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पति ने मेरे भाई के सामने ही चोदा मुझे

Bhabhi devar sex story – Didi bhai chudai sex story – Nanad bhabhi lesbian sex story: मैं एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से belong करती हूं, जहां शादी को अब पूरे दो साल हो चुके हैं और मेरी उम्र सत्ताईस के पार चल रही है। मेरे पति की उम्र उनतीस है, वे बेहद हैंडसम और स्मार्ट हैं, एक बड़ी कंपनी में ऊंचे पद पर हैं, जिस वजह से महीने में पंद्रह-बीस दिन शहर से बाहर टूर पर रहते हैं। उनका व्यवहार बहुत अच्छा है, लेकिन उनकी असली खासियत है उनकी कामुकता—वे सेक्स में हमेशा कुछ नया चाहते हैं, एक ही तरीके से बोर हो जाते हैं। उनके नए-नए स्टाइल, अलग-अलग आसन और क्रिएटिव आइडिया मुझे भी इतना आनंद देते हैं कि मैं कभी मना नहीं करती, बल्कि उनके साथ पूरी तरह बह जाती हूं।

कल ही वे टूर से लौटे थे और आज शाम का वक्त था। मेरा छोटा भाई, जिसकी उम्र अभी उन्नीस साल है, मेरे पास आया हुआ था। हम दोनों बेडरूम में बेड पर बैठकर टीवी देख रहे थे, एक पुरानी हिंदी फिल्म चल रही थी जिसमें रोमांटिक सीन थे। मैंने साड़ी और ब्लाउज पहना हुआ था, साड़ी का पल्लू थोड़ा सा सरका हुआ था जिससे मेरी कमर की चिकनाहट हल्की सी झलक रही थी। भाई पैंट और शर्ट में था, वह बेड के एक कोने पर शर्मीले अंदाज में बैठा था जबकि मैं कुशन से पीठ टिकाए, दोनों हाथ छाती पर बांधे आराम से लेटी हुई थी। कमरे में हल्की सी ठंडक थी, एसी की ठंडी हवा मेरी त्वचा पर स्पर्श कर रही थी और मुझे अच्छा लग रहा था।

सात बजने को थे कि अचानक कॉल बेल बजी। मैं उठने वाली थी कि भाई इससे पहले ही उठा, दरवाजा खोलकर वापस आया और अपनी पुरानी जगह पर बैठ गया। मैंने पूछा, “कौन आया?” उसने सामान्य लेकिन थोड़ी शरारत भरी मुस्कान के साथ कहा, “जीजाजी आए हैं।”

पति ने बाहर का दरवाजा लॉक किया और बेडरूम में घुसते ही मेरे पास बेड पर बैठ गए। उनकी आंखों में वो चमक थी जो टूर से लौटने के बाद हमेशा होती है—भूखी, उतावली। उन्होंने मेरे गालों पर गर्म होंठ रखते हुए कहा, “आज आने में देर नहीं हो गई जानू?” उनकी सांसें गर्म थीं, पुरुषों वाली हल्की दाढ़ी की खुशबू मेरे चेहरे को छू रही थी।

“देर वाले काम में ही मजा है न,” उन्होंने कहा और उनका एक हाथ सीधे मेरे ब्लाउज पर पहुंच गया। ब्लाउज के पतले कपड़े के ऊपर से ही उन्होंने मेरे भरे हुए स्तनों पर हल्की चुटकी काटी, इतनी कि मेरे मुंह से अनायास हल्की सी कराह निकल गई, “आह्ह… स्स्स…” वो कराह कमरे में गूंजी और भाई की नजर टीवी से हटकर मेरी ओर आई, उसकी आंखें चौड़ी हो गईं, फिर जल्दी से टीवी पर वापस। मैंने शर्म और उत्तेजना के मिश्रण से उनका हाथ हटाने की कोशिश की, लेकिन उनकी उंगलियां और मजबूत हो गईं।

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मैंने बहुत धीमी आवाज में, जो सिर्फ हम दोनों को सुनाई दे, कहा, “सब्र रखिए न, मेरा भाई बैठा है, उसके सामने ये क्या हरकतें कर रहे हैं?” मेरी सांसें पहले से ही थोड़ी तेज हो चुकी थीं, दिल की धड़कन बढ़ रही थी।

