Sexy tenant sex story, bhabhi chudai sex story, home sex story: नमस्कार दोस्तों, लड़कियों और सेक्सी आंटियों, मैं आप सभी से फिर से अपना परिचय करा दूं। मैं मनिष हूं, बठिंडा (पंजाब) से, मेरी उम्र अभी 25 साल की है और ये मेरी तीसरी कहानी है। मैं ISS का फैन हूं और कहानियां पढ़ने का बहुत शौक है। जिन लोगों ने मेरी पिछली कहानियां पढ़ीं और मुझे मेल किया, उन सबको दिल से थैंक्स। अब सीधे कहानी पर आते हैं, और इस बार मैं पूरी डिटेल में बताऊंगा, कुछ भी छोटा नहीं करूंगा।
हमारे घर में एक किराएदार रहती है, नाम है शीला, उम्र 26 साल। वो बहुत ही खूबसूरत और सेक्सी है। उसका फिगर देखकर किसी का भी मन डोल जाए। कमर पतली, कूल्हे भरे-भरे, और बूब्स ऐसे कि साड़ी के ब्लाउज से बाहर आने को बेताब रहते हैं। उसके परिवार में वो, उसका पति और एक छोटा सा बच्चा है। बच्चा अभी 1-1.5 साल का होगा।
ये बात एक साल पहले की है, जब मैं 22 साल का था। उस समय से ही शीला को देखते ही मेरा लंड तन जाता था। मैं सोचता रहता था कि काश उसके साथ सेक्स कर पाऊं। उसके बड़े-बड़े बूब्स दबाऊं, निप्पल चूसूं, होंठ चूमूं और उसकी चूत में अपना लंड डालकर जोर-जोर से पेलूं। लेकिन डर भी बहुत था, कहीं पति को पता चल गया तो क्या होगा। इसलिए मैं बस बहाने बनाता था। बच्चे को खेलाने के नाम पर उसके घर जाता, उसके पास बैठकर बातें करता, और चुपके-चुपके उसके बूब्स को घूरता रहता।
जब वो बच्चे को दूध पिलाती थीं तो मैं जानबूझकर वहां होता। वो जानती थीं कि मैं देख रहा हूं, फिर भी वो ब्लाउज का पल्लू थोड़ा सा सरकातीं और मुझे पूरा नजारा दिखातीं। उसके निप्पल्स गुलाबी और सख्त हो जाते थे। मैं बस मन ही मन सोचता रहता कि काश ये मेरे मुंह में होते।
फिर एक दिन मौका मिला। मेरे मम्मी-पापा को एक हफ्ते के लिए बाहर शादी में जाना था। उसी समय शीला के पति को भी कंपनी का काम था, वो 5-7 दिन के लिए बाहर जाने वाले थे। मम्मी ने जाने से पहले शीला से कहा, “शीला, तुम घर में अकेली हो, बच्चा छोटा है। राहुल भी घर में अकेला रहेगा। तुम अपना सामान लेकर हमारे यहां आ जाओ, बच्चे का भी ख्याल रखना और यहां ही रहना।” शीला ने हां कर दी।
मम्मी-पापा चले गए, शीला का पति भी चला गया। मैं कॉलेज से दोपहर में घर आया। फ्रिज से कुछ निकालकर खाया और टीवी रूम में चला गया। देखा तो शीला अपने बच्चे के साथ उसी रूम में सो रही थीं। साड़ी पहने हुए, पल्लू थोड़ा सरका हुआ था, जिससे उनके बूब्स की क्लीवेज साफ नजर आ रही थी, ऊपर-नीचे हो रहे थे सांसों के साथ। वो बहुत सेक्सी लग रही थीं, उनकी गोरी त्वचा चमक रही थी, होंठ हल्के गुलाबी और आंखें बंद होने से चेहरा और भी आकर्षक लग रहा था। मैं टीवी ऑन करके बैठ गया लेकिन नजरें बार-बार उन पर जा रही थीं, मेरा लंड धीरे-धीरे सख्त होने लगा, पैंट में तनाव महसूस हो रहा था।
