोम खड़े हो रहे थे।
उन्होंने मेरी चूत को अच्छे से देखा और चीर कर बोला वर्जिन हो। मैं बोली हां। सर जी मेरी चूत पर एक किस किए और उठाकर अपना बैग के तरफ गए और एक 500 रुपये की गड्डी जो पचास हजार रुपये थी मुझे दे दिया।
मैं सोची अभी तो चोदे भी नहीं और तुरंत ही पचास हजार मिल गए। मैं बोली इसकी जरूरत नहीं है सर। प्यार भी कोई चीज है। मैं पैसे नहीं लूंगी। पर सर जी ने कहा ले लो। कोई बात नहीं। फिर मैंने वो पचास हजार रख लिए।
अब वो मेरे पैरों के बीच में जाकर मेरी चूत को चाटने लगे। उन्होंने अपने मजबूत हाथों से मेरी जांघों को दोनों तरफ पूरी तरह फैला दिया और अपने चेहरे को मेरी गीली चूत के ठीक ऊपर ले आए। उनकी गर्म और भारी सांसें मेरी संवेदनशील चूत की नम त्वचा पर पड़ रही थीं जिससे मेरे पूरे शरीर में तीव्र सिहरन की लहरें दौड़ने लगीं। उनकी गर्म जीभ पहले मेरी बाहरी लेबिया पर धीरे-धीरे ऊपर से नीचे तक घूमने लगी और हर चाट के साथ वो मेरी चूत की मीठी और गर्म खुशबू को गहरी सांसों से अंदर ले रहे थे। फिर उन्होंने अपनी जीभ को मेरी क्लिटोरिस पर केंद्रित कर दिया और तेज-तेज चक्कर काटते हुए चूसने लगे। मेरी क्लिटोरिस फूलकर सख्त हो गई थी और उनकी जीभ हर बार उसे दबाकर खींच रही थी। मैं अनियंत्रित रूप से कराह उठी और मेरे हाथ स्वतः उनके बालों में उलझ गए। उनकी जीभ अब मेरी चूत के अंदर घुसने की कोशिश कर रही थी और वे मेरे निकलते रस को चूस-चूसकर पूरा पी रहे थे। उनका मुंह पूरी तरह मेरी चूत पर चिपका हुआ था और उनकी जीभ अंदर-बाहर तेजी से मूवमेंट कर रही थी। मेरे बदन में सिहरन हो रही थी। गुदगुदी हो रही थी। पर एक एक ना सुने और चाटते रहे।
फिर उन्होंने मुझे उल्ट दिया और मेरी कमर को ऊपर उठाकर कुत्ते की मुद्रा में कर दिया। मेरी गांड अब उनके चेहरे के सामने थी। फिर मेरी गांड के छेद को भी अपने जीभ से छूने लगे। उनकी गर्म और नम जीभ मेरे टाइट गांड के छेद पर घूम रही थी। उन्होंने पहले हल्के-हल्के चुम्बन किए फिर जीभ को दबाव देकर अंदर घुसाने की कोशिश की। हर बार उनकी जीभ अंदर थोड़ा-थोड़ा घुसती और बाहर निकलती जिससे मेरी पूरी रीढ़ में बिजली की तरह झटके लग रहे थे। मेरी गांड की मांसपेशियां अनियंत्रित रूप से सिकुड़ रही थीं और मेरे मुंह से जोर-जोर की कराह निकल रही थी। ओह्ह्ह क्या बताऊं दोस्तों मुझे ऐसा लग रहा था कि पूरे शरीर में बिजली दौड़ रही थी। उन्होंने मुझे आधे से करीब एक घंटे तक ऐसे ही करते रहे। अब मैं बर्दाश्त के बाहर हो गई। चूत गीली हो गई थी। चूचियां मेरी तन गई थीं। निप्पल खड़े हो गए थे।
उनका लंड भी खड़ा हो गया था। अब वो मुझे चोदने के लिए तैयार थे। उन्होंने अपना मोटा और गर्म लंड मेरी चूत के मुंह पर रगड़ना शुरू किया। लंड की गर्मी और सख्ती मेरी चूत की नम त्वचा पर महसूस हो रही थी। फिर अपना लंड चूत पर उन्होंने सेट किया और जोर से घुसा दिया। पर गया नहीं पूरा। मेरी टाइट वर्जिन चूत ने उनके मोटे लंड का पूरा स्वागत नहीं किया और मैं दर्द से चीख पड़ी। मेरी चूत की दीवारें उनके लंड को कसकर पकड़ रही थीं और मैंने अपने नाखून उनके कंधों में गड़ा दिए।
मैं सेट की फिर से उनका लंड और उन्होंने फिर से धक्का दिया और इस बार पूरा लंड चूत के अंदर चला गया। मुझे काफी दर्द होने लगा था। खून भी निकल आया था जो उनकी जांघों और बेडशीट पर लग गया था। पर वो मुझे चोदते रहे। उन्होंने पहले धीरे-धीरे लेकिन गहरे धक्के मारने शुरू कर दिए। हर धक्के के साथ उनका लंड मेरी चूत की गहराई तक पहुंच रहा था और मेरी चूत के रस के साथ खून का मिश्रण उनके लंड पर चमक रहा था।
मेरी चूचियों को मसलते रहे। उन्होंने मेरी दोनों चूचियों को जोर से पकड़कर मसला और निप्पल को उंगलियों से नोचते रहे। उनकी उंगलियां मेरी चूचियों को दबा रही थीं और निप्पल को खींच रही थीं। मुझे भी दर्द कम हो गया था और मैं चुदने लगी थी सर के साथ जबरदस्त तरीके से। फिर क्या था दोस्तों मेरी गदराई हुई बदन को उन्होंने खूब चूमा खूब चोदा खूब पीया मेरी चूत के रस को। निप्पल को तो उन्होंने काट खाया। उनके दांत मेरे निप्पल को हल्का-हल्का काट रहे थे जिससे दर्द और मजा दोनों एक साथ हो रहा था।
रात भर हम दोनों ही नहीं सोए। एक दूसरे के बाहों में ही रहे और सेक्स करते रहे दो दो घंटे के गैप में। फिर क्या था दोस्तों दूसरे दिन और तीसरे दिन की चुदाई के बाद मैं एक्सपर्ट हो गई थी। अब मैं सर की बीवी की तरह करने लगी। वो भी मुझे अपनी बीवी से बढ़कर समझने लगे। अब हम दोनों के बीच कोई दूरी नहीं है। नॉएडा में भी सप्ताह में तीन दिन निकाल ही लेती हूं उनके लिए और चार चार घंटे के लिए होटल में।
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