वे मुस्कुराए और बोले, “ठीक है जानू, तुम मेरे लिए अच्छी सी चाय बनाओ, मैं हाथ-मुंह धोकर आता हूं,” कहते हुए धोखे से मेरे गर्म होंठों को चूम लिया, उनकी जीभ हल्की सी अंदर तक घुसी और मेरी जीभ को छुआ। मैं बड़बड़ाती हुई उठी, लेकिन अंदर से शरीर में हल्की सी आग लग चुकी थी। भाई ने कनखियों से वो चुंबन देख लिया था, उसके गाल लाल हो गए और होंठों पर शरारती मुस्कान खेल गई।

थोड़ी देर बाद मैं चाय लेकर लौटी तो पति बेड पर अपनी जगह पर बैठे थे। मैंने कप उन्हें दिया और उनके बिल्कुल पास बैठ गई, मेरी जांघ उनकी जांघ से सट गई। टीवी पर कैबरे डांस का सीन आ रहा था, नायिका कम कपड़ों में कमर मटकाते हुए नाच रही थी, उसके पसीने से चमकते शरीर की झलक बार-बार आ रही थी। पति चाय पीते हुए बोले, “हाय यार, क्या फिगर है, कमर को ऐसे झटके दे रही है जैसे देखने वालों का दिल ही निकाल लेगी। क्यों जानू, तुम ऐसा डांस कर सकती हो?” उनकी आंखें शरारत से चमक रही थीं।

मैंने धीरे से लेकिन गुस्से का नाटक करते हुए कहा, “चुप रहोगे या नहीं?” मेरी सांसें उनकी निकटता से और तेज हो रही थीं।

“अरे साले साहब, देखो न, तुम्हारी दीदी हमें बोलने भी नहीं दे रही,” पति ने भाई की ओर देखकर कहा। भाई सिर्फ मुस्कुराकर रह गया, लेकिन उसकी नजर मेरे ब्लाउज पर ठहर गई जहां पति का हाथ फिर से पहुंच चुका था।

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चाय खत्म होने तक पति चुप रहे, लेकिन उनका हाथ मेरे ब्लाउज पर खेल रहा था, धीरे-धीरे स्तनों को मसल रहा था, उंगलियां निप्पल की ओर बढ़ रही थीं। मैं भाई को देखकर हाथ हटाने की कोशिश करती रही, लेकिन उन्होंने अचानक ब्लाउज के तीन बटन खोल दिए और ब्रा के नीचे हाथ डालकर निप्पल को इतनी जोर से मसला कि मेरे मुंह से तेज कराह फूट पड़ी, “आआह्ह्ह… उफ्फ्फ!” वो कराह इतनी गहरी थी कि कमरे में गूंज गई, मेरी कमर अपने आप उचक गई।

भाई का ध्यान पूरी तरह हमारी ओर खिंच गया, वह एक पल हमें घूरता रहा, उसकी सांसें तेज हो गईं, नजर मेरे आधे खुले ब्लाउज पर जम गई जहां मेरे गुलाबी स्तन ब्रा से झांक रहे थे। वह बाहर जाने को मुड़ा तो पति ने उसका हाथ पकड़कर पास बिठा लिया और मेरे ब्लाउज से हाथ निकाले बिना बोले, “अरे यार, ये तो पति-पत्नी की नोंक-झोंक है, तुम कहां भागे? अच्छा एक बात बता, सच-सच।”

भाई असमंजस में था, उसकी आंखें कभी पति को, कभी मुझे देख रही थीं, होंठ कांप रहे थे, बोल नहीं पा रहा था।

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“बता न, कभी किसी जवान औरत के स्तन देखे हैं, छुए हैं?” कहते हुए पति ने मेरे ब्लाउज को और खोल दिया और एक स्तन पूरी तरह ब्रा से बाहर निकाल दिया। स्तन हवा में उछला, गुलाबी निप्पल सख्त होकर तन गया। भाई की आंखें फट गईं, सांस रुक सी गई, मैं भी इस अचानक हुए दृश्य से स्तब्ध थी, लेकिन अंदर से उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी।

“मालूम है मुझे, तुमने न देखे हैं न छुए,” पति ने शरारत भरे स्वर में कहा और भाई का हाथ पकड़कर मेरे नंगे, गर्म स्तन पर रख दिया, “लो, छू लो, महसूस करो कितने मुलायम और गरम हैं। शर्माओ मत यार।”