मैं कंट्रोल नहीं कर पाया, दिल जोर-जोर से धड़क रहा था, डर भी लग रहा था लेकिन इच्छा ज्यादा थी। धीरे से उनके पास गया, बेड के किनारे खड़ा होकर उनका चेहरा देखा, बहुत सुंदर था, बाल बिखरे हुए, गाल मुलायम लग रहे थे। मैंने अपनी उंगली उनके होंठों पर रखी और धीरे-धीरे सहलाने लगा, ऊपर से नीचे, होंठों की नरमी महसूस कर रहा था, वो सोती रहीं, कोई हलचल नहीं। फिर मैंने झुककर अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिए, हल्का-हल्का चूमा, पहले ऊपरी होंठ को, फिर निचले को, उनकी सांसें मेरे चेहरे पर लग रही थीं, गर्माहट महसूस हो रही थी। वो नहीं जागीं, शायद जानबूझकर। फिर मैंने उनके ब्लाउज के नीचे हाथ डाला, उनकी कमर को सहलाया, त्वचा इतनी चिकनी थी कि उंगलियां फिसल रही थीं, फिर ऊपर की तरफ बढ़ा और ऊपर से बूब्स को छुआ, ब्लाउज के कपड़े के ऊपर से उनके बड़े-बड़े बूब्स की गोलाई महसूस की, धीरे-धीरे दबाया, पहले हल्के से, फिर थोड़ा जोर से, निप्पल्स सख्त लग रहे थे। वो फिर भी नहीं जागीं लेकिन मुझे लगा कि वो जाग रही हैं और जानबूझकर चुप हैं, उनकी सांसें तेज हो गई थीं।
मैंने हिम्मत की, अब रुकना मुश्किल था। उनके पैरों के पास गया, बेड पर घुटनों के बल बैठा, पेटीकोट को धीरे-धीरे ऊपर किया, पहले टखनों से शुरू करके जांघों तक, उनकी गोरी टांगें नजर आईं, चिकनी और आकर्षक। उनके पैर चूमते हुए ऊपर की तरफ बढ़ता गया, पहले पांव के तलवे को चूमा, फिर टखने, फिर घुटनों को, हर चुम्बन के साथ उनकी त्वचा का स्वाद ले रहा था, हल्की खुशबू आ रही थी। पेटीकोट पूरी तरह ऊपर कर दिया, अब उनकी पिंक कलर की पैंटी दिखी, जो थोड़ी गीली लग रही थी। मैंने पैंटी के ऊपर से उनकी चूत को सहलाना शुरू किया, उंगली से हल्के-हल्के दबाया, चूत की दरार पर उंगली फेरी, ऊपर से नीचे, क्लिट के आसपास रगड़ा, वो सांसें तेज ले रही थीं लेकिन कुछ नहीं बोलीं, उनकी जांघें हल्की कांप रही थीं। अचानक बच्चा रोने लगा, मैं झटके से हट गया, हाथ पीछे कर लिया। शीला उठीं, आंखें खोलीं जैसे कुछ हुआ ही न हो, बच्चे को गोद में लिया, ब्लाउज का हुक खोलकर दूध पिलाने लगीं। मैं बस उनके बूब्स देखता रहा, एक बूब बाहर था, निप्पल पर बच्चे का मुंह, दूध की बूंदें टपक रही थीं, मेरा लंड और सख्त हो गया।
शाम को मैं घर आया तो शीला ने कहा, “राहुल, खाना खा लो।” हम साथ बैठकर खाना खाए, टेबल पर बैठे, बातें की, लेकिन मेरी नजरें उनकी छाती पर थीं, वो मुस्कुरा रही थीं जैसे कुछ जानती हों। फिर सोने का टाइम हुआ। मैं अपने रूम की तरफ जा रहा था कि शीला बोलीं, “राहुल, तुम यहीं सो जाओ ना। मुझे यहां अकेले अच्छा नहीं लग रहा, बच्चा भी छोटा है।” मेरा दिल धड़क उठा, ये तो मौका था, मैंने तुरंत हां कर दी, मुस्कुराकर।
कमरे में एक ही बेड था। शीला एक तरफ लेटीं, बीच में बच्चा सो रहा था, और मैं दूसरी तरफ। मैं उन्हें देखता रहा, उनकी साड़ी का पल्लू, उनका चेहरा, कल की घटना याद आ रही थी, लंड फिर से खड़ा होने लगा। नींद कब लग गई पता नहीं। रात करीब 1 बजे मुझे लगा कोई मुझे टच कर रहा है, हल्का-हल्का। आंख खोली तो देखा बच्चा एक तरफ सरक गया है और शीला मेरे बहुत करीब आ गई हैं, उनका हाथ मेरे पैंट के ऊपर था। उनकी उंगलियां मेरे पैंट के ऊपर से मेरे लंड को सहला रही थीं, ऊपर-नीचे कर रही थीं, लंड की शेप महसूस कर रही थीं, वो मुस्कुरा रही थीं।