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भाई का हाथ कांप रहा था, लेकिन जैसे ही उसकी हथेली मेरे स्तन को छूई, मेरे शरीर में करंट सा दौड़ गया, निप्पल और सख्त हो गया। पति ने भाई का मुंह मेरे बाएं स्तन के इतना पास कर दिया कि उसकी गर्म सांसें मेरे निप्पल पर पड़ रही थीं, “मुंह खोल और चूस इसे, जैसे बच्चा दूध पीता है।”

भाई ने अभी होंठ नहीं खोले, बस फटी आंखों से देखता रहा, उसकी सांसें तेज और गर्म थीं। तब पति ने मेरा दूसरा स्तन भी बाहर निकाला और खुद मुंह लगाकर चूसने लगे, उनकी जीभ निप्पल के चारों ओर घूम रही थी, चूसने की आवाज कमरे में गूंज रही थी, “च्ख्ख… च्ख्ख…” मैं उत्तेजना में पिघलने लगी, मेरी सांसें भारी हो गईं, योनी में हल्की सी नमी महसूस होने लगी।

“क्या तुम अपने भाई के होंठ नहीं चूम सकती जानू?” पति ने मुझसे कहा। मेरे अंदर अजीब सा मदहोश करने वाला प्यार उमड़ आया, ये सब मेरे लिए बिल्कुल नया और वर्जित था। मैंने भाई के गुलाबी, कांपते होंठों को चूम लिया, हमारी जीभें आपस में उलझ गईं और मैंने अपना निप्पल उसके मुंह में ठूंस दिया, “चूस इसे… जोर से चूस।”

भाई ने आखिरकार चूसना शुरू कर दिया, पहले धीरे फिर भूखे बच्चे की तरह जोर-जोर से, उसके मुंह से गीली आवाजें आ रही थीं, “च्ख्ख… ग्ग्ग्ग…” मेरे हाथ उसके सिर को सहलाने लगे, बालों में उंगलियां फंस गईं। दोनों स्तन एक साथ चूसे जा रहे थे, मेरी कमर लहराने लगी, योनी से गर्म रस टपकने लगा। मेरे हाथ भाई की पीठ पर फिरते हुए उसकी पैंट पर पहुंच गए, जिप खोल दी और अंडरवियर के ऊपर से उसके तने, गर्म लिंग को सहलाने लगी—वो इतना सख्त हो चुका था कि कपड़े फटने को था।

पति ने मेरी साड़ी और पेटीकोट घुटनों से ऊपर उलट दिया, मेरी चिकनी, मुलायम जांघों पर उनकी उंगलियां फिर रही थीं, त्वचा पर रोंगटे खड़े हो गए। वे मेरे कानों में फुसफुसाए, “आज नया मजा लेते हैं जानू, तुम्हारे भाई का नया-नया, कच्चा लिंग तुम्हारी टाइट गांड में डलवाते हैं। तुम्हें तो मजा आएगा ही, इसे भी स्वर्ग मिलेगा।”

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मेरी सांसें और तेज हो गईं, मैंने करवट ली और जानवर की तरह हाथ-पैर बेड पर टिकाकर नितंब ऊंचे कर लिए, मेरी गांड उनकी ओर उभरी हुई थी, पैंटी गीली हो चुकी थी। पति ने भाई को मेरे पीछे खड़ा किया, उसके लिंग पर अपनी थूक लगाकर चुपड़ा और मेरी गांड की दरार में टिका कर बोले, “धीरे-धीरे धक्का मारो साले साहब, मजा लो।”

भाई ने मेरी पतली कमर पकड़ी और धक्का मारा, लेकिन लिंग फिसलकर ऊपर चला गया, मेरी त्वचा पर उसकी गर्माहट महसूस हुई। “रुक, दोबारा ट्राई करते हैं,” पति बोले, उनकी आवाज में उतावलापन था।

मैंने मुद्रा बदली और बोली, “ये पहली बार कर रहा है, बिना चिकनाई के कैसे घुसेगा? जाओ, रसोई से सरसों का तेल ले आओ, मैं तब तक इसके लिंग को और गरम करती हूं।” मेरी आवाज कांप रही थी, योनी से रस टपक रहा था।

पति तेल लेने चले गए। मैंने भाई को सिरहाने बिठाया, उसकी टांगें फैलाईं और उसका सात-आठ इंच का मोटा लिंग मुंह में ले लिया। ऊपरी चमड़ी को जीभ से धीरे-धीरे नीचे सरकाया, मुंड को चाटा, लिंग की नसें उभरी हुई थीं, गर्म और नमकीन स्वाद मुंह में फैल गया। वह मचल उठा, उसकी कमर उछली, “उफ्फ दीदी… कितनी गर्मी है आपके मुंह में… आह्ह… स्स्स्स… ग्ग्ग्ग्ग…”

मैंने उसके हाथ अपने स्तनों पर रखे, “इनसे खेलो, मसलो।” वह जोर-जोर से मसलने और निप्पल चूसने लगा, उसके दांत हल्के काट रहे थे।

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पति तेल लेकर लौटे, मेरे नितंबों के नीचे तकिया लगाया ताकि गांड और ऊंची और खुली हो जाए। भाई को मेरे ऊपर लिटाया, उसका लिंग तेल से चुपड़ा और मेरी गांड के तंग द्वार पर सेट किया। मैंने खुद एक हाथ से मुंड को फंसाया, मेरी उंगलियां उसके गर्म लिंग पर फिसल रही थीं, “मारो जोर का धक्का, मैं तैयार हूं… आह्ह आ जाओ अंदर।”

भाई ने जोर से धक्का मारा, मुंड गांड को फैलाता हुआ अंदर घुसा। मैं दांत भींची, लेकिन आनंद की पीड़ा थी, “आआह्ह्ह… उफ्फ्फ… धीरे…” भाई भी कराह उठा, उसकी चमड़ी पूरी तरह फट गई थी, हल्का गर्म खून महसूस हुआ। पति ने उसका हौसला बढ़ाया तो उसने फिर धक्का मारा, आधा लिंग अंदर समा गया, मेरी गांड की दीवारें उसके लिंग को जकड़ रही थीं, गर्माहट दोनों तरफ फैल रही थी।

“उफ दीदी… बहुत टाइट है… दर्द हो रहा है… जैसे चाकी में पिस रहा हूं,” भाई ने लिंग निकाल लिया, उसकी सांसें फूल रही थीं।

मैंने पति से कहा, “तुम मेरी गांड में डालो, मेरी आग बुझाओ, इसकी मैं चूत संभालती हूं।” मेरी योनी रस से लबालब थी, गंध कमरे में फैल रही थी।

भाई को आगे लिटाया, उसका लिंग सहलाते हुए अपनी गर्म, फिसलती योनी में फंसाया, रस की चिकनाहट से मुंड आसानी से अंदर सरका, “अब धक्का मारो… इसमें दर्द नहीं होगा… उफ्फ कितना मोटा है तेरा।”

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भाई ने पहले डरते-डरते फिर जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए, हर धक्के में उसका लिंग मेरी योनी की दीवारों से रगड़ खा रहा था, गीली आवाजें आ रही थीं, “चप्प… चप्प…” वह मेरे होंठ चूमने लगा, मैंने निप्पल उसके मुंह में ठूंस दिया, वह चूसते हुए चोदने लगा, “उफ्फ दीदी… आपकी चूत कितनी गर्म और रसीली है… आह्ह… मैं पागल हो रहा हूं…”

तभी पति ने अपना मोटा लिंग मेरी गांड में घुसेड़ दिया, तेल और पहले की चिकनाई से आसानी से अंदर गया। दोनों तरफ से लिंग का घर्षण शुरू हुआ—एक योनी में, एक गांड में। मैं पूरी तरह पागल हो गई, शरीर कांप रहा था, “आआह्ह्ह… ओह्ह्ह्ह… दोनों तरफ आग लग रही है… मारो जोर-जोर से… उफ्फ्फ मैं मर जाऊंगी मजे़ से!”

हर धक्के के साथ मेरी कमर लहरा रही थी, स्तन उछल रहे थे, पसीना पूरे शरीर पर छा गया था। मैं चरम पर पहुंची तो मेरा रस भाई के लिंग पर बह निकला, भाई भी मेरे मुंह में झड़ गया—गर्म, गाढ़ा रस मुंह में भर गया, मैंने चाटकर साफ किया। पति गांड में जोर से झड़े, उनकी गर्मी अंदर तक महसूस हुई। हम तीनों एक-दूसरे से लिपटकर हांफते रहे।