मैं चुप रहा, सांस रोककर देखता रहा कि क्या करती हैं, मेरा लंड पूरा सख्त हो गया। फिर मैंने उनका हाथ पकड़ लिया और पूछा, “शीला, क्या कर रही हो?” वो हंसकर बोलीं, “तुम्हारे लंड का साइज चेक कर रही थी, कितना बड़ा है देख रही थी।” मैंने कहा, “क्यों?” वो बोलीं, “दोपहर में जब मैं सो रही थी, तुम क्या कर रहे थे? तुमने तो मुझे छुआ था, सोचा साइज तो चेक कर लूं, देखूं कितना मोटा है।” मैंने पूछा, “तो रिजल्ट क्या निकला?” वो बोलीं, “तुम तो बहुत अच्छे डिवीजन से पास हुए हो। लंड बहुत मोटा और लंबा है, ऐसा मैंने पहले नहीं देखा। इसे तो मैं नहीं छोड़ूंगी, आज रात भर मजा लूंगी।”
मैंने कहा, “तो फिर ऊपर से क्यों चेक कर रही हो? रुको, मैं पैंट उतार देता हूं।” मैं बेड से उठा, पहले पैंट का बटन खोला, जिप नीचे की, पैंट उतार दी, फिर अंडरवियर नीचे सरकाया। मेरा लंड पूरा खड़ा था, सलामी दे रहा था, टोपा चमक रहा था, नसें फूली हुईं। शीला उसे देखकर हैरान रह गई, आंखें फैल गईं, बोलीं, “वाह, कितना सुंदर है, कितना बड़ा और मोटा।” मैंने कहा, “क्या बस देखती रहोगी? कुछ करोगी भी? छुओ इसे।” वो मेरे पास आईं, लंड को हाथ में लिया, गर्माहट महसूस की, सहलाने लगीं, उंगलियों से लंड की लंबाई नापी, टोपे पर उंगली फेरी। ऊपर-नीचे करने लगीं, पहले धीरे, फिर तेज, मेरी सिसकारी निकली, “आह.. शीला.. अच्छा लग रहा है।” फिर मुंह में ले लिया, पहले टोपे को चूसा, जीभ से चाटा, फिर पूरा मुंह में डाला। जोर-जोर से चूसने लगीं, ग्ग्ग्ग.. ग्ग्ग्ग.. गी.. गी.. गों.. गों.. गोग, उनकी लार लंड पर लग रही थी, जीभ टोपे पर घूम रही थी, मैं सिहर रहा था। मैंने उनका सिर पकड़ा और गले तक पुश कर दिया, लंड उनके गले में टच हो गया। वो घबरा गईं, खांसते हुए लंड छोड़कर बोलीं, “क्या कर रहे हो? इतना गहरा मत डालो, सांस रुक जाएगी।”
मैंने उन्हें पकड़ा, अपनी तरफ खींचा, होंठों पर होंठ रखे, जोर से चूसा, पहले ऊपरी होंठ को काटा, फिर निचले को, जीभ उनके मुंह में डाली, उनकी जीभ से खेला, चूसा। वो भी साथ देने लगीं, अपनी जीभ मेरे मुंह में डाली, हम 15 मिनट तक किस करते रहे, जीभ अंदर-बाहर, होंठ चूसते रहे, सांसें तेज, लार मिल रही थी, हाथ उनके बालों में। फिर मैंने किस करते हुए उनके बूब्स दबाए, ब्लाउज के ऊपर से दबाया, फिर ब्लाउज के हुक खोले, एक-एक करके। ब्रा नहीं थी, बूब्स बाहर आ गए, बड़े-बड़े, गोरे, निप्पल्स गुलाबी और सख्त। मैंने चूसना शुरू किया, पहले दाएं बूब के निप्पल को मुंह में लिया, चूसा, जीभ से घुमाया, दूध निकालने लगा, हल्का मीठा स्वाद। वो सिसकारियां लेने लगीं, “आआआआस्स्स्स्स्स.. आह्ह्ह.. राहुल.. और चूसो.. जोर से.. दूध पी लो सारा.. आह्ह..” फिर बाएं बूब को दबाया, निप्पल को उंगलियों से मसला, चूसा।
फिर मैंने उनका पेटीकोट का नाड़ा खोला, नीचे सरकाया, पैंटी भी उतार दी, अब वो पूरी नंगी हो गईं, उनकी चूत गोरी, हल्के बाल, गीली हो चुकी थी। मैं भी नंगा था। उन्हें बेड पर लेटाया, जांघें फैलाईं, चूत पर जीभ फेरी, पहले ऊपर से चाटा, क्लिट को जीभ से सहलाया, फिर चूसा। उंगली अंदर डाली, पहले एक उंगली, चूत की दीवारें गर्म और गीली, अंदर-बाहर किया, फिर दो उंगलियां डालीं, तेज की। वो तड़प उठीं, कमर उछाल रही थीं, “आह्ह.. ओह्ह.. राहुल.. और अंदर.. जीभ से चाटो.. आआआआआआस्स्स्सोओओओह्ह्ह्ह.. बहुत मजा आ रहा है.. चूत खा लो..” उनकी चूत से रस टपक रहा था, मैं चाटता रहा।
फिर बोलीं, “अब मत सताओ.. जल्दी लंड डाल दो.. चूत जल रही है.. नहीं तो मर जाऊंगी, प्लीज राहुल.. डालो अंदर।” मैंने लंड पकड़ा, टोपा गीला था, उनकी जांघें और फैलाईं, चूत पर रगड़ा, क्लिट पर रगड़कर तड़पाया, वो बोलीं, “मत तड़पाओ.. डालो ना।” फिर धीरे से आधा लंड अंदर किया, चूत टाइट थी, दीवारें लंड को जकड़ रही थीं। वो चिल्लाईं, “ओओओओह्ह्ह्ह.. आह्ह्ह.. दर्द हो रहा है..” मैं रुका, लंड को हल्का बाहर निकाला फिर अंदर। बोलीं, “रुको मत.. होने दो दर्द.. अपना काम करो, जोर से डालो।” मैंने धीरे-धीरे जोर लगाकर पूरा लंड अंदर किया, अब पूरा अंदर था, गर्माहट महसूस हो रही थी। फिर धक्के शुरू किए, पहले धीरे, फिर तेज, थप.. थप.. थप की आवाजें, लंड अंदर-बाहर। वो कमर उछाल रही थीं, साथ दे रही थीं, “आह ह ह ह.. ह्हीईई.. आअह्ह्ह्ह्ह.. राहुल.. जोर से.. और तेज.. चोदो मुझे.. आह्ह..” मैं उनके बूब्स दबाता रहा, निप्पल्स मसलता रहा।
10 मिनट बाद वो झड़ गईं, चूत से रस बहा, लंड गीला हो गया, लेकिन मैं जारी रहा, धक्के लगाता रहा। फिर वो दोबारा झड़ीं, सिसकारियां तेज, “आआआआह्ह्ह.. राहुल.. मैं गई.. आह्ह..” मैं भी झड़ने लगा, सांसें तेज। बोला, “बाहर निकालूं?” बोलीं, “नहीं.. अंदर ही.. सारा पानी अंदर डाल दो, मुझे महसूस कराओ।” मैंने तेज धक्के लगाए और अंदर ही झड़ दिया, गर्म पानी चूत में भर गया। फिर हम लेटे रहे, सांसें सामान्य हुईं, एक-दूसरे को गले लगाए। थोड़ी देर में लंड फिर खड़ा हो गया, मैंने कहा, “एक बार और?” वो मुस्कुराईं। इस बार डॉगी स्टाइल में किया, उन्हें घुटनों पर किया, पीछे से कूल्हे पकड़े, लंड चूत पर रगड़ा, फिर अंदर डाला, जोर-जोर से पेला, थप थप थप, उनके बूब्स हिल रहे थे। वो चिल्लाईं, “आआआआह्ह्ह्ह.. ओओओओह्ह्ह्ह.. राहुल.. मार डालोगे.. और जोर से.. पीछे से बहुत मजा आ रहा है..”
पूरी रात 3-4 बार चोदा, हर बार अलग तरीके से, कभी मिशनरी, कभी साइड से। पूरे हफ्ते तक रोज रात को चुदाई होती रही। अलग-अलग पोजिशन में, कभी वो ऊपर आतीं, लंड पर बैठकर उछलतीं, कभी मैं नीचे लेटकर उन्हें चोदता। कभी मैं उनके मुंह में झड़ता, वो सारा पानी निगल जातीं, कभी चूत में। जब पति और मम्मी-पापा वापस आए तो भी मौका मिलने पर चोदता रहा।
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