उस रात हम तीनों ने बार-बार सुख भोगा, कमरे में पसीने और रस की मिली-जुली गंध फैली थी। भाई पांच दिन रुका था, पति दो दिन बाद फिर टूर पर गए। घर में हम तीनों पूरी तरह बेझिझक हो गए, कपड़े पहनना लगभग छोड़ दिया, नंगे घूमते, कभी भी एक-दूसरे को छू लेते।

पति जाने लगे तो मुस्कुराकर बोले, “डार्लिंग, तुम तो अब प्यासी नहीं रहोगी, लेकिन हम प्यासे मर जाएंगे।”

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मैंने आंख मारते हुए कहा, “रास्ते में कोई ढूंढ लेंगे।”

वे सुबह नौ बजे गए। मैं और भाई अभी नहाए नहीं थे, पूरे शरीर पर रात की चुदाई की खुशबू और चिपचिपाहट थी। मैंने कहा, “चलो नहा लेते हैं, साथ ही।” भाई की आंखें चमक उठीं, वह मेरे साथ बाथरूम में घुस गया।

दरवाजा खुला ही छोड़ दिया क्योंकि घर में कोई था नहीं। मैंने शावर ऑन किया, गुनगुना पानी दोनों पर गिरने लगा। मैं ब्रा और पेटीकोट में भीग गई, कपड़े शरीर से चिपक गए, स्तन और नितंब साफ दिखने लगे। भाई मेरे पीछे सटा, उसने ब्रा के हुक खोले और ब्रा उतार दी। मेरे भरे हुए गुलाबी स्तन पानी की धार में चमकने लगे। वह पीछे से लिपटकर स्तनों पर, नाभि पर, गले पर साबुन मलने लगा, उसकी उंगलियां फिसल रही थीं, लिंग मेरी गांड की दरार में दबा हुआ सख्त हो रहा था।

मैं आंखें बंद कर आनंद में डूब गई, पानी की धार मेरी त्वचा को सहला रही थी, उसका स्पर्श हर जगह आग लगा रहा था। उसने पेटीकोट और पैंटी नीचे सरका दी, नीचे बैठकर मेरी जांघों और गोल नितंबों पर साबुन रगड़ा, उंगलियां गांड की दरार में घुस रही थीं। मैं सुलग उठी, “उफ्फ्फ… कितनी प्यास है इस यौवन की… कभी नहीं बुझती…”

वह आगे आया, मेरी योनी पर पहले साबुन लगाया, फिर हैंड शावर की तेज धार सीधे भंगाकुर पर मारी। मैंने उत्तेजना में योनी की चिरमिरियां खोल दीं, पानी अंदर तक घुसा, “आह्ह्ह्ह… स्स्स्स्स… बस्स्स… बहुत तेज है…” मैंने उसका सिर पकड़कर योनी पर दबाया, वह जीभ निकालकर चाटने लगा, जीभ भंगाकुर पर घूम रही थी, अंदर तक घुसेड़ रहा था, “ग्ग्ग्ग्ग… गी गी… दीदी की चूत कितनी मीठी है… चाटता रहूं…”

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तभी कॉल बेल बजी। हम दोनों चौंक गए, उत्तेजना एकदम ठंडी पड़ गई। मैंने टॉवल लपेटा, जल्दी अंतर्वस्त्र, पेटीकोट, ब्लाउज और साड़ी पहनी और दरवाजा खोला। सामने मेरी ननद आरुषी खड़ी थी, गहरे गले के टॉप और घुटनों तक चुस्त स्कर्ट में, उसके उभरे स्तन और गोल नितंब साफ झलक रहे थे, मुस्कान शरारत भरी थी।

“कितनी देर लगा दी भाभी,” वह अंदर आते हुए बोली, उसकी खुशबू कमरे में फैल गई।

“नहाकर कपड़े बदल रही थी,” मैंने साड़ी का पल्लू ठीक करते हुए कहा, मेरे गीले बाल अभी भी टपक रहे थे।

“तभी कहिए, इतनी मदहोश करने वाली खुशबू,” वह सोफे पर पसर गई, “वैसे पक्का है न, भैया अभी यहां नहीं हैं?”

“हां, लेकिन इसका क्या मतलब?” मैं उसके पास बैठ गई।

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“मतलब ये कि अगर भैया होते तो दरवाजा आधे-पौने घंटे में नहीं खुलता, आप दोनों किसी और काम में बिजी रहते,” उसने आंख मारते हुए मेरी जांघ पर जोर से चुटकी काटी, दर्द और शरारत दोनों महसूस हुए।

“जवानी की हवा बहुत जोर से लग रही है तुझे,” मैंने हंसते हुए कहा।

“लगनी भी चाहिए, अठारह पार कर चुकी हूं,” वह गर्व से बोली, उसके टॉप में स्तन कसमसा रहे थे, स्कर्ट से जांघें चमक रही थीं।

रसोई में चाय बनाते वक्त उसने अचानक मुझे बांहों में भर लिया, मेरे गाल और गले पर गर्म चुंबन दिए, उसकी सांसें मेरे कान में पड़ रही थीं, “काश भाभी मैं देवर होती… आपके इन मुलायम पहाड़ों को पिस डालती, अपना लिंग आपकी पसलियों तक घुसेड़ती।”

मेरे दिमाग में एक शरारती योजना कौंध गई। मैंने चाय का पानी चढ़ाते हुए कहा, “अभी भी पिस सकती हो इनको… वैसे बता, कोई बॉयफ्रेंड नहीं है?”

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वह और करीब सटी, मेरे ब्लाउज के बटन खोलते हुए बोली, “नहीं, कई लड़के ट्राई करते हैं पर मैं नहीं देती। मुझे तो स्तन चूसने में सबसे ज्यादा मजा आता है, एक सहेली के साथ करती हूं… हम लेस्बियन लवर्स हैं। आपके इतने भरे हुए यौवन को देखकर मेरा जी मचल रहा है।”

“कभी असली लिंग देखा है?” मैंने उसकी आंखों में देखते हुए पूछा।

“बस इत्तेफाक से कभी झलक,” वह बोली और मेरा एक बटन और खोल दिया। मैंने तीन कप चाय बनाई क्योंकि मुझे बाथरूम का दरवाजा बंद होने की हल्की आवाज सुनाई दी थी—भाई नहाकर आ रहा था।

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“ये तीसरा कप किसके लिए?” आरुषी ने हैरानी से पूछा।

“मेरे लिए,” भाई रसोई में प्रवेश करते हुए बोला। वह सिर्फ अंडरवियर में था, पानी की बूंदें अभी भी उसके सीने पर चमक रही थीं, लिंग का मोटा उभार साफ दिख रहा था, सख्ती शुरू हो चुकी थी।

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आरुषी मुझे छोड़कर दूर हट गई, उसके गाल लाल हो गए, आंखें शर्मा रही थीं।

“डोंट वरी आरुषी, ये मेरा छोटा भाई है,” मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “हम दोनों में कोई पर्दा नहीं। तुम्हारे भैया ने भी हमारे साथ खूब मजा लिया है। मुझे अपने भाई के साथ इतना आनंद मिला कि क्या बताऊं। जब तुम आईं, हम दोनों साथ नहा रहे थे।”

आरुषी धीरे-धीरे सामान्य हुई, उसकी नजर बार-बार भाई के उभार पर जा रही थी। हम तीनों चाय लेकर बेडरूम में आए और बेड पर बैठ गए। भाई का लिंग अब पूरी तरह सख्त होकर अंडरवियर से बाहर झांकने लगा था। आरुषी की सांसें तेज हो रही थीं, वह बेचैन सी हो रही थी।

मैंने उसकी जांघ पर हाथ रखकर चुटकी काटी और धीरे से कहा, “आज तुम्हारी सारी हसरतें पूरी हो जाएंगी। मेरा भाई तुम्हें ऐसा मजा देगा कि याद रखोगी।”

मैंने भाई का लिंग अंडरवियर से पूरी तरह बाहर निकालकर आरुषी के नर्म हाथ में थमा दिया, वो गर्म और नसों से भरा था, “धीरे-धीरे सहलाओ, देखना कैसे भभकता है, कितना मोटा और लंबा हो जाता है।”

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भाई ने मेरे ब्लाउज के सारे बटन खोल दिए, ब्रा नीचे सरकाई और मेरे गीले, भरे स्तनों को मुंह से लगाकर चूसने लगा, उसकी जीभ निप्पल के चारों ओर घूम रही थी, दांत हल्के काट रहे थे। आरुषी ने भी झुककर मेरे दूसरे स्तन पर मुंह लगा दिया और बोली, “भाभी पहले मैं चूसूंगी… कितने मुलायम और मीठे हैं।”

भाई ने आरुषी का टॉप ऊपर उठाया, उसकी शर्ट हटाई और उसके गोरे, गुदाज स्तनों को चूसने लगा। कमरे में तीनों की गर्म सांसें और चूसने की गीली आवाजें गूंज रही थीं। आरुषी के लगातार चूसने से मेरी योनी फिर से रस से भर गई, मैं बेड पर फैल गई।

मैंने भाई से कहा, “अब आरुषी की चूत में अपना लिंग डालो, पहले अच्छे से तेल लगा लो ताकि आसानी से घुसे।”

भाई ने तेल की कटोरी ली, अपना तपता लिंग और आरुषी की नर्म रोवों वाली टाइट योनी पर खूब तेल चुपड़ा। फिर लिंग मुंड को योनी के मुंह पर टिकाया, आरुषी की जांघ ऊपर उठाई और जोर का धक्का मारा—मुंड अंदर घुसा। आरुषी जोर से चीखी, “आआह्ह्ह्ह… उफ्फ्फ कितना दर्द… कितना मोटा है!”

मैंने उसकी पीठ सहलाई, उसके गर्म होंठ अपने होंठों से बंद कर दिए, हमारी जीभें आपस में खेलने लगीं। भाई ने फिर जोर का धक्का मारा, पूरा सात-आठ इंच का लिंग जड़ तक आरुषी की योनी में समा गया। आरुषी तड़पी लेकिन अब आनंद की तड़प थी, “उफ भाभी… तुमने इसे बहुत अच्छे से ट्रेंड किया है… अब मजा आ रहा है… मारो जोर-जोर से… आह्ह्ह… ओह्ह्ह!”

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भाई मुद्रा बदल-बदलकर तेज धक्के मारने लगा, कमरे में चप्प-चप्प की आवाज और आरुषी की कराहें गूंज रही थीं। वह मेरे स्तन को जोर-जोर से चूस रही थी। आखिर दोनों एक साथ चरम पर पहुंचकर झड़ गए। फिर भाई ने मेरी भी प्यास बुझाई, मेरी योनी और गांड दोनों में फिर से घुसा।

हम तीनों थककर रुक गए, पूरे शरीर पर पसीना और रस की चमक थी। आरुषी शाम को चली गई। भाई तीन दिन बाद गया। दस दिन बाद पति लौटे तो घर में घुसते ही मुझ पर टूट पड़े, मेरे गाउन को फाड़ते हुए स्तनों को मुंह से लगाकर पागलों की तरह चूसने लगे।

“ओफ्फो… तुम सब भाई-बहन एक जैसे हो, घर आते ही पहले स्तनों पर टूट पड़ते हो,” मैंने उनके सिर को सहलाते हुए कहा।

वे चौंके, निप्पल मुंह से निकालकर बोले, “क्या मतलब? आरुषी का जिक्र क्यों?”

“क्योंकि तुम्हारे जाते ही आरुषी आई थी और ब्लाउज खोलकर मेरे स्तनों पर टूट पड़ी थी,” मैं हंसकर बोली।

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“फिर क्या हुआ?” उनकी आंखें चमक उठीं, वे मुझे गोद में उठाकर बाथरूम की ओर ले गए।

शावर के नीचे नहाते-नहाते मैंने पूरी कहानी विस्तार से सुनाई। वे मेरे स्तनों को पागलों की तरह चूस रहे थे, निप्पल को दांतों से खींच रहे थे, फिर नीचे झुककर योनी चाटने लगे, जीभ भंगाकुर पर तेजी से घूम रही थी। मैं उनके बाल पकड़कर कराह रही थी, “उफ्फ्फ… आह्ह्ह… कितनी जोर से चाट रहे हो…”

फिर उन्होंने अपना मोटा लिंग मेरी योनी में घुसेड़ा, पानी की धार हमारे शरीर पर गिर रही थी, हर धक्के में जांघें टकरा रही थीं। बाद में मुद्रा बदली, मैं दीवार से हाथ टिकाए झुक गई, उन्होंने गांड में डाला और जोर-जोर से ठोका, अंत में गांड में ही गर्म रस झड़ दिया। हम दोनों देर तक एक-दूसरे से लिपटकर पानी के नीचे खड़े रहे।

पति को बहुत अफसोस हुआ कि आरुषी वाली घटना में वे मौजूद नहीं थे। उन्होंने हसरत जताई कि अगली बार आरुषी आए तो वे भी साथ हों।

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